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  • नवंबर की शुरुआत में महंगा हुआ कमर्शियल LPG सिलेंडर, दिल्ली से चेन्नई तक बढ़े नए दाम..

    नवंबर की शुरुआत में महंगा हुआ कमर्शियल LPG सिलेंडर, दिल्ली से चेन्नई तक बढ़े नए दाम..


    नई दिल्ली ।
    नवंबर महीने के पहले दिन आम लोगों और कारोबारियों से जुड़ी ईंधन की कीमतों में बदलाव किया गया है। तेल कंपनियों ने 1 नवंबर 2026 से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर के नए रेट लागू कर दिए हैं। इस बार विभिन्न शहरों में इसकी कीमतों में अलग-अलग बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर 10 रुपये महंगा होकर 2,820 रुपये का हो गया है। इससे पहले इसकी कीमत 2,810 रुपये थी। हालांकि, घरेलू रसोई गैस इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली हुई है और 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

    कमर्शियल गैस सिलेंडर का इस्तेमाल मुख्य रूप से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में किया जाता है। ऐसे में इसकी कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर इन कारोबारों के संचालन खर्च पर पड़ सकता है। नवंबर की शुरुआत में हुई यह वृद्धि अलग-अलग शहरों में अलग स्तर पर दर्ज की गई है। प्रमुख महानगरों में चेन्नई में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है।

    चेन्नई में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत 2,983 रुपये से बढ़कर 2,994.50 रुपये हो गई है। यहां प्रति सिलेंडर 11.50 रुपये की वृद्धि की गई है। मुंबई में इसकी नई कीमत 2,764 रुपये निर्धारित की गई है। वहीं, अहमदाबाद में कमर्शियल सिलेंडर का दाम 2,831.50 रुपये से बढ़कर 2,842 रुपये पहुंच गया है। इन बदलावों के बाद संबंधित शहरों के व्यावसायिक उपभोक्ताओं को सिलेंडर खरीदने के लिए पहले से अधिक भुगतान करना होगा।

    दूसरी ओर घरेलू रसोई गैस की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू LPG सिलेंडर पहले की तरह 942 रुपये में उपलब्ध है। मुंबई में इसकी कीमत 941.50 रुपये और चेन्नई में 957.50 रुपये बनी हुई है। अहमदाबाद में घरेलू गैस सिलेंडर का भाव 949 रुपये पर स्थिर रखा गया है। इस तरह कमर्शियल गैस के दाम बढ़ने के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं के मासिक रसोई खर्च पर फिलहाल कीमतों में बदलाव का अतिरिक्त असर नहीं पड़ेगा।

    कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में लगातार दूसरे महीने बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे पहले 1 अक्टूबर 2026 को भी दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर के दाम में 62.50 रुपये का इजाफा किया गया था। उस समय भी घरेलू रसोई गैस की कीमतों को स्थिर रखा गया था। अब नवंबर में दोबारा कीमत बढ़ने से होटल, रेस्टोरेंट और खानपान से जुड़े दूसरे व्यवसायों के सामने ईंधन पर अधिक खर्च करने की स्थिति बन सकती है।

    LPG के साथ ही 1 नवंबर से हवाई ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में भी वृद्धि हुई है। दिल्ली में ATF का भाव 137.12 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 138.50 रुपये प्रति लीटर हो गया है। यह करीब एक प्रतिशत की बढ़ोतरी है। इससे पहले अक्टूबर में हवाई ईंधन की कीमतों में 13.22 प्रतिशत यानी लगभग 16 रुपये प्रति लीटर का बड़ा इजाफा हुआ था। नवंबर में हुई वृद्धि के साथ ATF लगातार चौथे महीने महंगा हुआ है।

    हवाई ईंधन एयरलाइंस कंपनियों के संचालन खर्च का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। कुल ऑपरेटिंग लागत में इसकी हिस्सेदारी लगभग 35 से 40 प्रतिशत बताई जाती है। ऐसे में ATF की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से विमानन कंपनियों का खर्च बढ़ सकता है। इसका असर भविष्य में हवाई टिकटों की कीमतों पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल नवंबर की शुरुआत में कमर्शियल गैस और हवाई ईंधन महंगे हुए हैं, जबकि घरेलू रसोई गैस के उपभोक्ताओं को कीमतों में बदलाव से राहत मिली हुई है।

