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  • 24 हजार करोड़ कमाने वाली Avatar पर लगा भारतीय फिल्म की कहानी अपनाने का दावा, जानिए पूरा मामला

    24 हजार करोड़ कमाने वाली Avatar पर लगा भारतीय फिल्म की कहानी अपनाने का दावा, जानिए पूरा मामला


    नई दिल्ली । अक्सर बॉलीवुड फिल्मों पर हॉलीवुड या दक्षिण भारतीय फिल्मों की कहानी कॉपी करने के आरोप लगते रहे हैं लेकिन अब एक ऐसा दावा सामने आया है जिसने इस बहस को नया मोड़ दे दिया है। अभिनेता और कॉमेडियन राजीव ठाकुर ने एक इंटरव्यू में कहा कि दुनिया की सबसे सफल फिल्मों में शामिल Avatar की कहानी भारतीय फिल्म ठिकाना से काफी मिलती है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग दोनों फिल्मों की कहानी की तुलना करने लगे हैं।

    राजीव ठाकुर ने बातचीत के दौरान कहा कि हमेशा भारतीय फिल्मों पर कहानी चुराने के आरोप लगाए जाते हैं लेकिन कभी यह भी देखा जाना चाहिए कि क्या विदेशी फिल्मों ने भी भारतीय सिनेमा से प्रेरणा ली है। उन्होंने दावा किया कि यदि कोई ठिकाना फिल्म की कहानी ध्यान से देखे तो उसे Avatar की कहानी से कई समानताएं दिखाई देंगी। हालांकि उन्होंने यह भी नहीं कहा कि उनके पास इस बात का कोई आधिकारिक प्रमाण है बल्कि उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत राय और कहानी की समानता के आधार पर रखा।

    राजीव ठाकुर के अनुसार ठिकाना की कहानी में एक पुलिस अधिकारी अपराधियों के बीच अपनी पहचान छिपाकर पहुंचता है। वहां वह उस समुदाय का विश्वास जीतता है और उनके साथ भावनात्मक रूप से जुड़ जाता है। बाद में जब उसी समुदाय पर हमला होने की स्थिति बनती है तो वह उनके पक्ष में खड़ा होकर संघर्ष करता है। उनका कहना है कि Avatar में भी मुख्य किरदार दूसरी दुनिया में जाकर वहां के लोगों के साथ जुड़ता है और अंत में उन्हीं की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ता है। इसी आधार पर उन्होंने दोनों फिल्मों के कथानक में समानता होने का दावा किया।

    हालांकि फिल्म विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी दो फिल्मों में कुछ कथानक या पात्रों की समानता मिल जाना यह साबित नहीं करता कि एक फिल्म दूसरी की कॉपी है। साहित्य और सिनेमा में नायक का किसी नए समाज में जाना वहां के लोगों का विश्वास जीतना और अंत में उनके लिए संघर्ष करना जैसी संरचनाएं लंबे समय से अलग अलग कहानियों में इस्तेमाल होती रही हैं। इसलिए केवल कहानी के कुछ हिस्सों के आधार पर कॉपी का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जा सकता।

    जेम्स कैमरून के निर्देशन में बनी Avatar वर्ष 2009 में रिलीज हुई थी और यह दुनिया की सबसे सफल फिल्मों में गिनी जाती है। फिल्म ने वैश्विक बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड कमाई की और आधुनिक विजुअल इफेक्ट्स के नए मानक स्थापित किए। वहीं ठिकाना अपने समय की चर्चित हिंदी फिल्मों में शामिल रही थी लेकिन दोनों फिल्मों के बीच किसी आधिकारिक स्तर पर कहानी की समानता या कॉपीराइट विवाद कभी सामने नहीं आया।

    फिलहाल राजीव ठाकुर का बयान चर्चा का विषय बना हुआ है लेकिन इसे तथ्य के बजाय एक व्यक्तिगत दावा माना जा रहा है। जब तक किसी आधिकारिक पक्ष या कानूनी दस्तावेज के जरिए इसकी पुष्टि नहीं होती तब तक यह कहना सही नहीं होगा कि Avatar की कहानी वास्तव में भारतीय फिल्म से ली गई थी। फिर भी इस बयान ने एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि प्रेरणा और कॉपी के बीच की सीमा आखिर कहां तय होती है।

  • अमजद खान की इंडस्ट्री में सोच को लेकर बयान चर्चा में, शादाब ने कहा- छोटे-बड़े सभी के शोषण के खिलाफ थे अमजद खान, आज वैसा प्रभावशाली कोई नहीं

    अमजद खान की इंडस्ट्री में सोच को लेकर बयान चर्चा में, शादाब ने कहा- छोटे-बड़े सभी के शोषण के खिलाफ थे अमजद खान, आज वैसा प्रभावशाली कोई नहीं

