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  • CJP आंदोलन की कमान किसके हाथ में थी, अभिजीत दिपके ने बताई अंदर की बात, बोले मैं तो सिर्फ दोनों के निर्देश मानता था

    CJP आंदोलन की कमान किसके हाथ में थी, अभिजीत दिपके ने बताई अंदर की बात, बोले मैं तो सिर्फ दोनों के निर्देश मानता था


    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके ने अपने आंदोलन और पार्टी के नेतृत्व को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले सौरव दास और आशुतोष रांका लेते थे जबकि वह खुद उनके निर्देशों का पालन करते थे। दिपके के इस बयान ने आंदोलन के नेतृत्व को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। उन्होंने दोनों नेताओं को अपना भाई और परिवार बताते हुए उनकी गिरफ्तारी पर भावनात्मक प्रतिक्रिया भी दी। इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की कि दिवाली तक पार्टी की ओर से कोई प्रदर्शन आयोजित करने की योजना नहीं है।

    अभिजीत दिपके ने दशहरा के मौके पर करीब 16 मिनट का वीडियो संदेश जारी किया था। यह वीडियो उन्होंने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया। इसमें उन्होंने आंदोलन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और समर्थकों से कुछ समय के लिए विराम लेने की अपील की। दिपके ने कहा कि बाहर से लोगों को भले ही ऐसा लगता रहा हो कि आंदोलन का नेतृत्व वह कर रहे हैं लेकिन वास्तव में कई बड़े फैसले सौरव दास और आशुतोष रांका ही लेते थे। उनके मुताबिक दोनों उन्हें बताते थे कि अगले दिन कहां जाना है और क्या करना है।

    दिपके ने कहा कि सौरव और आशुतोष की निर्णय लेने की क्षमता उनसे बेहतर है। उन्होंने दोनों को केवल राजनीतिक सहयोगी नहीं बल्कि अपना भाई और परिवार बताया। दोनों की गिरफ्तारी से उन्हें गहरा भावनात्मक झटका लगा है। अपनी बात रखते हुए उन्होंने तीनों के बीच के निजी संबंधों का भी जिक्र किया। दिपके ने बताया कि उनका एक अलग व्हाट्सऐप ग्रुप था जिसमें वे एक दूसरे के साथ मीम्स साझा करते थे। उन्होंने कहा कि वह आज भी उस ग्रुप को खोलते हैं तो उन्हें ऐसा महसूस होता है कि दोनों अब भी उनके साथ मौजूद हैं।

    CJP संस्थापक ने अपने समर्थकों से भी अपील की कि वे कुछ समय अपने परिवार के साथ बिताएं और आंदोलन से जुड़े कार्यक्रमों को लेकर फिलहाल आराम करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि दिवाली तक पार्टी की ओर से किसी प्रदर्शन की योजना नहीं है। उनके इस ऐलान को मौजूदा परिस्थितियों के बीच आंदोलन की गतिविधियों में अस्थायी विराम के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि आगे आंदोलन की रणनीति क्या होगी इस पर उन्होंने कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।

    गौरतलब है कि सौरव दास और आशुतोष रांका 13 अक्टूबर को नई दिल्ली के जंतर मंतर पर हुई घटना के बाद न्यायिक हिरासत में हैं। आरोप है कि दोनों ने बंद गेट पार कर प्रदर्शन स्थल में प्रवेश किया और पहले से हस्ताक्षरित पीस बॉन्ड का उल्लंघन किया। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारे लगाए जाने की भी बात सामने आई थी। दोनों नेताओं की हिरासत की अवधि बढ़ाए जाने के बाद मामला और चर्चा में आ गया है।

    दिपके ने फ्रांस में हुए दंगों से CJP के प्रदर्शन की तुलना पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका ने जेल जाने के बावजूद शांतिपूर्ण रास्ता चुना। उनके अनुसार दोनों ने गुस्से और नफरत के बजाय शांति और करुणा का रास्ता अपनाया। दिपके ने उनके इस रुख की तुलना महात्मा गांधी के सत्याग्रह से की और कहा कि जेल जाने के बाद भी उन्होंने अहिंसा का रास्ता नहीं छोड़ा।

    अभिजीत दिपके के बयान से साफ है कि वह सौरव दास और आशुतोष रांका को आंदोलन की रणनीति और फैसलों में अहम भूमिका निभाने वाला मानते हैं। फिलहाल दिवाली तक प्रदर्शन स्थगित रखने के ऐलान के बाद सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि त्योहार के बाद CJP अपनी अगली रणनीति किस तरह तय करती है।

  • जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का समर्थन करने वाली पूनम पांडे अब क्यों हुईं खिलाफ, पीएम मोदी के इस्तीफे की मांग पर उठाए सवाल

    जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का समर्थन करने वाली पूनम पांडे अब क्यों हुईं खिलाफ, पीएम मोदी के इस्तीफे की मांग पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पहुंचकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का समर्थन करने वाली अभिनेत्री और मॉडल पूनम पांडे अब पार्टी के नए आंदोलन के विरोध में नजर आ रही हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग को लेकर चलाए जा रहे अभियान पर सवाल उठाए हैं। पूनम का कहना है कि किसी भी व्यक्ति का अपनी इच्छा से प्रधानमंत्री से इस्तीफा मांगना उचित नहीं है। उन्होंने मौजूदा विरोध प्रदर्शनों को देश के लिए नुकसानदायक बताते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियों से देश की छवि प्रभावित होती है।

    नीट पेपर लीक के खिलाफ जून और जुलाई में हुए आंदोलन के दौरान सीजेपी को कई लोगों का समर्थन मिला था। छात्रों के हितों से जुड़े इस मुद्दे पर आम लोगों के साथ कुछ चर्चित हस्तियां भी प्रदर्शन में शामिल हुई थीं। 18 जुलाई को सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से हटाए जाने के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ गई थी। इसी दौरान पूनम पांडे भी वहां पहुंची थीं। उन्होंने छात्रों की समस्याओं पर सरकार से जल्द ध्यान देने और उनकी मांगों को सुनने की अपील की थी।

    हालांकि, अब पार्टी की ओर से चलाए जा रहे नए आंदोलन को लेकर पूनम का रुख बदल गया है। सीजेपी इस समय मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रही है। इसके साथ ही पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे और व्यवस्था में बड़े बदलाव की मांग भी उठाई जा रही है। पूनम पांडे ने इन मांगों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि देश में विरोध के नाम पर जिस तरह की गतिविधियां हो रही हैं, वे उचित नहीं हैं।

    पूनम ने कहा कि किसी के भी प्रधानमंत्री से इस्तीफा मांगने का तरीका ऐसा नहीं हो सकता कि जब मन हुआ, सीधे पद छोड़ने की मांग कर दी। उन्होंने प्रधानमंत्री के पद की अहमियत का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि आखिर इस तरह की मांगें किस आधार पर की जा रही हैं। उनके अनुसार, देश का संचालन इस तरीके से नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री कोई पड़ोसी या निजी परिचित नहीं हैं, बल्कि देश के सर्वोच्च कार्यकारी पद पर आसीन व्यक्ति हैं।

    पूनम पांडे ने आंदोलन में शामिल युवाओं की समझ पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में शामिल कई लोगों को यह तक स्पष्ट नहीं है कि वे किस उद्देश्य से आंदोलन कर रहे हैं। उनके मुताबिक, कुछ छात्र और युवा बिना पूरी जानकारी के प्रदर्शन का हिस्सा बन रहे हैं। उन्होंने इसे देश के लिए अस्वस्थ माहौल बताते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियां राष्ट्रीय हित में नहीं हैं।

    इसी बातचीत के दौरान पूनम ने इमरान खान को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नागरिक होने के कारण उन्हें देश के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देना चाहिए था। इस टिप्पणी के साथ उन्होंने देश में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम और विरोध प्रदर्शनों को लेकर अपनी असहमति जाहिर की।

    इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी को दिल्ली में विरोध का भी सामना करना पड़ा। शुक्रवार को पार्टी ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ कार्यक्रम आयोजित करने के लिए समर्थकों को बुलाया था। हालांकि, वहां बड़ी संख्या में विरोध करने वाले लोग भी जुट गए। कनॉट प्लेस के कई कारोबारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली पुलिस के समर्थन में नारे लगाए तथा सीजेपी के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।

    कार्यक्रम से पहले पार्टी के युवा नेताओं अभिजीत दीपके और नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने की भी खबर सामने आई। इसके बाद कार्यक्रम में पार्टी समर्थकों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही। इस घटनाक्रम के बीच सीजेपी को एक ओर राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ रहा है, वहीं पहले समर्थन कर चुकी पूनम पांडे की आलोचना भी उसके लिए चर्चा का विषय बन गई है।

  • राहुल गांधी ने CJP नेताओं की गिरफ्तारी पर जताया विरोध, अब हाई टी के न्योते से विपक्षी एकजुटता की नई चर्चा

    राहुल गांधी ने CJP नेताओं की गिरफ्तारी पर जताया विरोध, अब हाई टी के न्योते से विपक्षी एकजुटता की नई चर्चा


    नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के बीच संभावित नजदीकी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। राहुल गांधी की ओर से आयोजित हाई टी में CJP के नेताओं को आमंत्रित करने की कोशिश की खबर सामने आने के बाद कांग्रेस और इस संगठन के संबंधों को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं। हालांकि इसे दोनों के बीच दोस्ती या किसी औपचारिक राजनीतिक गठबंधन के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी। रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और संगठन के अन्य नेताओं तक पहुंचने के लिए वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण की मदद लेने की कोशिश की थी। इस घटनाक्रम को विपक्षी एकजुटता की रणनीति और कांग्रेस के बदलते राजनीतिक रुख के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार सुबह कांग्रेस की ओर से CJP से संपर्क करने और उसके नेताओं को राहुल गांधी की हाई टी में आमंत्रित करने का फैसला किया गया। इसके लिए प्रशांत भूषण से मध्यस्थ की भूमिका निभाने का अनुरोध किया गया था। प्रशांत भूषण के करीबी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस की ओर से उनसे संपर्क किया गया था। उस समय अभिजीत दीपके महाराष्ट्र में थे जबकि CJP के कुछ प्रमुख नेता जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस हिरासत में थे। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का दावा है कि दीपके तक पहुंचने की कोशिश की गई लेकिन वह निमंत्रण को लेकर विशेष उत्साहित नहीं थे। ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इस संपर्क से दोनों पक्षों के बीच आगे कोई औपचारिक बातचीत होगी या नहीं।

