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  • कॉकरोच जनता पार्टी नेताओं ने पीड़ित परिवारों को एक करोड़ मुआवजे और छात्रों पर दर्ज मामलों की वापसी की मांग उठाई

    कॉकरोच जनता पार्टी नेताओं ने पीड़ित परिवारों को एक करोड़ मुआवजे और छात्रों पर दर्ज मामलों की वापसी की मांग उठाई

    नई दिल्ली ।कॉकरोच जनता पार्टी ने छात्रों से जुड़े मुद्दों और कथित तौर पर प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग को लेकर पांच सितंबर को दिल्ली में मार्च निकालने की घोषणा की है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि मार्च इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक निकाला जाएगा। उनके अनुसार, इस कार्यक्रम के जरिए छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और प्रभावित परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग उठाई जाएगी।

    जेन जी से जुड़े एक कार्यक्रम में अभिजीत दीपके के साथ आशुतोष रांका और सौरव दास भी मौजूद थे। बातचीत के दौरान दीपके ने कहा कि संगठन लंबे समय से संबंधित परिवारों के लिए मुआवजे और छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा कि इन मांगों को लेकर पांच सितंबर को मार्च निकाला जाएगा।

    दीपके ने मुआवजे की मांग के पीछे परिवारों की आर्थिक स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों में कई लोग सीमित आय वाले हैं और बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज तक लेते हैं। उन्होंने आकांक्षा चतुर्वेदी के परिवार का उदाहरण देते हुए दावा किया कि उनके पिता ने बेटी की पढ़ाई के लिए कर्ज लिया था और अब परिवार आर्थिक तथा पारिवारिक संकट से गुजर रहा है।

    उनका कहना था कि शिक्षा हासिल करने के लिए कोचिंग और अन्य खर्चों में बड़ी रकम लगती है। ऐसे में किसी परिवार के बच्चे के खोने के बाद आर्थिक सहायता उसके लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। संगठन इसी आधार पर प्रत्येक प्रभावित परिवार को एक करोड़ रुपये की सहायता देने की मांग कर रहा है।

    दूसरी प्रमुख मांग छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की है। दीपके ने कहा कि छात्र शिक्षा से जुड़े अपने अधिकारों की मांग करने के लिए सामने आए थे। संगठन का दावा है कि ऐसे मामलों में दर्ज प्राथमिकी वापस होनी चाहिए। पांच सितंबर के प्रस्तावित मार्च में इन्हीं दोनों मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की बात कही गई है।

    कार्यक्रम के दौरान जयपुर में हुई घटना के संदर्भ में भी नेताओं से सवाल किया गया। आशुतोष रांका ने कहा कि ऐसी घटनाओं को लेकर उन्हें अपने सार्वजनिक कार्यक्रमों से पीछे हटने की चिंता नहीं है। उन्होंने बताया कि संबंधित घटनाक्रम के बाद भी संगठन के लोग राजस्थान के विभिन्न इलाकों में गए और आगे भी लोगों के बीच जाने की योजना है।

    रांका ने यह भी कहा कि संगठन का उद्देश्य चुनाव में लोगों से वोट मांगना नहीं है। उन्होंने राजस्थान में स्कूलों की स्थिति सुधारने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना था कि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलना चाहिए और स्कूलों का संचालन उचित परिस्थितियों में होना चाहिए।

    हिंसा की आशंका से जुड़े सवाल पर अभिजीत दीपके ने अपने और आशुतोष रांका के साथ पहले हुई कथित मारपीट का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वे विरोध के दौरान मारपीट का सामना कर चुके हैं और अब सौरव दास की बारी आने की बात कही। हालांकि, संगठन ने पांच सितंबर के कार्यक्रम को शांतिपूर्ण मार्च बताया है।

    सौरव दास ने चर्चा के दौरान सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों की ओर से पहले किए गए वादों और अदालत में हुई कार्यवाही को संगठन महत्वपूर्ण मानता है। उनका दावा है कि छात्रों से जुड़े मामलों की प्राथमिकी और प्रभावित परिवारों के मुआवजे को लेकर अभी उनकी अपेक्षाएं पूरी नहीं हुई हैं।

    अब पांच सितंबर का प्रस्तावित मार्च संगठन की अगली बड़ी गतिविधि होगी। इसमें छात्रों पर दर्ज मामलों की वापसी और प्रभावित परिवारों को एक करोड़ रुपये की सहायता की मांग प्रमुख रहेगी। कार्यक्रम के दौरान संगठन अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार और प्रशासन के सामने रखने की बात कह रहा है।

  • CJP के कार्यक्रम में हंगामा, ABVP और BJP युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं ने दीवार फांदी; पुलिस ने दो को पकड़ा

