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  • गोल्ड-सिल्वर में उछाल जारी, कमजोर डॉलर ने बढ़ाई निवेशकों की दिलचस्पी

    गोल्ड-सिल्वर में उछाल जारी, कमजोर डॉलर ने बढ़ाई निवेशकों की दिलचस्पी


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में अनिश्चितता और डॉलर की कमजोरी के बीच सोने-चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे हफ्ते तेजी देखने को मिली है। सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की बढ़ती मांग और भू-राजनीतिक हालात ने कीमती धातुओं को मजबूती दी है।

    सोने में 1.65% साप्ताहिक उछाल

    इस हफ्ते सोने की कीमतों में 1.65 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुक्रवार को सोने के जून फ्यूचर्स हल्की बढ़त के साथ करीब 1,52,690 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करते नजर आए। वहीं इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 999 प्योरिटी वाले सोने का भाव बढ़कर 1,50,327 रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया, जो सप्ताह की शुरुआत से ऊंचा स्तर है।

     चांदी भी चमकी, कीमतों में मजबूती

    चांदी की कीमतों में भी तेजी का रुख बना रहा। एमसीएक्स पर मई फ्यूचर्स 2,43,300 रुपए प्रति किलोग्राम के आसपास ट्रेड करते दिखे।
    आईबीजेए के मुताबिक, 999 प्योरिटी वाली चांदी 2,39,934 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई, जो पिछले सप्ताह की तुलना में मजबूत बढ़त दर्शाता है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कॉमेक्स (COMEX) पर सोना लगभग 3% की साप्ताहिक बढ़त के साथ 4,787 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के करीब बंद हुआ। विश्लेषकों का मानना है कि 5,000 डॉलर का स्तर एक बड़ा रेजिस्टेंस है, जिसे पार करने पर तेजी और तेज हो सकती है।

    डॉलर की कमजोरी और फेड नीति बनी वजह

    अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने और सीजफायर बातचीत के चलते डॉलर पर दबाव बना है। इससे निवेशकों ने ब्याज दरों को लेकर नए सिरे से आकलन शुरू किया है।
    कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई कम होने की उम्मीद बढ़ी है, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना मजबूत हुई है।

    बाजार में संतुलन, लेकिन सतर्कता बरकरार

    कमोडिटी बाजार इस हफ्ते संतुलित लेकिन सतर्क माहौल में रहा। हालिया उतार-चढ़ाव के बाद अब कीमतों में स्थिरता के शुरुआती संकेत भी देखने को मिल रहे हैं, हालांकि वैश्विक अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है।


    सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर

    विशेषज्ञों के अनुसार:

    सोना: 1,48,000–1,46,000 रुपए मजबूत सपोर्ट, 1,54,000–1,55,000 रुपए रेजिस्टेंस
    चांदी: 2,30,000–2,25,000 रुपए सपोर्ट, गहरा सपोर्ट 2,05,000–2,00,000 रुपए साथ ही डॉलर-रुपया (USD/INR) की चाल आगे भी कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

  • ट्रंप के सीजफायर ऐलान के बावजूद सोना और कीमती धातुओं में जोरदार तेजी

    ट्रंप के सीजफायर ऐलान के बावजूद सोना और कीमती धातुओं में जोरदार तेजी


    नई दिल्ली।अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान के साथ दो सप्ताह के लिए युद्धविराम (सीजफायर) की घोषणा के बावजूद, सुरक्षित निवेश की मांग के कारण बुधवार को कीमती धातुओं में जोरदार उछाल देखने को मिला।

    सोना और चांदी में रिकॉर्ड उछाल
    एमसीएक्स पर सोने का वायदा (5 जून) 3,688 रुपए यानी 2.7% की तेजी के साथ 1,54,934 रुपए प्रति 10 ग्राम के इंट्राडे हाई तक पहुंच गया।
    चांदी का वायदा (5 मई) 6% से अधिक बढ़कर 2,46,376 रुपए प्रति किलोग्राम के दिन के उच्चतम स्तर पर था। खबर लिखे जाने तक, 5 जून कॉन्ट्रैक्ट सोना 1,54,471 रुपए (+2.8%) और 5 मई कॉन्ट्रैक्ट चांदी 2,45,678 रुपए (+6.19%) पर था। विश्लेषकों का कहना है कि कीमती धातुओं में यह तेजी सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग और निचले स्तर पर खरीदारी की वजह से आई है।

