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  • ईरान के बाद क्यूबा पर ट्रंप का बड़ा दांव! बोले समझौता कराने भेजेंगे मार्को रुबियो CIA के साथ मिलकर बदलाव लाने की अपील

    ईरान के बाद क्यूबा पर ट्रंप का बड़ा दांव! बोले समझौता कराने भेजेंगे मार्को रुबियो CIA के साथ मिलकर बदलाव लाने की अपील


    नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बाद क्यूबा को लेकर अपनी रणनीति के संकेत देकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान से निपटने के बाद अमेरिका क्यूबा के मामले पर ध्यान देगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि क्यूबा के साथ समझौते को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इस बयान के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या अमेरिका अब क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार पर दबाव बढ़ाने की तैयारी में है या दोनों देशों के बीच किसी नए समझौते का रास्ता खुलने वाला है।

    फ्लोरिडा में एक रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान से लौटते समय वे क्यूबा के मामले को देखेंगे। उनके इस बयान को क्यूबा के साथ संभावित समझौते की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। ट्रंप पहले भी क्यूबा के साथ समझौता होने की संभावना जता चुके हैं। उन्होंने दावा किया था कि दोनों देशों के बीच जल्द समझौता हो सकता है और इसके लिए सैन्य कार्रवाई की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि अभी तक किसी औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं हुई है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका किन शर्तों पर क्यूबा के साथ बातचीत आगे बढ़ाना चाहता है।

    इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। रुबियो ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर क्यूबा के लोगों को संबोधित करते हुए बदलाव की अपील की। उन्होंने कहा कि जो लोग क्यूबा में बदलाव चाहते हैं उनके लिए यह सही समय है। रुबियो ने क्यूबा की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए टूटे वादों भ्रष्टाचार और कुछ चुनिंदा लोगों की सुख सुविधाओं का जिक्र किया। उनके बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिकी प्रशासन क्यूबा की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव के लिए दबाव बनाने की रणनीति पर विचार कर रहा है।

    रुबियो के बयान में CIA के साथ गुप्त साझेदारी का जिक्र भी चर्चा का विषय बना है। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने क्यूबा में बदलाव चाहने वाले लोगों से अमेरिकी खुफिया एजेंसी के साथ सहयोग करने की अपील की। इस बयान को लेकर कई सवाल खड़े हो सकते हैं क्योंकि किसी दूसरे देश के आंतरिक राजनीतिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप का मुद्दा संवेदनशील माना जाता है। हालांकि उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि इस कथित सहयोग का स्वरूप क्या होगा और क्या इसके तहत कोई औपचारिक पहल की जा रही है।

    क्यूबा और अमेरिका के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। अमेरिका छह दशक से अधिक समय से क्यूबा पर विभिन्न प्रतिबंध लगाता रहा है। इस साल की शुरुआत में लगाए गए तेल प्रतिबंधों के बाद क्यूबा की आर्थिक मुश्किलें और बढ़ने की बात सामने आई है। वहां ईंधन की कमी और कमजोर बुनियादी ढांचे के कारण बिजली कटौती जैसी समस्याएं भी बनी हुई हैं। इन परिस्थितियों में अमेरिकी दबाव क्यूबा की अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों की जिंदगी पर असर डाल सकता है।

    क्यूबा पर अमेरिकी दबाव बढ़ने की एक अन्य वजह वेनेजुएला से जुड़े घटनाक्रम को भी माना जा रहा है। खबर के मुताबिक वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी सेना द्वारा पकड़े जाने के बाद क्यूबा को लेकर ट्रंप प्रशासन का रुख और सख्त हुआ है। हालांकि अमेरिका की आगे की कार्रवाई को लेकर अभी कोई स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई है।

    दूसरी ओर क्यूबा के विदेश मंत्री पहले ही संयुक्त राष्ट्र महासभा में कह चुके हैं कि उनका देश अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तैयार है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत की संभावनाओं पर नजर रहेगी। फिलहाल ट्रंप के बयान और रुबियो की अपील ने क्यूबा को अमेरिकी विदेश नीति के केंद्र में ला दिया है। अब देखना होगा कि ईरान के मुद्दे के बाद अमेरिका वास्तव में बातचीत का रास्ता अपनाता है या क्यूबा पर प्रतिबंधों और राजनीतिक दबाव को और तेज करता है।

  • ईरान के सत्ता गलियारों में बढ़ी हलचल, मोजतबा खामेनेई की लोकेशन पर सस्पेंस बरकरार

    ईरान के सत्ता गलियारों में बढ़ी हलचल, मोजतबा खामेनेई की लोकेशन पर सस्पेंस बरकरार


    नई दिल्ली। ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई पिछले कई महीनों से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं और इसी वजह से उनकी मौजूदगी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चाएं तेज हो गई हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और विश्लेषणों में दावा किया जा रहा है कि उनकी लोकेशन को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं लेकिन अब तक कोई आधिकारिक और स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी सामने नहीं आई है। यही कारण है कि यह मामला दुनिया की सबसे चर्चित भू राजनीतिक पहेलियों में शामिल होता जा रहा है।

