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  • तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद CJP से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस का नोटिस

    तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद CJP से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस का नोटिस

    नई दिल्ली । दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका को नोटिस जारी किया है। दोनों को तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया है। इसके अलावा, अजिंक्य शिंदे को भी पूछताछ के लिए तलब किया गया है। पुलिस इस मामले में कथित सरकारी आदेश के उल्लंघन और जंतर-मंतर पहुंचने के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संपत्ति में अनधिकृत प्रवेश से जुड़े आरोपों की जांच कर रही है।

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सौरव दास और आशुतोष रांका को जेल से रिहा होने के बाद नोटिस भेजे गए। वहीं, अजिंक्य शिंदे को भी जांच प्रक्रिया में शामिल होने के लिए समन जारी किया गया है। क्राइम ब्रांच तीनों से संबंधित घटनाक्रम और आरोपों के बारे में जानकारी जुटाना चाहती है। पूछताछ के दौरान पुलिस यह समझने की कोशिश कर सकती है कि कथित घटना किन परिस्थितियों में हुई और संबंधित लोगों की इसमें क्या भूमिका रही।

    मामले का संबंध कथित तौर पर सरकारी आदेश का पालन नहीं करने और जंतर-मंतर पहुंचने के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संपत्ति में बिना अनुमति प्रवेश करने के आरोपों से बताया गया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में कथित उल्लंघन से जुड़े घटनाक्रम का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है। इसलिए इन आरोपों को फिलहाल जांच का विषय माना जाना चाहिए। किसी व्यक्ति को पूछताछ के लिए बुलाया जाना अपने आप में आरोप साबित होने या दोषी ठहराए जाने के समान नहीं है।

    क्राइम ब्रांच की ओर से की जा रही पूछताछ का उद्देश्य मामले से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करना और संबंधित लोगों के बयान दर्ज करना हो सकता है। पुलिस तीनों से घटना के क्रम, कथित सरकारी आदेश और संपत्ति में प्रवेश से जुड़े पहलुओं पर सवाल कर सकती है। हालांकि, पूछताछ में किन विशिष्ट सवालों पर ध्यान दिया जाएगा, इसकी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

    इस मामले में कानूनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए पुलिस के आधिकारिक नोटिस, संबंधित दस्तावेजों और लागू कानूनी प्रावधानों की जानकारी महत्वपूर्ण होगी। उपलब्ध विवरण में यह पुष्टि नहीं की गई है कि तीनों के खिलाफ किन धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में किसी विशिष्ट अपराध या कानूनी निष्कर्ष का दावा करना उचित नहीं होगा।

    सौरव दास और आशुतोष रांका की तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद नोटिस जारी होने तथा अजिंक्य शिंदे को तलब किए जाने से मामले की जांच आगे बढ़ने का संकेत मिलता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पूछताछ के बाद पुलिस क्या कदम उठाएगी या जांच में कौन-से नए तथ्य सामने आएंगे।

    फिलहाल, मामले में तीनों को जांच में शामिल होने के लिए बुलाए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान या नोटिस की पूरी जानकारी सामने आने पर आरोपों की प्रकृति, जांच के दायरे और आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

  • CJP की तिरंगा मार्च से पहले अभिजीत दिपके का दावा, कहा- पुलिस हिरासत में ले सकती है

    CJP की तिरंगा मार्च से पहले अभिजीत दिपके का दावा, कहा- पुलिस हिरासत में ले सकती है


    नई दिल्ली। दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित तिरंगा मार्च से पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दावा किया है कि कुछ बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियां उनका पीछा कर रही हैं और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के कर्मचारी उनके घर की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई कि दिल्ली पुलिस गुरुवार रात या शुक्रवार सुबह उन्हें हिरासत में ले सकती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिपके ने कहा कि पार्टी के सदस्य शुक्रवार को शांतिपूर्वक तिरंगा लहराने जाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए जेल जाना पड़े, तो वे इसके लिए भी तैयार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तिरंगा लहराने के मामले में CJP के सहयोगियों सौरव दास और आशुतोष रांका को गिरफ्तार किया गया था।

    सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च निकालने की तैयारी

    CJP ने अपने समर्थकों और आम लोगों से शुक्रवार को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में जुटने की अपील की है। पार्टी यहां तिरंगा लहराकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध जताना चाहती है। यह विरोध मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर है।

    दिपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पार्टी शांतिपूर्वक तिरंगा लहराएगी। उन्होंने कहा कि यदि राष्ट्रीय ध्वज फहराना अपराध माना जाता है, तो वे जेल जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि तिरंगा लहराने के लिए किसी को अपराधी मानना गलत है।

    16 और 17 अक्टूबर को बंद रहेगा सेंट्रल पार्क

    तिरंगा मार्च की घोषणा के बीच नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने गुरुवार को बताया कि कनॉट प्लेस का सेंट्रल पार्क 16 और 17 अक्टूबर को बंद रहेगा। इसी स्थान पर CJP ने अपना कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई थी।

    पार्क बंद रखने के फैसले पर दिपके ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी 100 अलग-अलग जगहों पर तिरंगा लहराने का ऐलान कर दे, तो क्या प्रशासन सभी 100 स्थानों को बंद कर देगा? उन्होंने यह भी पूछा कि यदि किसी राजनीतिक रैली में लोग तिरंगा लेकर पहुंचें, तो क्या उस रैली को भी रद्द कर दिया जाएगा?

