Tag: comment

  • ‘केरल स्टोरी-2’ पर राहुल गांधी की टिप्पणी, बोले- ज्यादा लोग नहीं देख रहे, यह अच्छी बात

    ‘केरल स्टोरी-2’ पर राहुल गांधी की टिप्पणी, बोले- ज्यादा लोग नहीं देख रहे, यह अच्छी बात


    नई दिल्ली। राहुल गांधी ने फिल्म The Kerala Story 2 को लेकर बड़ा बयान दिया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह फिल्म ज्यादा लोग नहीं देख रहे हैं और उनके मुताबिक यह “अच्छी खबर” है।

    लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने यह बात Marian College Kuttikkanam में छात्रों से बातचीत के दौरान कही।

    चर्चा के दौरान एक छात्र ने फिल्मों को प्रचार के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किए जाने को लेकर सवाल पूछा था, जिसके जवाब में राहुल गांधी ने अपनी राय रखी।

    ‘फिल्म खाली-खाली लग रही है’

    राहुल गांधी ने कहा कि अच्छी बात यह है कि केरल स्टोरी-2 को लेकर दर्शकों में खास रुचि दिखाई नहीं दे रही है। उनके मुताबिक यह दिखाता है कि कुछ लोग केरल की परंपराओं और संस्कृति को ठीक से समझ नहीं पाए हैं।

    उन्होंने कहा कि आज के समय में फिल्म, टेलीविजन और मीडिया को एक तरह से “हथियार” की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। राहुल के अनुसार इन माध्यमों का उपयोग लोगों को बदनाम करने, समाज में विभाजन पैदा करने और कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।

    शौक और निजी जीवन पर भी की बात

    छात्रों के सवालों के जवाब में राहुल गांधी ने अपने निजी शौकों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्हें पढ़ना पसंद है और वे जिन विषयों में रुचि रखते हैं, उन पर काफी अध्ययन करते हैं।

    राहुल गांधी ने कहा कि वे बहुत ज्यादा फिल्में नहीं देखते, लेकिन शतरंज खेलना, मार्शल आर्ट्स करना, तैराकी और दौड़ना उन्हें पसंद है और फिट रहने के लिए नियमित व्यायाम भी करते हैं।

    केरल से बहुत कुछ सीखा

    राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने करीब पांच साल तक संसद में वायनाड का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन फिर भी केरल को पूरी तरह समझ पाना आसान नहीं है। हालांकि वहां के लोगों से उन्होंने बहुत कुछ सीखा।

    उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब वे पहली बार वहां पहुंचे थे, तब एक बड़ी भूस्खलन त्रासदी हुई थी। उस समय लोगों ने जिस तरह एक-दूसरे की मदद की, उससे वे काफी प्रभावित हुए।

    राहुल के अनुसार केरल की परंपराएं और सामाजिक मूल्य बेहद मजबूत हैं।

    शिक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

    राहुल गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि कई विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति किसी खास विचारधारा के आधार पर की जा रही है। उनके मुताबिक शिक्षा को किसी एक विचारधारा तक सीमित नहीं होना चाहिए।

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत अभी संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के स्तर तक नहीं पहुंचा है। उन्होंने कहा कि अगर भारत को एआई क्षेत्र में आगे बढ़ना है तो देश को अपने डेटा पर मजबूत नियंत्रण रखना होगा।
    ……….

  • वोटिंग अनिवार्य बनाने पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, NOTA की उपयोगिता पर जताई शंका

    वोटिंग अनिवार्य बनाने पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, NOTA की उपयोगिता पर जताई शंका


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट ने मतदान को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए अधिक से अधिक नागरिकों का मतदान केंद्र तक पहुंचना जरूरी है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वोटिंग को अनिवार्य बनाने जैसे उपायों पर विचार किया जा सकता है, ताकि लोग अपने मताधिकार का सक्रिय रूप से इस्तेमाल करें।

    यह टिप्पणी उस जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें मांग की गई है कि यदि किसी निर्वाचन क्षेत्र में केवल एक उम्मीदवार ही मैदान में हो, तब भी उसे निर्विरोध विजयी घोषित करने के बजाय चुनाव कराया जाए, ताकि मतदाता “इनमें से कोई नहीं” (NOTA) का विकल्प चुन सकें।


    अदालत ने पूछा—क्या NOTA से बदली है स्थिति?

