Tag: Coimbatore

  • कोयंबतूर से भोपाल बाइक पर जा रहे 29 वर्षीय युवक की बैतूल में मौत, नेशनल हाईवे-47 पर अज्ञात भारी वाहन ने मारी टक्कर

    कोयंबतूर से भोपाल बाइक पर जा रहे 29 वर्षीय युवक की बैतूल में मौत, नेशनल हाईवे-47 पर अज्ञात भारी वाहन ने मारी टक्कर

    मध्य प्रदेश। के बैतूल जिले में नेशनल हाईवे-47 पर हुए सड़क हादसे में 29 वर्षीय एस. गौतम की मौत हो गई। वह तमिलनाडु के कोयंबतूर के रहने वाले थे और दुबई में नौकरी करते थे। गौतम बाइक से कोयंबतूर से भोपाल जा रहे थे। मंगलवार देर रात रास्ते में एक अज्ञात भारी वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोट आई और घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई।

    यह दुर्घटना बैतूल बाजार थाना क्षेत्र में झिटापटी यात्री प्रतीक्षालय के पास हुई। हादसे का समय रात करीब 2:30 से 3 बजे के बीच बताया गया है। टक्कर मारने वाले भारी वाहन की पहचान अभी नहीं हो सकी है। पुलिस वाहन और उसके चालक का पता लगाने में जुटी है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गौतम भोपाल में अपने किसी पारिवारिक मित्र से मिलने के लिए निकले थे। वह कोयंबतूर से भोपाल तक लगभग 1,800 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए बाइक से यात्रा कर रहे थे। बताया गया है कि फ्लाइट उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्होंने सड़क मार्ग से जाने का फैसला किया था। हालांकि, दुर्घटना के समय तक वह कितनी देर से लगातार बाइक चला रहे थे, इस संबंध में जानकारी सामने नहीं आई है।

    हादसे की सूचना मिलने के बाद शव को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की एंबुलेंस से बैतूल जिला अस्पताल पहुंचाया गया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल की मर्चुरी में रखवा दिया गया। फिलहाल पोस्टमार्टम की प्रक्रिया परिवार के सदस्यों के आने के बाद पूरी की जाएगी।

    घटना के बाद भोपाल से गौतम के कुछ परिचित बैतूल पहुंचे। उनके परिवार के सदस्यों के पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है। परिजनों के आने के बाद आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर पोस्टमार्टम कराया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    गौतम के पारिवारिक जीवन को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक, उनके पिता का कुछ वर्ष पहले निधन हो गया था। परिवार में उनकी मां, भाई और भाभी हैं। उनका पालन-पोषण पारिवारिक संघर्षों और कई परेशानियों के बीच हुआ था। वह दुबई में नौकरी करते थे और भोपाल में एक पारिवारिक मित्र से मिलने जा रहे थे।

    बैतूल बाजार थाने के बीट प्रभारी रमन धुर्वे के मुताबिक, दुर्घटना के बाद शव को एंबुलेंस की मदद से जिला अस्पताल पहुंचाया गया था। फिलहाल पुलिस अज्ञात भारी वाहन की पहचान करने का प्रयास कर रही है। हादसे के कारणों और टक्कर मारने वाले वाहन के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

  • सूरत और अहमदाबाद की पहचान से आगे निकला कोयम्बटूर, जानिए क्यों तमिलनाडु का यह शहर आज भारत की असली 'टेक्सटाइल सिटी' कहलाता है

    सूरत और अहमदाबाद की पहचान से आगे निकला कोयम्बटूर, जानिए क्यों तमिलनाडु का यह शहर आज भारत की असली 'टेक्सटाइल सिटी' कहलाता है

    नई दिल्ली। भारत में कपड़ा उद्योग का इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है। प्राचीन काल से ही यहां सूती और रेशमी वस्त्रों का निर्माण होता रहा है। समय के साथ इस उद्योग ने आधुनिक रूप लिया और देश के अलग-अलग शहर कपड़ा उत्पादन के प्रमुख केंद्र बनते गए। कभी कानपुर को टेक्सटाइल कैपिटल कहा जाता था तो अहमदाबाद और सूरत भी लंबे समय तक वस्त्र उद्योग के बड़े केंद्र रहे। हालांकि वर्तमान समय में तमिलनाडु का कोयम्बटूर भारत की ‘टेक्सटाइल सिटी’ के रूप में सबसे मजबूत पहचान बना चुका है।

