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  • आम आदमी को झटका…. महंगाई पर लगाम कसने के बहाने बढ़ाया रेपो रेट… अब EMI करेगी जेब ढ़ीली!

    आम आदमी को झटका…. महंगाई पर लगाम कसने के बहाने बढ़ाया रेपो रेट… अब EMI करेगी जेब ढ़ीली!


    नई दिल्ली।
    तकनीकी रूप से बताया जाए तो रेपो रेट (Repo Rate) वह ब्याज दर होती है जिस पर रिजर्व बैंक (Reserve Bank) देश के कमर्शियल बैंकों (Commercial Banks) को उनके दैनिक कामकाज के लिए कर्ज देता है. देखने-सुनने में यह भले दो बैंकों के बीच की बात लगे, लेकिन जैसे ही रेप रेप बढ़ने की खबर आती है, आम आदमी की जेब पर इसका असर बेहद पेंचीदा और खर्चीला हो जाता है. साढ़े तीन साल बाद RBI ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है. इसके पीछे तर्क ये दिया गया है कि ईरान वॉर (Iran War) के कारण देश में बढ़ती महंगाई को 6 फीसदी के भीतर रोके रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।

    रिजर्व बैंक की दलील और उसके सामने के हालात अपनी जगह है, लेकिन आपकी और हमारी रसोई तक पहुंचने वाला यह एक बड़ा झटका भी है. बैंक को मिलने वाला महंगा कर्ज घूम-फिरकर आखिरकार आम इंसान की EMI, मकान के सपने और महीने के बजट पर ही भारी पड़ता है।

    रेपो रेट बढ़ने की पूरी कहानी को समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना होगा. 2020 में जब कोविड महामारी की वजह से सब कुछ बंद पड़ गया था, तब बाजार में पैसे का बहाव बनाए रखने के लिए रिजर्व बैंक ने ब्याज दरें घटा दी थीं, ताकि लोग आसानी से लोन ले सकें और ठप पड़ी अर्थव्यवस्था में थोड़ी जान आए. लेकिन महामारी का दौर ढलते ही दुनिया में एक के बाद एक नए संकट शुरू हो गए।


    Repo Rate बढ़ा, अब 20, 30 और 50 लाख के लोन पर कितनी कटेगी EMI?

    पहले रूस-यूक्रेन का झगड़ा और अब ईरान-अमेरिका के बीच जारी जंग ने कच्चे तेल से लेकर दुनिया भर के बाजारों में आग लगा दी है. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल बाहर से मंगवाता है. जब दुनिया में तेल महंगा होता है, तो देश के भीतर माल ढुलाई महंगी हो जाती है, जिससे बाजार में हर चीज का भाव चढ़ जाता है. इस वैश्विक उथल-पुथल ने भारत में महंगाई को इस कदर भड़का दिया कि रिजर्व बैंक को साढ़े तीन साल बाद दरों में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी का फैसला लेना ही पड़ा.


    रिजर्व बैंक की नजरिया: महंगाई की आग बुझाने की मजबूरी

    रिजर्व बैंक की अपनी एक तय जिम्मेदारी है- बाजार में घूम रहे पैसे को इस तरह संभालना कि कीमतें काबू से बाहर न जाएं. जब बाजार में महंगाई का ग्राफ ऊपर भागने लगता है, तो रिजर्व बैंक का मानना होता है कि लोगों के पास खर्च करने के लिए पैसा थोड़ा कम किया जाए. ताकि डिमांड घटे और कीमतें स्थिर हों।

    अर्थशास्त्री इस पहलू पर सहमति देते हुए समझाते हैं कि जब महंगाई लंबी खिंच जाती है, तो वह आम परिवार की पूरी बचत को निगल जाती है. रिजर्व बैंक ने रेपो रेट बढ़ाकर एक तरह से ब्रेक लगाने की कोशिश की है. उसके लिए प्राथमिकता विकास की रफ्तार से ज्यादा इस बात की है कि रोजमर्रा के सामान इतने महंगे न हो जाएं कि आम इंसान की खरीदने की ताकत ही खत्म हो जाए।


