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  • आर्मेनिया की संसद में बहस के दौरान भिड़े सत्ता पक्ष और विपक्षी सांसद, लात-घूंसे चले और कुर्सियां तक फेंकी गईं

    आर्मेनिया की संसद में बहस के दौरान भिड़े सत्ता पक्ष और विपक्षी सांसद, लात-घूंसे चले और कुर्सियां तक फेंकी गईं

    नई दिल्ली ।आर्मेनिया की संसद में 29 अक्टूबर को एक बहस के दौरान ऐसा हंगामा हुआ कि सदन की कार्यवाही हिंसक झड़प में बदल गई। सत्ताधारी सिविल कॉन्ट्रैक्ट पार्टी और विपक्षी स्ट्रॉन्ग आर्मेनिया गुट के सांसदों के बीच पहले तीखी बहस हुई और फिर मामला हाथापाई तक पहुंच गया। सदन के भीतर सांसद एक-दूसरे पर लात-घूंसे चलाते और धक्का-मुक्की करते नजर आए। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि संसद का मुख्य हॉल ही नहीं, बल्कि गलियारा भी झगड़े का मैदान बन गया। इस पूरी घटना का सीधा प्रसारण हो रहा था, जिसके कारण देशभर के लोगों ने सांसदों के बीच हुई मारपीट के दृश्य देखे।

    बताया गया कि विवाद की शुरुआत ऑडिट चैंबर के एक सदस्य की नियुक्ति को लेकर हो रही चर्चा के दौरान हुई। उस समय सत्ताधारी दल के सांसद तारोन चाखोयान अपनी बात रख रहे थे। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने विपक्षी नेता नारेक करापेत्यान के एक रिश्तेदार से जुड़ी पुरानी विवादित टिप्पणी का उल्लेख किया। चाखोयान के अनुसार, करापेत्यान के चचेरे भाई ने पहले विपक्ष के सत्ता में आने की स्थिति में महिलाओं को संतुष्ट करने के लिए अलग मंत्रालय बनाने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित व्यक्ति ने इस बयान के लिए अब तक माफी नहीं मांगी है।

    चाखोयान की इस टिप्पणी पर नारेक करापेत्यान ने अपनी सीट से ही विरोध जताना शुरू कर दिया। उन्होंने बयान को आपत्तिजनक बताया। कुछ ही देर में दोनों पक्षों के बीच बहस और तेज हो गई। इसके बाद करापेत्यान अपनी सीट से उठकर मंच की ओर बढ़ने लगे। इसी दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई सांसद भी अपनी जगह से उठकर एक-दूसरे की तरफ बढ़े और देखते ही देखते हाथापाई शुरू हो गई।

    शुरुआत में सांसदों के बीच धक्का-मुक्की हुई, लेकिन जल्द ही स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। दोनों पक्षों के सदस्य एक-दूसरे को पकड़कर नीचे गिराने लगे। इस दौरान लात और घूंसे भी चले। संसद के उपाध्यक्ष वहागन अलेक्सान्यान को भी विपक्षी सांसदों की तरफ कुर्सी फेंकते हुए देखा गया। घटनास्थल के वीडियो में कई सांसदों को कुर्सियां उठाते और एक-दूसरे पर हमला करते देखा जा सकता है।

    सदन के भीतर शुरू हुआ विवाद कुछ समय बाद संसद भवन के गलियारे तक पहुंच गया। वहां भी दोनों पक्षों के सांसदों के बीच धक्का-मुक्की और कहासुनी जारी रही। सुरक्षाकर्मियों तथा अन्य सदस्यों ने कई बार हस्तक्षेप कर दोनों गुटों को अलग करने की कोशिश की, लेकिन तनाव कम नहीं हुआ। इस दौरान कुछ सांसदों के कपड़े फट गए और कई लोगों को चोटें आईं।