    ‘पुलिस कार्रवाई से डरने वाले नहीं’

    अभिजीत दिपके ने दावा किया कि बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियां उनका पीछा कर रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि IB के कर्मचारी उनके घर के बाहर तैनात चौकीदार से उनके बारे में जानकारी जुटा रहे थे। दिपके ने आशंका जताई कि पुलिस उन्हें गुरुवार रात या शुक्रवार सुबह हिरासत में ले सकती है। उन्होंने कहा कि वे ऐसी कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं और अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए दिपके ने कहा कि उनकी पार्टी सरकार बदलने की मांग नहीं कर रही है। CJP की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए और उनकी जगह किसी दूसरे व्यक्ति की नियुक्ति स्वतंत्र एवं निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत की जाए।

    मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग पर सवाल

    दिपके ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अन्य चुनाव आयुक्तों की बात भी नहीं सुन रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग करना क्या अपराध है।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिपके ने देश में आपातकाल जैसे हालात होने का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आपातकाल घोषित नहीं कर रहे, क्योंकि इससे उनकी छवि को नुकसान पहुंच सकता है।

    CJP के तिरंगा मार्च, सेंट्रल पार्क को बंद रखने के फैसले और पुलिस हिरासत की आशंका को लेकर दिपके के बयान ऐसे समय आए हैं, जब पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने की तैयारी कर रही है। हालांकि, उनके पीछा किए जाने और निगरानी संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

  • जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने पर CJP प्रवक्ता सौरव दास ने उठाए सवाल, शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर जताई चिंता

    जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने पर CJP प्रवक्ता सौरव दास ने उठाए सवाल, शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर जताई चिंता

    नई दिल्ली ।दिल्ली में धरना-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों को लेकर किए गए बदलाव के बाद जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया है। इस फैसले पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस निर्णय पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए पूछा कि आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जंतर-मंतर से क्यों डरते हैं। दास ने कहा कि जंतर-मंतर भारत के लोगों का है और इस तरह के फैसले से शांतिपूर्ण विरोध करने के अधिकार को लेकर सवाल खड़े होते हैं।

    सौरव दास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट साझा कर इस बदलाव पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल किया कि क्या गृह मंत्रालय ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का निर्णय लेने से पहले देश के लोगों से सलाह ली थी। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या इस फैसले से जुड़े किसी हितधारक या संगठन से विचार-विमर्श किया गया। दास ने अपने बयान में निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह का कदम उठाने से पहले संबंधित पक्षों की राय जानना जरूरी है।

    अपने पोस्ट में दास ने केंद्र सरकार के फैसले को लेकर कड़ी टिप्पणी भी की। उन्होंने लिखा कि जिस तरह जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित सूची से हटाया जा रहा है, उसी तरह प्रधानमंत्री जल्द ही भारत में लोकतंत्र को भी अधिसूचित सूची से बाहर कर देंगे। उन्होंने इस कार्रवाई को उस दिशा में शुरुआत बताया। दास ने कहा कि उनकी पार्टी इस फैसले को स्वीकार नहीं करती और इसे मनमाना निर्णय मानती है। हालांकि, लोकतंत्र को लेकर की गई उनकी टिप्पणी उनके राजनीतिक विरोध और फैसले पर व्यक्त की गई प्रतिक्रिया का हिस्सा है।

    सौरव दास ने अपने बयान में विरोध करने और शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने के अधिकार का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाना लोगों के मौलिक अधिकारों पर हमला है। उन्होंने इस फैसले के विरोध में कहा कि अब पूरा देश ही जंतर-मंतर बन रहा है। उनकी इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि किसी एक स्थान पर प्रदर्शन की व्यवस्था में बदलाव होने के बावजूद विरोध की भावना समाप्त नहीं होगी।

    दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन आयोजित करने के लिए तीन वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए हैं। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान शामिल हैं। इन स्थानों पर प्रदर्शन करने वाले लोगों को संबंधित नियमों और अनुमति की शर्तों का पालन करना होगा। इस तरह जंतर-मंतर को सूची से हटाए जाने के बाद राजधानी में प्रदर्शन के लिए इन तीन जगहों का विकल्प उपलब्ध कराया गया है।

