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  • गोरखपुर में इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम का शिलान्यास, CM योगी बोले– यूपी अब विकास का मॉडल बन चुका है

    गोरखपुर में इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम का शिलान्यास, CM योगी बोले– यूपी अब विकास का मॉडल बन चुका है



    गोरखपुर। गोरखपुर में शनिवार को इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम का भव्य शिलान्यास किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी मौजूद रहे। करीब 393 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह स्टेडियम CM योगी का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जा रहा है, जिसे 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

    “उत्तर प्रदेश अब सिर्फ संभावनाओं का नहीं, परिणामों का राज्य है” – हरदीप पुरी
    केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में जिस तरह विकास कार्यों ने रफ्तार पकड़ी है, वह देश के लिए उदाहरण बन गया है। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था में सुधार से निवेश बढ़ा है और गोरखपुर का यह स्टेडियम युवाओं के सपनों को नई उड़ान देगा।

    18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य, अंतरराष्ट्रीय मैच की उम्मीद
    मंत्री पुरी ने दावा किया कि स्टेडियम का निर्माण तेजी से पूरा होगा और 18 महीने के भीतर इसे तैयार करने की कोशिश होगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में यहां IPL और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच आयोजित किए जा सकेंगे, जिससे पूर्वी उत्तर प्रदेश को नई पहचान मिलेगी।

    VIP कारपूल से पहुंचे रवि किशन, नेताओं ने दिखाई एकजुटता
    शिलान्यास समारोह में सांसद रवि किशन केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान और अन्य नेताओं के साथ कारपूल करके पहुंचे। इस दौरान गोरखपुर में खेल सुविधाओं के विस्तार और ग्रामीण स्तर पर स्टेडियम विकसित करने की योजनाओं पर भी चर्चा हुई।

    स्टेडियम से बदल जाएगी गोरखपुर की पहचान
    केंद्रीय राज्य मंत्री गिरीश चंद्र यादव ने कहा कि प्रदेश के हर जिले में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि गोरखपुर का यह स्टेडियम भविष्य में कई बड़े क्रिकेट सितारे तैयार करेगा और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती देगा।

  • काशी में गरजे सीएम योगी: सनातन को मिटाने वाले खुद मिट गए, ॐ जाप और सोमनाथ महोत्सव में गूंजे नारे

    काशी में गरजे सीएम योगी: सनातन को मिटाने वाले खुद मिट गए, ॐ जाप और सोमनाथ महोत्सव में गूंजे नारे



    नई दिल्ली। काशी विश्वनाथ धाम में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सनातन संस्कृति और भारत की आध्यात्मिक विरासत को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जिन्होंने सनातन को मिटाने का प्रयास किया, वे इतिहास में खुद मिट गए हैं। योगी ने मुहम्मद गौरी और औरंगजेब जैसे आक्रांताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे आक्रमणकारियों ने भारत की सांस्कृतिक पहचान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन वे भारत की आत्मा को कभी नहीं तोड़ सके। उन्होंने कहा कि भारत की चेतना अजर-अमर है और सनातन परंपरा आज भी उतनी ही मजबूत है जितनी सदियों पहले थी।

    सीएम योगी ने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम और सोमनाथ मंदिर भारत के गौरव और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि काशी में आज भव्य और दिव्य धाम का स्वरूप दिखाई दे रहा है, जो भारत की आस्था और संस्कृति का प्रतीक है। इसी तरह सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण भारत की आध्यात्मिक शक्ति का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि दोनों मंदिर हमें यह संदेश देते हैं कि भले ही आक्रमण हों, लेकिन सनातन संस्कृति को कभी नष्ट नहीं किया जा सकता।

    इस अवसर पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में विधिवत दर्शन-पूजन किया और परिसर में ‘ॐ’ का जाप भी किया। कार्यक्रम के दौरान सोमनाथ मंदिर के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजित सोमनाथ अमृत महोत्सव का लाइव प्रसारण भी देखा गया। यह वही ऐतिहासिक मंदिर है जिसका 1951 में स्वतंत्र भारत में पुनः प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी।

    कार्यक्रम में धार्मिक माहौल देखने को मिला। छात्र-छात्राओं ने शंखनाद और डमरू वादन किया, जिससे पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। वहीं गुजरात से आई महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में ‘वोट फॉर भाईसाहब’ के नारे लगाए, जिससे माहौल राजनीतिक रंग भी लेता नजर आया।

    सीएम ने अपने संबोधन में कहा कि आज भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को फिर से वैश्विक पहचान दिला रहा है। उन्होंने कहा कि पहले भारत अपनी परंपराओं पर उतना गर्व नहीं कर पाया, लेकिन अब देश अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है और अपनी पहचान को मजबूती से स्थापित कर रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि सोमनाथ मंदिर पर इतिहास में कई बार आक्रमण हुए और उसे नष्ट करने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार वह फिर से अपने गौरव के साथ खड़ा हुआ। यही भारत की सबसे बड़ी ताकत है कि यहां विनाश अस्थायी है और सृजन हमेशा स्थायी रहता है।

