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  • अदाणी ग्रुप मामले के समाधान से भारत के न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर को मिल सकती है नई रफ्तार, अमेरिकी बिजनेस लीडर का बड़ा बयान

    अदाणी ग्रुप मामले के समाधान से भारत के न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर को मिल सकती है नई रफ्तार, अमेरिकी बिजनेस लीडर का बड़ा बयान


    नई दिल्ली । भारत के ऊर्जा क्षेत्र और विशेष रूप से परमाणु ऊर्जा के भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि अदाणी ग्रुप से जुड़े एक मामले के समाधान के बाद भारत को न्यूक्लियर एनर्जी क्षेत्र में आगे बढ़ने में नई गति मिल सकती है। यह टिप्पणी एक प्रमुख अमेरिकी बिजनेस लीडर ने की है, जिन्होंने भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से विचार साझा किए हैं।

    उन्होंने कहा कि भारत में तेजी से हो रहे औद्योगीकरण और बढ़ती बिजली की मांग को देखते हुए केवल पारंपरिक या नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि एक स्थिर और भरोसेमंद आधार-लोड ऊर्जा प्रणाली की आवश्यकता है, जिसमें परमाणु ऊर्जा की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। उनके अनुसार किसी भी बड़े औद्योगिक राष्ट्र के लिए न्यूक्लियर एनर्जी एक अनिवार्य आधार है, जो 24 घंटे निरंतर और स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर सकती है।

    बिजनेस लीडर ने यह भी कहा कि अदाणी ग्रुप जैसे बड़े भारतीय औद्योगिक समूहों की भूमिका ऊर्जा और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास में महत्वपूर्ण हो सकती है। उनके अनुसार इस तरह के समूह बड़े स्तर पर परियोजनाओं को तेजी से लागू करने की क्षमता रखते हैं, जो न्यूक्लियर एनर्जी जैसे जटिल क्षेत्र में भी सहायक साबित हो सकती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि संबंधित मामलों के समाधान से अब सहयोग और निवेश के नए अवसर खुल सकते हैं।

    उन्होंने भारत की नवीकरणीय ऊर्जा जैसे सौर और पवन ऊर्जा में हुई प्रगति की सराहना की, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि केवल इन स्रोतों पर निर्भरता से बिजली ग्रिड में अस्थिरता की समस्या उत्पन्न हो सकती है। उनके अनुसार बैटरी स्टोरेज और अन्य तकनीकी सीमाओं के कारण सौर ऊर्जा पूरी तरह से निरंतर आपूर्ति देने में सक्षम नहीं है, जबकि परमाणु ऊर्जा इस कमी को पूरा कर सकती है।

    विशेषज्ञ ने छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के उपयोग पर भी जोर दिया और कहा कि भारत जैसे बड़े और विविध देश में यदि इस तकनीक को स्थानीय स्तर पर लागू किया जाए तो ऊर्जा उत्पादन और वितरण प्रणाली अधिक कुशल हो सकती है। इससे बड़े ट्रांसमिशन नेटवर्क पर निर्भरता कम होगी और लागत भी नियंत्रित रह सकेगी।

    उन्होंने यह भी बताया कि उनकी कंपनी भारत में पहले से ही सहयोग की संभावनाओं पर काम कर रही है और भारतीय अधिकारियों के साथ बातचीत जारी है। उनके अनुसार यदि भारत विदेशी निवेश और तकनीकी साझेदारी के लिए और अधिक खुला दृष्टिकोण अपनाता है तो परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से विकास संभव है।

    उन्होंने यह भी राय दी कि वैश्विक स्तर पर परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में अधिक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी से तकनीकी नवाचार और सुरक्षा मानकों में सुधार हो सकता है। उनके अनुसार भारत इस क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकता है, बशर्ते नीति और निवेश वातावरण अधिक अनुकूल बनाया जाए।

  • भारत-चिली FTA: क्रिटिकल मिनरल में भारत की रणनीतिक मजबूती, इलेक्ट्रिक व्हीकल और क्लीन एनर्जी सेक्टर को बड़ा लाभ

    भारत-चिली FTA: क्रिटिकल मिनरल में भारत की रणनीतिक मजबूती, इलेक्ट्रिक व्हीकल और क्लीन एनर्जी सेक्टर को बड़ा लाभ


    नई दिल्ली। अमेरिका और यूरोपियन यूनियन के साथ ट्रेड डील की चर्चाओं के बीच भारत चुपचाप एक और अहम मोर्चे पर काम कर रहा है। भारत और दक्षिण अमेरिकी देश चिली के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA को अंतिम रूप देने की तैयारी चल रही है। चिली दुनिया के प्रमुख लिथियम और अन्य क्रिटिकल मिनरल रिजर्व वाला देश है। यह समझौता सिर्फ व्यापार के लिहाज से ही नहीं बल्कि सामरिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    लिथियम इलेक्ट्रिक व्हीकल की बैटरियों और ऊर्जा स्टोरेज सिस्टम के लिए सबसे जरूरी संसाधन है और चिली दुनिया में इसका सबसे बड़ा उत्पादक देश है। इसके अलावा चिली में कॉपर, कोबाल्ट, रेनियम और मोलिब्डेनम जैसे महत्वपूर्ण मिनरल भी मौजूद हैं। ये मिनरल इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और सोलर सेक्टर के लिए जरूरी हैं। वर्तमान में क्रिटिकल मिनरल केवल इंडस्ट्री के कच्चे माल नहीं हैं, बल्कि उनका ग्लोबल पावर बैलेंस पर भी बड़ा असर है। कई देश सप्लाई चेन को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में भारत के लिए भरोसेमंद सोर्स से मिनरल की स्थिर सप्लाई सुनिश्चित करना बेहद जरूरी हो गया है।

