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  • दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने से मध्य प्रदेश के छात्र की जान गई, कटनी स्थित घर में पसरा गम का माहौल

    दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने से मध्य प्रदेश के छात्र की जान गई, कटनी स्थित घर में पसरा गम का माहौल

    नई दिल्ली । दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस क्षेत्र के सत्य निकेतन में हुई इमारत गिरने की घटना में मध्य प्रदेश के कटनी निवासी 19 वर्षीय छात्र अक्षत यादव की मौत हो गई। हादसे की जानकारी सामने आने के बाद कटनी स्थित उसके परिवार में शोक की स्थिति है। परिवार के सदस्य दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं और अब शव को गृह नगर लाने की तैयारी की जा रही है।

    मृतक छात्र की पहचान कटनी की दुबे कॉलोनी निवासी अक्षत यादव के रूप में हुई है। अक्षत दिल्ली में रहकर दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम की पढ़ाई कर रहा था। परिवार के अनुसार वह उच्च शिक्षा हासिल कर अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए दिल्ली में रह रहा था। पढ़ाई के दौरान हुई इस दुर्घटना ने परिवार को गहरा सदमा दिया है।

    बताया गया कि रविवार को सत्य निकेतन क्षेत्र में करीब 40 वर्ष पुरानी इमारत अचानक ढह गई। इमारत गिरने के दौरान कई लोग मलबे की चपेट में आ गए। हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया तथा मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया गया। इसी दौरान अक्षत को भी मलबे से निकाला गया।

    हादसे में अक्षत गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसे तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसकी जान बचाने की कोशिश की। हालांकि गंभीर चोटों के कारण उसकी हालत नहीं संभल सकी और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। बाद में शवों की पहचान की प्रक्रिया के दौरान अक्षत के परिजनों को उसकी मौत की पुष्टि हुई।

    इस हादसे में अब तक छह लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद इमारत की स्थिति, निर्माण संबंधी पहलुओं और हादसे के कारणों को लेकर जांच की जा रही है। संबंधित स्तर पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि पुरानी इमारत की स्थिति कैसी थी और उसके गिरने के पीछे किन परिस्थितियों की भूमिका रही।

    अक्षत की मौत की खबर कटनी पहुंचते ही दुबे कॉलोनी में मातम छा गया। परिवार के घर पर रिश्तेदारों, परिचितों और आसपास के लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। अचानक सामने आई इस दुखद खबर से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पड़ोसियों के मुताबिक अक्षत पढ़ाई के लिए दिल्ली गया था और परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं।

    परिजन अब दिल्ली पहुंचकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। उनका प्रयास है कि अक्षत के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द कटनी लाया जा सके, ताकि अंतिम संस्कार गृह नगर में किया जा सके। हादसे की खबर के बाद स्थानीय लोगों में भी घटना को लेकर चिंता और दुख का माहौल है।

    सत्य निकेतन जैसे छात्र बहुल क्षेत्र में पुरानी इमारतों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। घटना ने ऐसे भवनों की सुरक्षा और उनकी नियमित जांच की जरूरत को सामने ला दिया है। फिलहाल हादसे के कारणों और जिम्मेदारी से जुड़े पहलुओं की जांच जारी है। अक्षत की मौत ने उसके परिवार के सामने ऐसी क्षति छोड़ दी है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।

  • SRCC समारोह में पीएम मोदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना, 2013 के दौर को याद कर महंगाई और घोटालों का किया जिक्र

    SRCC समारोह में पीएम मोदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना, 2013 के दौर को याद कर महंगाई और घोटालों का किया जिक्र

    नई दिल्ली । दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक इमारत अचानक ढह जाने से बड़ा हादसा हो गया। इमारत के मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और राहत एवं बचाव दलों ने तत्काल अभियान शुरू कर दिया। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना दोपहर करीब 1:30 बजे के आसपास हुई। इमारत के अचानक गिरने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग को अलर्ट किया गया। इसके बाद दमकल की कई टीमें घटनास्थल के लिए रवाना हुईं और मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने तथा उसमें फंसे लोगों की तलाश शुरू की। बचावकर्मी बेहद सावधानी के साथ मलबे की जांच कर रहे हैं, ताकि अंदर मौजूद लोगों तक सुरक्षित तरीके से पहुंचा जा सके।

