Tag: CJP Protest

  • CJP आंदोलन की कमान किसके हाथ में थी, अभिजीत दिपके ने बताई अंदर की बात, बोले मैं तो सिर्फ दोनों के निर्देश मानता था

    CJP आंदोलन की कमान किसके हाथ में थी, अभिजीत दिपके ने बताई अंदर की बात, बोले मैं तो सिर्फ दोनों के निर्देश मानता था


    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके ने अपने आंदोलन और पार्टी के नेतृत्व को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले सौरव दास और आशुतोष रांका लेते थे जबकि वह खुद उनके निर्देशों का पालन करते थे। दिपके के इस बयान ने आंदोलन के नेतृत्व को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। उन्होंने दोनों नेताओं को अपना भाई और परिवार बताते हुए उनकी गिरफ्तारी पर भावनात्मक प्रतिक्रिया भी दी। इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की कि दिवाली तक पार्टी की ओर से कोई प्रदर्शन आयोजित करने की योजना नहीं है।

    अभिजीत दिपके ने दशहरा के मौके पर करीब 16 मिनट का वीडियो संदेश जारी किया था। यह वीडियो उन्होंने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया। इसमें उन्होंने आंदोलन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और समर्थकों से कुछ समय के लिए विराम लेने की अपील की। दिपके ने कहा कि बाहर से लोगों को भले ही ऐसा लगता रहा हो कि आंदोलन का नेतृत्व वह कर रहे हैं लेकिन वास्तव में कई बड़े फैसले सौरव दास और आशुतोष रांका ही लेते थे। उनके मुताबिक दोनों उन्हें बताते थे कि अगले दिन कहां जाना है और क्या करना है।

    दिपके ने कहा कि सौरव और आशुतोष की निर्णय लेने की क्षमता उनसे बेहतर है। उन्होंने दोनों को केवल राजनीतिक सहयोगी नहीं बल्कि अपना भाई और परिवार बताया। दोनों की गिरफ्तारी से उन्हें गहरा भावनात्मक झटका लगा है। अपनी बात रखते हुए उन्होंने तीनों के बीच के निजी संबंधों का भी जिक्र किया। दिपके ने बताया कि उनका एक अलग व्हाट्सऐप ग्रुप था जिसमें वे एक दूसरे के साथ मीम्स साझा करते थे। उन्होंने कहा कि वह आज भी उस ग्रुप को खोलते हैं तो उन्हें ऐसा महसूस होता है कि दोनों अब भी उनके साथ मौजूद हैं।

    CJP संस्थापक ने अपने समर्थकों से भी अपील की कि वे कुछ समय अपने परिवार के साथ बिताएं और आंदोलन से जुड़े कार्यक्रमों को लेकर फिलहाल आराम करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि दिवाली तक पार्टी की ओर से किसी प्रदर्शन की योजना नहीं है। उनके इस ऐलान को मौजूदा परिस्थितियों के बीच आंदोलन की गतिविधियों में अस्थायी विराम के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि आगे आंदोलन की रणनीति क्या होगी इस पर उन्होंने कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।

    गौरतलब है कि सौरव दास और आशुतोष रांका 13 अक्टूबर को नई दिल्ली के जंतर मंतर पर हुई घटना के बाद न्यायिक हिरासत में हैं। आरोप है कि दोनों ने बंद गेट पार कर प्रदर्शन स्थल में प्रवेश किया और पहले से हस्ताक्षरित पीस बॉन्ड का उल्लंघन किया। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारे लगाए जाने की भी बात सामने आई थी। दोनों नेताओं की हिरासत की अवधि बढ़ाए जाने के बाद मामला और चर्चा में आ गया है।

    दिपके ने फ्रांस में हुए दंगों से CJP के प्रदर्शन की तुलना पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका ने जेल जाने के बावजूद शांतिपूर्ण रास्ता चुना। उनके अनुसार दोनों ने गुस्से और नफरत के बजाय शांति और करुणा का रास्ता अपनाया। दिपके ने उनके इस रुख की तुलना महात्मा गांधी के सत्याग्रह से की और कहा कि जेल जाने के बाद भी उन्होंने अहिंसा का रास्ता नहीं छोड़ा।

    अभिजीत दिपके के बयान से साफ है कि वह सौरव दास और आशुतोष रांका को आंदोलन की रणनीति और फैसलों में अहम भूमिका निभाने वाला मानते हैं। फिलहाल दिवाली तक प्रदर्शन स्थगित रखने के ऐलान के बाद सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि त्योहार के बाद CJP अपनी अगली रणनीति किस तरह तय करती है।

  • इमरान खान को भारत छोड़ने के नोटिस पर बड़ा मोड़, एक्टर ने हाई कोर्ट में उठाए सवाल, बोले बिना पक्ष सुने जारी हुआ आदेश

