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  • Heatwave Diplomacy यूरोप की लू पर ईरान की सियासी चाल बैन हटाने के बदले एसी सप्लाई का प्रस्ताव

    Heatwave Diplomacy यूरोप की लू पर ईरान की सियासी चाल बैन हटाने के बदले एसी सप्लाई का प्रस्ताव


    नई दिल्ली। यूरोप इन दिनों रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और भीषण लू की मार झेल रहा है। कई देशों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है जबकि स्पेन फ्रांस और अन्य हिस्सों में लगातार हीटवेव के कारण जनजीवन प्रभावित है। इसी बीच ईरान ने यूरोपीय देशों के सामने एक ऐसा प्रस्ताव रखा है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति दोनों में नई चर्चा छेड़ दी है। ईरान ने कहा है कि यदि यूरोप उस पर लगाए गए प्रतिबंध हटाता है तो वह अपने यहां निर्मित एयर कंडीशनर और अन्य कूलिंग उपकरणों की आपूर्ति कर यूरोप को गर्मी से राहत दिलाने में मदद कर सकता है।

    यह प्रस्ताव तुर्की स्थित ईरानी दूतावास की ओर से सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किया गया। पोस्ट में कहा गया कि वर्षों से आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करने के बावजूद ईरान ने घरेलू तकनीक के दम पर एयर कंडीशनर और अन्य शीतलन उपकरण बनाने की क्षमता विकसित कर ली है। इतना ही नहीं देश अब बड़े पैमाने पर इनका उत्पादन और निर्यात करने की स्थिति में भी पहुंच चुका है। दूतावास ने संकेत दिया कि यदि यूरोपीय देश प्रतिबंधों में नरमी दिखाते हैं तो ईरान गर्मी से जूझ रहे देशों की मदद करने के लिए तैयार है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल व्यापारिक प्रस्ताव नहीं बल्कि एक कूटनीतिक संदेश भी है। ईरान लंबे समय से पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रतिबंधों का विरोध करता रहा है। ऐसे में यूरोप की मौजूदा चुनौती को आधार बनाकर ईरान ने यह दिखाने की कोशिश की है कि प्रतिबंधों के बावजूद उसने तकनीकी आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है और अब वह वैश्विक बाजार में अपनी भूमिका निभाने में सक्षम है।

    यूरोप इस समय जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों का सामना कर रहा है। कई देशों में गर्मी के पुराने रिकॉर्ड टूट रहे हैं। मौसम एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है जिससे जंगलों में आग लगने का खतरा भी बढ़ेगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बुजुर्गों बच्चों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है क्योंकि अत्यधिक तापमान उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

    रिपोर्टों के अनुसार हाल के सप्ताहों में भीषण गर्मी के कारण स्पेन और फ्रांस सहित कई देशों में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है। प्रशासन लोगों को घरों में रहने पर्याप्त पानी पीने और धूप से बचने की सलाह दे रहा है। कई शहरों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को भी अलर्ट पर रखा गया है।

    ईरान के प्रस्ताव को कुछ विश्लेषक राजनीतिक व्यंग्य के रूप में भी देख रहे हैं। उनका मानना है कि ईरान ने यह संदेश देकर यूरोपीय देशों की उस चुनौती की ओर इशारा किया है जिसमें विकसित होने के बावजूद वे चरम मौसम की परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हालांकि अभी तक यूरोपीय देशों की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे के बीच यह घटनाक्रम इस बात की भी याद दिलाता है कि मौसम से जुड़ी आपदाएं अब केवल पर्यावरण का विषय नहीं रह गई हैं बल्कि वे वैश्विक राजनीति व्यापार और कूटनीति को भी नई दिशा देने लगी हैं।

  • गंभीर जलवायु संकट की तरफ बढ़ रही दुनिया…. 20290 तक भीषण गर्मी और सूखे की चपेट में होंगे 260 करोड़ लोग

    गंभीर जलवायु संकट की तरफ बढ़ रही दुनिया…. 20290 तक भीषण गर्मी और सूखे की चपेट में होंगे 260 करोड़ लोग


    नई दिल्ली।
    दुनिया (World) तेजी से एक ऐसे जलवायु संकट (Climate Crisis) की ओर बढ़ रही है, जहां भीषण गर्मी और सूखा (Extreme heat and Drought)मिलकर अभूतपूर्व खतरा पैदा कर रहे हैं। जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स में प्रकाशित एक नई स्टडी के अनुसार अगर मौजूदा जलवायु नीतियों में ठोस बदलाव नहीं हुआ, तो सदी के अंत तक वैश्विक आबादी का करीब 28 फीसदी यानी लगभग 260 करोड़ लोग इस दोहरे संकट की चपेट में होंगे।

    अध्ययन के अनुसार इसका असर आज की तुलना में करीब पांच गुना तक बढ़ सकता है। अध्ययन के अनुसार 2001 से 2020 के बीच हर साल औसतन चार बार ऐसे हालात बने, जब भीषण गर्मी और सूखा एक साथ पड़े। यह आंकड़ा औद्योगिक काल 1850 से 1900 की तुलना में दोगुना है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2090 तक ऐसी घटनाएं साल में करीब 10 बार तक हो सकती हैं और हर घटना करीब दो हफ्ते तक असर डाल सकती है।


