Tag: Civic Issues

  • ₹17 करोड़ खर्च फिर भी सड़क में भेदभाव का आरोप, HIG-MIG में सीमेंटेड और EWS-LIG में डामर रोड पर रहवासी नाराज

    ₹17 करोड़ खर्च फिर भी सड़क में भेदभाव का आरोप, HIG-MIG में सीमेंटेड और EWS-LIG में डामर रोड पर रहवासी नाराज


    भोपाल । भोपाल के बाग मुगालिया एक्सटेंशन कॉलोनी में 17 करोड़ रुपए की लागत से बन रही सड़क को लेकर गुरुवार सुबह रहवासियों ने प्रदर्शन किया। कॉलोनी में सड़क निर्माण के दौरान कहीं सीमेंटेड तो कहीं डामर की सड़क बनाए जाने को लेकर लोगों में नाराजगी है। रहवासियों का कहना है कि जब पूरी कॉलोनी के लिए सड़क निर्माण का बड़ा टेंडर हुआ है तो अलग अलग हिस्सों में सड़क की गुणवत्ता और निर्माण का तरीका अलग क्यों रखा जा रहा है। लोगों ने मांग की है कि पूरी कॉलोनी में सीमेंटेड सड़क बनाई जाए ताकि सड़क लंबे समय तक टिकाऊ रहे और बार बार उखड़ने की समस्या न हो।

    प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में रहवासी हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर सड़क पर पहुंचे और नारेबाजी की। बाग मुगालिया एक्सटेंशन कॉलोनी विकास समिति के अध्यक्ष उमाशंकर तिवारी के मुताबिक करीब 85 एकड़ में फैली इस कॉलोनी में 1206 से अधिक मकान हैं। कॉलोनी में सड़क निर्माण के लिए 29 अप्रैल 2026 को करीब 17 करोड़ रुपए का टेंडर हुआ था। रहवासियों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि इस राशि से कॉलोनी की सड़क व्यवस्था बेहतर होगी लेकिन निर्माण शुरू होने के बाद सड़क के अलग अलग हिस्सों में अलग तरीके से काम होता दिखाई दे रहा है।

    रहवासियों के अनुसार कॉलोनी के HIG और MIG आवासों वाले हिस्से में सीमेंटेड सड़क बनाई जा रही है। लोगों का आरोप है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के आवासों के सामने भी सीमेंटेड सड़क का निर्माण किया गया है। इसके बाद जब EWS और LIG आवासों वाले हिस्से में सड़क निर्माण शुरू हुआ तो वहां डामर की सड़क बनाए जाने की तैयारी शुरू हो गई। इसी बात को लेकर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाते हुए विरोध दर्ज कराया है।

    मामले की जानकारी क्षेत्रवासियों ने मंत्री कृष्णा गौड़ और PWD अधिकारियों तक भी पहुंचाई। रहवासियों ने मांग की कि EWS और LIG क्षेत्र में भी सीमेंटेड सड़क बनाई जाए। उनका कहना है कि छोटे मकानों वाले हिस्से में रहने वाले लोगों को भी उतनी ही मजबूत और टिकाऊ सड़क मिलनी चाहिए जितनी कॉलोनी के अन्य हिस्सों में बनाई जा रही है।

    वहीं PWD अधिकारियों की ओर से रहवासियों को बताया गया कि टेंडर में सीमेंटेड और डामर दोनों तरह की सड़कों का प्रावधान रखा गया है। अधिकारियों के मुताबिक EWS और LIG क्षेत्र में डामर की सड़क ही बनाई जाएगी। उनका कहना है कि यदि रहवासी सीमेंटेड सड़क की मांग पर जोर देते हैं तो इसके लिए अतिरिक्त फंड उपलब्ध नहीं है और ऐसी स्थिति में काम रोकना पड़ सकता है।

    रहवासियों का सवाल इसी बात को लेकर है कि यदि एक ही कॉलोनी में दोनों तरह की सड़क बनाने का प्रावधान था तो निर्माण का आधार क्या तय किया गया है। लोगों का कहना है कि अधिकारियों के आवासों वाले हिस्से में सीमेंटेड सड़क और छोटे आवासों वाले हिस्से में डामर सड़क होने से उन्हें असमानता महसूस हो रही है। उनका यह भी कहना है कि कुछ हिस्सों में छोटे आवासों को छोड़कर करीब 300 मीटर आगे फिर अधिकारियों के आवासों के सामने सीमेंटेड सड़क बनाई जा रही है।

