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  • MP में सौ साल बाद जंगली भैंसों की वापसी…. CM ने काजीरंगा से लाए गए 8 भैंसों को कान्हा रिवर्ज में छोड़ा

    MP में सौ साल बाद जंगली भैंसों की वापसी…. CM ने काजीरंगा से लाए गए 8 भैंसों को कान्हा रिवर्ज में छोड़ा


    मंडला/बालाघाट।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में विलुप्त हो चुके जंगली भैंसों (Wild buffaloes) को उनके प्राकृतिक आवास में पुनः स्थापित करने की दिशा में रविवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) ने कान्हा टाइगर रिजर्व (Kanha Tiger Reserve) के सूपखार परिक्षेत्र में जंगली भैंसा पुनर्स्थापना कार्यक्रम के अंतर्गत क्वारंटाइन अवधि पूरी कर चुके आठ जंगली भैंसों को एक हेक्टेयर के छोटे बाड़े से 17 हेक्टेयर क्षेत्रफल में निर्मित बड़े बाड़े में विमुक्त किया। इस पहल का उद्देश्य जंगली भैंसों को क्षेत्र की आबोहवा और पर्यावरण के अनुकूल बनाकर उनके प्राकृतिक आवास में पुनर्स्थापित करना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कहा कि मध्यप्रदेश के लिए आज का दिन महत्वपूर्ण है। लगभग सौ वर्षों बाद कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना का दूसरा चरण प्रारंभ हो रहा है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सहयोग से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लगभग 2200 किलोमीटर की दूरी तय कर आठ जंगली भैंसों को मध्यप्रदेश लाया गया है। वर्षाकाल समाप्त होने के बाद इन्हें प्राकृतिक आवास में बसाने की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।

    दो चरणों में काजीरंगा से लाए गए आठ जंगली भैंसे

    जंगली भैंसा पुनर्स्थापना परियोजना के तहत असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से दो चरणों में आठ जंगली भैंसों को कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में लाया गया था। प्रथम चरण में 28 अप्रैल 2026 को तीन मादा और एक नर जंगली भैंसे को विशेष रूप से निर्मित एक हेक्टेयर क्षेत्रफल के बाड़े में छोड़ा गया। इसके बाद 9 मई 2026 को तीन मादा और एक नर जंगली भैंसे को इसी बाड़े में रखा गया।

    कुल छह मादा और दो नर जंगली भैंसों को छोटे बाड़े में क्वारंटाइन कर रखा गया, ताकि वे यहां के वातावरण और जलवायु के अनुरूप स्वयं को ढाल सकें। क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद रविवार 11 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी आठ जंगली भैंसों को 17 हेक्टेयर के बड़े बाड़े में स्थानांतरित कर विमुक्त किया।

    तीन वर्षों में 50 जंगली भैंसों को बसाने का लक्ष्य

    मध्यप्रदेश के वन क्षेत्रों से जंगली भैंसे लगभग सौ वर्ष पहले विलुप्त हो चुके थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रेरणा से वन विभाग ने इस प्रजाति को पुनः स्थापित करने के लिए विशेष योजना तैयार की है। सूपखार क्षेत्र में पूर्व में जंगली भैंसों की उपस्थिति के प्रमाण मिलने के आधार पर यहां पुनर्स्थापना परियोजना क्रियान्वित की जा रही है। इस परियोजना के अंतर्गत आगामी तीन वर्षों में कुल 50 जंगली भैंसों को पुनः स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। यह पहल मध्यप्रदेश में जैव-विविधता के संरक्षण, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को मजबूत बनाने और विलुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    वन्यजीव संरक्षण के साथ क्षेत्र के विकास पर जोर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार विलुप्त हो चुके वन्यजीवों को पुनः स्थापित कर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि 7 अक्टूबर को नौरादेही में रानी दुर्गावती के नाम पर अभयारण्य बनाकर चीतों के लिए तीसरा ठिकाना विकसित करने की पहल की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश से नक्सलवाद के खात्मे के बाद इस क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं सामने आ रही हैं।

  • MP: OBC आरक्षण को लेकर HC के फैसले पर CM बोले- कांग्रेस सरकार का अध्यादेश त्रुटिपूर्ण था, खामियों की करेंगे समीक्षा