  • भोपाल के रहवासी इलाकों में कारोबार पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टली, 62,500 प्रतिष्ठानों पर फैसले का इंतजार

    भोपाल के रहवासी इलाकों में कारोबार पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टली, 62,500 प्रतिष्ठानों पर फैसले का इंतजार

    भोपाल । शहर के रहवासी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई टल गई। जस्टिस के अवकाश पर होने के कारण अब इस मामले की सुनवाई बाद में होगी। फिलहाल नई तारीख तय नहीं हुई है।

    इस सुनवाई में भोपाल के रहवासी क्षेत्रों में चल रहे करीब 62,500 प्रतिष्ठानों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला आने की उम्मीद थी। इसी मामले में मंगलवार, 15 सितंबर को सुनवाई तय थी। नगर निगम को अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश करनी थी। अब सुनवाई टलने के बाद अगली तारीख का इंतजार है।

    इस मामले में भोपाल नगर निगम अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश कर चुका है। वहीं, रहवासी पक्ष ने निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अपने दस्तावेज कोर्ट में पेश किए हैं।

    याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी का आरोप है कि निगम ने कार्रवाई को लेकर जो रिपोर्ट पेश की है, उसमें कई बातें सही नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि जिन प्रतिष्ठानों को सील किया गया था, उनमें से कई दोबारा खुल गए हैं। रहवासी पक्ष ने निगम की कार्रवाई को लेकर कोर्ट के सामने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

    दरअसल, 5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भोपाल नगर निगम ने आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। करीब 15 दिनों तक नोटिस देने का अभियान चला।

    इस दौरान सूची में शामिल करीब 62,500 प्रतिष्ठानों में से 8,084 को नोटिस दिए गए। इसके बाद निगम ने 3 दिनों तक कार्रवाई करते हुए करीब 190 प्रतिष्ठानों को बंद किया था। हालांकि, व्यापारियों के विरोध के बाद कार्रवाई रोक दी गई।

    निगम की नोटिस और सीलिंग कार्रवाई के विरोध में व्यापारी सड़क पर उतर आए थे। व्यापारियों के विरोध के बाद निगम ने कार्रवाई रोक दी। पिछले करीब 15 दिनों से इस मामले में कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। दूसरी ओर, रहवासी निगम के जिम्मेदार अधिकारियों पर पक्षपात का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों से स्थानीय लोगों को लगातार परेशानी हो रही है।

    भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक इस्तेमाल और अवैध निर्माण को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है। अगस्त के पहले सप्ताह में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार की ओर से बनाई गई 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।

    कोर्ट ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ओर से दुकान संचालकों को दिए गए राहत और स्टे ऑर्डर भी निरस्त कर दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    रहवासियों की मांग है कि आवासीय इलाकों में कमर्शियल गतिविधियां बंद की जाएं। दुकानों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाले शोर और भीड़ को रोका जाए। बढ़ते ट्रैफिक और व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाली सार्वजनिक परेशानी को कम किया जाए। रहवासी क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बेहतर करने के साथ स्कूली बच्चों की सुरक्षा का भी ध्यान रखने की मांग की गई है। साथ ही नियमों के खिलाफ चल रहे प्रतिष्ठानों पर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग है।

    अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर है। नई तारीख तय होने के बाद 62,500 प्रतिष्ठानों और भोपाल के रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर आगे की स्थिति साफ हो सकेगी।

  • मुंबई में ऋतिक रोशन का बड़ा रियल एस्टेट दांव, ₹17 लाख मासिक किराए पर दिया कमर्शियल ऑफिस

    मुंबई में ऋतिक रोशन का बड़ा रियल एस्टेट दांव, ₹17 लाख मासिक किराए पर दिया कमर्शियल ऑफिस