    इसे कहते हैं कंपाउंड एक्सट्रीम

    जब कई चरम मौसम घटनाएं एक साथ मिलकर प्रभाव को कई गुना बढ़ा देती हैं तब इसे वैज्ञानिक भाषा में कंपाउंड एक्सट्रीम कहा जाता है। इससे फसलें तेजी से सूखती हैं, जल स्रोत सिकुड़ते हैं और जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। इसके साथ खाद्य कीमतों में उछाल और लू से मौतों का जोखिम भी बढ़ता है। यह स्थिति वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर भी सीधा दबाव डाल सकती है। इसका सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो खुले में काम करते हैं।


    सही नीतियों से कम हो सकता है खतरा

    अगर देश पेरिस समझौते के तहत अपने जलवायु वादों को प्रभावी ढंग से लागू करें तो इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह अंतर इस बात को रेखांकित करता है कि आने वाले दशकों में अरबों लोगों के जीवन को सुरक्षित या असुरक्षित बना सकते हैं।


    अध्ययन का आधार और वैज्ञानिक निष्कर्ष

    अध्ययन के अनुसार 8 जलवायु मॉडलों पर आधारित 152 सिमुलेशन का विश्लेषण किया गया, जिसमें जनसंख्या वृद्धि और ग्लोबल वार्मिंग के विभिन्न परिदृश्यों को शामिल किया गया। ये परिदृश्य इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज,संयुक्त राष्ट्र की जलवायु संबंधी वैज्ञानिक संस्था (आईपीसीसी) की छठी आकलन रिपोर्ट पर आधारित हैं। इसके लिए 1961 से 1990 की अवधि को आधार बनाया गया।

  • यूरोप में बढ़ता जलवायु संकट: रिकॉर्ड गर्मी और हीटवेव का खतरा, WMO ने जारी किया अलर्ट

    यूरोप में बढ़ता जलवायु संकट: रिकॉर्ड गर्मी और हीटवेव का खतरा, WMO ने जारी किया अलर्ट


    नई दिल्ली । यूरोप में जलवायु परिवर्तन की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है और ताजा रिपोर्ट्स ने इस खतरे को और स्पष्ट कर दिया है विश्व मौसम विज्ञान संगठन और कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है जहां तापमान वृद्धि वैश्विक औसत की तुलना में लगभग दोगुनी रफ्तार से हो रही है

    डब्ल्यूएमओ की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने यूरोपियन स्टेट ऑफ द क्लाइमेट रिपोर्ट 2025 पेश करते हुए कहा कि 1980 के बाद से यूरोप में तापमान में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह स्थिति अब पर्यावरण से लेकर मानव जीवन तक हर क्षेत्र को प्रभावित कर रही है रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में हालात और भयावह हो सकते हैं

    रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में यूरोप के लगभग 95 प्रतिशत हिस्से में सामान्य से अधिक तापमान दर्ज किया गया इसमें मेडिटेरेनियन क्षेत्र से लेकर आर्कटिक सर्कल तक लंबे समय तक गर्मी का असर बना रहा कई क्षेत्रों में रिकॉर्ड हीटवेव देखने को मिली खासतौर पर सब आर्कटिक क्षेत्र फेनोस्कैंडिया में जुलाई के महीने में लगातार 21 दिन तक हीटवेव चली जो अब तक की सबसे लंबी और गंभीर मानी जा रही है

    स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि आर्कटिक सर्कल के आसपास तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया जो सामान्य परिस्थितियों में बेहद असामान्य है इसके अलावा बढ़ती गर्मी और सूखे हालात ने जंगल की आग के खतरे को भी कई गुना बढ़ा दिया है रिपोर्ट के अनुसार 2025 में यूरोप में लगभग 1.034 मिलियन हेक्टेयर जमीन आग की चपेट में आई जो साइप्रस देश के कुल क्षेत्रफल से भी ज्यादा है

    जंगल की आग के कारण उत्सर्जन में भी भारी वृद्धि हुई है जिसमें स्पेन का योगदान सबसे अधिक रहा इस तरह की घटनाओं ने न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है बल्कि जैव विविधता पर भी गंभीर प्रभाव डाला है समुद्री हीटवेव के कारण भूमध्य सागर में सीग्रास जैसे संवेदनशील इकोसिस्टम को नुकसान पहुंचा है वहीं पीटलैंड क्षेत्रों में आग लगने से कार्बन उत्सर्जन और बढ़ गया है

    जलवायु परिवर्तन का असर केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है बल्कि यह मानव स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर डाल रहा है Food and Agriculture Organization और डब्ल्यूएमओ की संयुक्त रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अत्यधिक गर्मी वैश्विक खाद्य प्रणाली को प्रभावित कर रही है जिससे एक अरब से ज्यादा लोग जोखिम में आ सकते हैं इसके अलावा हीट स्ट्रेस के कारण हर साल दुनिया भर में लगभग 500 अरब काम के घंटे का नुकसान हो रहा है

    विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की नहीं बल्कि वर्तमान की समस्या बन चुका है और इससे निपटने के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाने की जरूरत है यूरोपीय देशों ने 2030 और 2050 के लिए कई लक्ष्य तय किए हैं लेकिन रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन प्रयासों की गति को और तेज करने की आवश्यकता है कुल मिलाकर यह रिपोर्ट एक स्पष्ट चेतावनी है कि यदि दुनिया ने अभी कदम नहीं उठाए तो जलवायु संकट आने वाले समय में और भी विनाशकारी रूप ले सकता है