    कार्यक्रम के अंत में सीएम ने कहा कि भारत के देवस्थल केवल पत्थर की इमारतें नहीं हैं, बल्कि वे हमारी आस्था, संस्कृति और चेतना के प्रतीक हैं। इन्हें कोई शक्ति मिटा नहीं सकती और यही सनातन की सबसे बड़ी विशेषता है।

    इस पूरे आयोजन ने काशी में धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल को और भी भव्य बना दिया, जहां आस्था, इतिहास और आधुनिक भारत की सोच एक साथ दिखाई दी।

  • मथुरा अधिक मास मेला: व्यवस्था, सत्यापन और सुरक्षा को लेकर उठा मुद्दा, प्रशासन से सख्ती की मांग

    मथुरा अधिक मास मेला: व्यवस्था, सत्यापन और सुरक्षा को लेकर उठा मुद्दा, प्रशासन से सख्ती की मांग



    नई दिल्ली। मथुरा के गोवर्धन क्षेत्र में लगने वाले तीन वर्ष में एक बार आयोजित होने वाले अधिक मास मेले (Adhik Maas Mela) को लेकर इस बार प्रशासनिक और धार्मिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मेले की व्यवस्थाओं को लेकर कुछ अहम सुझाव और चिंताएं साझा की हैं।

    पत्र में कहा गया है कि मेले के दौरान सभी दुकानदारों और व्यापारियों का सख्त सत्यापन होना चाहिए, ताकि आयोजन की शुचिता और सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे। साथ ही यह भी मांग की गई है कि केवल सत्यापित और नियमों का पालन करने वाले व्यापारियों को ही दुकान लगाने की अनुमति दी जाए।

    आयोजकों का कहना है कि गोवर्धन क्षेत्र में लगने वाला यह धार्मिक मेला लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की अव्यवस्था या सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए। पत्र में मेले की पारंपरिक और धार्मिक गरिमा बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है।

    स्थानीय प्रशासन ने अभी इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन पत्र सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। अधिकारियों के अनुसार मेले की तैयारी पहले से ही सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखकर की जा रही है।

    गोवर्धन क्षेत्र में यह मेला धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसमें देशभर से श्रद्धालु और व्यापारी शामिल होते हैं।

  • CM योगी समेत कई नेताओं ने बदली सोशल मीडिया DP, ऑपरेशन सिंदूर और ब्रह्मोस तस्वीरों से दिया खास संदेश

    CM योगी समेत कई नेताओं ने बदली सोशल मीडिया DP, ऑपरेशन सिंदूर और ब्रह्मोस तस्वीरों से दिया खास संदेश

    नई दिल्ली।
    ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के मौके पर देश के राजनीतिक और डिजिटल माहौल में एक खास तरह की हलचल देखने को मिली। इस दिन को याद करते हुए कई वरिष्ठ नेताओं ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स की प्रोफाइल तस्वीरों और कवर इमेज में बदलाव किया। यह बदलाव केवल एक औपचारिक अपडेट नहीं था, बल्कि इसके पीछे भारतीय सेना के साहस और उस ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई को याद करने का संदेश भी जुड़ा था, जिसे देश की सुरक्षा के इतिहास में एक अहम मोड़ माना जाता है।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस अवसर पर अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल में विशेष बदलाव किया। उनकी प्रोफाइल तस्वीर में ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी प्रतीकात्मक झलक दिखाई दी, जबकि कवर इमेज में ब्रह्मोस मिसाइल को प्रमुखता से दर्शाया गया। यह बदलाव सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया और लोगों के बीच इसे लेकर काफी प्रतिक्रिया देखने को मिली।

    ऑपरेशन सिंदूर को उस सैन्य कार्रवाई के रूप में देखा जाता है जिसमें भारतीय सुरक्षा बलों ने संयुक्त रूप से आतंकवादी ठिकानों पर निर्णायक कदम उठाया था। इस कार्रवाई को देश की सुरक्षा नीति में एक मजबूत संदेश के रूप में देखा जाता है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया था कि राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    इस वर्षगांठ पर कई नेताओं ने सोशल मीडिया के जरिए देश के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कीं और भारतीय सेना के साहस को सलाम किया। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किए गए ये बदलाव एक प्रतीकात्मक संदेश के रूप में सामने आए, जिसमें देश की रक्षा नीति और सैन्य ताकत को प्रमुखता से दर्शाया गया।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा ब्रह्मोस मिसाइल को कवर इमेज में शामिल करना भी विशेष रूप से चर्चा में रहा। ब्रह्मोस को भारत की आधुनिक और तेज सुपरसोनिक मिसाइलों में गिना जाता है, जिसे देश की रक्षा क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यह तस्वीर भारत की बढ़ती सैन्य तकनीक और आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था का भी संकेत देती है।

