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  • उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म.. CM धामी ने की राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की शुरुआत

    उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म.. CM धामी ने की राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की शुरुआत


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) में बुधवार से मदरसा बोर्ड खत्म (Madrasa Board Abolished) हो गया। अब इसकी जगह राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (State Minority Education Authority) ने ले ली है। इसके तहत मुस्लिम समेत सभी 5 अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के शिक्षण संस्थान आएंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) ने देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम में राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व को अपनी ज्ञानधारा से सिंचित करने वाले उत्तराखंड की यह जिम्मेदारी है कि वह शिक्षा एवं संस्कार के मामले में एक आदर्श स्थापित करे।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारी सरकार ने समाज के सभी वर्गों को अच्छी, संस्कार युक्त और आधुनिक शिक्षा देने के लिए पहली जुलाई से उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इसके साथ मदरसा बोर्ड को भंग कर दिया गया है। उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल उत्तराखंड ही नहीं वरन पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी के रूप में ‘वन नेशन वन लॉ’ की तरह अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के रूप में ‘वन नेशन वन एजुकेशन’ की शुरुआत भी उतराखंड से हो रही है। उत्तराखंड सरकार का संकल्प है कि राज्य में हर वर्ग, क्षेत्र और समुदाय के बच्चे को अच्छे संस्कार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।


    सपनों को मिलेगी नई उड़ान

    सीएम धामी ने कहा कि जब एक बच्चे को अच्छी शिक्षा मिलती है तो वह न केवल अपने भविष्य को बेहतर बनाता है वरन अपने परिवार, समाज और देश को बेहतर बनाने में अपना अमूल्य योगदान देता है। आज हम मात्र एक संस्था की शुरूआत नहीं कर रहे हैं वरन ऐसे भविष्य की मजबूत नींव रख रहे हैं जिसके जरिए राज्य के हर बच्चे के सपनों को एक नई उड़ान मिलेगी।


    आस्था और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाना है मकसद

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ किया कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना किसी भी समुदाय की धार्मिक पहचान, परंपरा या अधिकारों को प्रभावित करने के लिए नहीं वरन समाज के सभी वर्गों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए की गई है। हमारा मकसद आस्था और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाना है। हम चाहते हैं कि अल्पसंख्यक समुदाय का हर बच्चा अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा रहे और विज्ञान, गणित, कम्प्यूटर, भाषा, और आधुनिक तकनीकों में भी दक्ष बने।


    आएगा सकारात्मक बदलाव

    सीएम धामी ने कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल मान्यता देने वाली संस्था नहीं वरन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, पारदर्शी व्यवस्था और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन का मजबूत माध्यम बनेगा। सीएम धामी ने उम्मीद जताई कि प्राधिकरण आने वाले समय में हजारों बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा। यह गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाएगा।

  • Chardham Yatra: केदारनाथ में उमड़ रही भारी भीड़…वीडियो देख CM धामी ने किया बड़ा ऐलान

    Chardham Yatra: केदारनाथ में उमड़ रही भारी भीड़…वीडियो देख CM धामी ने किया बड़ा ऐलान


    देहरादून।
    पिछले दिनों केदारनाथ दर्शन (Kedarnath Darshan) को लेकर लोगों की भारी-भरकम भीड़ और रोते-बिलखते श्रद्धालुओं (Devotees.) की आपबीती वाले वायरल वीडियो सामने आए थे। इसके बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी (CM Pushkar Singh Dhami.) ने बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा है कि चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) के दौरान धामों की धारण क्षमता के अनुरूप दर्शन को लेकर व्यवस्था बनाई जाएगी। उन्होंने चारधाम यात्रा को लेकर अधिकारियों को कई निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने अफसरों से कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए धामों में दर्शन के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करें। किसी भी धाम या पड़ाव के लिए तय क्षमता से अधिक लोगों के आने की स्थिति में नीचे के होल्डिंग एरिया-प्रमुख चेक प्वाइंट्स पर वाहनों व श्रद्धालुओं की आवाजाही नियंत्रित की जाए। भीड़ प्रबंधन के लिए चरणबद्ध व्यवस्था अपनाते हुए यात्रियों को भेजा जाए ताकि धामों में अव्यवस्था की स्थिति पैदा न हो।


    भीड़ नियंत्रण पर क्या प्लान

    सीएम ने कहा कि भीड़ नियंत्रण के तहत श्रद्धालुओं को रोकने पर उन्हें इस के कारण, संभावित प्रतीक्षा समय और आगे की व्यवस्था की सूचना नियमित उपलब्ध कराई जाए। यात्रियों को किसी भी परिस्थिति में जानकारी के अभाव का सामना नहीं करना पड़े। इसके लिए सार्वजनिक सूचना प्रणाली, एलईडी डिस्प्ले, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और एफएम रेडियो से सूचनाएं पहुंचाई जाएं। मौसम में बदलाव, सड़क बंद होने, यातायात जाम या दर्शन में देरी जैसी स्थितियों के बारे में यात्रियों को समय रहते बताया जाए ताकि उनमें भ्रम और असंतोष पैदा न हो। सीएम ने निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर श्रद्धालुओं को रोका या ठहराया जा रहा है, वहां पार्किंग, भोजन, पेयजल, शौचालय समेत सभी जरूरी सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।


