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  • दिल्ली में दशहरे पर 30 फुट का कॉकरोच पुतला जलाने की तैयारी, विवाद के बीच आयोजकों ने बताई वजह

    दिल्ली में दशहरे पर 30 फुट का कॉकरोच पुतला जलाने की तैयारी, विवाद के बीच आयोजकों ने बताई वजह

    नई दिल्ली ।दिल्ली के पीतमपुरा में इस बार दशहरे पर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों के साथ 30 फुट ऊंचा कॉकरोच का पुतला भी जलाया जाएगा। इस फैसले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोगों ने धार्मिक आयोजन में कॉकरोच के पुतले को शामिल करने की प्रासंगिकता पर सवाल उठाए हैं, जबकि आयोजकों ने इसे स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने की पहल बताया है। उनका कहना है कि इस कदम का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं है।

    पीतमपुरा में वार्षिक रामलीला का आयोजन करने वाली श्री केशव रामलीला समिति ने कॉकरोच को गंदगी का प्रतीक बताया है। समिति के अनुसार, दशहरे के मौके पर इस पुतले का दहन करने के जरिए लोगों को साफ-सफाई के महत्व के बारे में संदेश दिया जाएगा। आयोजकों ने इस पहल को स्वच्छ भारत और स्वच्छ दिल्ली अभियानों से जोड़ते हुए कहा कि इसका उद्देश्य लोगों को अपने आसपास स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के लिए प्रेरित करना है।

    समिति के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के विधायक अशोक गोयल ने इस फैसले के पीछे किसी राजनीतिक मकसद से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि पुतला दहन का उद्देश्य बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देने के साथ स्वच्छता की अहमियत को भी सामने लाना है। उनके मुताबिक, कॉकरोच के पुतले को रावण की सेना में शामिल असुरों के बीच दिखाया जाएगा। आयोजकों का मानना है कि इस प्रतीक के माध्यम से सफाई से जुड़ा संदेश लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।

    हालांकि, इस फैसले पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों ने सवाल उठाया है कि दशहरा जैसे पारंपरिक धार्मिक उत्सव में समसामयिक मुद्दों को शामिल करना कितना उचित है। उनका कहना है कि त्योहार का मूल संदेश बुराई पर अच्छाई की जीत है और आयोजन में किसी नए प्रतीक को शामिल करने से धार्मिक परंपरा के अर्थ को लेकर बहस पैदा हो सकती है।

    एक सोशल मीडिया यूजर ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इस परंपरा को मौजूदा राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए। उसने यह भी कहा कि त्योहारों का उद्देश्य लोगों को एकजुट करना होना चाहिए, न कि उनके बीच राजनीतिक मतभेदों को बढ़ाना।

    कुछ अन्य लोगों ने भी इस पहल पर आपत्ति जताई। एक यूजर ने आशंका जताई कि रावण की तुलना कॉकरोच से करने से धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं। एक अन्य यूजर ने आरोप लगाया कि धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल अपने हितों के लिए किया जा रहा है। इन प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि कॉकरोच के पुतले को लेकर चर्चा केवल स्वच्छता के संदेश तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें धार्मिक परंपरा और सार्वजनिक आयोजनों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं।

    यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब कॉकरोच जनता पार्टी नाम से पहचाने जाने वाला समूह भी विरोध प्रदर्शनों में शामिल रहा है। इस समूह ने शुरुआत में पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ प्रदर्शन किया था। बाद में यह मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शनों में भी शामिल हो गया। हालांकि, समिति ने अपने फैसले को इन घटनाक्रमों से जोड़ने से इनकार किया है।

    इस पहल पर पर्यावरण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। एक सोशल मीडिया यूजर ने दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या का उल्लेख करते हुए पूछा कि जब शहर पहले से प्रदूषण से जूझ रहा है, तो इतने बड़े पुतले को जलाने की जरूरत क्यों है। इस तरह आयोजन को लेकर स्वच्छता के संदेश, धार्मिक भावनाओं और पर्यावरण संबंधी चिंताओं पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

  • कॉकरोच और कीड़े-मकोड़ों से हैं परेशान तो घर की इन चीजों का करें इस्तेमाल, बिना तेज केमिकल गंध के पाएं राहत

    कॉकरोच और कीड़े-मकोड़ों से हैं परेशान तो घर की इन चीजों का करें इस्तेमाल, बिना तेज केमिकल गंध के पाएं राहत

