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  • नरेंदर बेरवाल ने पीएम मोदी को सुनाया पाकिस्तान बॉक्सर से जुड़ा मजेदार किस्सा, नाम को लेकर हुई टिप्पणी पर हंस पड़े प्रधानमंत्री

    नरेंदर बेरवाल ने पीएम मोदी को सुनाया पाकिस्तान बॉक्सर से जुड़ा मजेदार किस्सा, नाम को लेकर हुई टिप्पणी पर हंस पड़े प्रधानमंत्री

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 अगस्त को स्कॉटलैंड के ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पदक जीतने वाले भारतीय खिलाड़ियों से मुलाकात की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के लिए बधाई दी और प्रतियोगिता में उनके प्रदर्शन की सराहना की। बातचीत के दौरान खिलाड़ियों ने अपने खेल करियर से जुड़े कई अनुभव भी साझा किए।

    इसी मुलाकात के दौरान कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीतने वाले हैवीवेट बॉक्सर नरेंदर बेरवाल ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने पुराने मुकाबले से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। यह घटना वर्ष 2015 में आयोजित वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स की है, जब नरेंदर का सामना पाकिस्तान के एक बॉक्सर से हुआ था।

    नरेंदर बेरवाल ने बताया कि यह पाकिस्तान के बॉक्सर के खिलाफ उनकी पहली फाइट थी। मुकाबले से पहले भारतीय सेना की ओर से उन्हें खास तौर पर कहा गया था कि पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबला हारना नहीं है। इसके बाद उन्होंने मुकाबले में पूरी ताकत के साथ प्रदर्शन किया और शुरुआती दोनों राउंड में बढ़त बना ली।

    नरेंदर के मुताबिक उन्होंने पहला राउंड 4-1 से जीता, जबकि दूसरे राउंड में भी 3-2 से बढ़त हासिल की। मुकाबला काफी कड़ा था और इसी दौरान दोनों खिलाड़ियों के सिर आपस में जोर से टकरा गए। फाइट खत्म होने के बाद दोनों खिलाड़ियों को इलाज के लिए अस्पताल जाना पड़ा और उन्हें टांके भी लगवाने पड़े।

    बेरवाल ने बताया कि मुकाबले के दौरान उनके साथ भारतीय सेना के कोच नरेंद्र राणा भी मौजूद थे। फाइट के बाद पाकिस्तानी बॉक्सर ने उनसे बातचीत की। कुछ देर सोचने के बाद उसने नरेंदर से कहा कि वह उनसे एक बात कहना चाहता है। नरेंदर ने उसे अपनी बात कहने के लिए कहा।

    इसके बाद पाकिस्तानी बॉक्सर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि भारतीय बॉक्सर का नाम नरेंदर है, उनके कोच का नाम नरेंद्र राणा है और भारत के प्रधानमंत्री का नाम भी नरेंद्र है। उसने आगे कहा कि अब उसे नरेंद्र नाम से ही नफरत हो गई है। मुकाबले के तनाव के बीच कही गई इस बात ने माहौल को हल्का कर दिया था।

    नरेंदर बेरवाल ने जब प्रधानमंत्री मोदी के सामने यह पुराना किस्सा दोहराया तो प्रधानमंत्री भी हंस पड़े। खिलाड़ियों के साथ बातचीत के दौरान सामने आया यह प्रसंग मुलाकात के हल्के-फुल्के पलों में शामिल रहा। बेरवाल ने अपने अनुभव को सहज अंदाज में साझा किया, जिसे सुनकर वहां मौजूद माहौल भी खुशनुमा हो गया।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीतने के बाद नरेंदर बेरवाल की प्रधानमंत्री के साथ हुई यह बातचीत उनके खेल सफर से जुड़े एक पुराने अनुभव को फिर सामने ले आई। एक तरफ यह मुकाबला भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ियों के बीच खेल प्रतिस्पर्धा से जुड़ा था, वहीं दूसरी ओर मुकाबले के बाद हुई बातचीत ने खेल के मैदान से बाहर का एक अलग मानवीय पहलू भी दिखाया।

    प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी उपलब्धियों और अनुभवों को साझा किया। नरेंदर बेरवाल का 2015 का यह किस्सा इसी बातचीत का खास हिस्सा बना, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने भी हंसी के साथ सुना।

  • ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में दर्दनाक हादसा, हाई बार स्पर्धा के दौरान गंभीर रूप से चोटिल हुए ब्रिटिश जिम्नास्ट

    ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में दर्दनाक हादसा, हाई बार स्पर्धा के दौरान गंभीर रूप से चोटिल हुए ब्रिटिश जिम्नास्ट

    नई दिल्ली । ग्लास्गो में आयोजित हो रहे राष्ट्रमंडल खेल 2026 के जिम्नास्टिक पुरुष टीम फाइनल मुकाबले के दौरान एक बेहद गंभीर और भयावह हादसा देखने को मिला। ब्रिटेन के उन्नीस वर्षीय युवा जिम्नास्ट गेब्रियल लैंगटन हाई बार स्पर्धा में अपना प्रदर्शन प्रस्तुत कर रहे थे, तभी अचानक ग्रिप छूट जाने के कारण वे बेहद अनियंत्रित होकर सिर के बल सीधे फ्लोर पर गिर पड़े। इस अचानक घटी घटना के बाद एरिना में मौजूद दर्शक, कोच और साथी खिलाड़ी स्तब्ध रह गए और परिसर में कुछ देर के लिए गहरा सन्नाटा छा गया।

    घटना के तुरंत बाद आयोजन स्थल पर मौजूद मेडिकल टीम ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मोर्चा संभाला। चोटिल खिलाड़ी जमीन से उठने में पूरी तरह असमर्थ थे, जिसके बाद डॉक्टरों ने मौके पर ही प्राथमिक उपचार शुरू किया। खिलाड़ी की गर्दन और रीढ़ की हड्डी को सुरक्षित रखने के लिए विशेष मेडिकल सपोर्ट लगाया गया और उन्हें तुरंत स्ट्रेचर के जरिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। इस गंभीर आपात स्थिति के कारण प्रतियोगिता को कुछ समय के लिए रोक देना पड़ा।

    चिकित्सकीय जांच और अस्पताल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, अस्पताल पहुंचने के बाद खिलाड़ी पूरी तरह होश में आ गए थे और डॉक्टरों से संवाद कर रहे थे। उनके सिर और रीढ़ की हड्डी के कई विस्तृत स्कैन और परीक्षण किए गए, जिनकी रिपोर्ट सकारात्मक आई है। किसी भी प्रकार की गंभीर या जानलेवा आंतरिक चोट की पुष्टि न होने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी, जिसके बाद वे अपनी टीम के पास वापस लौट आए हैं जहां डॉक्टरों की देखरेख जारी है।

    इस दुर्घटना के कारण प्रतियोगिता में भाग ले रहे अन्य खिलाड़ियों के मनोबल पर गहरा असर पड़ा। इसके बावजूद टीमों ने अपने खेल को आगे बढ़ाया और फाइनल मुकाबला पूरा किया। इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक कनाडा की टीम ने अपने नाम किया, जबकि पूर्व विजेता ब्रिटेन को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। ऑस्ट्रेलियाई दल ने इस मुकाबले में तीसरा स्थान हासिल कर कांस्य पदक पर कब्जा जमाया।

    खेल विशेषज्ञों और साथी एथलीटों ने इस घटना के बाद कहा कि जिम्नास्टिक एक अत्यधिक जोखिम भरा और कठिन खेल है, जिसमें मामूली सी चूक भी गंभीर परिणाम ला सकती है। हालांकि खिलाड़ी की स्थिति अब खतरे से बाहर बताई जा रही है और उनके शीघ्र पूर्ण स्वस्थ होने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय भारोत्तोलकों का शानदार दबदबा, मीराबाई चानू की ऐतिहासिक स्वर्ण हैट्रिक

    ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय भारोत्तोलकों का शानदार दबदबा, मीराबाई चानू की ऐतिहासिक स्वर्ण हैट्रिक

