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  • शिवपुरी के भदैया कुंड पर महिला और उसके दोस्त की बेल्ट से पिटाई, पति पर मामला दर्ज..

    शिवपुरी के भदैया कुंड पर महिला और उसके दोस्त की बेल्ट से पिटाई, पति पर मामला दर्ज..


    शिवपुरी जिले: में प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भदैया कुंड पर एक महिला और उसके दोस्त के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि महिला के पति गोविंद ने अपने चचेरे भाई के साथ मिलकर दोनों की बेल्ट से पिटाई की। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसके बाद मामला चर्चा में आ गया। महिला की शिकायत पर पुलिस ने उसके पति के खिलाफ मारपीट की धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है।

    जानकारी के अनुसार, महिला मंगलवार दोपहर अपने दोस्त के साथ भदैया कुंड घूमने पहुंची थी। इसी दौरान उसका पति गोविंद भी वहां पहुंच गया। पत्नी को दूसरे युवक के साथ देखकर वह नाराज हो गया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर गोविंद ने अपने चचेरे भाई के साथ मिलकर महिला और उसके दोस्त पर बेल्ट से हमला कर दिया।

    मारपीट के दौरान महिला के दोस्त के पैर बांधने का भी आरोप लगाया गया है। बताया गया है कि युवक के पैर बांधने के बाद दोनों की बेल्टों से पिटाई की गई। घटना से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद यह मामला लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, घटना के सभी पहलुओं और आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के आधार पर ही हो सकेगी।

    घटना की सूचना मिलने पर डायल 112 पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस संबंधित लोगों को थाने ले गई, जहां मामले से जुड़ी कार्रवाई की गई। महिला की शिकायत के आधार पर उसके पति गोविंद के खिलाफ मारपीट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। उपलब्ध जानकारी में पति के चचेरे भाई के खिलाफ दर्ज कार्रवाई का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है।

    बताया गया है कि महिला और उसके पति के बीच पहले से विवाद चल रहा था। इसी कारण महिला पिछले कुछ दिनों से अपने मायके में रह रही थी। मंगलवार को भदैया कुंड पर दोनों का आमना-सामना हुआ। इसके बाद विवाद बढ़ा और कथित तौर पर महिला तथा उसके दोस्त के साथ मारपीट हुई। पुलिस इस मामले में सामने आए आरोपों की जांच कर रही है।

    भदैया कुंड शिवपुरी का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है, जहां लोग घूमने और समय बिताने के लिए पहुंचते हैं। ऐसे स्थान पर महिला और उसके दोस्त के साथ कथित मारपीट की घटना सामने आने से मामला सुर्खियों में है। घटना के वीडियो के प्रसार के बाद पुलिस की कार्रवाई और जांच पर ध्यान केंद्रित है।

    फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार महिला की शिकायत पर उसके पति के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। मारपीट की परिस्थितियों, इसमें शामिल लोगों की भूमिका और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। आरोपों को अंतिम निष्कर्ष मानने के बजाय पुलिस की जांच और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।

  • पूर्व डीएसपी की पुत्रवधु ने ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना और संपत्ति हड़पने के आरोप लगाए, छह लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

    पूर्व डीएसपी की पुत्रवधु ने ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना और संपत्ति हड़पने के आरोप लगाए, छह लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी में पूर्व ट्रैफिक डीएसपी हरिवंश कन्हौआ के परिवार से जुड़ा विवाद पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक पहुंच गया है। उनकी पुत्रवधु प्रियांशु शर्मा ने ससुराल पक्ष के छह सदस्यों के खिलाफ शिकायत देकर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना, संपत्ति हड़पने की कोशिश तथा जान से मारने की धमकी देने जैसे आरोप लगाए हैं। प्रियांशु ने पुलिस से मामले में कार्रवाई करने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। फिलहाल ये आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। मामले में पुलिस की जांच और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    प्रियांशु शर्मा ने अपने आवेदन में बताया कि उनकी शादी जनवरी 2022 में आकाश कन्हौआ के साथ हुई थी। शिकायत के मुताबिक, 23 दिसंबर 2025 को आकाश 14 लाख रुपये की व्यवस्था करने के लिए घर से निकले थे। इसके अगले दिन प्रियांशु को जबलपुर में उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने की सूचना मिली। पति की मौत के हालात को लेकर शिकायत में चिंता जताई गई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में उनकी मौत के कारणों और उससे संबंधित जांच के अंतिम निष्कर्ष का उल्लेख नहीं है।

    प्रियांशु का आरोप है कि पति की मौत के लगभग सवा महीने बाद भोपाल स्थित मकान से 23 लाख रुपये की चोरी के मामले में उन पर आरोप लगाया गया। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में पुलिस जांच और फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला यानी एफएसएल की जांच में उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला। इस मामले में जांच से संबंधित दस्तावेजों और निष्कर्षों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

    शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि सास-ससुर और जेठ की ओर से उन पर दूसरी शादी करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, बेटी सान्वी को अपने पास से छोड़ने के लिए भी दबाव बनाया गया। प्रियांशु ने दावा किया कि पति के नाम पर मौजूद संपत्ति अपने नाम कराने के लिए भी उनसे लगातार दबावपूर्वक बातचीत की जाती रही। इन आरोपों के संबंध में दूसरे पक्ष का बयान उपलब्ध नहीं है।

    प्रियांशु ने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि उन्हें इंदौर में नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। उनका आरोप है कि अक्टूबर 2026 में अपने पिता के साथ बातचीत के दौरान उनसे जबरन समझौते से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें घर से निकालने की बात कही गई। शिकायतकर्ता के मुताबिक, इन परिस्थितियों के कारण उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा और अब उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता है।

    प्रियांशु शर्मा ने जिन छह लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, उनमें उनके ससुर हरिवंश कन्हौआ, सास सरोज कन्हौआ, जेठ विकास कन्हौआ, जेठानी भावना कन्हौआ, ननद ऋतु अवस्थी और नंदोई सौरभ अवस्थी के नाम शामिल हैं। उन्होंने पुलिस से शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करने, संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने और सुरक्षा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

    मामले में अब पुलिस की जांच महत्वपूर्ण होगी। पति की संदिग्ध मौत, चोरी के आरोप, संपत्ति को लेकर विवाद और कथित प्रताड़ना से जुड़े पहलुओं की वास्तविक स्थिति संबंधित दस्तावेजों, बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों को सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। पुलिस की कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

  • शिवपुरी में तीन बच्चों की मां के लापता होने का मामला, पति ने नकदी और सोने के जेवर ले जाने का लगाया आरोप

    शिवपुरी में तीन बच्चों की मां के लापता होने का मामला, पति ने नकदी और सोने के जेवर ले जाने का लगाया आरोप

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी जिले में तीन बच्चों की मां के लापता होने का मामला सामने आया है। सुरवाया थाना क्षेत्र के ग्राम बिची मोहनगढ़ निवासी धर्मवीर गुर्जर ने आरोप लगाया है कि उसकी पत्नी पूनम गुर्जर 30 सितंबर की रात घर में रखे दो लाख रुपये नकद और पांच तोला सोने के जेवर लेकर चली गई। धर्मवीर का दावा है कि उसकी पत्नी गौशाला क्षेत्र में रहने वाले जीतू गुर्जर के साथ गई है। मामले में शिकायत लेकर वह पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा और कार्रवाई की मांग की।

    धर्मवीर के अनुसार, उसकी शादी वर्ष 2017 में समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन में पूनम गुर्जर के साथ हुई थी। शादी के बाद उनके तीन बच्चे हुए। उसने बताया कि वह खेती करके परिवार का भरण-पोषण करता था और उसके पास करीब 40 बीघा कृषि भूमि है। बच्चों की पढ़ाई और बेहतर भविष्य को ध्यान में रखते हुए उसने शिवपुरी शहर के गौशाला-लुधावली क्षेत्र में एक मकान भी लिया था, ताकि बच्चों को शिक्षा के बेहतर अवसर मिल सकें।

    धर्मवीर ने अपने आवेदन में आरोप लगाया कि इसी दौरान उसकी पत्नी की गौशाला क्षेत्र में रहने वाले जीतू गुर्जर से नजदीकियां बढ़ गईं। उसके मुताबिक, इस संबंध में जानकारी मिलने के बाद उसने पत्नी को समझाने की कोशिश की, लेकिन परिस्थितियों में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उसने शिवपुरी स्थित मकान बेचने का निर्णय लिया। धर्मवीर का कहना है कि उसने मकान चार लाख रुपये में बेच दिया और इसके बाद पत्नी तथा बच्चों को लेकर अपने गांव बिची मोहनगढ़ लौट आया।

    पीड़ित के आरोप के मुताबिक, 30 सितंबर की रात पूनम घर में रखे दो लाख रुपये नकद और पांच तोला सोने के जेवर लेकर चली गई। धर्मवीर ने दावा किया कि इस मामले में जीतू गुर्जर के मौसा इंदर गुर्जर और उसके दोस्त नरेंद्र लोधी ने भी सहयोग किया। उसने नरेंद्र पर जान से मारकर फेंक देने की धमकी देने का आरोप भी लगाया है। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले में संबंधित पक्षों का बयान भी सामने नहीं आया है।

