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  • यूपी में विद्युत सखियों ने जमा कराए 3,720 करोड़ रुपये के बिजली बिल, कमीशन से कमाए 47 करोड़ रुपये

    यूपी में विद्युत सखियों ने जमा कराए 3,720 करोड़ रुपये के बिजली बिल, कमीशन से कमाए 47 करोड़ रुपये

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में विद्युत सखी योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम बन रही है। इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने अब तक 3,720 करोड़ रुपये से अधिक के बिजली बिल जमा कराए हैं। इसके बदले उन्हें 47 करोड़ रुपये से ज्यादा कमीशन मिला है। इन महिलाओं ने करीब 1.80 करोड़ उपभोक्ताओं के बिजली बिलों के भुगतान में भूमिका निभाई है।

    उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के समन्वय से संचालित इस योजना में अब तक 31 हजार से अधिक महिलाओं का पंजीकरण किया जा चुका है। इनमें 16 हजार से ज्यादा महिलाएं सक्रिय रूप से बिजली बिल जमा कराने का काम कर रही हैं। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आय अर्जित करने का अवसर उपलब्ध कराने के साथ उपभोक्ताओं के लिए बिजली बिल भुगतान की सुविधा बढ़ाना है।

    योजना के माध्यम से महिलाएं अपने गांव और आसपास के इलाकों में रहकर ही काम कर सकती हैं। उन्हें रोजगार के लिए शहरों की ओर जाने की आवश्यकता नहीं होती। घरेलू जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी का अवसर मिलने से महिलाएं परिवार की आमदनी में योगदान दे पा रही हैं। यह व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।

    विद्युत सखियों के काम से बिजली उपभोक्ताओं को भी सुविधा मिल रही है। ग्रामीणों को बिल जमा कराने के लिए दूर स्थित बिजली कार्यालयों या भुगतान केंद्रों तक जाने की जरूरत कम होती है। गांव में ही भुगतान की सुविधा मिलने से उनके समय और आने-जाने के खर्च की बचत हो सकती है। इस तरह योजना महिलाओं की आमदनी बढ़ाने के साथ ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए सेवा को अधिक सुलभ बनाने का प्रयास करती है।

    विद्युत सखियों को काम शुरू करने से पहले प्रशिक्षण दिया जाता है और डिजिटल भुगतान प्रणाली से जोड़ा जाता है। वे ई-वॉलेट के माध्यम से उपभोक्ताओं के बिजली बिल जमा करती हैं। इस काम के बदले उन्हें निर्धारित दर के अनुसार कमीशन मिलता है। योजना के तहत 2,000 रुपये तक का बिजली बिल जमा कराने पर 20 रुपये तक कमीशन दिया जाता है।

    डिजिटल भुगतान व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन को बढ़ावा देने में भी मदद मिल रही है। विद्युत सखियां उपभोक्ताओं और बिजली विभाग के बीच एक संपर्क माध्यम के रूप में काम करती हैं। इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर बिल भुगतान की सुविधा मिलती है, जबकि बिजली विभाग को राजस्व संग्रह के लिए अतिरिक्त माध्यम उपलब्ध होता है।

    राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार के मुताबिक, प्रदेश में 16 हजार से अधिक सक्रिय विद्युत सखियां ग्रामीण उपभोक्ताओं तक बिजली बिल भुगतान की सुविधा पहुंचा रही हैं। इस पहल से महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और समाज में उनकी भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

    विद्युत सखी योजना महिला सशक्तीकरण, ग्रामीण रोजगार और जनसेवा को एक साथ जोड़ती है। अब तक 3,720 करोड़ रुपये से अधिक के बिजली बिल जमा कराने और 47 करोड़ रुपये से ज्यादा कमीशन अर्जित करने के आंकड़े इस योजना के दायरे को दर्शाते हैं। पंजीकृत महिलाओं में से 16 हजार से अधिक के सक्रिय होने के साथ यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में बिल भुगतान की सुविधा और महिलाओं के लिए आय के अवसर उपलब्ध करा रही है।

  • चुनाव आयोग के समर्थन में 27 देशों के 400 से अधिक भारतवंशी, विपक्षी प्रदर्शनों पर जताई चिंता

    चुनाव आयोग के समर्थन में 27 देशों के 400 से अधिक भारतवंशी, विपक्षी प्रदर्शनों पर जताई चिंता

