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  • रसोई के नमक को सिर्फ खाने तक न रखें सीमित, सिंक से कटिंग बोर्ड तक इन कामों में आएगा उपयोग

    रसोई के नमक को सिर्फ खाने तक न रखें सीमित, सिंक से कटिंग बोर्ड तक इन कामों में आएगा उपयोग

    नई दिल्ली । रसोई में इस्तेमाल होने वाला नमक केवल खाने का स्वाद बढ़ाने तक सीमित नहीं है। घर की सफाई से जुड़ी कुछ सामान्य परेशानियों में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। सिंक से आने वाली बदबू, कप या मग पर लगे हल्के दाग और लकड़ी के कटिंग बोर्ड पर रह जाने वाली गंध जैसी स्थितियों में नमक घरेलू सफाई के काम आ सकता है। हालांकि, इसका इस्तेमाल हर सतह या हर समस्या के लिए सही नहीं माना जाता।

    नमक में हल्का घर्षण होता है, इसलिए कुछ बर्तनों की सतह से सामान्य गंदगी हटाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। कप या मग के अंदर चाय-कॉफी के हल्के दाग होने पर थोड़ी मात्रा में नमक पानी के साथ लगाकर नरम स्पंज से हल्के हाथ से रगड़ा जा सकता है। इसके बाद बर्तन को साफ पानी से अच्छी तरह धोना जरूरी है। ज्यादा जोर लगाने से सतह को नुकसान पहुंच सकता है।

    किचन सिंक में खाने के छोटे टुकड़े या गंदगी फंसने से कई बार दुर्गंध आने लगती है। ऐसी स्थिति में थोड़े नमक को गर्म पानी के साथ सिंक में डालकर बहाया जा सकता है। यह सामान्य सफाई में मदद कर सकता है और सिंक की बदबू कम करने में उपयोगी हो सकता है। हालांकि, अगर नाली जाम है या बदबू लगातार बनी हुई है तो केवल नमक पर निर्भर रहना उचित नहीं है।

    लकड़ी के कटिंग बोर्ड पर प्याज, लहसुन और मसाले काटने के बाद उनकी गंध रह सकती है। ऐसे में बोर्ड पर थोड़ा नमक छिड़ककर नींबू के कटे हुए हिस्से से हल्के हाथ से रगड़ने का घरेलू तरीका अपनाया जा सकता है। सफाई के बाद बोर्ड को पानी से धोकर अच्छी तरह सुखाना चाहिए। लकड़ी के कटिंग बोर्ड को बहुत ज्यादा पानी में भिगोना उचित नहीं माना जाता।

    कांच या स्टील की कुछ चीजों पर हल्की जमी गंदगी की सफाई में भी नमक का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इसे नाजुक सतह पर सीधे और जोर से रगड़ने से बचना चाहिए। पानी या उपयुक्त सफाई सामग्री के साथ सावधानी से इस्तेमाल करना बेहतर है। कांच, पॉलिश वाली सतह और आसानी से खरोंच आने वाली चीजों पर विशेष सावधानी जरूरी है।

    कपड़ों के दाग हटाने के लिए भी कई घरेलू नुस्खों में नमक का इस्तेमाल बताया जाता है, लेकिन हर तरह के कपड़े और दाग पर इसका असर एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है। किसी कपड़े पर इसे आजमाने से पहले उसके देखभाल संबंधी निर्देश देखना चाहिए। जरूरत हो तो पहले कपड़े के किसी छिपे हिस्से पर थोड़ी मात्रा से परीक्षण किया जा सकता है।

    घर की सफाई में नमक का इस्तेमाल करते समय सतह की प्रकृति को ध्यान में रखना जरूरी है। मार्बल, प्राकृतिक पत्थर, नाजुक पॉलिश, कोटेड सतह या ऐसी चीजों पर नमक रगड़ने से बचना चाहिए जिन पर आसानी से खरोंच पड़ सकती है। सफाई पूरी होने के बाद संबंधित सतह को अच्छी तरह पोंछना भी जरूरी है।