    MP: OBC आरक्षण को लेकर HC के फैसले पर CM बोले- कांग्रेस सरकार का अध्यादेश त्रुटिपूर्ण था, खामियों की करेंगे समीक्षा


    भोपाल।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण (27 Percent OBC reservation ) से जुड़े मामले में हाईकोर्ट (High Court) के फैसले पर मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अध्यादेश के माध्यम से 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने में जल्दबाजी की थी और इसके प्रावधानों में गंभीर कानूनी खामियां थीं। राज्य सरकार हाईकोर्ट के निर्णय का विधिक परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेगी। मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा कि हाईकोर्ट ने वर्ष 2019 से 2022 के बीच की गई नियुक्तियों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। उनके मुताबिक, न्यायालय ने 13 प्रतिशत अतिरिक्त नियुक्तियों को संरक्षण देते हुए आगामी भर्ती में समायोजित करने का निर्देश दिया है। वहीं, वर्ष 2022 के बाद से फैसले की तारीख तक की गई भर्तियों में 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए गए हैं।


    कांग्रेस सरकार की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

    सीएम मोहन यादव ने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अध्यादेश के जरिए 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू करने में जल्दबाजी की थी। उनके अनुसार, इस संबंध में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से भी परामर्श नहीं लिया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से तत्कालीन सरकार की प्रक्रिया और आरक्षण लागू करने के तरीके पर सवाल उठे हैं।


    विधिक परीक्षण के बाद आगे की कार्रवाई

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के फैसले का विधिक परीक्षण करेगी और इसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। ओबीसी आरक्षण के मामले में फैसले के प्रभाव और राज्य सरकार के अगले कदम को लेकर अब कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

  • MP में GIS से पहले निवेश जुटाने की बड़ी तैयारी… CM कल मुम्बई में निवेशकों से करेंगे संवाद

    MP में GIS से पहले निवेश जुटाने की बड़ी तैयारी… CM कल मुम्बई में निवेशकों से करेंगे संवाद


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में जनवरी 2027 में होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) (Global Investors Summit – GIS) से पहले सरकार ने निवेशकों से सीधा संपर्क बढ़ा दिया है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) 8 अक्तूबर को मुंबई में देश के प्रमुख उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। मुंबई के लोअर परेल स्थित द सेंट रेजिस होटल में होने वाले निवेश संवाद में मुख्यमंत्री उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठकें करेंगे। मुंबई देश के बड़े औद्योगिक और कारोबारी समूहों का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में मुख्यमंत्री का उद्योगपतियों से सीधे संवाद का मकसद मध्य प्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों की जानकारी देने के साथ ही कंपनियों की जरूरत और उनके निवेश प्रस्तावों को समझना भी है।


    उद्योगपतियों के सामने रखेंगे एमपी का रोडमैप

    कार्यक्रम में मध्य प्रदेश की औद्योगिक नीति, निवेश के अवसर, औद्योगिक अधोसंरचना और अलग-अलग क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर्स की जानकारी दी जाएगी। औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर प्रस्तुतीकरण देंगे। सरकार की ओर से निवेशकों को प्रदेश की भौगोलिक स्थिति और लॉजिस्टिक्स से जुड़े फायदे भी बताए जाएंगे। मध्यप्रदेश देश के मध्य में होने के कारण बड़े बाजारों तक पहुंच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा उद्योगों की जरूरत के मुताबिक अधोसंरचना और निवेश सुविधा तंत्र को मजबूत करने की जानकारी भी साझा की जाएगी।


    वन-टू-वन बैठक में निवेशकों की जरूरत समझेंगे सीएम

    मुख्यमंत्री की उद्योगपतियों के साथ होने वाली व्यक्तिगत बैठकों को इस संवाद का अहम हिस्सा माना जा रहा है। इन बैठकों में कंपनियों के निवेश प्रस्ताव, उनकी व्यावसायिक जरूरतें और प्रदेश में निवेश को लेकर आने वाली संभावित दिक्कतों पर सीधे चर्चा होगी। सरकार निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने, जरूरी अनुमतियों को सुगम करने और उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने के अपने प्रयासों की जानकारी भी निवेशकों को देगी। अलग-अलग उद्योग क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं को लेकर भी चर्चा होगी।