    मोदी सरकार का नजरिया: भले राजनीतिक जोखिम हो, अर्थव्यवस्था का संतुलन जरूरी

    मोदी सरकार के लिए रिजर्व बैंक का यह फैसला एक कड़वी दवा जैसा है. एक तरफ सरकार चाहती है कि देश में नए उद्योग लगें, लोग कारोबार शुरू करें और युवाओं को नौकरियां मिलें, जिसके लिए सस्ते लोन की जरूरत होती है. कर्ज महंगा होने से व्यापार की रफ्तार धीमी पड़ने का डर रहता है. इतना ही नहीं, सरकार यह अच्छी तरह जानती है कि रेपो रेट बढ़ने से जब EMI बढ़ेगी, तो भी लोग सरकार को ही कोसेंगे।

    लेकिन दूसरी तरफ, सरकार यह भी अच्छी तरह जानती है कि आम इंसान के लिए महंगाई से बड़ा कोई दर्द नहीं होता. अगर राशन, तेल और सब्जियों के दाम लगातार बढ़ते रहे, तो जनता का गुस्सा सीधे सरकार पर ही फूटता है. इसलिए सरकार के नजरिये से यह कदम भले ही थोड़े समय के लिए अप्रिय हो, लेकिन देश की आर्थिक साख बचाए रखने और रुपये को टूटने से रोकने के लिए यह कदम उठाना उसकी भी एक राजनीतिक मजबूरी बन गया है।


    आम नागरिक का संकट: बजट और सपनों पर टूटा पहाड़

    मध्यमवर्गीय और कामकाजी परिवारों के लिए इस फैसले का मतलब है हर महीने का गणित गड़बड़ा जाना. जब रिजर्व बैंक से बैंकों को महंगा कर्ज मिलेगा, तो बैंक बिना देर किए इसका बोझ अपने ग्राहकों पर डाल देंगे. इसका सबसे बड़ा थप्पड़ उन लोगों को लगेगा जिन्होंने होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन ले रखा है।

  • PAN, पेट्रोल से लेकर HRA तक….. एक अप्रैल से बदलेंगे ये नियम, आम आदमी पर होगा सीधा असर

    PAN, पेट्रोल से लेकर HRA तक….. एक अप्रैल से बदलेंगे ये नियम, आम आदमी पर होगा सीधा असर


    नई दिल्ली।
    नया वित्त वर्ष 2026-27 (New Financial Year 2026-27) शुरू होते ही 1 अप्रैल से कई बड़े नियम लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों, खासकर सैलरीड कर्मचारियों (Salaried Employees) और टैक्सपेयर्स (Taxpayers) पर पड़ेगा। पैन कार्ड, HRA, क्रेडिट कार्ड (Credit Card) और पेट्रोल से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए जा रहे हैं, जो आपकी जेब और टैक्स प्लानिंग दोनों को प्रभावित करेंगे।


    PAN कार्ड के नियम सख्त, अब सिर्फ आधार से काम नहीं चलेगा

    अब तक पैन कार्ड बनवाने के लिए सिर्फ आधार पर्याप्त था, लेकिन 1 अप्रैल 2026 से यह सुविधा खत्म हो जाएगी। नए नियमों के तहत पैन बनवाने या उसमें सुधार करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज देना अनिवार्य होगा। इससे पैन प्रक्रिया पहले से ज्यादा सख्त और सुरक्षित हो जाएगी।


    HRA क्लेम में बड़ा बदलाव, बताना होगा मकान मालिक से रिश्ता

    सैलरीड कर्मचारियों के लिए HRA से जुड़ा नियम और सख्त किया गया है। अब अगर आप सालाना 1 लाख रुपये से ज्यादा किराया देते हैं, तो आपको मकान मालिक का PAN देना होगा और साथ ही यह भी बताना होगा कि वह आपके परिवार का सदस्य है या नहीं। यह जानकारी नए फॉर्म 124 में देनी होगी। इसका उद्देश्य फर्जी HRA क्लेम पर रोक लगाना है।


    क्रेडिट कार्ड पर सख्ती, बड़े ट्रांजैक्शन सीधे आयकर विभाग की नजर में

    1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। अब बड़े ट्रांजैक्शन और भुगतान की जानकारी इनकम टैक्स डिपॉर्टमेंट को दी जाएगी। अगर कोई व्यक्ति साल में 10 लाख रुपये से ज्यादा का क्रेडिट कार्ड बिल डिजिटल माध्यम से चुकाता है या 1 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान कैश में करता है, तो इसकी रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी। इससे हर बड़ा खर्च सीधे आपके PAN रिकॉर्ड से जुड़ जाएगा।