    बागवानी में नमक का इस्तेमाल करते समय खास सावधानी रखनी चाहिए। पौधों की मिट्टी में ज्यादा नमक जमा होने से जड़ों और पौधों की बढ़त को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए पौधों को हरा-भरा रखने के लिए मिट्टी में नमक डालना सामान्य घरेलू उपाय नहीं माना जाना चाहिए। यदि किसी खास पौधे के लिए नमक के इस्तेमाल की सलाह दी गई हो तो उसकी किस्म और उचित मात्रा की जानकारी लेना जरूरी है।

  • किचन के कपड़े से बदबू नहीं जा रही तो अपनाएं ये आसान उपाय, नमी और तेल की गंध होगी कम

    किचन के कपड़े से बदबू नहीं जा रही तो अपनाएं ये आसान उपाय, नमी और तेल की गंध होगी कम

    नई दिल्ली ।रसोई में बर्तन पोंछने, गैस के आसपास गिरे पानी या तेल को साफ करने और किचन की अलग-अलग सतहों को पोंछने के लिए कपड़े का इस्तेमाल रोज किया जाता है। लगातार इस्तेमाल के कारण कई बार कपड़े में ऐसी बदबू आने लगती है, जो बार-बार धोने के बाद भी पूरी तरह खत्म नहीं होती। कपड़ा देखने में साफ हो सकता है, लेकिन उसमें बासी या तेल जैसी गंध बनी रह सकती है।

    इस समस्या की एक वजह कपड़े को इस्तेमाल करने और धोने का तरीका भी हो सकता है। केवल ज्यादा डिटर्जेंट डालने या तेज खुशबू वाले प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने से बदबू की असली वजह खत्म नहीं होती। कुछ आसान आदतों में बदलाव करके किचन के कपड़े को साफ और गंधमुक्त रखने में मदद मिल सकती है।

    इस्तेमाल के बाद गीले कपड़े को तुरंत बंद जगह में रखने से बचना चाहिए। अगर कपड़े को बिना सुखाए टोकरी, बैग या किसी बंद स्थान में डाल दिया जाए, तो उसमें नमी बनी रहती है। ऐसी स्थिति बदबू पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों के बढ़ने के लिए अनुकूल हो सकती है।

    इसलिए इस्तेमाल के बाद कपड़े को अच्छी तरह फैलाकर सुखाना जरूरी है। इसे रसोई में किसी हवादार जगह पर लटकाया जा सकता है। ओवन के हैंडल या छोटे ड्राइंग रैक जैसी जगह का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, बशर्ते कपड़ा वहां अच्छी तरह सूख सके। गीले कपड़े को पूरी तरह सूखने से पहले बंद स्थान पर रखने से बचना चाहिए।

    एक ही किचन कपड़े को लगातार कई दिनों तक इस्तेमाल करने से भी समस्या बढ़ सकती है। खाना बनाने के दौरान कपड़े में तेल, खाने के छोटे कण और नमी जमा होती रहती है। समय के साथ इन्हें पूरी तरह साफ करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए किचन के कपड़े नियमित रूप से बदलना बेहतर तरीका है। रोज इस्तेमाल होने वाले कपड़े को रोज बदलने की आदत रखी जा सकती है।

    इसके लिए घर में कई किचन कपड़े रखना उपयोगी हो सकता है। इस्तेमाल किया हुआ कपड़ा धोने के लिए अलग रखा जा सकता है और उसकी जगह साफ कपड़ा इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे एक ही कपड़े पर लगातार गंदगी और नमी जमा होने की स्थिति कम होगी।

    बदबू आने पर कपड़े को सिर्फ पानी से धोना पर्याप्त नहीं हो सकता। किचन में इस्तेमाल होने वाले कपड़ों की नियमित और अच्छी तरह धुलाई जरूरी है। कपड़ों की सफाई के लिए डिटर्जेंट का इस्तेमाल करते समय भी उसकी जरूरत से ज्यादा मात्रा नहीं डालनी चाहिए। ज्यादा डिटर्जेंट का मतलब हमेशा ज्यादा सफाई नहीं होता। एंजाइम वाले डिटर्जेंट गंदगी और दाग को हटाने में मदद कर सकते हैं।