    CJP के कार्यक्रम में हंगामा, ABVP और BJP युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं ने दीवार फांदी; पुलिस ने दो को पकड़ा


    नई दिल्ली। जोधपुर में रविवार को CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका के कार्यक्रम के दौरान उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब ABVP और बीजेपी युवा मोर्चा से जुड़े कार्यकर्ता गांधी शांति प्रतिष्ठान परिसर में दीवार फांदकर अंदर पहुंच गए। कार्यक्रम का आयोजन शिक्षा और नई पीढ़ी से जुड़े मुद्दों पर किया गया था। आशुतोष रांका कार्यक्रम में संविधान की किताब लेकर पहुंचे थे। इसी दौरान परिसर के बाहर अचानक विरोध और नारेबाजी का माहौल बन गया। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों में शामिल एक व्यक्ति ने कार्यक्रम स्थल के बाहर मौजूद युवक को थप्पड़ मार दिया और इसके बाद हॉल में प्रवेश करने की कोशिश की गई। स्थिति बिगड़ती देख मौके पर तैनात पुलिसकर्मी तुरंत सक्रिय हुए और दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए रातानाडा थाने ले गए।

    पुलिस के मुताबिक दो लोग दीवार फांदकर कार्यक्रम स्थल के भीतर पहुंचे थे। DCP ईस्ट मनीष चौधरी ने बताया कि दोनों को डिटेन किया गया है और उनसे पूरे घटनाक्रम को लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि कार्यक्रम स्थल में प्रवेश करने और हंगामा करने के पीछे क्या वजह थी तथा क्या किसी तरह की पूर्व योजना के तहत वहां पहुंचा गया था।

    घटना के दौरान कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच भी अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। बताया गया कि ABVP के संयोजक ललित दाधीच और बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता राजवीर बांता को पुलिस मौके से बाहर लेकर गई। हालांकि घटनाक्रम को लेकर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आ सकते हैं और पुलिस की जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट होगी।

    यह विवाद ऐसे समय हुआ है जब CJP की ओर से हाल के दिनों में ‘लीगल कॉकरोचेज’ जैसे विरोध प्रदर्शनों और विभिन्न मुद्दों को लेकर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। आशुतोष रांका का जोधपुर कार्यक्रम भी इसी सिलसिले का हिस्सा बताया गया। कार्यक्रम में शिक्षा और नई पीढ़ी से जुड़े सवालों पर चर्चा होनी थी लेकिन विरोध और हंगामे के चलते माहौल तनावपूर्ण हो गया।

    पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के साथ कार्यक्रम में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद आशुतोष रांका को पुलिस सुरक्षा में जोधपुर से जयपुर रवाना किया गया। पुलिस की मौजूदगी में उन्हें शहर से बाहर ले जाया गया ताकि रास्ते में किसी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा न हो।

    बताया गया है कि CJP के कार्यकर्ताओं का जोधपुर में आगे भी कार्यक्रम प्रस्तावित था। ऐसे में रविवार की घटना के बाद पुलिस की सतर्कता बढ़ गई है। प्रशासन की कोशिश है कि आगामी कार्यक्रमों के दौरान किसी तरह का विवाद या टकराव न हो। फिलहाल पुलिस हिरासत में लिए गए दोनों लोगों से पूछताछ कर रही है और पूरे घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।

  • जंतर-मंतर सीजन 2 की तैयारी के बीच पार्क में जुटे CJP समर्थकों को रेजिडेंट्स ने बैठक से रोका, पुलिस पहुंची

    जंतर-मंतर सीजन 2 की तैयारी के बीच पार्क में जुटे CJP समर्थकों को रेजिडेंट्स ने बैठक से रोका, पुलिस पहुंची

    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनकी टीम से जुड़ा दिल्ली का एक मामला सामने आने के बाद राजनीतिक गतिविधियों और सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार दीपके अपनी टीम के कुछ सदस्यों और समर्थकों के साथ दिल्ली की एक रेजिडेंट सोसाइटी के पार्क में जंतर-मंतर सीजन 2 की तैयारी को लेकर बैठक कर रहे थे। इसी दौरान सोसाइटी के कई निवासी वहां पहुंच गए और बैठक का विरोध किया।

    बताया गया कि दीपके के साथ सौरभ दास, आशुतोष रंका और कुछ समर्थक मौजूद थे। बैठक के दौरान आगामी कार्यक्रम की रणनीति पर चर्चा की जा रही थी। इसी बीच स्थानीय लोगों को वहां राजनीतिक बैठक होने की जानकारी मिली। इसके बाद कई निवासी पार्क में पहुंचे और टीम से बैठक बंद कर वहां से जाने को कहा।