    इमरान खान को भारत छोड़ने के नोटिस पर बड़ा मोड़, एक्टर ने हाई कोर्ट में उठाए सवाल, बोले बिना पक्ष सुने जारी हुआ आदेश


    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान ने भारत छोड़ने के नोटिस के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मुंबई पुलिस और विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय यानी FRRO की ओर से जारी नोटिस में उन्हें 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने के लिए कहा गया है। अभिनेता ने इस आदेश को चुनौती देते हुए शनिवार को हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। उनका कहना है कि नोटिस जारी करने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। इस मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है और याचिका पर जल्द सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है।

    इमरान खान ने अपने वकील जुल्फिकार मेमन के माध्यम से अदालत में याचिका दायर की है। इसमें भारत छोड़ने के नोटिस को अवैध अनुचित और कठोर बताते हुए उसे कानून की कसौटी पर गलत ठहराया गया है। याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि मौजूदा कानूनों और वैधानिक नियमों में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है जो भारत के प्रवासी नागरिक यानी OCI कार्डधारक को शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने से रोकता हो। अभिनेता का पक्ष है कि किसी कार्रवाई से पहले उन्हें अपनी बात रखने का उचित मौका दिया जाना चाहिए था। अब अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस याचिका का उल्लेख तत्काल सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ के सामने किया जा सकता है। हालांकि सुनवाई और अदालत के आदेश को लेकर आगे की स्थिति न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। फिलहाल अभिनेता ने नोटिस को चुनौती देकर अपने कानूनी अधिकारों के आधार पर राहत पाने की कोशिश की है।

    यह पूरा मामला मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में आयोजित सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस यानी CJP प्रोटेस्ट से जुड़ा है। इस प्रदर्शन का आयोजन कॉकरोच जनता पार्टी ने किया था। इमरान खान भी इसमें शामिल हुए थे। रिपोर्ट के अनुसार इमरान के पास भारतीय नागरिकता नहीं है और वे अमेरिकी नागरिक हैं। उनके पास OCI कार्ड है। प्रदर्शन में शामिल होने के बाद विदेशी नागरिकों से जुड़े नियमों और इमिग्रेशन कानूनों के कथित उल्लंघन का आरोप सामने आया। इसके बाद मुंबई पुलिस और FRRO की ओर से उन्हें 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का नोटिस जारी किए जाने की बात सामने आई।

    प्रदर्शन में शामिल होने के अपने फैसले पर इमरान खान ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि वह एक शहर के नागरिक के तौर पर वहां पहुंचे थे। उन्होंने कहा था कि उनकी कोई विशेष मांग नहीं है बल्कि वह यह समझना चाहते हैं कि लोगों की आवाज और स्वतंत्र रूप से आने जाने की आजादी पर रोक क्यों लगाई जा रही है। इस प्रदर्शन में उनकी गर्लफ्रेंड लेखा वाशिंगटन उनकी मां नुसरत और भांजी जायन भी शामिल हुई थीं।

    इमरान खान की पेशेवर जिंदगी की बात करें तो वह लंबे समय से फिल्मों में सक्रिय भूमिका से दूर रहे हैं। उनकी फिल्म कट्टी बट्टी साल 2015 में रिलीज हुई थी जिसमें उनके साथ कंगना रनौत मुख्य भूमिका में थीं। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खास सफलता हासिल नहीं कर सकी थी। इसके बाद इमरान इसी साल रिलीज हुई फिल्म हैप्पी पटेल खतरनाक जासूस में विशेष भूमिका में नजर आए। अब भारत छोड़ने के नोटिस के खिलाफ उनकी कानूनी लड़ाई चर्चा में है। आने वाले दिनों में हाई कोर्ट की सुनवाई इस मामले की दिशा तय करने में अहम हो सकती है।

  • तिरंगा मार्च से पहले अभिजीत दीपके पर शिकंजा, हिरासत के बाद आज मजिस्ट्रेट के सामने पेशी

    तिरंगा मार्च से पहले अभिजीत दीपके पर शिकंजा, हिरासत के बाद आज मजिस्ट्रेट के सामने पेशी


