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  • इंदौर के तीन सरकारी कॉलेजों में वोटर रजिस्ट्रेशन कैंप, पहली बार मतदाता बनने के लिए 96 विद्यार्थियों ने कराया पंजीयन

    इंदौर के तीन सरकारी कॉलेजों में वोटर रजिस्ट्रेशन कैंप, पहली बार मतदाता बनने के लिए 96 विद्यार्थियों ने कराया पंजीयन

    मध्य प्रदेश। के इंदौर में युवाओं को मतदाता सूची से जोड़ने और मतदान के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से तीन सरकारी कॉलेजों में विशेष मतदाता पंजीयन शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के विद्यार्थियों को पहली बार मतदाता पहचान पत्र बनवाने और मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया में सहायता दी गई। कॉलेज परिसरों में ही पंजीयन की सुविधा मिलने से विद्यार्थियों को आवेदन संबंधी जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला।

    यह अभियान श्री अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, शासकीय होलकर साइंस कॉलेज और शासकीय न्यू लॉ कॉलेज में चलाया गया। शिविरों का उद्देश्य ऐसे पात्र विद्यार्थियों को मतदाता सूची में शामिल करने में मदद करना था, जिन्होंने अभी तक अपना पंजीयन नहीं कराया है। इसके साथ ही युवाओं को मतदान के महत्व और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी भागीदारी के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया।

    श्री अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में आयोजित शिविर के दौरान कुल 96 विद्यार्थियों ने मतदाता पंजीयन कराया। इनमें पहले दिन 39 विद्यार्थियों ने आवेदन किया, जबकि अंतिम दिन 57 विद्यार्थियों ने पंजीयन की प्रक्रिया पूरी की। इस तरह दोनों दिनों में पंजीयन कराने वाले विद्यार्थियों की कुल संख्या 96 रही। कॉलेज की प्राचार्य डॉ. ममता चंद्रशेखर ने बताया कि मध्य प्रदेश के अन्य सरकारी कॉलेजों में भी इसी तरह के शिविर आयोजित किए गए हैं। इनका उद्देश्य पात्र विद्यार्थियों के नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने में सहायता करना है।

    शासकीय होलकर साइंस कॉलेज में भी विद्यार्थियों ने शिविर में हिस्सा लिया। कॉलेज के कर्मचारी राजेंद्र चौरसिया के अनुसार, यहां छात्र-छात्राओं ने उत्साह के साथ पंजीयन प्रक्रिया में भाग लिया। शिविर के दौरान लगभग 15 से 20 विद्यार्थी मतदाता पंजीयन के लिए शामिल हुए। इन शिविरों के माध्यम से विद्यार्थियों को आवेदन से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई गई और पंजीयन प्रक्रिया को समझने में मदद मिली।

    शासकीय न्यू लॉ कॉलेज में 5 और 9 अक्टूबर को विशेष मतदाता पंजीयन शिविर लगाए गए। दोनों दिन शिविर का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक निर्धारित था। विद्यार्थियों को आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेजों की जानकारी दी गई और फॉर्म भरने की प्रक्रिया पूरी करने में सहायता की गई। उनसे कक्षा 10वीं की मार्कशीट, बिजली का बिल, आधार कार्ड, पासपोर्ट आकार की फोटो और माता-पिता के मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेज लाने को कहा गया था।

    न्यू लॉ कॉलेज की छात्रा डिंपल वर्मा ने बताया कि शिविर में अधिकारियों ने आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाया। उनके अनुसार, दूसरे शहरों से आकर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को मतदाता पहचान पत्र बनवाने और उससे जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कॉलेज परिसर में आयोजित शिविर उनके लिए उपयोगी साबित होते हैं, क्योंकि यहां उन्हें पंजीयन की प्रक्रिया समझने और आवेदन पूरा करने में मदद मिलती है।

    इंदौर जिले में दो लोकसभा क्षेत्र, नौ विधानसभा क्षेत्र और कुल 3,210 मतदान केंद्र हैं। ऐसे में नए मतदाताओं को मतदाता सूची से जोड़ने के लिए कॉलेजों में आयोजित शिविर महत्वपूर्ण गतिविधि के रूप में सामने आए हैं। 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नागरिक मतदाता बनने के पात्र होते हैं, लेकिन मतदान करने के लिए मतदाता सूची में नाम दर्ज होना आवश्यक है। कॉलेजों में चलाए जा रहे इस अभियान के जरिए विद्यार्थियों को पहली बार मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने और चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने की दिशा में सहायता दी जा रही है।

  • जबलपुर में स्कूल-कॉलेजों के बाहर छात्राओं से छेड़छाड़ के मामलों पर मानवाधिकार आयोग सख्त, एसपी से मांगी रिपोर्ट

