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  • उज्जैन में गुरकीरत सिंह मनोचा का अंतिम संस्कार, 21 दिन बाद पहुंचा पार्थिव शरीर, CM समेत जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि

    उज्जैन में गुरकीरत सिंह मनोचा का अंतिम संस्कार, 21 दिन बाद पहुंचा पार्थिव शरीर, CM समेत जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि


    उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन निवासी छात्र गुरकीरत सिंह मनोचा का शुक्रवार को चक्रतीर्थ शमशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सांसद अनिल फिरोजिया और राज्यमंत्री गौतम टेटवाल ने उनके घर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की और परिजनों को सांत्वना दी।

    गौरतलब है कि गुरकीरत सिंह की 14 मार्च को कनाडा में हत्या कर दी गई थी। घटना के 21 दिन बाद शुक्रवार सुबह उनका पार्थिव शरीर उज्जैन स्थित घर लाया गया। जैसे ही शव घर पहुंचा, परिजन भावुक हो उठे और माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल था। मां ने अहमदाबाद एयरपोर्ट से शव लाने वाले एंबुलेंस चालक का हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया।

    सुबह करीब पौने 10 बजे अंतिम यात्रा घर से शुरू हुई। सबसे पहले गुरुद्वारे में अंतिम अरदास की गई, जिसके बाद चक्रतीर्थ स्थित विद्युत शवदाह गृह में अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में सिख समाज के लोग, रिश्तेदार और परिचित मौजूद रहे। पार्थिव शरीर गुरुवार शाम अहमदाबाद एयरपोर्ट पहुंचा था, जहां आवश्यक कस्टम और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद रात करीब 9 बजे एंबुलेंस के जरिए उज्जैन के लिए रवाना किया गया।

    हमले में गई थी जान
    जानकारी के अनुसार, कनाडा के फोर्ट सेंट जॉन शहर में 14 मार्च को गुरकीरत सिंह पर पहले 10-12 युवकों ने हमला किया और फिर उस पर वाहन चढ़ा दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद से परिवार बेटे के अंतिम दर्शन का इंतजार कर रहा था, जो अब 21 दिन बाद पूरा हो सका।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाराणसी में 31 मार्च को एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन में होंगे शामिल

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाराणसी में 31 मार्च को एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन में होंगे शामिल


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वाराणसी में आयोजित “एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन 2026” में मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं, पारंपरिक शिल्प, ओडीओपी और जीआई टैग उत्पादों, कृषि एवं खाद्य उत्पादों, निवेश अवसरों और पर्यटन संभावनाओं को एक साझा मंच पर प्रस्तुत करेंगे। इस सम्मेलन में दोनों राज्यों की प्रमुख ताकतें एक साथ सामने आएंगी और उत्पादन, बाजार तथा पहचान से जुड़े विभिन्न आयामों पर केंद्रित संवाद स्थापित होगा। सम्मेलन में उद्योग, शिल्प, निवेश और पर्यटन से जुड़े हितधारक एकत्रित होंगे, जहां व्यावहारिक सहयोग, बाजार विस्तार और साझा पहल पर चर्चा का स्पष्ट स्वरूप दिखाई देगा।

    काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का भ्रमण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की वाराणसी यात्रा काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के अध्ययन भ्रमण से होगी, जहां तीर्थ क्षेत्र में विकसित क्राउड फ्लो मैनेजमेंट, अधोसंरचना लेआउट और तीर्थयात्री प्रबंधन की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया जाएगा। यह अनुभव धार्मिक पर्यटन स्थलों के सुव्यवस्थित विकास और आधुनिक प्रबंधन प्रणाली को समझने का आधार बनेगा।

    इसके बाद एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन स्थल पर प्रदर्शनी का अवलोकन किया जाएगा, जिसमें मध्यप्रदेश के ओडीओपी उत्पाद, जीआई टैग हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्त्र, औद्योगिक क्षमताएं और पर्यटन संभावनाएं प्रदर्शित होंगी। यह प्रदर्शनी राज्य की आर्थिक और सांस्कृतिक विविधता को एक ही मंच पर प्रस्तुत करते हुए निवेशकों और प्रतिभागियों को प्रत्यक्ष रूप से जोड़ने का कार्य करेगी।