    स्थानीय लोगों की आपत्ति का आधार यह बताया गया कि सोसाइटी का पार्क निवासियों के घूमने और सामान्य गतिविधियों के लिए है। उनका कहना था कि पार्क में धरना या राजनीतिक प्रदर्शन की योजना नहीं बनाई जानी चाहिए। विरोध के दौरान दोनों पक्षों के बीच बहस की स्थिति भी बनी। बाद में पुलिसकर्मियों के हस्तक्षेप के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया और दीपके तथा उनके साथ मौजूद लोगों को पार्क से जाना पड़ा।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अभिजीत दीपके जंतर-मंतर सीजन 2 शुरू करने की बात कह चुके हैं। इससे पहले जून में CJP ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था। उस दौरान संगठन की ओर से केंद्र सरकार और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराया गया था। दीपके ने बाद में आंदोलन को आगे बढ़ाने के संकेत भी दिए थे।

    पार्क में बैठक करने की वजह को लेकर दीपके की ओर से कहा गया कि टीम को दिल्ली में अपने वॉलंटियर्स के साथ बैठक करनी थी। उनके अनुसार इसके लिए इनडोर स्थान तलाशने का प्रयास किया गया था, लेकिन हॉल उपलब्ध कराने में कठिनाई आई। उनका दावा है कि पहले एक हॉल की व्यवस्था हुई थी, लेकिन बाद में वहां भी बैठक की अनुमति नहीं मिली।

    इसके बाद टीम ने सोसाइटी के पार्क में बैठक करने का फैसला किया। दीपके के अनुसार बैठक के दौरान समर्थकों से आंदोलन की आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। इसी दौरान उन्होंने समर्थकों से पूछा कि अब किसके इस्तीफे की मांग की जानी चाहिए। समर्थकों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिया गया।

    पार्क में हुए विरोध के बाद दीपके ने आरोप लगाया कि उनकी टीम को बैठक करने से रोकने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने इसके पीछे बीजेपी का हाथ होने का दावा किया। उनका आरोप है कि लोगों को CJP से दूरी बनाए रखने के लिए डराया धमकाया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

    पूरे घटनाक्रम में एक तरफ सार्वजनिक स्थान के इस्तेमाल को लेकर सोसाइटी के निवासियों की आपत्ति सामने आई, तो दूसरी तरफ CJP ने इसे अपने राजनीतिक कार्यक्रमों को रोकने की कोशिश बताया। मामले में किसी बड़ी झड़प की जानकारी नहीं है और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद स्थिति शांत हुई।

    अभिजीत दीपके की टीम अब जंतर-मंतर सीजन 2 की आगे की रणनीति पर काम करने की बात कह रही है। ऐसे में दिल्ली में उनके अगले कार्यक्रम को लेकर गतिविधियां बढ़ सकती हैं। वहीं, सोसाइटी पार्क की घटना ने राजनीतिक बैठकों के लिए सार्वजनिक और निजी सामुदायिक स्थानों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

  • तमिलनाडु में विजय सरकार ने छात्रों को CJP और वामपंथी प्रदर्शनों से दूर रखने वाला विवादित आदेश वापस लिया

    तमिलनाडु में विजय सरकार ने छात्रों को CJP और वामपंथी प्रदर्शनों से दूर रखने वाला विवादित आदेश वापस लिया

    नई दिल्ली । तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने छात्रों को कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP और वामपंथी संगठनों के प्रदर्शनों में शामिल होने से रोकने वाला अपना निर्देश वापस ले लिया है। सरकार की ओर से यह फैसला 19 अगस्त को लिया गया। इससे पहले 14 अगस्त को कॉलेजिएट शिक्षा निदेशालय की ओर से संबंधित विभागों और संस्थानों को निर्देश जारी किया गया था।

    इस निर्देश में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों तथा युवाओं को राजनीतिक प्रदर्शनों और आंदोलनों में शामिल होने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया था। संबंधित प्रशासनिक और शैक्षणिक अधिकारियों से इस दिशा में कार्रवाई करने की अपेक्षा की गई थी। आदेश सामने आने के बाद तमिलनाडु की राजनीति में इसको लेकर बहस तेज हो गई।

    निर्देश में विशेष रूप से CJP और वामपंथी दलों की ओर से आयोजित आंदोलनों का उल्लेख किया गया था। सरकार का रुख छात्रों को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखने पर केंद्रित था, लेकिन इस व्यवस्था को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल उठने लगे। आलोचकों ने इसे छात्रों की राजनीतिक अभिव्यक्ति और लोकतांत्रिक गतिविधियों में भागीदारी से जोड़कर देखा।

    CJP ने सरकार के इस कदम का विरोध करते हुए निर्देश को असंवैधानिक बताया था। संगठन का कहना था कि छात्रों को किसी खास राजनीतिक आंदोलन में शामिल होने से रोकने के लिए प्रशासनिक निर्देश जारी करना उनके अधिकारों के दायरे से जुड़ा गंभीर विषय है। आदेश वापस लिए जाने के बाद इस विवाद को लेकर सरकार का रुख पहले की तुलना में बदला हुआ दिखाई दिया।

