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  • रिकॉर्ड 863.1 अरब डॉलर के निर्यात में एफटीए बने गेमचेंजर, नए वैश्विक बाजारों तक भारत की पहुंच मजबूत

    रिकॉर्ड 863.1 अरब डॉलर के निर्यात में एफटीए बने गेमचेंजर, नए वैश्विक बाजारों तक भारत की पहुंच मजबूत

    नई दिल्ली । भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 863.1 अरब डॉलर का अब तक का सर्वाधिक निर्यात दर्ज कर नया रिकॉर्ड बनाया है। सरकार ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि इस उपलब्धि में विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन समझौतों के माध्यम से भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच मिली, शुल्क रियायतों का लाभ बढ़ा और श्रम-प्रधान उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा हुए। सरकार का कहना है कि एफटीए की बदौलत भारतीय उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत हुई है और निर्यात के नए क्षेत्रों में विस्तार संभव हुआ है।

    लोकसभा में लिखित उत्तर देते हुए वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में वस्तु निर्यात (मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट) 441.8 अरब डॉलर रहा, जबकि सेवा क्षेत्र का निर्यात बढ़कर 421.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया। दोनों क्षेत्रों के संयुक्त प्रदर्शन से देश का कुल निर्यात 863.1 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। उन्होंने कहा कि सरकार व्यापार समझौतों के तहत मिलने वाली शुल्क रियायतों के उपयोग की लगातार निगरानी कर रही है, ताकि भारतीय निर्यातकों को इनका अधिकतम लाभ मिल सके।

    सरकार के अनुसार भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) लागू होने के बाद अब तक 4.45 लाख सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए जा चुके हैं। इससे स्पष्ट होता है कि भारतीय निर्यातकों ने शुल्क रियायतों का व्यापक रूप से उपयोग किया है। यूएई को निर्यात होने वाली एचएस 8-डिजिट टैरिफ लाइनों की संख्या भी वित्त वर्ष 2021-22 के 7,546 से बढ़कर 2025-26 में 8,053 हो गई। इन टैरिफ लाइनों के तहत 37.3 अरब डॉलर का निर्यात दर्ज किया गया, जो भारतीय उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग का संकेत माना जा रहा है।

    भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ईसीटीए) के तहत भी भारतीय निर्यातकों को उल्लेखनीय लाभ मिला है। समझौते के बाद अब तक 2.73 लाख सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए गए हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया को निर्यात होने वाली टैरिफ लाइनों की संख्या बढ़कर 5,668 हो गई है, जिनके माध्यम से 7.2 अरब डॉलर का निर्यात हुआ। इसी प्रकार भारत-मॉरीशस व्यापक आर्थिक सहयोग एवं साझेदारी समझौते (सीईसीपीए) के तहत भी टैरिफ लाइनों और निर्यात मूल्य दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे भारतीय उत्पादों की पहुंच नए क्षेत्रों तक विस्तारित हुई है।

    सरकार ने बताया कि भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के तहत भारत के 99.38 प्रतिशत निर्यात को शुल्क मुक्त पहुंच प्राप्त हुई है। समझौता लागू होने के बाद ओमान को निर्यात में तेज वृद्धि देखने को मिली है। जून 2026 में ओमान को 622.8 मिलियन डॉलर का निर्यात दर्ज किया गया, जो मई 2026 की तुलना में 54.7 प्रतिशत और जून 2025 की तुलना में 189.6 प्रतिशत अधिक रहा। इसके अलावा यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के साथ लागू समझौते के बाद भी हजारों सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए जा चुके हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों को शुल्क रियायतों का व्यापक लाभ मिला है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में किए गए एफटीए में टेक्सटाइल, चमड़ा और अन्य श्रम-प्रधान उद्योगों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड और ईएफटीए जैसे साझेदार देशों के साथ हुए समझौतों ने भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजारों के द्वार खोले हैं। सरकार का कहना है कि इन समझौतों में घरेलू उद्योगों के हितों की सुरक्षा के साथ संतुलित रणनीति अपनाई गई है, जिससे निर्यात बढ़ाने के साथ-साथ देश के औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को भी नई गति मिली है।

  • ट्रेड डील लगभग तय, पीयूष गोयल ने बताया बातचीत का सबसे अनोखा अनुभव; भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मिलेगा बड़ा लाभ

    ट्रेड डील लगभग तय, पीयूष गोयल ने बताया बातचीत का सबसे अनोखा अनुभव; भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मिलेगा बड़ा लाभ


    नई दिल्ली ।
    भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार समझौते की बातचीत अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और अब केवल कुछ अंतिम बिंदुओं पर चर्चा शेष है। उनका कहना है कि यह समझौता दोनों देशों के लिए संतुलित और पारस्परिक हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।

    पीयूष गोयल ने बातचीत के दौरान सामने आई सबसे बड़ी व्यावहारिक चुनौती का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पूरी वार्ता के दौरान सबसे अधिक परेशानी दोनों देशों के बीच समय के अंतर के कारण हुई। दिल्ली और वॉशिंगटन के अलग-अलग टाइम ज़ोन के चलते कई दौर की बैठकें देर रात तक चलीं, जिससे अधिकारियों और वार्ता टीमों को अपने कार्य समय में लगातार बदलाव करना पड़ा। हालांकि उन्होंने इसे तकनीकी चुनौती बताया और कहा कि इससे बातचीत की सकारात्मक गति प्रभावित नहीं हुई।

    उन्होंने कहा कि दोनों देशों की वार्ता टीमों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग का माहौल रहा। बातचीत के दौरान किसी बड़े मतभेद के बजाय अधिकांश मुद्दों पर रचनात्मक चर्चा हुई और समाधान निकालने का प्रयास किया गया। उनके अनुसार दोनों पक्षों ने समझौते को व्यावहारिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाया है।

    केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि प्रस्तावित व्यापार समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर लेकर आएगा। उनका कहना है कि अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी। इससे कई क्षेत्रों के उद्योगों को लाभ मिलने की संभावना है और भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में बेहतर अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापारिक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति को भी मजबूत करेगा। उनके अनुसार भारत को ऐसे कई क्षेत्रों में लाभ मिल सकता है, जहां अन्य प्रतिस्पर्धी देशों के साथ मुकाबला अधिक चुनौतीपूर्ण रहा है। इससे निवेश, निर्यात और औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

    दोनों देशों के बीच पिछले कई महीनों से व्यापार से जुड़े विभिन्न विषयों पर लगातार बातचीत जारी है। इस दौरान बाजार पहुंच, शुल्क व्यवस्था, निवेश, आपूर्ति श्रृंखला और व्यापारिक सहयोग जैसे अनेक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई है। अब अधिकांश विषयों पर सहमति बनने के बाद अंतिम चरण की बातचीत पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता तय समय के अनुसार अंतिम रूप लेता है, तो इससे भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के नए अवसर भी विकसित होंगे। फिलहाल दोनों पक्ष शेष बिंदुओं पर सहमति बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं और जल्द ही समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।