    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 126 और 170 के तहत एहतियाती कार्रवाई शुरू की है। शनिवार को उन्हें स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना है। इस घटनाक्रम के बाद सवाल उठने लगा है कि क्या अभिजीत दीपके को भी पार्टी के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की तरह तिहाड़ जेल भेजा जा सकता है। हालांकि फिलहाल उनके मामले में अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है और आगे की कार्रवाई मजिस्ट्रेट के आदेश पर निर्भर करेगी।
    रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार 16 अक्टूबर को अभिजीत दीपके को झंडेवालान इलाके से उस समय हिरासत में लिया जब वह लहरा दो तिरंगा प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कनॉट प्लेस की ओर जा रहे थे। इसी दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को भी हिरासत में लिया गया। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने और यातायात को सुचारु रखने के लिए कई अन्य प्रदर्शनकारियों को भी हिरासत में लिया था।
    पुलिस ने दीपके के खिलाफ BNSS की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की जानकारी दी है। उन्हें स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना है। वहीं CJP ने उनकी हिरासत के दौरान परिवार के सदस्यों वकीलों और पार्टी के लोगों को उनसे संपर्क करने में परेशानी होने का आरोप लगाया था। इस मामले में अब मजिस्ट्रेट की सुनवाई और पुलिस की ओर से रखे जाने वाले तथ्यों पर सबकी नजर है।
    अभिजीत दीपके के लिए यह पहली कानूनी कार्रवाई नहीं है। इससे पहले 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले उन्हें सौरव दास और आशुतोष रांका के साथ हिरासत में लिया गया था। अगले दिन तीनों को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक उस समय तीनों को 50-50 हजार रुपये के जमानत-सह-मुचलके पर रिहा किया गया था। उन्होंने एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छा आचरण करने की शर्त स्वीकार की थी।
    लेकिन कुछ ही दिनों बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को फिर हिरासत में ले लिया गया। पुलिस का आरोप था कि दोनों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया और पहले से लागू शांति संबंधी शर्तों का उल्लंघन किया। इसके बाद 14 अक्टूबर को अदालत ने दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। दोनों फिलहाल तिहाड़ जेल में हैं। इसी घटनाक्रम के कारण अब अभिजीत दीपके के पुराने बॉन्ड को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
    शांति बनाए रखने के लिए लिया जाने वाला बंधपत्र एक कानूनी प्रक्रिया है। इसके तहत संबंधित व्यक्ति से तय अवधि तक शांति भंग नहीं करने और अच्छा आचरण बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है। यदि पुलिस को बाद में शर्तों के उल्लंघन की आशंका होती है तो वह कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकती है। हालांकि किसी व्यक्ति पर आरोप लगना और अदालत में उसका साबित होना अलग-अलग बातें हैं। अभिजीत दीपके के मामले में भी यह तय होना बाकी है कि पुलिस की नई कार्रवाई किन तथ्यों पर आधारित है और क्या पुराने बॉन्ड की किसी शर्त का उल्लंघन हुआ है।
    BNSS की धारा 126 शांति बनाए रखने के लिए बंधपत्र से संबंधित है। इसके तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट निर्धारित परिस्थितियों में किसी व्यक्ति से शांति बनाए रखने का बंधपत्र भरने को कह सकता है। वहीं धारा 170 संभावित संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए कुछ परिस्थितियों में पुलिस को बिना वारंट गिरफ्तारी की शक्ति देती है। इस प्रावधान के तहत हिरासत की अवधि और आगे की कार्रवाई कानून में तय शर्तों के अधीन होती है।
    दूसरी ओर नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत औपचारिकताएं पूरी करने के बाद रिहा कर दिया गया है। इस तरह दोनों की हिरासत के बाद कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग दिशा में आगे बढ़ी है। अब अभिजीत दीपके की पेशी में यह महत्वपूर्ण होगा कि मजिस्ट्रेट पुलिस की दलीलों और उपलब्ध तथ्यों पर क्या रुख अपनाते हैं। उन्हें तिहाड़ जेल भेजा जाएगा या कोई अन्य आदेश दिया जाएगा यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है।

  • सौरभ दास और आशुतोष रांका के बाद अभिजीत दीपके की मुश्किलें बढ़ीं, SC/ST एक्ट में केस, 16 अक्टूबर को तिरंगा मार्च का ऐलान

    सौरभ दास और आशुतोष रांका के बाद अभिजीत दीपके की मुश्किलें बढ़ीं, SC/ST एक्ट में केस, 16 अक्टूबर को तिरंगा मार्च का ऐलान


    नई दिल्ली।
    दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी से जुड़े नेताओं और स्वतंत्र पत्रकारों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके साथियों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम यानी एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में स्वतंत्र पत्रकार रोजी और गजेंद्र सिंह के साथ सीजेपी से जुड़े सौरभ दास आशुतोष रांका रत्ना सिंह और अभिजीत दीपके के नाम एफआईआर में शामिल किए गए हैं। शिकायत दिल्ली पुलिस के कनॉट प्लेस सब डिवीजन के एसीपी विवेक भगत की ओर से दर्ज कराई गई है। आरोप है कि एसीपी के संबंध में अपमानजनक और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होगी।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब सीजेपी से जुड़े नेताओं और पुलिस के बीच विवाद पहले से चर्चा में है। रिपोर्ट के मुताबिक सौरभ दास और आशुतोष रांका को बुधवार को गिरफ्तार किए जाने के बाद अदालत ने पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। दोनों को जंतर मंतर पर प्रतिबंध के बावजूद प्रवेश करने और सुरक्षा घेरा तोड़ने के आरोपों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया। अब एससी एसटी एक्ट के तहत नया मामला दर्ज होने से पार्टी से जुड़े लोगों की कानूनी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। इस मामले में पुलिस की जांच और अदालत की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