    जंतर-मंतर लंबे समय से दिल्ली में धरना-प्रदर्शन और विरोध दर्ज कराने का प्रमुख केंद्र रहा है। विभिन्न मुद्दों पर अपनी मांगें रखने के लिए लोग यहां जुटते रहे हैं। ऐसे में इसे आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले पर सौरव दास की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने निर्णय की प्रक्रिया, संबंधित पक्षों से परामर्श और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान को वैकल्पिक स्थान के रूप में निर्धारित किया गया है, जहां नियमों और अनुमति संबंधी शर्तों के अनुसार प्रदर्शन किए जा सकेंगे।

  • दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन से 2000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित, बाजारों से होटल और पर्यटन उद्योग तक पड़ा असर

    दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन से 2000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित, बाजारों से होटल और पर्यटन उद्योग तक पड़ा असर


    नई दिल्ली ।
    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन और सुरक्षा पाबंदियों का व्यापक असर व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ा। व्यापारिक संगठन चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) के अनुसार, एक दिन के दौरान दिल्ली में करीब 2000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ। प्रदर्शन के दौरान प्रमुख बाजारों, मेट्रो स्टेशनों और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था सख्त किए जाने से आम लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। इसका असर त्योहारी सीजन की शुरुआत में व्यापारियों के कारोबार पर पड़ा।

    सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, प्रदर्शन के कारण हुए आर्थिक नुकसान का असर केवल खुदरा कारोबार तक सीमित नहीं रहा। सेवा क्षेत्र, होटल और आतिथ्य उद्योग, परिवहन तथा पर्यटन सहित कई क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। संगठन ने 10 अक्टूबर को हुए नुकसान का अनुमान करीब 2000 करोड़ रुपये लगाया है। इस दौरान पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों की आवाजाही कम रही। होटल, रेस्तरां, सिनेमा हॉल, ब्यूटी पार्लर और सैलून में भी पहले से की गई बुकिंग बड़े स्तर पर रद्द होने की जानकारी सामने आई।

    दिल्ली के कई प्रमुख बाजारों में कारोबार सामान्य रूप से नहीं चल सका। सुरक्षा प्रतिबंधों और यातायात जाम की आशंका के कारण सदर बाजार, चांदनी चौक, चावड़ी बाजार, कनॉट प्लेस, करोल बाग और लाजपत राय मार्केट जैसे व्यावसायिक केंद्रों में गतिविधियां प्रभावित रहीं। इन बाजारों में दिल्ली के साथ-साथ आसपास के शहरों से भी बड़ी संख्या में ग्राहक खरीदारी के लिए आते हैं। प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था के चलते इस बार उनकी आवाजाही पर असर पड़ा।

    सीटीआई के अनुसार, दिल्ली के बाहर से प्रतिदिन आने वाले करीब तीन से चार लाख खरीदार 10 अक्टूबर को राजधानी नहीं पहुंच सके। वहीं, सुरक्षा संबंधी आशंकाओं के कारण स्थानीय लोग भी घरों से निकलने से बचते रहे। मेट्रो स्टेशनों के बंद रहने से लोगों की आवाजाही और बाजारों तक पहुंचने में भी परेशानी हुई। ग्राहकों की संख्या घटने से खुदरा व्यापार के अलावा परिवहन और अन्य सेवाओं से जुड़े कारोबार पर भी दबाव पड़ा।

    व्यापारियों को होने वाले नुकसान को देखते हुए सीटीआई ने सीजेपी सहित सभी राजनीतिक दलों से दिवाली तक दिल्ली में धरना-प्रदर्शन नहीं करने की अपील की है। संगठन ने इस संबंध में राजनीतिक दलों को पत्र लिखकर मांग की है कि त्योहारों के दौरान राजधानी में विरोध कार्यक्रम आयोजित करने से बचा जाए। सीटीआई का कहना है कि नवरात्र और रामलीलाओं का आयोजन शुरू हो चुका है। यह अवधि दिल्ली के करीब 20 लाख व्यापारियों के लिए साल के सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी समय में शामिल है।

    संगठन ने दिल्ली में आयोजित होने वाली करीब 650 रामलीलाओं का भी उल्लेख किया। इन आयोजनों से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है और त्योहारों के दौरान विभिन्न कारोबारों को ग्राहकों की बढ़ी हुई आवाजाही से लाभ होता है। सीटीआई के अनुसार, यदि सड़कों और मेट्रो सेवाओं पर प्रतिबंधों का असर जारी रहता है, तो त्योहारों से जुड़े व्यापार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी वजह से संगठन ने राजनीतिक दलों को सुझाव दिया है कि यदि उन्हें प्रदर्शन करना है, तो दिवाली तक दिल्ली के बजाय किसी दूसरे शहर को आयोजन स्थल के रूप में चुना जाए। संगठन की अपील का उद्देश्य त्योहारों के दौरान व्यापारिक गतिविधियों और राजधानी की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना है।

  • दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा कड़ी, पुलिस ने दर्ज कीं 20 एफआईआर, जंतर-मंतर पर विरोध के बीच कई नेता हिरासत में

    दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा कड़ी, पुलिस ने दर्ज कीं 20 एफआईआर, जंतर-मंतर पर विरोध के बीच कई नेता हिरासत में

    नई दिल्ली । दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का विरोध प्रदर्शन रविवार, 11 अक्टूबर को भी जारी रहने वाला है। पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शन करने की योजना बनाई। प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। पुलिस ने इस मामले में 20 एफआईआर दर्ज की हैं। वहीं, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू की गई है। प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम के बीच दिल्ली के कई इलाकों में पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है।

    शनिवार को प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के बाद रविवार को भी विरोध प्रदर्शन को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। नई दिल्ली और मध्य दिल्ली में यातायात प्रभावित होने की आशंका के मद्देनजर लोगों को रास्तों पर पाबंदियों के बारे में चेतावनी दी गई है। सुरक्षा प्रबंधों के तहत बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जानकारी भी सामने आई है। प्रदर्शन के दौरान कनॉट प्लेस के इनर सर्कल में एकत्र हुए कुछ प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कार्रवाई को लेकर तनाव की स्थिति बनी।

    प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम में सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके की रिहाई की भी जानकारी सामने आई। रिहा होने के बाद वह अपने घर लौट गए। वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद जॉन ब्रिटास की दिल्ली पुलिस के जवानों से बहस हो गई। पुलिस जब उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश कर रही थी, तब दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। प्रदर्शन को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।

    आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल राय ने प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने इसे भारत के राजनीतिक इतिहास का काला दिन बताते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने देश पर ‘काली इमरजेंसी’ थोप दी है। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने ट्रेनों के रद्द होने और दिल्ली मेट्रो के बड़े पैमाने पर बंद रहने का भी उल्लेख किया। गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती लोकतांत्रिक इतिहास के लिए बड़ा झटका है। ये आरोप उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।

    मेट्रो सेवाओं और इंटरनेट को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि मेट्रो सामान्य रूप से चले और इंटरनेट सेवाओं में कोई बाधा न आए। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि 10 अक्टूबर को मेट्रो नेटवर्क के कुल 303 स्टेशनों में से 45 पर ही प्रवेश और निकास पर रोक लगाई गई थी। मेट्रो संचालन को लेकर यह जानकारी अदालत के समक्ष रखी गई।

    इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त एक स्वतंत्र संस्था का हिस्सा हैं और उन्हें अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेने चाहिए। खड़गे के अनुसार, उन्हें फैसले लेने की पूरी आजादी नहीं मिल रही है। उन्होंने ‘वोट चोरी’ और लोकतंत्र के साथ धोखे के खिलाफ लड़ाई जारी रखने की बात भी कही। प्रदर्शन और उससे जुड़ी राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच दिल्ली में सुरक्षा, यातायात और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

  • अजिंक्य शिंदे कौन हैं, सीजेपी नेताओं की हिरासत के बाद जंतर-मंतर प्रदर्शन की जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई उन्हें

    अजिंक्य शिंदे कौन हैं, सीजेपी नेताओं की हिरासत के बाद जंतर-मंतर प्रदर्शन की जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई उन्हें

    नई दिल्ली ।कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, प्रवक्ता आशुतोष रांका और सह-संयोजक सौरव दास को दिल्ली एयरपोर्ट पर पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस घटनाक्रम के बाद प्रदर्शन के नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे। इसी बीच अभिजीत दीपके का पहले से रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी गैरमौजूदगी में पार्टी के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे आंदोलन का नेतृत्व करेंगे। इसके बाद शिंदे की राजनीतिक पृष्ठभूमि, पार्टी में उनकी भूमिका और आम आदमी पार्टी से उनके पुराने संबंधों को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

    अजिंक्य शिंदे मूल रूप से महाराष्ट्र के अलिबाग के रहने वाले हैं। उनके माता-पिता खेती-किसानी करते हैं। उनकी उम्र 35 वर्ष बताई गई है और उनका संबंध महाराष्ट्र के लातूर से भी बताया गया है। शिंदे ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, लोनेरे से बीटेक की पढ़ाई पूरी की है। राजनीति में आने से पहले वह पुणे की एक सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी में नौकरी करते थे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने वर्ष 2016 में नौकरी छोड़कर पूर्णकालिक सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में काम करना शुरू किया था। तकनीकी शिक्षा के बाद राजनीति में उनकी सक्रियता ने उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारियों तक पहुंचाया।