    घटना के बाद संसद भवन में एम्बुलेंस बुलाई गई। विपक्षी गुट स्ट्रॉन्ग आर्मेनिया के सांसद एंड्रानिक गेवोरग्यान की नाक से खून बहता दिखाई दिया, जबकि उनके साथी सांसद रूबेन मखितारयान के कपड़े फटे हुए थे। अन्य कुछ सांसदों को भी मामूली चोटें आने की जानकारी सामने आई। दोबारा टकराव की आशंका को देखते हुए सुरक्षाकर्मियों ने संसद के गलियारे में दोनों पक्षों के बीच अवरोध लगाया, ताकि सदस्य फिर आमने-सामने न आ सकें।

    संसद के स्पीकर रूबेन रुबिनयान ने घटना के बाद नारेक करापेत्यान को झड़प के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि उन्होंने ब्रेक के दौरान हुई बातचीत का वीडियो देखा था और उनके अनुसार तारोन चाखोयान के भाषण में ऐसी कोई बात नहीं थी, जिसे आपत्तिजनक माना जाए। स्पीकर ने आरोप लगाया कि करापेत्यान ने अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रखा और सीट से विरोध जताने के बाद उठकर चाखोयान पर हमला करने की कोशिश की। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी सांसद गार्निक दावत्यान ने भी चाखोयान पर हमला किया था।

    रुबिनयान ने स्पष्ट किया कि उन्होंने जानबूझकर संसद की लाइव स्ट्रीमिंग बंद नहीं कराई, ताकि आम लोग सदन के भीतर चल रही घटनाओं को देख सकें। इससे पहले अक्टूबर महीने में भी सिविल कॉन्ट्रैक्ट और विपक्षी सांसदों के बीच विवाद हो चुका था। उस समय स्ट्रॉन्ग आर्मेनिया के सांसद एडगर गाजरियन ने स्पीकर पर सांसदों को बोनस देने के लिए सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। उस मामले में भी दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और तनाव देखने को मिला था।

  • एशिया कप राइजिंग स्टार्स 2026 में फिर होगी Ind vs Pak की भिड़ंत… टूर्नामेंट का शेड्यूल जारी

    एशिया कप राइजिंग स्टार्स 2026 में फिर होगी Ind vs Pak की भिड़ंत… टूर्नामेंट का शेड्यूल जारी


    नई दिल्ली।
    मेन्स एशिया कप राइजिंग स्टार्स 2026 (Men’s Asia Cup Rising Stars 2026) में भारत और पाकिस्तान (India vs Pakistan) के बीच रोमांचक भिडंत देखने को मिलेगी. एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) ने दोहा में होने वाले टूर्नामेंट का शेड्यूल जारी कर दिया है. इंडिया-ए और पाकिस्तान-ए को एक ही ग्रुप में रखा गया है।

    इंडिया-ए अपने अभियान की शुरुआत 20 नवंबर को नेपाल के खिलाफ करेगा. इसके बाद 22 नवंबर को वेस्ट एंड पार्क इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में इंडिया-ए की भिड़ंत पाकिस्तान-ए से होगी. जबकि इंडिया-ए ग्रुप स्टेज का आखिरी मुकाबला 24 नवंबर को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के खिलाफ खेलेगा।

    टूर्नामेंट में कुल आठ टीमों को दो ग्रुप में बांटा गया है. ग्रुप ए में श्रीलंका-ए, बांग्लादेश-ए, अफगानिस्तान-ए और हॉन्ग कॉन्ग शामिल हैं. वहीं, ग्रुप बी में इंडिया-ए, पाकिस्तान-ए, नेपाल और यूएई को जगह मिली है. हर टीम अपने ग्रुप की बाकी तीन टीमों से एक-एक मैच खेलेगी. दोनों ग्रुप की शीर्ष दो टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी. सेमीफाइनल 26 और 27 नवंबर को खेले जाएंगे, जबकि फाइनल 29 नवंबर को होगा।

    टूर्नामेंट के अधिकतर मैच वेस्ट एंड पार्क इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले जाएंगे. फाइनल भी इसी मैदान पर आयोजित होगा. वहीं, कुछ मुकाबले यूनिवर्सिटी ऑफ दोहा फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (UDST) क्रिकेट ग्राउंड पर होंगे. टूर्नामेंट का उद्घाटन मुकाबला 19 नवंबर को इसी मैदान पर खेला जाएगा।