    सौरभ दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में सीजेपी ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च निकालने का ऐलान किया है। पार्टी संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर समर्थकों से शुक्रवार शाम पांच बजे सेंट्रल पार्क पहुंचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में शामिल लोग राष्ट्रीय ध्वज लेकर आएं और तिरंगा फहराएं। दीपके ने यह भी अपील की कि जो लोग दिल्ली नहीं पहुंच सकते वे अपने शहरों में भी तिरंगा फहराएं। उन्होंने गिरफ्तारी की आशंका को लेकर भी बयान दिया और कहा कि जेल जाने की संभावना से उन्हें चिंता नहीं है। प्रस्तावित मार्च को लेकर अब प्रशासन की व्यवस्था और कानून व्यवस्था की स्थिति पर नजर रहेगी।

    इससे पहले नागपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि देश में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति थोपने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार आपातकाल लगाना चाहती है तो उसे आधिकारिक रूप से ऐसा करना चाहिए। हालांकि यह उनका राजनीतिक आरोप है और इसे किसी स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ इंडिया गठबंधन के प्रदर्शन को लेकर पूछे गए सवाल पर दीपके ने कहा कि सीजेपी एक स्वतंत्र समूह है और अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्वतंत्र रहने का मतलब इंडिया गठबंधन के खिलाफ होना नहीं है।

    विदेशी फंडिंग को लेकर उठे सवालों पर भी दीपके ने प्रतिक्रिया दी है। पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे के इस दावे पर कि भारत में हाल के कुछ विरोध प्रदर्शनों को विदेश से आर्थिक सहायता मिल रही है उन्होंने कहा कि यदि उनके पास इससे संबंधित सबूत हैं तो उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सौंपना चाहिए। दीपके ने सवाल उठाया कि यदि ऐसे प्रमाण मौजूद हैं तो उन्हें संबंधित अधिकारियों के सामने पेश किया जाना चाहिए। फिलहाल सीजेपी से जुड़े नेताओं के खिलाफ दर्ज मामले और प्रस्तावित तिरंगा मार्च को लेकर स्थिति पर नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में पुलिस की जांच अदालत की कार्यवाही और प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदम इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेंगे।

  • ‘इमरान खान विदेशी हैं, देश से बाहर निकालो’, CJP के प्रदर्शन में शामिल होने पर भाजपा नेता की मांग

    ‘इमरान खान विदेशी हैं, देश से बाहर निकालो’, CJP के प्रदर्शन में शामिल होने पर भाजपा नेता की मांग


    मुंबई।
    कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान विवादों में घिर गए हैं। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने मुंबई पुलिस से अभिनेता के खिलाफ कार्रवाई करने और उन्हें देश से निर्वासित करने की मांग की है। सोमैया का आरोप है कि इमरान खान विदेशी नागरिक हैं और उन्हें भारत में राजनीतिक प्रदर्शनों में हिस्सा लेने का अधिकार नहीं है।

    मुंबई पुलिस को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग

    किरीट सोमैया ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इस मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में मुंबई पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर मनोज कुमार शर्मा को पत्र लिखा है। सोमैया ने अपने पत्र की प्रति भी सोशल मीडिया पर साझा की।

    पत्र में भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि विदेशी नागरिक होने के कारण इमरान खान को भारतीय नागरिकों के समान राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं हैं। उन्होंने अभिनेता के राजनीतिक आंदोलन में शामिल होने को गैरकानूनी बताते हुए पुलिस से कार्रवाई करने की मांग की। अपनी एक अन्य पोस्ट में सोमैया ने अभिनेता को तत्काल देश से बाहर निकालने की मांग भी की।

    अगस्त क्रांति मैदान से हिरासत में लिए गए थे इमरान खान

    यह विवाद 10 अक्टूबर को उस समय सामने आया, जब मुंबई पुलिस ने अगस्त क्रांति मैदान से अभिनेता इमरान खान को हिरासत में लिया। यहां कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था।

    हिरासत में लिए जाने के बाद अभिनेता ने पुलिस वैन के अंदर से एक सेल्फी इंस्टाग्राम पर साझा की थी। इसके साथ उन्होंने लिखा, “ऐसा लगता है कि मैं ड्राइव पर जा रहा हूं।”

    इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें इमरान खान पुलिस अधिकारियों से सवाल करते दिखाई दिए। वीडियो में उन्होंने पूछा, “मैंने क्या किया है? मेरे साथ धक्का-मुक्की क्यों की जा रही है?”