    सम्मेलन के मुख्य सत्र में निवेश, औद्योगिक सहयोग और ओडीओपी आधारित अर्थव्यवस्था पर केंद्रित चर्चा होगी, जहां मध्यप्रदेश की निवेश-अनुकूल नीतियों, अधोसंरचना और प्रोत्साहन तंत्र को प्रस्तुत किया जाएगा। इसी सत्र में मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बीच एमओयू हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिससे औद्योगिक निवेश, कौशल विकास, हस्तशिल्प संवर्धन और पर्यटन क्षेत्रों में सहयोग को औपचारिक रूप दिया जाएगा। ओडीओपी उत्पादों का आदान-प्रदान स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आएगा। दोपहर पश्चात नेटवर्किंग सत्र में उद्योग जगत, निवेशकों और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद स्थापित होगा, जिससे संभावित निवेश और साझेदारियों को गति मिलेगी और यह सम्मेलन वास्तविक व्यावसायिक अवसरों से जुड़ता हुआ दिखाई देगा।

    समानांतर सत्रों में सहयोग के व्यावहारिक आयामों को विस्तार दिया जाएगा। संयुक्त शिल्प कार्यशाला में मध्यप्रदेश के चंदेरी और महेश्वरी शिल्पकार उत्तरप्रदेश के बनारसी सिल्क कारीगरों के साथ साझा ब्रांडिंग, बाजार विस्तार और ‘गंगा-नर्मदा क्राफ्ट कॉरिडोर’ की अवधारणा पर कार्य करेंगे, जिससे पारंपरिक शिल्प को नए बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में ठोस पहल होगी।

    टूरिज्म राउंड टेबल मीटिंग

    टूरिज्म राउंड टेबल में वाराणसी, उज्जैन और चित्रकूट को जोड़ते हुए एक संयुक्त धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित करने पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इस प्रक्रिया में इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन सहित प्रमुख हितधारकों की सहभागिता से पर्यटन को संगठित और विस्तारित स्वरूप देने की दिशा में सहमति बनेगी।

    विक्रमोत्सव महानाट्य मंचन के स्थल का अवलोकन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाराणसी के बी.एल.डब्ल्यू मैदान में 3 से 5 अप्रैल तक होने वाले महानाट्य विक्रमोत्सव के कार्यक्रम स्थल का मुआयना भी करेंगे।

  • भोपाल में दिव्यांग टी-20 क्रिकेट टूर्नामेंट का शुभारंभ, सीएम डॉ. मोहन ने कहा- वर्ल्ड रिकॉर्ड की तैयारी

    भोपाल में दिव्यांग टी-20 क्रिकेट टूर्नामेंट का शुभारंभ, सीएम डॉ. मोहन ने कहा- वर्ल्ड रिकॉर्ड की तैयारी


    भोपाल। राजधानी भोपाल में एक अनूठा और प्रेरक आयोजन शुरू हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नेहरू नगर स्थित पुलिस लाइन ग्राउंड में दिव्यांग टी-20 क्रिकेट टूर्नामेंट का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन 5 दिन तक लगातार बिना रुके क्रिकेट खेलेंगे और यह आयोजन वर्ल्ड रिकॉर्ड के आधार पर चल रहा है।

    सीएम ने खिलाड़ियों को किया प्रोत्साहित

    मुख्यमंत्री ने प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को बधाई दी और कहा कि दिव्यांग होने के बावजूद खिलाड़ियों ने चुनौतियों को स्वीकार कर खेल में हिस्सा लिया है। उन्होंने बताया कि यह आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे न्यास के माध्यम से आयोजित किया गया है जिसमें मन की बात कार्यक्रम के तहत दिव्यांग क्रिकेट महोत्सव भी शामिल है। सीएम ने यह भी कहा कि 100 घंटे लगातार क्रिकेट मैच खेला जाएगा जिससे खेलों को बढ़ावा मिलेगा और प्रतिभाओं को पहचान मिलेगी।

    प्रतियोगिता का स्वरूप

    इस टूर्नामेंट में 8 राज्यों की 6 टीमें भाग ले रही हैं। कुल 100 घंटे तक चलने वाली इस प्रतियोगिता में 25 टी-20 मैच दिन-रात खेले जाएंगे। खिलाड़ियों की मेहनत और जोश को देखते हुए यह आयोजन वर्ल्ड रिकॉर्ड लिंका बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन किया गया है।

    खेल और समर्पण की मिसाल

    मुख्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांग खिलाड़ी शरीर की सीमाओं के बावजूद खेल के मैदान में पूरी ऊर्जा के साथ भाग ले रहे हैं। यह न केवल खेलों को बढ़ावा देगा बल्कि समाज में दिव्यांग प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने का संदेश भी देगा। खिलाड़ियों की मेहनत और समर्पण इस आयोजन को और भी खास बनाता है। यह टूर्नामेंट न केवल क्रिकेट प्रेमियों के लिए रोमांचक साबित होगा बल्कि यह यह भी दिखाएगा कि सीमाएँ केवल मानसिक हैं और सही अवसर मिलने पर कोई भी खेल की ऊँचाइयों को छू सकता है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया सायबर पंजीयन कार्यालय का शुभारंभ, बताया तकनीक आधारित सुशासन की नई शुरुआत

