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  • शहडोल में सरकारी मशीनरी का अवैध इस्तेमाल: कोयला खदान से मिट्टी चोरी कर रेलवे निर्माण में लगाया गया, नगर परिषद उपाध्यक्ष पर गंभीर आरोप

    शहडोल में सरकारी मशीनरी का अवैध इस्तेमाल: कोयला खदान से मिट्टी चोरी कर रेलवे निर्माण में लगाया गया, नगर परिषद उपाध्यक्ष पर गंभीर आरोप


    शहडोल । मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के अमलाई क्षेत्र से सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और अवैध उत्खनन का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। नगर परिषद बरगवां-अमलाई के उपाध्यक्ष राज तिवारी पर आरोप है कि उनके संरक्षण में कोल इंडिया की प्रतिबंधित खदान से ओवरबर्डन यानी मिट्टी चोरी कर अमलाई रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म निर्माण में खपाई जा रही थी।

    सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इस पूरी अवैध गतिविधि में नगर परिषद की जेसीबी मशीन का इस्तेमाल किया गया। सूत्रों के अनुसार मशीन बिना किसी आधिकारिक आदेश या सीएमओ की अनुमति के खदान क्षेत्र में खुदाई कर रही थी। इसे छिपाने के लिए जेसीबी चालक को मरी हुई गाय को दफनाने का झांसा देकर मौके पर बुलाया गया लेकिन असल में वहां से मिट्टी ट्रैक्टरों के जरिए रेलवे स्टेशन तक भेजी जा रही थी।

    स्थानीय सूत्रों और सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि पिछले दो दिनों में लगभग 40 से 50 ट्रैक्टर मिट्टी रेलवे परिसर में डाली जा चुकी है। बताया गया है कि अमलाई स्टेशन पर प्लेटफॉर्म निर्माण के लिए करीब 8 से 10 लाख रुपये का मिट्टी भराई का ठेका दिया गया था। रेलवे के इंजीनियर और ठेकेदार भी मानते हैं कि मिट्टी राज तिवारी के माध्यम से मंगवाई जा रही थी हालांकि वे इसके अवैध स्रोत से अनजान थे।

    मामला उजागर होने पर कोल इंडिया सुहागपुर एरिया के अधिकारियों ने सर्वे दल के साथ मौके का मुआयना किया और पुष्टि की कि उत्खनन उनकी भूमि पर हो रहा था। इसके बाद अमलाई उप क्षेत्रीय प्रबंधक पी. रमन्ना और सुरक्षा अधिकारियों ने देवहरा पुलिस चौकी में लिखित शिकायत सौंपी है।

    राज तिवारी जो एक संपन्न और रसूखदार परिवार से ताल्लुक रखते हैं पर लगे आरोपों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। रेलवे के मुख्य अभियंता अरविंद ने स्पष्ट किया है कि यदि मिट्टी चोरी की पुष्टि होती है तो संबंधित निर्माण कंपनी का ठेका निरस्त कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    देवहरा पुलिस फिलहाल इस मामले की गहन जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कथित सिंडिकेट में और कौन-कौन से अधिकारी या रसूखदार शामिल हैं। मामला केवल अवैध उत्खनन तक सीमित नहीं है बल्कि यह सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग और उच्च स्तरीय संरक्षण का गंभीर उदाहरण भी माना जा रहा है।

  • BCCL IPO: 9 जनवरी से खुलेगा सरकारी कंपनी का पब्लिक इशू, निवेशकों के लिए क्या हैं मौके और जोखिम

    BCCL IPO: 9 जनवरी से खुलेगा सरकारी कंपनी का पब्लिक इशू, निवेशकों के लिए क्या हैं मौके और जोखिम