    CJP मई में सोशल मीडिया पर चर्चा में आई थी। इसके बाद जून और जुलाई में संगठन ने परीक्षा में पेपर लीक के मुद्दे पर जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था। इस आंदोलन के चलते संगठन को व्यापक पहचान मिली। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व का एक वर्ग शुरुआत से ही CJP को लेकर संदेह जताता रहा है। पार्टी के कुछ नेताओं की राय रही है कि यह संगठन आम आदमी पार्टी के प्रभाव में काम करता है या उसके राजनीतिक विस्तार के रूप में देखा जा सकता है। दूसरी ओर CJP खुद को स्वतंत्र संगठन बताती रही है। अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को रद्द करने की मांग को लेकर चल रहे अभियान ने दोनों पक्षों के बीच संभावित संवाद की चर्चा को बढ़ा दिया है।

    राहुल गांधी ने हाल ही में कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले सभी समूह एक व्यापक आंदोलन का हिस्सा हैं। उनका कहना था कि संगठन और झंडे अलग हो सकते हैं लेकिन संविधान की रक्षा और नागरिक अधिकारों की मांग करने वालों के उद्देश्य समान हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई समूह संवैधानिक अधिकारों के लिए आवाज उठा रहा है तो कांग्रेस उसका समर्थन करेगी। इस बयान को विपक्षी दलों और अन्य संगठनों को साथ लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    CJP नेताओं की गिरफ्तारी के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराने को अपराध मानने पर सवाल उठाया और युवाओं को जेल भेजे जाने की आलोचना की। राहुल गांधी के बयान पर अभिजीत दीपके ने उनका आभार जताया था। इससे दोनों पक्षों के बीच संवाद की संभावनाओं को लेकर चर्चा और तेज हो गई। हालांकि CJP सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए इंडिया गठबंधन के मार्च में शामिल नहीं हुई थी। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि समान मुद्दों पर समर्थन के बावजूद दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक तालमेल पूरी तरह स्थापित नहीं हुआ है।

    इसी बीच अभिजीत दीपके ने शुक्रवार 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च का आह्वान किया है। उन्होंने समर्थकों से शाम पांच बजे राष्ट्रीय ध्वज के साथ पहुंचने की अपील की है। दूसरे शहरों में भी तिरंगा फहराने का आग्रह किया गया है। अब राजनीतिक नजर इस बात पर रहेगी कि प्रस्तावित मार्च में कितने लोग शामिल होते हैं और कांग्रेस तथा CJP के बीच आगे कोई संवाद होता है या नहीं। फिलहाल हाई टी के निमंत्रण की कोशिश को विपक्षी एकजुटता के संदर्भ में एक घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है लेकिन इसे दोनों के बीच नई राजनीतिक दोस्ती का पक्का संकेत नहीं माना जा सकता।

  • कॉकरोच जनता पार्टी की फंडिंग पर सौरभ दास का दावा, बोले- जनता से मिलती है मदद, BJP समर्थक भी देते हैं योगदान

    कॉकरोच जनता पार्टी की फंडिंग पर सौरभ दास का दावा, बोले- जनता से मिलती है मदद, BJP समर्थक भी देते हैं योगदान

    नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी की फंडिंग को लेकर उठ रहे सवालों पर उसके प्रवक्ता सौरभ दास ने संगठन को मिलने वाली आर्थिक मदद के बारे में जानकारी दी है। एक बहस के दौरान उनसे पूछा गया कि देश के अलग-अलग शहरों में संगठन के सदस्यों के आने-जाने और कार्यक्रमों के आयोजन में होने वाले खर्च का इंतजाम कहां से होता है। इसके जवाब में सौरभ दास ने कहा कि संगठन की सारी फंडिंग जनता से होती है। उन्होंने बताया कि जब उन्हें एक शहर से दूसरे शहर जाना होता है, तो कोई उनकी फ्लाइट टिकट कर देता है और कोई दूसरी फ्लाइट की टिकट की व्यवस्था करता है।

    कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत देश के कुछ युवाओं को कॉकरोच कहे जाने के मुद्दे से जुड़े अभियान के तौर पर हुई थी। शुरुआत में इसे एक मीम पेज के रूप में शुरू किया गया था। बाद में यह संगठन आंदोलन से जुड़ गया और इसके सदस्यों ने अलग-अलग शहरों में जाकर युवाओं से समर्थन की अपील की। संगठन की गतिविधियां बढ़ने के साथ ही यह सवाल भी उठता रहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में होने वाले कार्यक्रमों, यात्राओं और अन्य व्यवस्थाओं के लिए आर्थिक संसाधन कहां से जुटाए जाते हैं।