    धर्मवीर का कहना है कि उसने इस घटना के संबंध में सुरवाया थाना पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद वह अपनी फरियाद लेकर शिवपुरी के पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा। उसने पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया से मिलने का प्रयास किया, लेकिन उसकी मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद उसने अपनी शिकायत पर कार्रवाई कराने की मांग दोहराई।

    धर्मवीर ने अपनी शिकायत में परिवार की स्थिति का भी जिक्र किया है। उसका कहना है कि तीनों बच्चे अपनी मां को याद करते हैं और उसके घर लौटने की उम्मीद में रोते हैं। वह बच्चों को यह कहकर समझाता है कि उनकी मां वापस आ जाएगी। इस स्थिति से परिवार पर पड़ रहे असर को बताते हुए उसने पुलिस से मामले को गंभीरता से लेने की अपील की है।

    पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि उसकी शिकायत के आधार पर मामले की जांच की जाए और पत्नी को ले जाने, नकदी तथा जेवर साथ ले जाने और धमकी देने से जुड़े उसके आरोपों की पड़ताल की जाए। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह मामला पति की शिकायत और उसके लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस की ओर से आगे की कार्रवाई या जांच की स्थिति के संबंध में कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

  • शिवपुरी में सहायक प्राध्यापक की पत्नी ने लिव-इन संबंधों को लेकर किया हंगामा, दोनों पक्षों ने थाने में दर्ज कराई शिकायत

    शिवपुरी में सहायक प्राध्यापक की पत्नी ने लिव-इन संबंधों को लेकर किया हंगामा, दोनों पक्षों ने थाने में दर्ज कराई शिकायत

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी में एक कॉलेज के सहायक प्राध्यापक के कथित लिव-इन संबंधों को लेकर विवाद सामने आया है। प्रोफेसर कॉलोनी स्थित एक आवास पर पहुंची उनकी पत्नी ने पति के एक महिला सहकर्मी के साथ रहने पर आपत्ति जताई। इस दौरान करीब तीन घंटे तक दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना रहा। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और बाद में संबंधित लोगों को थाने ले गई। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर मामले की जांच कर रही है।

    यह मामला शिवपुरी के प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, श्रीमंत माधवराव सिंधिया पीजी कॉलेज में पदस्थ सहायक प्राध्यापक चेतन्य राजपूत और उनकी महिला सहकर्मी राजवती किरार से जुड़ा है। ग्वालियर निवासी प्रीति राजपूत का आरोप है कि उनके पति चेतन्य राजपूत कॉलेज में पदस्थ अविवाहित सहायक प्राध्यापक राजवती किरार के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं। इसी बात को लेकर वह प्रोफेसर कॉलोनी स्थित आवास पर पहुंचीं और दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया।

    प्रीति राजपूत का दावा है कि उनके पति और महिला सहकर्मी का एक बच्चा भी है। उन्होंने अपने नौ वर्षीय बेटे का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उनके पति ने उन्हें और बच्चे को छोड़ दिया है। प्रीति का कहना था कि उनका पति संबंधित आवास के अंदर मौजूद है, लेकिन बाहर नहीं आ रहा है। इसी बात को लेकर मौके पर विवाद की स्थिति बनी रही। हालांकि, बच्चे के संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

    हंगामे की सूचना मिलने के बाद डायल-112 और महिला थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस की मौजूदगी में भी काफी देर तक गतिरोध बना रहा। करीब तीन घंटे बाद पुलिस दोनों पक्षों को थाने ले गई, जहां उनके बीच हुए विवाद से संबंधित शिकायतें सामने आईं। इस दौरान मामला केवल पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ आरोप लगाते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की।

    प्रीति राजपूत ने अपने पति चेतन्य राजपूत और महिला सहायक प्राध्यापक राजवती किरार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने लिव-इन संबंधों और कथित धोखाधड़ी को लेकर जांच की मांग की। साथ ही, उन्होंने संबंधित बच्चे का डीएनए परीक्षण कराने की मांग भी उठाई है। यह मांग उनकी शिकायत का हिस्सा है। फिलहाल डीएनए परीक्षण कराए जाने या बच्चे की जैविक पहचान के संबंध में किसी निष्कर्ष की जानकारी सामने नहीं आई है।

    दूसरी ओर, सहायक प्राध्यापक राजवती किरार ने भी शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रीति राजपूत उनके घर में जबरन घुसीं और उनके साथ बदतमीजी की। इस तरह दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग शिकायतें सामने आने के बाद पुलिस के सामने आरोपों की जांच करने और घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की जिम्मेदारी है।

    कॉलेज के प्राचार्य पवन श्रीवास्तव ने चेतन्य राजपूत और राजवती किरार के साथ रहने की बात की पुष्टि की है। हालांकि, उन्होंने बताया कि घटना के समय वह बाहर थे और उन्हें प्रोफेसर कॉलोनी में हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी नहीं थी। वहीं, फिजिकल थाना प्रभारी अविनाश राठौड़ के अनुसार, दोनों पक्षों से प्राप्त शिकायतों की जांच की जा रही है।

