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  • कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट, डॉलर मजबूत होने से सोना 5.89% तक फिसला

    कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट, डॉलर मजबूत होने से सोना 5.89% तक फिसला


    नई दिल्ली। इस हफ्ते अनमोल बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिली, जहां कॉन्स्टैंट रिवाइवसूली (प्रोफिट शो) और डॉलर की कमाई के साथ सोने और चांदी की कीमत में तेज गिरावट दर्ज की गई। पूरे सप्ताह के दौरान सोने का भाव करीब 5.89 प्रतिशत तक टूट गया, जिससे उपभोक्ताओं के बीच स्थिरता बढ़ गई। हालांकि सप्ताह के अंतिम दिन के शेयरों की संख्या भी देखने को मिली, लेकिन कुल बाजार दबाव में ही कमी आ रही है।

    सप्ताहभर में सोना-रेवेअर में बड़ी गिरावट

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने और चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। जबकि जोशक्स गोल्ड अमेरीका की शुक्रवार को बढ़त के साथ 1,44,825 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गयी, जबकि जनाबेक्स गोल्ड अमेरीका में 3,990 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट के साथ 2,27,470 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गयी।

    वहीं इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक, 999 पाउंड वाला सोना 1,56,436 रुपये से लेकर 1,47,218 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। चांदी भी 2,48,711 रुपए टूटकर 2,32,364 रुपए प्रति लुढ़क गई, यानी इसमें 16,000 रुपए से ज्यादा की गिरावट आई।

    डॉलर की दोस्ती और रुचि का असर

    सिद्धांतों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर की इज़ाजत और सरकारी अधिकारियों की समीक्षा नीति ने सोना-असलीयत पर दबाव डाला है। फ़ेडरल रिज़र्व, बैंक ऑफ़ जापान, बैंक ऑफ़ कनाडा और बैंक ऑफ़ इंग्लैंड के सख्त रुख के कारण ब्याज परिसंपत्ति जारी रह सकती है।

    ऐसे में मराठा में सोने से पैसा इन्वेस्टमेंट (सेफ हेवन) जैसे सोने से पैसा वाले निवेशकों की ओर से निवेश किया जाता है, जहां पर निवेशकों का दबाव बना रहता है।

    मध्य पूर्व तनाव का मिलाप-जुला असर

    मध्य पूर्व में जारी तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष का असर बाजार पर भी दिख रहा है। पहले इस तनाव के कारण सोना-रेयाला की झील में तेजी आई थी, लेकिन अब अनिश्चितता और उत्कट-अवस्था से अविश्वास का घाटा हो गया है।

    तेल और गैस के उत्पाद में स्टॉक का खतरा बढ़ गया है, जिससे बाजार में स्टॉक बना हुआ है।

    सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल क्या कहते हैं?

    विशेषज्ञ के मुताबिक, सोना इस समय अपने अहम सपोर्ट लेवल के करीब है।

    रेजिस्टेंस: 1,50,000 – 1,52,000 रुपये
    सपोर्ट: 1,35,000 – 1,40,000 रुपये

    चांदी की बात करें तो यह 2,20,000 – 2,15,000 रुपये के डिजायन जोन के करीब पहुंच गया है। अगर बाजार में खरीदारी बहुतायत है, तो इसमें फिर से 2,40,000 रुपये तक की छूट संभव है।

    विदेशी मुद्रा भंडार और आरबीआई का हस्तक्षेप

    भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 13 मार्च को समाप्त सप्ताह में भारत के स्वर्ण भंडार में 664 करोड़ डॉलर की उछाल आई और यह 130.68 डॉलर तक पहुंच गई। हालाँकि कुल विदेशी मुद्रा भंडार 7.05 अरब डॉलर 709.76 अरब डॉलर रह गया। इसकी बड़ी वैल्यू आरबीआई का मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप है, जहां रुपये को सहारा देने के लिए डॉलर पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

    डॉलर की साख, वैश्विक हित हितैषी का दबाव और भू-राजनीतिक साख ने सोना-ए-कीमत को झटका दिया है। निकट भविष्य में बाजार में जारी की जा सकती है, इसलिए आवेदकों को रणनीति निषेध की आवश्यकता है।

  • सोने-चांदी की कीमतों में दबाव, अमेरिकी फेड की नीति ने बनाया मार्केट चुनौतीपूर्ण

    सोने-चांदी की कीमतों में दबाव, अमेरिकी फेड की नीति ने बनाया मार्केट चुनौतीपूर्ण


    नई दिल्ली। सोने और चांदी के बाजार में गुरुवार को कमजोरी देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सुबह 10:21 बजे सोने का 2 अप्रैल 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 0.62 प्रतिशत यानी 953 रुपए की गिरावट के साथ 1,52,072 रुपए प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था। दिन भर में सोने ने 1,51,712 रुपए का न्यूनतम और 1,53,025 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ।

    चांदी की कीमतों में भी गिरावट रही। 5 मई, 2026 का चांदी कॉन्ट्रैक्ट 3,945 रुपए या 1.59 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,44,249 रुपए प्रति किलो पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान चांदी ने 2,43,083 रुपए का न्यूनतम और 2,45,387 रुपए का उच्चतम स्तर दर्ज किया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी में दबाव देखा गया। खबर लिखे जाने तक सोना 0.92 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,850 डॉलर प्रति औंस और चांदी 2.42 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 75.735 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व का हालिया निर्णय सोने और चांदी में गिरावट का मुख्य कारण है। बुधवार को अमेरिकी फेड ने ब्याज दरों को लगातार दूसरी बार यथावत रखते हुए 3.5 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के बीच बनाए रखा। इससे पहले 2025 में सितंबर, अक्टूबर और दिसंबर में दरों में कटौती की गई थी।

    वीटी मार्केट्स के वरिष्ठ विश्लेषक – एपीएसी जस्टिन खू के अनुसार, फेड का यह कदम भू-राजनीतिक झटकों और लगातार बढ़ती मुद्रास्फीति से जूझ रही समिति के दृष्टिकोण को दर्शाता है। फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने भी कहा कि कई अधिकारियों ने अपने पूर्वानुमानों में कटौती की संख्या घटाकर केवल एक कटौती पर सहमति दी है। यह बदलाव मुख्य रूप से ईरान युद्ध और वैश्विक तेल बाजार पर उसके प्रभाव के कारण मुद्रास्फीति में 2.7 प्रतिशत की वृद्धि के बाद आया है।