  • मुख्यमंत्री जी, 'दीये जलाने से फुर्सत मिल गई हो तो जमीनी हालत भी देखिए- इंदौर आने से पहले राहुल गांधी का तंज

    मुख्यमंत्री जी, 'दीये जलाने से फुर्सत मिल गई हो तो जमीनी हालत भी देखिए- इंदौर आने से पहले राहुल गांधी का तंज


    इंदौर।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के 76वें जन्मदिन पर देशभर में ‘आशीर्वाद के दीये’ (‘Lamps of Blessing’) जलाए जा रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सीएम मोहन यादव (CM Mohan Yadav) द्वारा दीये जलाने पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने तंज भरे लहजे में लिखा- ‘मुख्यमंत्री जी, दीये जलाने और उत्सव मनाने से फुर्सत मिल गई हो तो जरा राज्य की जमीनी हालत भी देखिए।’ इसके बाद उन्होंने लिखा- ‘मैं इंदौर आ रहा हूं।’


    आखिर किस बात पर भड़के राहुल गांधी

    दरअसल, राहुल गांधी ने बालाघाट में 30 आदिवासी बच्चों की मौत पर सीएम मोहन यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने सीएम पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए एक्स पर लिखा- ‘बालाघाट में 30 से ज़्यादा आदिवासी बच्चों की बीमारी, कुपोषण और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के बीच मौत हो चुकी है। संवेदनहीनता का आलम यह है मासूमों की मौतें होती रहीं, लेकिन कार्रवाई सुस्त रही, सरकार सोती रही।’


    दीये जलाने पर राहुल गांधी का तंज

    इसके बाद सीएम पर तंज भरे लहजे में लिखा- ‘मुख्यमंत्री जी, दीये जलाने और उत्सव मनाने से फुर्सत मिल गई हो तो जरा राज्य की जमीनी हालत भी देखिए।’ राहुल गांधी ने याद दिलाते हुए लिखा- ‘बीमारी, पोषण और साफ पानी की कमी और चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था नन्हें बच्चों की जान ले रही है। मिलावटी दवाइयां और जहरीली अवैध शराब सैकड़ों परिवारों को तबाह कर रही हैं।’


    राहुल गांधी बोले- मैं इंदौर आ रहा हूं…

    राहुल गांधी ने अपने इंदौर आने की बात भी लिखी। उन्होंने लिखा- ‘मैं इंदौर आ रहा हूं। सामने आ रही भयावह घटनाएं बता रही हैं कि मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था आज देश भर में सबसे ज़्यादा बर्बाद है। छात्र, बच्चे, गरीब, दलित, आदिवासी, पिछड़े या महिलाएं – हर वर्ग प्रताड़ित है, कोई खुश नहीं। मध्य प्रदेश सरकार आज भारत की सबसे भ्रष्ट और सबसे कुशासित सरकार है – यही सच्चाई है।’

    बालाघाट में 30 से ज़्यादा आदिवासी बच्चों की बीमारी, कुपोषण और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के बीच मौत हो चुकी है। संवेदनहीनता का आलम यह है मासूमों की मौतें होती रहीं, लेकिन कार्रवाई सुस्त रही, सरकार सोती रही।


    19 सितंबर को इसलिए इंदौर आ रहे राहुल गांधी

    आपको बताते चलें कि राहुल गांधी के इंदौर आने की वजह आ 19 सितंबर को होने वाले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल होना है। इस दौरान प्रदेश के छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित है। इसी सिलसिले में राहुल गांधी ने अपने पोस्ट के अंत में मध्य प्रदेश सरकार पर भ्रष्टाचार और कुशासन के आरोप भी लगाए।

  • उत्तराखंड में 13 ग्लेशियल झीलें संवेदनशील…. नेपाल तबाही के बाद CM ने किया अलर्ट

    उत्तराखंड में 13 ग्लेशियल झीलें संवेदनशील…. नेपाल तबाही के बाद CM ने किया अलर्ट


    देहरादून।
    नेपाल (Nepal) में फ्लैश फ्लड (Flash flood) से भारी तबाही के बाद अब उत्तराखंड (Uttarakhand) में 13 ग्लेशियल झीलों (Glacial lakes) को संवेदनशील माना गया है. इन झीलों से पहाड़ी इलाकों में खतरे की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) ने अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने झीलों की नियमित निगरानी करने को कहा है. साथ ही सुरक्षा के इंतजाम मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