    हादसे की गंभीरता को देखते हुए मौके पर राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। मलबे के नीचे कितने लोग फंसे हैं, इसकी सटीक संख्या फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाई है। प्रशासन और आपातकालीन टीमें स्थिति का लगातार आकलन कर रही हैं। जैसे-जैसे मलबा हटाया जाएगा, अंदर फंसे लोगों की स्थिति और हादसे में हुए नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

    सत्य निकेतन राजधानी दिल्ली का ऐसा इलाका है जहां बड़ी संख्या में छात्र और अन्य लोग रहते हैं। शुरुआती रिपोर्टों में इमारत में लोगों की मौजूदगी की बात सामने आई है, जिसके कारण बचाव अभियान को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मौके पर मौजूद टीमें प्राथमिकता के आधार पर उन स्थानों की पहचान कर रही हैं जहां से किसी व्यक्ति के फंसे होने की संभावना अधिक है।

    बचाव कार्य के दौरान स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन की मदद के लिए हाथ बढ़ाया। हालांकि, मलबे को हटाने के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है, क्योंकि किसी भी तरह की जल्दबाजी से फंसे लोगों के लिए खतरा बढ़ सकता है। आपातकालीन दल घटनास्थल पर लगातार काम कर रहे हैं और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

    हादसे के कारणों को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इमारत की संरचनात्मक स्थिति, निर्माण कार्य या अन्य संभावित वजहों की जांच के बाद ही दुर्घटना का वास्तविक कारण सामने आएगा। लगातार बारिश के बीच दिल्ली में भवनों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है, हालांकि इस हादसे के लिए बारिश को जिम्मेदार मानना अभी जल्दबाजी होगी।

    प्रशासन की ओर से आसपास के क्षेत्र में भी सुरक्षा का जायजा लिया जा रहा है। बचाव अभियान पूरा होने के बाद इमारत के ढहने से हुए नुकसान का आकलन किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर संबंधित विभागों की ओर से आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। दमकल और अन्य राहत दल लगातार अभियान में जुटे हैं। अधिकारियों की ओर से विस्तृत जानकारी मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे में कितने लोग प्रभावित हुए और कितने लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

  • दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में इमारत गिरने से मचा हड़कंप, दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं, मलबे में दबे लोगों की तलाश तेज

    दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में इमारत गिरने से मचा हड़कंप, दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं, मलबे में दबे लोगों की तलाश तेज

    नई दिल्ली । दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक इमारत अचानक ढह जाने से बड़ा हादसा हो गया। इमारत के मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और राहत एवं बचाव दलों ने तत्काल अभियान शुरू कर दिया। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना दोपहर करीब 1:30 बजे के आसपास हुई। इमारत के अचानक गिरने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग को अलर्ट किया गया। इसके बाद दमकल की कई टीमें घटनास्थल के लिए रवाना हुईं और मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने तथा उसमें फंसे लोगों की तलाश शुरू की। बचावकर्मी बेहद सावधानी के साथ मलबे की जांच कर रहे हैं, ताकि अंदर मौजूद लोगों तक सुरक्षित तरीके से पहुंचा जा सके।

    हादसे की गंभीरता को देखते हुए मौके पर राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। मलबे के नीचे कितने लोग फंसे हैं, इसकी सटीक संख्या फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाई है। प्रशासन और आपातकालीन टीमें स्थिति का लगातार आकलन कर रही हैं। जैसे-जैसे मलबा हटाया जाएगा, अंदर फंसे लोगों की स्थिति और हादसे में हुए नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

    सत्य निकेतन राजधानी दिल्ली का ऐसा इलाका है जहां बड़ी संख्या में छात्र और अन्य लोग रहते हैं। शुरुआती रिपोर्टों में इमारत में लोगों की मौजूदगी की बात सामने आई है, जिसके कारण बचाव अभियान को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मौके पर मौजूद टीमें प्राथमिकता के आधार पर उन स्थानों की पहचान कर रही हैं जहां से किसी व्यक्ति के फंसे होने की संभावना अधिक है।

    बचाव कार्य के दौरान स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन की मदद के लिए हाथ बढ़ाया। हालांकि, मलबे को हटाने के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है, क्योंकि किसी भी तरह की जल्दबाजी से फंसे लोगों के लिए खतरा बढ़ सकता है। आपातकालीन दल घटनास्थल पर लगातार काम कर रहे हैं और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