    अजिंक्य शिंदे का आम आदमी पार्टी से भी जुड़ाव रहा है। वह महाराष्ट्र में पार्टी की युवा इकाई के प्रदेश संयोजक के तौर पर काम कर चुके हैं। इसके अलावा, उन्हें गोवा में आम आदमी पार्टी का सह-प्रभारी भी बनाया गया था। उनके सोशल मीडिया खातों पर वर्ष 2024 तक आम आदमी पार्टी के समर्थन में की गई पोस्ट मौजूद होने की जानकारी दी गई है। सीजेपी में उनकी मौजूदा भूमिका और आम आदमी पार्टी में पहले निभाई गई जिम्मेदारियों के कारण दोनों संगठनों के बीच संभावित राजनीतिक संबंधों को लेकर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को अपने आप में दोनों दलों के बीच सीधे संबंध का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

    सीजेपी में अजिंक्य शिंदे को 6 अगस्त 2026 को घोषित राष्ट्रीय कार्यसमिति के दौरान राष्ट्रीय संगठन प्रभारी नियुक्त किया गया था। यह पद पार्टी के संगठनात्मक कामकाज में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से जुड़ा है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सार्वजनिक रूप से शिंदे को दीपके का मार्गदर्शक बताया है। इससे पार्टी के भीतर उनके प्रभाव और नेतृत्व से जुड़े संबंधों का संकेत मिलता है। संगठन में उनकी जिम्मेदारी केवल पद तक सीमित नहीं रही। जून से 25 जुलाई 2026 के बीच दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी के प्रदर्शनों में भीड़ प्रबंधन, स्वयंसेवकों के समन्वय और पर्दे के पीछे की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी भी उनके पास होने की जानकारी सामने आई है।

    10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले तीन प्रमुख नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद शिंदे की भूमिका और अहम हो गई। अभिजीत दीपके ने अपने पहले से रिकॉर्ड किए गए वीडियो में कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि उनकी अनुपस्थिति में आंदोलन को अजिंक्य शिंदे के नेतृत्व में आगे बढ़ाया जाए। इस घोषणा के बाद शिंदे को प्रदर्शन की कमान संभालने वाले नेता के रूप में देखा जा रहा है। संगठनात्मक प्रबंधन और पहले के प्रदर्शनों में उनकी भूमिका को देखते हुए पार्टी ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है।

    अब जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में अजिंक्य शिंदे की भूमिका पर नजर रहेगी। सीजेपी के शीर्ष नेताओं की हिरासत के बीच उन्हें कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करने और आंदोलन की व्यवस्थाएं संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और पाबंदियों के बीच पार्टी अपने कार्यक्रम को किस तरह आगे बढ़ाती है, यह आगे की गतिविधियों से स्पष्ट होगा।

  • दिल्ली एयरपोर्ट पर सीजेपी नेताओं को हिरासत में लेने के दौरान विमान में महिला यात्री और सौरव दास के बीच तीखी बहस, वीडियो वायरल

    दिल्ली एयरपोर्ट पर सीजेपी नेताओं को हिरासत में लेने के दौरान विमान में महिला यात्री और सौरव दास के बीच तीखी बहस, वीडियो वायरल

    नई दिल्ली । दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं को विमान के भीतर से हिरासत में लिए जाने के दौरान विवाद सामने आया। इस कार्रवाई के समय पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास और एक महिला यात्री के बीच तीखी बहस हो गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सीजेपी के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के विरोध में जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे थे।

    विमान के एयरपोर्ट पर उतरने के बाद दिल्ली पुलिस की टीम उसके भीतर पहुंची। पुलिस ने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिया। इसी दौरान विमान में मौजूद यात्रियों और पार्टी नेताओं के बीच बहस की स्थिति बनी। सामने आए वीडियो में पुलिसकर्मियों को सौरव दास को विमान से बाहर ले जाते हुए देखा जा सकता है। उसी समय एक महिला यात्री उनसे कुछ कहती दिखाई देती है, जिसके बाद दोनों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो जाती है।

    वीडियो में महिला यात्री सौरव दास से नाराजगी जताते हुए उन्हें “शर्म करो” कहती सुनाई देती है। इससे पहले दास भी तल्ख लहजे में प्रतिक्रिया देते नजर आते हैं। इसके बाद महिला यात्री की नाराजगी और बढ़ जाती है। फुटेज के एक हिस्से में पुलिस अधिकारियों के विमान में दाखिल होने के दौरान महिला यात्री को हंसते हुए भी देखा जा सकता है। हालांकि, उपलब्ध वीडियो से यह स्पष्ट नहीं होता कि महिला और सौरव दास के बीच बहस किस बात को लेकर शुरू हुई थी। इस विवाद के कारणों की पुष्टि नहीं हुई है।

