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  • डिमोना-अराद मिसाइल स्ट्राइक: ईरान ने इजरायल के न्यूक्लियर फैसिलिटी को निशाना बनाया

    डिमोना-अराद मिसाइल स्ट्राइक: ईरान ने इजरायल के न्यूक्लियर फैसिलिटी को निशाना बनाया


    नई दिल्ली । इजरायल के दक्षिणी शहरों डिमोना और अराद में शनिवार को ईरान ने बड़े पैमाने पर मिसाइल हमला किया जिसमें 100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। घायलों में से 11 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। इजरायली मीडिया के अनुसार ईरान की ओर से ताबड़तोड़ हमलों में इजरायली एयर डिफेंस कम से कम दो बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में नाकाम रहा।

    हमलों के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और इजरायल डिफेंस फोर्स के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर ने जनता को भरोसा दिलाते हुए कहा कि देश अपने दुश्मनों से हर मोर्चे पर लड़ता रहेगा। हमलों में गंभीर रूप से घायल लोगों में डिमोना में हुए हमले के कारण 12 साल का एक लड़का और अराद में 5 साल की एक लड़की शामिल हैं।

    डिमोना इलाके में ईरान ने कई मिसाइल हमले किए जिन्हें न्यूक्लियर रिसर्च फैसिलिटी को निशाना बनाने के लिए किया गया था। यह फैसिलिटी डिमोना से लगभग 10 किलोमीटर और अराद से 30 किलोमीटर दूर स्थित है। ईरानी मीडिया ने बताया कि यह हमला इजरायल के परमाणु केंद्रों पर बदले के तौर पर किया गया है। अमेरिका और इजरायल पहले से ही ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए लगातार दबाव डाल रहे हैं।

    इजरायल के मैगन डेविड एडोम इमरजेंसी सर्विस के अनुसार डिमोना में हमले के दौरान गंभीर रूप से घायल लड़के के अलावा 30 साल की एक महिला को भी कांच के टुकड़ों से मामूली चोटें आईं। शहर में 31 अन्य लोगों को हल्की चोटों का इलाज किया गया जबकि 14 लोगों को एक्यूट एंग्जायटी के लिए मेडिकल सहायता मिली। एमडीए पैरामेडिक कार्मेल कोहेन ने कहा कि हमले के बाद मौके पर अफरा-तफरी मची हुई थी और बहुत ज्यादा नुकसान हुआ।

    बीर्शेबा के सोरोका मेडिकल सेंटर ने जानकारी दी कि हमले में घायल सात लोगों को भर्ती किया गया जिनमें गंभीर रूप से घायल 12 साल का बच्चा भी शामिल था। बच्चों और अन्य गंभीर घायलों का इलाज ट्रॉमा रूम और सर्जिकल इमरजेंसी रूम में किया जा रहा है।

    डिमोना में हुए हमले के कुछ घंटों बाद पास के अराद में भी एक बैलिस्टिक मिसाइल के टकराने से कई इमारतों को नुकसान हुआ। एमडीए की टीम ने अराद में हमले के दौरान 71 लोगों का इलाज किया और उन्हें अस्पताल भेजा। इसमें 10 गंभीर घायल शामिल थे जिनमें 5 साल की बच्ची भी थी। 13 लोगों की हालत स्थिर बताई गई जबकि 48 लोगों को हल्की चोटें आईं। चार और लोगों को अतिरिक्त इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

    इस हमले ने इजरायल के न्यूक्लियर शहरों और नागरिक सुरक्षा पर गंभीर संकट उत्पन्न किया है। विशेषज्ञ इसे ईरान की ओर से इजरायल के परमाणु कार्यक्रम और सुरक्षा रणनीति पर बड़ा प्रहार मान रहे हैं। इस घटना ने क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक रणनीतिक स्थिरता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

  • अफगानिस्तान में पाकिस्तान का एयरस्ट्राइक हमला, हॉस्पिटल पर वार में 400 नागरिकों की मौत; 1,15,000 लोग बेघर