    अब क्रेडिट कार्ड से भी भर सकेंगे टैक्स

    सरकार ने करदाताओं को राहत देते हुए अब टैक्स भुगतान के लिए क्रेडिट कार्ड को भी मान्य कर दिया है। पहले यह सुविधा केवल नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड तक सीमित थी। हालांकि, भुगतान करते समय अतिरिक्त चार्ज या प्रोसेसिंग फीस का ध्यान रखना जरूरी होगा।


    कंपनी के क्रेडिट कार्ड पर खर्च पर टैक्स नियम स्पष्ट

    अगर किसी कर्मचारी को कंपनी की ओर से क्रेडिट कार्ड दिया जाता है और उसका पेमेंट कंपनी करती है, तो यह एक प्रकार का लाभ माना जाएगा और उस पर टैक्स लग सकता है। हालांकि, यदि खर्च पूरी तरह आधिकारिक काम के लिए है और उसका सही रिकॉर्ड मौजूद है, तो उस पर टैक्स नहीं लगेगा।


    नया आयकर अधिनियम 2025 लागू

    1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 लागू किया जाएगा, जो पुराने 1961 कानून की जगह लेगा। यह टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।


    सख्त नियम
    पेट्रोल में 20% एथेनॉल अनिवार्य, गुणवत्ता भी बदलेगी

    अब पूरे देश में पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर भी नए मानक लागू होंगे, जिससे प्रदूषण कम करने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद मिलेगी।


    क्या है इसका सीधा असर?

    इन सभी बदलावों का सीधा असर आपकी टैक्स प्लानिंग, खर्च और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा। खासतौर पर सैलरीड लोगों और ज्यादा खर्च करने वालों को अब ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होगी, क्योंकि हर बड़ा ट्रांजैक्शन अब टैक्स सिस्टम की नजर में होगा।

  • कीमतें आसमान पर… आम आदमी की पहुंच से दूर हुआ सोना, मांग में भारी गिरावट

    कीमतें आसमान पर… आम आदमी की पहुंच से दूर हुआ सोना, मांग में भारी गिरावट


    नई दिल्ली।
    कीमतों के रिकॉर्ड स्तर (Record levels Prices) पर पहुंचने और उपभोक्ताओं के खरीद व्यवहार में बदलाव के कारण वर्ष 2025 में भारत (India) की सोने की मांग (Gold Demand) में 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) की गुरुवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सोने की कुल मांग 2025 में गिरकर 710.9 टन रह गई, जो 2024 में 802.8 टन थी। परिषद का अनुमान है कि 2026 में देश में सोने की मांग 600 से 700 टन के बीच रह सकती है। हालांकि, कीमतों में भारी उछाल के कारण मूल्य के संदर्भ में सोने की मांग 30 प्रतिशत बढ़कर 7,51,490 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जबकि पिछले वर्ष यह 5,75,930 करोड़ रुपये थी।

    डब्ल्यूजीसी ने बताया, ‘वर्ष, 2025 की चौथी तिमाही में सोने की मांग पर ऊंची कीमतों और उपभोक्ताओं के बदलते व्यवहार का असर स्पष्ट दिखा। मात्रा के आधार पर इस तिमाही में मांग नौ प्रतिशत गिरकर 241.3 टन रही, लेकिन मूल्य के आधार पर यह 49 प्रतिशत बढ़कर करीब 3,03,470 करोड़ रुपये हो गई।

    वर्ष 2025 के दौरान आभूषणों की कुल मांग 24 प्रतिशत घटकर 430.5 टन रही, जो 2024 में 563.4 टन थी। हालांकि, मूल्य के लिहाज से यह 12 प्रतिशत बढ़कर 4,54,390 करोड़ रुपये रही, जो इससे पिछले साल 4,04,510 करोड़ रुपये रही थी। शादियों के सीजन के बावजूद ऊंची कीमतों और महंगाई के कारण आभूषणों की बिक्री में 23 प्रतिशत की कमी आई। 2025 में सोने ने 60 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दिया और 53 बार सर्वकालिक उच्च स्तर को छुआ। इसके विपरीत, निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ी है। चौथी तिमाही में निवेश मांग 26 प्रतिशत बढ़कर 96 टन रही, जबकि इसका मूल्य 108 प्रतिशत उछलकर 1,20,700 करोड़ रुपये हो गया।


