Tag: Compensation Dispute

  • डॉन 3' विवाद: क्या रणवीर सिंह को चुकाने होंगे 40 करोड़? फरहान अख्तर की कंपनी के साथ तकरार तेज

    डॉन 3' विवाद: क्या रणवीर सिंह को चुकाने होंगे 40 करोड़? फरहान अख्तर की कंपनी के साथ तकरार तेज


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के गलियारों में इन दिनों एक बड़ी कानूनी और वित्तीय जंग की आहट सुनाई दे रही है। खबर है कि सुपरस्टार रणवीर सिंह और फरहान अख्तर के प्रोडक्शन हाउस एक्सेल एंटरटेनमेंट के बीच फिल्म ‘डॉन 3’ को लेकर विवाद गहरा गया है। मामला इतना बढ़ चुका है कि प्रोडक्शन हाउस ने रणवीर सिंह से 40 करोड़ रुपये के भारी-भरकम मुआवजे कंपनसेशन की मांग की है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब रणवीर सिंह ने कथित तौर पर ‘डॉन 3’ से अपने हाथ पीछे खींच लिए जिसके बाद फिल्म का भविष्य अधर में लटक गया है।

    ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक एक्सेल एंटरटेनमेंट का तर्क है कि रणवीर सिंह की वजह से उन्हें न केवल समय का नुकसान हुआ है बल्कि भारी आर्थिक चपत भी लगी है। फिल्म के प्री-प्रोडक्शन पर काफी पैसा खर्च किया जा चुका था। चर्चा तो यहाँ तक है कि इस घाटे की भरपाई के लिए प्रोडक्शन हाउस को अपने कुछ कर्मचारियों तक को नौकरी से निकालना पड़ा है। कंपनी का कहना है कि रणवीर सिंह ने पहले स्क्रिप्ट को अपनी मंजूरी दी थी और उनकी सहमति के बाद ही प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया गया था ऐसे में अब पीछे हटने से हुए नुकसान की जिम्मेदारी एक्टर की ही बनती है।

    दूसरी ओर रणवीर सिंह का पक्ष इस मामले में बिल्कुल अलग है। सूत्रों की मानें तो रणवीर फिल्म की स्क्रिप्ट से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने कई बार स्क्रिप्ट में बदलाव के सुझाव दिए थे लेकिन बात नहीं बनी। रणवीर के मुताबिक रचनात्मक मतभेदों के चलते फिल्म छोड़ना एक पेशेवर फैसला है और इसके लिए 40 करोड़ रुपये का मुआवजा देना उनकी जिम्मेदारी नहीं है। हाल ही में दोनों पक्षों के बीच करीब दो घंटे तक लंबी बातचीत हुई लेकिन घंटों चली इस बैठक का कोई नतीजा नहीं निकला। अब खबर आ रही है कि इस विवाद को सुलझाने के लिए ‘प्रोड्यूसर गिल्ड ऑफ इंडिया’ को भी शामिल किया जा सकता है।

    एक तरफ जहाँ ‘डॉन 3’ को लेकर खींचतान जारी है वहीं रणवीर सिंह के फैंस के लिए एक राहत भरी खबर भी है। अभिनेता अपनी हालिया रिलीज फिल्म ‘धुरंधर’ की सफलता का आनंद ले रहे हैं। फिल्म के पहले भाग में जसकीरत सिंह रंगी के रूप में उनके प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा। अब हर तरफ ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ का इंतजार हो रहा है जो 19 मार्च को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है। लेकिन बड़ा सवाल अब भी यही बना हुआ है कि क्या ‘डॉन 3’ का यह विवाद कोर्ट तक जाएगा या फिर बॉलीवुड के ये दो दिग्गज आपसी सहमति से कोई रास्ता निकालेंगे?

  • पांगरी बांध परियोजना: अब बच्चों ने संभाली आंदोलन की कमान; CM को लिखा पत्र, माँगा जमीन का दोगुना मुआवजा

    पांगरी बांध परियोजना: अब बच्चों ने संभाली आंदोलन की कमान; CM को लिखा पत्र, माँगा जमीन का दोगुना मुआवजा


    बुरहानपुर । मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में पांगरी बांध परियोजना को लेकर चल रहा विवाद अब एक भावुक मोड़ पर पहुँच गया है। अपनी पुश्तैनी जमीन और आजीविका बचाने की जंग लड़ रहे किसानों के बाद अब उनके मासूम बच्चों ने भी आंदोलन के मैदान में कदम रख दिया है। रविवार को प्रभावित किसानों के छोटे-छोटे बच्चों ने हाथों में विरोध की तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम पत्र लिखकर अपनी व्यथा सुनाई। बच्चों की एक ही मांग है हमारी जमीन का सही दाम दो, हमें दोगुना मुआवजा दो।

    अनोखे प्रदर्शनों के बाद भी सरकार मौन मुआवजे की मांग को लेकर पांगरी बांध प्रभावित किसान लंबे समय से संघर्षरत हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं निकलने के कारण आक्रोश बढ़ता जा रहा है। किसान इससे पहले अपनी बात सरकार तक पहुँचाने के लिए ‘पत्थर खाओ आंदोलन’, ‘भैंस के आगे बीन बजाना’ और ‘अर्धनग्न प्रदर्शन’ जैसे कई अनूठे तरीके अपना चुके हैं। इन तमाम कोशिशों के बावजूद जब शासन-प्रशासन की नींद नहीं टूटी, तो अब घर के नौनिहालों ने अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए मोर्चा खोल दिया है।

    हाथों में तख्तियां और आँखों में भविष्य की चिंता रविवार का नजारा बेहद हृदयविदारक था, जब स्कूल जाने की उम्र वाले बच्चे अपने माता-पिता के साथ आंदोलन स्थल पर डटे नजर आए। बच्चों के हाथों में मौजूद तख्तियों पर मुख्यमंत्री से गुहार लगाते संदेश लिखे थे। बच्चों का कहना है कि उनकी जमीन ही उनके भविष्य का आधार है; यदि उसका उचित मुआवजा नहीं मिला, तो उनकी पढ़ाई और जीवन पर संकट आ जाएगा। उन्होंने पत्र के माध्यम से मांग की है कि वर्तमान बाजार दर के हिसाब से जमीन का दोगुना मुआवजा दिया जाए ताकि विस्थापन के बाद परिवार दोबारा खड़ा हो सके।

    बढ़ता दबाव और प्रशासनिक चुनौती किसानों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत उनकी बर्बादी से न चुकाई जाए। बच्चों के आंदोलन में कूदने से इस मामले ने अब मानवीय और नैतिक रूप ले लिया है, जिससे जिला प्रशासन और राज्य सरकार पर दबाव बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर बच्चों के प्रदर्शन की तस्वीरें वायरल होने के बाद अब इस मुद्दे पर प्रदेश भर की नजरें टिकी हैं। पांगरी बांध परियोजना का भविष्य फिलहाल अधर में नजर आ रहा है, क्योंकि किसान अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इन बच्चों की पुकार पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या प्रशासन संवाद का कोई नया रास्ता खोज पाता है।