    नई दिल्ली । घर में अचानक कॉकरोच या दूसरे कीड़े-मकोड़े दिखाई देने लगें तो परेशानी बढ़ जाती है। खासकर रसोई में इनका नजर आना साफ-सफाई को लेकर चिंता पैदा कर सकता है। इनसे छुटकारा पाने के लिए लोग अक्सर बाजार में मिलने वाले स्प्रे और दूसरे केमिकल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, इन उत्पादों की गंध तेज हो सकती है और कुछ समय बाद समस्या दोबारा सामने आने की बात भी कही जाती है।

    अगर आप घर में मौजूद चीजों के जरिए कॉकरोच को दूर रखने का तरीका तलाश रहे हैं, तो किचन में इस्तेमाल होने वाली कुछ चीजें मददगार हो सकती हैं। तेज पत्ता, लौंग और दालचीनी ऐसी ही चीजें हैं, जिनकी तेज खुशबू कॉकरोच को कुछ जगहों से दूर रखने में सहायक मानी जाती है।

    सबसे पहले तेज पत्ते की बात करें। आमतौर पर इसका इस्तेमाल खाने में स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए किया जाता है। लेकिन इसकी गंध कॉकरोच को पसंद नहीं आती। इसके लिए सूखे तेज पत्ते लेकर उन्हें हल्का सा कुचल सकते हैं। ऐसा करने से उनमें मौजूद खुशबू और प्राकृतिक तेल बाहर आने लगते हैं।

    कुचले हुए तेज पत्तों को रसोई के कोनों, दराजों के किनारों और फ्रिज या गैस जैसे उपकरणों के पीछे रखा जा सकता है। इन जगहों पर इसकी खुशबू कॉकरोच को दूर रखने में मदद कर सकती है। जब तेज पत्ते की खुशबू कम होने लगे तो उन्हें बदल देना बेहतर रहेगा।

    दूसरा घरेलू विकल्प साबुत लौंग है। लौंग की तेज और तीखी खुशबू भी कॉकरोच को असहज कर सकती है। इसे किचन के उन हिस्सों में रखा जा सकता है जहां कॉकरोच दिखाई देते हैं या उनके आने की संभावना रहती है।

    सिंक के नीचे, मसाले रखने वाली अलमारी और कूड़ेदान के आसपास कुछ साबुत लौंग रखने का तरीका अपनाया जा सकता है। इसकी खुशबू कॉकरोच को उन जगहों से दूर रखने में मदद कर सकती है। साथ ही किचन में लौंग की प्राकृतिक सुगंध भी बनी रहती है।

    तीसरा विकल्प दालचीनी है। इसकी तेज खुशबू को भी कॉकरोच दूर रखने में उपयोगी माना जाता है। इसके लिए खिड़की की चौखट, दरवाजे के किनारे और फ्रिज के पीछे जैसी जगहों पर थोड़ी मात्रा में दालचीनी पाउडर रखा या छिड़का जा सकता है।

    किचन की अलमारी या पेंट्री में साबुत दालचीनी की स्टिक भी रखी जा सकती है। इसकी सुगंध कॉकरोच को उन स्थानों से दूर रखने में मदद कर सकती है।

    हालांकि, घरेलू उपायों का असर हर घर और हर स्थिति में एक जैसा होना जरूरी नहीं है। अगर कॉकरोच की समस्या लगातार बनी हुई है या बहुत ज्यादा बढ़ गई है, तो केवल खुशबू आधारित उपायों पर निर्भर रहने के बजाय घर की साफ-सफाई और कीड़ों के संभावित ठिकानों पर भी ध्यान देना जरूरी है। रसोई को साफ और सूखा रखने से भी कीड़ों की समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

  • अभिजीत दीपके का बड़ा ऐलान, कहा- चुनावी राजनीति से आगे बढ़कर बदलाव लाना है, कॉकरोच आंदोलन को जारी रखने की योजना

    अभिजीत दीपके का बड़ा ऐलान, कहा- चुनावी राजनीति से आगे बढ़कर बदलाव लाना है, कॉकरोच आंदोलन को जारी रखने की योजना