    करंसी और शेयर बाजार में मजबूती
    भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 40 पैसे मजबूत होकर 92.61 पर पहुंच गया।
    शेयर बाजार में भी सेंसेक्स और निफ्टी करीब 4% तक उछल गए। इसका कारण आरबीआई द्वारा रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखना और सीजफायर की घोषणा रही।

    तेल की कीमतों में भारी गिरावट
    ब्रेंट क्रूड 16% यानी 17.39 डॉलर गिरकर 91.88 डॉलर प्रति बैरल।
    यूएस डब्ल्यूटीआई क्रूड 20% यानी 21.90 डॉलर गिरकर 91.05 डॉलर प्रति बैरल।
    बाजार पर प्रभाव

    विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप का सीजफायर ऐलान भू-राजनीतिक तनाव को कुछ हद तक कम कर रहा है। इसके बावजूद अस्थिर वैश्विक हालात और निवेशकों की सतर्कता सुरक्षित विकल्पों जैसे सोना और चांदी की मांग को बढ़ा रही है।

    ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर बताया कि उन्होंने अमेरिकी सेना को पीछे हटने के निर्देश दिए हैं, जो कुछ घंटे पहले दिए गए कड़े बयानों के बाद एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

     सीजफायर की घोषणा के बावजूद निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर आकर्षित हुए, जिससे सोना और चांदी में तेजी आई, रुपये की मजबूती और शेयर बाजार में उछाल देखा गया।

  • निवेशकों के लिए अलर्ट! सोना-चांदी में आई बड़ी गिरावट के पीछे क्या कारण, आगे खरीदें या रुकें?

    निवेशकों के लिए अलर्ट! सोना-चांदी में आई बड़ी गिरावट के पीछे क्या कारण, आगे खरीदें या रुकें?


    नई दिल्ली। वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और अमेरिका-ईरान संघर्ष के पांचवें सप्ताह में पहुंचने के बावजूद, अब बाजार का रुख बदलता नजर आ रहा है। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 2.2% और चांदी 3.8% तक टूट गई, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई है।

    रिकॉर्ड स्तर से भारी गिरावट

    घरेलू बाजार में भी इसका असर साफ दिखाई दिया। एमसीएक्स पर सोना अपने ऑल-टाइम हाई से करीब 50 हजार रुपए नीचे आ गया है, जबकि चांदी में तो और बड़ी गिरावट आई है—यह अपने उच्चतम स्तर से करीब 2 लाख रुपए तक टूट चुकी है। इस गिरावट ने उन निवेशकों को झटका दिया है जिन्होंने ऊंचे स्तर पर निवेश किया था।

    मजबूत डॉलर बना सबसे बड़ा कारण

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना और चांदी खरीदना महंगा हो जाता है। इससे मांग घटती है और कीमतों पर दबाव बनता है।

    कच्चे तेल और महंगाई का असर

    इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने महंगाई की चिंता को बढ़ा दिया है। महंगाई बढ़ने पर केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रख सकते हैं। ऊंची ब्याज दरों का सीधा असर सोने और चांदी पर पड़ता है, क्योंकि ये धातुएं ब्याज नहीं देतीं। ऐसे में निवेशक बेहतर रिटर्न के लिए अन्य विकल्पों की ओर रुख करने लगते हैं।

    ट्रंप के बयान से बदला बाजार का मूड

    विश्लेषकों के अनुसार, शुरुआत में भू-राजनीतिक तनाव के कारण सोने को “सेफ हेवन” के रूप में समर्थन मिला था, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद संघर्ष के जल्द खत्म होने की उम्मीद कमजोर पड़ी, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया और कीमतें नीचे आ गईं।

    चांदी में ज्यादा गिरावट क्यों?

    चांदी की कीमतों में ज्यादा गिरावट की एक अहम वजह यह है कि यह सिर्फ निवेश धातु नहीं, बल्कि एक औद्योगिक धातु भी है। जब वैश्विक आर्थिक वृद्धि को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है, तो उद्योगों में इसकी मांग घटने का डर रहता है, जिससे कीमतों पर ज्यादा दबाव आता है।

    आगे कैसी रहेगी चाल?