    पिछले सीजन वैभव भी खेले थे

    2025 के एशिया कप राइजिंग स्टार्स में इंडिया-ए की कप्तानी जितेश शर्मा ने की थी. तब वैभव सूर्यवंशी भी टीम का हिस्सा थे. इंडिया-ए ने यूएई को 148 रनों से हराकर शानदार शुरुआत की, लेकिन अगले मैच में पाकिस्तान-ए के खिलाफ आठ विकेट से हार गया. इसके बाद इंडिया-ए ने ओमान को छह विकेट से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई. वहां बांग्लादेश-ए के खिलाफ मुकाबला टाई रहा और नतीजा सुपर ओवर से निकला, जिसमें भारत को हार का सामना करना पड़ा।

    उधर पाकिस्तान-ए ने सेमीफाइनल में श्रीलंका-ए को 5 रनों से हराया था. फिर पाकिस्तान-ए ने फाइनल में सुपर ओवर के जरिए बांग्लादेश-ए को हराकर खिताब अपने नाम किया था. अब 2026 के संस्करण में इंडिया-ए के पास पिछले टूर्नामेंट की निराशा पीछे छोड़ने और पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में दम दिखाने का मौका होगा।

  • मणिपुर में भड़की हिंसा…. नगा-कुकी समुदाय के बीच टकराव. 24 घंटे में 9 की हत्या, 14 घर फूंके

    मणिपुर में भड़की हिंसा…. नगा-कुकी समुदाय के बीच टकराव. 24 घंटे में 9 की हत्या, 14 घर फूंके


    इम्फाल। पू
    र्वोत्तर राज्य मणिपुर (Northeastern State of Manipur) में एक बार फिर से हिंसा हुई है. नगा और कुकी समुदाय (Naga and Kuki Communities) के बीच हुए हिंसक टकराव में पिछले 24 घंटे में 9 लोगों की मौत हुई है, जबकि 14 घरों में आग लगा दी गई है. इस घटना के बाद कुकी और नागा समुदायों के बीच फिर से तनाव बढ़ गया है और कांगपोकपी ज़िले में शटडाउन करना पड़ा है।

    अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि हिंसा के शिकार लोगों में कामजोंग ज़िले में गोलीबारी के दौरान मारी गई एक कुकी महिला शामिल है. इसके अलावा कामजोंग और कांगपोकपी में अलग-अलग हमलों का शिकार बने नागा विलेज गार्ड और उखरुल ज़िले में घात लगाकर किए गए हमले में फंसे एक आम नागरिक की मौत हुई है।

    इस हिंसा के कारण कामजोंग ज़िला प्रशासन ने चसाड पुलिस स्टेशन के 400 मीटर के दायरे में लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी. इस बीच, कुकी संगठन ‘कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी’ (CoTU) ने कांगपोकपी ज़िले में शनिवार शाम 6 बजे से 24 घंटे के बंद का आह्वान किया।

    यह हिंसा शुक्रवार रात तब भड़की जब चसाड पुलिस स्टेशन के पास गोलीबारी में 42 वर्षीय कुकी महिला और पांच बच्चों की मां, डोमखोनी टौथांग की मौत हो गई. पुलिस के अनुसार सिविल पुलिस, इंडिया रिज़र्व बटालियन और बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के सुरक्षाकर्मियों ने पुलिस स्टेशन के पास कथित अवैध बंकरों के निर्माण की खबरों के बाद उन्हें हटाने के लिए एक ऑपरेशन शुरू किया था।

    इस दौरान जब अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने सुरक्षाकर्मियों पर गोली चलाई और सुरक्षाकर्मियों ने जवाबी कार्रवाई की, तो कथित तौर पर स्थानीय महिलाओं ने इस ऑपरेशन में बाधा डालने की कोशिश की. पुलिस ने बताया कि टौथांग की गर्दन के पास बाईं ओर छाती के ऊपरी हिस्से में गोली लगी और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