    नई दिल्ली । चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी दलों की ओर से किए जा रहे प्रदर्शनों के बीच दुनिया के 27 देशों में रहने वाले 400 से अधिक भारतीय मूल के छात्रों, शोधकर्ताओं और पूर्व विद्यार्थियों ने आयोग के समर्थन में संयुक्त बयान जारी किया है। ‘भारत को अराजकता से बचाएं’ शीर्षक वाले इस बयान में प्रदर्शन के तरीकों पर चिंता जताते हुए कहा गया है कि ऐसे कदम संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जनता के विश्वास को कमजोर कर सकते हैं। बयान पर हस्ताक्षर करने वालों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए संवैधानिक प्रक्रियाओं और संस्थाओं का सम्मान करने की आवश्यकता बताई है।

    संयुक्त बयान में बाबासाहब आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि लोकतंत्र में मतभेदों का समाधान संवैधानिक तरीकों से किया जाना चाहिए। हस्ताक्षरकर्ताओं ने सड़कों पर होने वाले अराजकतापूर्ण प्रदर्शनों की आलोचना की और कहा कि लोकतंत्र को बचाने के नाम पर ऐसी गतिविधियां नहीं होनी चाहिए, जिनसे संवैधानिक लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर पड़े। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संस्थाओं पर भरोसा बनाए रखना देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।

    बयान में आरोप लगाया गया है कि भारतीय लोकतंत्र को लेकर संदेह पैदा करने की अनुचित कोशिश की जा रही है। इसमें अदालतों में विचाराधीन मामलों को इस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किए जाने और फिर प्रदर्शनों के माध्यम से इस मुद्दे को आगे बढ़ाने पर आपत्ति जताई गई है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा का दावा करने वालों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके तरीके संवैधानिक शासन को नुकसान न पहुंचाएं। हालांकि, ये बातें बयान जारी करने वाले समूह के आरोप और विचार हैं।

    यह बयान ऐसे समय आया है, जब विपक्षी दल चुनाव आयोग के कामकाज और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने चुनावों में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने भी आयोग के विरोध में कई प्रदर्शन किए हैं। इन आंदोलनों की अगुवाई अभिजीत दीपके कर रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस सिलसिले में उन्हें दो बार हिरासत में भी लिया गया है।

    संयुक्त बयान में हस्ताक्षरकर्ताओं ने मौजूदा राजनीतिक माहौल पर दुख और हैरानी जताई है। उनका कहना है कि कुछ हलकों में चुनाव परिणामों को स्वीकार नहीं करने, संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाने और संसद के बजाय सड़कों पर आंदोलन को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति दिखाई दे रही है। बयान में कहा गया कि दुनिया के अलग-अलग देशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों के रूप में वे भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और उसके भविष्य को लेकर चिंतित हैं।

    हस्ताक्षर करने वाले लोग अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस, जापान और सिंगापुर समेत 27 देशों के विश्वविद्यालयों से जुड़े हैं। इनमें मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी), हार्वर्ड विश्वविद्यालय, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स जैसे संस्थानों से जुड़े छात्र, शोधकर्ता और पूर्व विद्यार्थी शामिल हैं।

    बयान में एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी दिया गया है कि हस्ताक्षरकर्ताओं का इन विश्वविद्यालयों से जुड़ा होना संबंधित संस्थानों की आधिकारिक सहमति या समर्थन का प्रमाण नहीं है। यानी यह बयान इसमें हस्ताक्षर करने वाले व्यक्तियों का सामूहिक रुख है, न कि इन विश्वविद्यालयों की ओर से जारी आधिकारिक वक्तव्य। इस तरह चुनाव आयोग के समर्थन में सामने आए इस बयान ने चुनाव प्रक्रिया, संवैधानिक संस्थाओं और विरोध प्रदर्शनों के तरीकों को लेकर जारी बहस में एक नया पक्ष सामने रखा है।

  • सीहोर में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के विरोध में भोपाल कूच, 35 से अधिक गांवों के हजारों लोगों ने उठाई न्याय की मांग

    सीहोर में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के विरोध में भोपाल कूच, 35 से अधिक गांवों के हजारों लोगों ने उठाई न्याय की मांग

    मध्य प्रदेश। के सीहोर जिले के कोसमी गांव में 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने और फसलों को नुकसान पहुंचाने के मामले में विरोध तेज हो गया है। खिवनी अभयारण्य क्षेत्र के 35 से अधिक गांवों के एक हजार से ज्यादा आदिवासी न्याय की मांग को लेकर भोपाल की ओर कूच कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर अपनी शिकायतें और जमीन से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने की बात कही है। इस आंदोलन के कारण प्रदेश की सियासत में भी हलचल बढ़ गई है।