    नई दिल्ली ।
    कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके ने कहा है कि उनकी पार्टी और आंदोलन का उद्देश्य केवल चुनाव लड़ना नहीं है। उन्होंने एक हालिया इंटरव्यू में अपने भविष्य के प्लान, कॉकरोच आंदोलन और CJP की आगे की दिशा को लेकर बात की। दीपके ने कहा कि अब जब वे मैदान में उतर चुके हैं तो आंदोलन को जारी रखने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।

    बीते मई महीने में देश के मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी के बाद 30 वर्षीय अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी की स्थापना की थी। उन्होंने इसे शुरुआत में एक तंज के तौर पर शुरू किया था। इसके बाद इस मुहिम से लाखों लोग जुड़ गए और दीपके की पहचान भी तेजी से बढ़ी।

    बाद में अभिजीत दीपके अमेरिका से भारत लौटे। भारत आने के बाद उन्होंने और उनकी पार्टी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों की अगुवाई की थी। अब उन्होंने एक इंटरव्यू में अपने इस फैसले और आंदोलन को आगे बढ़ाने की योजना के बारे में विस्तार से बात की है।

    अभिजीत दीपके ने बताया कि सरकार की ओर से उन्हें ‘देश के लिए खतरा’ और ‘एंटी नेशनल’ जैसे टैग दिए जाने की बात उन्हें काफी खटकी थी। उन्होंने कहा कि इन बातों से उन्हें बहुत दुख हुआ। दीपके के अनुसार उनके परिवार और वकील ने उन्हें भारत नहीं जाने की सलाह दी थी। इसके बावजूद उन्होंने अमेरिका से भारत लौटने का निर्णय लिया।

    दीपके ने कहा कि जब उनकी अपनी सरकार ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया, तभी उन्होंने भारत लौटने का फैसला किया। उनके मुताबिक इस बात ने उन्हें काफी दुख पहुंचाया। उन्होंने सवाल किया कि जब वह विदेश में थे, तब क्या उनकी सरकार को उनके साथ खड़ा नहीं होना चाहिए था।

    उन्होंने कहा कि उन्होंने देश लौटने का फैसला इसलिए किया ताकि यह साबित कर सकें कि वह देश की सुरक्षा के लिए कोई खतरा नहीं हैं। दीपके ने यह भी कहा कि वह अपने देश से प्यार करते हैं, लेकिन उस तरीके से नहीं जिस तरीके से सरकार चाहती है।

    नीट पेपर लीक आंदोलन के बाद कॉकरोचों ने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान भी शुरू किया है। CJP के नेता सरकारी स्कूलों की बदहाली से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं। इसी संदर्भ में जब दीपके से उनकी आगे की योजना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने आंदोलन को पार्टी या चुनावी राजनीति तक सीमित रखने से इनकार किया।

    अभिजीत दीपके ने कहा कि लोगों ने राजनीति को केवल चुनाव और राजनीतिक दलों तक सीमित कर दिया है, जबकि उनका उद्देश्य इससे आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि वे सिर्फ चुनाव लड़ने के लिए नहीं हैं, बल्कि एक बड़ा बदलाव लाना चाहते हैं।

    उनके मुताबिक इस बदलाव का उद्देश्य लोगों को अपने अधिकार और कर्तव्य समझने में सक्षम बनाना है। साथ ही वे चाहते हैं कि लोग यह भी समझें कि सत्ता में कोई भी राजनीतिक पार्टी आए, उससे जवाबदेही कैसे तय कराई जा सकती है। इस तरह दीपके ने अपने आंदोलन को चुनाव से आगे ले जाने और उसे व्यापक बदलाव से जोड़ने की योजना सामने रखी है।

  • विजय माल्या बोले- कॉकरोच बन जाना चाहिए, शायद उनकी जिंदगी बेहतर है

    विजय माल्या बोले- कॉकरोच बन जाना चाहिए, शायद उनकी जिंदगी बेहतर है


    नई दिल्ली। भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में अपनी स्थिति की तुलना ‘कॉकरोच’ से करते हुए कहा है कि शायद कॉकरोच की जिंदगी बेहतर होती है। माल्या का यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम का व्यंग्यात्मक युवा आंदोलन चर्चा में है। माल्या ने अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को कथित अन्याय से जोड़ते हुए यह टिप्पणी की है।

    माल्या ने एक्स पर क्या लिखा?
    माल्या ने एक्स पर लिखा, “मैंने जितनी भी नाइंसाफियां झेली हैं और झेल रहा हूं, उन्हें देखते हुए सोचता हूं कि क्या मुझे कॉकरोच बन जाना चाहिए। शायद कॉकरोच की जिंदगी बेहतर हो।”