    हादसे के कारणों को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इमारत की संरचनात्मक स्थिति, निर्माण कार्य या अन्य संभावित वजहों की जांच के बाद ही दुर्घटना का वास्तविक कारण सामने आएगा। लगातार बारिश के बीच दिल्ली में भवनों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है, हालांकि इस हादसे के लिए बारिश को जिम्मेदार मानना अभी जल्दबाजी होगी।

    प्रशासन की ओर से आसपास के क्षेत्र में भी सुरक्षा का जायजा लिया जा रहा है। बचाव अभियान पूरा होने के बाद इमारत के ढहने से हुए नुकसान का आकलन किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर संबंधित विभागों की ओर से आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। दमकल और अन्य राहत दल लगातार अभियान में जुटे हैं। अधिकारियों की ओर से विस्तृत जानकारी मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे में कितने लोग प्रभावित हुए और कितने लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

  • ट्रेंट ब्रिज में रनों के लिहाज से भारत को मिली इतिहास की सबसे बड़ी हार, पांच मैचों की श्रृंखला में इंग्लैंड 2-0 से आगे

    ट्रेंट ब्रिज में रनों के लिहाज से भारत को मिली इतिहास की सबसे बड़ी हार, पांच मैचों की श्रृंखला में इंग्लैंड 2-0 से आगे

    नई दिल्ली । भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला का तीसरा मुकाबला भारतीय टीम के लिए बेहद निराशाजनक साबित हुआ। नॉटिंघम के ट्रेंट ब्रिज मैदान पर खेले गए इस बेहद अहम मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजी क्रम पूरी तरह ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। इंग्लैंड द्वारा दिए गए 202 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम महज 11.4 ओवरों में सिर्फ 76 रनों पर सिमट गई। इस बेहद खराब प्रदर्शन के परिणामस्वरूप भारतीय टीम को रनों के लिहाज से अपने टी20 अंतरराष्ट्रीय इतिहास की सबसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा है।

    इस करारी हार के बाद मेजबान इंग्लैंड ने श्रृंखला में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली है, जिससे भारतीय टीम के लिए अब श्रृंखला में वापसी की राह बेहद कठिन हो गई है। क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि मध्य प्रदेश सहित देश के सभी हिस्सों में फैले करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह नतीजा चौंकाने वाला है क्योंकि टी20 अंतरराष्ट्रीय में भारतीय टीम का यह दूसरा सबसे कम स्कोर है। इससे पहले साल 2019 में न्यूजीलैंड ने वेलिंगटन में भारत को 80 रनों से हराया था, लेकिन नॉटिंघम की इस 125 रनों की हार ने उस पुराने अनचाहे रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है।

    मैच की बात करें तो भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया था, जो बाद में पूरी तरह गलत साबित हुआ। इंग्लैंड के सलामी बल्लेबाज फिल साल्ट ने भारतीय गेंदबाजों की बखिया उधेड़ते हुए महज 44 गेंदों में 70 रनों की आक्रामक पारी खेली, जिसमें सात चौके और तीन शानदार छक्के शामिल थे। इसके अलावा जोस बटलर ने 36 रन और निचले क्रम में सैम करन ने नाबाद 41 रनों का अमूल्य योगदान दिया, जिसकी बदौलत इंग्लैंड ने निर्धारित 20 ओवरों में 7 विकेट खोकर 201 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया। भारत की ओर से प्रिंस यादव और हर्षित राणा ने दो-दो विकेट अवश्य लिए, लेकिन वे रनों की रफ्तार पर अंकुश लगाने में नाकाम रहे।

    विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत किसी बुरे सपने जैसी रही। टीम ने पावरप्ले के भीतर ही महज 52 रनों के स्कोर पर अपने 5 महत्वपूर्ण विकेट गंवा दिए थे। इंग्लिश तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर और जोश टंग की घातक गेंदबाजी के सामने भारतीय बल्लेबाजों ने पूरी तरह से घुटने टेक दिए। जोफ्रा आर्चर ने भारतीय शीर्ष क्रम को झकझोरते हुए वैभव सूर्यवंशी, कप्तान श्रेयस अय्यर और अक्षर पटेल को पवेलियन का रास्ता दिखाया। जोश टंग ने भी अपनी रफ्तार का कहर बरपाते हुए अभिषेक शर्मा और ईशान किशन को आउट कर भारत की कमर तोड़ दी। टीम का कोई भी बल्लेबाज क्रीज पर टिकने का साहस नहीं दिखा सका और पूरी पारी ताश के पत्तों की तरह ढह गई।