    इस पूरे घटनाक्रम में भारतीय जनता पार्टी की प्रतिक्रिया भी सामने आई थी। भाजपा नेता विनोज पी. सेल्वम ने सरकार के शुरुआती निर्देश का समर्थन करते हुए CJP और वामपंथी संगठनों पर छात्रों को प्रभावित करने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि ऐसे संगठन युवाओं को आंदोलनों में शामिल करते हैं और बाद में उन्हें परिस्थितियों का सामना करने के लिए छोड़ देते हैं।

    तमिलनाडु की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम ने राज्य की राजनीति में नई भूमिका बनाई है। सरकार के गठन में कांग्रेस और वामपंथी दलों के समर्थन का भी राजनीतिक संदर्भ मौजूद है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वामपंथी दलों ने सरकार को समर्थन दिया है, जबकि उनके किसी नेता को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिला है।

    ऐसे में छात्रों को वामपंथी संगठनों और CJP के प्रदर्शनों से दूर रखने वाला निर्देश राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गया था। सरकार द्वारा इसे वापस लेने के बाद अब संबंधित संस्थानों के लिए पहले जारी प्रतिबंधात्मक निर्देश प्रभावी नहीं रहेगा।

    यह घटनाक्रम तमिलनाडु में छात्र राजनीति, राजनीतिक भागीदारी और प्रशासनिक निर्देशों को लेकर चल रही व्यापक बहस के बीच सामने आया है। सरकार का आदेश वापस लेना इस बात का संकेत है कि फिलहाल छात्रों को इन प्रदर्शनों से दूर रखने संबंधी पहले जारी निर्देश को आगे लागू नहीं किया जाएगा।

    हालांकि, राजनीतिक दलों और संगठनों की प्रतिक्रियाओं के बीच यह मुद्दा राज्य की राजनीति में आगे भी चर्चा का विषय बना रह सकता है। सरकार के फैसले ने एक ओर प्रशासनिक स्तर पर जारी निर्देश को समाप्त किया है, वहीं दूसरी ओर छात्रों की राजनीतिक गतिविधियों में भागीदारी और संस्थानों की भूमिका को लेकर नए सवाल भी सामने रखे हैं।

  • सीजेपी समर्थकों ने संगठन में लोकतंत्र की मांग उठाई, कोर टीम से नहीं मिलने पर अभिजीत दीपके पर लगाए आरोप

    सीजेपी समर्थकों ने संगठन में लोकतंत्र की मांग उठाई, कोर टीम से नहीं मिलने पर अभिजीत दीपके पर लगाए आरोप

    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी में संगठनात्मक स्तर पर असंतोष के स्वर सामने आए हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले महीने हुए छात्र आंदोलन में शामिल होने का दावा करने वाले दो युवकों ने शुक्रवार को सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के आवास के बाहर धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने संगठन के कामकाज और आंदोलन की आगे की रणनीति को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

    अहमदाबाद से आए मनीष ब्रह्मभट्ट और राहुल पांड्या ने दीपके के आवास के बाहर पहुंचकर सड़क पर बैठकर विरोध जताया। दोनों युवकों ने दावा किया कि उन्होंने सीजेपी से जुड़े आंदोलन में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था, लेकिन इसके बाद उन्हें संगठन की कोर टीम से मिलने का अवसर नहीं दिया गया। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू किया।

    प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आंदोलन किसी एक व्यक्ति या सीमित समूह तक केंद्रित नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, यह आंदोलन देशभर के युवाओं से जुड़ा हुआ है और इसकी आगे की रणनीति तय करने में आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं और समर्थकों को भी अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।

    मनीष ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि आंदोलन शुरू होने के समय इसका कोई स्पष्ट चेहरा नहीं था और उन्होंने तथा कई अन्य स्वयंसेवकों ने जंतर-मंतर पर आयोजित कार्यक्रम में योगदान दिया था। उनका कहना था कि इसके बाद उन्होंने सीजेपी की टीम से संपर्क कर बैठक में शामिल होने की कोशिश की, लेकिन उन्हें संगठन की बैठक में बुलाया नहीं गया।

    ब्रह्मभट्ट ने संगठन के निर्णय लेने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आंदोलन की आगे की रणनीति केवल कुछ रिश्तेदारों और मित्रों के बीच बैठकर तय नहीं की जानी चाहिए। उनके अनुसार, आंदोलन से जुड़े लोगों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करना और उनके सुझाव सुनना जरूरी है।