    सौरभ दास ने फंडिंग के तरीके के बारे में बताते हुए कहा कि संगठन को अलग-अलग लोगों से अलग-अलग तरह की मदद मिलती है। उनके मुताबिक, कोई यात्रा के लिए टिकट की व्यवस्था करता है तो किसी स्थान पर कार्यक्रम के लिए हॉल की बुकिंग कोई अन्य व्यक्ति करा देता है। उन्होंने कहा कि इस तरह जनता की ओर से मिलने वाले अलग-अलग सहयोग के जरिए संगठन की गतिविधियों से जुड़े खर्च पूरे किए जाते हैं। उनके बयान के अनुसार, फंडिंग किसी एक व्यक्ति या एक ही माध्यम पर निर्भर नहीं है, बल्कि अलग-अलग लोगों के सहयोग से होती है।

    सौरभ दास ने यह भी दावा किया कि संगठन को कुछ भाजपा समर्थकों से भी आर्थिक मदद मिलती है। उनके मुताबिक, कुछ ऐसे भाजपा समर्थक हैं जो अपनी पार्टी के कामकाज से नाराज हैं। उन्होंने बताया कि जब संगठन के सदस्य किसी शहर में जाते हैं, तो वहां ऐसे कुछ समर्थक उनसे कहते हैं कि पार्टी ठीक काम नहीं कर रही है और उसे हटाना चाहते हैं। सौरभ दास के अनुसार, ऐसे लोग कॉकरोच जनता पार्टी के लिए भी आर्थिक सहयोग करते हैं।

    फंडिंग को लेकर सौरभ दास का बयान सामने आने के बाद संगठन के आर्थिक स्रोतों पर चल रही चर्चा में जनता और अलग-अलग समर्थकों के योगदान की बात सामने आई है। उन्होंने अपने बयान में यात्रा, कार्यक्रमों के लिए हॉल की व्यवस्था और अन्य जरूरतों में लोगों की ओर से मिलने वाले सहयोग का उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने दावा किया कि भाजपा से जुड़े कुछ नाराज समर्थक भी संगठन की गतिविधियों के लिए आर्थिक मदद करते हैं। इस तरह उनके मुताबिक कॉकरोच जनता पार्टी को मिलने वाला सहयोग अलग-अलग लोगों की मदद से जुटाया जाता है।

  • ‘अरे! कम से कम एक साल का समय दीजिए’; TMC के चुनाव चिह्न विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी का तंज

    ‘अरे! कम से कम एक साल का समय दीजिए’; TMC के चुनाव चिह्न विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी का तंज


    नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को समयसीमा में फैसला लेने का निर्देश दिया है। इस आदेश पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने तंज कसा है। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने व्यंग्य करते हुए कहा कि चुनाव आयोग को इस मामले में कम से कम एक साल का समय दिया जाना चाहिए था।

    दरअसल, TMC के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच पार्टी के नाम और ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिह्न को लेकर विवाद चल रहा है। चुनाव आयोग ने 18 सितंबर को अंतरिम व्यवस्था के तहत मूल पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। इसके बाद दोनों गुटों को उपचुनाव के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए गए।

    सुप्रीम कोर्ट ने चार हफ्ते में दलीलें पूरी करने को कहा

    सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने दोनों गुटों को चुनाव आयोग के समक्ष अपनी दलीलें और जरूरी दस्तावेज दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। इसके बाद चुनाव आयोग को दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के तीन महीने के भीतर विवाद पर फैसला करने का निर्देश दिया गया है। इस तरह पूरी प्रक्रिया के लिए प्रभावी तौर पर करीब चार महीने की समयसीमा तय हुई है।

    पीठ ने कहा कि दोनों पक्ष चार सप्ताह के भीतर अपने हलफनामे, अतिरिक्त हलफनामे और अन्य जरूरी सामग्री रिकॉर्ड पर रखें। इसके बाद चुनाव आयोग मामले पर निर्णय लेगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई असाधारण कठिनाई सामने आती है तो आयोग दोबारा अदालत का रुख कर सकता है।

    चुनाव आयोग ने मांगा था छह महीने का समय

    सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि ऐसे विवादों में बड़ी संख्या में दस्तावेज और हलफनामे जमा होते हैं, जिनकी जांच में समय लगता है। आयोग की ओर से मामले का फैसला करने के लिए छह महीने का समय मांगा गया था।

    हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने छह महीने की मांग स्वीकार नहीं की। पीठ ने तीन महीने की अवधि को पर्याप्त माना।

    क्या है पूरा विवाद?

