Tag: CIA

  • कहां हैं मोजतबा खामेनेई? नए सुप्रीम लीडर की गैरमौजूदगी पर CIA-मोसाद सतर्क

    कहां हैं मोजतबा खामेनेई? नए सुप्रीम लीडर की गैरमौजूदगी पर CIA-मोसाद सतर्क


    नई दिल्ली। ईरान के नए सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei की सार्वजनिक अनुपस्थिति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। बताया जा रहा है कि उनके पिता Ali Khamenei की हत्या के बाद 9 मार्च को उन्हें ईरान का तीसरा सुप्रीम लीडर घोषित किया गया था, लेकिन तब से वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। इस स्थिति ने Central Intelligence Agency (CIA) और Mossad जैसी खुफिया एजेंसियों को सतर्क कर दिया है।

    नवरोज पर नहीं आया वीडियो संदेश

    फारसी नववर्ष Nowruz के मौके पर आमतौर पर सुप्रीम लीडर देश को संबोधित करते हैं, लेकिन इस बार केवल लिखित बयान जारी किया गया। उनके आधिकारिक चैनल पर कुछ पुरानी तस्वीरें साझा की गईं, जिससे उनकी मौजूदगी और स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    ‘जीवित होने के संकेत’, लेकिन ठोस प्रमाण नहीं

    अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों के अनुसार, कुछ संकेत मिले हैं कि ईरानी अधिकारी उनसे मुलाकात की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, एक इजरायली अधिकारी ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि वे वास्तव में आदेश दे रहे हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने इस स्थिति को “बेहद अजीब” बताया और कहा कि इतने बड़े पद पर किसी की सक्रियता का कोई स्पष्ट संकेत न मिलना असामान्य है।

    संभावित कारणों पर चर्चा

    रिपोर्टों के अनुसार, एजेंसियां साझा की गई तस्वीरों की जांच कर रही हैं कि वे हाल की हैं या नहीं। इस बीच Masoud Pezeshkian ने नवरोज पर वीडियो संदेश जारी किया, जबकि मोजतबा खामेनेई सामने नहीं आए। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा कारणों से उन्हें सार्वजनिक रूप से सामने नहीं लाया जा रहा हो सकता है।

    तेल अवीव स्थित Institute for National Security Studies से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा युद्ध जैसे हालात में उनकी सार्वजनिक मौजूदगी जोखिम भरी हो सकती है। यह भी संभावना जताई जा रही है कि स्वास्थ्य या चोट से जुड़ी वजहों के कारण वे सामने नहीं आ रहे हों।

    सत्ता संतुलन पर उठे सवाल

    बताया जा रहा है कि Israel ने उन्हें संभावित लक्ष्य सूची में ऊपर रखा है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं। इस बीच सवाल उठ रहे हैं कि क्या वास्तव में सत्ता की कमान उनके हाथ में है या Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) जैसे शक्तिशाली सैन्य संगठन निर्णय ले रहे हैं।

    खुफिया एजेंसियां उनकी गतिविधियों से जुड़े हर संकेत पर नजर बनाए हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई की अनुपस्थिति ईरान की आंतरिक राजनीति और चल रहे संघर्ष की दिशा पर महत्वपूर्ण असर डाल सकती है।

  • अमेरिकी हमलों से कमजोर हुआ ईरान, लेकिन खतरा बरकरार: इंटेलिजेंस एजेंसियों की चेतावनी

    अमेरिकी हमलों से कमजोर हुआ ईरान, लेकिन खतरा बरकरार: इंटेलिजेंस एजेंसियों की चेतावनी


    वॉशिंगटन। हाल ही में हुए अमेरिकी सैन्य अभियानों के बाद ईरान की सैन्य और रणनीतिक क्षमताओं को बड़ा झटका लगा है लेकिन खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। संयुक्त राज्य अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने सीनेट को जानकारी देते हुए कहा है कि ईरानी शासन कमजोर जरूर हुआ है पर अब भी क्षेत्रीय स्थिरता और अमेरिकी हितों के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है।

    अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने सीनेट सिलेक्ट इंटेलिजेंस कमेटी को बताया कि हमलों के चलते ईरान की पारंपरिक सैन्य ताकत काफी हद तक प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान की सैन्य शक्ति प्रदर्शित करने की क्षमता कमजोर पड़ी है जिससे उसके विकल्प सीमित हो गए हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरानी सरकार अभी कायम है और समय के साथ अपनी सैन्य ताकत फिर से खड़ी करने की क्षमता रखती है।

    CIA के निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान लंबे समय से अमेरिका के लिए खतरा रहा है और वर्तमान में यह खतरा और अधिक तात्कालिक हो गया है। उन्होंने ईरान की मिसाइल और स्पेस लॉन्च तकनीक को लेकर चिंता जताई और कहा कि यदि इसे बिना रोक-टोक जारी रहने दिया गया तो भविष्य में ईरान के पास पूरे अमेरिका तक मार करने वाली मिसाइल क्षमता हो सकती है।

    इंटेलिजेंस असेसमेंट के मुताबिक ईरान और उसके सहयोगी संगठन मध्य पूर्व में लगातार अमेरिकी हितों को निशाना बना रहे हैं। तुलसी गबार्ड ने बताया कि ईरान के प्रॉक्सी समूह क्षेत्र में सक्रिय हैं और समय-समय पर हमले करते रहते हैं।

    हालांकि सैन्य नुकसान के बावजूद ईरान की आंतरिक स्थिति पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है। रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक और राजनीतिक दबाव बढ़ने से देश के भीतर तनाव जरूर बढ़ सकता है लेकिन शासन अभी भी स्थिर बना हुआ है।

    अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी कहा कि हाल के ऑपरेशनों जैसे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने ईरान की न्यूक्लियर और मिसाइल क्षमताओं को बाधित किया है। इसके बावजूद सीनेटरों ने सवाल उठाया कि क्या ईरान से खतरा पूरी तरह खत्म हुआ है या नहीं।

    कुल मिलाकर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि ईरान को भले ही सैन्य झटका लगा हो लेकिन वह अभी भी एक बड़ा रणनीतिक खतरा बना हुआ है और भविष्य में अपनी ताकत फिर से खड़ी कर सकता है।