    प्रदर्शनकारियों ने सीजेपी में लोकतांत्रिक तरीके से कामकाज की मांग रखी। उनका कहना था कि यदि संगठन युवाओं के नेतृत्व और भागीदारी की बात करता है तो आंदोलन से जुड़े युवाओं को भी अपनी राय रखने और संगठन की दिशा तय करने में योगदान देने का अवसर मिलना चाहिए।

    प्रदर्शन के दौरान युवकों ने अभिजीत दीपके के खिलाफ नाराजगी जताते हुए कहा कि वे संगठन में ऐसी व्यवस्था नहीं चाहते, जिसमें निर्णय सीमित लोगों के स्तर पर लिए जाएं। प्रदर्शनकारियों ने अपने विरोध को आगे भी जारी रखने की बात कही और आवास के बाहर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया।

    मनीष ब्रह्मभट्ट ने यह भी कहा कि युवाओं के नेतृत्व में चलने वाले किसी भी संगठन के लिए पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। उन्होंने आंदोलन से जुड़े अन्य लोगों को भी सुझाव देने और रणनीति पर चर्चा के लिए आमंत्रित किए जाने की मांग की।

    सीजेपी समर्थकों के इस विरोध से संगठन के भीतर नेतृत्व, निर्णय प्रक्रिया और कार्यकर्ताओं की भागीदारी को लेकर बहस शुरू होने के संकेत मिले हैं। फिलहाल प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग यही है कि आंदोलन से जुड़े लोगों को संगठन की बैठकों और रणनीतिक फैसलों में अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए। अभिजीत दीपके की ओर से लगाए गए आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, यह घटनाक्रम का अगला महत्वपूर्ण पहलू होगा।

  • कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके बोले, फिलहाल आंदोलन पर फोकस, जनता चाहेगी तो राजनीति पर करेंगे विचार

    कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके बोले, फिलहाल आंदोलन पर फोकस, जनता चाहेगी तो राजनीति पर करेंगे विचार

    नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपने आंदोलन के अगले चरण की तैयारियां शुरू कर दी हैं। उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ दो दिवसीय बैठक बुलाने का फैसला किया है, जिसमें आंदोलन की आगामी रणनीति, युवाओं तक पहुंच बढ़ाने और संगठन के भविष्य को लेकर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इस बीच राजनीति में उनके संभावित प्रवेश को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं, लेकिन दिपके ने फिलहाल चुनावी राजनीति से दूरी बनाए रखने की बात कही है।

    अभिजीत दिपके ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल के रूप में चुनावी मैदान में उतरना नहीं है। उनका कहना है कि उनकी प्राथमिकता एक ऐसे सामाजिक अभियान को मजबूत करना है, जो आम लोगों, विशेषकर युवाओं की आवाज को प्रभावी ढंग से सामने ला सके। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े निर्णय से पहले समाज की अपेक्षाओं और युवाओं की राय को समझना आवश्यक है।

    उन्होंने बताया कि आगामी बैठक में इस बात पर विशेष चर्चा होगी कि आज के युवा किन मुद्दों को सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं और उन विषयों पर किस प्रकार प्रभावी जनजागरूकता अभियान चलाया जा सकता है। उनके अनुसार, आंदोलन का उद्देश्य केवल विरोध दर्ज कराना नहीं, बल्कि लोगों की समस्याओं को सामने लाकर समाधान की दिशा में सकारात्मक माहौल तैयार करना भी है।

    राजनीति में आने की संभावनाओं पर पूछे गए सवाल के जवाब में दिपके ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि भविष्य में बड़ी संख्या में लोग उनसे चुनाव लड़ने की अपेक्षा जताते हैं और उन्हें व्यापक जनसमर्थन मिलता है, तो उस समय इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी निर्णय का आधार व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि जनता की इच्छा और सामाजिक आवश्यकता होगी।

    दिपके का मानना है कि वर्तमान समय में बड़ी संख्या में युवाओं का भरोसा विभिन्न संस्थाओं और पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था पर पहले जैसा नहीं रहा है। उनका कहना है कि इस स्थिति में सबसे बड़ी जरूरत लोगों का विश्वास दोबारा मजबूत करने की है। उन्होंने जिम्मेदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही पर आधारित जनभागीदारी को लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक बताया।

    उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में संगठन की गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। बैठक में शामिल सदस्य आंदोलन के विस्तार, युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर अभियान चलाने की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेंगे। इसके साथ ही यह भी तय किया जाएगा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों तक पहुंचने और संवाद स्थापित करने के लिए किन माध्यमों का उपयोग किया जाए।

    अभिजीत दिपके ने भरोसा जताया कि यदि उनका अभियान लगातार जनहित के मुद्दों को उठाता रहा और लोगों का समर्थन मिलता रहा, तो भविष्य में संगठन बड़े स्तर पर निर्णय लेने की स्थिति में पहुंच सकता है। उन्होंने दोहराया कि फिलहाल पूरा ध्यान सामाजिक जागरूकता, युवाओं की भागीदारी और जनसरोकारों से जुड़े विषयों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने पर केंद्रित रहेगा।