    इस घटनाक्रम के दौरान सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके भी पुलिस की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते दिखाई देते हैं। उनके इंस्टाग्राम लाइव से सामने आए वीडियो में महिला पुलिसकर्मियों समेत पुलिस टीम को विमान के भीतर उनकी ओर बढ़ते देखा जा सकता है। दीपके कहते सुनाई देते हैं कि दिल्ली पुलिस विमान में आ गई है और उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है। इसके बाद वह कहते हैं कि वे गिरफ्तार होने के लिए ही आए हैं और पुलिस को उन्हें गिरफ्तार कर लेना चाहिए।

    वीडियो में अभिजीत दीपके पुलिसकर्मियों के सामने “इंकलाब जिंदाबाद” के नारे लगाते भी सुनाई देते हैं। उनका यह बयान और विमान के भीतर पुलिस की कार्रवाई से जुड़े दृश्य घटना के प्रमुख हिस्से के रूप में सामने आए हैं। इस दौरान पार्टी के अन्य नेताओं को भी हिरासत में लिया गया। पूरी कार्रवाई उस समय हुई, जब सीजेपी के नेता चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के एसआईआर से जुड़े मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए राजधानी पहुंचे थे।

    प्रदर्शन को लेकर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस ने बिना पूर्व अनुमति प्रदर्शन या अनधिकृत सभा आयोजित करने पर रोक से संबंधित सुरक्षा कारणों का हवाला दिया। इसी के तहत नेताओं को एयरपोर्ट पर ही रोककर हिरासत में लिया गया। हालांकि, इस मामले में पुलिस कार्रवाई से संबंधित विस्तृत कानूनी जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए हिरासत के आधार और आगे की प्रक्रिया को लेकर इससे अधिक निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

    विमान के भीतर हुई बहस और सीजेपी नेताओं को हिरासत में लिए जाने के वीडियो सामने आने के बाद घटना को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। सीजेपी समर्थक पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कुछ प्रतिक्रियाओं में विमान के भीतर हुए विवाद और सह-यात्रियों को हुई संभावित असुविधा पर चर्चा की जा रही है। महिला यात्री और सौरव दास के बीच बहस की वजह स्पष्ट नहीं होने के कारण विवाद के मूल कारण को लेकर स्थिति अब भी साफ नहीं है।

  • CJP नेताओं की हिरासत पर शशि थरूर ने उठाए सवाल, दिल्ली में 22 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और प्रतिबंधों पर जताई चिंता

    CJP नेताओं की हिरासत पर शशि थरूर ने उठाए सवाल, दिल्ली में 22 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और प्रतिबंधों पर जताई चिंता

    नई दिल्ली ।दिल्ली में 10 अक्टूबर को सिटिजन जस्टिस एंड पीस (CJP) के प्रदर्शन के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने राजधानी में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती को युद्ध जैसी स्थिति बताते हुए कहा कि शहर में जिस स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था की गई है, वैसी स्थिति उन्होंने पहले कभी नहीं देखी। थरूर के अनुसार, वह रात दो बजे के बाद राष्ट्रीय राजधानी लौटे और इसके बाद उन्होंने शहर में व्यापक सुरक्षा बंदोबस्त तथा आवाजाही पर प्रतिबंध देखे।

    थरूर ने कहा कि दिल्ली में हर कुछ सौ मीटर की दूरी पर सुरक्षा चौकियां बनाई गई हैं। सड़कों पर कंक्रीट के बैरिकेड और स्पाइक स्ट्रिप्स लगाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि पूरे शहर में लगभग 22,000 पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। उनके बयान के मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था के बीच 250 ट्रेनें रद्द कर दी गईं और 45 मेट्रो स्टेशन भी बंद कर दिए गए। कांग्रेस सांसद ने इन व्यवस्थाओं को लेकर चिंता जताई और राजधानी में आम लोगों की आवाजाही पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा उठाया।

    थरूर ने दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में युवाओं को उनके घरों और सड़कों से हिरासत में लिए जाने की खबरों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी चुनावों की निष्पक्षता पर शांतिपूर्ण तरीके से सवाल उठाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें ऐसा करने से रोकने के लिए कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने राजधानी के मध्य हिस्से में इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने को भी दमनकारी कदम बताया। उनके अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में नागरिकों के लिए अपनी बात रखना और सार्वजनिक स्थानों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