    EWS और LIG-1 तथा LIG-2 क्षेत्र में डामर सड़क का काम शुरू होने के बाद गुरुवार सुबह रहवासी मौके पर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन किया। लोगों ने निर्माण कार्य को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए अधिकारियों से सड़क निर्माण की व्यवस्था पर दोबारा विचार करने की मांग की। रहवासियों ने कहा कि वे सीमेंटेड सड़क की मांग को लेकर अपना विरोध जारी रखेंगे। इसी क्रम में शनिवार को सुंदरकांड का पाठ आयोजित करने की भी बात कही गई है। अब देखना होगा कि PWD और प्रशासन रहवासियों की मांग पर क्या निर्णय लेते हैं और सड़क निर्माण की मौजूदा योजना में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं।

  • इंदौर के वार्डों में खुली समस्याओं की पोल, नेता प्रतिपक्ष ने जोनल अधिकारियों को मौके पर घेरा

    इंदौर के वार्डों में खुली समस्याओं की पोल, नेता प्रतिपक्ष ने जोनल अधिकारियों को मौके पर घेरा


    इंदौर । इंदौर के कई वार्डों में लंबे समय से अलग अलग तरह की समस्याएं बनी हुई हैं। रहवासी अपनी शिकायतों को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचते हैं लेकिन कई मामलों में समय पर समाधान नहीं हो पाता। अब इन समस्याओं की वास्तविक स्थिति जानने और उनके निराकरण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट ने जोन अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत वे खुद उन वार्डों में पहुंच रही हैं जहां समस्याएं अधिक हैं। वहां वार्ड अध्यक्षों और स्थानीय लोगों से चर्चा कर मैदानी स्थिति की जानकारी ली जा रही है। इसके बाद संबंधित जोनल अधिकारियों से मुलाकात कर समस्याओं पर सीधे जवाब मांगा जा रहा है।

    अभियान की शुरुआत जोन 22 से की गई है। यहां नेता प्रतिपक्ष ने जोनल अधिकारी से मुलाकात कर वार्डों में सामने आ रही समस्याओं को लेकर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान ड्रेनेज लाइन पानी बिजली सड़क और नगर निगम की विभिन्न योजनाओं का लाभ नहीं मिलने जैसी शिकायतों को सामने रखा गया। अधिकारियों से यह जानने की कोशिश की गई कि इन समस्याओं का समाधान कब तक किया जाएगा और इसके लिए क्या कार्रवाई की जा रही है।

    सोनिला मिमरोट के अनुसार वार्डों में कई स्थानों पर अनियमितताएं देखने को मिल रही हैं। कुछ जगहों पर लोगों की शिकायतों के बावजूद सुनवाई नहीं होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में केवल कार्यालय में बैठकर शिकायतों की जानकारी लेने के बजाय मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति समझने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से जोन कार्यालयों तक पहुंचने का अभियान शुरू किया गया है।

    जोन 22 के अंतर्गत आने वाले कुछ वार्डों की स्थिति को लेकर भी अधिकारियों के सामने सवाल रखे गए। बताया गया कि इस क्षेत्र में दो वार्ड ऐसे हैं जो पहले ग्रामीण क्षेत्र का हिस्सा रहे हैं और बाद में शहरी क्षेत्र में शामिल हुए। इन इलाकों में अभी भी कई मूलभूत सुविधाओं का अभाव बताया जा रहा है। कुछ स्थानों पर ड्रेनेज लाइन का काम अधूरा है तो कहीं सड़क जैसी जरूरी सुविधाओं को लेकर लोग परेशान हैं। इन समस्याओं को बिंदुवार अधिकारियों के सामने रखा गया और इनके समाधान की समयसीमा को लेकर जवाब मांगा गया।

    नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि जोन अभियान केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। आगे भी अलग अलग वार्डों में जाकर स्थानीय लोगों और वार्ड अध्यक्षों से समस्याओं की जानकारी ली जाएगी। इसके बाद संबंधित जोनल अधिकारियों से सीधे चर्चा कर शिकायतों के निराकरण की स्थिति जानी जाएगी। इस दौरान अधिकारियों से यह भी पूछा जाएगा कि किसी समस्या के समाधान में देरी क्यों हो रही है और उसे दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

    अभियान के जरिए नगर निगम के स्तर पर वार्डों की समस्याओं को सीधे जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। अब जोन 22 के बाद अन्य जोनों में भी इसी तरह का अभियान चलाने की तैयारी है। इससे स्थानीय समस्याओं की वास्तविक स्थिति सामने आने और उनके समाधान को लेकर अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • निगम परिषद की बैठक में गरमाएगा भोपाल का मुद्दा! सड़कें खुदी पड़ीं और सफाई व्यवस्था बदहाल फिर भी चर्चा से बाहर