    नई दिल्ली । ग्लास्गो में आयोजित हो रहे राष्ट्रमंडल खेल 2026 के चौथे दिन भारतीय एथलीटों ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश को गौरवान्वित किया है। खेल प्रतियोगिता के चौथे दिन भारतीय दल ने कुल तीन पदक अपने नाम किए और ये तीनों ही सफलताएं भारोत्तोलन स्पर्धा में हासिल हुईं। स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने एक बार फिर अपनी अंतरराष्ट्रीय बादशाहत साबित करते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया, जबकि पुरुषों के वर्ग में ऋषिकांता सिंह और आर मुथुपांडी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए देश के लिए रजत पदक जीते। इन सफलताओं के साथ ही प्रतियोगिता में भारत के कुल पदकों की संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    महिलाओं के 48 किलोग्राम भारवर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हुए ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू ने राष्ट्रमंडल खेलों में लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीतकर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया। उन्होंने कुल 190 किलोग्राम वजन उठाकर अपने वर्ग में शीर्ष स्थान हासिल किया। शुरुआती प्रयासों में मिली असफलता से बिना विचलित हुए उन्होंने स्नैच और क्लीन एंड जर्क दोनों चरणों में जबरदस्त वापसी की और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को भारी अंतर से पछाड़ते हुए रिकॉर्ड कायम किया। यह मौजूदा खेलों में भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक भी साबित हुआ।

    पुरुषों के भारोत्तोलन मुकाबलों में मणिपुर के युवा भारोत्तोलक ऋषिकांता सिंह ने अपनी शारीरिक चोटों की परवाह न करते हुए ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। 60 किलोग्राम वर्ग में भाग लेते हुए उन्होंने स्नैच स्पर्धा में राष्ट्रमंडल खेलों के रिकॉर्ड की बराबरी की। हालांकि घुटने की तकलीफ के चलते क्लीन एंड जर्क के अंतिम प्रयासों में उन्हें संघर्ष करना पड़ा, इसके बावजूद उन्होंने कुल 264 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक अपनी झोली में डाला। इसी स्पर्धा के एक अन्य मुकाबले में आर मुथुपांडी ने भी अपनी क्षमता का प्रदर्शन करते हुए कुल 286 किलोग्राम भार उठाया और भारत के लिए एक और रजत पदक सुनिश्चित किया।

    मुक्केबाजी रिंग से भी भारतीय दल के लिए सकारात्मक खबरें सामने आईं, जहां महिला और पुरुष मुक्केबाजों ने अपने-अपने मुकाबलों में दबदबा बनाया। महिला 54 किलोग्राम वर्ग में मुक्केबाज प्रीति ने शानदार खेल दिखाते हुए विपक्षी खिलाड़ी को दूसरे ही दौर में परास्त कर दिया और क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया। पुरुष 55 किलोग्राम वर्ग के एक बेहद रोमांचक और एकतरफा मुकाबले में जादूमणि सिंह ने अपने प्रतिद्वंद्वी को सर्वसम्मत फैसले से हराकर अंतिम आठ में अपनी जगह पक्की की। हालांकि 65 किलोग्राम वर्ग में आदित्य प्रताप यादव को कड़े संघर्ष के बाद अंकों के आधार पर हार का सामना करना पड़ा।

    अन्य खेल स्पर्धाओं में भारत का दिन मिला-जुला रहा। तैराकी के पुरुषों की 4×200 मीटर फ्रीस्टाइल रिले वर्ग में भारतीय टीम ने फाइनल तक का सफर तय किया, लेकिन अंतिम दौर में कड़े मुकाबले के बीच वे छठे स्थान पर रहे और पदक से चूक गए। इसके अलावा लॉन बॉल्स, जिम्नास्टिक और व्हीलचेयर बास्केटबॉल की स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी ओर से कड़ी चुनौती पेश की, हालांकि वे अंतिम चरण तक पहुंचने में असफल रहे। तपन मोहंती ने आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक के फाइनल में संघर्ष किया, पर वे पदक तालिका में स्थान बनाने से थोड़ा पीछे रह गए।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स का मेजबान बनने की दौड़ में कौन कितना आगे जानिए 1930 से 2026 तक का पूरा इतिहास

    कॉमनवेल्थ गेम्स का मेजबान बनने की दौड़ में कौन कितना आगे जानिए 1930 से 2026 तक का पूरा इतिहास