    बदबू को केवल तेज खुशबू वाले उत्पाद से ढकने के बजाय उसकी वजह दूर करना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर धोने के दौरान बेकिंग सोडा का इस्तेमाल किया जा सकता है या कपड़े को सिरके में कम से कम 30 मिनट तक भिगोया जा सकता है। हालांकि, ऐसे किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले कपड़े के फैब्रिक और केयर लेबल की जानकारी जरूर देखनी चाहिए।

    किचन के कपड़ों को दूसरे घरेलू कपड़ों से अलग रखना भी बेहतर है। इनमें तेल, खाने के अवशेष और अन्य गंदगी हो सकती है। इसलिए इन्हें निजी कपड़ों के साथ एक ही टोकरी में रखने से बचना चाहिए। अलग टोकरी या बैग रखने से किचन के गंदे कपड़ों को अलग रखना और समय पर धोना आसान हो जाता है।

  • अजनार नदी के बाद यमुना की सफाई में जुटे 'बिट्टू तबाही', साढ़े चार घंटे में 585 किलो कचरा निकाला

    अजनार नदी के बाद यमुना की सफाई में जुटे 'बिट्टू तबाही', साढ़े चार घंटे में 585 किलो कचरा निकाला


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश की अजनार नदी से सफाई अभियान की शुरुआत कर चर्चा में आए सुरेंद्र सिंह चौधरी उर्फ ‘बिट्टू तबाही’ अब दिल्ली की यमुना नदी के किनारे सफाई अभियान चला रहे हैं। उन्होंने दिल्ली में अपने पहले सफाई अभियान के दौरान स्थानीय लोगों और वॉलंटियर्स के साथ मिलकर करीब साढ़े चार घंटे में 585 किलो कचरा हटाने का दावा किया है। इस अभियान का वीडियो उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किया है, जो अब चर्चा में है।

    यमुना किनारे चलाए गए अभियान के दौरान फूल-मालाओं, पूजा सामग्री, प्लास्टिक और अन्य तरह का कचरा हटाया गया। बिट्टू के मुताबिक, सफाई अभियान में स्थानीय लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और कचरे को एकत्र करने में टीम की मदद की।

    यमुना किनारे जमा था कचरे का ढेर

    दिल्ली पहुंचने के बाद बिट्टू तबाही ने यमुना किनारे की स्थिति को अपने वीडियो में दिखाया। उनके अनुसार, घाट और आसपास के इलाके में बड़ी मात्रा में फूल-मालाएं, पूजा सामग्री, प्लास्टिक तथा अन्य कचरा जमा था।

    धार्मिक आयोजनों और रोजमर्रा की गतिविधियों के बाद पूजा सामग्री और अन्य सामान नदी के किनारे या आसपास छोड़े जाने से वहां कचरा जमा होने की समस्या सामने आती रही है। बिट्टू ने इसी स्थान से अपनी सफाई ड्राइव शुरू की। अभियान के दौरान स्थानीय लोग और वॉलंटियर्स भी उनके साथ जुड़ते गए।

    साढ़े चार घंटे में 585 किलो कचरा हटाने का दावा

    बिट्टू तबाही ने सोशल मीडिया पर साझा वीडियो में बताया कि दिल्ली में यह उनकी पहली क्लीनअप ड्राइव थी। उनके अनुसार, करीब साढ़े चार घंटे चले अभियान में टीम ने कुल 585 किलो कचरा हटाया।

    उन्होंने बताया कि यह अभियान वर्ल्ड क्लीनअप डे से जुड़ी गतिविधियों के तहत आयोजित किया गया। तीन दिन चलने वाली इस मुहिम में अलग-अलग स्थानों पर सफाई अभियान के साथ लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने की योजना बनाई गई थी। बिट्टू ने सफाई अभियान में सहयोग करने वाले स्थानीय लोगों और वॉलंटियर्स का आभार भी जताया।

    सफाई में स्थानीय लोगों ने भी बढ़ाया हाथ

    अभियान के दौरान आसपास रहने वाले कुछ लोग भी सफाई टीम के साथ जुड़ गए। किसी ने कचरा उठाने में मदद की तो किसी ने उसे एक स्थान पर एकत्र करने का काम किया।

