

इस बैक्टीरिया का मुख्य स्रोत सीवेज ओवरफ्लो अनुपचारित सीवेज डिस्चार्ज और खराब सेप्टिक टैंक हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पानी में यह बैक्टीरिया तब घुलता है जब ड्रेनेज चैंबरों से सीवेज लीक होता है और मल-मूत्र युक्त पानी बोरिंग के पानी में मिल जाता है। इस स्थिति से इंदौर शहर के भागीरथीपुरा क्षेत्र में विशेष रूप से संकट बढ़ा है। यहां 600 से अधिक बोरिंग की गई हैं जिनका पानी कई परिवारों की जीवनरेखा है। गंदे पानी के कारण अब तक 150 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। इनमें से 20 लोगों की हालत गंभीर है और उन्हें ICU में रखा गया है।
इस गंभीर स्वास्थ्य संकट का मुख्य कारण पानी में फीकल कोलिफार्म बैक्टीरिया का बढ़ना है जो आंतों किडनी लिवर और इम्यून सिस्टम पर प्रभाव डाल सकता है। लंबे समय तक यह बैक्टीरिया आंतों में सूजन और कोलाइटिस जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है जिससे शरीर में गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं। इंदौर नगर निगम ने इस समस्या के समाधान के लिए सख्त कदम उठाने की योजना बनाई है ताकि पानी की गुणवत्ता सुधारी जा सके और लोगों को स्वच्छ पानी मिल सके।

पानी में सड़ी लाश मिलने की घटना ने उस समय पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया था। टंकी में पड़ा कंकाल पानी में मिलकर पूरे इलाके में सप्लाई हो रहा थाजिससे लोग दस्तउल्टी और बुखार जैसी समस्याओं से जूझने लगे थे। हालांकिइस घटना में किसी की मौत नहीं हुई थीलेकिन लोगों में गहरे डर का माहौल बन गया था।
अब 30 साल बादभागीरथीपुरा इलाके में फिर से दूषित पानी ने लोगों की जान ली है। कांग्रेस पार्टी ने इसे लेकर प्रदेश सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया है कि पानी की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस घटना ने इंदौर में पानी के सिस्टम की गुणवत्ता और प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया है।
इंदौर नगर निगम के अधिकारियों ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी हैलेकिन स्थानीय लोग और नेताओं ने प्रशासन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इन मौतों के बादसियासी माहौल भी गर्मा गया है और सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की जा रही है।यह घटना इंदौर में पानी की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े करती हैऔर यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता जताती है कि जनता को स्वच्छ और सुरक्षित पानी मिल सके।