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  • हाईकोर्ट में 31 अस्पतालों की सुनवाई ने पकड़ा नया मोड़, गलत जांच रिपोर्ट और अवैध संचालन के आरोपों से बढ़ी मुश्किलें

    हाईकोर्ट में 31 अस्पतालों की सुनवाई ने पकड़ा नया मोड़, गलत जांच रिपोर्ट और अवैध संचालन के आरोपों से बढ़ी मुश्किलें


    इंदौर  इंदौर के 31 अस्पतालों की वैधता और स्वास्थ्य संबंधी नियमों के पालन को लेकर दायर जनहित याचिका में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में गुरुवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट के निर्देश के अनुसार याचिकाकर्ता एडवोकेट चर्चित शास्त्री ने अपना रिजाइंडर यानी प्रत्युत्तर अदालत में पेश किया जिसमें सीएमएचओ डॉ माधव हासानी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई जांच रिपोर्ट वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाती और इससे नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों को बचाने का प्रयास किया गया है।

    रिजाइंडर में कहा गया है कि सीएमएचओ की ओर से कोर्ट में दी गई रिपोर्ट भ्रामक है और उसमें वास्तविक स्थिति को पूरी तरह सामने नहीं रखा गया। याचिकाकर्ता का दावा है कि गलत तथ्यों के आधार पर अदालत को गुमराह करने की कोशिश की गई ताकि बिना नियमों का पालन करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई प्रभावित हो सके।

    याचिकाकर्ता ने अपने प्रत्युत्तर के साथ कई ऐसे दस्तावेज भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जिनके बारे में दावा किया गया कि वे कूटरचित हैं। इसके अलावा कुछ अस्पतालों के ऐसे रिकॉर्ड भी पेश किए गए जिनके संबंध में कहा गया कि वे आवश्यक वैधानिक अनुमति और पंजीयन के बिना संचालित हो रहे हैं जबकि आधिकारिक दस्तावेजों में अलग स्थिति दिखाई गई है। याचिका में यह भी कहा गया कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

    इससे पहले हुई सुनवाई में भी कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए थे। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया था कि जिन 31 अस्पतालों के संबंध में मामला लंबित है उनके स्थान पर 34 संस्थानों की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। साथ ही विनायक पैथोलॉजी लैब और लेडी हलीमा हॉस्पिटल को सील किए जाने से जुड़े कथित फर्जी आदेश भी रिकॉर्ड पर रखने का आरोप लगाया गया था। इसके अलावा कुछ अस्पतालों की ओर से नगर निगम के कथित फर्जी शपथ पत्रों के आधार पर भवन अनुमति से जुड़े दस्तावेज पेश किए जाने का दावा भी किया गया।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने यह भी कहा था कि जनहित याचिका दायर करने के बाद उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है और हमले की कोशिशें भी हुई हैं। इस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा था कि याचिकाकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन की जिम्मेदारी है और उन्हें आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।

    अब ताजा सुनवाई में पेश किए गए रिजाइंडर और उससे जुड़े दस्तावेजों के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई करेगी। कोर्ट यह जांच करेगी कि प्रस्तुत रिपोर्ट और रिकॉर्ड में कितनी सच्चाई है तथा यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या गलत जानकारी दी गई है तो उसके लिए क्या कार्रवाई की जानी चाहिए। इस मामले का फैसला इंदौर के स्वास्थ्य तंत्र और निजी अस्पतालों की जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे भविष्य में अस्पतालों के संचालन और नियामकीय व्यवस्था पर भी व्यापक असर पड़ सकता है।

  • उज्जैन में मलेरिया निरोधक माह की शुरुआत, जागरूकता रैली और रथ को सीएमएचओ ने दिखाई हरी झंडी

    उज्जैन में मलेरिया निरोधक माह की शुरुआत, जागरूकता रैली और रथ को सीएमएचओ ने दिखाई हरी झंडी