    मुख्यमंत्री ने राज्य आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन को जरूरी कदम उठाने को कहा है. उन्होंने संवेदनशील ग्लेशियल झीलों की वैज्ञानिक तरीके से निगरानी करने के निर्देश दिए. इन इलाकों में आधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने को कहा गया है. जरूरत के हिसाब से इनकी संख्या भी बढ़ाई जाएगी।

    सीएम धामी ने संवेदनशील ग्लेशियल झीलों का व्यापक सर्वे कराने को कहा है. इन झीलों की स्थिति की नियमित जांच होगी. पानी के स्तर पर भी नजर रखी जाएगी. झीलों के आकार में होने वाले बदलाव को भी रिकॉर्ड किया जाएगा।

    इसके अलावा झीलों के आसपास के पहाड़ी इलाकों की स्थिति की भी जांच होगी. संभावित खतरे वाले क्षेत्रों की पहचान की जाएगी. इससे किसी भी आपदा की स्थिति में समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सकेगा.


    सेंसर और वार्निंग सिस्टम होंगे मजबूत

    मुख्यमंत्री ने संवेदनशील इलाकों में आधुनिक सेंसर लगाने पर जोर दिया है. पानी का स्तर मापने वाले उपकरण भी लगाए जाएंगे. संचार व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा. इन तकनीकी संसाधनों से खतरे की जानकारी समय पर मिल सकेगी.

    अधिकारियों को सुरक्षित निकासी के रास्तों की पहचान करने के निर्देश भी दिए गए हैं. स्थानीय स्तर पर चेतावनी व्यवस्था मजबूत की जाएगी. राहत और बचाव की तैयारियों को भी बेहतर किया जाएगा. आपदा की स्थिति में लोगों को जल्द सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने पर जोर रहेगा।

    नेपाल में हाल ही में आई बाढ़ के बाद उत्तराखंड में भी आपदा को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है. इसी को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से सभी जिलों के जिलाधिकारियों के साथ बैठक की गई.

    बैठक में आपदा से निपटने की तैयारियों की समीक्षा हुई. जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में संभावित खतरे वाले इलाकों की नियमित निगरानी करने को कहा गया. किसी भी तरह की असामान्य गतिविधि दिखने पर तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी देने के निर्देश दिए गए।


    चार झीलों का सर्वे पूरा

    राज्य आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि उत्तराखंड में कुल 13 ग्लेशियल झीलों को संवेदनशील चिन्हित किया गया है. इनमें से चार झीलों का सर्वे पहले ही पूरा किया जा चुका है।

    बाकी संवेदनशील झीलों का भी चरणबद्ध तरीके से सर्वे कराया जाएगा. इन झीलों की वैज्ञानिक जांच की जाएगी. चमोली जिले की सरस्वती ताल और उत्तरकाशी जिले की केदारताल के सर्वे के लिए जल्द विशेषज्ञों की टीम भेजी जाएगी।

    संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को संभावित खतरे के बारे में जानकारी दी जाएगी. उन्हें आपदा के समय बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी बताया जाएगा. लोगों को सुरक्षित स्थान और निकासी के रास्तों की जानकारी दी जाएगी।

    सरकार का जोर आपदा से पहले तैयारी मजबूत करने पर है. नियमित निगरानी और समय पर चेतावनी से बड़े खतरे को कम करने की कोशिश की जा रही है. संवेदनशील ग्लेशियल झीलों पर नजर रखने के साथ राहत और बचाव व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।

  • MP: इस नेता ने PM मोदी की अपील के विरुद्ध निकाली 200 गाड़ियों की रैली, CM का बड़ा एक्शन… नियुक्ति निरस्त

    MP: इस नेता ने PM मोदी की अपील के विरुद्ध निकाली 200 गाड़ियों की रैली, CM का बड़ा एक्शन… नियुक्ति निरस्त


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने गुरुवार को मध्य प्रदेश टेक्स्ट बुक कॉर्पोरेशन (Madhya Pradesh Text Book Corporation) के नवनियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह (Saubhagya Singh) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से सादगी बरतने की अपील के बावजूद 200 गाड़ियों की एक जश्न वाली रैली निकालने के लिए दिया गया है।

