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  • ‘सीआईडी’ और ‘आहट’ के निर्माता-निर्देशक बी.पी. सिंह का निधन, 28 अक्टूबर को होगा अंतिम संस्कार

    ‘सीआईडी’ और ‘आहट’ के निर्माता-निर्देशक बी.पी. सिंह का निधन, 28 अक्टूबर को होगा अंतिम संस्कार

    नई दिल्ली ।भारतीय टेलीविजन के लोकप्रिय धारावाहिक ‘सीआईडी’ और ‘आहट’ के निर्माता-निर्देशक बी.पी. सिंह का मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 की सुबह निधन हो गया। उनके निधन की जानकारी फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने साझा की। उन्होंने बताया कि बी.पी. सिंह को सुबह तड़के दिल का दौरा पड़ा था। उनके जाने से टेलीविजन जगत में शोक का माहौल है। अशोक पंडित ने उन्हें एक प्रतिभाशाली फिल्मकार और करीबी मित्र बताते हुए उनके योगदान को याद किया।

    अशोक पंडित ने बी.पी. सिंह के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनके बनाए अपराध और डर पर आधारित धारावाहिकों ने देशभर के दर्शकों को लंबे समय तक बांधे रखा। उन्होंने कहा कि बी.पी. सिंह का काम आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बना रहेगा। पंडित ने यह भी बताया कि जब बी.पी. सिंह भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन निर्देशक संघ के अध्यक्ष थे, तब उन्हें उनके साथ करीबी सहयोगी के रूप में काम करने का अवसर मिला था।

    उन्होंने दिवंगत निर्माता-निर्देशक को बेहतरीन इंसान और प्रिय मित्र बताते हुए उनके परिवार तथा करीबियों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बी.पी. सिंह का अंतिम संस्कार 28 अक्टूबर को किया जाएगा। अंतिम संस्कार के समय और स्थान से जुड़ी विस्तृत जानकारी बाद में साझा किए जाने की बात कही गई है।

    बी.पी. सिंह का पूरा नाम बृजेंद्रपाल सिंह था। उनका जन्म उत्तराखंड के देहरादून में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1973 में दूरदर्शन के साथ समाचार कैमरामैन के रूप में अपने पेशेवर करियर की शुरुआत की। करीब दस वर्षों तक कैमरे के पीछे काम करने के बाद वह मुंबई पहुंचे। इसके बाद उन्होंने टेलीविजन कार्यक्रमों के निर्माण और निर्देशन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई।

    उनके करियर में दूरदर्शन के लिए बनाई गई टेलीफिल्म ‘सिर्फ चार दिन’ का अहम स्थान रहा। इस फिल्म की तैयारी के दौरान वह पुलिस की अपराध शाखा में जाने लगे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात निरीक्षक जयंत वागले से हुई। पुलिस की जांच प्रक्रिया और अपराधों को सुलझाने के तरीकों में उनकी रुचि बढ़ी। आगे चलकर यही दिलचस्पी उनके चर्चित अपराध धारावाहिक ‘सीआईडी’ की पृष्ठभूमि बनी।

    वर्ष 1998 में शुरू हुए ‘सीआईडी’ ने बी.पी. सिंह को भारतीय टेलीविजन के प्रमुख निर्माताओं और निर्देशकों में शामिल कर दिया। अपराधों की जांच, रहस्य और पुलिस की कार्यप्रणाली पर आधारित इस धारावाहिक ने दर्शकों के बीच व्यापक पहचान बनाई। लंबे समय तक प्रसारित होने के कारण यह भारतीय टेलीविजन के चर्चित कार्यक्रमों में गिना गया।

    ‘सीआईडी’ से पहले वर्ष 1995 में प्रसारित हुए डर और रहस्य पर आधारित धारावाहिक ‘आहट’ के निर्माण और निर्देशन में भी बी.पी. सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। डरावनी कहानियों और रहस्यमय घटनाओं पर आधारित इस कार्यक्रम ने भी दर्शकों के बीच लोकप्रियता हासिल की। इन दोनों धारावाहिकों के जरिए उन्होंने टेलीविजन पर अपराध और हॉरर शैली को मजबूत पहचान दिलाने में योगदान दिया।