    यह घटना 9 अक्टूबर को रात करीब 9.35 बजे हुई, जब चसाड गांव के वॉलंटियर्स की कथित मनमानी गिरफ्तारी और हिरासत के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहा था. इस हत्या के बाद आगजनी हुई और हथियारबंद समूहों और सुरक्षाकर्मियों के बीच फिर से गोलीबारी हुई. हिंसा के दौरान दोनों समुदायों के सदस्यों के कम से कम 14 घरों में आग लगा दी गई. अधिकारियों ने बताया कि उपद्रवियों ने चसाड पुलिस स्टेशन में भी आग लगाने की कोशिश की, जिससे उसके प्रवेश द्वार के पास बनी कुछ लकड़ी की दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं। शनिवार सुबह करीब 5 बजे फिर से गोलीबारी शुरू हुई और लगभग सुबह 7 बजे तक जारी रही।

    कुकी विमेन यूनियन के हेडक्वार्टर ने दावा किया कि 23 साल के माइकल न्गाममिनलेन हाओकिप की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई. आरोप है कि यह हत्या नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नागालिम (इसक-मुइवा) यानी NSCN-IM और उसके ईस्टर्न फ्लैंक गुट के लोगों ने की. इस आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी. एक और घटना में पुलिस ने बताया कि शनिवार सुबह करीब 9:30 बजे कामजोंग ज़िले के निंगचो चिंगडोंग गांव में हुए हमले में दो नागा विलेज गार्ड – 30 साल के न्गाचान्सो निंगशेन और 50 साल के लीशिशन हंग्यो मारे गए। यह गांव चसाड पुलिस स्टेशन से लगभग 17 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है।

    एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि भारत-म्यांमार सीमा पर सक्रिय हथियारबंद गुट इस हमले में शामिल हो सकते हैं. हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच चल रही है। कांगपोकपी जिले में, हथियारबंद कुकी उग्रवादियों के संदिग्ध गुट द्वारा किए गए घात लगाकर किए गए हमले में एक नागा विलेज वॉलंटियर की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए. यह हमला सुबह करीब 6 बजे इम्फाल-तामेंगलोंग रोड पर मकुई और तापोक गांवों के बीच हुआ, जो चालवा पुलिस स्टेशन से लगभग 15 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है।

    पुलिस ने मृतक की पहचान तमेई सब-डिविजन के थालोन गांव के 35 वर्षीय माचुंगवांगबोउ के रूप में की. घायलों में एल पाब्रम गांव के 29 वर्षीय नहासोन और काडी गांव के 30 वर्षीय माथांगाम्बोउ शामिल थे।

    पुलिस के अनुसार, चार नागा विलेज वॉलंटियर यह जानकारी मिलने के बाद तापोन गांव से मकुई के लिए निकले थे कि मकुई गांव पर हमला हुआ है घात लगाकर बैठे हथियारबंद लोगों ने तापोन से लगभग 2 किलोमीटर दूर उन पर हमला कर दिया. माचुंगवांगबोउ की मौके पर ही मौत हो गई. नहासोन के दोनों पैरों में गोली लगी, जबकि माथांगाम्बोउ के दोनों पैरों और हाथों में चोटें आईं. घायलों को इलाज के लिए सेनापति ज़िला मुख्यालय ले जाया गया है।

    एक अलग घटना में 30 साल के संदीप राय की मौत हो गई. उन पर नेशनल हाईवे 202 पर कोंजांग गांव के पास अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने घात लगाकर हमला किया. यह हाईवे इम्फाल को उखरुल होते हुए नागालैंड से जोड़ता है।

    पुलिस ने बताया कि यह हमला शनिवार सुबह करीब 5.30 बजे लिटन पुलिस स्टेशन से लगभग 12 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में हुआ. सेनापति ज़िला मुख्यालय के पास तापहोउ सेनापति नेपाली गांव में रहने वाले राय अपनी कार से जा रहे थे तभी हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया.