    ‘मैं एक नागरिक के तौर पर अपनी आवाज उठाने आया था’

    हिरासत की घटना के बाद शनिवार को मीडिया से बातचीत में इमरान खान ने अपने प्रदर्शन में शामिल होने की वजह बताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी विशेष मांग को लेकर वहां नहीं पहुंचे थे, बल्कि एक नागरिक के तौर पर अपनी आवाज उठाने आए थे।

    अभिनेता ने कहा, “मेरी कोई मांग नहीं है। मैं यहां एक नागरिक के रूप में, इस शहर में रहने वाले व्यक्ति के रूप में आया हूं। मैं यह देखने आया हूं कि लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध क्यों लगाया जा रहा है और लोगों की आवाज क्यों दबाई जा रही है।”

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी संगठन या राजनीतिक पार्टी का हिस्सा बनकर प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए थे।

    400 से अधिक लोगों को हिरासत में लेने का दावा

    मुंबई पुलिस के मुताबिक, अगस्त क्रांति मैदान में CJP के समर्थन में बिना अनुमति विरोध प्रदर्शन करने के आरोप में 400 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था।

    पुलिस ने बताया कि बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार विरोध प्रदर्शन के लिए आजाद मैदान निर्धारित था। इसी वजह से अगस्त क्रांति मैदान में प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा सकती थी।

    इस कार्रवाई के दौरान महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी को भी हिरासत में लिया गया था, हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।

    इमरान खान के प्रदर्शन में शामिल होने के बाद अब मामला राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। जहां अभिनेता ने इसे एक नागरिक के तौर पर अपनी आवाज उठाने का मामला बताया है, वहीं किरीट सोमैया ने उनकी नागरिकता और राजनीतिक प्रदर्शन में भागीदारी को लेकर सवाल उठाते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की है।

  • CJP प्रोटेस्ट पर प्रकाश राज का सरकार पर तीखा हमला, बोले तुम लोग डरे हुए हो ना, दिन-ब-दिन नंगे होते जाओगे

    CJP प्रोटेस्ट पर प्रकाश राज का सरकार पर तीखा हमला, बोले तुम लोग डरे हुए हो ना, दिन-ब-दिन नंगे होते जाओगे


    नई दिल्ली। नई दिल्ली में CJP प्रोटेस्ट को लेकर जारी हंगामे के बीच अभिनेता प्रकाश राज ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने संदेश में सरकार और प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिशों पर सवाल उठाए हैं। प्रकाश राज ने बिना किसी राजनीतिक दल या नेता का नाम लिए कहा कि विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश करने वाले लोग खुद अपने डर के पीछे छिपे हुए हैं। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है और इसे लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
    फिल्मों में अपने दमदार अभिनय के लिए पहचाने जाने वाले प्रकाश राज ने वीडियो में कहा कि युवाओं को उनके घरों और फ्लाइट से हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को विरोध करने की निर्धारित जगह तक पहुंचने से भी रोका जा रहा है। अभिनेता ने इस घटनाक्रम पर नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि आखिर इतनी सख्ती क्यों दिखाई जा रही है। उनके मुताबिक पुलिस और सुरक्षा बलों के जरिए लोगों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है लेकिन इससे सवाल उठाने वाले लोगों की आवाज खत्म नहीं होगी।
    प्रकाश राज ने अपने संदेश में कहा कि विरोध करने वालों को गिरफ्तार करने या उनकी आवाज रोकने की कोशिश करने वाले वास्तव में अपने डर के पीछे कैद हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की आवाज को दबाने से समस्या का समाधान नहीं होगा बल्कि सवाल उठाने वाली आवाजें और बुलंद हो सकती हैं। अभिनेता ने अपने वीडियो में यह भी कहा कि कोशिश कर ली जाए लेकिन विरोध करने वालों को पूरी तरह रोक पाना संभव नहीं होगा। उन्होंने लोकतंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि देश लोकतंत्र की हत्या नहीं होने देगा।
    प्रकाश राज ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के कैप्शन में नदी का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि आखिर किसी नदी को कब तक रोका जा सकता है। उनके इस संदेश को विरोध और असहमति की आवाज को लंबे समय तक दबा पाने की कोशिशों पर टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है। वीडियो में उन्होंने यह भी कहा कि यह एक लंबी लड़ाई है और वे सवाल पूछना जारी रखेंगे। उनके अनुसार समय के साथ विरोध करने वालों की आवाज और स्पष्ट होती जाएगी। इसी दौरान उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि संबंधित लोग दिन-ब-दिन बेनकाब होते जाएंगे।
    अभिनेता ने अपने संदेश के अंत में कहा कि खेल शुरू हो चुका है और देश सब कुछ देख रहा है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। कुछ लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया तो कुछ यूजर्स ने उनकी टिप्पणी पर सवाल उठाए। एक यूजर ने पूछा कि वह होटल के कमरे में क्यों छिपे हुए हैं। वहीं दूसरे यूजर ने उन्हें दिल्ली आने की चुनौती देते हुए कहा कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं को उनकी जरूरत है। कुछ अन्य लोगों ने भी उनके बयान पर असहमति जताते हुए टिप्पणी की।
    CJP प्रोटेस्ट को लेकर सामने आए इस घटनाक्रम ने विरोध प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। प्रकाश राज ने अपने वीडियो में लोकतंत्र और सवाल पूछने के अधिकार पर जोर दिया है। हालांकि हिरासत और प्रदर्शन को रोकने से जुड़े आरोपों के संबंध में संबंधित पक्षों का विस्तृत पक्ष इस रिपोर्ट में शामिल नहीं है। ऐसे में पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए प्रदर्शन से जुड़े आधिकारिक बयान और अन्य पक्षों की प्रतिक्रियाएं भी महत्वपूर्ण होंगी।
  • CJP के प्रदर्शन से पहले सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, छात्रों और युवाओं की भीड़ जुटाने की आशंका के बीच सरकार ने ऐसे बनाया सुरक्षा चक्र