    TMC में संगठनात्मक विवाद के बाद दो गुट पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना दावा कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने विवाद का अंतिम निपटारा होने तक दोनों गुटों को मूल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल और घास’ चिह्न के इस्तेमाल से रोकते हुए अंतरिम तौर पर अलग-अलग नाम और प्रतीक दिए हैं।

    सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश इसी विवाद के अंतिम निपटारे की समयसीमा से जुड़ा है। अब दोनों पक्षों को चार सप्ताह में चुनाव आयोग के समक्ष अपना पक्ष पूरा करना होगा और उसके बाद आयोग को तीन महीने के भीतर अपना फैसला देना होगा।

  • 5 माह भी नहीं चली कॉकरोच जनता पार्टी….. मई में बनी और सितंबर में टूट गई, दीपके पर गंभीर आरोप

    5 माह भी नहीं चली कॉकरोच जनता पार्टी….. मई में बनी और सितंबर में टूट गई, दीपके पर गंभीर आरोप

    नई दिल्ली। राजनीति के दलदल से दूर रहने की बात करने वाले अभिजीत दीपके (Abhijeet Deepke) अब उसमें फंसते हुए नजर आ रहे हैं। अभिजीत दीपके (Abhijeet Deepke) की कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party) में बगावत हो गई है। कॉकरोच पार्टी के एक सदस्य ने ना सिर्फ दीपके का साथ छोड़ा है, बल्कि एक नई पार्टी बनाने का भी ऐलान कर दिया है। यही नहीं इस नेता ने अभिजीत दीपके और उनके साथियों पर कई बड़े आरोप भी लगाए हैं।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक पेपर लीक आंदोलन से जुड़े रहे कॉकरोच पार्टी के सदस्य मनीष ब्रह्मभट्ट ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुद को CJP से अलग कर लिया। साथ ही उन्होंने एक अलग गुट, ‘कॉकरोच जनता पार्टी-डेमोक्रेटिक’ (CJP-D) बनाने का ऐलान कर दिया है। ब्रह्मभट्ट ने पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि आंदोलन की सफलता के बाद जमीनी कार्यकर्ताओं और छात्रों का सौदा कर दिया गया और संगठन अब ‘टीम केजरीवाल’ में बदल गया है।


    मनीष ब्रह्मभट्ट क्या-क्या बोल गए?

    मनीष ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि आंदोलन के सफल होने के बाद जो 12 सदस्यीय राष्ट्रीय टीम बनाई गई, उसके लिए किसी भी जमीनी कार्यकर्ता, छात्र या सोशल मीडिया वॉलंटियर से सलाह नहीं ली गई। ब्रह्मभट्ट ने कहा, “आंदोलन देश का था, लेकिन सफलता मिलते ही इसे बेच दिया गया। नई टीम के 8 सदस्य आम आदमी पार्टी से जुड़े हैं। यह पूरी टीम अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।”

    उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन में शिवसेना, सपा, राजद, बीजेपी, कांग्रेस और एनसीपी से जुड़े युवाओं ने भी हिस्सा लिया था, लेकिन नई टीम में किसी को जगह नहीं मिली। साथ ही महिला, सिख और मुस्लिम चेहरों को भी दरकिनार कर दिया गया। ब्रह्मभट्ट ने कहा कि जिस आंदोलन की नींव पेपर लीक के खिलाफ पड़ी थी, उसी आंदोलन के नेतृत्व ने अब मेरिट को किनारे कर दिया है।


    ‘CJP-D में सबको मिलेगी जगह’

    इस दौरान मनीष ब्रह्मभट्ट ने कहा है कि CJP-D को एक सच्चा लोकतांत्रिक और राष्ट्रव्यापी संगठन बनाया जाएगा। इसके तहत हर राज्य के स्थानीय आंदोलनकारियों और वॉलंटियर्स में से 5-5 प्रतिनिधियों को चुना जाएगा, ताकि हर जगह की आवाज को बराबर जगह मिल सके।


    क्या कह रहे हैं अभिजीत दीपके?

    दूसरी तरफ केजरीवाल से सांठ-गांठ जैसे आरोपों को अभिजीत दीपके ने सिरे से खारिज किया है। एक बयान में उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी सिर्फ छात्रों की A टीम है और किसी भी अन्य किसी भी CJP का कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री कहते हैं कि हम कांग्रेस की ‘B’ टीम हैं, कुछ लोग हमें आम आदमी पार्टी की ‘B’ टीम बताते हैं। मुझे लगता है कि इन नेताओं को एक साथ बैठकर तय कर लेना चाहिए। हमारी तरफ से बात साफ है। हम सिर्फ और सिर्फ छात्रों की ‘A’ टीम हैं।”


    दीपके ने बनाई थी कॉकरोच पार्टी

    इससे पहले देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के एक बयान के विरोध में महाराष्ट्र के अभिजीत दीपके ने कॉकरोच जनता पार्टी की मुहिम शुरू की थी। देखते ही देखते इस ऑनलाइन मुहिम से लाखों लोग जुड़ गए। इसके बाद पार्टी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन की अगुवाई की थी। आंदोलन की सफलता के बाद पार्टी चर्चा में है।

  • कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में उतरा वैष्णव किन्नर अखाड़ा, प्रमुख बोलीं- ‘सच से क्यों डरना?’

    कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में उतरा वैष्णव किन्नर अखाड़ा, प्रमुख बोलीं- ‘सच से क्यों डरना?’