    नई दिल्ली। सरकारी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी भारत कोकिंग कोल लिमिटेडBCCL पहली बार शेयर बाजार में कदम रखने जा रही है। कोल इंडिया लिमिटेड की इस सहायक कंपनी का इनिशियल पब्लिक ऑफरIPO 9 जनवरी 2026 को खुलेगा और 13 जनवरी तक निवेश के लिए उपलब्ध रहेगा। कंपनी ने इस पब्लिक इशू के लिए ₹21 से ₹23 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से एक लॉट में निवेश करने के लिए निवेशकों को कम से कम ₹13,800 लगाने होंगे। इस IPO को लेकर बाजार में काफी चर्चा है, क्योंकि यह एक बड़ी सरकारी कंपनी की लिस्टिंग मानी जा रही है।

    BCCL देश में कोकिंग कोल उत्पादन की अग्रणी कंपनी है। कोकिंग कोल का इस्तेमाल मुख्य रूप से स्टील निर्माण में किया जाता है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है। कंपनी को वर्ष 2014 में मिनी रत्नका दर्जा मिला था। इस IPO के जरिए कोल इंडिया लिमिटेड अपनी हिस्सेदारी घटा रही है, जिससे सरकार को विनिवेश के तहत पूंजी प्राप्त होगी।इस इशू के तहत निवेशकों को 600 शेयरों के एक लॉट के लिए आवेदन करना होगा। एंकर निवेशकों के लिए बोली 8 जनवरी को खुलेगी, जबकि आम निवेशक 9 जनवरी से आवेदन कर सकेंगे। पात्र कर्मचारियों के लिए प्रति शेयर ₹1 का डिस्काउंट भी रखा गया है, जो सरकारी कंपनियों के IPO में आम तौर पर देखने को मिलता है। इशू बंद होने के बाद तय समय-सीमा के भीतर शेयरों का आवंटन और लिस्टिंग प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल(OFS आधारित है। इसके तहत कुल 46.57 करोड़ शेयर बेचे जाएंगे। चूंकि यह OFS है, इसलिए IPO से जुटाई गई पूरी रकम प्रमोटर कोल इंडिया लिमिटेड को जाएगी, न कि BCCL को। इसका मतलब यह है कि इस इशू से कंपनी को सीधे तौर पर विस्तार, नई खदानों या प्रोजेक्ट्स के लिए कोई ताजा पूंजी नहीं मिलेगी। निवेशकों के लिए यह पहलू समझना बेहद जरूरी है।कंपनी की परिचालन स्थिति की बात करें तो वित्त वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार, देश के घरेलू कोकिंग कोल उत्पादन में BCCL की हिस्सेदारी करीब 58.50% है। 1 अप्रैल 2024 तक कंपनी के पास लगभग 7,910 मिलियन टन कोयले का भंडार मौजूद था। BCCL झरिया और रानीगंज कोलफील्ड में फैली 34 खदानों का संचालन कर रही है, जो कुल 288.31 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली हैं। कंपनी का प्रमुख ग्राहक आधार स्टील और पावर सेक्टर से जुड़ा हुआ है।

    उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए BCCL ने वर्ष 2021 से हैवी अर्थ मूविंग मशीनरीHEMM के इस्तेमाल को बढ़ाया है। इससे खनन कार्य की रफ्तार में सुधार हुआ है और परिचालन दक्षता भी बेहतर हुई है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी का प्रदर्शन काफी हद तक सरकारी नीतियों, स्टील उद्योग की मांग और वैश्विक कोयला कीमतों पर निर्भर करता है। इन कारकों में उतार-चढ़ाव से मुनाफे पर असर पड़ सकता है।कोकिंग कोल को स्टील उद्योग की रीढ़ माना जाता है और भारत आज भी अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर कोकिंग कोल का उत्पादन करने वाली BCCL की भूमिका रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि आने वाले वर्षों में स्टील सेक्टर की मांग मजबूत बनी रहती है, तो इसका सकारात्मक असर BCCL के कारोबार और निवेशकों की उम्मीदों पर भी दिख सकता है।