    बिट्टू का कहना है कि जब स्थानीय लोग खुद सफाई अभियान का हिस्सा बनते हैं तो उसका असर केवल एक दिन की सफाई तक सीमित नहीं रहता। इससे दूसरे लोगों को भी सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने के प्रति जागरूक होने का संदेश मिलता है।

    अजनार नदी से मिली पहचान

    सुरेंद्र सिंह चौधरी को ‘बिट्टू तबाही’ नाम से पहचान मध्य प्रदेश की अजनार नदी की सफाई के दौरान मिली। उन्होंने नदी किनारे जमा गंदगी और कचरे को खुद हटाते हुए वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किए थे। धीरे-धीरे उनके सफाई अभियान ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

    उनके अभियान की चर्चा द ओशन क्लीनअप के संस्थापक और सीईओ बोयन स्लैट तक पहुंचने की बात भी सामने आई थी। इसके बाद उन्हें संगठन के साथ काम करने का न्योता मिलने की जानकारी सामने आई।

    अब दूसरे राज्यों तक अभियान ले जाने की तैयारी

    अजनार नदी के बाद बिट्टू तबाही अपनी सफाई मुहिम को दूसरे राज्यों तक ले जाने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि अभियान का उद्देश्य केवल कचरा हटाना नहीं, बल्कि लोगों को नदियों और सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखने के लिए जागरूक करना भी है।

    दिल्ली में अभियान शुरू करने के बाद उन्होंने अलग-अलग राज्यों में जाकर लोगों को मुहिम से जोड़ने की बात कही है। उनका मानना है कि स्थानीय लोग जब सफाई अभियान में सीधे भागीदारी करते हैं तो उसका प्रभाव अधिक व्यापक हो सकता है।

    गुरुग्राम के खेड़की दौला में अगला अभियान

    दिल्ली के बाद बिट्टू तबाही ने अपने अगले पड़ाव की जानकारी भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी है। उन्होंने बताया कि अब उनकी सफाई मुहिम गुरुग्राम पहुंचेगी। उन्होंने गुरुग्राम के खेड़की दौला का जिक्र करते हुए लोगों से अगली सफाई ड्राइव में शामिल होने की अपील की है।

    सोशल मीडिया पर लोगों ने किया समर्थन

    यमुना किनारे सफाई अभियान का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने बिट्टू तबाही के प्रयास की सराहना की। कई लोगों ने उन्हें अभियान जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। कुछ यूजर्स ने सकारात्मक टिप्पणियों के साथ दिल और फायर इमोजी भी साझा किए।

    हालांकि, नदी और सार्वजनिक स्थानों की सफाई के साथ वहां दोबारा कचरा न पहुंचे, यह सुनिश्चित करना भी चुनौती है। ऐसे अभियानों के साथ लोगों की भागीदारी और व्यवहार में बदलाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • शहडोल सरकारी स्कूल में बारिश के बीच बच्चों से छज्जे की सफाई, वायरल वीडियो के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    शहडोल सरकारी स्कूल में बारिश के बीच बच्चों से छज्जे की सफाई, वायरल वीडियो के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    मध्य प्रदेश: के शहडोल जिले में सरकारी प्राथमिक विद्यालय से सामने आए एक वीडियो ने बच्चों की सुरक्षा और स्कूलों में जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गोरतरा ग्राम पंचायत स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय में बारिश के दौरान बच्चों से स्कूल की छत और छज्जे की सफाई कराए जाने का मामला सामने आया है। वायरल वीडियो में कुछ बच्चे ऊंचाई वाले हिस्से पर चढ़कर सफाई करते दिखाई दे रहे हैं।

    बताया जा रहा है कि स्कूल की छत की दीवार और छज्जे पर गंदगी जमा होने के बाद उसे साफ करने की जरूरत महसूस हुई थी। इसी दौरान बच्चों से सफाई का काम कराया गया। वीडियो में बच्चे ऊंचाई पर मौजूद दिखाई देते हैं, जिससे उनके फिसलने या नीचे गिरने का खतरा बना हुआ था। खास तौर पर बारिश के दौरान छत और छज्जे की सतह पर फिसलन बढ़ जाने से जोखिम और अधिक गंभीर हो जाता है।