  • CJP समर्थन के बदले पैसे लेने के आरोपों पर भड़कीं उर्फी जावेद, बोलीं- एक रुपया साबित करो, अकाउंट डिलीट कर दूंगी

    CJP समर्थन के बदले पैसे लेने के आरोपों पर भड़कीं उर्फी जावेद, बोलीं- एक रुपया साबित करो, अकाउंट डिलीट कर दूंगी

    नई दिल्ली । सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और अभिनेत्री उर्फी जावेद एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। इस बार उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने Cockroach Janta Party (CJP) का समर्थन करने के बदले एक लाख रुपये लिए थे। इन आरोपों पर उर्फी ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है और पूरे मामले को पूरी तरह निराधार बताते हुए आरोप लगाने वालों को खुली चुनौती दी है।

    हाल ही में सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने अभियान के समर्थन के लिए कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और चर्चित चेहरों को भुगतान किया था। इसी दावे में उर्फी जावेद का नाम भी शामिल किया गया और आरोप लगाया गया कि उन्हें पार्टी का समर्थन करने के बदले एक लाख रुपये मिले थे। यह दावा सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।

    इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए उर्फी जावेद ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सोशल मीडिया पर संबंधित खबर का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए पहले आश्चर्य व्यक्त किया और फिर वीडियो जारी कर आरोपों का विस्तार से जवाब दिया। उर्फी ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे हैं और उनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।

    उर्फी ने आरोप लगाने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फैजान अंसारी पर भी निशाना साधा। उनका कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब उनके बारे में गलत जानकारी फैलाई गई हो। उन्होंने दावा किया कि पहले भी उनके खिलाफ कई तरह की भ्रामक और असत्य बातें सार्वजनिक की जा चुकी हैं। उर्फी के अनुसार इस तरह के आरोप उनकी छवि खराब करने की कोशिश हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति उनके पेशे और सोशल मीडिया से होने वाली आय को समझता है तो वह ऐसे आरोपों पर आसानी से विश्वास नहीं करेगा। उर्फी ने तंज भरे अंदाज में कहा कि बिना किसी कारण केवल एक लाख रुपये के लिए किसी संगठन का समर्थन करने का आरोप वास्तविकता से मेल नहीं खाता। उनका कहना था कि ऐसे दावे तथ्यों के बजाय केवल अफवाहों पर आधारित हैं।

    उर्फी जावेद ने यह भी दावा किया कि उन्हें इस पूरे घटनाक्रम से आर्थिक नुकसान हुआ है। उनके अनुसार CJP का समर्थन करने के बाद कई ब्रांड्स ने उनके साथ व्यावसायिक साझेदारी समाप्त कर दी, जिससे उन्हें वित्तीय हानि उठानी पड़ी। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी प्रकार का भुगतान नहीं मिला, बल्कि इसके विपरीत उनके काम और कमाई पर असर पड़ा है।

    इस मामले में उर्फी ने मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि किसी भी आरोप को प्रकाशित करने से पहले उसके समर्थन में ठोस प्रमाण होना चाहिए। उन्होंने बिना पर्याप्त साक्ष्यों के केवल दावों के आधार पर खबरें प्रकाशित करने की प्रवृत्ति पर भी आपत्ति जताई।

    उर्फी ने अंत में आरोप लगाने वालों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि कोई यह साबित कर दे कि उन्होंने CJP का समर्थन करने के बदले एक रुपया भी लिया है, तो वह उसी दिन अपना इंस्टाग्राम अकाउंट स्थायी रूप से बंद कर देंगी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया उनके करियर और आय का प्रमुख माध्यम है, लेकिन यदि आरोप सही साबित होते हैं तो वह बिना किसी हिचकिचाहट के अपना अकाउंट हटाने के लिए तैयार हैं। फिलहाल यह विवाद सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं।

  • अभिजीत दीपके के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर ने एफआईआर और गिरफ्तारी की मांग की

    अभिजीत दीपके के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर ने एफआईआर और गिरफ्तारी की मांग की

    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके के खिलाफ दिल्ली पुलिस में एक आवेदन प्रस्तुत किया गया है। सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर फैजान अंसारी ने राष्ट्रीय राजधानी पहुंचकर अभिजीत दीपके के विरुद्ध प्राथमिक दर्ज करने और उन्हें हिरासत में लेने की मांग उठाई है। शिकायत आवेदन में कई संगीन आरोप लगाए गए हैं, यद्यपि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और पुलिस प्रशासन की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक वक्तव्य जारी नहीं हुआ है।

