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  • दिल्ली में पुलिस का कड़ा पहरा….CJP नहीं जुटा पाई भीड़…. ठंडा पड़ा आंदोलन…

    दिल्ली में पुलिस का कड़ा पहरा….CJP नहीं जुटा पाई भीड़…. ठंडा पड़ा आंदोलन…


    नई दिल्ली।
    दिल्ली (Delhi) में जब पिछली बार कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party) यानी CJP का आंदोलन हुआ था. तब देश के तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) को इस्तीफा देना पड़ा था. शायद यही वो बात थी जो सरकार और सीजेपी नेताओं दोनों को याद रही. सीजेपी इस बार 10 अक्टूबर को जुलाई जैसा ही कुछ करना चाहती थी. लेकिन सरकार किसी भी कीमत पर उसे रोकने में जुटी थी. दिल्ली पुलिस की तैयारी और राजधानी में लागू पाबंदियां इसकी गवाह हैं।

    एक तरफ कॉकरोच थे, जिनके साथ युवा और कुछ छात्र संगठन खड़े थे. दूसरी तरफ राजधानी में तैनात पुलिस और पैरामिलिट्री की फौज थी. इस बार सीजेपी के प्रदर्शन को आंदोलन बनने से रोक दिया गया। 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar) के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट का कॉल दिया था. लेकिन दिल्ली लैंड होते ही फ्लाइट से सीजेपी के तीनों बड़े नेता अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत के बाद प्रदर्शन ठंडा पड़ गया।

    नई दिल्ली के इलाके में शनिवार को दिनभर पुलिस और सीजेपी समर्थकों के बीच चूहा-बिल्ली का खेल देखने को मिला. सीजेपी समर्थकों की जंतर-मंतर पर जुटने और वहां धरना देने की हर कोशिश नाकाम साबित हुई. दिपके ने अपने डिटेंशन से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसे बाद में जारी किया गया. सीजेपी के प्लान-B के तहत दिपके, रांका और सौरव दास के पकड़े जाने के बाद अंजिक्य शिंदे को प्रोटेस्ट लीड करने का जिम्मा दिया गया. लेकिन लीड करने के लिए समर्थकों की भीड़ को जमा ही नहीं होने दिया गया।

    अंजिक्य शिंदे ने समर्थकों से प्रोटेस्ट जारी रखने की अपील की और हर जगह को जंतर-मंतर बनाने का आह्वान भी किया. लेकिन रविवार आते-आते सीजेपी समर्थक हल्के पड़ गए. सड़कों पर प्रदर्शनकारियों से ज्यादा पुलिस की मौजूदगी थी. प्रोटेस्ट के दूसरे दिन रविवार को सड़कों पर सन्नाटा रहा. कनॉट प्लेस के आसपास कुछ इलाके में छिटपुट लोग जमा हुए, लेकिन पुलिस ने उन्हें भी खदेड़ दिया. सीजेपी के तीनों बड़े नेताओं की रिहाई भी हुई, लेकिन शर्त यह थी कि एक साल तक वे कोई प्रदर्शन नहीं करेंगे।

    पुलिस इस बार पहले से ज्यादा तैयार थी और तैयारी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत थी. जुलाई में हुए पेपर लीक प्रोटेस्ट से इस बार का प्रोटेस्ट एकदम अलग रहा. पेपर लीक के मुद्दे से वह आमजन भी जुड़े जिनका राजनीति से सीधे कोई सरोकार नहीं था. जंतर-मंतर पर लोग अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर पहुंचे हुए थे. पिछली बार छात्रों का बड़ा हुजूम नजर आया, जिसे तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं था।