    मथुरा। वृंदावन में वैष्णव किन्नर अखाड़ा की प्रमुख हिमांगी सखी ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के समर्थन में बयान देकर नई चर्चा छेड़ दी। पुरुषोत्तम मास के दौरान ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचीं हिमांगी सखी ने कहा कि यह ऑनलाइन समूह देश में फैले भ्रष्टाचार और सामाजिक अव्यवस्थाओं को उजागर करने का काम कर रहा है।

    मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि समाज को सच दिखाने वालों से घबराने की बजाय उनका सामना करना चाहिए। उनके मुताबिक, डर केवल उन्हीं लोगों को लगता है जिनके भीतर गलत काम छिपे होते हैं, जबकि ईमानदार व्यक्ति को किसी प्रकार का भय नहीं होना चाहिए।

    हिमांगी सखी ने कहा कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ युवाओं द्वारा बनाई गई एक पहल है, जिसका उद्देश्य भ्रष्टाचार और सामाजिक गंदगी के खिलाफ आवाज उठाना है। उन्होंने कहा कि आज का युवा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर पहले से अधिक जागरूक है और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात प्रभावी ढंग से सामने रख रहा है।

    उन्होंने इस पहल को लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर बोलना जरूरी है। हिमांगी सखी ने सार्वजनिक रूप से इस संगठन का समर्थन करते हुए कहा कि वह किन्नर जगद्गुरु शंकराचार्य के रूप में इस मुहिम के साथ खड़ी हैं।

    उन्होंने यह भी दावा किया कि कम समय में इस संगठन ने वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई है, जो इस बात का संकेत है कि लोग बदलाव और नई सोच को स्वीकार कर रहे हैं।

    हिमांगी सखी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। कुछ लोगों ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ साहसिक पहल बताया, जबकि कुछ ने इसे राजनीतिक और सामाजिक विवादों से जोड़कर देखा। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका समर्थन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और पारदर्शिता के समर्थन में है।

    वृंदावन में दिए गए इस बयान के बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर और प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

  • कॉकरोच जनता पार्टी’ पर भड़के रैपर सैंटी शर्मा, बोले- देश को इंटरनेट ड्रामा नहीं, असली मुद्दों पर बहस चाहिए

    कॉकरोच जनता पार्टी’ पर भड़के रैपर सैंटी शर्मा, बोले- देश को इंटरनेट ड्रामा नहीं, असली मुद्दों पर बहस चाहिए

    नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ट्रेंड को लेकर अब विवाद और भी गहरा गया है। इस पूरे मामले में चर्चित रैपर और गीतकार सैंटी शर्मा ने खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस वायरल ट्रेंड को गंभीर राजनीतिक आंदोलन मानने से इनकार करते हुए इसे “इंटरनेट ड्रामा” करार दिया है। साथ ही उन्होंने इसके पीछे काम कर रहे लोगों और उनके इरादों पर भी सवाल उठाए हैं।

    सैंटी शर्मा का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं की भावनाओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी बिना किसी तथ्य की जांच किए इंटरनेट पर चल रहे ट्रेंड्स को आंख बंद करके फॉलो करने लगी है, जो समाज और देश दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है। उनके मुताबिक, किसी भी आंदोलन या विचारधारा को समझने से पहले उसकी पृष्ठभूमि और उद्देश्य को जानना बेहद जरूरी है।

    रैपर ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अभिजीत दीपके पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि असली सामाजिक मुद्दों पर काम करने के बजाय सोशल मीडिया के जरिए केवल नैरेटिव तैयार किया जा रहा है। सैंटी शर्मा ने कहा कि अगर कोई खुद को राष्ट्रवादी बताता है, तो उसे रोजगार, शिक्षा, विकास, तकनीक और राष्ट्रीय एकता जैसे विषयों पर काम करना चाहिए, न कि केवल इंटरनेट पर आक्रोश फैलाना चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं को उग्र विरोध और सड़क राजनीति की ओर धकेलना सही नहीं है। सैंटी शर्मा के अनुसार लोकतंत्र में हर राजनीतिक दल की आलोचना की जा सकती है, लेकिन देश को केवल विरोध और गुस्से की राजनीति से आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लगातार नफरत और भड़काऊ माहौल तैयार करने से समाज में अस्थिरता बढ़ती है और इससे देश के विकास पर असर पड़ता है।

    सैंटी शर्मा ने सोशल मीडिया पर सक्रिय कुछ संदिग्ध अकाउंट्स को लेकर भी चिंता जाहिर की। उनका कहना है कि कई बार ऐसे ट्रेंड्स को बाहरी ताकतों और देश विरोधी सोच रखने वाले अकाउंट्स से भी समर्थन मिलता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी वायरल अभियान का हिस्सा बनने से पहले उसकी सच्चाई को जरूर परखें।

    इस पूरे विवाद के बाद लोग यह जानना भी चाहते हैं कि आखिर सैंटी शर्मा कौन हैं। मध्य प्रदेश के रतलाम से आने वाले सैंटी शर्मा का असली नाम गणेश शर्मा है। उन्होंने देसी हिप-हॉप और रैप म्यूजिक की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। साल 2014 के आसपास उन्होंने अपने संगीत करियर की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में उनके स्वतंत्र गानों ने युवाओं के बीच अच्छी लोकप्रियता हासिल की। बाद में उन्होंने कमर्शियल म्यूजिक की दुनिया में भी कदम रखा और कई चर्चित रैप ट्रैक्स दिए।