    उनके काम का दायरा इन दो धारावाहिकों तक सीमित नहीं था। वह ‘एक शून्य शून्य’, ‘सीआईडी: स्पेशल ब्यूरो’, ‘अचानक 37 साल बाद’, ‘रात होने को है’, ‘जिंदगी बदल सकता है हादसा’, ‘गुटुर गू’, ‘सूर्य द सुपर कॉप’, ‘हम ने ली है शपथ’, ‘सुपरकॉप्स वर्सेज सुपर विलेन’ और ‘दिव्य दृष्टि’ जैसे कार्यक्रमों से भी जुड़े रहे।

    बी.पी. सिंह का निधन भारतीय टेलीविजन के उस दौर की एक महत्वपूर्ण हस्ती का जाना है, जिन्होंने समाचार कैमरे से अपने करियर की शुरुआत कर अपराध और रहस्य आधारित धारावाहिकों के जरिए व्यापक पहचान बनाई। उनके काम और लोकप्रिय कार्यक्रमों को लंबे समय तक याद किया जाएगा।

  • JPSC पेपर लीक मामले में SIT का एक्शन, दो सफल सगे भाई गिरफ्तार, 20 सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ जारी

    JPSC पेपर लीक मामले में SIT का एक्शन, दो सफल सगे भाई गिरफ्तार, 20 सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ जारी

    नई दिल्ली ।झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितता के मामले में जांच कर रही एसआईटी ने शनिवार को दो सफल सगे भाइयों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए अभ्यर्थियों की पहचान दिलीप राणा और ओमप्रकाश राणा के रूप में हुई है। दोनों ने 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में सफलता हासिल की थी। दोनों की गिरफ्तारी केस संख्या 16/2026 में की गई है। जांच एजेंसी के अनुसार, दोनों पर परीक्षा में अनुचित तरीके से सफलता हासिल करने के लिए सेटिंग कराने का आरोप है।

    जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के अनुसार, दोनों भाइयों ने अभय तिवारी के लिए एजेंट के तौर पर काम करने वाले बुद्धेश्वर भगत के माध्यम से परीक्षा में सेटिंग कराई थी। आरोप है कि ओएमआर शीट में हेरफेर के जरिए उन्हें 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण कराया गया। बुद्धेश्वर भगत की गिरफ्तारी के बाद उससे 11 अभ्यर्थियों के बारे में जानकारी मिली थी। इसके बाद इन सभी अभ्यर्थियों को जांच के दायरे में रखा गया। इनमें कपिल कुमार महतो, संतोष कुमार, वंदना कुमारी, दिलीप कुमार राणा, ओमप्रकाश राणा, शिवम सिंह, पवन कुमार मुंडा, राकी सचिन लकड़ा, रोशन केरकेट्टा और उमांकांत उरांव के नाम शामिल हैं।

    इस मामले में रोशन केरकेट्टा और उमाकांत उरांव की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है और उनसे पूछताछ भी की जा चुकी है। शनिवार की कार्रवाई के बाद हजारीबाग से गिरफ्तार किए गए सफल अभ्यर्थियों की संख्या तीन हो गई है। जेपीएससी मेधा घोटाले की जांच में अब तक कुल 27 आरोपितों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। इनमें नौ ऐसे अभ्यर्थी शामिल हैं, जिन्होंने विभिन्न परीक्षाओं में सफलता हासिल की थी। गिरफ्तार सफल अभ्यर्थियों में हजारीबाग के सुमन सौरभ, दीपक राणा और ओमप्रकाश राणा, लोहरदगा के उमाकांत उरांव, रांची के रोशन केरकेट्टा और मनोज कुमार, उत्तर प्रदेश के रक्षक सिंह तथा एफआरओ और एसीएफ परीक्षा में सफल ऋतिक रौशन और पंकज प्रसून्न शामिल हैं।