    सुनवाई के दौरान पीठ ने यह सवाल उठाया कि NOTA लागू होने के बाद क्या वास्तव में:

    • मतदान प्रतिशत में वृद्धि हुई है?

    • उम्मीदवारों की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला है?

    अदालत ने कहा कि कभी-कभी ऐसा लगता है कि कोई प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए—बहुत कठोर नहीं, लेकिन ऐसी कि नागरिक मतदान के लिए प्रेरित हों।


    ग्रामीण बनाम शहरी मतदान पर भी चर्चा

    सुनवाई के दौरान यह भी उल्लेख किया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान को अक्सर एक उत्सव की तरह देखा जाता है। लोग समूह में मतदान करने जाते हैं, जबकि अनुभव बताता है कि शिक्षित और आर्थिक रूप से संपन्न वर्ग कई बार मतदान में अपेक्षाकृत कम भागीदारी करता है।


    किस प्रावधान को दी गई है चुनौती?

    याचिका में जनप्रतिनिधित्व कानून की उस धारा को चुनौती दी गई है, जिसके तहत यदि चुनाव मैदान में केवल एक उम्मीदवार रह जाता है, तो उसे बिना मतदान के निर्वाचित घोषित किया जा सकता है।

    याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस स्थिति में मतदाताओं को NOTA का विकल्प प्रयोग करने का अवसर ही नहीं मिलता, जिससे लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति सीमित हो जाती है।


    याचिकाकर्ताओं का पक्ष

    याचिका में कहा गया कि यदि NOTA के परिणामों को वास्तविक प्रभाव दिया जाए, तो अधिक मतदाता मतदान के लिए प्रेरित होंगे। वर्तमान व्यवस्था में NOTA चुनने का कोई प्रत्यक्ष परिणाम नहीं निकलता, जिससे मतदाताओं का उत्साह कम होता है।


    व्यापक बहस की शुरुआत

    अदालत की इन टिप्पणियों ने अनिवार्य मतदान, मतदाता सहभागिता और NOTA की प्रभावशीलता जैसे मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है। मामला अभी विचाराधीन है और आगे की सुनवाई में इस पर विस्तृत कानूनी विमर्श होने की संभावना है।

  • इकरा हसन को तीन तलाक-हलाला से बचना है तो…, एक और हिंदूवादी नेता की टिप्पणी, वीडियो वायरल

    इकरा हसन को तीन तलाक-हलाला से बचना है तो…, एक और हिंदूवादी नेता की टिप्पणी, वीडियो वायरल


    नई दिल्ली । समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन को लेकर एक और हिंदूवादी नेता ने अभद्र टिप्पणी की है। शामली के गांव कंडेला में आयोजित हिंदू सम्मेलन के दौरान 31 जनवरी को की गई टिप्पणी का वीडियो अब वायरल हो रहा है। वीडियो में स्वामी राम विशाल दास महाराज मंच से इकरा हसन को तीन तलाक और हलाल से बचने के तरीके बता रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद से इकरा के समर्थकों में भारी नाराजगी है। इसे नारी शक्ति का अपमान और चुनावी सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करार दिया गया है। इससे पहले करणी सेना के उपाध्यक्ष योगेंद्र राणा ने इसी तरह से अमर्यादित टिप्पणी इकरा हसन पर की थी।
    सोशल मीडिया पर जो 51 सेकंड का वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें स्वामी राम विशाल दास महाराज सांसद इकरा हसन के चुनाव प्रचार के तरीकों पर कटाक्ष करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में वह कह रहे हैं कि इकरा हसन ने चुनाव के दौरान गुर्जर बाहुल्य क्षेत्रों में खुद को ‘गुर्जर की बेटी’ बताया था और इसी आधार पर वोट मांगे थे। इसके तुरंत बाद उन्होंने कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग किया जिन्हें सांसद के समर्थकों ने ‘अत्यंत अमर्यादित’ और ‘महिला विरोधी’ बताया है।
    समर्थकों में उबाल, कार्रवाई की मांग
    वीडियो वायरल होने के बाद कैराना और शामली के विभिन्न हिस्सों में इकरा हसन के समर्थकों ने कड़ी नाराजगी जताई है। समर्थकों का कहना है कि इकरा हसन एक सम्मानित जनप्रतिनिधि हैं और उनके खिलाफ इस तरह की भाषा का प्रयोग न केवल अशोभनीय है, बल्कि यह क्षेत्र की गंगा-जमुनी तहजीब पर भी प्रहार है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि चुनाव के दौरान इकरा हसन को जिस तरह सर्वसमाज विशेषकर मुस्लिम और गुर्जर गठबंधन का समर्थन मिला था, यह टिप्पणी उसी भाईचारे को निशाना बनाने के लिए की गई है। सोशल मीडिया पर लोग पुलिस प्रशासन से इस मामले का संज्ञान लेने और धार्मिक भावनाओं के साथ-साथ किसी व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचाने के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