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया सायबर पंजीयन कार्यालय का शुभारंभ, बताया तकनीक आधारित सुशासन की नई शुरुआत


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य सरकार विकास के साथ प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, शुचिता, तत्परता, नवाचार और जनकल्याण को प्रोत्साहन दे रही है। पंजीयन विभाग के सायबर पंजीयन कार्यालय का शुभारंभ इसी संकल्प की सिद्धि का प्रमाण है। संपदा-1.0 और संपदा 2.0 के बाद प्रदेश में सायबर पंजीयन की प्रक्रिया का आरंभ होना तकनीक आधारित सुशासन की नई शुरुआत है। मध्यप्रदेश तेजी से बदल रहा है। मध्यप्रदेश भारत का पहला राज्य है, जिसने डिजिटल क्रांति के माध्यम से लोन, मुख्तयारनामा, माइनिंग लीज, हलफनामा, पावर आफ अटार्नी, पार्टनरशिप डीड जैसी 75 से अधिक सेवाओं के लिए सायबर पंजीयन प्रारंभ किया है। राज्य सरकार के इस नवाचार से पेपरलेस और कैशलेस प्रक्रिया को प्रोत्साहन मिल रहा है। यह नई पीढ़ी के लिए पर्यावरण और पारदर्शिता के मामले में महत्वपूर्ण होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को भोपाल में पंजीयन भवन में सायबर पंजीयन कार्यालय का शुभारंभ करने के बाद ये विचार व्यक्त किए।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब शासन और उसके उपक्रमों के अंतरण दस्तावेज भी पेपरलेस रजिस्ट्रेशन के माध्यम से पूरे होंगे। हाउसिंग बोर्ड और विकास प्राधिकरण के अंतरण के लिए जनता को पंजीयन कार्यालय नहीं आना पड़ेगा। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से वीडियो केवायसी सहित सभी कार्य होंगे, इससे धन और समय दोनों की बचत होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि संपदा 2.0 के नवाचार को वर्ष 2025 का राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार मिला है। अब तक 14 लाख 95 हजार से अधिक दस्तावेजों का पंजीयन हो चुका है। राज्य सरकार ने 55 जिलों में सायबर तहसील परियोजना को लागू किया है, जिसमें राजस्व बंटवारा, नामांतरण की प्रक्रिया भी संपदा 2.0 से हो सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विभागीय अधिकारी सायबर पंजीयन सुविधा के माध्यम से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के साथ मौजूदा वित्त वर्ष में अपने लक्ष्य पूरे करें।

    उप मुख्यमंत्री एवं वाणिज्यिक कर मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि वर्ष 2024-25 में दस्तावेजों के पंजीयन और ई-स्टाम्पिंग के लिए एडवांस सॉफ्टवेयर संपदा 2.0 लागू किया। इससे चल और अचल संपत्ति के दस्तावेज डिजिटल और पेपरलेस तरीके से पंजीकृत हो रहे हैं। कई दस्तावेज तो ऐसे हैं जिनके लिए उप-पंजीयक कार्यालय भी नहीं आना पड़ता है। सबसे पहले गुना,हरदा, रतलाम और डिण्डौरी जिलों में नए ई-पंजीयन और ई- स्थम्पिंग सॉफ्टवेयर संपदा 2.0 का सफल पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था। प्रदेश के नवाचारों को देशभर में सराहा गया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में जारी इन नवाचारों का लाभ प्रदेश के नागरिकों को मिल रहा हैं। पंजीयन से जुड़े कार्यों को त्रूटि रहित पूरा करने के लिए प्रदेशभर के 14 लाख कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। इस अवसर पर प्रमुख सचिव अमित राठौर, प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह, महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक अमित तोमर उपस्थित रहे। कार्यक्रम से जिलों के अधिकारी, बैंककर्मी और लाभार्थी वर्चुअली जुड़े।