    कांग्रेस सांसद ने जंतर-मंतर तक पहुंचने पर लगाई गई पाबंदियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस स्थान को नागरिकों के लिए अपनी असहमति व्यक्त करने के उद्देश्य से निर्धारित किया गया था, लेकिन प्रदर्शन के दौरान वहां जाने वाली सड़कों पर भी प्रतिबंध लगा दिए गए। थरूर ने इसे आवागमन की स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत होती है, तब इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और ऐसी तत्परता क्यों दिखाई नहीं देती।

    थरूर ने हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने की मांग की। उन्होंने सवाल किया कि यदि प्रदर्शनकारी सोमवार को दोबारा राजधानी में एकत्र होते हैं, तो क्या प्रशासन फिर से इसी तरह प्रतिबंध लगाएगा। उन्होंने कहा कि चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाले नागरिकों के साथ सरकार का व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, यदि सरकार चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा रखती है, तो उसे सवाल उठाने वालों का स्वागत करना चाहिए। इसके विपरीत, राजधानी को किले में बदलने जैसी व्यवस्था लोगों के संदेह को कम करने के बजाय बढ़ा सकती है।

    कांग्रेस सांसद ने कहा कि केवल बैरिकेड लगाने से चुनाव आयोग के प्रति लोगों का विश्वास बहाल नहीं होगा। उनके मुताबिक, आयोग जितनी जल्दी जनता के सवालों का जवाब देगा, उतनी जल्दी शांति बहाल होने की संभावना बनेगी। उन्होंने लोकतंत्र की मजबूती को इस बात से जोड़कर देखा कि संस्थाएं अपने कामकाज पर सवाल उठाने वाले लोगों के साथ कैसा व्यवहार करती हैं। थरूर ने दिल्ली में दिखाई गई व्यवस्था को शर्मनाक और अमानवीय बताया। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण असहमति और चुनावों की निष्पक्षता से जुड़े सवालों का जवाब देना जरूरी है। उन्होंने हिरासत, सुरक्षा प्रतिबंधों और सार्वजनिक आवाजाही से जुड़े मुद्दों पर सरकार तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए।

  • सीजेपी के जंतर-मंतर प्रदर्शन पर भाजपा का हमला, संबित पात्रा बोले- दिल्ली में आगजनी और हिंसा की कोशिश की गई

    सीजेपी के जंतर-मंतर प्रदर्शन पर भाजपा का हमला, संबित पात्रा बोले- दिल्ली में आगजनी और हिंसा की कोशिश की गई

    नई दिल्ली । दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रदर्शन की आलोचना करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर हो रही गतिविधियां भारत की वास्तविक तस्वीर पेश नहीं करतीं। उन्होंने दावा किया कि देश में शांति और सुशासन का माहौल है, जबकि दिल्ली के एक हिस्से में कुछ अराजक तत्व अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। पात्रा ने प्रदर्शन को फ्लॉप शो बताते हुए कहा कि इसका प्रभाव पूरी तरह विफल रहा।

    संबित पात्रा ने कहा कि जंतर-मंतर पर जो कुछ हो रहा है और टेलीविजन तथा सोशल मीडिया पर जो दिखाया जा रहा है, उसे भारत की पूरी कहानी नहीं माना जा सकता। उनके मुताबिक, देश में शांति बनी हुई है और सुशासन के साथ व्यवस्था आगे बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजधानी के एक कोने में अराजक तत्वों की ओर से अव्यवस्था पैदा करने की कोशिश की जा रही है। भाजपा प्रवक्ता ने प्रदर्शन को लेकर कहा कि यह पूरी तरह फ्लॉप रहा और इसका उद्देश्य सफल नहीं हुआ।

    प्रदर्शन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया में पात्रा ने आरोप लगाया कि इसके जरिए देश और राजधानी को बंधक बनाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि दिल्ली में आगजनी कराने, मारपीट की स्थिति पैदा करने और सड़कों पर संघर्ष कराने का प्रयास किया गया था। हालांकि, ये सभी बातें भाजपा प्रवक्ता के आरोपों के रूप में सामने आईं। उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों के समर्थन में किसी अलग जांच रिपोर्ट या आधिकारिक निष्कर्ष का उल्लेख नहीं है।

    भाजपा प्रवक्ता ने अपने बयान में लोकतंत्र और भीड़तंत्र के बीच अंतर पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान राजधानी को बंधक बनाने की कोशिश सफल नहीं हुई और इसे भीड़तंत्र पर लोकतंत्र की जीत के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, जिस तरह की स्थिति पैदा करने का प्रयास किया गया था, वह सफल नहीं हो सकी। उन्होंने प्रदर्शन के आयोजन और उसके प्रभाव को लेकर अपनी पार्टी का विरोध स्पष्ट किया।