    लेकिन इस बार के प्रदर्शन की वजह वोट चोरी, एक सियासी मुद्दा ज्यादा है. SIR के तहत लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, इसके पीछे चुनाव आयोग और सरकार के अपने तर्क हैं. विपक्ष खास तौर पर राहुल गांधी सालभर से इस मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं. कई बार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं. पिछले सप्ताह तीन दिन तक लगातार राहुल गांधी समेत समूचा विपक्ष ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली की सड़कों पर उतरा. आखिर में राष्ट्रपति से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी है. अब उसी मुद्दे के साथ दिपके की सीजेपी जब मैदान में आई तो उसे पहले जैसा जनसमर्थन नहीं मिल सका।

    वोट चोरी के मुद्दे को पहले से ही विपक्ष दल पूरे जोर-शोर से उठा रहे हैं और एक प्रेशर ग्रुप के तौर पर सीजेपी इसके जरिए युवाओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है. 10 अक्टूबर के प्रोटेस्ट से यह बात साफ हो गई कि सीजेपी को इस बार पेपर लीक जैसा समर्थन नहीं मिला. दूसरी बात पुलिस ने इस बार पहले से ज्यादा सतर्कता बरती. दिल्ली को छावनी बना दिया गया. ट्रेनें, मेट्रो, बाजार, यहां तक कि इंटरनेट पर भी पाबंदी लगाई गई. सरकार को पता था कि अगर एक बार सीजेपी जंतर-मंतर डेरा डाल लेती तो उन्हें वहां से हटाना मुश्किल होगा. लेकिन पुलिस ने ऐसा होने ही नहीं दिया।

    रविवार को सीजेपी नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है. आशुतोष रांका, सौरव दाव और रत्ना सिंह ने पुलिस और सरकार पर प्रदर्शनकारियों पर बर्बरता करने के आरोप लगाए. दिपके इस प्रेस वार्ता का हिस्सा नहीं थे. क्योंकि दादी के निधन के बाद वह वापस महाराष्ट्र अपने गांव लौट चुके हैं. उन्होंने कहा कि हमने कोर्ट में कोई बॉन्ड साइन नहीं किया है और फिर से सड़कों पर उतरेंगे. लेकिन अब तक सीजेपी की तरफ से आगे की रणनीति का खुलासा नहीं किया गया है।

  • CJP आंदोलन पर पाकिस्तान की पहली प्रतिक्रिया, बोला- यह भारत का आंतरिक मामला, टिप्पणी से किया इनकार

    CJP आंदोलन पर पाकिस्तान की पहली प्रतिक्रिया, बोला- यह भारत का आंतरिक मामला, टिप्पणी से किया इनकार


    नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन पर पहली बार पाकिस्तान की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे को भारत का आंतरिक मामला बताते हुए किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

    साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी से CJP आंदोलन और उससे जुड़े घटनाक्रम पर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह भारत का घरेलू विषय है और पाकिस्तान ऐसे मामलों पर कोई टिप्पणी नहीं करता।

    पांचवें सप्ताह में पहुंचा आंदोलन
    CJP का प्रदर्शन अब पांचवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। प्रदर्शनकारी NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कथित अनियमितताओं के लिए जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।

    ‘संसद चलो’ मार्च के बाद बढ़ा तनाव
    20 जुलाई को आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच झड़प हुई थी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जबकि दिल्ली पुलिस का कहना है कि बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बल प्रयोग किया गया।

    पेपर लीक मामलों पर सरकार का सख्त रुख
    इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

    सरकार ने फिर दिया बातचीत का प्रस्ताव
    केंद्र सरकार ने आंदोलनकारियों से संवाद की पहल भी दोहराई है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के अनुसार सरकार चार बार CJP को बातचीत का प्रस्ताव दे चुकी है और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ वार्ता के लिए तैयार है। हालांकि, CJP ने नड्डा के आवास या कार्यालय में बैठक करने से इनकार करते हुए किसी तटस्थ स्थान पर बातचीत की मांग रखी है।

    सोनम वांगचुक ने समाप्त किया अनशन
    इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 25 दिन से जारी अपना अनशन समाप्त कर दिया है। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत की संभावना को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।