    हालांकि इस मामले को लेकर अब तक पुलिस में किसी औपचारिक लिखित शिकायत की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन खुफिया विभाग और स्थानीय पुलिस सोशल मीडिया की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की गई है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पश्चिमी यूपी में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। अब देखना यह होगा कि सांसद इकरा हसन या उनका दल इस पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है और पुलिस इस वायरल वीडियो की सत्यता की जांच के बाद क्या कदम उठाती है।

  • ‘बुर्के वाली PM बनी तो जय श्री राम भी नहीं बोल पाएंगे’, ओवैसी के बयान पर नितेश राणे भड़के

    ‘बुर्के वाली PM बनी तो जय श्री राम भी नहीं बोल पाएंगे’, ओवैसी के बयान पर नितेश राणे भड़के


    नई दिल्ली| AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी के बयान को लेकर लगातार राजनीति हो रही है। इस मुद्दे पर अब भाजपा नेता नितेश राणे का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई बुर्के वाली कल प्रधानमंत्री बन जाती है, कल ही हिंदू समाज का धर्मांतरण कर दिया जाएगा हम कल से ही जय श्री राम भी नहीं बोल पाएंगे, आई लव महादेव के पोस्टर नहीं लगा पाएंगे। महाराष्ट्र के मंत्री ने कहा कि ओवैसी हिजाबी महिला प्रधानमंत्री बनाने की बात करके इस देश को इस्लामिक देश बनाने की धमकी देने की कोशिश कर रहे हैं।

    मीडिया से बात करते हुए नितेश राणे ने कहा, “भौंकने वाले, कभी काटते नहीं है। देश को इस्लामी राज्य में बदलने का प्रयास बुर्का पहने प्रधानमंत्री की धमकी से शुरू होता है। ओवैसी हमें यह कहकर डराने की कोशिश कर रहे हैं कि अगर कल कोई बुर्का पहनी महिला प्रधानमंत्री बन जाती है, तो सभी को जबरन धर्म परिवर्तन कराया जाएगा और यह हिंदू राष्ट्र इस्लामी राज्य में बदल जाएगा। इसका मतलब है कि हम अपने घरों में पूजा भी नहीं कर पाएंगे, हम ‘जय श्री राम’ नहीं कह पाएंगे और हम ‘आई लव महादेव’ के बैनर भी नहीं लगा पाएंगे।” नितेश ने कहा, “यह धमकी देने वाले लोगों को महाराष्ट्र में खड़े रहने देना है या नहीं, यह हमें देखना होगा।”

    आपको बता दें, हैदराबाद के सांसद ने महाराष्ट्र में एक रैली के दौरान कहा था कि वह चाहते हैं कि किसी दिन एक हिजाबी महिला भारत की प्रधानमंत्री बने। पाकिस्तान में उन्होंने अपने संविधान में लिख दिया कि एक मुस्लिम ही प्रधानमंत्री बन सकता है, लेकिन बाबा साहेब आंबेडकर के संविधान में लिखा है कि भारत का कोई भी नागरिक प्रधानमंत्री बन सकता है। उनके इस बयान के बाद काफी राजनैतिक बयानबाजी हुई।

    भाजपा की तरफ से राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि ओवैसी ऐसा ही चाहते हैं, तो सबसे पहले उन्हें अपनी पार्टी से ही इसकी शुरुआत करनी चाहिए। उन्हें अपनी पार्टी के अध्यक्ष पद पर किसी महिला को बैठाना चाहिए। दूसरी तरफ कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने ओवैसी के इस बयान को दिन में तारे देखने जैसा बताया। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि संविधान सभी को प्रधानमंत्री पद तक जाने की अनुमति देता है, लेकिन हमारा देश हिंदू प्रधान है, ऐसे में हिंदू को ही प्रधानमंत्री बनना चाहिए।