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  • वॉशिंग मशीन में ज्यादा डिटर्जेंट डालना कपड़ों की सफाई नहीं बढ़ाता, मशीन के ड्रम और ड्रेनेज सिस्टम को पहुंचा सकता है नुकसान

    वॉशिंग मशीन में ज्यादा डिटर्जेंट डालना कपड़ों की सफाई नहीं बढ़ाता, मशीन के ड्रम और ड्रेनेज सिस्टम को पहुंचा सकता है नुकसान

    नई दिल्ली । वॉशिंग मशीन ने कपड़े धोने का काम काफी आसान कर दिया है, लेकिन मशीन का सही इस्तेमाल न किया जाए तो सुविधा देने वाला यह उपकरण धीरे-धीरे खराब भी हो सकता है। ऐसी ही एक आम गलती जरूरत से ज्यादा डिटर्जेंट डालना है। कई लोगों को लगता है कि अधिक डिटर्जेंट से कपड़े ज्यादा साफ और चमकदार होंगे, जबकि वास्तविकता में ज्यादा डिटर्जेंट सफाई बढ़ाने के बजाय कपड़ों और मशीन दोनों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।

    वॉशिंग मशीन में आवश्यकता से अधिक डिटर्जेंट डालने पर सामान्य से ज्यादा झाग बन सकता है। यह झाग कपड़ों के रेशों के बीच फंस सकता है और कई बार पूरी तरह पानी के साथ बाहर नहीं निकल पाता। इसका असर कपड़ों पर सफेद अवशेष, कड़ापन या अजीब गंध के रूप में दिखाई दे सकता है। खासकर गहरे रंग के कपड़ों पर डिटर्जेंट के निशान आसानी से नजर आ सकते हैं।

    अतिरिक्त डिटर्जेंट का असर केवल कपड़ों तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक ज्यादा डिटर्जेंट इस्तेमाल करने पर इसके अवशेष मशीन के ड्रम, पाइप, फिल्टर और ड्रेनेज सिस्टम के कुछ हिस्सों में जमा हो सकते हैं। इससे पानी की निकासी प्रभावित हो सकती है और मशीन को अपना सामान्य चक्र पूरा करने में परेशानी हो सकती है।

    मशीन के अंदर लगातार नमी और डिटर्जेंट के अवशेष जमा होने से रबर गैसकेट और दूसरे हिस्सों के आसपास गंदगी तथा सूक्ष्मजीवों की वृद्धि के लिए अनुकूल वातावरण भी बन सकता है। इसका एक संकेत मशीन के अंदर से आने वाली बदबू हो सकता है। खासकर फ्रंट लोड मशीन में दरवाजे के आसपास मौजूद रबर सील की नियमित सफाई नहीं करने पर यह समस्या अधिक महसूस हो सकती है।

    डिटर्जेंट की सही मात्रा हर स्थिति में एक जैसी नहीं होती। यह मशीन के प्रकार, कपड़ों की संख्या, पानी की गुणवत्ता और कपड़ों पर मौजूद गंदगी की मात्रा पर निर्भर करती है। इसलिए डिटर्जेंट के पैकेट पर दिए गए निर्देश और वॉशिंग मशीन के निर्माता की सलाह को प्राथमिकता देना बेहतर होता है।

    फ्रंट लोड मशीनें सामान्यतः कम पानी का इस्तेमाल करती हैं। इसलिए इनमें अत्यधिक डिटर्जेंट डालने से झाग बनने की समस्या ज्यादा हो सकती है। दूसरी ओर टॉप लोड मशीनों में पानी की मात्रा अलग होती है, इसलिए डिटर्जेंट की जरूरत भी मशीन और उसके वॉश प्रोग्राम के अनुसार बदल सकती है।

    अगर कपड़े बहुत ज्यादा गंदे हैं तो केवल डिटर्जेंट की मात्रा बढ़ाना सही तरीका नहीं है। कपड़ों को उपयुक्त तरीके से पहले भिगोना या मशीन में सही वॉश प्रोग्राम चुनना बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे कम डिटर्जेंट में भी प्रभावी सफाई मिल सकती है।

    मशीन की बेहतर कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए डिटर्जेंट डालने वाले ड्रॉअर, फिल्टर और रबर सील की समय-समय पर सफाई करना भी जरूरी है। वॉशिंग साइकल पूरा होने के बाद मशीन का दरवाजा कुछ समय खुला रखने से अंदर की नमी कम होने में मदद मिल सकती है।

    इसलिए अगली बार कपड़े ज्यादा साफ करने के इरादे से डिटर्जेंट की मात्रा बढ़ाने से पहले मशीन और डिटर्जेंट के निर्देश जरूर देखें। सही मात्रा में डिटर्जेंट का इस्तेमाल न केवल कपड़ों पर अवशेष और बदबू की समस्या कम कर सकता है, बल्कि मशीन की सफाई व्यवस्था और लंबे समय तक उसकी कार्यक्षमता बनाए रखने में भी मदद कर सकता है।

  • बेकिंग सोडा और नींबू से मिनटों में साफ करें गैस स्टोव, जले निशान होंगे आसानी से दूर..