    आदिवासियों की ओर से निकाली जा रही पदयात्रा में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा शामिल हैं। प्रदर्शनकारी बैनर और तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। यह आंदोलन शुरुआत में कोसमी गांव के 12 आदिवासी परिवारों को बेदखल किए जाने के विरोध में शुरू हुआ था, लेकिन अब आसपास के दर्जनभर गांवों के लोग भी इसमें शामिल हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि उनके साथ हुई कार्रवाई की जांच हो और प्रभावित परिवारों को न्याय मिले।

    इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, सीहोर के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित संबंधित अधिकारियों से तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है। आयोग की ओर से जवाब तलब किए जाने के बाद मामला प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, संबंधित अधिकारियों की ओर से दिए गए जवाब की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

    कोसमी गांव में 11 अक्टूबर को वन विभाग की कार्रवाई के दौरान 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े गए थे। प्रभावित परिवारों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस कार्रवाई में उनकी फसलें बर्बाद कर दी गईं और एक कुएं को मिट्टी से भर दिया गया। घटना के विरोध में ग्रामीणों ने गांव में लगातार तीन दिन तक धरना दिया था। उनका कहना है कि मकान टूटने और फसलें नष्ट होने से परिवारों के सामने रहने और आजीविका से जुड़ी समस्याएं खड़ी हो गई हैं।

    घटना के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और विधायक रमाकांत भार्गव प्रभावित आदिवासी परिवारों से मिलने पहुंचे थे। केंद्रीय कृषि मंत्री ने वन विभाग की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने इसे अत्याचार की पराकाष्ठा बताते हुए धरने पर बैठकर प्रभावित परिवारों की शिकायतें सुनी थीं। इस घटनाक्रम के बाद मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आ गया।

    दूसरी ओर, प्रशासन की रिपोर्ट में संबंधित जमीन पर कब्जे को अवैध बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वन विभाग की ओर से यह कहा गया है कि आरक्षित वन भूमि पर पौधे काटकर अतिक्रमण किया गया था। इस तरह मामले में प्रदर्शनकारियों के आरोप और प्रशासन का पक्ष अलग-अलग हैं। जमीन पर कब्जे की स्थिति और कार्रवाई से जुड़े मुद्दे विवाद के प्रमुख बिंदु बने हुए हैं।

    प्रदर्शनकारी आदिवासी परिवारों की मांग है कि जिस जमीन पर वे पीढ़ियों से खेती करते आ रहे हैं, उसका पट्टा दिया जाए। इसके अलावा बेदखल परिवारों के पुनर्वास, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था करने तथा नष्ट हुई फसलों के लिए मुआवजा देने की मांग भी उठाई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावित परिवारों की जरूरतों पर ध्यान दिया जाना चाहिए और उन्हें रहने तथा आजीविका के लिए उचित व्यवस्था मिलनी चाहिए।

    आंदोलन में शामिल लोग कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। भोपाल कूच का उद्देश्य मुख्यमंत्री के सामने अपनी शिकायतें और जमीन से संबंधित दस्तावेज रखना है। अब इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा मांगे गए जवाब, प्रशासन के पक्ष और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

  • मोटर इंश्योरेंस खरीदने वालों को मिल सकते हैं ज्यादा विकल्प, IRDAI के प्रस्ताव से डीलर कमीशन व्यवस्था में बदलाव संभव

    मोटर इंश्योरेंस खरीदने वालों को मिल सकते हैं ज्यादा विकल्प, IRDAI के प्रस्ताव से डीलर कमीशन व्यवस्था में बदलाव संभव

    नई दिल्ली । नई कार या बाइक खरीदते समय ज्यादातर ग्राहक इंश्योरेंस भी उसी डीलर से करा लेते हैं, जहां से वाहन खरीदा जाता है। ऐसे में अलग-अलग बीमा कंपनियों की पॉलिसी, कीमत और उपलब्ध विकल्पों की तुलना करना हमेशा आसान नहीं होता। अब मोटर इंश्योरेंस की बिक्री व्यवस्था में बदलाव के प्रस्ताव से ग्राहकों को डीलर के अलावा दूसरे माध्यमों से बीमा खरीदने का विकल्प मिल सकता है।

    भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण ने मोटर इंश्योरेंस की बिक्री और कमीशन व्यवस्था को लेकर एक पब्लिक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसमें मोटर इंश्योरेंस से जुड़े कमीशन और वितरण व्यवस्था की समीक्षा की गई है। नियामक के अनुसार अलग-अलग मामलों में मोटर इंश्योरेंस पर कमीशन 13 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक हो सकता है, जबकि औसत करीब 24 प्रतिशत बताया गया है।

    नए और पुराने वाहनों की बिक्री से जुड़े ब्रोकर्स और मोटर इंश्योरेंस सर्विस प्रोवाइडर्स के माध्यम से वित्त वर्ष 2025 में करीब 29,000 करोड़ रुपये का प्रीमियम जुटाया गया। इसमें करीब 7,050 करोड़ रुपये कमीशन के तौर पर गया। प्रस्ताव में इस बात पर विचार किया गया है कि अपेक्षाकृत सरल मोटर इंश्योरेंस उत्पादों पर इतनी ऊंची कमीशन लागत कितनी उचित है।

    प्रस्तावित व्यवस्था में ग्राहकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए नए और पुराने वाहनों के इंश्योरेंस उत्पादों तक पहुंच देने की बात कही गई है। इससे ग्राहक अलग-अलग विकल्पों की जानकारी ले सकेंगे और डीलर से अलग माध्यम के जरिए पॉलिसी खरीदने का विकल्प चुन सकते हैं। ऐसे गैर-लाभकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लागत वसूलने के लिए प्रीमियम का अधिकतम पांच प्रतिशत शुल्क रखने का प्रस्ताव भी दिया गया है।

    अगर प्रस्ताव लागू होते हैं तो वाहन डीलरों को ग्राहकों के सामने डिजिटल प्लेटफॉर्म का विकल्प और क्यूआर कोड स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना पड़ सकता है। इसका उद्देश्य ग्राहक को यह जानकारी देना है कि इंश्योरेंस खरीदने के लिए केवल डीलर पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है।

    वाहन लोन के साथ इंश्योरेंस की बिक्री को लेकर भी प्रस्ताव में ध्यान दिया गया है। लोन और बीमा की बंडलिंग से जुड़े मामलों में करीब 16 प्रतिशत कमीशन देखे जाने का उल्लेख किया गया है। प्रस्तावित बदलावों में ग्राहक को लोन लेते समय इंश्योरेंस की कीमत और उसे खरीदने के माध्यम की स्पष्ट जानकारी देने पर जोर है।

    पुराने वाहनों के बीमा में भी कमीशन व्यवस्था की समीक्षा की गई है। प्रस्ताव के मुताबिक कई डीलरों के पास सर्विस और रिपेयर की सुविधाएं होने के बावजूद पुराने वाहनों के इंश्योरेंस पर मोटर इंश्योरेंस सर्विस प्रोवाइडर्स को औसतन करीब 12 प्रतिशत कमीशन मिलता है।

    कैशलेस रिपेयर को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रस्ताव है। यदि ग्राहक ने किसी दूसरे बीमाकर्ता से पॉलिसी खरीदी है और उसमें कैशलेस रिपेयर की सुविधा उपलब्ध है, तो केवल इस आधार पर डीलर सुविधा से इनकार नहीं कर सकेगा कि बीमा उसी डीलर से नहीं लिया गया।

    इसके अलावा पॉलिसी बिक्री के आधार पर अतिरिक्त इंसेंटिव देने वाली कुछ व्यवस्थाओं पर रोक का प्रस्ताव है। अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा और सरल मोटर इंश्योरेंस उत्पादों पर कम कमीशन रखने की भी बात कही गई है।

    हालांकि, ये बदलाव अभी लागू नहीं हुए हैं। संबंधित प्रस्ताव पर सुझाव और आपत्तियां 25 अक्टूबर 2026 तक मांगी गई हैं। इसके बाद प्राप्त प्रतिक्रियाओं पर विचार करके आगे की प्रक्रिया तय होगी। इसलिए फिलहाल मोटर इंश्योरेंस की मौजूदा व्यवस्था में तत्काल बदलाव नहीं माना जा सकता।

  • 30 सितंबर को दिल्ली में INDIA ब्लॉक की संभावित बैठक, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर चर्चा

    30 सितंबर को दिल्ली में INDIA ब्लॉक की संभावित बैठक, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर चर्चा

    नई दिल्ली । विपक्षी दलों का INDIA ब्लॉक 30 सितंबर को नई दिल्ली में बैठक कर सकता है। इस संभावित बैठक में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। विपक्षी दल इन विषयों पर आगे की संयुक्त रणनीति तैयार करने के लिए आपसी समन्वय बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