    उत्तर प्रदेश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। लखनऊ में ब्रह्मोस से जुड़ी उत्पादन इकाई इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जाती है, जो राज्य को रक्षा क्षेत्र में नई पहचान दिला रही है।

    सोशल मीडिया पर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर लोगों की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली। कई यूजर्स ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी तस्वीरें और संदेश साझा किए, जिससे यह विषय केवल एक औपचारिक वर्षगांठ न रहकर एक व्यापक चर्चा का हिस्सा बन गया। यह पूरा घटनाक्रम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर देशभक्ति और सुरक्षा संदेश के एक नए रूप में सामने आया।

  • CM योगी की नई नीति ने बदली UP की तस्वीर… रोजगार बढ़े…. कमाई में भी इजाफा

    CM योगी की नई नीति ने बदली UP की तस्वीर… रोजगार बढ़े…. कमाई में भी इजाफा


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Adityanath Government) द्वारा लागू की गई नई आबकारी नीति (New excise policy) ने राज्य के राजस्व, सुरक्षा और औद्योगिक निवेश की तस्वीर बदल दी है। साल 2025 आबकारी विभाग के लिए संरचनात्मक सुधारों और तकनीकी बदलावों का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है। सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और ‘ई-गवर्नेंस’ के समन्वय ने इस क्षेत्र में पारदर्शिता के साथ-साथ रिकॉर्ड तोड़ कमाई सुनिश्चित की है।

    नई आबकारी नीति के तहत विभाग की पूरी कार्यप्रणाली को ‘टेक्नोलॉजी ड्रिवेन’ बनाया गया है। अब शराब की दुकानों का आवंटन पूरी तरह से ई-लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाता है, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो गई है। इसके अलावा, लेबल की मंजूरी, एमआरपी का निर्धारण और निर्यात परमिट जैसी सभी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन कर दिया गया है।

    निगरानी को सख्त करने के लिए उत्पादन इकाइयों और डिस्टिलरीज में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। साथ ही, शराब ले जाने वाले टैंकरों में डिजिटल लॉक और जीपीएस (GPS) अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि रास्ते में मिलावट या चोरी की संभावना को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।


    राजस्व में 15% से ज्यादा की रिकॉर्ड बढ़ोतरी

    योगी सरकार की नीतियों का सीधा असर सरकारी खजाने पर दिख रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2025 तक राज्य को कुल 35,144.11 करोड़ रुपये का आबकारी राजस्व प्राप्त हुआ है। यह पिछले वर्ष (2024-25) की इसी अवधि के मुकाबले 15.59 प्रतिशत अधिक है। सरकार ने पिछले साल की तुलना में केवल आठ महीनों में 4,741.77 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय दर्ज की है।


    एथेनॉल उत्पादन में यूपी बना नंबर-1

    उत्तर प्रदेश अब देश के एक बड़े एथेनॉल हब के रूप में उभरा है। इस साल राज्य में एथेनॉल का उत्पादन 182 करोड़ लीटर तक पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। इसमें से 105.25 करोड़ लीटर एथेनॉल की खपत राज्य के भीतर हुई, जबकि 40.96 करोड़ लीटर अन्य राज्यों को निर्यात किया गया। इससे न केवल उद्योगों को मजबूती मिली है, बल्कि गन्ना किसानों की आय में भी वृद्धि हुई है।


    अवैध शराब के खिलाफ एक्शन

    अवैध शराब के कारोबार को जड़ से मिटाने के लिए सरकार ने इस साल व्यापक अभियान चलाया। प्रदेश भर में कुल 79,990 मामले दर्ज किए गए और लगभग 20.86 लाख लीटर अवैध शराब जब्त की गई। इस कार्रवाई के तहत 15,085 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 2,755 को जेल भेजा गया। जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ‘यूपी एक्साइज सिटीजन ऐप’ और टोल-फ्री नंबर (14405) भी जारी किया गया है।


    निवेश और रोजगार के नए अवसर

    ‘इन्वेस्ट यूपी’ के माध्यम से आबकारी क्षेत्र में अब तक 35,378 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों वाले 140 एमओयू (MoU) साइन किए गए हैं। वर्तमान में 35 परियोजनाएं धरातल पर काम कर रही हैं, जिनमें 4,045 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हो चुका है। इन परियोजनाओं ने सीधे तौर पर 5,000 से अधिक युवाओं को रोजगार प्रदान किया है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था को $1 ट्रिलियन (एक ट्रिलियन डॉलर) बनाने के लक्ष्य में अहम भूमिका निभा रहे हैं।