    CJP के प्रदर्शन से पहले सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, छात्रों और युवाओं की भीड़ जुटाने की आशंका के बीच सरकार ने ऐसे बनाया सुरक्षा चक्र


    नई दिल्ली। नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP और विपक्षी INDIA गठबंधन के दिल्ली मार्च को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क रहीं। शनिवार को प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने राजधानी के संवेदनशील इलाकों में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए। जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली के आसपास बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों की आवाजाही पर नजर रखी गई। सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को एक बड़ी भीड़ में एकजुट होने से रोकना और किसी भी संभावित हिंसक स्थिति से निपटना था। हालांकि हिंसा भड़काने की कथित साजिश को लेकर सामने आए दावे सुरक्षा एजेंसियों के आकलन पर आधारित हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
    रिपोर्ट के अनुसार खुफिया एजेंसियों को आशंका थी कि प्रदर्शन के आयोजक छात्रों और युवाओं को आगे रखकर सेंट्रल दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में छोटे-छोटे समूहों में विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। इससे कई स्थानों पर एक साथ भीड़ जुटने और कानून व्यवस्था की चुनौती पैदा होने की आशंका जताई गई थी। इसी इनपुट के आधार पर पुलिस ने जंतर-मंतर तक पहुंचने वाले रास्तों और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी। 37 से अधिक स्थानों पर बैरिकेडिंग और अर्धसैनिक बलों की तैनाती किए जाने की जानकारी सामने आई। अधिकारियों की रणनीति यह थी कि अलग-अलग स्थानों पर मौजूद समूह एकजुट होकर बड़ी भीड़ नहीं बना सकें और स्थिति पर समय रहते नियंत्रण रखा जा सके।
    सुरक्षा एजेंसियों के लिए 20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर हुई झड़पों का अनुभव भी महत्वपूर्ण बताया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उस दौरान प्रदर्शन की अनुमति सीमित अवधि के लिए होने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने लंबे समय तक वहां डेरा जमाए रखा था। इसके बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने प्रदर्शन से जुड़े आयोजनों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिक सतर्कता बरती। रिपोर्ट के मुताबिक आयोजकों के बीच संवाद के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और बर्नर फोन के इस्तेमाल की आशंका भी जताई गई थी। हालांकि इन माध्यमों के इस्तेमाल से संबंधित सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
    इस बार दिल्ली पुलिस ने रियल टाइम सूचना और निगरानी व्यवस्था पर भी जोर दिया। रिपोर्ट में बताया गया है कि डिजिटल निगरानी और मैसेजिंग नेटवर्क से जुड़ी सूचनाओं के आधार पर पुलिस कमांड सेंटर को प्रदर्शनकारियों की संभावित आवाजाही और भीड़ के आकार पर नजर रखने में मदद मिली। इसके साथ ही अलग-अलग स्थानों पर पुलिस बल तैनात किए गए ताकि किसी क्षेत्र में अचानक भीड़ बढ़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। प्रदर्शन के प्रमुख आयोजकों और विपक्षी नेताओं को अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिए जाने की भी जानकारी सामने आई। पुलिस की इस कार्रवाई से प्रदर्शनकारियों के एकजुट होने की संभावना प्रभावित हुई।
    इस पूरे घटनाक्रम के बीच केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विरोध प्रदर्शन और कानून व्यवस्था को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध का अधिकार सभी को है लेकिन अराजकता के लिए कोई जगह नहीं है। संवैधानिक संस्थाओं की साख को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जा सकता। CJP के प्रदर्शन को लेकर उठे सवालों के बीच राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार पर बहस तेज हो गई है। इस मामले में आगे की स्थिति पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन से जुड़े तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि पर निर्भर करेगी।
  • सड़कें सूनी.. बाजार बंद…. CJP के प्रदर्शन से दिल्ली में लॉकडाउन जैसा हाल… एक दिन में 2000 करोड़ का नुकसान

    सड़कें सूनी.. बाजार बंद…. CJP के प्रदर्शन से दिल्ली में लॉकडाउन जैसा हाल… एक दिन में 2000 करोड़ का नुकसान