    निगम परिषद की बैठक में गरमाएगा भोपाल का मुद्दा! सड़कें खुदी पड़ीं और सफाई व्यवस्था बदहाल फिर भी चर्चा से बाहर


    भोपाल । भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक बुधवार 19 अगस्त को ISBT स्थित मीटिंग हॉल में आयोजित होने जा रही है। साल के पहले नियमित परिषद सम्मेलन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। बैठक के एजेंडे में शहर की मौजूदा समस्याओं से जुड़े जनहित के मुद्दे शामिल नहीं होने पर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का कहना है कि राजधानी की सड़कें बारिश के बाद बदहाल हो चुकी हैं कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आ रही है और सफाई व्यवस्था को लेकर भी लोगों की शिकायतें लगातार बनी हुई हैं। इसके बावजूद इन अहम मुद्दों को परिषद की बैठक के एजेंडे में जगह नहीं दी गई है। ऐसे में बैठक के हंगामेदार रहने के आसार जताए जा रहे हैं।

    नगर निगम परिषद की बैठक की शुरुआत पार्षदों के सवाल जवाब से होगी। इसके बाद एजेंडे में शामिल प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। बैठक सुबह 11 बजे शुरू होगी। बताया गया है कि सम्मेलन में नगर निगम की खाली हुई एक बिल्डिंग को किराए पर दिए जाने से जुड़े प्रस्ताव पर भी चर्चा होनी है। विपक्ष का कहना है कि जब शहर के सामने बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई सवाल खड़े हैं तो परिषद की बैठक में इन विषयों पर प्राथमिकता से चर्चा होनी चाहिए।

    बारिश के बाद भोपाल की सड़कों की स्थिति विपक्ष के प्रमुख मुद्दों में शामिल है। राजधानी में कई स्थानों पर सड़कें उखड़ी हुई हैं और कुछ इलाकों में सड़क निर्माण या दूसरे कामों के कारण रास्ते प्रभावित हैं। तेज बारिश के दौरान निचले इलाकों में पानी भरने की समस्या भी सामने आती है। ऐसे में आम लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विपक्ष का सवाल है कि शहर की ऐसी स्थिति के बीच सड़क और जलभराव जैसे मुद्दे परिषद की बैठक में चर्चा का हिस्सा क्यों नहीं बनाए गए।

    सफाई व्यवस्था को लेकर भी विपक्ष नगर निगम को घेरने की तैयारी में है। कई इलाकों में बारिश के बाद कचरा जमा होने और जल निकासी से जुड़ी शिकायतों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि शहर की सफाई और बुनियादी सुविधाएं सीधे तौर पर आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी हैं। ऐसे में परिषद की बैठक में इन विषयों पर पार्षदों को सवाल पूछने और अधिकारियों से जवाब लेने का मौका मिलना चाहिए।

    नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने एजेंडे को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि हर बैठक में शहर सरकार की ओर से जनहित के मुद्दों को पर्याप्त जगह नहीं दी जाती। उन्होंने दावा किया कि पिछली बैठक में भी जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा की मांग की गई थी लेकिन विपक्ष की बात नहीं सुनी गई। अब एक बार फिर शहर की प्रमुख समस्याओं को एजेंडे से बाहर रखने को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं।

    सीनियर पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान ने भी भोपाल की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उनके मुताबिक शहर की कई सड़कें जर्जर हो चुकी हैं और तेज बारिश के बाद राजधानी के बड़े हिस्से में पानी भरने की स्थिति बनी। उनका कहना है कि सफाई व्यवस्था भी कई स्थानों पर ठीक नहीं है। विपक्ष इन सभी मुद्दों को परिषद की बैठक में उठाने की तैयारी में है।

    यह सम्मेलन इस साल का पहला ऐसा परिषद सम्मेलन बताया जा रहा है जिसमें पार्षदों को सवाल जवाब के जरिए शहर से जुड़े मुद्दे उठाने का अवसर मिलेगा। इससे पहले इस साल दो सम्मेलन हुए हैं लेकिन उनमें एक महिला सशक्तिकरण और दूसरा कचरे के नए नियमों से संबंधित था। इन बैठकों में पार्षदों के सवाल जवाब का सामान्य प्रारूप नहीं था।

    अब बुधवार की बैठक में विपक्ष के तेवर और सत्ता पक्ष के जवाब पर सबकी नजर रहेगी। एजेंडे में जनहित के मुद्दों की कमी को लेकर विपक्ष पहले ही अपनी रणनीति स्पष्ट कर चुका है। ऐसे में सड़क जलभराव सफाई और शहर की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल बैठक में जोरदार तरीके से उठने की संभावना है। अगर इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होती है तो निगम परिषद का यह सम्मेलन हंगामेदार हो सकता है।