    रिपोर्टों के अनुसार मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता अली खामेनेई के निधन के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता की जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद से उन्होंने कुछ लिखित संदेश जरूर जारी किए हैं लेकिन किसी सार्वजनिक कार्यक्रम टेलीविजन संबोधन या आधिकारिक समारोह में दिखाई नहीं दिए। उनकी अनुपस्थिति ने अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों और सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

    कई विदेशी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिका और इजरायल की खुफिया एजेंसियां उनकी गतिविधियों पर नजर रखने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि मोजतबा खामेनेई आधुनिक डिजिटल माध्यमों का बहुत सीमित उपयोग करते हैं या उनसे पूरी तरह दूरी बनाए हुए हैं। यदि ऐसा है तो इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के जरिए उनकी लोकेशन का पता लगाना स्वाभाविक रूप से अधिक कठिन हो सकता है।

    उनकी गैरमौजूदगी को लेकर अलग अलग तरह की अटकलें भी सामने आती रही हैं। कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि वह सुरक्षा कारणों से किसी सुरक्षित स्थान पर रह रहे हैं जबकि कुछ अन्य रिपोर्टों में उनके स्वास्थ्य को लेकर भी दावे किए गए हैं। हालांकि इन दावों की पुष्टि ईरानी सरकार या किसी विश्वसनीय आधिकारिक स्रोत की ओर से नहीं की गई है। इसलिए इन खबरों को केवल अपुष्ट रिपोर्टों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

    विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा चुनौतियों के बीच किसी भी शीर्ष नेतृत्व के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सख्त बनाया जाना असामान्य नहीं है। ईरान लंबे समय से पश्चिमी देशों और इजरायल के साथ तनावपूर्ण संबंधों का सामना करता रहा है। ऐसे माहौल में शीर्ष नेतृत्व की सार्वजनिक गतिविधियों को सीमित करना सुरक्षा रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। हालांकि इसके पीछे वास्तविक कारण क्या हैं इसका स्पष्ट उत्तर फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान की सरकार अपने प्रशासनिक और राजनीतिक कामकाज को सामान्य रूप से जारी रखने का दावा करती रही है। कुछ सरकारी अधिकारियों ने यह भी कहा है कि सर्वोच्च नेतृत्व आवश्यक निर्णय ले रहा है लेकिन उनके सार्वजनिक कार्यक्रम सीमित हैं। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय मीडिया और सुरक्षा विशेषज्ञ लगातार इस विषय पर नजर बनाए हुए हैं और किसी आधिकारिक तस्वीर या सार्वजनिक उपस्थिति का इंतजार कर रहे हैं।

    फिलहाल मोजतबा खामेनेई की मौजूदगी को लेकर कई तरह की चर्चाएं जरूर हैं लेकिन उनके ठिकाने या स्वास्थ्य संबंधी किसी भी दावे की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इस मामले को लेकर सामने आ रही अपुष्ट जानकारियों के बजाय आधिकारिक बयानों और विश्वसनीय स्रोतों पर ही भरोसा करना उचित होगा। आने वाले समय में यदि ईरान की ओर से कोई सार्वजनिक उपस्थिति या आधिकारिक जानकारी जारी की जाती है तो इस रहस्य से जुड़ी कई अटकलों पर विराम लग सकता है।

  • कहां हैं मोजतबा खामेनेई? नए सुप्रीम लीडर की गैरमौजूदगी पर CIA-मोसाद सतर्क

    कहां हैं मोजतबा खामेनेई? नए सुप्रीम लीडर की गैरमौजूदगी पर CIA-मोसाद सतर्क


    नई दिल्ली। ईरान के नए सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei की सार्वजनिक अनुपस्थिति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। बताया जा रहा है कि उनके पिता Ali Khamenei की हत्या के बाद 9 मार्च को उन्हें ईरान का तीसरा सुप्रीम लीडर घोषित किया गया था, लेकिन तब से वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। इस स्थिति ने Central Intelligence Agency (CIA) और Mossad जैसी खुफिया एजेंसियों को सतर्क कर दिया है।

    नवरोज पर नहीं आया वीडियो संदेश

    फारसी नववर्ष Nowruz के मौके पर आमतौर पर सुप्रीम लीडर देश को संबोधित करते हैं, लेकिन इस बार केवल लिखित बयान जारी किया गया। उनके आधिकारिक चैनल पर कुछ पुरानी तस्वीरें साझा की गईं, जिससे उनकी मौजूदगी और स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    ‘जीवित होने के संकेत’, लेकिन ठोस प्रमाण नहीं

    अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों के अनुसार, कुछ संकेत मिले हैं कि ईरानी अधिकारी उनसे मुलाकात की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, एक इजरायली अधिकारी ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि वे वास्तव में आदेश दे रहे हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने इस स्थिति को “बेहद अजीब” बताया और कहा कि इतने बड़े पद पर किसी की सक्रियता का कोई स्पष्ट संकेत न मिलना असामान्य है।

    संभावित कारणों पर चर्चा

    रिपोर्टों के अनुसार, एजेंसियां साझा की गई तस्वीरों की जांच कर रही हैं कि वे हाल की हैं या नहीं। इस बीच Masoud Pezeshkian ने नवरोज पर वीडियो संदेश जारी किया, जबकि मोजतबा खामेनेई सामने नहीं आए। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा कारणों से उन्हें सार्वजनिक रूप से सामने नहीं लाया जा रहा हो सकता है।

    तेल अवीव स्थित Institute for National Security Studies से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा युद्ध जैसे हालात में उनकी सार्वजनिक मौजूदगी जोखिम भरी हो सकती है। यह भी संभावना जताई जा रही है कि स्वास्थ्य या चोट से जुड़ी वजहों के कारण वे सामने नहीं आ रहे हों।

    सत्ता संतुलन पर उठे सवाल

    बताया जा रहा है कि Israel ने उन्हें संभावित लक्ष्य सूची में ऊपर रखा है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं। इस बीच सवाल उठ रहे हैं कि क्या वास्तव में सत्ता की कमान उनके हाथ में है या Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) जैसे शक्तिशाली सैन्य संगठन निर्णय ले रहे हैं।

    खुफिया एजेंसियां उनकी गतिविधियों से जुड़े हर संकेत पर नजर बनाए हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई की अनुपस्थिति ईरान की आंतरिक राजनीति और चल रहे संघर्ष की दिशा पर महत्वपूर्ण असर डाल सकती है।

  • अमेरिकी हमलों से कमजोर हुआ ईरान, लेकिन खतरा बरकरार: इंटेलिजेंस एजेंसियों की चेतावनी

    अमेरिकी हमलों से कमजोर हुआ ईरान, लेकिन खतरा बरकरार: इंटेलिजेंस एजेंसियों की चेतावनी


    वॉशिंगटन। हाल ही में हुए अमेरिकी सैन्य अभियानों के बाद ईरान की सैन्य और रणनीतिक क्षमताओं को बड़ा झटका लगा है लेकिन खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। संयुक्त राज्य अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने सीनेट को जानकारी देते हुए कहा है कि ईरानी शासन कमजोर जरूर हुआ है पर अब भी क्षेत्रीय स्थिरता और अमेरिकी हितों के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है।

    अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने सीनेट सिलेक्ट इंटेलिजेंस कमेटी को बताया कि हमलों के चलते ईरान की पारंपरिक सैन्य ताकत काफी हद तक प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान की सैन्य शक्ति प्रदर्शित करने की क्षमता कमजोर पड़ी है जिससे उसके विकल्प सीमित हो गए हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरानी सरकार अभी कायम है और समय के साथ अपनी सैन्य ताकत फिर से खड़ी करने की क्षमता रखती है।

    CIA के निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान लंबे समय से अमेरिका के लिए खतरा रहा है और वर्तमान में यह खतरा और अधिक तात्कालिक हो गया है। उन्होंने ईरान की मिसाइल और स्पेस लॉन्च तकनीक को लेकर चिंता जताई और कहा कि यदि इसे बिना रोक-टोक जारी रहने दिया गया तो भविष्य में ईरान के पास पूरे अमेरिका तक मार करने वाली मिसाइल क्षमता हो सकती है।

    इंटेलिजेंस असेसमेंट के मुताबिक ईरान और उसके सहयोगी संगठन मध्य पूर्व में लगातार अमेरिकी हितों को निशाना बना रहे हैं। तुलसी गबार्ड ने बताया कि ईरान के प्रॉक्सी समूह क्षेत्र में सक्रिय हैं और समय-समय पर हमले करते रहते हैं।

    हालांकि सैन्य नुकसान के बावजूद ईरान की आंतरिक स्थिति पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है। रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक और राजनीतिक दबाव बढ़ने से देश के भीतर तनाव जरूर बढ़ सकता है लेकिन शासन अभी भी स्थिर बना हुआ है।

    अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी कहा कि हाल के ऑपरेशनों जैसे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने ईरान की न्यूक्लियर और मिसाइल क्षमताओं को बाधित किया है। इसके बावजूद सीनेटरों ने सवाल उठाया कि क्या ईरान से खतरा पूरी तरह खत्म हुआ है या नहीं।

    कुल मिलाकर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि ईरान को भले ही सैन्य झटका लगा हो लेकिन वह अभी भी एक बड़ा रणनीतिक खतरा बना हुआ है और भविष्य में अपनी ताकत फिर से खड़ी कर सकता है।