    बैठक का प्रमुख मुद्दा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली हो सकता है। विपक्षी दल इस प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां उठा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की रणनीति पर विचार कर रहे हैं।

    इस घटनाक्रम में पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े तृणमूल कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का एक मुद्दे पर साथ आना भी महत्वपूर्ण है। दोनों दल राज्य में राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं, लेकिन चुनाव आयोग और मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों पर समन्वित कार्रवाई की जरूरत जता रहे हैं।

    मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव एमए बेबी ने विपक्षी दलों को पत्र लिखकर बैठक बुलाने का अनुरोध किया था। इसके बाद उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी बातचीत की। ममता बनर्जी ने इस मामले से निपटने के लिए समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।

    विपक्षी दलों में कांग्रेस और वामपंथी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने तथा SIR प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग उठा रहे हैं। इस मुद्दे पर विपक्ष संसद के दोनों सदनों में नया प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। इसके कानूनी पहलुओं पर विशेषज्ञों से राय ली जा रही है।

    कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक 29 सितंबर को प्रस्तावित है। इस बैठक में पार्टी चुनाव आयोग और मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े विवाद पर अपना रुख स्पष्ट कर सकती है। इसके बाद 30 सितंबर को होने वाली संभावित विपक्षी बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा हो सकती है।

    विपक्ष की मौजूदा लामबंदी के पीछे चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े फैसलों पर कथित मतभेद की खबर भी एक वजह बताई जा रही है। सामने आई जानकारी में दावा किया गया था कि आयोग के अन्य आयुक्तों ने पुनरीक्षण से संबंधित कुछ फैसलों पर आपत्तियां जताई थीं।

    हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि बहुसदस्यीय संस्था में अलग-अलग विचार सामने आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग ने अपने आदेशों को वैधानिक बताया है। इस मुद्दे पर विपक्ष और चुनाव आयोग के रुख में अंतर बना हुआ है।

    इससे पहले 23 विपक्षी दलों और एक सांसद ने भारत के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात कर मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। विपक्षी दल अब संसद में प्रस्ताव लाने और आपसी समन्वय के जरिए आगे की कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं।

    30 सितंबर की संभावित बैठक में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव से जुड़े मुद्दे चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं। बैठक में शामिल होने वाले दलों और अंतिम एजेंडे को लेकर आगे की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

  • अभिजीत दीपके अचानक दिल्ली रवाना, ज्ञानेश कुमार का लिया नाम; चुनाव आयोग पर नए विरोध के संकेत

    अभिजीत दीपके अचानक दिल्ली रवाना, ज्ञानेश कुमार का लिया नाम; चुनाव आयोग पर नए विरोध के संकेत

    नई दिल्ली ।कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके समेत संगठन के प्रमुख नेता अपने तय कार्यक्रम रद्द कर तत्काल दिल्ली रवाना हुए हैं। संगठन ने गुरुवार को राजधानी में एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की घोषणा की है। इस घटनाक्रम के बाद चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर संगठन की ओर से नए कदम या विरोध कार्यक्रम की घोषणा किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

    अभिजीत दीपके के साथ आशुतोष रांका और सौरभ दास भी दिल्ली पहुंचने की तैयारी में जुटे हैं। नेताओं ने अपने पहले से तय कार्यक्रमों को रद्द करने की जानकारी दी है। दीपके ने एक पोस्ट में कहा कि वह महाराष्ट्र और गुजरात सीमा क्षेत्र में थे, लेकिन अब दिल्ली की उड़ान पकड़ने के लिए लौट रहे हैं। इसी संदेश में उन्होंने ज्ञानेश कुमार का भी उल्लेख किया।

    इससे पहले दीपके ने चुनाव आयोग में सुधार की मांग को लेकर दिल्ली में जरूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस की जानकारी दी थी। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के नाम का उल्लेख करते हुए संकेत दिया था कि संगठन अब चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़े मुद्दों को अपने अभियान का हिस्सा बना सकता है।

    आशुतोष रांका ने भी कहा था कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता से जुड़ी हालिया घटनाओं को देखते हुए उन्होंने अपने पहले से तय कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। उनके मुताबिक, संगठन के प्रमुख नेता तत्काल दिल्ली के लिए रवाना हो रहे हैं और वहां अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए अपनी बात रखेंगे।

    पहले इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का समय दोपहर 12 बजे बताया गया था, लेकिन बाद में इसे दोपहर 2 बजे करने की जानकारी दी गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास के शामिल होने की बात कही गई है। संगठन ने इसके लिए लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखा है।