    रात 10 से सुबह चार बजे तक यात्री वाहनों पर रोक

    चारधाम यात्रा मार्गों पर रात 10 बजे से सुबह चार बजे तक यात्री वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध रहेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को अफसरों को यह व्यवस्था सख्ती से लागू करने को कहा। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि, ट्रक और अन्य जरूरी सेवाओं से जुड़े भारी वाहनों को केवल रात के समय संचालन की अनुमति दी जाएगी। उनके अनुसार, चारधाम यात्रा अब दूसरे और अधिक चुनौतीपूर्ण चरण में प्रवेश कर रही है, जहां प्रतिकूल मौसम की सबसे बड़ी चुनौती होगी। लिहाजा, संवेदनशील स्थलों पर जेसीबी, पोकलैंड व सैटेलाइट फोन के साथ एम्बुलेंस और राहत-बचाव के जरूरी उपकरणों की व्यवस्था कराई जाए। सभी अफसरों को फील्ड में रहकर सारे इंतजाम का निरीक्षण और श्रद्धालुओं को सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।


    दिन में मालवाहक वाहनों पर रोक

    चारधाम यात्रा रूट पर दिन में मध्यम व भारी मालवाहक वाहनों के संचालन पर रोक लगा दी गई है। तीर्थयात्रियों को जाम से निजात के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद चारधाम यात्रा के नोडल अफसर संदीप सैनी ने यह आदेश किए।


    हेली एम्बुलेंस के लिए नोडल अफसर बनेंगे

    मुख्यमंत्री ने गंभीर मरीजों को त्वरित उपचार दिलाने के लिए हेली एम्बुलेंस के लिए राज्य स्तर पर नोडल अफसर नियुक्त करने के निर्देश दिए। जरूरत पड़ने पर डीएम समन्वय बनाकर मरीजों को मदद मुहैया करवा सकेंगे। उन्होंने केदारनाथ पैदल मार्ग पर पर्याप्त संख्या में शेड और बारिश-धूप से बचाव की बेहतर व्यवस्था के साथ स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा। इस बैठक में मंत्री सतपाल महाराज, भरत सिंह चौधरी, विधायक अनिल नौटियाल, आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रोहिला, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन आदि मौजूद रहे।


    होटल-रेस्टोरेंट और ढाबों में अनिवार्य होगी रेट लिस्ट

    मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा मार्ग पर संचालित होटल-रेस्टोरेंट और ढाबों में रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से प्रदर्शित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित सैंपलिंग को कहा। गढ़वाल आयुक्त और आईजी गढ़वाल को नियमित समीक्षा, श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही इस यात्रा से जुड़े जिलों के जिला अधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को यात्रा प्रबंधन की निरंतर निगरानी और प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने को कहा गया।

  • पीएम मोदी की अपील का असर, उत्तराखंड में सीएम धामी ने घटाया काफिला, ऊर्जा संरक्षण पर दिया जोर

    पीएम मोदी की अपील का असर, उत्तराखंड में सीएम धामी ने घटाया काफिला, ऊर्जा संरक्षण पर दिया जोर

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री Narendra Modi की ऊर्जा बचत और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की अपील का असर अब राज्यों में भी देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने एक बड़ा और प्रतीकात्मक कदम उठाते हुए अपने सरकारी काफिले की गाड़ियों की संख्या आधी कर दी है।

    मुख्यमंत्री ने इस पहल को केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि राष्ट्रहित से जुड़ा संकल्प बताया है। उनका कहना है कि ऊर्जा संरक्षण और संसाधनों का सही उपयोग आज की आवश्यकता है, और हर स्तर पर इसके लिए जिम्मेदारी निभाना जरूरी है। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर और पर्यावरण के प्रति जागरूक भारत के निर्माण की दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण प्रयास बताया।

    धामी ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री की यह अपील सिर्फ ऊर्जा बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सोच है जो देश को अधिक जिम्मेदार और सतत विकास की ओर ले जाती है। इसी सोच के तहत उन्होंने अपने मंत्रियों, अधिकारियों और अन्य जनप्रतिनिधियों से भी अपील की है कि वे अनावश्यक वाहनों के उपयोग से बचें और जहां संभव हो, सार्वजनिक परिवहन को अपनाएं।

    राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि इस पहल को आगे बढ़ाते हुए ऊर्जा संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने की कोशिश की जाएगी। इसके लिए सरकारी स्तर पर जागरूकता बढ़ाने और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जाएगा।

    इससे पहले भी प्रधानमंत्री ने कई मौकों पर ऊर्जा बचत और ईंधन के कम उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन के अधिक इस्तेमाल और अनावश्यक खपत को कम करने की सलाह दी थी, ताकि देश की ऊर्जा सुरक्षा और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत किया जा सके।

    इसी दिशा में यह कदम एक प्रतीकात्मक संदेश देता है कि यदि नेतृत्व स्तर पर बदलाव आता है, तो उसका असर समाज के अन्य वर्गों तक भी तेजी से पहुंचता है।

  • उत्तराखंड में बोर्ड परीक्षा के नतीजे घोषित, सीएम धामी ने छात्रों को दी बधाई..