    माल्या लंबे समय से अपने खिलाफ हुई कार्रवाई और लगाए गए आरोपों पर सवाल उठाते रहे हैं। हालिया पोस्ट में भी उन्होंने खुद को ‘भगोड़ा’ कहे जाने पर आपत्ति जताई और दावा किया कि ब्रिटेन के कानूनी प्रतिबंधों के चलते वह वहां से बाहर नहीं जा सकते।

    ‘कॉकरोच’ शब्द से शुरू हुआ व्यंग्यात्मक आंदोलन

    2026 में ‘कॉकरोच’ शब्द सोशल मीडिया की राजनीति में एक अलग प्रतीक के तौर पर सामने आया। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP की शुरुआत व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन के रूप में हुई थी। इसके संस्थापक अभिजीत दीपके हैं। आंदोलन के जरिए बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था, परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और युवाओं की राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दे उठाए गए।

    CJP के नाम को उस समय ज्यादा चर्चा मिली, जब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की ओर से कुछ बेरोजगार युवाओं और कार्यकर्ताओं के लिए ‘कॉकरोच’ और ‘पैरासाइट’ जैसे शब्द इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई। आंदोलन से जुड़े लोगों ने ‘कॉकरोच’ शब्द को अपमान के बजाय व्यंग्यात्मक पहचान के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।

    इसके बाद आंदोलन सोशल मीडिया से आगे बढ़कर सड़क पर भी दिखाई दिया और शिक्षा व परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किए गए। जुलाई में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को भी आंदोलन से जुड़े दबाव के संदर्भ में बताया गया है।

    विजय माल्या पर क्या मामले हैं?

    विजय माल्या कभी भारत के प्रमुख कारोबारी चेहरों में गिने जाते थे। वह यूनाइटेड ब्रुअरीज समूह से जुड़े रहे और किंगफिशर एयरलाइंस के प्रमोटर थे। एयरलाइन के वित्तीय संकट के बाद भारतीय बैंकों का हजारों करोड़ रुपये का बकाया सामने आया।

    माल्या मार्च 2016 में भारत छोड़कर ब्रिटेन चले गए। इसके बाद भारतीय एजेंसियों ने उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं और बकाये से जुड़े मामलों में कार्रवाई की। भारत सरकार उनकी वापसी के लिए प्रत्यर्पण प्रक्रिया भी चला रही है।

    संपत्तियों को लेकर माल्या का दावा

    माल्या का कहना है कि उनके खिलाफ हुई कार्रवाई में उनके साथ अन्याय हुआ है। हालिया बयानों में उन्होंने दावा किया है कि उनकी संपत्तियों से बैंकों और एजेंसियों ने उनकी देनदारी से अधिक रकम वसूल की है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, माल्या ने दावा किया कि करीब 14,131 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गई हैं, जबकि वह अपनी देनदारी करीब 6,203 करोड़ रुपये बताते हैं। ये आंकड़े माल्या के दावे के तौर पर ही देखे जाने चाहिए, अदालत द्वारा स्थापित तथ्य के रूप में नहीं।

    अगस्त 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने माल्या की संपत्तियों की जब्ती और बैंक रिकवरी से जुड़े लंबे समय से लंबित विवाद को खत्म करने की जरूरत पर टिप्पणी की थी। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय से मामले की मौजूदा स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। माल्या के वकील ने अदालत में दावा किया था कि बैंकों ने करीब 15,000 करोड़ रुपये की वसूली कर ली है।

    CJP से जुड़े विवाद भी जारी

    ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ हाल के दिनों में भी सक्रिय रही है। सितंबर में इसके समर्थकों ने दिल्ली के संसद मार्ग थाने तक मार्च किया और एक प्रदर्शन के दौरान छात्रा के पिता पर कथित हमले के मामले में कार्रवाई की मांग की।

    9 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से CJP के प्रदर्शन में शामिल एक कानून छात्र को नोटिस जारी किए जाने के मामले पर संज्ञान लिया। कोर्ट ने इस मामले में प्राधिकरण से स्पष्टीकरण मांगने की बात कही।

    इसी बीच CJP से जुड़ा एक और कानूनी विवाद सामने आया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने CJP, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में 2 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया है।

  • ‘कॉकरोच’ टिप्पणी पर दावा: अभिजीत दीपके बोले- CJI सूर्यकांत का इशारा सौरभ दास की ओर था

    ‘कॉकरोच’ टिप्पणी पर दावा: अभिजीत दीपके बोले- CJI सूर्यकांत का इशारा सौरभ दास की ओर था


    नई दिल्ली। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की ‘कॉकरोच’ टिप्पणी को लेकर अब नया दावा सामने आया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने दावा किया है कि CJI की यह टिप्पणी CJP प्रवक्ता और पत्रकार सौरभ दास के संदर्भ में थी। हालांकि, दास ने भी इस संभावना से इनकार नहीं किया और कहा कि उस समय कई वकीलों और रिटायर्ड जजों ने उनसे संपर्क कर कहा था कि टिप्पणी शायद उन्हीं के लिए की गई है।

    एक इंटरव्यू के दौरान सौरभ दास ने अपने पत्रकारिता करियर और अदालतों से जुड़े लेखन का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वह कानून और खास तौर पर जजों से जुड़े मामलों पर लिखते हैं। इसी दौरान अभिजीत दीपके ने कहा कि CJI द्वारा इस्तेमाल किया गया ‘कॉकरोच’ शब्द सौरभ दास के लिए था।

    ‘उस समय सबसे ज्यादा यही लिख रहा था’

    दीपके ने कहा, ‘जो कॉकरोच शब्द यूज किया गया था, वह सौरभ के लिए किया गया था। यह ओजी कॉकरोच है, क्योंकि तब सबसे ज्यादा यही लिख रहा था।’

    इस पर सौरभ दास ने बताया कि उस समय कुछ वकीलों और रिटायर्ड जजों ने उनसे संपर्क किया था। उनके मुताबिक, उन लोगों का कहना था कि CJI की टिप्पणी संभवतः उनके लिए थी।

    दास ने बताया कि उस दौरान वह कारवां मैगजीन के लिए CJI सूर्यकांत पर एक प्रोफाइल लिख रहे थे। इससे पहले वह पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ पर भी प्रोफाइल लिख चुके थे। इसी सिलसिले में उन्होंने कुछ RTI आवेदन भी दाखिल किए थे।

    दास के मुताबिक, उसी समय CJI ने कहा था कि कुछ युवा लोग पेशे में नौकरी नहीं ढूंढ पाते और फिर मीडिया या RTI एक्टिविज्म की तरफ चले जाते हैं और सिस्टम पर हमला करते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि ‘कॉकरोच’ टिप्पणी उन्हीं के लिए थी, तो उन्होंने कहा, ‘पता नहीं, हां हो सकता है।’

    युवाओं पर टिप्पणी को लेकर हुआ था विवाद

    दरअसल, एक मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की मौखिक टिप्पणी को लेकर विवाद हुआ था। इसे कुछ जगहों पर देश के बेरोजगार युवाओं पर टिप्पणी के तौर पर प्रचारित किया गया। बाद में CJI ने अदालत में अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा था कि उनकी टिप्पणी को मीडिया के एक हिस्से ने गलत तरीके से पेश किया।

    CJI ने कहा था कि उन्होंने उन लोगों की आलोचना की थी, जो फर्जी या नकली डिग्रियों के जरिए वकालत जैसे पेशों में प्रवेश करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग मीडिया, सोशल मीडिया और दूसरे प्रतिष्ठित पेशों में भी घुसपैठ कर चुके हैं और उनकी तुलना ‘परजीवियों’ से की गई थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कहना गलत है कि उन्होंने देश के युवाओं की आलोचना की थी।

    CJI की टिप्पणी के बाद बनी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’

    CJI की इसी ‘कॉकरोच’ टिप्पणी को आधार बनाकर अभिजीत दीपके ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की शुरुआत की थी। टिप्पणी के बाद दीपके ने एक्स पर लिखा था- ‘क्या होगा यदि सारे कॉकरोच एकत्रित हो जाएं।’

    इस पोस्ट के वायरल होने के बाद उन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम से एक्स और इंस्टाग्राम अकाउंट बनाए। दावा किया गया कि इंस्टाग्राम पर महज चार दिन में करीब 2.5 करोड़ फॉलोअर हो गए। इसके बाद दीपके चर्चा में आए और अमेरिका से भारत लौटकर उन्होंने NEET पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन भी शुरू किया।