  • नोहलेश्वर महोत्सव आस्था के साथ संस्कृति, परम्परा और सामाजिक समरसता का उत्सव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    नोहलेश्वर महोत्सव आस्था के साथ संस्कृति, परम्परा और सामाजिक समरसता का उत्सव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नोहलेश्वर महादेव की महिमा ऐसी है जो यहाँ एक बार आता है, उसका मन बार-बार यहां आने को करता है। कृपावंत, कृपाशंकर भगवान नोहलेश्वर महादेव के आशीर्वाद से हम प्रदेश के विकास और जनकल्याण के लिए पूरी ऊर्जा और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ रहे हैं। नोहलेश्वर महोत्सव आस्था ही नहीं, स्थानीय संस्कृति, परम्परा और सामाजिक समरसता का भी उत्सव है। हमारी सरकार आस्था के स्थलों के संरक्षण और पर्यटन विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को दमोह जिले के ग्राम नोहटा में नोहलेश्वर महोत्सव मेले के अवसर पर आयोजित किसान सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मेले का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। साथ ही नोहलेश्वर मंदिर परिसर और मेला परिसर में विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई विकास प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्रीय जनता की मांग पर नोहटा को परीक्षण के उपरांत नगर परिषद बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दमोह में 2 करोड़ रूपए की लागत से गीता भवन का निर्माण किया जाएगा। दमोह जिले में बांदकपुर-सेमरखो जलाशय की क्षमता में वृद्धि कर 600 करोड़ रूपए की नई सिंचाई परियोजना विकसित की जाएगी। इससे जिले के 33 गांवों के खेतों को सिंचाई के लिये भरपूर पानी मिलेगा। दमोह में 10 करोड़ रूपए की लागत से वॉटर स्पोर्ट्स, बोट क्लब सहित अन्य पर्यटन गतिविधियों का विकास किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तेंदूखेड़ा और हटा में खेल गतिविधियों के प्रोत्साहन के लिए नए स्टेडियम बनाए जाएंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुप्रसिद्ध भजन गायिका शहनाज अख्तर का अभिनंदन भी किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार दमोह के साथ पूरे बुंदेलखंड के विकास के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। दमोह के तेंदूखेड़ा में 165 करोड़ की नई योजना को स्वीकृति दी गई है। दमोह के लिए नया फोर लेन भी मंजूर किया गया है। दमोह में पर्यटन के साथ उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि सहित सभी क्षेत्रों में समान रूप से प्रयास कर रही है। दमोह जिले में जैविक खेती के प्रोत्साहन के लिए जैविक हाट लगाए जा रहे हैं। अब तक जिले में 69 जैविक हाटों में 28 लाख रुपए के उत्पादों की बिक्री हुई है। उन्होंने जिला प्रशासन द्वारा किसानों को खाद वितरण के लिए की गई ई-टोकन की व्यवस्था की सराहना की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान हमारे अन्नदाता हैं। उनकी खुशहाली और समृद्धि से ही देश खुशहाल बनेगा। उन्होंने कहा कि हम खेती के साथ पशुपालन को भी प्रोत्साहन दे रहे हैं। कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण बढ़ाना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पशुपालन से दूध उत्पादन बढ़ेगा। हमने प्रदेश का दूध उत्पादन 9 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा है। हमारी सरकार पशुपालन, गौपालन और गौ-संरक्षण की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसी भी देश के साथ रिश्तों में किसानों के हितों से कभी समझौता नहीं किया। खेतों में किसान और सीमा पर जवान, दोनों हमारे लिए बराबर सम्मान रखते हैं। राज्य सरकार किसानों के स्वास्थ्य का भी विशेष ध्यान रख रही है। विकास कार्यों को गति देने में हमारी सरकार सदैव जनता के साथ खड़ी है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में माताओं-बहनों का स्थान सर्वोपरि है। हम अपने देश को भी माता का दर्जा देते हुए भारत माता कहकर सम्मान देते हैं। माताएं-बहनें हमारे परिवार की गरिमा हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार हमेशा लाड़ली बहनों के साथ है। लाड़ली बहनों को हर महीने 1500 रुपए की सहायता राशि दी जा रही है। वे अपनी मेहनत और निष्ठा से पूरे कुल, खानदान, परिवार का लालन-पालन करती हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दमोह में औद्योगिक प्रक्षेत्र के विकास के साथ क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। सूखे खेत को पानी मिल जाए, तो फसल सोने जैसी हो जाती है। दमोह जिले को देश की पहली नदी जोड़ो केन-बेतवा लिंक परियोजना से सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने पहली बार श्रीकृष्ण जन्माष्ठमी और गीता जयंती को भव्यता के साथ मनाने की शुरुआत की। मध्यप्रदेश, देश का एकमात्र राज्य है, जो विकास के साथ विरासत का भी संरक्षण कर रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नोहटा का नोहलेश्वर मंदिर 1100 साल से अधिक प्राचीन है, जिसे कलचुरी साम्राज्य में महारानी नोहला ने बनवाया था। नोहलेश्वर महोत्सव के आयोजन से इस क्षेत्र के पर्यटन को नई ऊर्जा मिल रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती पर चीतों के पुनर्स्थापन से नया चमत्कार हुआ है। श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में विदेश से 20 चीता लाए गए थे, अब 35 चीते प्रदेश की धरती पर दौड़ लगा रहे हैं, चीतों का परिवार बढ़ रहा है। कुछ दिन पहले मादा चीता आशा ने 5 शावकों को जन्म दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इसी साल जून में नौंरादेही अभयारण्य में चीतों को छोड़ा जाएगा। मध्यप्रदेश टाइगर, चीता, गिद्ध और घड़ियाल के मामले में देश में शीर्ष स्थान पर है। उन्होंने कहा कि वन्य जीव पर्यटन को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने होम-स्टे योजना बनाई है। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा और वे पर्यटकों को अपने घरों में होम-स्टे बनाकर ठहरा सकेंगे। होम-स्टे तैयार करने वाले हितग्राहियों को शासकीय अनुदान भी दिया जा रहा है। उन्होंने होम-स्टे संचालनकर्ताओं से कहा कि जब पर्यटक आएं, तो उनकी अच्छी तरह मेहमाननवाज़ी करे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिन पर्यटन क्षेत्रों में होम-स्टे चल रहे हैं, वहाँ होम-स्टे से ग्रामीणों की आय तेजी से बढ़ रही है।