    कोयम्बटूर को यह पहचान केवल कपड़ा उत्पादन की वजह से नहीं मिली, बल्कि यहां विकसित हुए संपूर्ण टेक्सटाइल उद्योग ने इसे देश के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक शहरों में शामिल कर दिया है। शहर में बड़ी संख्या में स्पिनिंग मिल्स, टेक्सटाइल यूनिट्स, गारमेंट निर्माण केंद्र और प्रोसेसिंग प्लांट संचालित हैं। यही कारण है कि यह भारत में सूती धागे के सबसे बड़े उत्पादन केंद्रों में गिना जाता है।

    इस शहर की भौगोलिक परिस्थितियां भी कपड़ा उद्योग के लिए अनुकूल मानी जाती हैं। यहां का मौसम, औद्योगिक वातावरण और प्रशिक्षित श्रमिकों की उपलब्धता उत्पादन क्षमता को लगातार मजबूत बनाती है। वर्षों से विकसित औद्योगिक ढांचे ने कोयम्बटूर को टेक्सटाइल क्षेत्र में स्थिर और भरोसेमंद पहचान दिलाई है। यही वजह है कि देश की कई प्रमुख वस्त्र कंपनियां यहां से अपना उत्पादन संचालित करती हैं।

    कोयम्बटूर की सबसे बड़ी विशेषता इसका एकीकृत टेक्सटाइल नेटवर्क है। यहां कपास की खरीद से लेकर धागा तैयार करने, बुनाई, रंगाई, प्रिंटिंग और तैयार परिधान बनाने तक की पूरी प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर ही पूरी हो जाती है। इससे उत्पादन लागत नियंत्रित रहती है और उद्योग की कार्यक्षमता भी बढ़ती है। इस मॉडल ने शहर को देश के सबसे संगठित टेक्सटाइल क्लस्टरों में शामिल कर दिया है।

    शहर में तैयार होने वाला कॉटन यार्न देश के अनेक राज्यों की वस्त्र इकाइयों तक पहुंचता है। उच्च गुणवत्ता वाले सूती धागे की वजह से यहां का उत्पादन गारमेंट उद्योग और निर्यात आधारित कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा निटवियर, फैब्रिक, होम टेक्सटाइल्स, तौलिये और अन्य तैयार वस्त्रों का भी बड़े पैमाने पर निर्माण किया जाता है।

    कोयम्बटूर का योगदान केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है। यहां निर्मित टेक्सटाइल उत्पादों की आपूर्ति कई विदेशी बाजारों में भी होती है। सूती धागा, तैयार कपड़े, टेक्निकल टेक्सटाइल और होम फर्निशिंग उत्पादों का निर्यात इस शहर की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देता है। इसी वजह से यह भारत के प्रमुख निर्यात केंद्रों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए हुए है।

    टेक्सटाइल उत्पादन के साथ-साथ कोयम्बटूर मशीन निर्माण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यहां टेक्सटाइल मशीनरी, मोटर्स, स्पेयर पार्ट्स और इंजीनियरिंग उपकरणों का भी बड़े पैमाने पर निर्माण होता है। इससे वस्त्र उद्योग को स्थानीय स्तर पर आवश्यक मशीनें और तकनीकी सहायता आसानी से उपलब्ध हो जाती है।

    भारत का कपड़ा उद्योग आज भी देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। कृषि के बाद यह सबसे अधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाले क्षेत्रों में शामिल है और निर्यात में भी इसकी उल्लेखनीय हिस्सेदारी है। इसी मजबूत औद्योगिक व्यवस्था, व्यापक उत्पादन क्षमता और निर्यात में अहम योगदान के कारण कोयम्बटूर को आज भारत की ‘टेक्सटाइल सिटी’ के रूप में विशेष पहचान प्राप्त है।