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  • विकेट लेने के बजाय बार-बार नो-बॉल! जडेजा ने बनाया ऐसा रिकॉर्ड जिसे कोई गेंदबाज नहीं चाहेगा

    विकेट लेने के बजाय बार-बार नो-बॉल! जडेजा ने बनाया ऐसा रिकॉर्ड जिसे कोई गेंदबाज नहीं चाहेगा


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो में खेले जा रहे टेस्ट मुकाबले में टीम इंडिया ने पहली पारी के आधार पर बड़ी बढ़त हासिल की लेकिन इसी बीच भारतीय ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा के नाम ऐसा अनचाहा रिकॉर्ड दर्ज हो गया है जिसे शायद ही कोई गेंदबाज अपने नाम देखना चाहेगा। टेस्ट क्रिकेट में जडेजा की नो-बॉल फेंकने की समस्या एक बार फिर सामने आई और आंकड़ों के मुताबिक साल 2021 से अब तक वह टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा नो-बॉल फेंकने वाले स्पिन गेंदबाज बन गए हैं। जडेजा के नाम इस अवधि में कुल 88 नो-बॉल दर्ज हो चुकी हैं और इस मामले में वह बाकी स्पिनर्स से काफी आगे हैं।

    कोलंबो टेस्ट में भी भारतीय स्पिन गेंदबाजों की ओर से नो-बॉल की समस्या देखने को मिली। मुकाबले में भारतीय स्पिनर्स अब तक कुल 10 नो-बॉल फेंक चुके थे। टेस्ट क्रिकेट में स्पिन गेंदबाजों द्वारा नो-बॉल करना वैसे भी टीम के लिए महंगा साबित हो सकता है क्योंकि इससे बल्लेबाज को अतिरिक्त मौका मिलने के साथ विपक्षी टीम को अतिरिक्त रन भी मिलते हैं। जडेजा जैसे अनुभवी गेंदबाज से ऐसी गलती बार-बार होना टीम के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

    साल 2021 से अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो रवींद्र जडेजा 88 नो-बॉल के साथ इस अनचाही सूची में सबसे ऊपर हैं। पाकिस्तान के स्पिनर नोमान अली 40 नो-बॉल के साथ दूसरे स्थान पर हैं। यानी जडेजा और दूसरे नंबर के गेंदबाज के बीच भी बड़ा अंतर है। श्रीलंका के लसिथ एम्बुलडेनिया 33 नो-बॉल के साथ तीसरे नंबर पर हैं। इंग्लैंड के जैक लीच ने इस दौरान 19 नो-बॉल फेंकी हैं। वहीं वेस्टइंडीज के जोमेल वारिकन और अफगानिस्तान के जहीर खान के नाम 17-17 नो-बॉल दर्ज हैं।

    जडेजा के लिए यह आंकड़ा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह भारतीय टेस्ट टीम के सबसे अनुभवी और भरोसेमंद ऑलराउंडर्स में शामिल हैं। गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी और फील्डिंग में भी उनकी भूमिका बेहद अहम रहती है। ऐसे में नो-बॉल की बार बार होने वाली गलती विपक्षी टीम के खिलाफ भारत की स्थिति को प्रभावित कर सकती है। खासकर टेस्ट क्रिकेट में जब एक विकेट के लिए लंबे समय तक मेहनत करनी पड़ती है तब नो-बॉल पर मिला अतिरिक्त मौका मैच का रुख बदल सकता है।

    अगर कोलंबो टेस्ट की बात करें तो भारत ने पहली पारी में 503 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था। इसके जवाब में श्रीलंका की पहली पारी 290 रन पर समाप्त हो गई और भारत को 213 रन की बड़ी बढ़त मिली। इसके बाद कप्तान शुभमन गिल ने श्रीलंका को फॉलोऑन देने का फैसला किया। दूसरी पारी में श्रीलंका की शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम ने शुरुआती विकेट जल्दी गंवा दिए।