    स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की उम्र को देखते हुए इस तरह का कार्य कराना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। जिस समय विद्यार्थियों को पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल होना चाहिए, उस समय उनसे ऊंचाई पर चढ़कर सफाई कराने की घटना सामने आई है। यदि सफाई आवश्यक थी तो इसे सुरक्षित तरीके से कराया जा सकता था, ताकि विद्यार्थियों को किसी संभावित दुर्घटना का सामना न करना पड़े।

    मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि बच्चों को छत और छज्जे जैसे जोखिम वाले स्थान पर जाने की अनुमति किस स्तर पर दी गई। स्कूल परिसर में विद्यार्थियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी शिक्षकों और संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था की होती है। ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि घटना के समय बच्चों की निगरानी और सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था मौजूद थी।

    शहडोल जिले में बारिश के कारण पहले से ही कई स्थानों पर जनजीवन प्रभावित बताया जा रहा है। ऐसे मौसम में स्कूल भवनों की सुरक्षा और विद्यार्थियों की आवाजाही को लेकर अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है। बारिश के बीच ऊंचाई पर सफाई का काम बच्चों से कराया जाना इसी वजह से और अधिक चिंता का विषय बन गया है।

    वीडियो सामने आने के बाद अभिभावकों के बीच भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को किसी भी ऐसे काम में शामिल नहीं किया जाना चाहिए, जिसमें उनकी शारीरिक सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका हो। खासकर छत, छज्जे या ऊंचाई वाले स्थानों पर काम करते समय प्रशिक्षित और जिम्मेदार व्यक्ति की मौजूदगी जरूरी मानी जाती है।

    घटना के बाद यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि सरकारी स्कूलों में सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की निगरानी किस तरह की जा रही है। स्कूल भवन की नियमित सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी तय व्यवस्था के तहत पूरी की जानी चाहिए, लेकिन इसके लिए विद्यार्थियों को जोखिम में डालना उचित नहीं माना जा सकता।

    फिलहाल वायरल वीडियो के आधार पर सामने आई इस घटना ने स्कूल प्रबंधन और संबंधित शिक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। पूरे मामले में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि बच्चों से सफाई का काम क्यों कराया गया, उन्हें ऊंचाई पर जाने की अनुमति किसने दी और बारिश के दौरान उनकी सुरक्षा के लिए क्या सावधानियां बरती गई थीं। मामले की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदारी तय होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

  • वॉशिंग मशीन में ज्यादा डिटर्जेंट डालना कपड़ों की सफाई नहीं बढ़ाता, मशीन के ड्रम और ड्रेनेज सिस्टम को पहुंचा सकता है नुकसान

    वॉशिंग मशीन में ज्यादा डिटर्जेंट डालना कपड़ों की सफाई नहीं बढ़ाता, मशीन के ड्रम और ड्रेनेज सिस्टम को पहुंचा सकता है नुकसान

    नई दिल्ली । वॉशिंग मशीन ने कपड़े धोने का काम काफी आसान कर दिया है, लेकिन मशीन का सही इस्तेमाल न किया जाए तो सुविधा देने वाला यह उपकरण धीरे-धीरे खराब भी हो सकता है। ऐसी ही एक आम गलती जरूरत से ज्यादा डिटर्जेंट डालना है। कई लोगों को लगता है कि अधिक डिटर्जेंट से कपड़े ज्यादा साफ और चमकदार होंगे, जबकि वास्तविकता में ज्यादा डिटर्जेंट सफाई बढ़ाने के बजाय कपड़ों और मशीन दोनों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।

    वॉशिंग मशीन में आवश्यकता से अधिक डिटर्जेंट डालने पर सामान्य से ज्यादा झाग बन सकता है। यह झाग कपड़ों के रेशों के बीच फंस सकता है और कई बार पूरी तरह पानी के साथ बाहर नहीं निकल पाता। इसका असर कपड़ों पर सफेद अवशेष, कड़ापन या अजीब गंध के रूप में दिखाई दे सकता है। खासकर गहरे रंग के कपड़ों पर डिटर्जेंट के निशान आसानी से नजर आ सकते हैं।