    शिकायतकर्ता फैजान अंसारी ने दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारियों को सौंपे पत्र में कहा कि उन पर अभिजीत दीपके के समर्थकों द्वारा दो अलग-अलग मौकों पर हमला किया गया। उनके अनुसार पहली घटना पुणे में और दूसरी औरंगाबाद में घटित हुई, जिनके संदर्भ में स्थानीय थानों में पूर्व में ही सूचना दी जा चुकी है। उन्होंने इन घटनाओं से जुड़े साक्ष्य होने का दावा करते हुए दिल्ली पुलिस से त्वरित वैधानिक कदम उठाने का अनुरोध किया है।

    आवेदन में अभिजीत दीपके पर कई अन्य गंभीर आक्षेप भी मढ़े गए हैं। इसमें उन्हें पाकिस्तान का एजेंट बताने के साथ-साथ उमर खालिद का समर्थन करने का आरोप लगाया गया है। इसके अतिरिक्त यह दावा भी किया गया है कि विगत आंदोलनों में कुछ नामचीन हस्तियों को धनराशि देकर आमंत्रित किया गया था। हालांकि, किसी भी प्रशासनिक या न्यायिक संस्था ने इन आरोपों का समर्थन नहीं किया है और न ही अभिजीत दीपके की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान आया है।

    फैजान अंसारी ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे विशेष रूप से मुंबई से दिल्ली केवल इस आवेदन को सौंपने आए हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए चेतावनी दी कि समय पर उचित कार्रवाई न होने से स्थिति बिगड़ सकती है। मध्य प्रदेश समेत देशभर के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इस पूरे घटनाक्रम की चर्चाएं तेज हो गई हैं, लेकिन यह पूरी तरह से एकपक्षीय आरोपों पर आधारित मामला है।

    यह विवाद ऐसे वक्त सामने आया है जब सीजेपी और अभिजीत दीपके पूर्व में आयोजित आंदोलनों के कारण सार्वजनिक रूप से चर्चा का केंद्र रहे हैं। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों के दौरान भी उनके संगठन की भूमिका पर बात हुई थी। फिलहाल दिल्ली पुलिस को प्राप्त शिकायत की समीक्षा की जा रही है और प्राथमिक जांच के पश्चात ही अगली विधिक प्रक्रिया तय होगी। जांच पूर्ण होने तक इन दावों को अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता।

  • PM केयर्स फंड पर उठे सवालों के बीच CJP का पलटवार, RTI शिकायतों को बताया राजनीतिक एजेंडा

    PM केयर्स फंड पर उठे सवालों के बीच CJP का पलटवार, RTI शिकायतों को बताया राजनीतिक एजेंडा


    नई दिल्ली । कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) की फंडिंग और उसके संस्थापक अभिजीत दिपके के परिवार की आर्थिक स्थिति की जांच की मांग को लेकर दायर शिकायतों के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पार्टी ने इन शिकायतों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए तीखा पलटवार किया है। पार्टी की प्रवक्ता वैष्णवी गौर ने कहा कि यदि पारदर्शिता और जवाबदेही की बात की जा रही है तो केवल एक संगठन या व्यक्ति को निशाना बनाने के बजाय सभी मामलों की समान रूप से जांच होनी चाहिए। उन्होंने इस दौरान पीएम केयर्स फंड का भी उल्लेख किया और उस पर जांच की मांग उठाते हुए तंज भरी टिप्पणी की कि “पीएम माफ कर देंगे, चिंता मत करो।”

    पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब सूरत निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने 1 अगस्त को भारत निर्वाचन आयोग, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) और महाराष्ट्र सरकार सहित कई सरकारी संस्थाओं को शिकायत भेजी। शिकायत में उन्होंने CJP की फंडिंग के स्रोत, पार्टी की कानूनी स्थिति और संस्थापक अभिजीत दिपके के पिता भगवानराव दिपके की आर्थिक स्थिति की जांच कराने की मांग की। शिकायत में यह भी कहा गया कि यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।

    अमित तिवारी ने अपनी शिकायत में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल द्वारा घोषित एक करोड़ रुपये के लीगल डिफेंस फंड का भी उल्लेख किया। उन्होंने मांग की कि इस फंड पर लागू कर नियमों की समीक्षा की जाए और आवश्यकता होने पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाए जाने के पहलू की भी जांच की जाए। शिकायत में विभिन्न सरकारी एजेंसियों से पूरे मामले की विस्तृत पड़ताल करने का अनुरोध किया गया है।

    इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए CJP की प्रवक्ता वैष्णवी गौर ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी निजी व्यक्ति की शिक्षा, पारिवारिक खर्च या व्यक्तिगत आर्थिक स्थिति को राजनीतिक विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है। उनके अनुसार इस तरह की शिकायतें तथ्यों से अधिक राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित दिखाई देती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना ही उद्देश्य है तो सभी संस्थाओं और फंडों पर समान मानदंड लागू होने चाहिए।