    हालांकि इसके बाद पासिंदु सूर्यबंदारा और धनंजय डी सिल्वा ने पारी को संभाल लिया। चौथे दिन बारिश के कारण खेल जल्दी समाप्त होने तक श्रीलंका ने दूसरी पारी में 6 विकेट पर 229 रन बना लिए थे और टीम ने भारत के खिलाफ 16 रन की बढ़त हासिल कर ली थी। ऐसे में भारतीय गेंदबाजों के लिए आखिरी विकेट हासिल करना बेहद जरूरी हो गया था। इस दौरान जडेजा की नो-बॉल भी चर्चा का बड़ा कारण बनी।

    जडेजा भले ही इस रिकॉर्ड को कभी याद नहीं रखना चाहेंगे लेकिन आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में नो-बॉल उनकी गेंदबाजी की एक बड़ी कमजोरी बन गई है। अब भारतीय टीम को उम्मीद होगी कि आगे के मुकाबलों में वह इस गलती पर नियंत्रण पाएंगे और अपनी शानदार गेंदबाजी से टीम को ज्यादा से ज्यादा सफलता दिलाएंगे।

  • भारत के सामने श्रीलंका की हालत पस्त! फॉलोऑन खेलते ही ढहा टॉप ऑर्डर, 6 विकेट लेकर जीत की ओर टीम इंडिया

    भारत के सामने श्रीलंका की हालत पस्त! फॉलोऑन खेलते ही ढहा टॉप ऑर्डर, 6 विकेट लेकर जीत की ओर टीम इंडिया


    नई दिल्ली। कोलंबो टेस्ट में भारतीय टीम ने मुकाबले पर अपनी पकड़ बेहद मजबूत कर ली है और अब श्रीलंका की हार लगभग सामने खड़ी नजर आ रही है। सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट के चौथे दिन बारिश ने खेल जरूर रोक दिया लेकिन उससे पहले भारतीय गेंदबाजों ने श्रीलंकाई बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। फॉलोऑन खेलने उतरी मेजबान टीम ने दिन का खेल खत्म होने तक दूसरी पारी में 6 विकेट गंवाकर 229 रन बना लिए हैं। श्रीलंका के पास अब भारत के खिलाफ सिर्फ 16 रन की बढ़त है और उसके चार विकेट बाकी हैं। ऐसे में पांचवें दिन भारतीय टीम की कोशिश श्रीलंका की पारी को जल्द से जल्द समेटकर जीत पर मुहर लगाने की होगी।

    इससे पहले भारत ने अपनी पहली पारी 503 रन पर 9 विकेट के नुकसान पर घोषित की थी। टीम इंडिया की शुरुआत बहुत अच्छी नहीं रही थी और 66 रन के भीतर केएल राहुल और यशस्वी जायसवाल के विकेट गिर गए थे। इसके बाद देवदत्त पड्डिकल और कप्तान शुभमन गिल ने पारी को संभाला और तीसरे विकेट के लिए 120 रन की शानदार साझेदारी की। गिल ने 50 रन बनाए जबकि पड्डिकल ने शानदार शतक लगाते हुए 117 रन की पारी खेली। उनकी पारी में 12 चौके शामिल रहे।

    पड्डिकल के बाद रवींद्र जडेजा के साथ उनकी 74 रन की साझेदारी ने भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। इसके बाद ऋषभ पंत ने चोट से उबरकर मैदान पर वापसी की और ध्रुव जुरेल के साथ मिलकर 112 रन जोड़े। पंत ने 63 रन बनाए जबकि जुरेल ने नाबाद 115 रन की शानदार पारी खेलकर भारत को 500 के पार पहुंचाया। जुरेल की पारी में 9 चौके और 2 छक्के शामिल रहे।