    इसी जांच से जुड़े सीजीएल पेपर लीक मामले में पहले गिरफ्तार किए जा चुके एजेंट दिलीप पासवान को तीन दिनों की रिमांड पर लिया गया है। उसे 14 सितंबर को पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले से गिरफ्तार किया गया था। जांच में यह बात सामने आई है कि सीजीएल परीक्षा से पहले दिलीप पासवान ने अभ्यर्थियों को आसनसोल के एक होटल में ठहराया था और उन्हें प्रश्नोत्तर रटवाए थे। शनिवार को जांच टीम ने 20 सफल अभ्यर्थियों से भी पूछताछ की। इसके अलावा जेपीएससी भर्ती परीक्षा में कथित धांधली के मामले में जेल में बंद आयोग के पूर्व अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्य सचिव एल ख्यांग्ते ने जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया है।

    एल ख्यांग्ते को इस मामले में तीन दिनों तक पूछताछ के बाद 10 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था और गिरफ्तारी के बाद से वह न्यायिक हिरासत में हैं। उन्होंने इससे पहले रांची सिविल कोर्ट स्थित सीआईडी कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया था। इसके बाद अब उन्होंने हाईकोर्ट में जमानत की मांग की है। जेपीएससी परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच में गिरफ्तारियों और पूछताछ का सिलसिला जारी है।

  • CID पूछताछ के बाद TMC विधायक परेश राम दास की तबीयत बिगड़ी, सीने में दर्द के बाद अस्पताल में भर्ती

    CID पूछताछ के बाद TMC विधायक परेश राम दास की तबीयत बिगड़ी, सीने में दर्द के बाद अस्पताल में भर्ती

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल में 2023 के पंचायत चुनाव के दौरान हुई हिंसा से जुड़े एक मामले में पूछताछ के लिए पहुंचे तृणमूल कांग्रेस विधायक परेश राम दास की सोमवार को अचानक तबीयत बिगड़ गई। करीब पांच घंटे तक चली पूछताछ के दौरान उन्होंने सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी की शिकायत की। इसके बाद उन्हें कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    परेश राम दास दक्षिण 24 परगना जिले की कैनिंग पश्चिम विधानसभा सीट से विधायक हैं। उन्हें पंचायत चुनाव के दौरान हुई हिंसा से संबंधित मामले की जांच के सिलसिले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। विधायक सोमवार सुबह करीब 11 बजे भवानी भवन स्थित जांच कार्यालय पहुंचे थे।

    पूछताछ के दौरान शाम करीब चार बजे उन्होंने अपनी तबीयत खराब होने की जानकारी दी। सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल ले जाने की व्यवस्था की गई। अस्पताल पहुंचने पर उनका इलाज शुरू किया गया और डॉक्टरों ने उन्हें निगरानी में रखा।

    इस मामले में विधायक को इससे पहले भी पूछताछ के लिए तलब किया जा चुका है। जांच 2023 के पंचायत चुनाव के दौरान कैनिंग इलाके में हुई हिंसा और उससे जुड़े आरोपों पर केंद्रित है। इसी सिलसिले में विधायक से मामले से संबंधित जानकारी और घटनाक्रम को लेकर सवाल किए जा रहे थे।

    पूछताछ के लिए पहुंचने से पहले विधायक ने सोशल मीडिया पर एक संदेश भी पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने कैनिंग को अलविदा कहने और दोबारा मिलने तथा बातचीत करने की बात कही थी। उनके इस संदेश को लेकर समर्थकों के बीच भी चर्चा हुई।

    परेश राम दास के करीबी लोगों के अनुसार, वह पहले स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण इलाज करा चुके हैं। हाल ही में वह इलाज के लिए चेन्नई भी गए थे। सोमवार को जांच के लिए पहुंचते समय उनके पास इनहेलर भी मौजूद था।

