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  • उज्जैन में दो मंजिला मकान भरभराकर ढहा, मलबे में दबकर किशोर की मौत; पांच गंभीर, निर्माण कार्य पर उठे सवाल

    उज्जैन में दो मंजिला मकान भरभराकर ढहा, मलबे में दबकर किशोर की मौत; पांच गंभीर, निर्माण कार्य पर उठे सवाल

     मध्य प्रदेश:  के उज्जैन जिले में बुधवार सुबह एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। शहर के जीवाजीगंज थाना क्षेत्र स्थित हम्मालवाड़ी इलाके में एक दो मंजिला रिहायशी मकान अचानक भरभराकर गिर गया। मकान गिरते ही आसपास के क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे में एक 15 वर्षीय किशोर की मलबे में दबने से मौत हो गई, जबकि पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की टीम ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह का समय होने के कारण मकान के भीतर कई लोग मौजूद थे। अचानक तेज आवाज के साथ पूरी इमारत जमींदोज हो गई। मकान के गिरते ही आसपास रहने वाले लोगों ने बिना समय गंवाए राहत कार्य शुरू कर दिया। स्थानीय नागरिकों ने मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया और प्रशासन को सूचना दी। कुछ ही देर में पुलिस और राहत दल भी मौके पर पहुंच गए।

    जानकारी के अनुसार हादसे के समय मकान के भीतर कुल आठ लोग मौजूद थे। मकान के ढहने से सभी लोग मलबे के नीचे दब गए। स्थानीय लोगों और बचाव दल की मदद से घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। हादसे में 15 वर्षीय अरशान कुरैशी की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं खुर्शीद बी, इकलाश, फरान नाज, शेर मोहम्मद और परवीन बी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार जारी है और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल है। आसपास के लोगों का कहना है कि मकान के गिरने की घटना इतनी अचानक हुई कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। तेज धमाके जैसी आवाज सुनकर लोग घरों से बाहर निकल आए और मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य में जुट गए। कई घंटों तक इलाके में लोगों की आवाजाही प्रभावित रही और सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने क्षेत्र को घेराबंदी कर सुरक्षित किया।

    प्रारंभिक जांच में मकान ढहने के पीछे पड़ोस में चल रहे निर्माण कार्य को संभावित कारण माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार समीप स्थित एक भवन का निर्माण कार्य जारी था, जिसके कारण प्रभावित मकान की नींव पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हादसे के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही चल सकेगा। विशेषज्ञों की टीम को भी घटनास्थल का निरीक्षण करने के लिए लगाया गया है।

    पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर आवश्यक जानकारी जुटाई है। आसपास के अन्य मकानों की स्थिति का भी आकलन किया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी संभावित खतरे को रोका जा सके। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित पक्षों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    उज्जैन में हुए इस हादसे ने एक बार फिर पुराने और कमजोर भवनों की सुरक्षा, निर्माण कार्यों की निगरानी तथा शहरी क्षेत्रों में भवन निर्माण संबंधी नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल प्रशासन राहत कार्य, घायलों के उपचार और घटना के कारणों की जांच पर प्राथमिकता से काम कर रहा है।

  • भीषण गर्मी से वैश्विक कृषि सिस्टम तबाही की कगार पर… 100 करोड़ लोगों की आजीविका पर संकट

    भीषण गर्मी से वैश्विक कृषि सिस्टम तबाही की कगार पर… 100 करोड़ लोगों की आजीविका पर संकट


    रोम।
    भीषण गर्मी (Extreme Heat) वैश्विक कृषि प्रणालियों (Global Agricultural Systems) को तबाही की कगार पर धकेल रही हैं। इससे वैश्विक खाद्य तंत्र बिगड़ने लगा है। इसके चलते दुनियाभर में 100 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका और उनके स्वास्थ्य पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।

    संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अत्यधिक गर्मी अब केवल मौसम ही नहीं, बल्कि खेती, मछली पालन और वानिकी के लिए एक अस्तित्वगत खतरा बन गई है। एफएओ के जलवायु परिवर्तन कार्यालय के प्रमुख कावेह जाहेदी ने कहा, भीषण गर्मी यह तय कर रही है कि किसान और मछुआरे क्या उगा सकते हैं और कब काम कर सकते हैं।


    समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र भी खतरे में

    गर्मी का असर केवल जमीन तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में दुनिया के 91 फीसदी महासागरों ने कम से कम एक समुद्री लू का सामना किया। इससे पानी में ऑक्सीजन का स्तर कम हो रहा है, जिससे मछलियों का अस्तित्व खतरे में है और समुद्री खाद्य प्रणालियां चरमरा रही हैं।


    प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों की आवश्यकता

    कृषि से संबंधित रिपोर्ट में बताया गया कि किसानों को मौसम का सटीक डेटा समय पर मिलना चाहिए ताकि वे बुवाई और कटाई के समय में बदलाव कर सकें। अगर तापमान 1.5 डिग्री के बजाय 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ता है, तो भीषण गर्मी की तीव्रता और आवृत्ति चार गुना तक बढ़ सकती है।


    चार प्रमुख फसलों पर पड़ता है असर

    वैश्विक औसत तापमान में प्रत्येक एक डिग्री की वृद्धि से चार प्रमुख फसलों मक्का, चावल, सोयाबीन और गेहूं की पैदावार में लगभग 6% की कमी आती है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 अब तक के तीन सबसे गर्म वर्षों में से एक रहा है। जब तापमान 30 डिग्री की सीमा को पार कर जाता है, तो प्रमुख फसलों की पैदावार में तेजी से गिरावट आने लगती है।

  • MP: ग्वालियर में खुले पड़े सीवर चैंबर में गिरने से एक मजदूर की मौत

    MP: ग्वालियर में खुले पड़े सीवर चैंबर में गिरने से एक मजदूर की मौत


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में ग्वालियर (Gwalior) के झांसी रोड थाना क्षेत्र में दर्दनाक घटना सामने आई है. यहां खुले पड़े सीवर चैंबर (Open Sewer Chamber) में गिरने से एक मजदूर की जान चली गई. मृतक की पहचान सौरभ बाथम (Saurabh Batham) के रूप में हुई है, मजदूरी कर गुजारा करता था. स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सीवर चैंबर लंबे समय से खुला पड़ा था. बार-बार शिकायतों के बावजूद नगर निगम ने कोई कार्रवाई नहीं की. ऐसे में सवाल है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी किस हादसे का इंतजार कर रहे थे?

    यह घटना झांसी रोड थाना क्षेत्र की गणेश कॉलोनी ओफो की बगिया की है. यहां शुक्रवार की शाम सनसनी फैल गई. एक खुले हुए सीवर चैंबर में संदिग्ध परिस्थितियों में एक युवक गिर गया. स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद सौरभ को बाहर निकाला. उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी- डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि सौरभ शराब पीने का आदी था।

    आशंका जताई जा रही है कि नशे की हालत में वह खुले चैंबर को देख नहीं पाया और उसमें गिर गया. इस घटना के बाद इलाके में नगर निगम की लापरवाही को लेकर लोगों में आक्रोश है. स्थानीय लोगों का कहना है कि चैंबर लंबे समय से खुला पड़ा था, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया. अगर समय रहते चैंबर को ढका गया होता तो शायद सौरभ की जान बच जाती।

    घटना के बाद इलाके में गुस्सा फूट पड़ा है. स्थानीय लोगों ने नगर निगम के खिलाफ नाराजगी जताई और इसे लापरवाही बताया. वहीं इस मामले की सूचना मिलते ही झांसी रोड थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा होगा।