    भारत और चिली के बीच 2006 से प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट लागू है। लेकिन अब दोनों देश इसे आगे बढ़ाकर एक कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट करना चाहते हैं। प्रस्तावित समझौते में केवल सामान का व्यापार ही नहीं बल्कि डिजिटल सर्विस, निवेश और एमएसएमई सहयोग भी शामिल होगा। खास बात यह है कि इसमें क्रिटिकल मिनरल सेक्टर को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।

    क्रिटिकल मिनरल की स्थिर और किफायती सप्लाई से भारत के मेक इन इंडिया और क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन प्रोजेक्ट्स को बड़ा फायदा मिलेगा। इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी मैन्युफैक्चरिंग और सोलर पैनल प्रोडक्शन के लिए इन मिनरल की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। अगर चिली से भरोसेमंद सप्लाई सुनिश्चित होती है तो डोमेस्टिक प्रोडक्शन में विस्तार, लागत कम करना और रणनीतिक मजबूती हासिल करना संभव होगा।

    इस समझौते से भारत को न केवल आर्थिक बल्कि सामरिक लाभ भी मिलेगा। क्रिटिकल मिनरल की उपलब्धता से देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत होगी और ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत का प्रभाव बढ़ेगा। इसके अलावा, यह कदम भारत के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी जगह मजबूत करने का भी जरिया बनेगा।

    अमेरिका और यूरोप के साथ ट्रेड डील की चर्चाओं के बीच चिली के साथ भारत का यह रणनीतिक कदम शिक्षा देता है कि क्रिटिकल मिनरल पर फोकस केवल आर्थिक लाभ के लिए नहीं बल्कि देश की रणनीतिक सुरक्षा और इंडस्ट्री को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी जरूरी है।

  • दिल्ली में ईवी क्रांति! सरकार ने तैयार की EV पॉलिसी 2.0, चार्जिंग और बैटरी रीसाइक्लिंग में बड़े बदलाव

    दिल्ली में ईवी क्रांति! सरकार ने तैयार की EV पॉलिसी 2.0, चार्जिंग और बैटरी रीसाइक्लिंग में बड़े बदलाव


    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार ने EV पॉलिसी 2.0 का मसौदा तैयार कर लिया है। नई पॉलिसी का फोकस चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बैटरी रीसाइक्लिंग, और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने पर होगा।

    बैटरी रीसाइक्लिंग: पहली बार पूरी व्यवस्था

    नई पॉलिसी के तहत ईवी बैटरी की रीसाइक्लिंग पर खास जोर दिया गया है। ईवी बैटरी आमतौर पर 8 साल तक चलती है और उसके बाद सुरक्षित निपटान चुनौती बन जाता है। दिल्ली सरकार ने राजधानी में पहली बार बैटरी जमा करने और रीसाइक्लिंग की पूरी व्यवस्था बनाने की योजना बनाई है।

    चार्जिंग स्टेशन: हर कोने में सुविधा

    सरकार ने 2030 तक 5,000 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन लगाने का लक्ष्य रखा है। हर स्टेशन पर 4-5 चार्जिंग पॉइंट होंगे। स्टेशन शॉपिंग मार्केट, मल्टी लेवल पार्किंग, RWAs, सरकारी ऑफिस और मुख्य मार्गों के किनारे लगाए जाएंगे। इसका उद्देश्य दिल्ली के हर कोने में भरोसेमंद और आसान चार्जिंग नेटवर्क तैयार करना है।

    नई छोटी ईवी वैन: लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के लिए

    संकरी गलियों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में चलाने के लिए नई छोटी ईवी वैन की योजना है, जो 7 यात्रियों और 1 ड्राइवर के साथ चलेगी। इसके साथ ही ई-रिक्शा संचालन के लिए तय रूट बनाए जाएंगे।

    पॉलिसी लागू होने के बाद बदलाव

    राजधानी में प्रदूषण में कमी

    सार्वजनिक परिवहन की सुविधा में सुधार

    ईवी सेक्टर में निवेश और रोजगार में वृद्धि

    चार्जिंग और बैटरी रीसाइक्लिंग नेटवर्क का विस्तार

    नई ईवी वैन से रोजमर्रा की यात्रा आसान और साफ-सुथरी

    नई पॉलिसी 31 दिसंबर के बाद लागू की जाएगी। पहली ईवी पॉलिसी 2020 में लागू हुई थी, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के कारण अब इसे अधिक व्यापक और प्रभावशाली बनाया गया है।