    नई दिल्ली।
    राजधानी नई दिल्ली (New Delhi) में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) (Cockroach Janata Party -CJP) के विरोध-प्रदर्शन के चलते सदर बाजार, चांदनी चौक, कनॉट प्लेस समेत एक दर्जन से ज्यादा बाजार बंद (Shops Closed ) रहे। इसकी वजह से शनिवार को तकरीबन दो हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ। दिल्ली में वीकेंड पर ही बाजारों में सबसे ज्यादा खरीदारी होती है, लेकिन एक साथ इतनी बड़ी संख्या में बाजार बंद होने के कारण कारोबार ठप रहा। हालांकि, जिन इलाकों में बाजार खुले थे, वहां भी ग्राहकों की संख्या बेहद कम रही।


    लॉकडाउन जैसा दिखा मंजर

    राजधानी के थोक बाजार अब साप्ताहिक अवकाश के चलते रविवार को भी बंद रहेंगे। सोमवार से कामकाज सुचारू हो सकेगा। व्यापारियों का कहना है कि दिल्ली में त्योहारी सीजन में जहां बाजारों में रौनक बढ़ जाती थी, वहीं इस बार हालात विपरीत हैं। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि नवरात्रि और रामलीला मंचन के इस सीजन में दिल्ली में शनिवार को लॉकडाउन जैसे हालात बन गए। बाजार सूने पड़े थे। इसकी वजह से करीब 2000 करोड़ से ज्यादा के नुकसान का अनुमान है।

    पेट्रोल पंपों पर भी भीड़ कम रही। होटल, रेस्टोरेंट, ब्यूटी पार्लर, सैलून में बड़ी संख्या में बुकिंग कैंसिल हुई हैं। वहीं, फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश यादव ने कहा कि शनिवार को ज्यादा बिक्री की उम्मीद थी, लेकिन सुरक्षा के चलते बाजार बंदी का निर्णय लेना पड़ा। सदर बाजार के 40 हजार दुकानदारों को करोड़ों का नुकसान झेलना पड़ा।


    यूपीआई से पेमेंट में दिक्कत हुई, गूगल मैप भी नहीं चला

    जंतर-मंतर और इसके आसपास नई दिल्ली के कई इलाकों में शनिवार को सीजेपी के प्रदर्शन के चलते इंटरनेट सेवा बंद रही। इससे न तो कैब, ऑटो चालक और गिग वर्कर्स गूगल मैप से रास्ता खोज पाए और न ही लोग यूपीआई से भुगतान कर सके। इसकी वजह से लोगों को दिनभर परेशानियों का सामना करना पड़ा।

    बाहरी शहरों से आए लोगों को वैकल्पिक रास्तों की जानकारी न होने की वजह से ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इंटरनेट सेवा बंद होने के कारण वे गूगल मैप से वैकल्पिक रास्तों की जानकारी नहीं कर पाए और सड़कों पर एक से दूसरी जगह भटकते रहे। वहीं, नई दिल्ली क्षेत्र में मेट्रो स्टेशन और डीटीसी की बस सेवा बंद होने के कारण लोगों ने गंतव्य तक जाने के लिए ऑटो, बाइक कैब और टैक्सी बुक की, लेकिन यूपीआई से भुगतान नहीं हो सका। जेब में नकदी न होने के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।

  • CJP के प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस अलर्ट, हिरासत में लिए गए लोगों को रखने के लिए 10 जगहें तय

    CJP के प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस अलर्ट, हिरासत में लिए गए लोगों को रखने के लिए 10 जगहें तय


    नई दिल्ली।
    कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के ऐलान को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। प्रदर्शनकारियों की संभावित भीड़ को देखते हुए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के 35 हजार से अधिक जवानों की तैनाती की जानकारी सामने आई है। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने वाले लोगों को रखने के लिए 10 स्थान भी चिह्नित किए हैं।

    हिरासत में लिए गए लोगों को रखने के लिए 10 स्थान तय

    पुलिस अधिकारी के मुताबिक, शनिवार को प्रस्तावित प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की आशंका को देखते हुए पहले से तैयारी की गई है। प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने वाले लोगों को रखने के लिए 10 स्थानों का चयन किया गया है। ये स्थान नई दिल्ली से दूर और राजधानी के बाहरी इलाकों में स्थित हैं।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन स्थानों में मॉडल टाउन स्थित छत्रसाल स्टेडियम, न्यू पुलिस लाइन, बवाना का राजीव गांधी स्टेडियम, नांगलोई का सूरजमल स्टेडियम और दक्षिण दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम तथा जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम शामिल हैं। इन स्थानों पर भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

    कनॉट प्लेस के पास कुछ प्रदर्शनकारी हिरासत में

    समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। शनिवार को कनॉट प्लेस इलाके में जनपथ के पास कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

    पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ऐसे लोगों पर भी नजर रख रही है जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है या जिन पर लोगों को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाने की आशंका है। पुलिस अधिकारियों की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लोगों से नियमों का पालन करने की अपील की जा रही है।

