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  • दीपिका पादुकोण मैटरनिटी लीव से पहले नाइट शिफ्ट में भी कर रहीं काम…

    दीपिका पादुकोण मैटरनिटी लीव से पहले नाइट शिफ्ट में भी कर रहीं काम…


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा जगत की शीर्ष अभिनेत्रियों में शुमार दीपिका पादुकोण इन दिनों अपनी आगामी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘राका’ के फिल्मांकन में पूरी गंभीरता के साथ व्यस्त हैं। वर्तमान में सात महीने की गर्भवती होने के बावजूद वह अपनी मैटरनिटी लीव पर जाने से पहले फिल्म के महत्वपूर्ण हिस्सों की शूटिंग को समय पर संपन्न करने के लिए दिन-रात काम कर रही हैं। फिल्म निर्माण से जुड़े सूत्रों के अनुसार, वह न केवल देर रात के शेड्यूल में सक्रियता से भाग ले रही हैं, बल्कि फिल्म की आवश्यकता के अनुसार कठिन एक्शन दृश्यों को भी स्वयं फिल्मा रही हैं। शारीरिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण इस समय में उनका यह व्यावसायिक समर्पण मनोरंजन जगत में व्यापक स्तर पर प्रशंसा बटोर रहा है।

    मीडिया रिपोर्ट्स और सेट से जुड़े क्रू सदस्यों के अनुसार, दीपिका पादुकोण बिना किसी अतिरिक्त विश्राम के लगातार काम कर रही हैं ताकि परियोजना अपने निर्धारित समय पर पूरी हो सके। हाल ही में उद्योग जगत में उनकी आठ घंटे की कार्य अवधि की मांग को लेकर काफी चर्चाएं और विवाद सामने आए थे, किंतु वर्तमान में उनका यह कठोर परिश्रम उन सभी कयासों को खारिज करता है। सेट पर मौजूद तकनीकी और प्रशासनिक दल के सदस्यों का कहना है कि इस स्थिति में भी दीपिका को पूरी ऊर्जा के साथ परफॉर्म करते देखना वहां उपस्थित प्रत्येक कर्मचारी और सह-कलाकार के लिए अत्यंत प्रेरणादायक साबित हो रहा है। इसके साथ ही वह अपनी डेढ़ वर्षीय बेटी दुआ की देखभाल और पारिवारिक जिम्मेदारियों का भी पूरी सहजता से निर्वहन कर रही हैं।

    उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व फिल्म उद्योग में काम के घंटों को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ गई थी, जब मीडिया में यह अपुष्ट खबरें आईं कि आठ घंटे की शिफ्ट की मांग के कारण दीपिका पादुकोण को संदीप रेड्डी वांगा की आगामी फिल्म ‘स्पिरिट’ और नाग अश्विन की ‘कल्कि 2’ जैसी बड़ी परियोजनाओं से अलग कर दिया गया था। उस समय फिल्म निर्माताओं के एक वर्ग ने इस मांग पर असंतोष व्यक्त किया था, जबकि दूसरे वर्ग ने कलाकारों के स्वास्थ्य और अधिकारों के पक्ष में इसका पुरजोर समर्थन किया था। हालांकि, वर्तमान फिल्म के सेट पर उनका देर रात तक काम करना यह स्पष्ट करता है कि वह काम की गुणवत्ता और अपनी प्रतिबद्धता से कोई समझौता नहीं कर रही हैं।

    यदि फिल्म ‘राका’ की बात करें, तो इसका निर्देशन भारतीय सिनेमा के सफल निर्देशकों में गिने जाने वाले एटली कर रहे हैं। यह एक उच्च बजट वाली साइंस-फिक्शन थ्रिलर फिल्म होगी, जिसमें दर्शकों को आधुनिक तकनीक और अभूतपूर्व एक्शन दृश्यों का संयोजन देखने को मिलेगा। इस फिल्म के माध्यम से पहली बार तेलुगु सुपरस्टार अल्लू अर्जुन और दीपिका पादुकोण की जोड़ी बड़े पर्दे पर एक साथ मुख्य भूमिकाओं में नजर आने वाली है। इन दोनों शीर्ष कलाकारों के अतिरिक्त फिल्म की मुख्य स्टारकास्ट में रश्मिका मंदाना, जाह्नवी कपूर और मृणाल ठाकुर जैसी लोकप्रिय अभिनेत्रियां भी महत्वपूर्ण किरदारों में दिखाई देंगी।

    प्रशासनिक और वितरण सूत्रों के अनुसार, इस भव्य सिनेमाई परियोजना को अगले वर्ष तक देश भर के सिनेमाघरों में बड़े स्तर पर प्रदर्शित करने की योजना बनाई गई है। ‘राका’ के अतिरिक्त दीपिका पादुकोण इस वर्ष शाहरुख खान के अभिनय से सजी फिल्म ‘किंग’ में भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका में दिखाई देने वाली हैं, जो इसी साल के अंत तक बड़े पर्दे पर दस्तक दे सकती है। मातृत्व के इस पड़ाव पर भी एक के बाद एक बड़ी व्यावसायिक फिल्मों की शूटिंग को सफलतापूर्वक पूरा करना दीपिका पादुकोण की मजबूत ब्रांड वैल्यू और पेशेवर दृष्टिकोण को प्रमाणित करता है।

  • बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई के बाद भी सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार हारे थे सलमान खान, साल 1995 के 40वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में नाना पाटेकर और माधुरी दीक्षित ने मारी थी बाजी

    बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई के बाद भी सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार हारे थे सलमान खान, साल 1995 के 40वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में नाना पाटेकर और माधुरी दीक्षित ने मारी थी बाजी


    नई दिल्ली।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में साल 1994 एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया था। इसी वर्ष रिलीज हुई पारिवारिक ड्रामा फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के तमाम पुराने कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए थे। सूरज बडजात्या के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने उस दौर में लगभग 128 करोड़ रुपये का अभूतपूर्व कलेक्शन कर भारतीय फिल्म उद्योग को एक नई दिशा दिखाई थी। व्यावसायिक रूप से इस दशक की सबसे सफल फिल्म होने के बावजूद, जब सम्मान और पुरस्कारों की बात आई, तो साल 1995 में आयोजित 40वें फिल्मफेयर पुरस्कार समारोह में इस फिल्म को कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ा था। कुल 14 श्रेणियों में नामांकित होने के बाद भी यह फिल्म केवल 5 श्रेणियों में ही जीत दर्ज करने में सफल हो सकी थी।

    इस पुरस्कार समारोह का सबसे बड़ा उलटफेर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी में देखने को मिला था। फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ में प्रेम के किरदार से दर्शकों का दिल जीतने वाले सलमान खान को उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जाने वाला नामांकन मिला था। सलमान खान के साथ इस श्रेणी में ‘अंदाज अपना अपना’ के लिए आमिर खान, ‘ये दिल्लगी’ के लिए अक्षय कुमार और ‘1942: ए लव स्टोरी’ के लिए अनिल कपूर जैसे दिग्गज कलाकार भी शामिल थे। इन सभी स्थापित सितारों और मुख्यधारा के चहेते अभिनेताओं को पछाड़ते हुए नाना पाटेकर ने फिल्म ‘क्रांतिवीर’ में अपने दमदार और संजीदा अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का ब्लैक लेडी पुरस्कार अपने नाम किया था। नाना पाटेकर के संवादों और अभिनय की तीव्रता उस वर्ष अन्य सभी रोमांटिक और कल्ट किरदारों पर भारी पड़ी थी।

    सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री की श्रेणी में भी मुकाबला बेहद दिलचस्प और कड़ा था। इस श्रेणी में उस दौर की सबसे बड़ी अभिनेत्रियों के बीच सीधी टक्कर थी। नामांकन सूची में ‘लाडला’ फिल्म के लिए श्रीदेवी, ‘ये दिल्लगी’ के लिए काजोल, ‘अंजाम’ के लिए माधुरी दीक्षित और ‘1942: ए लव स्टोरी’ के लिए मनीषा कोइराला जैसी शीर्ष अभिनेत्रियां शामिल थीं। उस समय की सबसे बड़ी स्टार श्रीदेवी को कड़ी टक्कर देते हुए माधुरी दीक्षित ने बाजी मारी थी। फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ में निशा के चुलबुले और भावुक किरदार को जीवंत करने वाली माधुरी दीक्षित को इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार से नवाजा गया था, जिसने उनके स्टारडम को एक पायदान और ऊपर पहुंचा दिया था।

    भले ही सलमान खान इस समारोह में व्यक्तिगत पुरस्कार से चूक गए हों, लेकिन फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ के लिए सूरज बडजात्या ने सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का प्रतिष्ठित पुरस्कार अपने नाम किया था। इसके साथ ही इस फिल्म को साल की सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार भी दिया गया था। दूसरी ओर, इस पुरस्कार समारोह में सबसे अधिक श्रेणियों में परचम लहराने वाली फिल्म ‘1942: ए लव स्टोरी’ रही थी। इस फिल्म ने अलग-अलग तकनीकी और मुख्य श्रेणियों में रिकॉर्ड 13 नामांकनों में से 9 पुरस्कारों पर अपना कब्जा जमाया था। अभिनेता जैकी श्रॉफ ने इसी फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार जीता था, जबकि महान संगीतकार आर. डी. बर्मन को उनके निधन के बाद इस फिल्म के मधुर संगीत के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

    इसके अतिरिक्त, फिल्म ‘क्रांतिवीर’ के लिए डिंपल कपाड़िया को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। हास्य भूमिकाओं की श्रेणी में फिल्म ‘राजा बाबू’ के लिए शक्ति कपूर को सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता का पुरस्कार मिला, जबकि शाहरुख़ खान को फिल्म ‘अंजाम’ में उनके नकारात्मक किरदार के लिए सर्वश्रेष्ठ विलेन का पुरस्कार दिया गया था। मशहूर गीतकार जावेद अख्तर को सर्वश्रेष्ठ गीतकार के सम्मान से नवाजा गया था। कुल मिलाकर, साल 1995 का यह फिल्मफेयर समारोह स्टारडम और विशुद्ध अभिनय प्रतिभा के बीच संतुलन का एक ऐसा गवाह बना, जिसकी चर्चा आज तीन दशकों के बाद भी सिनेमाई गलियारों में बेहद दिलचस्पी के साथ की जाती है।