    अधिकारियों ने बताया कि नोटिस का जवाब मिलने तक सौभाग्य सिंह पर अपने ऑफिस में प्रवेश, सरकारी वाहनों और अन्य सुविधाओं का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी गई है। उन्होंने आगे बताया कि जांच पूरी होने तक उन्हें सौंपी गई सभी प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी गई हैं।

    उन्होंने कहा, ”मुख्यमंत्री कार्यालय ने मितव्ययिता उपायों के घोर उल्लंघन का संज्ञान लिया है। सरकार ने वाहन रैली को अनावश्यक और सरकार की सादगी की नीति के खिलाफ माना है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि दिखावा और अनुशासनहीनता बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”


    भाजपा नेता ने सैकड़ों गाड़ियों संग रैली निकाली, पार्टी ने पद से हटाया

    ऐसे ही एक मामले में सैकड़ों गाड़ियों के साथ रैली निकालने के आरोप में भाजपा ने मध्य प्रदेश के भिंड जिले के किसान मोर्चा अध्यक्ष को पद से हटा दिया है। पार्टी पदाधिकारियों के अनुसार, हाल ही में इस पद पर नियुक्त किए गए सज्जन सिंह यादव को मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के आदेश पर पद से हटाया गया है। बताया गया कि सज्जन सिंह यादव के किसान मोर्चा अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने के अवसर पर बुधवार को भिंड शहर में एक रैली आयोजित की गई थी, जिसमें सैकड़ों वाहन शामिल हुए थे। भिंड शहर भोपाल से लगभग 500 किलोमीटर दूर है।

    भाजपा ने यादव को जारी पत्र में कहा कि उनका यह आचरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाओ अपील के विपरीत है और गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।


    नियुक्ति निरस्त की गई

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा, “यादव की नियुक्ति अनुशासनहीनता और ईंधन बचत एवं मितव्ययिता के उपायों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बार-बार की गई अपील का पालन नहीं करने के कारण निरस्त कर दी गई है।”

    गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को पेट्रोल और डीजल की खपत को कम करने, शहरों में अधिक से अधिक मेट्रो रेल सेवाओं का उपयोग करने, कारपूलिंग, इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने, पार्सल आवाजाही के लिए रेलवे सेवाओं का उपयोग करने और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ करने जैसे उपायों को प्रोत्साहित करने की अपील की थी।

  • MP में 100 साल पहले विलुप्त हो चुके जंगली भैंसों की वापसी…. CM आज सूखपार में करेंगे रिलीज

    MP में 100 साल पहले विलुप्त हो चुके जंगली भैंसों की वापसी…. CM आज सूखपार में करेंगे रिलीज


    बालाघाट।
    मध्य प्रदेश ( Madhya Pradesh) के वन्यजीव इतिहास (Wildlife History) में 28 अप्रैल का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है. ‘टाइगर’ और ‘चीता’ स्टेट के बाद अब मध्यप्रदेश ( Madhya Pradesh) अपनी धरती पर ‘जंगली भैंसों’ को दोबारा बसाने जा रहा है. मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) बालाघाट के सूपखार क्षेत्र में 4 जंगली भैंसों को उनके नए प्राकृतिक आवास में छोड़कर इस अभियान का आगाज करेंगे.

    तकरीबन 100 साल पहले मध्यप्रदेश से विलुप्त हो चुकी इस प्रजाति को वापस लाने के लिए असम सरकार के साथ एक खास समझौता हुआ है.

    इसके तहत पहले चरण में असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से 4 भैंसों (3 मादा, 1 नर) का दल कान्हा पहुंच रहा है. ‘फाउंडर पॉपुलेशन’ के रूप में कुल 50 जंगली भैंसों को लाने का लक्ष्य है, जिनमें से इस सीजन में 8 भैंसें लाई जाएंगी. काजीरंगा और कान्हा के विशेषज्ञ डॉक्टरों और अधिकारियों की टीम इस पूरे ‘ट्रांसलोकेशन’ की निगरानी कर रही है।


    MP-असम के बीच वाइल्ड लाइफ एक्सचेंज

    मुख्यमंत्री मोहन यादव और असम के सीएम हिमंता विश्व सरमा के बीच हुए समझौते के तहत दोनों राज्यों के बीच वन्यजीवों का आदान-प्रदान होगा।


    कान्हा ही क्यों बना पहली पसंद?

    भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून के अध्ययन के अनुसार, कान्हा टाइगर रिजर्व का सूपखार और टोपला क्षेत्र जंगली भैंसों के लिए देश में सबसे उपयुक्त स्थान है. यहां के बड़े घास के मैदान (Grasslands) और प्रचुर जल स्रोत इस प्रजाति के फलने-फूलने के लिए अनुकूल हैं.


    विलुप्ति की कगार से वापसी

    मध्यप्रदेश में आखिरी बार 1979 में सूपखार क्षेत्र में एक जंगली भैंसा देखा गया था. शिकार और आवास की कमी के कारण यह प्रजाति यहां खत्म हो गई थी. वर्तमान में इनकी मुख्य आबादी केवल असम में है. इस पहल से न केवल एक दुर्लभ प्रजाति बचेगी, बल्कि कान्हा का इकोसिस्टम भी सशक्त होगा.

  • MP में अब सप्ताह में 6 दिन गेहूं खरीदी…. किसान 9 मई तक कर सकेंगे स्लॉट बुक- CM ने की घोषणा

    MP में अब सप्ताह में 6 दिन गेहूं खरीदी…. किसान 9 मई तक कर सकेंगे स्लॉट बुक- CM ने की घोषणा


    भोपाल।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने प्रदेश की जनता को संबोधित करते हुए किसानों के हित में कई अहम घोषणाएं की हैं. उन्होंने बताया कि रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन (Record Wheat Production) को देखते हुए राज्य ने केंद्र सरकार से खरीदी सीमा बढ़ाने का आग्रह किया था, जिसे स्वीकार करते हुए अब गेहूं उपार्जन लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है. इससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा. उन्होंने यह भी ऐलान किया कि अब गेहूं खरीदी सप्ताह में 6 दिन होगी और स्लॉट बुकिंग की तारीख 9 मई तक बढ़ा दी गई है।

    CM यादव ने बताया कि रिकॉर्ड उत्पादन को देखते हुए सरकार ने खरीदी व्यवस्था को और सुगम बनाया है. गेहूं उपार्जन का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर अब 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है।


    6 दिन होगी गेहूं खरीदी

    अब गेहूं उपार्जन सप्ताह में 6 दिन होगा. शनिवार का अवकाश समाप्त कर दिया गया है ताकि किसान निर्बाध रूप से अपनी फसल बेच सकें. वहीं, 30 अप्रैल तक समाप्त होने वाली स्लॉट बुकिंग की अवधि को अब 9 मई 2026 तक बढ़ा दिया गया है।


    भूमि अधिग्रहण पर 4 गुना मुआवजा

    मुख्यमंत्री ने भू-अर्जन को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय की जानकारी दी. अब किसानों को उनकी अधिग्रहित भूमि के बदले 4 गुना तक मुआवजा दिया जाएगा. यह कदम किसानों के अधिकारों की रक्षा और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से उठाया गया है.


    फसलों पर बोनस और अन्य प्रोत्साहन

    तय समर्थन मूल्य (MSP) पर उड़द की खरीदी के साथ किसानों को 600 रुपये प्रति क्विंटल की अतिरिक्त बोनस राशि दी जाएगी। सरसों पर भावांतर योजना के सकारात्मक परिणाम मिले हैं, जिससे किसानों को MSP से भी अधिक दाम मिल रहे हैं। ‘किसान कल्याण वर्ष’ के तहत मात्र 5 रुपये में कृषि पंप कनेक्शन दिया जा रहा है. साथ ही, कृषक मित्र योजना में 90% सब्सिडी पर सोलर पंप दिए जा रहे हैं।


    मध्य प्रदेश बनेगा ‘मिल्क कैपिटल’

    पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को आय का मुख्य जरिया बनाने के लिए सरकार ठोस कदम उठा रही है. प्रदेश में 1752 नई दुग्ध समितियों का गठन किया गया है. हर दिन का दूध संकलन 10 लाख किलो के पार पहुंच गया है. दुग्ध उत्पादक किसानों को अब दूध का दाम 8 से 10 रुपये प्रति किलो बढ़कर मिल रहा है।