    बेकिंग सोडा और नींबू से मिनटों में साफ करें गैस स्टोव, जले निशान होंगे आसानी से दूर..

    नई दिल्ली । रसोई में चाय या दूध बनाते समय कई बार थोड़ी सी लापरवाही के कारण बर्तन से दूध या चाय उबलकर गैस स्टोव पर गिर जाती है। गर्म सतह पर गिरते ही यह जलकर चिपक जाती है और कुछ ही देर में जिद्दी दाग का रूप ले लेती है। सामान्य साबुन और पानी से कई बार ये निशान पूरी तरह साफ नहीं होते, जिससे गैस स्टोव की चमक भी प्रभावित होने लगती है। ऐसे में कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर इन दागों को बिना अधिक मेहनत और बिना सतह को नुकसान पहुंचाए साफ किया जा सकता है।

    गैस स्टोव की सफाई शुरू करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि स्टोव पूरी तरह ठंडा हो चुका हो। गर्म सतह पर सफाई करने से दुर्घटना की संभावना रहती है और सफाई भी प्रभावी नहीं होती। स्टोव ठंडा होने के बाद जले हुए हिस्से पर थोड़ा पानी छिड़कें और उस पर बेकिंग सोडा डाल दें। कुछ मिनट तक इसे ऐसे ही छोड़ने के बाद मुलायम स्पंज से हल्के हाथों से रगड़ें। इससे जमी हुई परत ढीली होने लगती है और दाग आसानी से हटने लगते हैं।

    यदि दूध या चाय का दाग काफी पुराना और जिद्दी हो गया है तो बेकिंग सोडा का गाढ़ा पेस्ट अधिक प्रभावी साबित हो सकता है। इसके लिए बेकिंग सोडा में थोड़ा गर्म पानी या नींबू का रस मिलाकर पेस्ट तैयार करें और इसे दाग वाले हिस्से पर 15 से 20 मिनट तक लगा रहने दें। इसके बाद मुलायम ब्रश या स्पंज से धीरे-धीरे सफाई करें। इस प्रक्रिया से जली हुई परत नरम हो जाती है और बिना ज्यादा दबाव लगाए हटाई जा सकती है।

    अक्सर दूध या चाय बर्नर के आसपास और छोटे-छोटे कोनों में भी जम जाती है, जहां सामान्य स्पंज आसानी से नहीं पहुंच पाता। ऐसी जगहों की सफाई के लिए पुराने टूथब्रश का उपयोग किया जा सकता है। टूथब्रश के मुलायम ब्रिसल्स संकरी जगहों तक पहुंचकर जमा गंदगी को धीरे-धीरे हटाने में मदद करते हैं। सफाई करते समय ध्यान रखें कि गैस का बर्नर पूरी तरह बंद हो और उसमें अतिरिक्त पानी न जाए।

    हल्के दागों के लिए नींबू और बेकिंग सोडा का मिश्रण भी उपयोगी माना जाता है। बेकिंग सोडा छिड़कने के बाद उस पर नींबू का रस डालने से हल्की रासायनिक प्रतिक्रिया होती है, जो जमी हुई गंदगी को ढीला करने में सहायता करती है। कुछ मिनट बाद मुलायम कपड़े या स्पंज से पोंछने पर सतह साफ दिखाई देने लगती है। यदि गैस स्टोव ग्लास टॉप का है तो पहले इस उपाय को किसी छोटे हिस्से पर आजमाना बेहतर रहेगा।

    यदि घरेलू उपाय अपनाने के बाद भी दाग पूरी तरह साफ न हों, तो गैस स्टोव या कुकटॉप के लिए बने विशेष क्लीनर का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, किसी भी क्लीनर का उपयोग करने से पहले उसके निर्देशों को ध्यान से पढ़ना चाहिए, क्योंकि अलग-अलग सतहों के लिए अलग प्रकार के उत्पाद बनाए जाते हैं। गलत क्लीनर या कठोर स्क्रबर का उपयोग करने से स्टोव की सतह खराब हो सकती है।

    सफाई के दौरान चाकू, ब्लेड या किसी नुकीली वस्तु से दाग खुरचने से बचना चाहिए। इससे स्टेनलेस स्टील या ग्लास टॉप पर स्थायी खरोंच पड़ सकती है। सबसे अच्छा तरीका यही है कि दूध या चाय गिरने के बाद गैस ठंडी होते ही तुरंत सफाई कर दी जाए। समय पर सफाई करने से दाग जिद्दी नहीं बनते और गैस स्टोव लंबे समय तक साफ, चमकदार और सुरक्षित बना रहता है।