Tag: CJP leaders

  • जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कोशिश के बाद CJP के तीन नेता गिरफ्तार, बिना अनुमति कर रहे थे प्रवेश

    जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कोशिश के बाद CJP के तीन नेता गिरफ्तार, बिना अनुमति कर रहे थे प्रवेश


    नई दिल्ली। दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की है। सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को एहतियातन गिरफ्तार किया गया है। तीनों को एसईएम कोर्ट में पेश किया गया। इससे पहले पुलिस ने कथित तौर पर बिना अनुमति जंतर-मंतर क्षेत्र में प्रवेश करने के मामले में सौरव दास, आशुतोष रांका और संगठन के अन्य सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।

    CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया था कि तीनों नेताओं को अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस के मुताबिक, प्राथमिकी में शांति बनाए रखने के लिए पहले दिए गए पीस बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन से संबंधित धाराएं भी शामिल की गई हैं।

    यह कार्रवाई उस समय हुई, जब CJP के कार्यकर्ता भारी बैरिकेडिंग के बीच जंतर-मंतर क्षेत्र में दाखिल हुए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की। हाल ही में जंतर-मंतर को धरना-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटा दिया गया है।

    CJP का दावा- करीब 11 कार्यकर्ता हिरासत में लिए गए

    मंगलवार सुबह सौरव दास, आशुतोष रांका और संगठन के कुछ अन्य सदस्यों को निषेधाज्ञा का कथित उल्लंघन कर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद हिरासत में लिया गया था। CJP का दावा है कि उसके करीब 11 सदस्यों को पुलिस ने हिरासत में लिया है।

    पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को द्वारका जिले के जाफरपुर कलां थाने ले जाया गया। इस दौरान कुछ CJP कार्यकर्ता थाने के बाहर जमा हो गए, जिसके बाद थाने और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई।

    CJP के संस्थापक दीपके ने संगठन की कार्रवाई को जंतर-मंतर पर दोबारा अपना अधिकार जताने की कोशिश बताया। उनका कहना है कि प्रदर्शन स्थल को निर्धारित स्थानों की सूची से हटाए जाने के बावजूद संगठन का आंदोलन जारी रहेगा।

    एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर मिली थी रिहाई

    इससे पहले शनिवार को भी दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद हिरासत में लिया गया था। उस समय कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के चलते ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP का प्रस्तावित प्रदर्शन नहीं हो सका था।

    तीनों को एक दिन बाद इस शर्त पर रिहा किया गया था कि वे एक साल तक शांति भंग नहीं करेंगे। पुलिस के अनुसार, मौजूदा मामले में पीस बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन से जुड़ी धाराएं भी जोड़ी गई हैं।

    प्रदर्शन के लिए नए स्थान तय किए जाने पर विवाद

    दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर को एक स्थायी आदेश जारी किया था। इसमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान को धरना-प्रदर्शन के लिए नए निर्धारित स्थलों के रूप में सूचीबद्ध किया गया था।

    CJP का कहना है कि जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने की घोषणा 12 अक्टूबर को हुई। संगठन के मुताबिक, इसी दिन उसके प्रतिनिधि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तारीख और समय तय कराने के उद्देश्य से संसद मार्ग थाने पहुंचे थे।

    जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कोशिश के बाद पुलिस की कार्रवाई से CJP और दिल्ली पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। संगठन ने आंदोलन जारी रखने की बात कही है, जबकि पुलिस ने निषेधाज्ञा के कथित उल्लंघन और शांति बनाए रखने की शर्तों से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई की है।

  • सोनम वांगचुक आज कर सकते हैं बड़ा ऐलान, गिरफ्तार CJP नेताओं के विरोध में उठाएंगे कदम

    सोनम वांगचुक आज कर सकते हैं बड़ा ऐलान, गिरफ्तार CJP नेताओं के विरोध में उठाएंगे कदम


    नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक आज कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में अगला कदम उठाने का ऐलान कर सकते हैं। उन्होंने सरकार से प्रदर्शनकारियों को रिहा करने और गिरफ्तारियों से जुड़े मामलों को सुलझाने के लिए 24 घंटे का समय दिया था। यह समयसीमा पूरी होने पर वांगचुक धरना, अनशन या पदयात्रा जैसे शांतिपूर्ण विरोध के विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।

    वांगचुक ने दिल्ली में छात्र और युवा नेताओं, वकीलों, पत्रकारों तथा सांसदों को हिरासत में लिए जाने की निंदा की है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन की अनुमति होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि गिरफ्तारियों को वापस लेकर संबंधित मामलों का समाधान बातचीत के जरिए किया जाए।

    वांगचुक बोले- देश में अघोषित आपातकाल जैसे हालात

    सोनम वांगचुक ने कहा कि दिल्ली में छात्र नेताओं, युवा नेताओं, वकीलों, पत्रकारों और यहां तक कि सांसदों को भी हिरासत में लिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान शांति और एकता बनाए रखने की अपील करने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध की अनुमति दी जाएगी।

    वांगचुक ने आरोप लगाया कि देशभर में अघोषित आपातकाल जैसे हालात दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि दिन खत्म होने से पहले गिरफ्तारियों को समाप्त किया जाए और विवाद का समाधान निकाला जाए।

    उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले 24 घंटे में गिरफ्तारियों को वापस नहीं लिया गया, तो उन्हें लेह या दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पर विचार करना पड़ेगा। इसके लिए धरना, अनशन या पदयात्रा जैसे विकल्प अपनाए जा सकते हैं। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार बातचीत के जरिए ही मामले को सुलझा लेगी और उन्हें आंदोलन का अगला कदम उठाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    7 हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने का दावा

    दिल्ली में ‘जंतर-मंतर 2.0’ आंदोलन के दौरान पुलिस की भारी तैनाती और बैरिकेडिंग के बीच प्रदर्शन सीमित हो गया। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, सात हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। इनमें सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके और चार पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल बताए गए हैं।

    सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमान से ही हिरासत में ले लिया। जंतर-मंतर की ओर जा रहे आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, माकपा नेता पिनराई विजयन और माणिक सरकार सहित कई विपक्षी नेताओं को भी हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई।

    इसके अलावा, ध्रुव राठी को गुरुग्राम स्थित उनके आवास से और आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली हाट से हिरासत में लिया गया।

    सीजेपी का ऐलान- मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तक जारी रहेगा आंदोलन

    सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प जताया है। पार्टी ने रविवार सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पर दोबारा प्रदर्शन करने की घोषणा की।

    प्रेस वार्ता में सीजेपी के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी और आंदोलन की कमान संभाल रहे अजिंक्य शिंदे ने कहा कि दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बावजूद संगठन पीछे नहीं हटेगा। पार्टी ने अपने आंदोलन को जारी रखने की बात दोहराते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है।

    सुप्रीम कोर्ट में आज अवमानना याचिका पर सुनवाई

    इस मामले से जुड़ा एक कानूनी घटनाक्रम भी सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट रविवार को उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें आरोप लगाया गया है कि 10 अक्टूबर को मेट्रो और ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक नहीं लगाने संबंधी अदालत के आदेश का उल्लंघन हुआ।

    अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने यह अवमानना याचिका दाखिल की है। इसमें संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया गया है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर भी नजर रहेगी।