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  • अमजद खान की इंडस्ट्री में सोच को लेकर बयान चर्चा में, शादाब ने कहा- छोटे-बड़े सभी के शोषण के खिलाफ थे अमजद खान, आज वैसा प्रभावशाली कोई नहीं

    अमजद खान की इंडस्ट्री में सोच को लेकर बयान चर्चा में, शादाब ने कहा- छोटे-बड़े सभी के शोषण के खिलाफ थे अमजद खान, आज वैसा प्रभावशाली कोई नहीं

    नई दिल्ली। अभिनेता अमजद खान को लेकर दिए गए एक बयान ने फिल्म इंडस्ट्री की पुरानी कार्यशैली और व्यवहार पर फिर से चर्चा छेड़ दी है। शादाब ने कहा कि अमजद खान का मानना था कि इंडस्ट्री में सिर्फ एक्ट्रेसेस ही नहीं, बल्कि छोटे डायरेक्टर, बड़े एक्टर्स और दिहाड़ी मजदूर तक का कई तरह से शोषण होता था।

    उन्होंने बताया कि अमजद खान इस “ऊंच-नीच” वाली मानसिकता के खिलाफ थे और हमेशा कमजोर माने जाने वाले लोगों के अधिकारों के लिए आवाज उठाते थे। शादाब के अनुसार, अमजद खान का प्रभाव इतना मजबूत था कि उनकी बातों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था।

    शादाब ने आगे कहा कि अमजद खान अपने समय में एक ऐसे शख्स थे जिनकी साख और व्यक्तित्व के कारण लोग उनकी बात सुनने को मजबूर होते थे। उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर की फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा प्रभावशाली और सिद्धांतों पर अडिग व्यक्ति शायद ही देखने को मिलता है। 

  • ‘धुरंधर’ को लेकर कमल जैन ने की तारीफ बोले यह फिल्म दर्शकों को खींचने वाला सिनेमाई अनुभव

    ‘धुरंधर’ को लेकर कमल जैन ने की तारीफ बोले यह फिल्म दर्शकों को खींचने वाला सिनेमाई अनुभव


    फिल्म ‘मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी’ के निर्माता कमल जैन ने अपनी नई फिल्म ‘धुरंधर’ को लेकर बेहद सकारात्मक राय व्यक्त की है। उनके अनुसार ‘धुरंधर’ केवल एक फिल्म नहीं बल्कि एक ऐसा सिनेमाई अनुभव है जो दर्शकों को न सिर्फ जोड़ता है बल्कि उन्हें पूरी तरह से अपनी कहानी में खींच लेता है। उन्होंने इसे एक ऐसा प्रोजेक्ट बताया है जो दर्शकों के देखने के नजरिए को बदलने की क्षमता रखता है।

    कमल जैन का मानना है कि असली सफलता सिर्फ एक अच्छी कहानी से नहीं आती, बल्कि उसमें मौजूद उस खास जादू से आती है जो दर्शकों को बांधकर रखता है। उन्होंने कहा कि ‘मैजिक ही असल में बिकता है’ और यही वह तत्व है जो किसी फिल्म को सामान्य से अलग बनाता है। उनके अनुसार ‘धुरंधर’ में वही दुर्लभ जादू मौजूद है, जिसे हमने पहले भी ‘दीवार’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘भाग मिल्खा भाग’, ‘एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’, ‘विकी डोनर’ और ‘संजू’ जैसी फिल्मों में देखा है।

    उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि इस तरह के जादू के लिए जरूरी है कि फिल्म के क्रिएटर्स की सोच और इरादे मजबूत हों। जब प्रोड्यूसर की व्यावसायिक दृष्टि और निर्देशक की रचनात्मक सोच एक साथ मिलकर काम करती हैं, तब एक बेहतरीन सिनेमाई अनुभव तैयार होता है। ‘धुरंधर’ इसी तरह की मजबूत सिनर्जी का उदाहरण है, जहां कहानी, निर्देशन और प्रस्तुति एक दूसरे के साथ तालमेल बनाते हैं।

    कमल जैन ने यह भी कहा कि आज के दौर में जब दुनिया पूरी तरह से कनेक्टेड है, तब फिल्में सिर्फ दर्शकों तक पहुंचती नहीं बल्कि उन्हें सिनेमाघरों तक खींचने की क्षमता भी रखती हैं। ‘धुरंधर’ भी इसी तरह का प्रभाव छोड़ने में सक्षम दिखाई देती है, जो दर्शकों को थिएटर तक आकर्षित करने का दम रखती है।

    उन्होंने फिल्म की टीम की भी सराहना की और कहा कि इसमें मेकर्स की स्पष्टता और मजबूत सोच साफ दिखाई देती है। आदित्य की लेखनी, निर्देशन, संगीत और कलाकारों का प्रदर्शन कहानी को और गहराई प्रदान करता है। साथ ही ज्योति देशपांडे की मजबूत मार्केटिंग और वितरण रणनीति ने इसे एक बड़े सिनेमाई प्रोजेक्ट में बदल दिया है।

    कमल जैन के अनुसार जब कंटेंट खुद बोलने लगता है और दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन जाता है, तब वह केवल एक फिल्म नहीं रहता बल्कि एक प्रभावशाली अनुभव बन जाता है। यही ‘धुरंधर’ की खासियत है, जो कहानी कहने की कला को एक नई ऊंचाई पर ले जाती है।

     कमल जैन की राय के अनुसार ‘धुरंधर’ एक ऐसी फिल्म है जो सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि दर्शकों के दिल और दिमाग दोनों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। यह फिल्म उस स्तर पर खड़ी दिखाई देती है जहां कला, कहानी और प्रस्तुति का संगम एक यादगार अनुभव तैयार करता है