    पार्टी ने अपने आधिकारिक रुख में कहा कि उसकी फंडिंग और कानूनी स्थिति को लेकर लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं और उन्हें राजनीतिक एजेंडे के तहत उछाला जा रहा है। CJP का कहना है कि वह कानून के दायरे में काम कर रही है और यदि किसी सक्षम एजेंसी द्वारा कोई वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जाती है तो पार्टी पूरा सहयोग करेगी। साथ ही पार्टी ने आरोप लगाया कि चुनिंदा संगठनों और व्यक्तियों को निशाना बनाकर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।

    फिलहाल इस पूरे मामले में भारत निर्वाचन आयोग, सीबीआईसी, महाराष्ट्र सरकार या अन्य संबंधित सरकारी एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिकायतों पर जांच शुरू हुई है या नहीं, इस संबंध में भी अभी तक कोई सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। ऐसे में अब निगाहें संबंधित एजेंसियों के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि मामले में किसी प्रकार की जांच शुरू होती है तो उसके निष्कर्षों के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल यह विवाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के रूप में चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • पीएम मोदी पर टिप्पणी करने वाली नाबालिग की माफी के बाद कंगना रनौत ने माता-पिता से की बच्चों को वैचारिक प्रभाव से बचाने की अपील

    पीएम मोदी पर टिप्पणी करने वाली नाबालिग की माफी के बाद कंगना रनौत ने माता-पिता से की बच्चों को वैचारिक प्रभाव से बचाने की अपील

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में माफी मांगने वाली 15 वर्षीय नाबालिग लड़की से जुड़ा विवाद अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया देते हुए अभिभावकों से अपने बच्चों के मार्गदर्शन पर विशेष ध्यान देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किशोर उम्र के बच्चों को गलत संगत और ऐसे वैचारिक प्रभावों से बचाने की आवश्यकता है, जो उन्हें भड़काऊ या अनुचित व्यवहार की ओर ले जा सकते हैं।

    कंगना रनौत ने अपने सोशल मीडिया संदेश में कहा कि संबंधित किशोरी स्वयं यह स्वीकार कर रही है कि वह पहले कभी प्रधानमंत्री के खिलाफ कोई पोस्ट या टिप्पणी नहीं करती थी, लेकिन विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों के कहने पर उसने आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों के सामाजिक और वैचारिक परिवेश पर ध्यान दें तथा उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए सही दिशा प्रदान करें। उन्होंने अपने संदेश में कुछ वैचारिक समूहों की आलोचना करते हुए समाज से आत्ममंथन की भी अपील की।

    यह विवाद उस समय सामने आया जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में एक नाबालिग लड़की प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करती दिखाई दी। वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया और इसके संबंध में कानूनी कार्रवाई भी शुरू हुई।

    मामले में नोएडा के एक्सप्रेसवे थाना क्षेत्र में एक महिला की शिकायत पर जीरो एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक और सार्वजनिक शांति को प्रभावित करने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया। बाद में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मामला दिल्ली पुलिस को स्थानांतरित कर दिया गया, जहां संबंधित तथ्यों और शिकायत की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।

    विवाद के बीच 15 वर्षीय लड़की ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उसने कहा कि वह अपने दोस्तों के साथ कनॉट प्लेस गई थी, जहां कुछ लोगों ने उसे आपत्तिजनक नारे और शब्द दोहराने के लिए उकसाया। उसने स्वीकार किया कि उससे गंभीर गलती हुई और वह अपने व्यवहार को लेकर बेहद शर्मिंदा है। किशोरी ने देशवासियों से क्षमा मांगते हुए भरोसा दिलाया कि भविष्य में वह ऐसी गलती दोबारा नहीं करेगी।

    इस पूरे घटनाक्रम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके साथ-साथ उनकी दिवंगत मां के लिए भी अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया, जिससे उन्हें दुख पहुंचा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई बच्चा गुमराह होकर ऐसी गलती करता है तो उसे सही मार्ग दिखाने का प्रयास होना चाहिए। उन्होंने ऐसे बच्चों को माफ करने और उन्हें सकारात्मक दिशा देने की बात कही।

    दूसरी ओर, विरोध प्रदर्शन से जुड़े संगठन के प्रतिनिधियों ने इस मामले में दर्ज शिकायत पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि अपमानजनक भाषा के मामलों में कानूनी कार्रवाई की जा रही है, तो सभी पक्षों के लिए समान मानदंड अपनाए जाने चाहिए। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और संबंधित एजेंसियां उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी कर रही हैं। इस बीच, नाबालिग की माफी, कंगना रनौत की प्रतिक्रिया और प्रधानमंत्री की अपील ने इस मुद्दे को सामाजिक, राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बना दिया है।