    पंचायत चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। कैनिंग क्षेत्र से जुड़े मामले की जांच के दौरान कई लोगों से पूछताछ की गई है। विधायक से भी इसी जांच के तहत पूछताछ की जा रही थी।

    करीब पांच घंटे तक चली पूछताछ के बाद अचानक तबीयत बिगड़ने से जांच की प्रक्रिया प्रभावित हुई। अब आगे की पूछताछ और जांच से संबंधित कार्रवाई विधायक की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए तय की जा सकती है।

    फिलहाल परेश राम दास अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में हैं। उनकी तबीयत को लेकर डॉक्टरों की निगरानी जारी है। मामले में जांच एजेंसी की ओर से आगे की कार्रवाई स्वास्थ्य स्थिति और जांच की जरूरत के अनुसार की जाएगी।

  • बंगाल: CID का दावा- जमीन घोटाले के 7 करोड़ TMC के खाते में आए…. अभिषेक बनर्जी के PA ने उगले राज

    बंगाल: CID का दावा- जमीन घोटाले के 7 करोड़ TMC के खाते में आए…. अभिषेक बनर्जी के PA ने उगले राज


    कोलकाता।
    ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के कार्यकाल के दौरान पश्चिम बंगाल (West Bengal) में हुए साल्बोनी जमीन घोटाले (Salboni land scam) में अब अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) और तृणमूल यूथ कांग्रेस का नाम भी शामिल हो गया है। इस मामले में आरोपियों से पूछताछ कर रही सीआईडी ने कोर्ट को बताया था कि जमीन घोटाले से मिली रकम तृणमूल के खातों में जमा की गई थी। एजेंसी का दावा है कि डायमंड हार्बर से सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के कहने पर ही ये पैसे टीएमसी के खाते में डाले गए। सीआईडी का दावा है कि अभिषेक के पर्सनल असिस्टेंट सुमित रॉय ने पूछताछ के दौरान यह जानकारी दी है।

    आपको बता दें कि इस मामले में सुमित को तृणमूल के पूर्व MLA सुजय हाजरा और कई अन्य लोगों के साथ पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। सुमित को शनिवार को मिदनापुर कोर्ट में पेश किया गया।


    बेच दी गई सरकारी जमीन

    सूत्रों के मुताबिक, सीआईडी की ओर से कोर्ट में जमा किए गए दस्तावेजों से पता चला कि पूछताछ के दौरान सुमित ने बताया कि अभिषेक के कहने पर सांसद के ट्रेजरर टी. घोष नाम के एक व्यक्ति ने उसे तृणमूल कांग्रेस पार्टी फंड में जमा करने के लिए पैसे दिए थे। सुमित ने दावा किया कि उसने वह पैसा बैंक में जमा कर दिया था। उसने कहा कि उसे जमीन घोटाले से कोई पैसा नहीं मिला। आपको बता दें कि इस मामले में फर्जी कागजात का इस्तेमाल करके सरकारी जमीन बेची गई थी।

    इस महीने की शुरुआत में, तृणमूल के पूर्व MLA सुजय हाजरा के खिलाफ दायर चार्जशीट में CID ने एक पब्लिक सेक्टर बैंक अकाउंट नंबर का जिक्र किया और कोर्ट को बताया कि सुमित ने 2018 और 2021 के बीच उस खाते में किश्तों में लगभग 7 करोड़ जमा किए थे। CID ने चार्जशीट के साथ इससे जुड़े जरूरी दस्तावेज भी कोर्ट में जमा किए। जांच में पता चला कि कोलकाता की हरीश मुखर्जी रोड ब्रांच में मौजूद वह खाता पश्चिम बंगाल तृणमूल यूथ कांग्रेस के नाम पर रजिस्टर्ड था। सुमित ने उस खाते में इतनी बड़ी रकम क्यों जमा की? शनिवार को कोर्ट में इस बारे में पूछे जाने पर सुमित ने दावा किया कि उसने सांसद अभिषेक बनर्जी के कहने पर पार्टी फंड में पैसे जमा किए थे।