    अफगानिस्तान में पाकिस्तान का एयरस्ट्राइक हमला, हॉस्पिटल पर वार में 400 नागरिकों की मौत; 1,15,000 लोग बेघर

    नई दिल्ली। अफगानिस्तान में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। हाल ही में पाकिस्तान के पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में किए गए एयरस्ट्राइक में 400 आम नागरिकों की मौत हुई है। यह हमला स्थानीय समयानुसार रात 9 बजे एक ड्रग ट्रीटमेंट हॉस्पिटल पर हुआ जिसमें करीब 2,000 मरीज उपचाराधीन थे। वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।

    अधिकारियों ने बताया कि यह हमला फरवरी से शुरू हुए पाकिस्तान अफगानिस्तान संघर्ष का हिस्सा है। सीमा क्षेत्रों में दोनों पक्षों के बीच लगातार झड़पें हो रही हैं। पाकिस्तान का दावा है कि उसने केवल आतंकवाद समर्थित ठिकानों और अफगान तालिबान के तकनीकी व एम्युनिशन स्टोरेज को निशाना बनाया जबकि अफगान पक्ष इसे आम नागरिकों के खिलाफ जानबूझकर हमला बता रहा है।

    अफगानिस्तान के उप सरकारी प्रवक्ता मंदुल्लाह फितरत के अनुसार 2,000 बेड वाले अस्पताल का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया है। मरने वालों की संख्या 400 पहुंच गई है जबकि 250 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और आग को नियंत्रित करने तथा शवों को निकालने का काम चल रहा है।

    यह हमला 2021 में तालिबान के कब्जे और अमेरिकी सैनिकों की वापसी के दौरान हुए हमले के बाद सबसे खतरनाक हमला माना जा रहा है। फरवरी के बाद पाकिस्तान अफगानिस्तान में शासन बदलने और तालिबान को दबाने की कोशिश में है लेकिन इसके परिणामस्वरूप आम नागरिकों को भारी नुकसान हुआ है। अब तक कम से कम 475 नागरिक मारे गए हैं और 1,15,000 लोग बेघर हो गए हैं।

    अफगान अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान का यह कदम देश में आतंक फैलाने और आम लोगों को डराने की कोशिश है। इसके उलट अफगान नागरिक बॉर्डर पर जाकर पाकिस्तानी सेना के खिलाफ मुकाबले के लिए तैयार हैं।

    हालांकि पाकिस्तान ने हमले में शामिल होने से इनकार किया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के प्रवक्ता मुशर्रफ जैदी ने कहा कि अस्पताल को कोई निशाना नहीं बनाया गया और सभी हमले केवल सैन्य ठिकानों पर हुए। यह हमला न केवल अफगान नागरिकों के लिए खतरनाक साबित हुआ है बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर चेतावनी है।

  • पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक से अफगानिस्तान में तबाही, 400 लोगों की मौत, 250 से ज्यादा घायल; तालिबान बोला- अस्पताल पर गिराया बम

    पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक से अफगानिस्तान में तबाही, 400 लोगों की मौत, 250 से ज्यादा घायल; तालिबान बोला- अस्पताल पर गिराया बम


    नई दिल्ली।काबुल में बीती रात जोरदार धमाकों से अफरा-तफरी मच गई। अफगानिस्तान का दावा है कि पाकिस्तान की वायुसेना ने शहर के कई हिस्सों पर एयरस्ट्राइक की, जिससे भारी तबाही हुई। अफगान अधिकारियों के मुताबिक, इन हमलों में करीब 400 लोगों की मौत हो गई, जबकि 250 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। राहत और बचाव दल लगातार मलबे से लोगों को निकालने में जुटे हैं।

    अस्पताल पर बमबारी का आरोप
    तालिबान प्रशासन का आरोप है कि हमले में एक बड़े सरकारी अस्पताल को भी निशाना बनाया गया। बताया जा रहा है कि यह अस्पताल हजारों मरीजों की क्षमता वाला था और बमबारी के बाद पूरी तरह जल उठा।