    भारत के विशाल स्कोर के जवाब में श्रीलंका की पहली पारी 290 रन पर सिमट गई। पसिंदु सूरियाबंदारा ने 80 रन और सोनल दिनुषा ने 103 रन बनाकर टीम को संभालने की कोशिश की लेकिन श्रीलंका फॉलोऑन बचाने के लिए जरूरी स्कोर से 14 रन दूर रह गया। भारत की ओर से प्रसिद्ध कृष्णा और मानव सुथार ने तीन तीन विकेट चटकाए जबकि सारांश जैन ने दो विकेट हासिल किए। भारत को पहली पारी में 213 रन की बड़ी बढ़त मिली जिसके बाद श्रीलंका को फॉलोऑन खेलने के लिए मजबूर होना पड़ा।

    दूसरी पारी में श्रीलंका ने शुरुआत में ही एक विकेट गंवा दिया लेकिन इसके बाद पसिंदु सूरियाबंदारा ने मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने कामिल मिशारा और कामिंदु मेंडिस के साथ महत्वपूर्ण साझेदारियां कीं। कामिंदु ने 55 रन बनाए जबकि पसिंदु 92 रन बनाकर आउट हुए। कप्तान धनंजय डी सिल्वा ने 23 रन जोड़े। हालांकि भारतीय गेंदबाज लगातार दबाव बनाए रहे और दूसरी पारी में भी श्रीलंका के छह विकेट गिर चुके हैं।

    अब मुकाबले का आखिरी दिन बेहद रोमांचक होने वाला है। श्रीलंका के पास केवल 16 रन की बढ़त है और चार विकेट शेष हैं। अगर भारतीय गेंदबाज शुरुआती सत्र में इन विकेटों को हासिल कर लेते हैं तो टीम इंडिया के सामने जीत के लिए बेहद छोटा लक्ष्य होगा। बारिश के कारण चौथे दिन खेल समय से पहले खत्म होने के बाद अब सभी की निगाहें पांचवें दिन पर टिकी हैं। भारत के पास जीत का सुनहरा मौका है और श्रीलंका के लिए अब मैच बचाना सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है।

  • कोलंबो टेस्ट में भारत का पलड़ा भारी, पडिक्कल ने जड़ा अर्धशतक तो गिल ने भी जमाया पचासा

    कोलंबो टेस्ट में भारत का पलड़ा भारी, पडिक्कल ने जड़ा अर्धशतक तो गिल ने भी जमाया पचासा


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो के सिंहली क्रिकेट क्लब स्टेडियम में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट के दूसरे सेशन में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन किया। टी-ब्रेक तक भारतीय टीम ने पहली पारी में तीन विकेट के नुकसान पर 187 रन बना लिए थे। देवदत्त पडिक्कल ने एक बार फिर शानदार बल्लेबाजी करते हुए अर्धशतक पूरा किया जबकि कप्तान शुभमन गिल ने भी बेहतरीन पारी खेलते हुए पचासा जड़ा। दोनों बल्लेबाजों के बीच हुई मजबूत साझेदारी ने भारत को शुरुआती झटकों से उबारकर मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया।

    पहले टेस्ट में शतक लगाने वाले देवदत्त पडिक्कल ने कोलंबो में भी अपनी शानदार फॉर्म जारी रखी। टी-ब्रेक तक वह 117 गेंदों में 63 रन बनाकर क्रीज पर टिके हुए थे। उनकी पारी में सात शानदार चौके शामिल रहे। पडिक्कल ने संयम के साथ बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंकाई गेंदबाजों का सामना किया और टीम को मुश्किल स्थिति से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।

    कप्तान शुभमन गिल ने भी शानदार बल्लेबाजी की और 108 गेंदों पर 50 रन बनाए। उन्होंने अपनी पारी में छह चौके लगाए। गिल और पडिक्कल ने तीसरे विकेट के लिए 209 गेंदों पर 120 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी की। इस साझेदारी ने भारतीय पारी को मजबूती दी और श्रीलंकाई गेंदबाजों पर दबाव बढ़ा दिया। हालांकि अर्धशतक पूरा करने के बाद गिल ज्यादा देर क्रीज पर नहीं टिक सके और असिथा फर्नांडो की गेंद पर विकेटकीपर निरोशन डिकवेला को कैच दे बैठे।