    संस्कृति, पर्यटन एवं धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। मध्यप्रदेश ने ऊर्जा के क्षेत्र में प्रगति करते हुए आज 26 हजार मेगावॉट से अधिक बिजली उपलब्धता सुनिश्चित की है। मध्यप्रदेश में किसानों को ब्याज रहित ऋण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ‘मैन ऑफ आइडियाज’ हैं। उन्होंने अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारा है।

    दमोह सांसद राहुल सिंह लोधी ने कहा कि दमोह में मेडिकल कॉलेज बनकर तैयार हो रहा है। बुंदेलखंड में सबसे बड़ी समस्या पानी की थी, जो अब दूर होती जा रही है। देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना केन-बेतवा लिंक से दमोह जिले के 300 से अधिक गांवों को सिंचाई और पेयजल के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा। प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश के गरीब, किसान, युवा और नारी, हर वर्ग को सरकार की जनहितैषी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। श्याम शिवहरे ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 100 करोड़ की लागत से जागेश्वर महादेव मंदिर के विकास कार्य की घोषणा की थी, जिसका काम जारी है।

    किसान सम्मेलन में पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल, पूर्व मंत्री एवं दमोह विधायक जयंत मलैया, पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रंजीता गौरव पटैल, उपाध्यक्ष श्रीमती मंजु धर्मेन्द्र कटारे, विधायक हटा श्रीमती उमा खटीक, पूर्व मंत्री दशरथ सिंह लोधी, पूर्व सांसद चन्द्रभान सिंह, वरिष्ठ नेता विद्यासागर पांडे, भावसिंह लोधी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, लाड़ली बहनें, युवा और बड़ी संख्या में क्षेत्रीय किसान बंधु उपस्थित थे।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कांफ्रेंस-2026 में होंगे शामिल

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कांफ्रेंस-2026 में होंगे शामिल


    भोपाल!
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार 15 जनवरी को भोपाल में ‘मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कांफ्रेंस-2026’ में एआई-सक्षम शासन और आर्थिक परिवर्तन के लिए मध्यप्रदेश के रणनीतिक रोडमैप को प्रस्तुत करेंगे। यह कांफ्रेंस एआई इनेबल्ड गवर्नेंस फॉर एन एम्पावर्ड भारत की थीम पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा इंडिया एआई मिशन के सहयोग से आयोजित की जा रही है।इससे एआई आधारित शासन,तकनीक एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अकादमिक और उद्योग समन्वय को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ प्रदेश सरकार एआई को नागरिक-केंद्रित, पारदर्शी और कुशल शासन की आधारशिला के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है।

    कांफ्रेंस में मध्यप्रदेश ‘इनोवेशन एक्सपो’ का शुभारंभ भी किया जाएगा, जिसमें इंडिया एआई पेवेलियन, मध्यप्रदेश पेवेलियन, स्टार्ट-अप शो-केस, हैकाथॉन एरिना और स्टार्ट-अप प्रतियोगिता शामिल होंगी। कांफ्रेंस में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अपर सचिव एवं सीईओ इंडिया एआई श्री अभिषेक सिंह और आईआईटी इंदौर के निदेशक श्री सुहास एस. जोशी संबोधित करेंगे।

    अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी श्री संजय दुबे द्वारा “एआई फॉर पीपल,प्लेनेट एंड प्रोग्रेस – मध्यप्रदेश रोडमैप टू इंपैक्ट ” पर राज्य का प्रमुख एआई विजन प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन कांफ्रेंस को संबोधित करेंगे। कांफ्रेंस में स्पेसटेक नीति लांच होगी, विभिन्न समझौता ज्ञापनों और नवाचार एवं युवा एआई पहलों से संबंधित महत्वपूर्ण घोषणाएं की जाएंगी।

    कांफ्रेंस में तीन उच्चस्तरीय थीमैटिक सत्र—टेक्नोलॉजी लेड गवर्नेंस फॉर ऑल, एआई फॉर इकोनॉमिक ग्रोथ एंड सोशल गुड और रेज़िलिएंस, इनोवेशन एंड डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर आयोजित किए जाएंगे। इनमें डिजिटल इंडिया- भाषिणी, यूआईडीएआई, एनईपीडी विभिन्न राज्य सरकारों और गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, डिलोट्टी और ईवाई जैसे अग्रणी संगठनों के विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे। साथ ही एमपी इनोटेक स्टार्ट-अप पिच कंटेस्ट और उज्जैन महाकुंभ हैकाथॉन के विजेताओं की घोषणा भी की जाएगी।

    यह कांफ्रेंस इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट-2026 की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट-2026 की घोषणा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा फ्रांस एआई एक्शन समिट में की गई थी। सम्मेलन का आयोजन 16 से 20 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली में किया जाएगा।

  • केन्द्र और राज्य के बेहतर समन्वय से म.प्र. में सड़क परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आई उल्लेखनीय गति : केन्द्रीय मंत्री गडकरी

    केन्द्र और राज्य के बेहतर समन्वय से म.प्र. में सड़क परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आई उल्लेखनीय गति : केन्द्रीय मंत्री गडकरी


    नई दिल्‍ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री  नितिन गडकरी ने सिंहस्थ-2028 को दृष्टिगत रखते हुए प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन के लिए सुदृढ़, सुरक्षित और सुगम सड़क कनेक्टिविटी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने मध्यप्रदेश में सड़क परियोजनाओं की संतोषजनक प्रगति के लिए राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य के बेहतर समन्वय से सड़क परियोजनाओं के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय गति आई है। यह बात केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री गडकरी ने, मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार, सुदृढ़ीकरण एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन को नई गति प्रदान करने के उद्देश्य से दिल्ली में समीक्षा बैठक में कही। बैठक में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव एवं म.प्र. विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर भी शामिल हुए।

    केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी ने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के अंतर्गत ब्यूटीफिकेशन, ब्रिज निर्माण, पुलिया निर्माण तथा ब्लैक स्पॉट रेक्टिफिकेशन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सड़कें केवल यातायात का माध्यम नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास और जनसुविधा का आधार होती हैं, इसलिए इनके सौंदर्यीकरण और सुरक्षा उपायों पर विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दुर्घटना संभावित स्थलों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर सुधारात्मक कार्य किए जाएं।

    सड़क निर्माण की गुणवत्ता को दें सर्वोच्च प्राथमिकता

    केंद्रीय मंत्री श्री गडकरी ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सड़क परियोजनाओं में वृक्ष कटाई को न्यूनतम रखते हुए आधुनिक तकनीकों के माध्यम से ट्री ट्रांसप्लांट को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जिससे विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कॉन्ट्रैक्टर्स से सीधे संवाद कर प्रत्येक परियोजना की समीक्षा की और कहा कि सभी कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप ही किए जाएं।

    केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी ने पेचवर्क सहित सड़क रख-रखाव कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि टोल टैक्स वाली सड़कों की स्थिति उत्कृष्ट होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि किसी टोल रोड पर सड़क की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाई जाती है, तो संबंधित टोल संचालकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने लंबित परियोजनाओं को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश देते हुए समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया।

    दिल्ली में हुआ मंथन राजमार्ग परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता करेंगी सुनिश्चित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह मंथन बैठक केंद्र एवं राज्य सरकार के बीच संस्थागत समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करेगी तथा राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के क्रियान्वयन में गति और गुणवत्ता दोनों सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा कि इस समीक्षा के माध्यम से लंबित एवं प्रगतिरत परियोजनाओं से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों-जैसे भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय स्वीकृतियां, निर्माण गुणवत्ता और समयबद्धता-पर समन्वित निर्णय लिए गए हैं, जिससे कार्यों को शीघ्रता से धरातल पर उतारा जा सकेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक मजबूत, आधुनिक और सुरक्षित सड़क नेटवर्क प्रदेश की आर्थिक प्रगति, औद्योगिक विकास, निवेश आकर्षण और पर्यटन विस्तार की आधारशिला है। राष्ट्रीय राजमार्गों के सुदृढ़ीकरण से न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि व्यापार, लॉजिस्टिक्स, कृषि विपणन और रोजगार सृजन को भी नया प्रोत्साहन मिलेगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार के सहयोग और राज्य सरकार की सक्रिय भूमिका से मध्यप्रदेश में सड़क अवसंरचना को नई दिशा मिलेगी तथा आम नागरिकों को सुरक्षित, सुगम और विश्वस्तरीय यातायात सुविधाओं का लाभ प्राप्त होगा।

    लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कुशल नेतृत्व में राज्य में सड़क नेटवर्क को सुदृढ़ और आधुनिक बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का निर्माण कार्य तेज़ गति से प्रगति पर है। उन्होंने बताया कि इन परियोजनाओं से आवागमन सुगम होगा, आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और आम नागरिकों को बेहतर परिवहन सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। उन्होंने राज्य में राष्ट्रीय राज्यमार्ग परियोजनाएँ तीव्र गति से प्रस्तावित करने के लिए केंद्रीय मंत्री श्री गडकरी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने राज्य सरकार की परियोजनाओं में विकासात्मक उपलब्धियों की जानकारी भी साझा की।

    मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को समय-सीमा में पूर्ण करने लिए में प्रति माह परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की जा रही है। राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए हरसंभव सहयोग दिया जा रहा हैं। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के लिए भूमि अर्जन, फॉरेस्ट क्लियरेंस आदि कार्यों में गति लाई जा रही है। सिंहस्थ-2028 के लिए परियोजनाओं को पूर्ण करने के लिए समय सीमा दिसम्बर-2027 रखी गई है। संभाग एवं जिला प्रशासन को राष्ट्रीय परियोजनाओं के कार्यों में गति लाने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

    समीक्षा बैठक में ये भी रहे प्रमुख बिन्दु

    • समीक्षा बैठक में अवगत कराया गया कि मध्यप्रदेश में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की कोई भी परियोजना तीन वर्ष से अधिक समय से लंबित नहीं है, जो प्रभावी परियोजना प्रबंधन, सतत निगरानी और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया को दर्शाता है।

    • केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री गडकरी ने खंडवा बायपास, जबलपुर रिंग रोड, इंदौर-हरदा, रीवा बायपास सहित प्रदेश की सभी प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    • बैठक में जानकारी दी गई कि वर्तमान में मध्यप्रदेश में NHAI के अंतर्गत 33 तथा MoRTH-PWD के अंतर्गत 28 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं प्रगतिरत हैं। इस प्रकार कुल 61 परियोजनाएं विभिन्न चरणों में क्रियान्वयन की अवस्था में हैं।

    • इन सभी परियोजनाओं का उद्देश्य प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करना, यातायात को सुगम बनाना और क्षेत्रीय विकास को नई गति प्रदान करना है।

    • वर्ष 2025-26 की वार्षिक योजना के अंतर्गत प्रस्तावित एवं प्रगतिरत राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई और समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया गया।

    • आगामी वित्तीय वर्ष में परियोजनाओं की गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने तथा केंद्र-राज्य समन्वय आधारित निगरानी प्रणाली को सुदृढ़ करने पर सहमति बनी।

    • बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई 9,300 किलोमीटर से अधिक है, जो राज्य की आर्थिक प्रगति, औद्योगिक विकास, पर्यटन विस्तार और सुरक्षित यातायात व्यवस्था का मजबूत आधार है।

    • प्रदेश की भविष्य की राष्ट्रीय राजमार्ग विकास योजनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया, जिससे सड़क अवसंरचना को और अधिक आधुनिक, सुरक्षित एवं व्यापक बनाते हुए विकास की गति को निरंतर बनाए रखा जा सके।

  • उज्जैन बनेगी देश की पहली सर्पमित्र नगरी सांपों के संरक्षण के लिए विशेष प्रयास जारी

    उज्जैन बनेगी देश की पहली सर्पमित्र नगरी सांपों के संरक्षण के लिए विशेष प्रयास जारी