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन ने अपनी कमर्शियल रियल एस्टेट निवेश रणनीति को आगे बढ़ाते हुए मुंबई के अंधेरी पश्चिम स्थित अपने एक बड़े ऑफिस स्पेस को पांच वर्ष की अवधि के लिए किराए पर दे दिया है। इस लीज समझौते के तहत शुरुआती तीन वर्षों के लिए मासिक किराया 17 लाख रुपये तय किया गया है, जबकि बाद के दो वर्षों में यह बढ़कर 19.55 लाख रुपये प्रति माह हो जाएगा। इस सौदे ने एक बार फिर फिल्मी हस्तियों के बीच कमर्शियल प्रॉपर्टी निवेश की बढ़ती प्रवृत्ति को चर्चा में ला दिया है।

    यह ऑफिस स्पेस अंधेरी पश्चिम के न्यू लिंक रोड स्थित एक बिजनेस पार्क में मौजूद है। लगभग 6,000 वर्गफुट में फैली यह संपत्ति सात अलग-अलग यूनिट्स में विभाजित है और इसके साथ सात कार पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध है। लीज समझौते के तहत किराएदार ने 68 लाख रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट भी जमा कराई है। यह अनुबंध 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी माना गया है और 31 मार्च 2031 तक जारी रहेगा।

    समझौते के अनुसार पहले तीन वर्षों तक किराया 17 लाख रुपये प्रतिमाह रहेगा। इसके बाद शेष दो वर्षों के लिए किराया बढ़ाकर 19.55 लाख रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया गया है। इस तरह यह सौदा लंबी अवधि की स्थिर आय सुनिश्चित करने वाली कमर्शियल लीज का उदाहरण माना जा रहा है।

    पिछले कुछ वर्षों में ऋतिक रोशन ने मनोरंजन जगत के साथ-साथ रियल एस्टेट क्षेत्र में भी सक्रिय निवेशक के रूप में अपनी मौजूदगी मजबूत की है। विशेष रूप से कमर्शियल ऑफिस स्पेस में निवेश और उन्हें कॉर्पोरेट कंपनियों को किराए पर देने की रणनीति उनकी निवेश प्राथमिकताओं का हिस्सा बनती जा रही है। मुंबई और पुणे जैसे प्रमुख शहरों में उनकी संपत्तियां नियमित किराया आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन रही हैं।

    अंधेरी पश्चिम क्षेत्र में उनके परिवार द्वारा हाल के वर्षों में कई कमर्शियल प्रॉपर्टी खरीदे जाने की जानकारी भी सामने आ चुकी है। बीते वर्ष ऋतिक रोशन, उनके पिता राकेश रोशन से जुड़ी कंपनी और उनकी मां की कंपनी ने मिलकर लगभग 28 करोड़ रुपये की लागत से 10 ऑफिस यूनिट्स खरीदी थीं। इसके अलावा परिवार की ओर से करीब 19.68 करोड़ रुपये में पांच अन्य कमर्शियल ऑफिस यूनिट्स का अधिग्रहण भी किया गया था। इससे स्पष्ट होता है कि परिवार व्यवस्थित रूप से कमर्शियल रियल एस्टेट पोर्टफोलियो का विस्तार कर रहा है।

    ऋतिक रोशन पहले भी अपनी संपत्तियों को लीज पर देने को लेकर चर्चा में रह चुके हैं। इससे पहले उन्होंने मुंबई के जुहू स्थित अपने एक आवासीय फ्लैट को किराए पर दिया था। अब अंधेरी स्थित इस बड़े कमर्शियल ऑफिस स्पेस की लीज उनके निवेश पोर्टफोलियो में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि मुंबई के प्रमुख व्यावसायिक इलाकों में उच्च गुणवत्ता वाले ऑफिस स्पेस की मांग लगातार बनी हुई है। ऐसे में कमर्शियल संपत्तियों से नियमित किराया आय निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बनती जा रही है। फिल्म उद्योग से जुड़े कई कलाकार भी अब केवल मनोरंजन क्षेत्र तक सीमित न रहकर रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक निवेश कर रहे हैं। ऋतिक रोशन का यह नया सौदा इसी बदलते निवेश रुझान का एक प्रमुख उदाहरण माना जा रहा है।