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित बहु खेल आयोजनों में शामिल हैं जिनका इतिहास लगभग एक शताब्दी पुराना है। इन खेलों की शुरुआत वर्ष 1930 में ब्रिटिश एम्पायर गेम्स के नाम से हुई थी। उस समय इसमें केवल ब्रिटिश साम्राज्य से जुड़े देशों ने हिस्सा लिया था लेकिन समय के साथ इसका स्वरूप बदलता गया और आज यह राष्ट्रमंडल देशों का सबसे बड़ा खेल महाकुंभ बन चुका है। इन खेलों का आयोजन हर चार वर्ष में किया जाता है हालांकि द्वितीय विश्व युद्ध के कारण 1942 और 1946 में इनका आयोजन नहीं हो सका था।

    पहले संस्करण का आयोजन कनाडा के हैमिल्टन शहर में हुआ था जहां केवल 11 देशों ने भाग लिया था। इसके बाद प्रतियोगिता का विस्तार लगातार बढ़ता गया और 2022 तक इसमें 72 देशों की भागीदारी दर्ज की गई। 2026 के ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भी कई देश अपनी चुनौती पेश करेंगे और खेलों का रोमांच नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा।

    मेजबानी के रिकॉर्ड की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया इस मामले में सबसे आगे है। ऑस्ट्रेलिया ने अब तक पांच बार कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की है और इस उपलब्धि के साथ वह सबसे सफल मेजबान देश बना हुआ है। कनाडा चार बार इन खेलों का आयोजन कर दूसरे स्थान पर है जबकि स्कॉटलैंड 2026 में चौथी बार मेजबानी करेगा। इंग्लैंड और न्यूजीलैंड तीन तीन बार इन खेलों की मेजबानी कर चुके हैं।

    भारत ने वर्ष 2010 में नई दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स का सफल आयोजन किया था। यह पहला अवसर था जब भारत को इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की मेजबानी मिली। इस आयोजन ने देश की खेल अधोसंरचना को नई पहचान दी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की आयोजन क्षमता को भी मजबूती से स्थापित किया। मलेशिया जमैका और वेल्स भी एक एक बार इन खेलों की मेजबानी कर चुके हैं।

    अविभाजित भारत ने 1934 और 1938 के संस्करणों में ब्रिटिश शासन के अधीन भाग लिया था जबकि 1947 में स्वतंत्रता के बाद भारत और पाकिस्तान ने अलग अलग देशों के रूप में प्रतियोगिता में हिस्सा लेना शुरू किया। बाद में 1971 में स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद बांग्लादेश भी इस खेल परिवार का हिस्सा बना। ऑस्ट्रेलिया कनाडा इंग्लैंड न्यूजीलैंड स्कॉटलैंड और वेल्स ऐसे देश हैं जिन्होंने अब तक आयोजित प्रत्येक कॉमनवेल्थ गेम्स में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।

    वर्ष 2026 के कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन 28 जुलाई से 8 अगस्त तक स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में होगा। यह शहर चौथी बार इन खेलों की मेजबानी करेगा। इस बार भी दुनिया भर के खिलाड़ी पदकों के लिए संघर्ष करेंगे और राष्ट्रमंडल देशों के बीच खेल भावना तथा प्रतिस्पर्धा का शानदार उदाहरण देखने को मिलेगा।

    करीब सौ वर्षों का सफर तय कर चुके कॉमनवेल्थ गेम्स आज केवल खेल प्रतियोगिता नहीं बल्कि राष्ट्रमंडल देशों के बीच सहयोग मित्रता और खेल संस्कृति का सबसे बड़ा मंच बन चुके हैं। हर नया संस्करण इस गौरवशाली इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ता है।

  • भारत-ऑस्ट्रेलिया ने खेल सहयोग को दी नई उड़ान, कबड्डी से ऑस्ट्रेलियन फुटबॉल तक साझा रोडमैप, खिलाड़ियों और खेल विज्ञान पर रहेगा विशेष फोकस

    भारत-ऑस्ट्रेलिया ने खेल सहयोग को दी नई उड़ान, कबड्डी से ऑस्ट्रेलियन फुटबॉल तक साझा रोडमैप, खिलाड़ियों और खेल विज्ञान पर रहेगा विशेष फोकस