    यूरिया की उपलब्धता

    वैश्विक युद्ध स्थितियों के बावजूद प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं होने दी गई है. वर्तमान में 5.90 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है. वितरण प्रणाली को डिजिटल और आधुनिक बनाया गया है ताकि किसानों को बिना लंबी लाइनों के खाद मिल सके।

  • MP: सीएम ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर राज्य के विकास को लेकर की चर्चा

    MP: सीएम ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर राज्य के विकास को लेकर की चर्चा


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को नई दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय मंत्रियों और राज्य के संसद सदस्यों से मुलाकात कर प्रदेश के विकास संबंधी योजनाओं पर चर्चा की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन्द्रीय संचार और उत्तर पूर्वी विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार से मुलाकात की। उन्होंने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और संसदीय मामलों के राज्यमंत्री डॉ. एल. मुरुगन , केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके, केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर से भी मुलाकात की। इस अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और महेन्द्र सिंह भी उनके साथ उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसके पहले मध्य प्रदेश के सांसदों से विकास के विभिन्न मुद्दों पर वन-टू-वन चर्चा की। प्रदेश के विभिन्न अंचलों में केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के क्रियान्वयन के संबंध में संसद सदस्यों के साथ मध्य प्रदेश भवन में हुई बैठक में विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

  • दूसरे बच्चे के जन्म पर पेरेंट्स को मिलेंगे 25 हजार रुपये… इस राज्य के CM की बड़ी घोषणा

    दूसरे बच्चे के जन्म पर पेरेंट्स को मिलेंगे 25 हजार रुपये… इस राज्य के CM की बड़ी घोषणा


    अमरावती।
    गिरते प्रजनन दर (Falling Rertility Rates) की समस्या को निपटने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार (Andhra Pradesh Government) ने बड़ा ऐलान किया है।गिरते प्रजनन दर (Falling Rertility Rates) की समस्या को निपटने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार (Andhra Pradesh Government) ने बड़ा ऐलान किया है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू (Chief Minister N. Chandrababu Naidu) ने गुरुवार को कहा है कि राज्य सरकार गिरती जन्म दर को बढ़ावा देने के लिए दूसरे बच्चे के जन्म पर दंपतियों को 25,000 रुपए की सौगात देने पर विचार कर रही है।

    चंद्रबाबू नायडू ने विधानसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य आंध्र प्रदेश की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) को वर्तमान 1.5 से बढ़ाकर 2.1 करना है। नायडू ने कहा, “हम एक नए तरीके पर विचार कर रहे हैं। हम दूसरे या उसके बाद होने वाले बच्चे के लिए माता-पिता को प्रसव के समय ही 25,000 रुपए देंगे। यह एक बड़ा बदलाव होगा। अगर हम ऐसा कर पाते हैं, तो यह बहुत उपयोगी होगा।”

    मुख्यमंत्री ने आगे जनसंख्या प्रबंधन के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि कई देश बढ़ती उम्र वाली आबादी के कारण चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार मार्च के अंत तक जनसंख्या प्रबंधन नीति लाने और अप्रैल से इसे लागू करने की योजना बना रही है।

    अमरावती में ‘क्वांटम वैली’ बनाने की योजना
    इस दौरान चंद्रबाबू नायडू ने दावा किया है कि राज्य में 20 महीनों में 6.28 लाख नौकरियों का सृजन हुआ है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार संतुलित क्षेत्रीय विकास के लिए काम कर रही है और विशाखापत्तनम, अमरावती और तिरुपति को आर्थिक क्षेत्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री नायडू ने कहा, “आंध्र प्रदेश का लक्ष्य 2047 तक 2.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है।” उन्होंने बताया कि विशाखापत्तनम सूचना प्रौद्योगिकी और जीसीसी के लिए एक हब के रूप में उभरने को तैयार है। अमरावती में ‘क्वांटम वैली’ जैसा इकोसिस्टम बन रहा है। तिरुपति को अंतरिक्ष, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उद्योग के हब के रूप में विकसित किया जाएगा। गूगल और टाटा-टीसीएस जैसी बड़ी कंपनियां विशाखापत्तनम आई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्सेलर मित्तल एक स्टील प्लांट लगा रहा है।