    यह घटनाक्रम चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच सामने आया है। चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची की समीक्षा को लेकर कई राजनीतिक दलों ने सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ भी अलग-अलग आपत्तियां और मांगें सामने आई हैं। इन मुद्दों को लेकर न्यायिक हस्तक्षेप और चुनाव प्रक्रिया से संबंधित अन्य मांगों की चर्चा भी जारी है।

    वहीं, चुनाव आयोग की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि एसआईआर समेत उसके फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए जाते हैं। आयोग के अनुसार, मतदाता सूचियों की विशेष गहन समीक्षा कोई नई प्रक्रिया नहीं है और पहले भी अलग-अलग समय पर ऐसी कवायद की जाती रही है। इस बार तकनीक के इस्तेमाल से प्रक्रिया को अधिक व्यापक और व्यवस्थित बनाने की बात कही गई है।

    चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि निर्णय प्रक्रिया में अधिकारियों के बीच मतभेद या अलग-अलग विचार होना अपने आप में संस्थागत टकराव का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। आयोग के अनुसार अंतिम निर्णय सभी संबंधित अधिकारियों की सहमति से लिए जा रहे हैं।

    ऐसे में अब दिल्ली में होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर नजर बनी हुई है। अभिजीत दीपके और संगठन के अन्य नेताओं के दिल्ली पहुंचने तथा ज्ञानेश कुमार का लगातार उल्लेख किए जाने से यह स्पष्ट है कि चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे उनके अगले सार्वजनिक अभियान में प्रमुखता से उठ सकते हैं। हालांकि प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन की ओर से कौन से ठोस कदम या नए कार्यक्रम घोषित किए जाएंगे, इसकी जानकारी आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • मध्य प्रदेश: जीतू पटवारी ने जल संसाधन विभाग में टेंडर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया, 15 दिन में कार्रवाई का अल्टीमेटम

    मध्य प्रदेश: जीतू पटवारी ने जल संसाधन विभाग में टेंडर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया, 15 दिन में कार्रवाई का अल्टीमेटम



    भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बुधवार को जल संसाधन विभाग (WRD) में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का खुलासा किया। पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में सिंचाई परियोजनाओं के नाम पर केवल ‘ठेकेदारी और कमीशन’ का खेल चल रहा है। उन्होंने सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि जांच नहीं हुई, तो कांग्रेस सबूतों के साथ CBI के पास जाएगी।

    पटवारी ने तंज कसते हुए कहा, “सरकार इसे ‘कृषि वर्ष’ कह रही है, जबकि यह ‘कमीशन वर्ष’ है। कल ही सरकार ने 5800 करोड़ का कर्ज लिया है, लेकिन पैसा किसानों के पास नहीं, बल्कि चहेते ठेकेदारों की जेब में जा रहा है।”

    पांच प्रमुख आरोप
    टेंडर सिंडिकेट और गिनी-चुनी कंपनियों का कब्जा: पटवारी ने कहा कि बड़े टेंडरों में केवल फलोदी और गुप्ता कंस्ट्रक्शन जैसी कंपनियां ही दिखाई देती हैं। यह रोटेशन सिस्टम है, जिसमें कभी एक कंपनी L1 (सबसे कम बोली) बनती है और कभी दूसरी। प्रतिस्पर्धा खत्म कर दी गई है।

    दुबई कनेक्शन और मनी ट्रेल: पटवारी ने नौशाद और अश्विन नाटू का जिक्र किया। आरोप लगाया कि इनके माध्यम से मंत्रियों के रिश्तेदारों का दुबई में साझा व्यवसाय है, जो सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हो सकता है।

    फर्जी बैंक गारंटी का महाघोटाला: विभाग में फर्जी बैंक गारंटी जमा कर ठेकेदार करोड़ों का एडवांस ले रहे हैं। जल निगम में फर्जीवाड़ा पकड़े जाने के बावजूद e-BG सिस्टम लागू नहीं किया गया।

    भाजपा कार्यालय और केन-बेतवा लिंक: केन-बेतवा प्रोजेक्ट का ठेका उस नागार्जुन कंपनी को दिया गया है जो भाजपा का दफ्तर बना रही है। पटवारी ने कहा, “पार्टी दफ्तर बनाओ, कमीशन दो और फिर मर्जी से काम करो या लटका दो।”