    नई दिल्ली । भारत और ऑस्ट्रेलिया ने खेल सहयोग को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से एक व्यापक स्पोर्ट्स रोडमैप पर सहमति बनाई है। इस पहल का लक्ष्य दोनों देशों के बीच खिलाड़ियों के विकास, खेल विज्ञान, प्रशिक्षण, निवेश और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में सहयोग को मजबूत करना है। इस रोडमैप के माध्यम से खेलों को केवल प्रतिस्पर्धा तक सीमित न रखते हुए शिक्षा, तकनीक, उद्योग और सांस्कृतिक साझेदारी के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में विकसित करने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे।

    यह रोडमैप वर्ष 2023 में दोनों देशों के बीच हुए खेल सहयोग समझौते को आगे बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में 2030 राष्ट्रमंडल खेल, 2032 ब्रिस्बेन ओलंपिक और पैरालंपिक सहित बड़े वैश्विक आयोजनों को ध्यान में रखते हुए सहयोग के ऐसे क्षेत्रों की पहचान की गई है, जिनसे दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिल सके। इसके तहत अनुभवों का आदान-प्रदान, संयुक्त प्रशिक्षण और खेल प्रबंधन में साझेदारी को प्राथमिकता दी जाएगी।

    दोनों देशों ने खेल प्रशासन की अलग-अलग व्यवस्थाओं का सम्मान करते हुए संस्थागत सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। खेल संगठनों, विश्वविद्यालयों, राज्य सरकारों, निजी कंपनियों और सामुदायिक संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित कर नई परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। उपलब्ध संसाधनों और साझा प्राथमिकताओं के आधार पर विभिन्न कार्यक्रमों का चरणबद्ध तरीके से क्रियान्वयन किया जाएगा, जिससे सहयोग का दायरा लगातार विस्तारित हो सके।

    रोडमैप में खिलाड़ियों और कोचों के क्षमता विकास को विशेष महत्व दिया गया है। भारत में हाई-परफॉर्मेंस प्रशिक्षण केंद्रों के विकास, पैरा खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाओं, प्रशिक्षकों के आदान-प्रदान और ‘ट्रेन द ट्रेनर’ मॉडल के माध्यम से आधुनिक प्रशिक्षण प्रणाली को बढ़ावा दिया जाएगा। भारतीय खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया के उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ने तथा ऑस्ट्रेलिया में योग और भारतीय खेल परंपराओं के प्रचार पर भी ध्यान दिया जाएगा।

    खेल विज्ञान और तकनीक इस साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार होंगे। दोनों देशों के विश्वविद्यालय और अनुसंधान संस्थान खिलाड़ियों के प्रदर्शन विश्लेषण, चोटों की रोकथाम, खेल पोषण, रिकवरी तकनीक, वियरेबल तकनीक और पैरा खेलों से जुड़े शोध पर मिलकर काम करेंगे। साथ ही डोपिंग रोधी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए संबंधित संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाया जाएगा तथा खेल नैतिकता और पारदर्शिता को मजबूत करने के लिए संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

    इस साझेदारी के तहत खेल संस्कृति के विस्तार पर भी विशेष जोर दिया गया है। ऑस्ट्रेलिया में कबड्डी और खो-खो जैसे भारतीय पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने की योजना है, जबकि भारत में ऑस्ट्रेलियन फुटबॉल लीग और बास्केटबॉल जैसे खेलों की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए प्रदर्शनी मुकाबलों और विशेष आयोजनों का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही भारत में नियमित रूप से बिग बैश लीग के मुकाबले आयोजित करने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे, जिससे दोनों देशों के खेल प्रेमियों को नए अनुभव मिल सकें।

    रोडमैप में खेल उद्योग, खेल उपकरण निर्माण, मीडिया, प्रसारण, आयोजन प्रबंधन और स्टार्टअप क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की भी योजना शामिल है। भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों के बीच व्यावसायिक सहयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि खेल अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सके। इसके साथ ही महिलाओं की भागीदारी, नेतृत्व और उच्च प्रदर्शन वाले खेलों में उनके अवसरों को बढ़ाने के लिए संयुक्त कार्यक्रमों और द्विपक्षीय प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यापक साझेदारी दोनों देशों के खेल संबंधों को नई दिशा देने के साथ भविष्य की अंतरराष्ट्रीय खेल तैयारियों को भी मजबूत आधार प्रदान करेगी।