    जबलपुर में स्कूल-कॉलेजों के बाहर छात्राओं से छेड़छाड़ के मामलों पर मानवाधिकार आयोग सख्त, एसपी से मांगी रिपोर्ट


    जबलपुर।
    शहर के स्कूलों और कॉलेजों के बाहर छात्राओं से छेड़छाड़ और उत्पीड़न की लगातार मिल रही शिकायतों को लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने गंभीर रुख अपनाया है। मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जबलपुर पुलिस अधीक्षक से मामले की जांच कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

    छात्राओं को बनाया जा रहा निशाना

    जानकारी के अनुसार, कई शिक्षण संस्थानों के बाहर छुट्टी के समय असामाजिक तत्व और मनचले छात्राओं का पीछा करते हैं, उन पर फब्तियां कसते हैं, मोबाइल नंबर मांगते हैं और उनकी बिना अनुमति तस्वीरें भी खींचते हैं। इन घटनाओं से छात्राएं मानसिक रूप से परेशान हो रही हैं और खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं।

    बताया जा रहा है कि लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के कारण कुछ छात्राओं ने स्कूल-कॉलेज जाना भी छोड़ दिया है। वहीं, विरोध करने पर अभिभावकों को भी धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।

    मानवाधिकार आयोग ने लिया स्वत: संज्ञान

    मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के क्षेत्रीय कार्यालय प्रभारी द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, आयोग की मुख्य पीठ भोपाल में अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह की एकल पीठ ने मामले को प्रथम दृष्टया मानवाधिकार हनन का मामला माना है।

    आयोग ने जबलपुर के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें तथा दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें।

    सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    लगातार सामने आ रही घटनाओं ने स्कूल और कॉलेज परिसरों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित पुलिस गश्त, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और मनचलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

  • ईरान युद्ध का असर पाकिस्तान पर, स्कूल-कॉलेज बंद

    ईरान युद्ध का असर पाकिस्तान पर, स्कूल-कॉलेज बंद

    लाहौर। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने के बाद पाकिस्तान सरकार ने ईंधन बचाने के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने घोषणा की है कि देश में स्कूल दो सप्ताह के लिए बंद रहेंगे, जबकि सरकारी दफ्तर अब सप्ताह में सिर्फ चार दिन ही खुलेंगे।

    समाचार एजेंसी Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने कहा है कि ईंधन की खपत कम करने के लिए बैंकों को छोड़कर अधिकतर सरकारी कार्यालय सीमित दिनों में काम करेंगे। साथ ही उच्च शिक्षा संस्थानों की कक्षाएं फिलहाल ऑनलाइन मोड में संचालित की जाएंगी।

    सरकारी दफ्तरों में आधा स्टाफ करेगा वर्क फ्रॉम होम

    सरकार के फैसले के अनुसार जरूरी सेवाओं को छोड़कर कई सरकारी विभागों में 50 प्रतिशत कर्मचारी घर से काम करेंगे। इसके अलावा अगले दो महीनों के दौरान सरकारी विभागों को मिलने वाले ईंधन में भी 50 फीसदी कटौती करने का फैसला किया गया है।
    क्यों लेना पड़ा यह फैसला
    पाकिस्तान में ईंधन संकट का मुख्य कारण मध्य-पूर्व में बढ़ता युद्ध और Strait of Hormuz में बढ़ा तनाव बताया जा रहा है।

    इस समुद्री मार्ग से पाकिस्तान को तेल की बड़ी आपूर्ति मिलती है। क्षेत्रीय हालात बिगड़ने के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई है और कीमतों में तेज उछाल आया है।

    सरकार ने शनिवार देर रात पेट्रोल की कीमतों में 55 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की, जिसे देश के इतिहास में सबसे बड़ी बढ़ोतरी माना जा रहा है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेट्रोलियम मंत्री Ali Pervaiz Malik, उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री Ishaq Dar और वित्त मंत्री Muhammad Aurangzeb भी मौजूद थे।

    डीज़ल भी हुआ महंगा
    सिर्फ पेट्रोल ही नहीं, बल्कि हाई-स्पीड डीज़ल की कीमत में भी करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।

    डीज़ल की कीमत 280.86 पाकिस्तानी रुपये से बढ़ाकर 335.86 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है।

    मंत्री अली परवेज मलिक ने कहा कि पड़ोसी क्षेत्र में शुरू हुआ संघर्ष अब पूरे इलाके को प्रभावित कर रहा है और फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह संकट कब तक जारी रहेगा।

    सरकार का मानना है कि अगर ईंधन की खपत पर अभी नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले समय में आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है, इसलिए अस्थायी तौर पर ये कड़े कदम उठाए गए हैं।