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के उज्जैन में मलेरिया और अन्य मच्छरजनित बीमारियों के खिलाफ जागरूकता अभियान की शुरुआत हो गई है। राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत सोमवार को मलेरिया निरोधक माह का शुभारंभ किया गया।

    इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) उज्जैन ने जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रैली सीएमएचओ कार्यालय और चरक अस्पताल परिसर से शुरू होकर चामुंडा माता चौराहे तक निकाली गई, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी और नर्सिंग स्टाफ शामिल रहे।

    रैली के साथ ही एक विशेष जागरूकता रथ भी रवाना किया गया, जो जिले के विभिन्न विकासखंडों और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से बचाव के उपाय बताएगा। इस दौरान जनप्रतिनिधियों और स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों की मदद से पंपलेट वितरण भी किया जाएगा।

    स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि अपने घरों और आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि यही मच्छरों के प्रजनन का प्रमुख कारण बनता है। साथ ही मच्छरदानी के उपयोग, साफ-सफाई और बुखार होने पर तुरंत जांच कराने की सलाह दी गई है।

    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, उज्जैन शहर में पिछले पांच महीनों में मलेरिया का कोई भी नया मरीज सामने नहीं आया है, जो राहत की बात है। हालांकि विभाग ने सतर्कता बनाए रखने पर जोर दिया है।

    डॉ. प्रशांत तिवारी ने जानकारी दी कि जागरूकता रथ पूरे जिले की सभी तहसीलों में पहुंचेगा और लोगों को लगातार जागरूक करेगा। इसके साथ ही फीवर सर्विलेंस अभियान भी चलाया जा रहा है, जिसके तहत बुखार के मरीजों की जांच कर तुरंत इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है।

    उन्होंने बताया कि यह विशेष अभियान पूरे महीने चलेगा, जबकि मलेरिया और अन्य वेक्टर जनित रोगों को लेकर जागरूकता गतिविधियां पूरे वर्ष जारी रहेंगी।

  • लालच का वायरस, बना कारण जबलपुर में स्वास्थ्य विभाग में 59 लाख की गड़बड़ी उजागर

    लालच का वायरस, बना कारण जबलपुर में स्वास्थ्य विभाग में 59 लाख की गड़बड़ी उजागर


    जबलपुर । जबलपुर में स्वास्थ्य विभाग एक बड़े वित्तीय घोटाले को लेकर चर्चा में है, जहां करीब 59 लाख रुपये के कथित गबन का मामला सामने आया है। इस पूरे प्रकरण को लेकर विभाग में हड़कंप मच गया है और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।

    यह मामला संजीवनी क्लीनिकों के कायाकल्प और NQAS सर्टिफिकेशन की तैयारियों के लिए जारी की गई राशि से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, 58 संजीवनी क्लीनिकों को एक-एक लाख रुपये की राशि दी गई थी, ताकि रंगाई-पुताई और आवश्यक सुधार कार्य किए जा सकें, लेकिन आरोप है कि यह काम प्रस्तावित तरीके से पूरा नहीं हुआ।

    मामले के सामने आने के बाद यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि निर्धारित कार्यों के बिना ही पूरी राशि का उपयोग कर लिया गया। इसके चलते संजीवनी अस्पतालों और क्लीनिकों के सुधार कार्य अधूरे रह गए, जबकि सरकारी फंड खर्च हो चुका था।

    इस वित्तीय अनियमितता के उजागर होने के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने सख्त रुख अपनाते हुए चार अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। इनमें मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. नवीन कोठारी, सहायक शहरी कार्यक्रम प्रबंधक संदीप नामदेव, जिला क्वालिटी मॉनिटर शिखा गर्ग और लेखा प्रबंधक रेखा साहू शामिल हैं।

    अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि अगर तय मानकों के अनुसार NQAS सर्टिफिकेशन प्राप्त नहीं हुआ, तो संबंधित राशि की वसूली की कार्रवाई भी की जा सकती है। इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और प्रशासनिक स्तर पर जांच की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।