    उज्जैन । मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले को अब देश की पहली सर्पमित्र नगरी के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पहल का ऐलान किया है जिसका मुख्य उद्देश्य सांपों के संरक्षण के साथ-साथ समाज में इनके प्रति जागरूकता बढ़ाना है। महाकाल की नगरी उज्जैन को सांपों का संरक्षण करने वाली पहली नगरी के रूप में स्थापित किया जा रहा है जहां सांपों के जीवन को बचाने और उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा करने के लिए व्यापक प्रयास किए जाएंगे ।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि सांप भगवान शिव के गले का हार हैं और इन्हें सुरक्षित करना महाकाल की नगरी का कर्तव्य बनता है। उनका मानना है कि सांपों को लेकर समाज में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना बेहद जरूरी है ताकि न तो सांप किसी इंसान को नुकसान पहुंचाएं और न ही इंसान सांपों को नुकसान पहुंचाए। उनके इस दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने कई कदम उठाने की योजना बनाई है।

    प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूकता फैलाना

    उज्जैन में इस पहल के तहत अब तक 100 से ज्यादा विद्यार्थियों को हायर सेकंडरी स्कूलों में सांपों से सुरक्षित और मित्रवत तरीके से व्यवहार करने के लिए प्रशिक्षण दिया गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों और युवाओं में सांपों के प्रति डर को कम करना और उनके संरक्षण के महत्व को समझाना है। आगामी चरणों में इस अभियान का विस्तार किया जाएगा जिसमें डॉक्टरों हेल्थ वर्कर्स किसानों और पंचायत सचिवों को भी सांपों के सुरक्षित संरक्षण के तरीके सिखाए जाएंगे।

    यह पहल उज्जैन में सांपों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उनके संरक्षण के लिए जरूरी कदमों को लागू करेगी। सांपों के अलावा इस पहल में अन्य वन्य जीवों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके परिणामस्वरूप न सिर्फ सांपों को बचाया जाएगा बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन भी बना रहेगा।

    सांपों के संरक्षण के लिए तैयार की गई योजनाएं

    उज्जैन को सर्प संरक्षण के लिए नोडल जिला बनाने का निर्णय लिया गया है जिसका मतलब है कि इस जिले में सांपों के संरक्षण के लिए अलग-अलग योजनाओं का निर्माण किया जाएगा। इन योजनाओं में सांपों के प्राकृतिक आवासों को संरक्षित करना उनकी प्रजनन दर बढ़ाना और उन्हें उपयुक्त वातावरण प्रदान करना शामिल होगा। इसके अलावा किसानों को जागरूक किया जाएगा ताकि वे कृषि कार्यों के दौरान सांपों को नुकसान न पहुंचाएं और उनके प्राकृतिक आवासों में हस्तक्षेप न करें।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सांपों के संरक्षण के लिए उठाए गए कदम केवल उनके अस्तित्व को बचाने के लिए नहीं हैं बल्कि इस पहल से पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और जैव विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। उनका मानना है कि सांपों और मनुष्यों के बीच मित्रवत संबंध स्थापित करके हम पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ कर सकते हैं जिससे समग्र पर्यावरण की रक्षा हो सकेगी।

    सांपों के संरक्षण से पर्यावरण संतुलन

    सांपों का पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण स्थान है। वे छोटे कीटों और अन्य जीवों का शिकार करते हैं जिससे प्राकृतिक संसाधनों का संतुलन बना रहता है। सांपों की उपस्थिति से कीटों की संख्या नियंत्रित रहती है जिससे कृषि क्षेत्र में कीटों के हमले की संभावना कम होती है और कृषि उत्पादकता भी बढ़ती है। यदि सांपों का संरक्षण सही तरीके से किया जाए तो यह पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए लाभकारी साबित होगा।

    इसके साथ ही सांपों के संरक्षण से स्थानीय समुदायों में पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ेगी। लोग अब सांपों को एक खतरनाक प्राणी के रूप में नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र के हिस्से के रूप में देखेंगे। इस तरह की जागरूकता से समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक नया दृष्टिकोण विकसित होगा।

    सीएम डॉ. मोहन यादव की पहल का प्रभाव

    सीएम डॉ. मोहन यादव की यह पहल न केवल सांपों के संरक्षण के लिए है बल्कि यह पूरे राज्य और देश के पर्यावरण के लिए एक बड़ी क्रांतिकारी बदलाव का संकेत देती है। उनके इस कदम से उज्जैन की पहचान एक पर्यावरण मित्र नगरी के रूप में होगी जो सांपों और अन्य वन्य जीवों के संरक्षण में अपनी भूमिका निभाएगी। यह कदम उन लोगों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बनेगा जो पर्यावरणीय संरक्षण की दिशा में काम कर रहे हैं।

    यह पहल उज्जैन को एक मिसाल बना सकती है जहां समाज और वन्य जीवों के बीच सामंजस्यपूर्ण संबंध स्थापित किया जा सकता है जिससे न केवल सांपों का संरक्षण होगा बल्कि पूरे पर्यावरण का संतुलन भी बनाए रखा जा सकेगा।