    अभिषेक बनर्जी से भी हो सकती है पूछताछ

    CID अधिकारियों का दावा है कि साल्बोनी में जमीन का फ्रॉड 2018 और 2021 के बीच हुआ था। चार्जशीट में CID ने अभिषेक के बॉडीगार्ड और सुजय के ड्राइवर के बयानों के आधार पर कहा है कि इन गवाहों ने सुजय और सुमित के बीच पैसों के लेन-देन को देखा था। CID का कहना है कि सुमित का अपना कोई ऑफिस नहीं है। वह अभिषेक बनर्जी के दफ्तर में ही रहता था। सुमित ने अपने बयान में सात करोड़ रुपये के लेन-देन के लिए अभिषेक बनर्जी को ही जिम्मेदार ठहराया है। CID अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अगर उसका बयान सही साबित होता है तो पैसे के स्रोत का पता लगाने के लिए अभिषेक बनर्जी से भी इस मामले में पूछताछ की जा सकती है।

  • रांची छात्र आंदोलन के बीच सीआईडी की बड़ी कार्रवाई, पांच और गिरफ्तार; वार्ता को लेकर सक्रिय हुई हेमंत सरकार

    रांची छात्र आंदोलन के बीच सीआईडी की बड़ी कार्रवाई, पांच और गिरफ्तार; वार्ता को लेकर सक्रिय हुई हेमंत सरकार

    नई दिल्ली । झारखंड में प्रतियोगी परीक्षा में कथित धांधली को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। एक तरफ जहां जांच एजेंसियां अपनी कार्रवाई तेज कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच वार्ता के रास्ते तलाशने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। आपराधिक जांच विभाग यानी सीआईडी ने इस प्रकरण में पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिससे इस मामले में अब तक हुई गिरफ्तारियों का दायरा और बढ़ गया है।

    इस हालिया कार्रवाई में परीक्षा आयोजन से जुड़े एक पूर्व अधिकारी के कार्यालय में तैनात कर्मचारी, कुछ अभ्यर्थी और बिचौलिए पुलिस की गिरफ्त में आए हैं। जांच अधिकारियों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और जब्त दस्तावेजों के आधार पर यह गिरफ्तारियां की गई हैं। सीआईडी की टीमें पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के उद्देश्य से लगातार विभिन्न ठिकानों पर दबिश दे रही हैं और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

    इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूरे मामले पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए आंदोलनकारी छात्रों से संवाद की पेशकश की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार युवाओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और सभी जायज मांगों पर नियमानुसार विचार किया जाएगा।

    दूसरी ओर, आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे बंद कमरे में वार्ता के पक्षधर नहीं हैं। छात्रों की मांग है कि बातचीत किसी सार्वजनिक मंच पर हो या फिर पूरी प्रक्रिया का सीधा प्रसारण किया जाए, ताकि सभी अभ्यर्थियों के सामने पूरी पारदर्शिता बनी रहे। कुछ छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि मुख्यमंत्री को स्वयं अनशन स्थल पर आकर छात्रों की समस्याएं सुननी चाहिए और तुरंत समाधान की घोषणा करनी चाहिए।

    प्रदर्शन स्थल पर अनशन पर बैठे छात्रों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। आंदोलनकारी मुख्य रूप से विवादित परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने, दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने और भविष्य की भर्ती परीक्षाओं के लिए सख्त कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। मध्य प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों के छात्र संगठन भी झारखंड के इस घटनाक्रम पर अपनी नजर बनाए हुए हैं और लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से आंदोलन को समर्थन मिल रहा है।

    संभावित विधानसभा घेराव और प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए हैं। शहर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। फिलहाल सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बने इस गतिरोध का नतीजा क्या निकलता है, इस पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं।

