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  • भाजपा की बड़ी जीत से बढ़ सकती है एकनाथ शिंदे की टेंशनविपक्ष और सहयोगियों पर होगा असर

    भाजपा की बड़ी जीत से बढ़ सकती है एकनाथ शिंदे की टेंशनविपक्ष और सहयोगियों पर होगा असर


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के स्थानिक निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी भा,ज,पा,शिवसेना और एनसीपी अजित पवार गुट के गठबंधन महायुति ने भारी जीत दर्ज की है। भाजपा ने 129 सीटों के साथ सबसे ज्यादा अध्यक्ष पद जीतेजबकि शिवसेना ने 51 और एनसीपी अजित पवार ने 35 अध्यक्ष पदों पर जीत हासिल की। कुल 288 निकायों में से महायुति ने 215 निकायों में जीत हासिल कीजिससे भाजपा का इस चुनाव में वर्चस्व साफ तौर पर दिखा।

    इन परिणामों के बाद भाजपा के लिए यह एक अहम मोड़ साबित हो सकता है। भाजपा ने इस चुनाव में अकेले प्रचार कियाजिससे पार्टी को यह जानने का मौका मिला कि वह अपनी शत-प्रतिशत भाजपा के लक्ष्य की दिशा में कितनी दूर तक बढ़ रही है। पार्टी के नेताओं का मानना है कि इन नतीजों से कार्यकर्ताओं का आत्मविश्वास भी बढ़ेगाखासकर 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनाव में।

    हालांकिइस जीत के साथ भाजपा के सहयोगी दलों के लिए चिंता भी बढ़ सकती है। भाजपा की बेजोड़ जीत यह संकेत देती है कि पार्टी अब अपनी राजनीतिक राह पर अकेले बढ़ सकती है और इसे अपने सहयोगियों की कम जरूरत हो सकती है। इस परिणाम के बाद कुछ समय पहले से ही कमजोर हो रही महाविकास अघाड़ी गठबंधन की स्थिति और भी अस्थिर हो सकती हैखासकर तब जब भाजपा अपने सहयोगियों के साथ सीटों के बंटवारे पर विचार करेगी।

    इसी तरहविपक्ष के लिए भी यह चुनाव परिणाम चिंता का कारण बन सकते हैं। विधानसभा चुनाव में पहले ही झटके झेल चुका विपक्ष इस बार भी पिछड़ता दिख रहा हैखासकर जब बीएमसी बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव नजदीक हैं। शिवसेना यूबीटी और एनसीपी एसपी दोनों ही अपनी सीटों के दोहरे आंकड़े तक नहीं पहुंच पाए हैं। यह परिणाम विपक्ष के लिए और भी समस्याएं पैदा कर सकते हैंक्योंकि फूट के कारण पहले से ही कमजोर पड़ चुकी पार्टियों को अब इस पर काबू पाना और भी मुश्किल हो सकता है। उद्धव ठाकरे गुट को लेकर भी असमंजस बना हुआ हैक्योंकि शिवसेना यूबीटी की स्थिति पहले से ही कमजोर हो चुकी है

    शिवसेना के 3 दशकों के प्रभाव को बनाए रखना अब चुनौतीपूर्ण हो सकता हैखासकर जब भाजपा की जीत से राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस जीत को संगठन और सरकार के सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने इस चुनाव में सकारात्मक विकास एजेंडे पर प्रचार किया और कभी किसी राजनीतिक नेता या पार्टी की आलोचना नहीं की। फडणवीस का मानना है कि यह पहली बार है जब पार्टी ने शत-प्रतिशत सकारात्मक वोट मांगे थेऔर उन्हें जनता का शत-प्रतिशत समर्थन मिला है। इस चुनाव परिणाम के बाद भाजपा अब राज्य की राजनीति में और भी दबदबा बना सकती हैलेकिन इसका असर महाविकास अघाड़ी गठबंधन और विपक्षी दलों पर भी होगा।

  • भाजपा को महाराष्ट्र में ऐतिहासिक सफलता40 साल बाद कम्पटी नगरपालिका में जीती पहली बार सत्ता

    भाजपा को महाराष्ट्र में ऐतिहासिक सफलता40 साल बाद कम्पटी नगरपालिका में जीती पहली बार सत्ता


    नागपुर । महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को निकाय चुनावों में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। कुल 288 जिलों के निकायों में से 215 में महायुति ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की हैजिसमें भाजपा ने 129 सीटों पर जीत के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। लेकिन भाजपा को सबसे बड़ी और ऐतिहासिक जीत कम्पटी नगरपालिका परिषद में मिलीजहां 40 साल बाद पहली बार उसे सत्ता हासिल हुई है। कम्पटी नगरपालिका परिषद में भाजपा के कैंडिडेट अजय अग्रवाल ने 103 वोटों के मामूली अंतर से जीत दर्ज की। हालांकिकांग्रेस के कैंडिडेट शाकूर नागानी ने चुनाव परिणाम में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि वह पूरे दिन चुनाव में आगे चल रहे थेलेकिन आखिरी समय में गड़बड़ी कर के अजय अग्रवाल को जिताया गया।

    यह चुनाव परिणाम नागपुर जिले में काफी चर्चा में रहाखासकर इस सीट के लिए भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी के कारण। एक और दिलचस्प बात यह रही कि बहुजन रिपब्लिकन एकता मंच की नेता सुलेखा कुंभारे ने इस सीट पर अजय कदम को कैंडिडेट बनाया था। हालांकिभाजपा ने इस बार उनका समर्थन नहीं कियाक्योंकि पार्टी को इस बार महाराष्ट्र में भगवा लहर की उम्मीद थी। कुंभारे ने यह भी दावा किया कि नितिन गडकरी उन्हें अपनी बहन मानते रहे हैंलेकिन भाजपा ने उनका समर्थन नहीं किया।नागपुर की इस महत्वपूर्ण नगरपालिका परिषद में भाजपा की 40 साल बाद जीत एक बड़ी राजनीतिक घटना मानी जा रही है।

    कांग्रेस के भीतर भी टिकट बंटवारे को लेकर विवाद उभरेऔर यह सवाल उठने लगा कि भाजपा अब बीएमसी में जीत की कोशिश कर सकती है।
    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का नागपुर संसदीय क्षेत्र होने के बावजूद इस नगरपालिका परिषद में भाजपा की जीत का यह लंबे समय से इंतजार थाजो अब समाप्त हुआ। कांग्रेस ने भी अपनी स्थिति को लेकर सवाल उठाएऔर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने यह कहा कि बीएमसी में कांग्रेस का कोई वजूद नहीं हैक्योंकि पिछले 30 सालों से वे ही लगातार जीत रहे हैं। इन नतीजों के बादविपक्षी गठबंधन महाअघाड़ी में भी विवाद शुरू हो गया हैजो भविष्य में महाराष्ट्र की राजनीति में और भी हलचल पैदा कर सकता है।