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  • करियर, जिम्मेदारियां और सही साथी की तलाश ने रोक दी शादी, गीता कपूर बोलीं- बीमार पड़ो तो अकेलापन सबसे ज्यादा खलता है

    करियर, जिम्मेदारियां और सही साथी की तलाश ने रोक दी शादी, गीता कपूर बोलीं- बीमार पड़ो तो अकेलापन सबसे ज्यादा खलता है

    नई दिल्ली । मशहूर कोरियोग्राफर और टेलीविजन जज गीता कपूर ने अपनी निजी जिंदगी, शादी और रिश्तों को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि जीवन में कई लोगों से मुलाकात और रिश्ते बनने के बावजूद उन्हें अब तक ऐसा साथी नहीं मिला, जिसके साथ वह पूरी जिंदगी बिताने का फैसला कर पातीं। उनका कहना है कि सही जीवनसाथी की तलाश और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण शादी का फैसला लगातार टलता गया।

    गीता कपूर ने बताया कि करियर के शुरुआती दौर में उनकी प्राथमिकता परिवार की जिम्मेदारियां निभाना था। वह अपनी मां के लिए बेहतर जीवन सुनिश्चित करना चाहती थीं और इसी कारण उन्होंने पूरी ऊर्जा अपने काम और आर्थिक मजबूती हासिल करने पर लगाई। इस दौरान शादी का विचार पीछे छूटता चला गया और समय के साथ परिस्थितियां भी बदलती गईं।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा कभी नहीं था कि वह शादी या परिवार नहीं चाहती थीं। उनके मन में भी एक सामान्य परिवार बसाने, बच्चों के साथ जीवन बिताने और वैवाहिक जीवन जीने की इच्छा थी। हालांकि जिन लोगों के साथ उनका रिश्ता बना, उनमें उन्हें वह भरोसा और आत्मविश्वास महसूस नहीं हुआ, जो शादी जैसे बड़े फैसले के लिए जरूरी होता है। इसी वजह से उन्होंने कभी जल्दबाजी में विवाह करने का निर्णय नहीं लिया।

    गीता कपूर ने कहा कि उनके मन में हमेशा ऐसे जीवनसाथी की कल्पना रही, जिसमें भगवान शिव जैसे गुण हों। उनका मानना है कि जीवन में कुछ ऐसे लोग जरूर आए, जिनमें उन्हें उन गुणों की झलक दिखाई दी, लेकिन कोई भी व्यक्ति उनकी अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरा नहीं उतर सका। यही कारण रहा कि उन्होंने विवाह का साहस नहीं जुटाया।

    उन्होंने यह भी कहा कि समय के साथ उनकी जिंदगी का नजरिया बदला है। टेलीविजन के विभिन्न डांस रियलिटी शो के जरिए उन्हें कई ऐसे प्रतिभागी मिले, जो उन्हें मां जैसा सम्मान और स्नेह देते हैं। यही अपनापन उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। इसके अलावा वह अपनी मां की देखभाल को भी अपनी सबसे बड़ी जिम्मेदारी मानती हैं और उसी में उन्हें संतोष मिलता है।

    गीता कपूर ने स्वीकार किया कि वर्तमान में वह अपने जीवन से संतुष्ट हैं, लेकिन भविष्य में एक ऐसे साथी की जरूरत महसूस हो सकती है जो उन्हें समझ सके और मुश्किल समय में उनका साथ निभाए। उनका कहना है कि जीवन में खुशियों के दौरान अकेलेपन का एहसास कम होता है, लेकिन कठिन परिस्थितियों में किसी अपने का साथ सबसे अधिक मायने रखता है।

    उन्होंने कहा कि बीमारी या परेशानी के समय जब आसपास कोई अपना मौजूद नहीं होता, तब अकेलापन सबसे ज्यादा महसूस होता है। ऐसे क्षण यह एहसास कराते हैं कि जीवन में भावनात्मक सहारा भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना पेशेवर सफलता या आर्थिक स्थिरता। गीता कपूर ने उम्मीद जताई कि यदि भविष्य में उन्हें ऐसा साथी मिला, जो उन्हें समझे और उनका साथ निभा सके, तो वह उस संभावना पर जरूर विचार करेंगी। उनके इस स्पष्ट और संतुलित बयान को सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा मिल रही है।