    भारतीय टीम की ओर से युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी और विकेटकीपर ईशान किशन ही सर्वाधिक 13-13 रन बना सके, जो टीम के खराब बल्लेबाजी दृष्टिकोण को दर्शाता है। पूरी पारी के दौरान शॉट चयन में भारी लापरवाही देखने को मिली और बल्लेबाजों में पिच पर रुककर संघर्ष करने का कोई जज्बा नजर नहीं आया। इस हार के साथ ही भारतीय क्रिकेट के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब टीम लगातार पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में एक भी जीत दर्ज करने में असफल रही है। श्रृंखला का चौथा मुकाबला अब ब्रिस्टल में खेला जाना है, जहां भारतीय टीम को अपनी साख बचाने और श्रृंखला में बने रहने के लिए आत्ममंथन कर मैदान पर उतरना होगा।

  • उज्जैन में दो मंजिला मकान भरभराकर ढहा, मलबे में दबकर किशोर की मौत; पांच गंभीर, निर्माण कार्य पर उठे सवाल

    उज्जैन में दो मंजिला मकान भरभराकर ढहा, मलबे में दबकर किशोर की मौत; पांच गंभीर, निर्माण कार्य पर उठे सवाल

     मध्य प्रदेश:  के उज्जैन जिले में बुधवार सुबह एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। शहर के जीवाजीगंज थाना क्षेत्र स्थित हम्मालवाड़ी इलाके में एक दो मंजिला रिहायशी मकान अचानक भरभराकर गिर गया। मकान गिरते ही आसपास के क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे में एक 15 वर्षीय किशोर की मलबे में दबने से मौत हो गई, जबकि पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की टीम ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह का समय होने के कारण मकान के भीतर कई लोग मौजूद थे। अचानक तेज आवाज के साथ पूरी इमारत जमींदोज हो गई। मकान के गिरते ही आसपास रहने वाले लोगों ने बिना समय गंवाए राहत कार्य शुरू कर दिया। स्थानीय नागरिकों ने मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया और प्रशासन को सूचना दी। कुछ ही देर में पुलिस और राहत दल भी मौके पर पहुंच गए।

    जानकारी के अनुसार हादसे के समय मकान के भीतर कुल आठ लोग मौजूद थे। मकान के ढहने से सभी लोग मलबे के नीचे दब गए। स्थानीय लोगों और बचाव दल की मदद से घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। हादसे में 15 वर्षीय अरशान कुरैशी की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं खुर्शीद बी, इकलाश, फरान नाज, शेर मोहम्मद और परवीन बी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार जारी है और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल है। आसपास के लोगों का कहना है कि मकान के गिरने की घटना इतनी अचानक हुई कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। तेज धमाके जैसी आवाज सुनकर लोग घरों से बाहर निकल आए और मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य में जुट गए। कई घंटों तक इलाके में लोगों की आवाजाही प्रभावित रही और सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने क्षेत्र को घेराबंदी कर सुरक्षित किया।

    प्रारंभिक जांच में मकान ढहने के पीछे पड़ोस में चल रहे निर्माण कार्य को संभावित कारण माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार समीप स्थित एक भवन का निर्माण कार्य जारी था, जिसके कारण प्रभावित मकान की नींव पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हादसे के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही चल सकेगा। विशेषज्ञों की टीम को भी घटनास्थल का निरीक्षण करने के लिए लगाया गया है।

    पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर आवश्यक जानकारी जुटाई है। आसपास के अन्य मकानों की स्थिति का भी आकलन किया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी संभावित खतरे को रोका जा सके। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित पक्षों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    उज्जैन में हुए इस हादसे ने एक बार फिर पुराने और कमजोर भवनों की सुरक्षा, निर्माण कार्यों की निगरानी तथा शहरी क्षेत्रों में भवन निर्माण संबंधी नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल प्रशासन राहत कार्य, घायलों के उपचार और घटना के कारणों की जांच पर प्राथमिकता से काम कर रहा है।

  • भीषण गर्मी से वैश्विक कृषि सिस्टम तबाही की कगार पर… 100 करोड़ लोगों की आजीविका पर संकट