    पुलिस ने शव बरामद कर मामला दर्ज कर लिया है. बाद में शव को पोस्टमार्टम के लिए इम्फाल के जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज की मोर्चरी में रखवाया गया. हत्या की वजह और इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। बढ़ती हिंसा के बीच CoTU ने शनिवार शाम 6 बजे से कांगपोकपी ज़िले में 24 घंटे के पूर्ण बंद की घोषणा की।

  • संसद मार्च में पुलिस-प्रदर्शनकारी के बीच झड़प, 118 जवान घायल, 70 हिरासत में

    संसद मार्च में पुलिस-प्रदर्शनकारी के बीच झड़प, 118 जवान घायल, 70 हिरासत में


    नई दिल्ली।
    संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान भारी हंगामा हुआ। जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई जगह हिंसक झड़पें हुईं। जनपथ, रायसीना रोड और संसद मार्ग पर पथराव, बैरिकेड तोड़ने और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा। दिनभर चले हंगामे के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर से हटा दिया लेकिन देर शाम वे फिर लौट आए। इस बीच सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने आंदोलन और संसद मार्च मंगलवार को भी जारी रहने का ऐलान किया।

    जंतर-मंतर व उसके आसपास पिछली रात से ही इकट्ठा हो रहे प्रदर्शनकारी और उनके समर्थकों की भीड़ मंगलवार शाम तक करीब 16 हजार हो गई।प्रदर्शनकारियों ने पूरे दिन पुलिसकर्मियों को इधर से उधर भगाया। देर शाम तक एनडीएमसी भवन के पास अचानक चार हजार से ज्यादा

    की भीड़ जमा हो गई। पुलिस बार-बार रोड को खाली करने का अनुरोध करती रही और लोग उग्र होते दिखे। इस बीच प्रदर्शन करने वाले लोगों ने पुलिस टीम पर पानी की बोतल भी फेंकी।

    इससे पहले साेमवार काे प्रदर्शनकारियों ने बार-बार चेतावनी और कानूनी निर्देशों के बावजूद लागू धारा-163 का उल्लंघन किया। भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया, बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। पुलिस का दावा है कि उपद्रव के दौरान 15 से 20 सरकारी वाहन क्षतिग्रस्त हुए, जबकि जनपथ इलाके में कई दुकानों में भी तोड़फोड़ की गई। हिंसा में 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इनमें स्पेशल कमिश्नर, जॉइंट कमिश्नर, एडिशनल कमिश्नर, डीसीपी, एडिशनल डीसीपी और एसीपी रैंक के अधिकारी समेत पांच से अधिक आईपीएस अधिकारी शामिल हैं। कई महिला पुलिसकर्मी भी घायल हुई हैं।

    वहीं, करीब 60 प्रदर्शनकारियों के भी जख्मी होने की सूचना है। घटनास्थल पर तैनात एक घायल पुलिस अधिकारी ने बताया कि क्लैरिजेस होटल के पास अचानक प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव शुरू हो गया। उनके मुताबिक ऐसा लगा कि पत्थरों का पहले से इंतजाम किया गया था और प्रदर्शन समाप्त होने के बाद बची भीड़ ने सुनियोजित तरीके से हिंसक रूप ले लिया।

    हिंसा के बाद पुलिस ने करीब 70 लोगों को हिरासत में लिया है। सूत्रों के मुताबिक, हिरासत में लिए गए कई लोग छात्र नहीं हैं। ऐसे में पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की सुनियोजित साजिश के एंगल से भी जांच कर रही है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। सीसीटीवी फुटेज, सोशल मीडिया पोस्ट और मोबाइल वीडियो भी जांच के दायरे में हैं।

    उधर, सड़क पर बवाल के बीच बातचीत का दौर भी चलता रहा। सीजेपी प्रतिनिधि सौरव दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से दो बार मुलाकात की। पहली बैठक में मंत्री ने उनकी मांगों का विवरण मांगा, जबकि दूसरी बैठक में प्रतिनिधियों ने लिखित ज्ञापन सौंपा। हालांकि सरकार की ओर से किसी भी मांग पर तत्काल कोई आश्वासन नहीं दिया गया। जेपी नड्डा ने आंदोलन समाप्त कर शांति बनाए रखने की अपील की।