    नई दिल्ली। अभिनेता अमजद खान को लेकर दिए गए एक बयान ने फिल्म इंडस्ट्री की पुरानी कार्यशैली और व्यवहार पर फिर से चर्चा छेड़ दी है। शादाब ने कहा कि अमजद खान का मानना था कि इंडस्ट्री में सिर्फ एक्ट्रेसेस ही नहीं, बल्कि छोटे डायरेक्टर, बड़े एक्टर्स और दिहाड़ी मजदूर तक का कई तरह से शोषण होता था।

    उन्होंने बताया कि अमजद खान इस “ऊंच-नीच” वाली मानसिकता के खिलाफ थे और हमेशा कमजोर माने जाने वाले लोगों के अधिकारों के लिए आवाज उठाते थे। शादाब के अनुसार, अमजद खान का प्रभाव इतना मजबूत था कि उनकी बातों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था।

    शादाब ने आगे कहा कि अमजद खान अपने समय में एक ऐसे शख्स थे जिनकी साख और व्यक्तित्व के कारण लोग उनकी बात सुनने को मजबूर होते थे। उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर की फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा प्रभावशाली और सिद्धांतों पर अडिग व्यक्ति शायद ही देखने को मिलता है। 

  • ‘धुरंधर’ को लेकर कमल जैन ने की तारीफ बोले यह फिल्म दर्शकों को खींचने वाला सिनेमाई अनुभव

    ‘धुरंधर’ को लेकर कमल जैन ने की तारीफ बोले यह फिल्म दर्शकों को खींचने वाला सिनेमाई अनुभव


    फिल्म ‘मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी’ के निर्माता कमल जैन ने अपनी नई फिल्म ‘धुरंधर’ को लेकर बेहद सकारात्मक राय व्यक्त की है। उनके अनुसार ‘धुरंधर’ केवल एक फिल्म नहीं बल्कि एक ऐसा सिनेमाई अनुभव है जो दर्शकों को न सिर्फ जोड़ता है बल्कि उन्हें पूरी तरह से अपनी कहानी में खींच लेता है। उन्होंने इसे एक ऐसा प्रोजेक्ट बताया है जो दर्शकों के देखने के नजरिए को बदलने की क्षमता रखता है।

    कमल जैन का मानना है कि असली सफलता सिर्फ एक अच्छी कहानी से नहीं आती, बल्कि उसमें मौजूद उस खास जादू से आती है जो दर्शकों को बांधकर रखता है। उन्होंने कहा कि ‘मैजिक ही असल में बिकता है’ और यही वह तत्व है जो किसी फिल्म को सामान्य से अलग बनाता है। उनके अनुसार ‘धुरंधर’ में वही दुर्लभ जादू मौजूद है, जिसे हमने पहले भी ‘दीवार’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘भाग मिल्खा भाग’, ‘एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’, ‘विकी डोनर’ और ‘संजू’ जैसी फिल्मों में देखा है।

    उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि इस तरह के जादू के लिए जरूरी है कि फिल्म के क्रिएटर्स की सोच और इरादे मजबूत हों। जब प्रोड्यूसर की व्यावसायिक दृष्टि और निर्देशक की रचनात्मक सोच एक साथ मिलकर काम करती हैं, तब एक बेहतरीन सिनेमाई अनुभव तैयार होता है। ‘धुरंधर’ इसी तरह की मजबूत सिनर्जी का उदाहरण है, जहां कहानी, निर्देशन और प्रस्तुति एक दूसरे के साथ तालमेल बनाते हैं।

    कमल जैन ने यह भी कहा कि आज के दौर में जब दुनिया पूरी तरह से कनेक्टेड है, तब फिल्में सिर्फ दर्शकों तक पहुंचती नहीं बल्कि उन्हें सिनेमाघरों तक खींचने की क्षमता भी रखती हैं। ‘धुरंधर’ भी इसी तरह का प्रभाव छोड़ने में सक्षम दिखाई देती है, जो दर्शकों को थिएटर तक आकर्षित करने का दम रखती है।

    उन्होंने फिल्म की टीम की भी सराहना की और कहा कि इसमें मेकर्स की स्पष्टता और मजबूत सोच साफ दिखाई देती है। आदित्य की लेखनी, निर्देशन, संगीत और कलाकारों का प्रदर्शन कहानी को और गहराई प्रदान करता है। साथ ही ज्योति देशपांडे की मजबूत मार्केटिंग और वितरण रणनीति ने इसे एक बड़े सिनेमाई प्रोजेक्ट में बदल दिया है।

    कमल जैन के अनुसार जब कंटेंट खुद बोलने लगता है और दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन जाता है, तब वह केवल एक फिल्म नहीं रहता बल्कि एक प्रभावशाली अनुभव बन जाता है। यही ‘धुरंधर’ की खासियत है, जो कहानी कहने की कला को एक नई ऊंचाई पर ले जाती है।

     कमल जैन की राय के अनुसार ‘धुरंधर’ एक ऐसी फिल्म है जो सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि दर्शकों के दिल और दिमाग दोनों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। यह फिल्म उस स्तर पर खड़ी दिखाई देती है जहां कला, कहानी और प्रस्तुति का संगम एक यादगार अनुभव तैयार करता है