    अपने अनोखे अंदाज और बेबाक बयानों की वजह से सैंटी शर्मा अक्सर चर्चा में रहते हैं। इससे पहले भी वह कई विवादित मुद्दों पर अपनी राय रख चुके हैं। हाल ही में उन्होंने संगीत इंडस्ट्री से जुड़े एक विवाद में भी खुलकर प्रतिक्रिया दी थी, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी काफी चर्चा हुई थी।

    फिलहाल, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर दिया गया उनका बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कुछ लोग उनके विचारों का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल उठाने वाला बयान बता रहे हैं। हालांकि सैंटी शर्मा का साफ कहना है कि भारत को इंटरनेट पर फैलने वाले आक्रोश से ज्यादा रचनात्मक बहस और समाधान आधारित सोच की जरूरत है।

  • डिजिटल पॉलिटिक्स में बड़ा विवाद, वायरल ‘कॉकरोच पार्टी’ के पीछे AAP लिंक के दावे से मचा हड़कंप

    डिजिटल पॉलिटिक्स में बड़ा विवाद, वायरल ‘कॉकरोच पार्टी’ के पीछे AAP लिंक के दावे से मचा हड़कंप

    नई दिल्ली। देश की राजनीति और सोशल मीडिया की दुनिया में इन दिनों एक अनोखा डिजिटल अभियान चर्चा का केंद्र बना हुआ है, जिसका नाम है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’। मीम्स और व्यंग्य के सहारे शुरू हुआ यह अभियान अचानक इतना वायरल हो गया कि इसने बड़े राजनीतिक दलों की ऑनलाइन मौजूदगी को भी पीछे छोड़ दिया। लेकिन अब यही अभियान राजनीतिक विवादों के घेरे में आ गया है और इसके कथित राजनीतिक संबंधों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

    यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब इस डिजिटल प्लेटफॉर्म को लेकर यह चर्चा तेज हो गई कि इसके पीछे आम आदमी पार्टी से जुड़े कुछ पुराने संबंध हो सकते हैं। अभियान के संस्थापक अभिजीत दीपके का नाम सामने आने के बाद यह बहस और तेज हो गई, क्योंकि बताया जा रहा है कि उनका अतीत में आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया और चुनावी कैंपेन से जुड़ाव रहा है। इसके बाद सोशल मीडिया पर यह सवाल उठने लगे कि क्या यह पूरी तरह स्वतंत्र डिजिटल प्रयोग है या इसके पीछे किसी राजनीतिक दल का अप्रत्यक्ष प्रभाव मौजूद है।

    इस विवाद ने तब और तूल पकड़ लिया जब पूर्व नौकरशाह आशीष जोशी ने इस अभियान को शुरू में समर्थन देने के बाद अपना रुख बदल लिया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह सवाल उठाया कि क्या यह अभियान वास्तव में स्वतंत्र है या किसी राजनीतिक संगठन से जुड़ा हुआ है। स्पष्ट जवाब न मिलने के बाद उन्होंने खुद को इस अभियान से अलग कर लिया और कहा कि वे किसी ऐसे मंच का हिस्सा नहीं बनना चाहते जिसकी राजनीतिक स्वतंत्रता पर संदेह हो।

    इसी बीच, सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की लोकप्रियता तेजी से बढ़ती रही और इसके फॉलोअर्स की संख्या लाखों से आगे बढ़कर करोड़ों में पहुंच गई। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इसकी मौजूदगी ने इसे एक नए तरह के राजनीतिक व्यंग्य और ऑनलाइन आंदोलन के रूप में स्थापित कर दिया है, जहां मीम्स के जरिए पारंपरिक राजनीति पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

    विवाद तब और गहरा गया जब आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया द्वारा इस अभियान के समर्थन में एक वीडियो साझा किया गया। इस कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा और तेज हो गई कि क्या यह डिजिटल अभियान किसी राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा है। इसके बाद पुराने सोशल मीडिया पोस्ट भी सामने आने लगे, जिनमें संस्थापक के राजनीतिक संबंधों को लेकर नए सवाल खड़े किए गए।

    हालांकि, अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि यह पूरी तरह एक व्यंग्यात्मक और स्वतंत्र डिजिटल पहल है, जिसका उद्देश्य राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाना है, न कि किसी दल विशेष का समर्थन करना। उनका दावा है कि इसे केवल एक मीम-आधारित आंदोलन के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि किसी औपचारिक राजनीतिक संगठन के रूप में।

    इस पूरे घटनाक्रम ने डिजिटल राजनीति की नई परिभाषा पर बहस छेड़ दी है, जहां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अब केवल मनोरंजन या संवाद का माध्यम नहीं रहे, बल्कि राजनीतिक प्रभाव और जनमत निर्माण के नए केंद्र बनते जा रहे हैं।