    सीजेपी का यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित किया गया था। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके साथियों को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए जाने की खबर भी सामने आई थी। प्रदर्शन को लेकर भाजपा की प्रतिक्रिया इसी घटनाक्रम के संदर्भ में आई है। संबित पात्रा ने अपने बयान में प्रदर्शन को देश की व्यापक स्थिति का प्रतिनिधि मानने से इनकार किया और कहा कि जंतर-मंतर पर दिखाई दे रही गतिविधियां भारत की कहानी नहीं हैं।

    भाजपा की ओर से जारी इस प्रतिक्रिया में प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा, व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाए गए। पात्रा ने दावा किया कि देश में शांति और सुशासन कायम है तथा राजधानी में कथित अराजक गतिविधियों के जरिए स्थिति बिगाड़ने की कोशिश की गई। उन्होंने दोहराया कि प्रदर्शन अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सका। इस तरह सीजेपी के जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर भाजपा ने राजनीतिक विरोध दर्ज कराया और आगजनी, मारपीट तथा राजधानी को बंधक बनाने की कथित कोशिशों का आरोप लगाया। इन आरोपों के संबंध में उपलब्ध विवरण में विपक्ष या प्रदर्शन आयोजकों की प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।

  • दिल्ली पहुंचते ही कॉकरोच जनता पार्टी के तीन नेता हिरासत में, अभिजीत दीपके बोले- मैं गिरफ्तारी देने ही आया हूं

    दिल्ली पहुंचते ही कॉकरोच जनता पार्टी के तीन नेता हिरासत में, अभिजीत दीपके बोले- मैं गिरफ्तारी देने ही आया हूं

    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके और पार्टी के दो अन्य नेताओं आशुतोष रांका तथा सौरभ दास को दिल्ली पहुंचते ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया। तीनों नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के इरादे से मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने उन्हें हवाई अड्डे पर विमान के अंदर से ही हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के कारण तीनों नेता हवाई अड्डे से बाहर निकलकर प्रदर्शन स्थल तक भी नहीं पहुंच सके।

    हिरासत में लिए जाने के दौरान अभिजीत दीपके का बयान सामने आया। उन्होंने कहा, “मैं अरेस्ट होने के लिए ही आया हूं। कर लो अरेस्ट।” दीपके ने विमान के अंदर से एक वीडियो संदेश जारी कर पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार कर रही है। उन्होंने कहा, “आ जाओ, कर लो अरेस्ट। यह अराजकता है। ऐसा तो इंदिरा गांधी के समय में भी नहीं हुआ। मैं डरने वाला नहीं हूं।” उनके इस बयान के बाद हिरासत की कार्रवाई को लेकर मामला चर्चा में आ गया।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तीनों नेताओं को हिरासत में लेने के लिए दिल्ली पुलिस की महिला पुलिसकर्मियों को विमान के अंदर भेजा गया था। उनकी मौजूदगी में पुलिस ने अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास को हिरासत में लिया। इसके बाद तीनों को एक वैन में बैठाकर वहां से ले जाया गया। हालांकि, उन्हें हिरासत में लेने के बाद पुलिस किस स्थान पर लेकर गई, इसकी जानकारी स्पष्ट नहीं हो सकी। उनकी हिरासत के स्थान और आगे की कार्रवाई को लेकर भी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई।

    कॉकरोच जनता पार्टी ने अपने नेताओं को हिरासत में लिए जाने पर विरोध जताया। पार्टी ने इस कार्रवाई से जुड़ा एक वीडियो साझा कर तीनों नेताओं को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी और पुलिस के कदम को शर्मनाक बताया। पार्टी ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। सीजेपी के नेता मुंबई से दिल्ली मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने पहुंचे थे, लेकिन पुलिस की कार्रवाई के कारण वे जंतर-मंतर तक नहीं पहुंच पाए। हिरासत को लेकर पार्टी की ओर से विरोध दर्ज कराया गया।

    इस मामले पर आम आदमी पार्टी ने भी केंद्र सरकार की आलोचना की। पार्टी ने आरोप लगाया कि शनिवार को जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल होने आ रहे कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। इसके बाद आम आदमी पार्टी ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए देश में ‘काला आपातकाल’ लागू होने का आरोप लगाया। पार्टी ने पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठाए।

    आम आदमी पार्टी के विधायक गोपाल राय ने आरोप लगाया कि सरकार ने केवल एक व्यक्ति की सुरक्षा के लिए मेट्रो स्टेशन बंद किए और ट्रेनें रद्द कीं। उन्होंने इन कदमों को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में संबंधित मेट्रो स्टेशनों के नाम, ट्रेनों की संख्या और बंद रहने की अवधि का विवरण नहीं दिया गया है। इस तरह सीजेपी नेताओं की हिरासत का मामला राजनीतिक बयानबाजी के बीच सामने आया है। एक ओर अभिजीत दीपके ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई, वहीं सीजेपी ने अपने नेताओं की हिरासत का विरोध किया और आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाए।