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  • इक्वाडोर के चर्च में लाइव प्रार्थना के दौरान पादरी पर गिरा ईसा मसीह का भारी क्रॉस, सिर में गंभीर चोट से मौत

    इक्वाडोर के चर्च में लाइव प्रार्थना के दौरान पादरी पर गिरा ईसा मसीह का भारी क्रॉस, सिर में गंभीर चोट से मौत

    नई दिल्ली । दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर के गुआयाक्विल शहर में चर्च के भीतर एक दर्दनाक हादसा हुआ। यहां प्रार्थना सभा के लाइव प्रसारण के दौरान कैथोलिक पादरी पैट्रिक अल्फ्रेडो सांचेज मोलिनारी के ऊपर अचानक ईसा मसीह का भारी लकड़ी का क्रॉस गिर गया। इस हादसे में पादरी के सिर पर गंभीर चोट लगी, जिसके कारण उनकी मौत हो गई। घटना 17 अक्टूबर की बताई गई है। जिस समय यह दुर्घटना हुई, उस वक्त चर्च में प्रार्थना सेवा चल रही थी और उसका सोशल मीडिया पर सीधा प्रसारण किया जा रहा था। हादसे का दृश्य कैमरे में रिकॉर्ड हो गया, जिसके बाद इसका वीडियो तेजी से फैलने लगा।

    यह घटना गुआयाक्विल स्थित न्यूस्ट्रा सेनोरा डेल परपेटुआ सोकोरो चर्च में हुई। जानकारी के मुताबिक, पादरी सांचेज मोलिनारी चर्च में मंच के पास खड़े होकर धार्मिक अनुष्ठान कर रहे थे और लोगों को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान दीवार पर लगा भारी लकड़ी का क्रूसीफिक्स अचानक अपनी जगह से उखड़ गया और सीधे उनके सिर पर आ गिरा। क्रूसीफिक्स ईसा मसीह को क्रॉस पर दर्शाने वाला धार्मिक प्रतीक होता है। अचानक हुए इस हादसे से वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। पादरी को गंभीर चोट लगने के कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

    इस पूरी घटना का प्रसारण इंटरनेट पर लाइव हो रहा था। बताया गया कि हजारों लोग उस समय प्रार्थना सभा को देख रहे थे। इसी वजह से हादसे का दृश्य बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच गया। वीडियो में पादरी को चर्च के भीतर खड़े होकर श्रद्धालुओं को संबोधित करते देखा जा सकता है। कुछ ही क्षणों बाद उनके ऊपर क्रॉस गिर जाता है और वह नीचे गिर पड़ते हैं। घटना की अचानक हुई प्रकृति और धार्मिक सभा के दौरान हुई इस दुर्घटना ने लोगों को स्तब्ध कर दिया।

    पादरी की मौत की पुष्टि कैथोलिक प्रशासन ने रविवार को की। उनके निधन के बाद धार्मिक समुदाय की ओर से शोक व्यक्त किया गया। पादरी सांचेज मोलिनारी के लिए साझा किए गए एक भावुक संदेश में कहा गया कि वह ईश्वर के पास चले गए हैं। संदेश में उनके लिए शाश्वत शांति की प्रार्थना की गई और उनकी आत्मा को शांति मिलने की कामना की गई। उनके निधन से जुड़े इस संदेश के सामने आने के बाद श्रद्धालुओं और घटना के बारे में जानने वाले लोगों ने दुख जताया।

    इस हादसे को लेकर एक और बात चर्चा में है। बताया जा रहा है कि क्रॉस गिरने से कुछ ही समय पहले पादरी मृत्यु के विषय पर लोगों को संबोधित कर रहे थे। वह श्रद्धालुओं को जीवन की नश्वरता और ईश्वर के साथ बिताए समय के महत्व के बारे में समझा रहे थे। उनके कथित अंतिम संबोधन में कहा गया था कि एक दिन यहां मौजूद सभी लोगों को मृत्यु का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा था कि दूसरी गतिविधियों में समय बिताने की तुलना में ईश्वर, भाई-बहनों और परिवार के साथ बिताया गया समय अधिक महत्वपूर्ण होता है।

    पादरी के कथित अंतिम शब्दों को लेकर इंटरनेट पर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि, इन शब्दों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन्हें उनके प्रमाणित अंतिम शब्द मानने के बजाय घटना से जुड़े दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।चर्च में हुई इस दुर्घटना ने धार्मिक कार्यक्रमों के लाइव प्रसारण के दौरान सामने आए एक अप्रत्याशित हादसे की ओर लोगों का ध्यान खींचा है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पादरी की मौत भारी लकड़ी का क्रूसीफिक्स सिर पर गिरने से लगी गंभीर चोट के कारण हुई। प्रार्थना सभा के दौरान हुई इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला व्यापक चर्चा में आ गया है।

  • कैम्ब्रिजशायर में मंदिर के लिए हिंदूओं को नहीं दी जमीन, चर्च और मुस्लिम ग्रुप को कर दिया आवंटन

    कैम्ब्रिजशायर में मंदिर के लिए हिंदूओं को नहीं दी जमीन, चर्च और मुस्लिम ग्रुप को कर दिया आवंटन


    नई दिल्‍ली । ब्रिटेन के कैम्ब्रिजशायर स्थित नए शहर नॉर्थस्टोव में अपना पहला पूजा स्थल बनाने की कोशिश कर रहे ब्रिटिश हिंदुओं को तगड़ा झटका लगा है। स्थानीय काउंसिल ने एक जमीन के टुकड़े को हिंदू चैरिटी को देने के बजाय एक चर्च और मुस्लिम ग्रुप को आवंटित कर दिया है। यह फैसला सामने आने के बाद इलाके में रहने वाले करीब 150 हिंदू परिवारों में काफी निराशा है।

    क्या है पूरा मामला?
    साउथ कैम्ब्रिजशायर डिस्ट्रिक्ट काउंसिल ने 0.25 हेक्टेयर जमीन को 999 साल के लिए ‘नॉर्थस्टोव चर्च नेटवर्क’ (NCN) को लीज पर दे दिया है। इसके लिए उन्हें सिर्फ नाममात्र का किराया चुकाना होगा।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय निवासियों द्वारा बनाए गए ‘हिंदू समाज नॉर्थस्टोव’ (HSN) ने भी इस जमीन के लिए बोली लगाई थी। उन्होंने यहां एक मंदिर के साथ-साथ ‘सर्वधर्म’ और वेलबीइंग सेंटर बनाने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, बोलियों का आकलन करने वाले काउंसिल के अधिकारियों ने HSN के प्रस्ताव को 65% और NCN के प्रस्ताव को 81% अंक दिए, जिसके कारण जमीन चर्च नेटवर्क को मिल गई।

    मुस्लिम ग्रुप कैसे बना हिस्सेदार?
    नॉर्थस्टोव चर्च नेटवर्क (NCN) के प्रस्ताव में नॉर्थस्टोव के मुसलमानों को मुख्य किरायेदार (एंकर टेनेंट) के रूप में शामिल किया गया था। इस प्रस्ताव में उनके लिए एक अलग इस्लामिक प्रार्थना कक्ष और शिक्षा केंद्र बनाने की बात शामिल है। नॉर्थस्टोव मुस्लिम ग्रुप के अध्यक्ष नवाश ने बताया कि शहर में लगभग 200 मुस्लिम हैं, जिन्हें दिन में पांच बार नमाज पढ़ने के लिए एक स्थायी जगह की जरूरत थी, क्योंकि कम्युनिटी स्पेस इतने लंबे समय तक खुले नहीं रहते। यही वजह है कि उन्होंने एंकर टेनेंट के तौर पर आवेदन किया था। वहीं, NCN के प्रवक्ता का कहना है कि स्थानीय समुदायों और आस्था समूहों को भी जगह किराए पर लेने की अनुमति दी जाएगी।

    हिंदू परिवारों की क्या है परेशानी?
    कैम्ब्रिजशायर में कई चर्च और मस्जिदें हैं, लेकिन एक भी हिंदू मंदिर नहीं है। हिंदुओं को पूजा करने के लिए दो घंटे का सफर तय करके बर्मिंघम या वेम्बली जाना पड़ता है। वे रात भर के लिए कम्युनिटी स्पेस किराए पर नहीं ले सकते, जिससे गणपति जैसे त्योहार मनाना मुश्किल हो जाता है। हालात ये हैं कि भगवान की मूर्तियों को कैरी बैग में रखकर गैराज में रखना पड़ता है। जगह-जगह ले जाने के कारण कई मूर्तियां खंडित भी हो गई हैं।

    उत्तर प्रदेश के कानपुर से यूके गए अभिषेक श्रीवास्तव कहते हैं कि उन्हें कभी-कभी लगता है कि यूके आकर उन्होंने गलती कर दी, क्योंकि उनके 9 और 12 साल के बच्चे हिंदू त्योहारों में हिस्सा नहीं ले पाते। वहीं, 16 साल की इवा का कहना है कि उसने कभी रात भर शिवरात्रि नहीं मनाई और न ही कभी ‘हवन’ देखा है। वह कहती हैं, “मैं अक्सर भारत में अपने चचेरे भाई-बहनों को त्योहार मनाते देखती हूं। मेरी पीढ़ी यहां अपनी जड़ों, संस्कृति और विरासत से पूरी तरह अलग हो रही है।”

    हिंदू चैरिटी ने उठाए प्रक्रिया पर सवाल
    HSN की अध्यक्ष अपर्णा निगम-सक्सेना ने फैसले पर निराशा जताते हुए पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ अपील करने पर विचार कर रहे हैं। दरअसल, ‘वित्तीय ट्रैक रिकॉर्ड’ की कमी सहित कई कारणों से HSN की बोली के अंक काट लिए गए थे। अपर्णा ने कहा कि उन्हें पता ही नहीं था कि यह एक महत्वपूर्ण कारक है। अगर काउंसिल को आर्किटेक्ट से तैयार कोटेशन चाहिए थे, तो उन्हें इसके लिए दिशानिर्देश देने चाहिए थे।

    दूसरी ओर, काउंसिलर डॉ. लिसा रेड्रुप ने फैसले का बचाव करते हुए कहा, “बोलियों का आकलन स्पष्ट मानदंडों के आधार पर किया गया था, जो सभी के लिए उपलब्ध थे। आवेदकों को अपने प्रोजेक्ट की जरूरत और अपनी धार्मिक प्रथाओं से जुड़ी बातों को स्पष्ट करना था।”

  • जबलपुर में चर्च में हंगामा: महिला दिवस कार्यक्रम में निलंबित प्राचार्य ने किया उत्पात, ईसाई समुदाय ने FIR की मांग की

    जबलपुर में चर्च में हंगामा: महिला दिवस कार्यक्रम में निलंबित प्राचार्य ने किया उत्पात, ईसाई समुदाय ने FIR की मांग की


    जबलपुर । जबलपुर के क्राइस्टचर्च गर्ल्स स्कूल परिसर में स्थित चर्च में रविवार सुबह आराधना के दौरान हंगामा हो गया। महिला दिवस के अवसर पर आयोजित महिला सम्मान कार्यक्रम में अचानक व्यवधान उत्पन्न होने से ईसाई समुदाय में नाराजगी फैल गई। समाज और चर्च के पदाधिकारियों ने तुरंत ओमती थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और हंगामा करने वाले के खिलाफ FIR दर्ज कर कार्रवाई की मांग की।

    ओमती पुलिस के अनुसार, शिकायत में बताया गया कि क्राइस्टचर्च बॉयज स्कूल से निलंबित प्राचार्य लेडली मैथ्यूज सुबह आराधना के दौरान चर्च में घुस आए। उन्होंने पवित्र स्थान में पहुंचकर माइक छीन लिया और बेवजह की बातें करने लगे, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।

    चर्च पदाधिकारियों के विरोध करने पर मैथ्यूज ने वहां मौजूद लोगों को धमकाया और पदाधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की की। इस घटना से उपस्थित लोग आहत हुए और महिलाओं के सम्मान के लिए आयोजित कार्यक्रम में व्यवधान उत्पन्न हुआ। कार्यक्रम में शामिल महिलाओं के साथ भी अभद्रता की शिकायत की गई है।

    पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और बताया कि जल्द ही दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। चर्च और समाज के पदाधिकारी पूरे मामले में सतर्क हैं और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।

    इस घटना ने न केवल चर्च परिसर में सुरक्षा की चिंता बढ़ाई है, बल्कि समुदाय के बीच तनाव भी पैदा किया है। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करने की अपील की है।