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  • 'गदर' के 25 वर्ष पूरे होने पर अमीषा पटेल का बड़ा खुलासा, सनी देओल संग उम्र के फासले के कारण फिल्म न करने की मिली थी सलाह

    'गदर' के 25 वर्ष पूरे होने पर अमीषा पटेल का बड़ा खुलासा, सनी देओल संग उम्र के फासले के कारण फिल्म न करने की मिली थी सलाह

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित और सफल फिल्मों में शुमार ‘गदर: एक प्रेम कथा’ की रिलीज को हाल ही में 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर फिल्म की मुख्य अभिनेत्री अमीषा पटेल ने अपने शुरुआती करियर और फिल्म की कास्टिंग से जुड़े कई अनसुने व चौंकाने वाले पहलुओं को साझा किया है। एक साक्षात्कार के दौरान अपने बेबाक अंदाज के लिए जानी जाने वाली अभिनेत्री ने बताया कि जब उन्होंने इस प्रोजेक्ट को साइन किया था, तब फिल्म उद्योग और उनके आसपास के कई लोगों ने उन्हें इस फिल्म का हिस्सा न बनने की सख्त सलाह दी थी। विरोध की सबसे बड़ी वजह उनके और अभिनेता सनी देओल के बीच उम्र का एक लंबा फासला था, जिसे उस दौर के सिनेमाई पैमानों पर जोखिम भरा माना जा रहा था।

    फिल्म के निर्माण के समय की परिस्थितियों को याद करते हुए अभिनेत्री ने बताया कि उस वक्त उनकी उम्र महज 26 वर्ष थी, जबकि स्थापित सुपरस्टार सनी देओल 43 वर्ष के थे। इस बड़े आयु अंतर को लेकर केवल बाहरी लोग ही नहीं, बल्कि खुद वे भी शुरुआत में थोड़ी आशंकित थीं। एक नवागंतुक कलाकार के तौर पर उनके मन में यह स्वाभाविक सवाल था कि क्या दर्शकों को पर्दे पर यह जोड़ी स्वीकार्य होगी या नहीं। हालांकि, फिल्म की पटकथा और उसके गहरे विषय ने बाद में इस उम्र के फासले को पूरी तरह से पर्दे पर न्यायसंगत साबित किया, जिसने बाद में बॉक्स ऑफिस के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए।

    सिनेमाई संरचना पर बात करते हुए अभिनेत्री ने कहा कि भारतीय फिल्म उद्योग को उम्र के अंतर वाले किरदारों के रोमांस को पर्दे पर दिखाना जारी रखना चाहिए, बशर्ते कहानी में उसकी कोई ठोस और तार्किक वजह मौजूद हो। आजकल दर्शकों द्वारा कुछ फिल्मों को नापसंद किए जाने का एक मुख्य कारण यह भी है कि कहानियों में बिना किसी मजबूत संदर्भ के ऐसी कास्टिंग थोप दी जाती है। ‘गदर’ के मामले में यह अंतर कागजी तौर पर भले ही अजीब लग रहा था, लेकिन जब फिल्म परदे पर उतरी तो किरदारों के सामाजिक और पारिवारिक परिवेश ने इस अंतर को एक खूबसूरत मोड़ दे दिया।

    कहानी के दृष्टिकोण से यह फासला बेहद सटीक बैठता था क्योंकि फिल्म एक ऐसे सीधे-साधे और कम पढ़े-लिखे स्थानीय युवक तारा सिंह की कहानी थी, जिसे एक कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ने वाली संभ्रांत परिवार की युवती सकीना से प्रेम हो जाता है। तारा सिंह के लिए सकीना एक ऐसी राजकुमारी की तरह थी, जिसे पाना सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद कठिन था। दोनों किरदारों के बीच धर्म, शिक्षा और जीवनशैली का एक बड़ा अंतर था, जिसे इस आयु वर्ग के अंतर ने और अधिक गहराई प्रदान की। यही कारण था कि दर्शकों ने दोनों के बीच के भावनात्मक जुड़ाव को बहुत शिद्दत से महसूस किया।

    मध्य प्रदेश। इस ऐतिहासिक प्रेम कहानी की सबसे बड़ी खूबसूरती यही थी कि दोनों किरदारों ने एक-दूसरे के परिवेश को पूरी तरह से आत्मसात कर लिया था। जहां सकीना ने भारतीय संस्कृति और तारा सिंह के परिवार को ससम्मान अपनाया, वहीं तारा सिंह भी अपने परिवार की खुशी के लिए सीमा पार जाने को सहर्ष तैयार हो गया। वह केवल उसी परिस्थिति में उग्र रूप धारण करता है जब उसकी व्यक्तिगत और राष्ट्रीय पहचान पर प्रहार किया जाता है। अभिनेत्री के इन ताजा बयानों ने एक बार फिर 25 वर्ष पुरानी यादों को ताजा कर दिया है और यह साबित किया है कि एक मजबूत पटकथा किसी भी रूढ़िवादी सिनेमाई मानदंड को बदलने की पूरी क्षमता रखती है।