    तकनीकी धोखाधड़ी: जमीन पर सस्ते HDPE पाइप डाले गए और कागजों में महंगे DI पाइप दिखाकर करोड़ों का भुगतान निकलवाया गया।

    पटवारी ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और मुख्यमंत्री से सवाल किया कि आखिर नौशाद और अश्विन नाटू कौन हैं और क्या सरकार विभाग में जमा सभी बैंक गारंटियों की जांच कराएगी।

    पटवारी ने कहा कि यदि 15 दिन में स्वतंत्र ऑडिट और जांच नहीं हुई, तो कांग्रेस दस्तावेजों के साथ CBI जाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि सिंचाई के रकबे का सरकारी आंकड़ा झूठा है और कांग्रेस खुद इसका सत्यापन कर सच सामने लाएगी।

  • भ्रामक विज्ञापन मामले में सलमान खान को बड़ी राहत… इस आयोग ने गैर-जमानती वारंट पर लगाई रोक

    भ्रामक विज्ञापन मामले में सलमान खान को बड़ी राहत… इस आयोग ने गैर-जमानती वारंट पर लगाई रोक


    जयपुर।
    राजस्थान उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Rajasthan Consumer Disputes Redressal Commission) ने अभिनेता सलमान खान (Actor Salman Khan.) को एक बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट (Non-bailable warrant) पर रोक लगा दी है। यह मामला एक पान मसाला कंपनी के भ्रामक विज्ञापन (Misleading Advertisement) से जुड़ा है। राज्य आयोग ने सलमान खान और कंपनी की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। राजस्थान उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने शुक्रवार को एक पान मसाला कंपनी और सलमान खान की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिकाओं पर सुनवाई की।


    क्या दलील?

    सलमान खान के वकील ने सुनवाई के दौरान राज्य आयोग को बताया कि जिला उपभोक्ता आयोग ने बिना समन जारी किए ही जमानती वारंट जारी किया था। अब गैर-जमानती वारंट जारी करने की प्रक्रिया में है। यही नहीं जमानती वारंट रद्द करने का अनुरोध की एक अर्जी भी जिला उपभोक्ता आयोग जयपुर-द्वितीय के समक्ष लंबित है।


    आयोग ने दी राहत

    इसे ध्यान में रखते हुए राज्य आयोग ने जमानती वारंट तामील होने तक गैर-जमानती वारंट जारी करने से रोक दिया। यही नहीं जिला आयोग को लंबित अर्जी पर जल्द से जल्द सुनवाई करने का भी निर्देश दिया। बता दें कि जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग जयपुर-द्वितीय ने अभिनेता के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया था और उन्हें छह फरवरी को पेश होने का निर्देश दिया था।


    क्या है मामला?

    यह आदेश शिकायतकर्ता योगेंद्र सिंह द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया गया था। शिकायतकर्ता ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि आयोग की ओर से छह जनवरी को अंतरिम रोक के बावजूद एक पान मसाला कंपनी के विज्ञापन अब भी दिखाए जा रहे हैं। दलील दी गई कि यह तो आयोग के आदेश की अवमानना है।


    क्या आरोप?

    मूल शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पान मसाला कंपनी और उसके ब्रांड एंबेसडर अभिनेता सलमान खान भ्रामक विज्ञापन कर रहे हैं। इस शिकायत पर आयोग ने 6 जनवरी को उत्पाद के प्रचार और विज्ञापन पर अंतरिम रोक लगा दी थी। शिकायतकर्ता ने बाद में अवमानना याचिका दायर की। फिर दावा किया कि रोक के बावजूद 9 जनवरी को कोटा में नयापुरा स्टेडियम के पास उक्त विज्ञापन वाला एक साइन बोर्ड लगाया गया।

  • जीतन राम मांझी का दावा… बोले- हर MP-MLA लेता है कमीशन', सियासी गलियारे में मची हलचल

    जीतन राम मांझी का दावा… बोले- हर MP-MLA लेता है कमीशन', सियासी गलियारे में मची हलचल


    गयाजी।
    केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) ने अपने नए और सनसनीखेज बयान से NDA को असहज स्थिति में डाल दिया है। जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) ने दावा किया है कि सभी सांसद और विधायक (MP-MLA ) अपने निर्वाचन क्षेत्र के डेवलपमेंट फंड में कमीशन (Development Fund Commission) लेते हैं। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (धर्मनिरपेक्ष) सुप्रीमो मांझी ने आगे दावा किया कि उन्होंने कई बार पार्टी को अपना कमीशन दिया था और पार्टी नेताओं को सलाह दी थी कि वे उस पैसे का इस्तेमाल कार खरीदने के लिए करें। जीतन राम मांझी ने हाल ही में HAM के एक कार्यक्रम में ये बयान दिया है।