    सरकारी सूत्रों के अनुसार, पूरे घटनाक्रम पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लगातार नजर बनाए हुए थे। दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों को निर्देश दिए गए थे कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया जाए। इसके बावजूद हालात बिगड़ने पर पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। अब राजधानी में हुई इस हिंसा की विस्तृत जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • बैरकों से छत तक फैला हंगामा: कपूरथला जेल में कैदियों की भिड़ंत के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    बैरकों से छत तक फैला हंगामा: कपूरथला जेल में कैदियों की भिड़ंत के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल


    नई दिल्ली। पंजाब की कपूरथला केंद्रीय जेल में हुई हिंसक घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार रात जेल परिसर में अचानक ऐसा माहौल बन गया जिसने पूरे इलाके में हलचल पैदा कर दी। कैदियों के दो गुटों के बीच शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया और कुछ ही समय में हालात इतने बिगड़ गए कि पूरे जेल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना के बाद प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को तत्काल सक्रिय होना पड़ा।

    बताया जा रहा है कि झड़प के दौरान कैदियों ने बैरकों में जमकर तोड़फोड़ की और स्थिति को और गंभीर बनाने की कोशिश की। कुछ स्थानों पर आग लगाने की भी कोशिश की गई, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए। घटना के दौरान कई कैदी बैरकों से बाहर निकलकर जेल परिसर की छतों तक पहुंच गए। अचानक बढ़े इस हंगामे ने जेल प्रशासन की चिंता बढ़ा दी क्योंकि स्थिति कुछ समय के लिए नियंत्रण से बाहर होती दिखाई दी।

    घटना के बाद की गई कार्रवाई में कई चौंकाने वाली चीजें बरामद होने की जानकारी सामने आई है। तलाशी अभियान के दौरान लोहे की छड़ें, लाठियां और मोबाइल फोन जैसी वस्तुएं बरामद की गईं। इन वस्तुओं के मिलने के बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इतनी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद ऐसी सामग्री जेल के भीतर कैसे पहुंची। जांच एजेंसियां इस पहलू को बेहद गंभीरता से देख रही हैं क्योंकि इससे जेल की आंतरिक सुरक्षा पर सीधा असर पड़ता है।

    घटना के दौरान कुछ कैदियों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। हालात को नियंत्रण में लाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया और स्थिति को काबू में करने के लिए विशेष कदम उठाए गए। अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कैदियों को वापस बैरकों में पहुंचाया और पूरे परिसर की दोबारा जांच की गई। इसके बाद सभी कैदियों की गिनती भी की गई ताकि किसी प्रकार की अनहोनी की संभावना को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

    इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी कई वीडियो सामने आने लगे, जिनमें जेल के भीतर तनावपूर्ण हालात दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। कुछ वीडियो में कैदी अपनी शिकायतें और आरोप भी रखते दिखाई दिए। हालांकि प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है और वायरल सामग्री की भी सत्यता पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है और जेल परिसर की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

    फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने जेल प्रशासन के सामने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जेल जैसी संवेदनशील जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की चूक गंभीर परिणाम ला सकती है। अब जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि यह केवल कैदियों के बीच विवाद था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश भी छिपी हुई थी। आने वाले दिनों में जांच के बाद इस मामले में और बड़े खुलासे सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

  • MP: कटनी में शादी समारोह के दौरान हिंसक झड़प….. पुलिस का बारातियों पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज

    MP: कटनी में शादी समारोह के दौरान हिंसक झड़प….. पुलिस का बारातियों पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज


    कटनी।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के कटनी जिले (Katni district) में सोमवार की रात उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक शादी समारोह के दौरान पुलिस और बारातियों के बीच हिंसक झड़प हो गई। आरोप है कि पुलिस ने बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज (Brutal lathicharge) की, जिसमें महिलाओं और बच्चों सहित करीब 14 लोग घायल हुए हैं। मंगलवार को पीड़ित पक्ष ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में न्याय की गुहार लगाई।