    अब निवेशकों की नजर अमेरिका के अहम आर्थिक आंकड़ों नॉन-फार्म पेरोल, एडीपी रोजगार डेटा और बेरोजगारी दर पर टिकी है। ये आंकड़े आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। तकनीकी तौर पर सोने के लिए 1,48,000 रुपए के आसपास सपोर्ट और 1,55,000 रुपए के करीब रेजिस्टेंस माना जा रहा है। हालांकि, सभी दबावों के बावजूद सोने ने सप्ताह के दौरान करीब 2.20% की बढ़त भी दर्ज की है, जो बाजार की अस्थिरता को दर्शाता है।

    निवेशकों के लिए संकेत

    फिलहाल बाजार पूरी तरह मैक्रोइकॉनॉमिक संकेतों जैसे महंगाई, डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर निर्भर है। आने वाले समय में भी सोना-चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

  • सेफ हेवन की ओर भागे निवेशक, युद्ध की आहट से गोल्ड-सिल्वर में जबरदस्त तेजी

    सेफ हेवन की ओर भागे निवेशक, युद्ध की आहट से गोल्ड-सिल्वर में जबरदस्त तेजी

    नई दिल्ली। इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने वैश्विक बाजारों में घबराहट बढ़ा दी है। मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल की संयुक्त कार्रवाई और उसके बाद जवाबी हमलों की खबरों ने अनिश्चितता को और गहरा कर दिया। इसी माहौल में निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाते हुए सुरक्षित निवेश की ओर रुख किया, जिसका सीधा फायदा सोना और चांदी को मिला। सोमवार को कीमती धातुओं में 3 प्रतिशत से अधिक की तेज उछाल दर्ज की गई।

    एमसीएक्स पर रिकॉर्ड के करीब भाव
    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अप्रैल वायदा सोना कारोबार के दौरान 3 प्रतिशत से ज्यादा उछलकर 1,67,915 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। वहीं मार्च वायदा चांदी भी 3 प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ 2,85,978 रुपये प्रति किलोग्राम पर जा पहुंची। खबर लिखे जाने तक सुबह लगभग 10:46 बजे अप्रैल एक्सपायरी वाला सोना 4,612 रुपये यानी 2.85 प्रतिशत बढ़कर 1,66,716 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था, जबकि मार्च एक्सपायरी चांदी 7,311 रुपये यानी 2.66 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,82,309 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।

    भू-राजनीतिक जोखिम से बाजार में घबराहट
    तेहरान पर हमलों और जवाबी मिसाइल कार्रवाई के बाद व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका ने बाजारों को जोखिम से बचाव की मुद्रा में ला दिया है। हालांकि कुछ रिपोर्टों में Ali Khamenei को लेकर दावे किए गए, लेकिन ऐसी बड़ी खबरों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि आवश्यक होती है। भू-राजनीतिक तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका भी बढ़ी है, जिससे ऊर्जा बाजार में भी हलचल तेज हुई।

    डॉलर और कच्चा तेल भी चढ़े
    डॉलर इंडेक्स 0.24 प्रतिशत बढ़कर 97.85 पर पहुंच गया, जिससे अन्य मुद्राओं में खरीदारी करने वालों के लिए सोना अपेक्षाकृत महंगा हो गया। इसके बावजूद सुरक्षित निवेश की मांग इतनी मजबूत रही कि कीमतों में तेजी बनी रही। कच्चे तेल में भी 7 प्रतिशत से अधिक की उछाल दर्ज की गई, क्योंकि बाजार को डर है कि आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ सकता है।

    विशेषज्ञों की राय और आगे का अनुमान
    मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के कमोडिटी विश्लेषक मानव मोदी के मुताबिक, अमेरिका-ईरान तनाव और टैरिफ नीति को लेकर अनिश्चितता ने सोने की तेजी को मजबूती दी है। 2025 में अब तक सोना करीब 64 प्रतिशत चढ़ चुका है, जिसे केंद्रीय बैंकों की खरीद, ईटीएफ में निवेश और ढीली मौद्रिक नीति की उम्मीदों का सहारा मिला है।

    वैश्विक निवेश बैंक JPMorgan Chase ने 2026 के अंत तक सोना 6,300 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान जताया है, जबकि Bank of America ने 6,000 डॉलर प्रति औंस तक जाने की संभावना व्यक्त की है। अब निवेशकों की नजर प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के विनिर्माण पीएमआई और अमेरिकी श्रम बाजार के आंकड़ों पर है, जो आगे की दिशा तय करेंगे।