    अतिरिक्त डिटर्जेंट का असर केवल कपड़ों तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक ज्यादा डिटर्जेंट इस्तेमाल करने पर इसके अवशेष मशीन के ड्रम, पाइप, फिल्टर और ड्रेनेज सिस्टम के कुछ हिस्सों में जमा हो सकते हैं। इससे पानी की निकासी प्रभावित हो सकती है और मशीन को अपना सामान्य चक्र पूरा करने में परेशानी हो सकती है।

    मशीन के अंदर लगातार नमी और डिटर्जेंट के अवशेष जमा होने से रबर गैसकेट और दूसरे हिस्सों के आसपास गंदगी तथा सूक्ष्मजीवों की वृद्धि के लिए अनुकूल वातावरण भी बन सकता है। इसका एक संकेत मशीन के अंदर से आने वाली बदबू हो सकता है। खासकर फ्रंट लोड मशीन में दरवाजे के आसपास मौजूद रबर सील की नियमित सफाई नहीं करने पर यह समस्या अधिक महसूस हो सकती है।

    डिटर्जेंट की सही मात्रा हर स्थिति में एक जैसी नहीं होती। यह मशीन के प्रकार, कपड़ों की संख्या, पानी की गुणवत्ता और कपड़ों पर मौजूद गंदगी की मात्रा पर निर्भर करती है। इसलिए डिटर्जेंट के पैकेट पर दिए गए निर्देश और वॉशिंग मशीन के निर्माता की सलाह को प्राथमिकता देना बेहतर होता है।

    फ्रंट लोड मशीनें सामान्यतः कम पानी का इस्तेमाल करती हैं। इसलिए इनमें अत्यधिक डिटर्जेंट डालने से झाग बनने की समस्या ज्यादा हो सकती है। दूसरी ओर टॉप लोड मशीनों में पानी की मात्रा अलग होती है, इसलिए डिटर्जेंट की जरूरत भी मशीन और उसके वॉश प्रोग्राम के अनुसार बदल सकती है।

    अगर कपड़े बहुत ज्यादा गंदे हैं तो केवल डिटर्जेंट की मात्रा बढ़ाना सही तरीका नहीं है। कपड़ों को उपयुक्त तरीके से पहले भिगोना या मशीन में सही वॉश प्रोग्राम चुनना बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे कम डिटर्जेंट में भी प्रभावी सफाई मिल सकती है।

    मशीन की बेहतर कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए डिटर्जेंट डालने वाले ड्रॉअर, फिल्टर और रबर सील की समय-समय पर सफाई करना भी जरूरी है। वॉशिंग साइकल पूरा होने के बाद मशीन का दरवाजा कुछ समय खुला रखने से अंदर की नमी कम होने में मदद मिल सकती है।

    इसलिए अगली बार कपड़े ज्यादा साफ करने के इरादे से डिटर्जेंट की मात्रा बढ़ाने से पहले मशीन और डिटर्जेंट के निर्देश जरूर देखें। सही मात्रा में डिटर्जेंट का इस्तेमाल न केवल कपड़ों पर अवशेष और बदबू की समस्या कम कर सकता है, बल्कि मशीन की सफाई व्यवस्था और लंबे समय तक उसकी कार्यक्षमता बनाए रखने में भी मदद कर सकता है।

  • बेकिंग सोडा और नींबू से मिनटों में साफ करें गैस स्टोव, जले निशान होंगे आसानी से दूर..

    बेकिंग सोडा और नींबू से मिनटों में साफ करें गैस स्टोव, जले निशान होंगे आसानी से दूर..

