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  • टी20 विश्व कप फाइनल में आचार संहिता उल्लंघन पर अर्शदीप सिंह पर जुर्माना

    टी20 विश्व कप फाइनल में आचार संहिता उल्लंघन पर अर्शदीप सिंह पर जुर्माना

    Arsh

    अहमदाबाद। भारत के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने आचार संहिता का उल्लंघन करने के मामले में मैच फीस का 15 प्रतिशत जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप 2026 के फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ हुए मुकाबले के दौरान की घटना को लेकर की गई है।

    आईसीसी के अनुसार अर्शदीप ने खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ के लिए निर्धारित आचार संहिता के अनुच्छेद 2.9 का उल्लंघन किया, जो अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान किसी खिलाड़ी की ओर अनुचित या खतरनाक तरीके से गेंद या अन्य उपकरण फेंकने से संबंधित है। यह घटना न्यूजीलैंड की पारी के 11वें ओवर में हुई, जब अर्शदीप ने अपनी गेंदबाजी के फॉलो-थ्रू के दौरान गेंद को तेजी से फेंका, जो बल्लेबाज डेरिल मिशेल के पैड से जा टकराई। इसे अनुचित आचरण मानते हुए अंपायरों ने मामला दर्ज किया।

    इस उल्लंघन के चलते अर्शदीप के अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में एक डिमेरिट अंक भी जोड़ा गया है। पिछले 24 महीनों में यह उनका पहला अपराध है। अर्शदीप ने आईसीसी एलीट पैनल के मैच रेफरी एंडी पाईक्राफ्ट द्वारा प्रस्तावित सजा को स्वीकार कर लिया, जिसके कारण औपचारिक सुनवाई की आवश्यकता नहीं पड़ी।

    मैदान पर मौजूद अंपायर रिचर्ड इलिंगवर्थ और एलेक्स व्हार्फ के साथ तीसरे अंपायर अल्लाहुद्दीन पालेकर और चौथे अंपायर एड्रियन होल्डस्टॉक ने यह आरोप लगाया था। आईसीसी नियमों के अनुसार लेवल-1 के उल्लंघन पर आधिकारिक चेतावनी से लेकर मैच फीस का अधिकतम 50 प्रतिशत तक जुर्माना और एक या दो डिमेरिट अंक दिए जा सकते हैं।

  • साबरमती हॉस्टल के बाहर लगे नारे हेट स्पीच में आए, छात्र संघ और ABVP के बीच जुबानी जंग, प्रशासन ने दिल्ली पुलिस को शिकायत दी

    साबरमती हॉस्टल के बाहर लगे नारे हेट स्पीच में आए, छात्र संघ और ABVP के बीच जुबानी जंग, प्रशासन ने दिल्ली पुलिस को शिकायत दी


    नई दिल्ली। जेएनयू के साबरमती हॉस्टल के बाहर कुछ छात्रों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ भड़काऊ नारे लगाए जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की। यह घटना 5 जनवरी 2020 की हिंसक रात की छठी बरसी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुई।

    जेएनयू प्रशासन ने इसे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना और विश्वविद्यालय के कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन माना। सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट में कहा गया कि लगभग 30-35 छात्र इस नारेबाजी में शामिल थे, जिसमें प्रमुख नाम आदिति मिश्रा, गोपिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली, साद आजमी, मेहबूब इलाही, कनिष्क, पाकीजा खान और शुभम शामिल हैं।

    प्रशासन ने दिल्ली पुलिस के वसंत कुंज थाने को शिकायत पत्र भेजकर FIR दर्ज करने और मामले की गहन जांच की मांग की। पत्र में उल्लेख है कि सुरक्षा अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद थे और नारे जानबूझकर और दोहराए गए, जो सामान्य अभिव्यक्ति नहीं बल्कि सुनियोजित कदाचार दिखाते हैं।

    छात्र संघ अध्यक्ष ने कहा कि यह कोई विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि 5 जनवरी की हिंसक रात और ABVP के कथित हमले को याद करने के लिए एक सभा थी। उन्होंने हिंसा और भड़काऊ विचारधारा की निंदा की और कहा कि नारों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

    वहीं, ABVP ने कड़ा विरोध जताया। दिल्ली के अध्यक्ष मयंक पांचाल ने कहा कि नारे लगाने वाले छात्रों की मानसिकता हिंदुओं और हिंदू धर्म के खिलाफ है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने बताया कि अब तक कोई औपचारिक शिकायत प्रशासन की ओर से प्राप्त नहीं हुई है।

    जेएनयू प्रशासन ने स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन और हेट स्पीच के बीच अंतर बहुत बारीक होता है। विश्वविद्यालय के कोड ऑफ कंडक्ट के तहत इस तरह की नारेबाजी पूरी तरह से प्रतिबंधित है, क्योंकि यह शैक्षणिक माहौल और परिसर की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है। प्रशासन ने सभी छात्रों से अपील की है कि वे परिसर में शांति बनाए रखें और विवादास्पद गतिविधियों से दूर रहें, ताकि भविष्य में किसी भी कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े।