    उत्तराखंड में बोर्ड परीक्षा के नतीजे घोषित, सीएम धामी ने छात्रों को दी बधाई..


    नई दिल्ली।उत्तराखंड में बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं, जिससे हजारों छात्रों और अभिभावकों में उत्साह का माहौल है। इस वर्ष कक्षा 10वीं और 12वीं के नतीजों में छात्रों ने बेहतर प्रदर्शन किया है और कुल पास प्रतिशत में भी सुधार देखने को मिला है। परिणाम जारी होने के साथ ही राज्य के टॉपर्स की सूची भी सामने आ गई है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी सफल विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह सफलता छात्रों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास का परिणाम है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो छात्र इस बार अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं कर सके हैं, उन्हें निराश नहीं होना चाहिए और आगे और अधिक मेहनत के साथ प्रयास जारी रखना चाहिए।

    कक्षा 10वीं के परिणामों के अनुसार इस वर्ष कुल पास प्रतिशत 92.10 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जो एक मजबूत शैक्षणिक प्रदर्शन को दर्शाता है। इस परीक्षा में छात्राओं ने एक बार फिर छात्रों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। लड़कियों का पास प्रतिशत 96.07 प्रतिशत रहा, जबकि लड़कों का पास प्रतिशत 88.03 प्रतिशत दर्ज किया गया।

    कक्षा 10वीं में इस बार टॉपर्स की सूची में शानदार प्रदर्शन देखने को मिला है। नैनीताल जिले के रामनगर के छात्र ने 98.20 प्रतिशत अंक प्राप्त कर राज्य में पहला स्थान हासिल किया है। वहीं, दो छात्रों ने 98 प्रतिशत अंक के साथ संयुक्त रूप से दूसरा स्थान प्राप्त किया, जबकि तीसरे स्थान पर 97.80 प्रतिशत अंकों के साथ एक अन्य छात्र रहा।

    इसी तरह कक्षा 12वीं के परिणामों में कुल पास प्रतिशत 85.11 प्रतिशत रहा है। यहां भी छात्राओं ने छात्रों से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 88.09 प्रतिशत पास प्रतिशत हासिल किया, जबकि छात्रों का पास प्रतिशत 81.93 प्रतिशत रहा। यह अंतर इस बात को दर्शाता है कि राज्य में लड़कियों का शैक्षणिक प्रदर्शन लगातार मजबूत हो रहा है।

    इंटरमीडिएट परीक्षा में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन देखने को मिला है। बागेश्वर और ऊधम सिंह नगर की दो छात्राओं ने संयुक्त रूप से राज्य में पहला स्थान प्राप्त किया है, दोनों ने 98 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। उनके प्रदर्शन को राज्य स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

  • सीएम धामी ने बाबा नीब करौरी महाराज पर आधारित फिल्म का प्रोमो और पोस्टर किया लॉन्च

    सीएम धामी ने बाबा नीब करौरी महाराज पर आधारित फिल्म का प्रोमो और पोस्टर किया लॉन्च

    नई दिल्ली/देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में श्री बाबा नीब करौरी महाराज के जीवन पर आधारित फिल्म का प्रोमो और पोस्टर जारी किया। इस अवसर पर योगगुरु स्वामी रामदेव, स्वामी चिदानंद सरस्वती, फिल्म के निर्देशक शरद सिंह ठाकुर सहित कई प्रमुख गणमान्य व्यक्ति और कलाकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम का माहौल आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से ओतप्रोत नजर आया।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि यह फिल्म केवल एक मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और मानवता के मूल्यों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का एक सार्थक प्रयास है। उन्होंने कहा कि ऐसे विषयों पर आधारित फिल्में समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती हैं और लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य करती हैं।

    सीएम धामी ने बाबा नीब करौरी महाराज के जीवन और उनके विचारों को याद करते हुए कहा कि उनका दिव्य व्यक्तित्व आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि बाबा की शिक्षाएं सरलता, करुणा, सेवा और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश देती हैं, जो वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक हैं और समाज को दिशा देने का कार्य करती हैं।

    उन्होंने आगे कहा कि भारतीय संत परंपरा और सनातन संस्कृति के मूल्यों को सहेजना और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार की आध्यात्मिक फिल्मों के माध्यम से युवा पीढ़ी को अपने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के प्रति जागरूक किया जा सकता है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों, निर्देशक और निर्माण टीम की सराहना करते हुए उन्हें इस प्रयास के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह फिल्म समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगी और लोगों को आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित करेगी।

    इस आयोजन को उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जो संत परंपरा के महान व्यक्तित्वों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।