    कई इलाकों को बनाया निशाना
    जानकारी के अनुसार, हमले में रक्षा मंत्रालय के पास के रिहायशी इलाके, खुफिया एजेंसी के आसपास का क्षेत्र, राष्ट्रपति भवन के पास की बस्तियां और एयरपोर्ट के पास पुराना बेस शामिल था। पूरे शहर में आग और धुएं का गुबार देखा गया। वहीं, पाकिस्तान ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि उनकी ओर से ऐसा कोई हमला नहीं किया गया।

    मंजूर पश्तीन का तीखा बयान
    मंजूर पश्तीन ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह निर्दोष लोगों पर हमला है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को शर्म करनी चाहिए। पश्तीन ने यह भी कहा कि सीमा के दोनों ओर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और आम लोग इसकी कीमत चुका रहे हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मुद्दे पर ध्यान देने की अपील की। फिलहाल काबुल में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। अस्पताल और रिहायशी इलाकों से लगातार शव और घायलों को निकाला जा रहा है। स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है और मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है।

  • गाजा संघर्ष: युद्धविराम के बावजूद हिंसा जारी, मानवाधिकार संगठनों ने जांच की मांग की..

    गाजा संघर्ष: युद्धविराम के बावजूद हिंसा जारी, मानवाधिकार संगठनों ने जांच की मांग की..


    नई दिल्ली। वाशिंगटन/गाजा। गाजा संघर्ष में हालिया रिपोर्टों ने इजराइल पर कथित रूप से ‘वैक्यूम’ या थर्मोबैरिक बम इस्तेमाल करने के आरोप लगाए हैं। मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इन आरोपों की गंभीरता पर ध्यान देते हुए जांच की मांग तेज कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार यह हथियार पहले हवा में ज्वलनशील कणों का बादल फैलाते हैं और फिर उसे विस्फोटित करते हैं, जिससे अत्यधिक ताप और दबाव उत्पन्न होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बंद या घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इसका असर व्यापक विनाशकारी होता है।

    गाजा की सिविल डिफेंस एजेंसियों के अनुसार कई घटनाओं में शव तक नहीं मिले और हजारों लोग अभी भी लापता हैं। आधिकारिक युद्धविराम लागू होने के बावजूद हिंसा जारी है। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, युद्धविराम के बाद भी सैकड़ों लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं। इस स्थिति ने क्षेत्र में मानवीय संकट और सामाजिक अस्थिरता को और बढ़ा दिया है।

    मानवाधिकार समूहों ने चेतावनी दी है कि यदि घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इस प्रकार के हथियारों का इस्तेमाल हुआ, तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन माना जा सकता है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से तत्काल जांच की अपील की है। हालांकि इन आरोपों पर इजराइल की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से नहीं आई है।

    संघर्ष के कारण गाजा का बुनियादी ढांचा व्यापक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ है। संयुक्त राष्ट्र के आकलनों के अनुसार बड़ी आबादी विस्थापन, भोजन और पानी की कमी जैसी समस्याओं का सामना कर रही है। राहत एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि युद्ध की लंबी अवधि का प्रभाव क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक संरचना पर गहरा पड़ेगा।

    इसी बीच अमेरिका और इजराइल के शीर्ष नेतृत्व के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा, मानवीय सहायता और युद्धविराम को लेकर उच्चस्तरीय बातचीत भी हुई। कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि चर्चा जारी है, लेकिन ठोस प्रगति की अभी पुष्टि नहीं हुई है। क्षेत्रीय स्थिरता, मानवाधिकारों की रक्षा और मानवीय सहायता वितरण इस समय अंतरराष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।

    वैश्विक समुदाय इस पर नजर बनाए हुए है कि क्या गाजा में हथियारों के कथित इस्तेमाल की जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। युद्धविराम के बावजूद जारी हिंसा और नागरिक हताहतों की संख्या ने अंतरराष्ट्रीय चिंता को और बढ़ा दिया है।