    फिलहाल, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ विवाद और लोकप्रियता दोनों के बीच फंसी नजर आ रही है। एक ओर इसकी बढ़ती फैन फॉलोइंग इसे डिजिटल पॉलिटिकल ट्रेंड का बड़ा उदाहरण बना रही है, वहीं दूसरी ओर इसके राजनीतिक संबंधों को लेकर उठ रहे सवाल इसकी पारदर्शिता पर लगातार बहस को जन्म दे रहे हैं।

  • ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की एंट्री से सियासत गरम, 2029 चुनाव और केजरीवाल संग गठजोड़ पर अभिजीत ने दिया बयान

    ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की एंट्री से सियासत गरम, 2029 चुनाव और केजरीवाल संग गठजोड़ पर अभिजीत ने दिया बयान


    नई दिल्ली।
    सोशल मीडिया पर अचानक उभरी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ इन दिनों राजनीतिक और डिजिटल दोनों मंचों पर चर्चा का विषय बनी हुई है। इस आंदोलन के पीछे 30 वर्षीय अभिजीत दीपके हैं, जिन्होंने हाल ही में बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स किया है। उनका दावा है कि यह सिर्फ एक पार्टी नहीं, बल्कि देश के युवाओं की नाराजगी और हताशा की आवाज है।

    अभिजीत ने बताया कि कुछ दिन पहले तक वह अमेरिका में नौकरी के लिए आवेदन कर रहे थे, लेकिन चीफ जस्टिस की उस टिप्पणी ने उन्हें झकझोर दिया जिसमें सोशल मीडिया पर सक्रिय युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ से की गई थी। इसी के बाद उन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि अगर यही बयान किसी राजनीतिक नेता ने दिया होता तो शायद इतना असर नहीं होता, लेकिन जब संविधान की रक्षा करने वाले पद पर बैठा व्यक्ति ऐसी टिप्पणी करे तो युवाओं को चोट पहुंचना स्वाभाविक है।

    अभिजीत के मुताबिक, पार्टी को शुरू हुए महज कुछ ही दिनों में लाखों लोग इससे जुड़ गए। इंस्टाग्राम पर पार्टी के 33 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं, जबकि वेबसाइट पर लाखों युवाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। उनका कहना है कि यह किसी प्रायोजित अभियान का नतीजा नहीं, बल्कि युवाओं के भीतर जमा गुस्से का विस्फोट है।

    अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी से रिश्तों को लेकर भी अभिजीत ने खुलकर बात की। उन्होंने माना कि वह 2020 से 2023 के बीच आम आदमी पार्टी के कम्युनिकेशन विभाग से जुड़े थे और शिक्षा-स्वास्थ्य मॉडल से प्रभावित होकर काम किया था। हालांकि उन्होंने साफ किया कि फिलहाल उनकी नई मुहिम किसी भी पारंपरिक राजनीतिक दल से दूरी बनाए रखना चाहती है।

    केजरीवाल के समर्थन को लेकर उन्होंने कहा कि कोई भी समर्थन दे सकता है, लेकिन ‘जेन-जी’ के युवा नहीं चाहते कि इस आंदोलन पर किसी स्थापित पार्टी की छाया पड़े। 2029 के चुनाव लड़ने के सवाल पर अभिजीत ने कहा कि अभी इस पर फैसला लेना जल्दबाजी होगी। पहले युवाओं की राय ली जाएगी और उसी आधार पर आगे की रणनीति तय होगी। उनका कहना है कि मौजूदा राजनीति युवाओं की असली समस्याओं से दूर हो चुकी है और अब राजनीतिक विमर्श बदलने की जरूरत है।

    कॉकरोच जनता पार्टी ने अपनी वेबसाइट पर पांच सूत्रीय एजेंडा भी जारी किया है। इसमें न्यायपालिका और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, महिलाओं को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व, मीडिया स्वामित्व पर सवाल और राजनीतिक जवाबदेही जैसे मुद्दे शामिल हैं। अभिजीत का कहना है कि यह एक आदर्श लोकतांत्रिक व्यवस्था की दिशा में सोच है।

    उन्होंने मौजूदा राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में वर्षों से हिंदू-मुस्लिम जैसे मुद्दों पर राजनीति हो रही है, जबकि युवाओं के सामने रोजगार, शिक्षा, तकनीक और भविष्य जैसे बड़े सवाल खड़े हैं। उन्होंने ‘नीट पेपर लीक’ मामले का जिक्र करते हुए कहा कि सिस्टम की विफलता ने कई युवाओं का भविष्य प्रभावित किया है।

    अभिजीत ने दावा किया कि यह आंदोलन केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगा। उनका कहना है कि देश के युवा अब अपनी आवाज लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से उठाने के लिए तैयार हैं। फंडिंग और संगठनात्मक ढांचे को लेकर उन्होंने कहा कि फिलहाल टीम रणनीति तैयार कर रही है और जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। उनका उद्देश्य एक स्वतंत्र और लंबे समय तक चलने वाला युवा आंदोलन खड़ा करना है।