    नई दिल्ली । रसोई में चाय या दूध बनाते समय कई बार थोड़ी सी लापरवाही के कारण बर्तन से दूध या चाय उबलकर गैस स्टोव पर गिर जाती है। गर्म सतह पर गिरते ही यह जलकर चिपक जाती है और कुछ ही देर में जिद्दी दाग का रूप ले लेती है। सामान्य साबुन और पानी से कई बार ये निशान पूरी तरह साफ नहीं होते, जिससे गैस स्टोव की चमक भी प्रभावित होने लगती है। ऐसे में कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर इन दागों को बिना अधिक मेहनत और बिना सतह को नुकसान पहुंचाए साफ किया जा सकता है।

    गैस स्टोव की सफाई शुरू करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि स्टोव पूरी तरह ठंडा हो चुका हो। गर्म सतह पर सफाई करने से दुर्घटना की संभावना रहती है और सफाई भी प्रभावी नहीं होती। स्टोव ठंडा होने के बाद जले हुए हिस्से पर थोड़ा पानी छिड़कें और उस पर बेकिंग सोडा डाल दें। कुछ मिनट तक इसे ऐसे ही छोड़ने के बाद मुलायम स्पंज से हल्के हाथों से रगड़ें। इससे जमी हुई परत ढीली होने लगती है और दाग आसानी से हटने लगते हैं।

    यदि दूध या चाय का दाग काफी पुराना और जिद्दी हो गया है तो बेकिंग सोडा का गाढ़ा पेस्ट अधिक प्रभावी साबित हो सकता है। इसके लिए बेकिंग सोडा में थोड़ा गर्म पानी या नींबू का रस मिलाकर पेस्ट तैयार करें और इसे दाग वाले हिस्से पर 15 से 20 मिनट तक लगा रहने दें। इसके बाद मुलायम ब्रश या स्पंज से धीरे-धीरे सफाई करें। इस प्रक्रिया से जली हुई परत नरम हो जाती है और बिना ज्यादा दबाव लगाए हटाई जा सकती है।

    अक्सर दूध या चाय बर्नर के आसपास और छोटे-छोटे कोनों में भी जम जाती है, जहां सामान्य स्पंज आसानी से नहीं पहुंच पाता। ऐसी जगहों की सफाई के लिए पुराने टूथब्रश का उपयोग किया जा सकता है। टूथब्रश के मुलायम ब्रिसल्स संकरी जगहों तक पहुंचकर जमा गंदगी को धीरे-धीरे हटाने में मदद करते हैं। सफाई करते समय ध्यान रखें कि गैस का बर्नर पूरी तरह बंद हो और उसमें अतिरिक्त पानी न जाए।

    हल्के दागों के लिए नींबू और बेकिंग सोडा का मिश्रण भी उपयोगी माना जाता है। बेकिंग सोडा छिड़कने के बाद उस पर नींबू का रस डालने से हल्की रासायनिक प्रतिक्रिया होती है, जो जमी हुई गंदगी को ढीला करने में सहायता करती है। कुछ मिनट बाद मुलायम कपड़े या स्पंज से पोंछने पर सतह साफ दिखाई देने लगती है। यदि गैस स्टोव ग्लास टॉप का है तो पहले इस उपाय को किसी छोटे हिस्से पर आजमाना बेहतर रहेगा।

    यदि घरेलू उपाय अपनाने के बाद भी दाग पूरी तरह साफ न हों, तो गैस स्टोव या कुकटॉप के लिए बने विशेष क्लीनर का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, किसी भी क्लीनर का उपयोग करने से पहले उसके निर्देशों को ध्यान से पढ़ना चाहिए, क्योंकि अलग-अलग सतहों के लिए अलग प्रकार के उत्पाद बनाए जाते हैं। गलत क्लीनर या कठोर स्क्रबर का उपयोग करने से स्टोव की सतह खराब हो सकती है।

    सफाई के दौरान चाकू, ब्लेड या किसी नुकीली वस्तु से दाग खुरचने से बचना चाहिए। इससे स्टेनलेस स्टील या ग्लास टॉप पर स्थायी खरोंच पड़ सकती है। सबसे अच्छा तरीका यही है कि दूध या चाय गिरने के बाद गैस ठंडी होते ही तुरंत सफाई कर दी जाए। समय पर सफाई करने से दाग जिद्दी नहीं बनते और गैस स्टोव लंबे समय तक साफ, चमकदार और सुरक्षित बना रहता है।