    भारत की शुरुआत हालांकि उम्मीद के मुताबिक नहीं रही थी। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी टीम इंडिया ने शुरुआती दौर में ही केएल राहुल का विकेट गंवा दिया। राहुल सिर्फ 18 रन बनाकर पवेलियन लौटे। इसके बाद यशस्वी जायसवाल ने तेज शुरुआत की और कई शानदार चौके लगाए लेकिन वह अपनी पारी को बड़ी पारी में नहीं बदल सके। जायसवाल 53 गेंदों पर 45 रन बनाकर असिथा फर्नांडो की गेंद पर क्लीन बोल्ड हो गए।

    इन शुरुआती झटकों के बाद गिल और पडिक्कल ने जिम्मेदारी संभाली। दोनों ने श्रीलंकाई गेंदबाजों के खिलाफ धैर्य से बल्लेबाजी की और लगातार रन बनाते हुए भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। टी-ब्रेक के समय ऋषभ पंत एक रन बनाकर पडिक्कल का साथ दे रहे थे। श्रीलंका की ओर से असिथा फर्नांडो अब तक दो विकेट ले चुके थे जबकि लाहिरू कुमारा को एक सफलता मिली।

    दूसरे टेस्ट के लिए भारतीय टीम में एक बदलाव किया गया है। कुलदीप यादव की जगह मध्य प्रदेश के ऑलराउंडर सारांश जैन को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया है। सारांश ने इसी मुकाबले से अपना टेस्ट डेब्यू किया। कप्तान गिल ने टॉस के समय बताया था कि कुलदीप संक्रमण के कारण चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे। सारांश अपनी ऑफ स्पिन गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में भी टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।

    वहीं श्रीलंका की टीम में भी एक खिलाड़ी ने टेस्ट डेब्यू किया है। कामिल मिशारा को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया है। भारतीय टीम दो मैचों की टेस्ट सीरीज में पहले ही 1-0 से आगे है। पहले टेस्ट में भारत ने श्रीलंका को 165 रनों से हराकर शानदार जीत दर्ज की थी। ऐसे में दूसरे टेस्ट में भी भारतीय टीम की नजर जीत के साथ सीरीज अपने नाम करने पर है।

  • कोलंबो टेस्ट में नहीं खेलेंगे कुलदीप यादव, BCCI ने किया साफ; MP के सारांश जैन को मिला डेब्यू का मौका

    कोलंबो टेस्ट में नहीं खेलेंगे कुलदीप यादव, BCCI ने किया साफ; MP के सारांश जैन को मिला डेब्यू का मौका


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो के सिंहली स्पोर्ट्स क्लब में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट से पहले भारतीय टीम को बड़ा झटका लगा है। स्टार स्पिनर कुलदीप यादव इस मुकाबले में भारतीय प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं हैं। टॉस जीतकर भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया और इसके बाद टीम की अंतिम एकादश सामने आई तो उसमें कुलदीप यादव का नाम नहीं था। इसके बाद उनके बाहर रहने को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने बताया कि कुलदीप अभी वायरल बीमारी से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं और इसी वजह से वह इस मुकाबले के लिए चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे।

    बीसीसीआई ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि कुलदीप यादव वायरल बीमारी से पूरी तरह ठीक नहीं हुए हैं। इसी कारण उन्हें श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट की प्लेइंग इलेवन में शामिल नहीं किया गया है। हालांकि जरूरत पड़ने पर वह कन्कशन सब्स्टीट्यूट के तौर पर मैदान पर उतर सकते हैं। यानी टीम में उनकी मौजूदगी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है लेकिन सामान्य परिस्थितियों में वह इस टेस्ट में गेंदबाजी या बल्लेबाजी करते नजर नहीं आएंगे।