    जंतर-मंतर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम

    CJP के दोबारा प्रदर्शन के ऐलान के बाद जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस ने संभावित भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया है।

    केंद्र सरकार की ओर से भी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए जाने की जानकारी है। प्रशासन की प्राथमिकता प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना और अनधिकृत जमावड़े को रोकना है।

    प्रदर्शन से पहले हिरासत केंद्रों की व्यवस्था, पुलिस बल की तैनाती और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाए जाने से राजधानी में सुरक्षा इंतजाम चर्चा में हैं।

  • 30 हजार के जूते और फंडिंग का सवाल, कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से पहले अभिजीत दीपके का बेबाक जवाब

    30 हजार के जूते और फंडिंग का सवाल, कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से पहले अभिजीत दीपके का बेबाक जवाब


    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके एक बार फिर चर्चा में हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2 अक्टूबर से मुंबई में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले उनसे पार्टी की फंडिंग को लेकर सवाल किया गया। जवाब में दीपके ने कहा कि उनकी फंडिंग और चुनाव आयोग से जुड़े उनके आरोपों का आपस में क्या संबंध है। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ फंडिंग का स्रोत बताने से चुनाव व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं आ जाएगा। उनके बयान में उन्होंने अपने महंगे जूतों और विदेश यात्रा का भी जिक्र किया।

    दीपके की पार्टी ने 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी की ओर से इसे जेल भरो आंदोलन बताया गया है। हालांकि मुंबई पुलिस की अनुमति को लेकर विवाद सामने आया है। पुलिस के अनुसार शिवाजी पार्क में आयोजन को लेकर 2013 के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश और क्षेत्र के साइलेंस जोन होने की स्थिति लागू होती है। इसके बावजूद दीपके ने आंदोलन जारी रखने की बात कही है।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब उनसे पूछा गया कि जिस तरह वह चुनाव आयोग से पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं उसी तरह क्या वह अपनी पार्टी की फंडिंग का स्रोत भी सार्वजनिक कर सकते हैं तो दीपके ने सवाल को ही गैरजरूरी बताया। उन्होंने कहा कि अगर वह अपनी सार्वजनिक रूप से आने वाली फंडिंग की जानकारी बता भी दें तो इससे चुनाव कैसे ठीक हो जाएंगे। उन्होंने फंडिंग और चुनाव आयोग से जुड़े उनके आरोपों के बीच संबंध पर सवाल उठाया।

    इसी बातचीत में उनसे यह भी पूछा गया कि इतना बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के लिए संसाधन कहां से आ रहे हैं। इस पर दीपके ने अपने जूतों की कीमत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह 30000 रुपये के जूते पहनते हैं और उन्हें यह बताने में कोई शर्म नहीं है। उन्होंने बताया कि वह अमेरिका भी जा चुके हैं और वहां से भारत लौटकर अलग-अलग राज्यों में यात्रा करने की क्षमता रखते हैं। उनका कहना था कि अगर वह अमेरिका जाने वाली फ्लाइट ले सकते हैं तो मुंबई से दिल्ली तक भी यात्रा कर सकते हैं।

    फंडिंग के सवाल पर उनका यह जवाब ऐसे समय आया है जब कॉकरोच जनता पार्टी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। रिपोर्टों के अनुसार पार्टी की प्रमुख मांगों में ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कुछ मुद्दों पर बदलाव शामिल हैं।

    इससे पहले 1 अक्टूबर को दीपके को मुंबई के मरीन ड्राइव इलाके में समर्थकों के साथ तख्तियां लेकर मौजूद रहने के बाद पुलिस ने कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक उन्हें मरीन ड्राइव थाने ले जाया गया और कुछ देर बाद छोड़ दिया गया। 2 अक्टूबर को भी मुंबई और दिल्ली में चुनाव आयोग से जुड़े विरोध प्रदर्शनों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाए जाने की खबर है।

    दीपके ने कहा है कि मुंबई के बाद आंदोलन को दूसरे शहरों तक ले जाया जाएगा। रिपोर्टों में गोवा बेंगलुरु और कोलकाता समेत अन्य शहरों में प्रदर्शन की योजना का भी उल्लेख है। उन्होंने यह भी कहा है कि अक्टूबर के अंत में दिल्ली के जंतर मंतर पर बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।

    इस तरह फंडिंग और आंदोलन के खर्च को लेकर पूछे गए सवाल पर दीपके का जवाब अब चर्चा में है। उन्होंने अपनी आर्थिक क्षमता का हवाला देते हुए कहा कि महंगे जूते पहनना या विदेश यात्रा करना अपने आप में पार्टी की फंडिंग के स्रोत का जवाब नहीं है। वहीं पार्टी के आंदोलन और उसकी वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े सवाल आगे भी चर्चा का विषय बने रह सकते हैं।