  • 3000 रुपये की कमाई से बिग बॉस स्टार तक, अर्चना गौतम की प्रेरणादायक संघर्ष कहानी

    3000 रुपये की कमाई से बिग बॉस स्टार तक, अर्चना गौतम की प्रेरणादायक संघर्ष कहानी


    नई दिल्ली । मनोरंजन जगत की चमक-दमक के पीछे संघर्ष, मेहनत और धैर्य की लंबी कहानी छिपी होती है। इसका ताजा उदाहरण अभिनेत्री अर्चना गौतम हैं, जिन्होंने हाल ही में अपने करियर के शुरुआती दिनों के कुछ ऐसे अनुभव साझा किए, जिन्हें सुनकर हर कोई हैरान रह गया। आज भले ही अर्चना गौतम टीवी और सोशल मीडिया की चर्चित हस्ती हों, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने कई छोटे-बड़े संघर्षों का सामना किया है।

    ‘बिग बॉस 16’ से घर-घर में पहचान बनाने वाली अर्चना गौतम हाल ही में एक रियलिटी शो में पहुंचीं, जहां उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दौर की चुनौतियों पर खुलकर बात की। अर्चना ने बताया कि इंडस्ट्री में पहचान बनाने से पहले उन्होंने कई छोटे किरदार निभाए। यहां तक कि लोकप्रिय क्राइम शो ‘CID’ में उन्होंने एक मृत शरीर यानी लाश का रोल भी किया था।

    अर्चना के अनुसार, उस समय उन्हें प्रतिदिन 3000 रुपये का भुगतान किया जाता था। हालांकि यह रकम आज भले ही छोटी लगे, लेकिन उस दौर में उनके लिए यह काम और कमाई दोनों ही बेहद महत्वपूर्ण थे। उन्होंने बताया कि यह उनके करियर का तीसरा टेलीविजन शो था और उस भूमिका ने उन्हें अभिनय की दुनिया को करीब से समझने का मौका दिया।

    अर्चना ने सेट से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी साझा किया। उन्होंने हंसते हुए बताया कि जब वह लाश बनकर बिना हिले-डुले लेटी रहती थीं, तब शो के सीनियर कलाकार उनकी आंखें खोलकर देखते थे कि कहीं वह पलक तो नहीं झपका रहीं। क्योंकि एक मृत शरीर के किरदार में बिल्कुल स्थिर रहना जरूरी होता था। उनके लिए यह अनुभव नया और चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि लंबे समय तक बिना किसी हरकत के पड़े रहना आसान नहीं था।

    अभिनेत्री ने कहा कि लोग अक्सर ग्लैमर इंडस्ट्री को बाहर से देखकर यह मान लेते हैं कि यहां सफलता आसानी से मिल जाती है, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग होती है। नए कलाकारों को छोटे-छोटे रोल, लंबे इंतजार, ऑडिशन और असफलताओं के दौर से गुजरना पड़ता है। कई बार मेहनत का परिणाम तुरंत नहीं मिलता, लेकिन लगातार प्रयास ही सफलता की राह खोलते हैं।

    अर्चना गौतम की कहानी इस बात का उदाहरण है कि कोई भी उपलब्धि रातों-रात हासिल नहीं होती। छोटे किरदारों से शुरू हुआ उनका सफर आज उन्हें मनोरंजन जगत की चर्चित हस्तियों में शामिल कर चुका है। उनके संघर्ष की यह कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अभिनय की दुनिया में अपनी पहचान बनाने का सपना देखते हैं।

    आज अर्चना गौतम जिस आत्मविश्वास और लोकप्रियता के साथ दर्शकों के बीच मौजूद हैं, उसके पीछे वर्षों की मेहनत, धैर्य और संघर्ष की लंबी यात्रा छिपी हुई है। यही वजह है कि उनकी सफलता की कहानी लाखों युवाओं को अपने सपनों के लिए लगातार प्रयास करने की प्रेरणा देती है।