    सोने की वैश्विक मांग 5,000 टन से अधिक हुई

    वैश्विक स्तर पर सोने की मांग 2025 में 5,000 टन से अधिक होकर एक नए सर्वकालिक उच्चस्तर पर पहुंच गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल सोने की मांग 2025 में 5,002 टन के नए ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई, जो पिछले वर्ष 4,961.9 टन थी। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से निवेश मांग में तेज उछाल के कारण हुई, जो 2025 में बढ़कर 2,175.3 टन हो गई जबकि यह 2024 में 1,185.4 टन थी। चालू वित्त वर्ष की अक्तूबर-दिसंबर तिमाही में उपभोक्ता मांग दो प्रतिशत बढ़कर 1,345.3 टन हो गई जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 1,318.5 टन थी।

  • Budget 2026: रेलवे में आम आदमी की उम्मीदों पर नजर, सस्ती टिकट और बेहतर सेवाओं की मांग

    Budget 2026: रेलवे में आम आदमी की उम्मीदों पर नजर, सस्ती टिकट और बेहतर सेवाओं की मांग


    नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी। इस बार बजट में रेलवे सेवाओं को लेकर यात्रियों की उम्मीदें बढ़ी हैं। करोड़ों लोगों की नजर है कि क्या बजट में आम आदमी की जेब और उनकी दैनिक जरूरतों को ध्यान में रखा जाएगा। प्रीमियम ट्रेनों और बड़े निवेशों के बावजूद आम यात्री आज भी सफाई सुविधा भीड़ और समयबद्धता जैसी समस्याओं से असंतुष्ट है।

    रेल यात्री चाहते हैं कि कन्फर्म टिकट सस्ती दरों पर उपलब्ध हों और वेटिंग लिस्ट की समस्या कम हो। इसके साथ ही लोकल और मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों की समयबद्धता सुधारने की उम्मीद है। यात्रियों का कहना है कि प्रीमियम ट्रेनों की तुलना में आम ट्रेनों की सेवाओं में सुधार जरूरी है।

    रेलवे की शिकायतों की सूची लंबी है। ट्रेनों में सफाई व्यवस्था कमजोर है पैंट्री कार का खाना क्वालिटी में अधूरा है बोतलबंद पानी और अन्य सामान की कीमत अधिक वसूली जाती है। गंदे टॉयलेट पानी की कमी स्टेशन और ट्रेन में चोरी और कभी-कभार दुर्घटनाएं यात्रियों की चिंता बढ़ाती हैं। बजट से उम्मीद है कि इन बुनियादी समस्याओं के सुधार के लिए पर्याप्त फंड आवंटित होगा।रेल विशेषज्ञों का मानना है कि नई और तेज रफ्तार ट्रेनों से पहले ट्रैक और सिग्नल सिस्टम को मजबूत करना जरूरी है। कई रूट्स पर ट्रैक की हालत ऐसी है कि ट्रेनें घोषित स्पीड पर नहीं चल पातीं। बजट 2026 में ट्रैक अपग्रेडेशन सेफ्टी सिस्टम और मेंटेनेंस पर खर्च बढ़ने की संभावना है।

    रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 2026 को रेलवे के लिए रिफॉर्म ईयर बताया है। उनका दावा है कि साल के 52 हफ्तों में 52 सुधार लागू किए जाएंगे। चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री के पूर्व जीएम सुधांशु मणि का कहना है कि पहले बजट आम आदमी की जेब और जरूरतों पर केंद्रित होता थानई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी। इस बार बजट में रेलवे सेवाओं को लेकर यात्रियों की उम्मीदें बढ़ी हैं। करोड़ों लोगों की नजर है कि क्या बजट में आम आदमी की जेब और उनकी दैनिक जरूरतों को ध्यान में रखा जाएगा। प्रीमियम ट्रेनों और बड़े निवेशों के बावजूद आम यात्री आज भी सफाई, सुविधा, भीड़ और समयबद्धता जैसी समस्याओं से असंतुष्ट है।

    रेल यात्री चाहते हैं कि कन्फर्म टिकट सस्ती दरों पर उपलब्ध हों और वेटिंग लिस्ट की समस्या कम हो। इसके साथ ही लोकल और मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों की समयबद्धता सुधारने की उम्मीद है। यात्रियों का कहना है कि प्रीमियम ट्रेनों की तुलना में आम ट्रेनों की सेवाओं में सुधार जरूरी है।