    सांसद-विधायक लेते हैं कमीशन- जीतन राम मांझी

    जीतन राम मांझी ने विधायकों से कहा कि अगर उन्हें 10% कमीशन नहीं मिल पा रहा है, तो 5% तो ले ही लें। उन्होंने आगे कहा, ‘हर सांसद और विधायक कमीशन लेता है और एक रुपये में से 10 पैसे भी लेना एक बड़ी रकम है।’ गया जी लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले श्री मांझी ने कहा, ‘मैंने व्यक्तिगत रूप से कई बार अपनी कमीशन राशि पार्टी कोष में दी है। एक सांसद को 5 करोड़ रुपये मिलते हैं, और अगर उसे 10% कमीशन मिलता है, तो यह 40 लाख रुपये हो जाएगा।’


    मैंने तो बेटे से भी कमीशन लेने को कहा- मांझी

    एक रिपोर्ट के अनुसार जीतन राम मांझी यहीं नहीं रुके, यहां तक कहा कि उन्होंने अपने बेटे और पार्टी अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन, जो राज्य में कैबिनेट मंत्री हैं, से भी कमीशन लेने को कहा, क्योंकि यह कोई रहस्य नहीं था और हर कोई ऐसा करता था।’ अपने बेटे की ओर देखते हुए मांझी ने कहा, ‘अगर ये लोग [पार्टी नेता] ऐसा करने में असमर्थ हैं, तो यह पार्टी अध्यक्ष की गलती है।’


    2030 में HAM 100 सीटों पर लड़े चुनाव- मांझी

    उन्होंने घोषणा की कि आगामी विधानसभा चुनाव में HAM को 100 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहिए और यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी। जीतन राम मांझी ने अपने बेटे को लक्ष्य हासिल करने के लिए एक कार्य योजना तैयार करने को कहा और बताया कि उनकी जाति के लोग इसका समर्थन करेंगे, हालांकि HAM को कुछ और जातियों के समर्थन की भी आवश्यकता होगी। उन्होंने यह भी कहा कि एनडीए की सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उन्हें कम आंककर गलती की है।


    तीन प्रमंडलों में मांझी ने ठोका दावा

    जीतन राम मांझी ने कहा कि ‘पूर्णिया, मगध और मुंगेर डिवीजनों में हम कोई साधारण पार्टी नहीं हैं। पश्चिम चंपारण में भी हमारे समर्थक हैं। हमारी पार्टी हर जगह मजबूत है, लेकिन भाजपा ने हर चुनाव में हमें कम आंका है। अब तक जो हुआ है, वह ठीक है। अगर अगले चुनाव में हमें महत्व नहीं दिया गया, तो हम अपना अलग रास्ता अपनाएंगे।’ कुछ दिनों पहले, जीतन राम मांझी के भाषण का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिसमें उन्हें यह कहते हुए सुना गया था कि 2020 के विधानसभा चुनाव में, उन्होंने अपने टिकारी उम्मीदवार को, जो 2,700 वोटों से पीछे चल रहे थे, गया जी के तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट के समर्थन से जीत दिलाने में मदद की थी।


    मांझी पहले भी दे चुके हैं ऐसे बयान

    ये कोई पहली बार नहीं है जब बेबाकी से जीतन राम मांझी ने ऐसे बयान दिए हैं। इससे पहले मांझी ने 2015 में मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद बिहार में एस्टीमेट घोटाले का जिक्र कर बहस छेड़ दी थी। तब मांझी ने कहा था कि सरकारी ठेकों में जमकर एस्टीमेट घोटाला किया जाता है। ठेकों में पैसा बनाने के लिए एस्टीमेट को जान बूझ कर बढ़ा चढ़ा कर बताया जाता है। हाल ही में राज्यसभा सीट की उनकी मांग पूरी न होने पर गठबंधन से बाहर निकलने की उनकी टिप्पणी ने भी हलचल मचा दी थी।

    बीजेपी ने बताया निजी राय
    मंत्री और भाजपा नेता दिलीप कुमार जायसवाल ने जीतन राम मांझी की टिप्पणी को उनकी निजी राय बताया है। वहीं विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल को बैठे-बिठाए मुद्दा मिल गया है। RJD के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि विधानसभा चुनाव में 202 सीटें जीतने के बावजूद एनडीए में सब कुछ ठीक नहीं है।