    ​देरी से पहुंची थी बारात, चौराहे पर हुआ विवाद

    ​प्राप्त जानकारी के अनुसार, मैहर जिले के ग्राम अमदरा निवासी सीताराम बर्मन के परिवार की बारात कटनी के इंदिरा नगर आ रही थी। दूल्हे की गाड़ी रास्ते में खराब होने के कारण बारात करीब दो घंटे देरी से पहुंची। रात करीब 1:30 बजे जब बारात वधु पक्ष के घर से महज 50 मीटर की दूरी पर थी, तभी कुठला थाने की पुलिस और 112 वाहन मौके पर पहुंचे।

    ​शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुलिस ने बिना किसी संवाद के बारातियों को धक्का देना शुरू कर दिया। जब बारातियों ने इसका विरोध किया, तो विवाद बढ़ गया। शुरुआती झड़प के बाद पुलिस वहां से चली गई, लेकिन कुछ देर बाद भारी बल के साथ वापस लौटी और कथित तौर पर लाठीचार्ज शुरू कर दिया।

    ​दुल्हन के भाई और चाचा के हाथ टूटे, दूल्हा-दुल्हन को ले गए थाने
    ​पीड़ित पक्ष ने बताया कि पुलिस ने घर के अंदर घुसकर मारपीट की। इस दौरान बीच-बचाव करने आईं महिलाओं और बच्चों को भी नहीं बख्शा गया। मारपीट में दुल्हन के भाई आकाश चौधरी और दूल्हे के चाचा सहित कई लोगों के हाथ फैक्चर हो गए हैं, वहीं कुछ के सिर में गंभीर चोटें आई हैं।

    ​हैरानी की बात यह रही कि पुलिस रात करीब 2:30 बजे दूल्हा, दुल्हन और दुल्हन के भाई को अपने साथ ले गई, जिसके कारण वैवाहिक रस्में बीच में ही रुक गईं। मंगलवार सुबह 4:00 बजे उन्हें छोड़ा गया, जिसके बाद शादी संपन्न हो सकी।


    बारातियों पर पुलिस ने बरसाईं लाठियां

    ​इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पुलिसकर्मी लाठियां चलाते नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बाराती भी आक्रोश में बर्तन फेंकते और बहस करते दिखाई दे रहे हैं। घायलों में संजय, मनोज, आकाश, रमेश, सुमन बाई, राजकुमार, अजय और भगवती चौधरी शामिल हैं। इनमें से 8 लोगों को एम्बुलेंस की मदद से जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने एक्सरे और सीटी स्कैन की सलाह दी है।

    ​मंगलवार को एसपी कार्यालय पहुंचे पीड़ितों ने आवेदन सौंपकर दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने न केवल मारपीट की, बल्कि अभद्र गालियों का प्रयोग कर मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रख दिया।

    ये वीडियो मध्य प्रदेश के कटनी जिले के हैं। यहां एक शादी समारोह में पुलिस और बारातियों के बीच हिंसक झड़प का मामला सामने आया है। पुलिस के लाठीचार्ज में महिलाओं, बच्चों सहित 14 लोगों के घायल होने की सूचना है।

    इस संबंध में सी.एस.पी. नेहा पच्चीसिया ने जानकारी देते हुए बताया कि कल इनका आपस में झगड़ा हुआ था, जिसके बाद डायल 112 को कॉल करके बुलाया गया। वहाँ मौजूद बहुत से लोग नशे की हालत में थे। जब पुलिस उन्हें समझा रही थी, उसी दौरान बारातियों की तरफ से पुलिसकर्मियों पर पथराव कर दिया गया। ​घटना की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई, जिन्होंने इस कृत्य में शामिल व्यक्तियों को चिन्हित कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। निर्देशों के परिपालन में जब पुलिस बारात स्थल पहुँची, तब वहाँ मौजूद लोगों ने पत्थरबाजी और गाली-गलौज करते हुए पुलिस के साथ मारपीट कर दी। इस घटना में चार से पांच पुलिसकर्मी चोटिल हुए हैं।