    भीषण गर्मी से वैश्विक कृषि सिस्टम तबाही की कगार पर… 100 करोड़ लोगों की आजीविका पर संकट


    रोम।
    भीषण गर्मी (Extreme Heat) वैश्विक कृषि प्रणालियों (Global Agricultural Systems) को तबाही की कगार पर धकेल रही हैं। इससे वैश्विक खाद्य तंत्र बिगड़ने लगा है। इसके चलते दुनियाभर में 100 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका और उनके स्वास्थ्य पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।

    संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अत्यधिक गर्मी अब केवल मौसम ही नहीं, बल्कि खेती, मछली पालन और वानिकी के लिए एक अस्तित्वगत खतरा बन गई है। एफएओ के जलवायु परिवर्तन कार्यालय के प्रमुख कावेह जाहेदी ने कहा, भीषण गर्मी यह तय कर रही है कि किसान और मछुआरे क्या उगा सकते हैं और कब काम कर सकते हैं।


    समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र भी खतरे में

    गर्मी का असर केवल जमीन तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में दुनिया के 91 फीसदी महासागरों ने कम से कम एक समुद्री लू का सामना किया। इससे पानी में ऑक्सीजन का स्तर कम हो रहा है, जिससे मछलियों का अस्तित्व खतरे में है और समुद्री खाद्य प्रणालियां चरमरा रही हैं।


    प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों की आवश्यकता

    कृषि से संबंधित रिपोर्ट में बताया गया कि किसानों को मौसम का सटीक डेटा समय पर मिलना चाहिए ताकि वे बुवाई और कटाई के समय में बदलाव कर सकें। अगर तापमान 1.5 डिग्री के बजाय 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ता है, तो भीषण गर्मी की तीव्रता और आवृत्ति चार गुना तक बढ़ सकती है।


    चार प्रमुख फसलों पर पड़ता है असर

    वैश्विक औसत तापमान में प्रत्येक एक डिग्री की वृद्धि से चार प्रमुख फसलों मक्का, चावल, सोयाबीन और गेहूं की पैदावार में लगभग 6% की कमी आती है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 अब तक के तीन सबसे गर्म वर्षों में से एक रहा है। जब तापमान 30 डिग्री की सीमा को पार कर जाता है, तो प्रमुख फसलों की पैदावार में तेजी से गिरावट आने लगती है।

  • MP: ग्वालियर में खुले पड़े सीवर चैंबर में गिरने से एक मजदूर की मौत

    MP: ग्वालियर में खुले पड़े सीवर चैंबर में गिरने से एक मजदूर की मौत


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में ग्वालियर (Gwalior) के झांसी रोड थाना क्षेत्र में दर्दनाक घटना सामने आई है. यहां खुले पड़े सीवर चैंबर (Open Sewer Chamber) में गिरने से एक मजदूर की जान चली गई. मृतक की पहचान सौरभ बाथम (Saurabh Batham) के रूप में हुई है, मजदूरी कर गुजारा करता था. स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सीवर चैंबर लंबे समय से खुला पड़ा था. बार-बार शिकायतों के बावजूद नगर निगम ने कोई कार्रवाई नहीं की. ऐसे में सवाल है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी किस हादसे का इंतजार कर रहे थे?

    यह घटना झांसी रोड थाना क्षेत्र की गणेश कॉलोनी ओफो की बगिया की है. यहां शुक्रवार की शाम सनसनी फैल गई. एक खुले हुए सीवर चैंबर में संदिग्ध परिस्थितियों में एक युवक गिर गया. स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद सौरभ को बाहर निकाला. उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी- डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि सौरभ शराब पीने का आदी था।

    आशंका जताई जा रही है कि नशे की हालत में वह खुले चैंबर को देख नहीं पाया और उसमें गिर गया. इस घटना के बाद इलाके में नगर निगम की लापरवाही को लेकर लोगों में आक्रोश है. स्थानीय लोगों का कहना है कि चैंबर लंबे समय से खुला पड़ा था, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया. अगर समय रहते चैंबर को ढका गया होता तो शायद सौरभ की जान बच जाती।

    घटना के बाद इलाके में गुस्सा फूट पड़ा है. स्थानीय लोगों ने नगर निगम के खिलाफ नाराजगी जताई और इसे लापरवाही बताया. वहीं इस मामले की सूचना मिलते ही झांसी रोड थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा होगा।