    कप्तान शुभमन गिल ने भी टॉस के दौरान कुलदीप की स्थिति को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दुर्भाग्य से कुलदीप को इन्फेक्शन हो गया है और इसी कारण वह इस मुकाबले का हिस्सा नहीं हैं। कुलदीप का बाहर होना भारतीय टीम के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि वह टीम के प्रमुख स्पिन विकल्पों में शामिल हैं और टेस्ट क्रिकेट में अपनी विविधतापूर्ण गेंदबाजी से बल्लेबाजों के लिए लगातार परेशानी खड़ी करते रहे हैं।

    कुलदीप यादव इससे पहले गाले में खेले गए पहले टेस्ट का हिस्सा थे। हालांकि उस मुकाबले में उनका प्रदर्शन अपेक्षा के मुताबिक प्रभावी नहीं रहा और उन्हें केवल एक विकेट मिला था। दूसरे टेस्ट से पहले यह चर्चा थी कि टीम मैनेजमेंट उन्हें आराम देकर किसी दूसरे स्पिन विकल्प को मौका दे सकता है। लेकिन अब बीसीसीआई ने स्पष्ट कर दिया है कि कुलदीप के बाहर रहने की मुख्य वजह उनकी बीमारी है।

    कुलदीप की अनुपस्थिति में भारतीय टीम ने मध्यप्रदेश के अनुभवी ऑलराउंडर सारांश जैन को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया है। यह सारांश के अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला मुकाबला है। 33 वर्षीय सारांश लंबे समय से घरेलू क्रिकेट में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं और मध्यप्रदेश की टीम के लिए उनके प्रदर्शन को काफी महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। उन्होंने टीम को रणजी ट्रॉफी का पहला खिताब दिलाने के सफर में भी अहम भूमिका निभाई थी।

    सारांश जैन बाएं हाथ से बल्लेबाजी करते हैं और दाएं हाथ से ऑफ स्पिन गेंदबाजी करते हैं। ऐसे में भारतीय टीम को उनसे बल्ले और गेंद दोनों से उपयोगी योगदान की उम्मीद होगी। कुलदीप की गैरमौजूदगी में सारांश के पास खुद को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मंच पर साबित करने का बड़ा मौका है। कोलंबो की परिस्थितियों में उनकी ऑफ स्पिन भारतीय टीम के लिए कितनी उपयोगी साबित होती है और डेब्यू मैच में वह कैसा प्रदर्शन करते हैं इस पर क्रिकेट प्रशंसकों की नजर रहेगी।

  • कोलंबो में नहीं चलेगी श्रीलंका की स्पिन वाली चाल? टीम इंडिया को फंसाने का दांव पड़ सकता है उल्टा, पिच पर बड़ा अपडेट

    कोलंबो में नहीं चलेगी श्रीलंका की स्पिन वाली चाल? टीम इंडिया को फंसाने का दांव पड़ सकता है उल्टा, पिच पर बड़ा अपडेट


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का दूसरा मुकाबला 23 अगस्त से कोलंबो के सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब यानी एसएससी मैदान पर खेला जाएगा। शुभमन गिल की कप्तानी वाली भारतीय टीम गॉल में पहला टेस्ट 165 रन से जीतकर सीरीज में 1-0 की बढ़त बना चुकी है। अब भारत के पास कोलंबो में जीत हासिल कर सीरीज अपने नाम करने का मौका है। दूसरी तरफ श्रीलंका के लिए यह मुकाबला बेहद अहम है क्योंकि सीरीज बराबर करने के लिए उसे हर हाल में जीत दर्ज करनी होगी।

