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  • पारिवारिक विवाद पहुंचा पुलिस के पास: बेटों की शिकायत लेकर एसपी ऑफिस पहुंचे माता-पिता

    पारिवारिक विवाद पहुंचा पुलिस के पास: बेटों की शिकायत लेकर एसपी ऑफिस पहुंचे माता-पिता


    झाबुआ  झाबुआ जिले के पेटलावद तहसील अंतर्गत ग्राम हिरानिनामापाड़ा में एक हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहां बुजुर्ग दंपति ने अपने ही बेटों और बहुओं पर लगातार प्रताड़ना, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित दंपति रतनीबाई और उनके पति नाकु डांगी मंगलवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई।

    जमीन बांटने के बाद भी नहीं थमी प्रताड़ना
    पीड़ित दंपति ने बताया कि उन्होंने अपनी पूरी जमीन-जायदाद पहले ही अपने तीनों बेटों-धनसिंग, डूंगरसिंग और एक अन्य पुत्र के बीच बांट दी थी। इसके बावजूद उनके पास बची हुई मात्र एक बीघा जमीन से ही वे किसी तरह जीवनयापन कर रहे हैं। लेकिन अब आरोप है कि बेटों और बहुओं द्वारा लगातार उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है।

    शराब के नशे में मारपीट और गंभीर चोट का आरोप
    दंपति के अनुसार, बीते रविवार और 23 मई को बेटों और उनकी पत्नियों ने शराब के नशे में उनके साथ बेरहमी से मारपीट की। नाकु डांगी ने आरोप लगाया कि उन्हें पत्थर मारकर घायल किया गया, जिससे उनके पैर में गंभीर चोट आई है। वहीं, रतनीबाई ने बताया कि आरोपियों ने उनका मकान तोड़ दिया, जिसके चलते उन्हें भीषण गर्मी में खुले बरामदे में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।

    धमकी देकर कहा-‘पुलिस हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती’
    पीड़ित दंपति ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने विरोध किया तो बेटों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी और कहा कि अब जमीन और मकान उनके कब्जे में हैं तथा पुलिस भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। दंपति ने यह भी बताया कि जब वे रायपुरिया थाने में शिकायत करने पहुंचे तो आरोपी मोटरसाइकिल से उनका पीछा करते हुए वहां तक पहुंच गए, जिससे वे बेहद भयभीत हो गए।

    एसपी से सख्त कार्रवाई की मांग
    लगातार प्रताड़ना और जान के खतरे से परेशान बुजुर्ग दंपति ने पुलिस अधीक्षक देवेन्द्र पाटीदार से निवेदन किया है कि उनके बेटों और बहुओं के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए और उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए, ताकि वे अपने शेष जीवन को भयमुक्त होकर जी सकें।

    यह मामला न केवल पारिवारिक टूटन की दर्दनाक तस्वीर पेश करता है, बल्कि बुजुर्गों की सुरक्षा और सामाजिक मूल्यों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।