    मुकाबले से पहले सबसे ज्यादा चर्चा कोलंबो की पिच को लेकर हो रही है। माना जा रहा था कि श्रीलंका भारत के मजबूत बल्लेबाजी क्रम को परेशान करने के लिए बेहद ज्यादा स्पिन वाली पिच तैयार कर सकता है। हालांकि ताजा रिपोर्टों के मुताबिक मेजबान टीम इस रणनीति से पीछे हटती दिखाई दे रही है। श्रीलंका क्रिकेट से जुड़े एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि फिलहाल गॉल टेस्ट जैसी संतुलित पिच तैयार करने के बारे में सोचा जा रहा है। ऐसी पिच पर बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों को पर्याप्त मदद मिलने की उम्मीद रहती है।

    श्रीलंका के लिए सबसे बड़ी चिंता उसका कमजोर बल्लेबाजी क्रम है। अनुभवी बल्लेबाज कुसल मेंडिस और दिनेश चांदीमल दूसरे टेस्ट से बाहर हैं जबकि पथुम निसांका भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में अगर पिच को जरूरत से ज्यादा स्पिन के अनुकूल बनाया जाता है तो इसका नुकसान श्रीलंकाई बल्लेबाजों को भी उठाना पड़ सकता है। टीम पहले ही भारत के स्पिन आक्रमण के सामने दबाव में रही है और युवा बल्लेबाजों को कठिन परिस्थितियों में उतारना जोखिम भरा फैसला साबित हो सकता है।

    गॉल में खेले गए पहले टेस्ट में भारत ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया था। देवदत्त पडिक्कल ने पहली पारी में 167 रन की बड़ी पारी खेली जबकि भारत ने 460 रन से ज्यादा का स्कोर खड़ा किया। श्रीलंका के स्पिनरों ने मुकाबले में वापसी की कोशिश जरूर की लेकिन भारतीय बल्लेबाजी की गहराई ने मेजबान टीम को दबाव में बनाए रखा। भारत ने अंत में 165 रन से मुकाबला अपने नाम किया।

    कोलंबो में संतुलित पिच होने की स्थिति में टॉस और पहली पारी का स्कोर काफी महत्वपूर्ण हो सकता है। एसएससी मैदान का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताता है कि यहां पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम को बड़े स्कोर के जरिए दबाव बनाने का मौका मिल सकता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस मैदान पर टेस्ट में पहली पारी का औसत स्कोर 323 रन रहा है जबकि दूसरी पारी का औसत 354 रन है।

    श्रीलंका के लिए एक और चुनौती टीम संयोजन की है। पूर्व श्रीलंकाई क्रिकेटर रसेल अर्नोल्ड ने भी माना है कि मेजबान टीम भारत की तरह तीन विशेषज्ञ स्पिनरों के साथ उतरने की स्थिति में नहीं है क्योंकि इससे बल्लेबाजी का संतुलन बिगड़ सकता है। भारत के पास रविंद्र जडेजा जैसे खिलाड़ी हैं जो गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में भी मजबूत योगदान दे सकते हैं। इसी कारण श्रीलंका को पिच और प्लेइंग इलेवन दोनों में संतुलन साधना होगा।

    ऐसे में कोलंबो टेस्ट में असली मुकाबला सिर्फ भारतीय बल्लेबाजों और श्रीलंकाई स्पिनरों के बीच नहीं होगा बल्कि रणनीति और टीम संतुलन के बीच भी होगा। अगर श्रीलंका बहुत ज्यादा टर्न वाली पिच तैयार करता है तो उसके अनुभवहीन बल्लेबाज खुद मुश्किल में पड़ सकते हैं। वहीं संतुलित विकेट मिलने पर भारत की मजबूत बल्लेबाजी को रोकना उसके लिए बड़ी चुनौती होगी। इसलिए पिच का अंतिम मिजाज दोनों टीमों की रणनीति और मैच के नतीजे पर बड़ा असर डाल सकता है।