    फिलहाल इस मामले में पुलिस जांच जारी है। शिकायतों में लगाए गए आरोपों की पुष्टि और विवाद से जुड़े अन्य तथ्यों का स्पष्ट होना जांच के बाद ही संभव होगा।

  • MP: दीपके और उनके साथियों की इंदौर पुलिस में शिकायत, नाबालिगों को बरगलाने का आरोप…

    MP: दीपके और उनके साथियों की इंदौर पुलिस में शिकायत, नाबालिगों को बरगलाने का आरोप…


    इंदौर।
    अभिजीत दीपके (Abhijit Deepke) और सौरव दास (Sourav Das) समेत उनके अन्य साथियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। खुद को सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर बताने वाले एक शख्स ने इंदौर पुलिस में इनकी भूमिकाओं की जांच की मांग उठाई है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party-CJP) के प्रदर्शन में नाबालिग लड़के-लड़कियों को बरगलाकर जमावड़ा कराने में इनकी कथित भूमिका साबित होती हो और पॉक्सो के तहत अपराध पाए जाएं तो FIR दर्ज किया जाना चाहिए।


    किसने दी शिकायत?

    मुंबई के निवासी फैजान अंसारी ने इंदौर पुलिस की अपराध निरोधक शाखा में दी गई अपनी शिकायत में दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP की अगुवाई में 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन में नाबालिगों की कथित मौजूदगी का दावा करते हुए अभिजीत दीपके और सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास समेत अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच करने की मांग की है।


    अभिजीत दीपके, सौरभ दास और अन्य की भूमिकाओं की हो जांच

    मुंबई के निवासी फैजान अंसारी ने शिकायत में कहा कि जांच के जरिये इस बात का पता लगाया जाना चाहिए कि अभिजीत दीपके, सौरभ दास या समूह के अन्य सदस्य नाबालिगों को प्रदर्शन में लाने में कहीं शामिल तो नहीं थे। क्या ये लोग नाबालिगों को भड़काने में शामिल तो नहीं थे।


    इन सुबूतों को सुरक्षित किए जाने की भी मांग

    फैजान अंसारी ने इंदौर पुलिस क्राइम ब्रांच से विरोध प्रदर्शन के फोटो-वीडियो, मीडिया इंटरव्यू, सार्वजनिक बयान, प्रदर्शन स्थल और इसके आस-पास के सीसीटीवी फुटेज, सोशल मीडिया सामग्री और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को संरक्षित करके उनकी जांच का अनुरोध किया है।


    जांच में पॉक्सो का अपराध मिले हो तो करें FIR

    शिकायत में कहा गया है कि यदि जांच में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम के तहत किसी भी प्रकार का संज्ञेय अपराध सामने आता है तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।


    इंदौर पुलिस ने भी शुरू की जांच

    अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेश दंडोतिया ने बताया कि हमें अंसारी की शिकायत मिली है जो खुद को सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर बता रहे हैं। शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है। जांच में मिले तथ्यों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


    दिल्ली पुलिस की भी भूमिका हो जाएगी अहम

    गौरतलब है कि कथित नीट पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी की अगुवाई में विरोध प्रदर्शन हुआ था। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने संसद तक मार्च की कोशिश थी तब पुलिस के साथ उनकी झड़पें हुई थीं। इसमें कई आपत्तिजनक वीडियो वायरल हुए थे। ऐसे में इस शिकायत के सामने आने से पूरे प्रकरण में नया मोड़ आ गया है। यदि इंदौर पुलिस उक्त शिकायत पर आगे बढ़ती है तब जांच में दिल्ली पुलिस की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाएगी।

  • अभिजीत दीपके के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर ने एफआईआर और गिरफ्तारी की मांग की

    अभिजीत दीपके के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर ने एफआईआर और गिरफ्तारी की मांग की

    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके के खिलाफ दिल्ली पुलिस में एक आवेदन प्रस्तुत किया गया है। सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर फैजान अंसारी ने राष्ट्रीय राजधानी पहुंचकर अभिजीत दीपके के विरुद्ध प्राथमिक दर्ज करने और उन्हें हिरासत में लेने की मांग उठाई है। शिकायत आवेदन में कई संगीन आरोप लगाए गए हैं, यद्यपि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और पुलिस प्रशासन की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक वक्तव्य जारी नहीं हुआ है।

    शिकायतकर्ता फैजान अंसारी ने दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारियों को सौंपे पत्र में कहा कि उन पर अभिजीत दीपके के समर्थकों द्वारा दो अलग-अलग मौकों पर हमला किया गया। उनके अनुसार पहली घटना पुणे में और दूसरी औरंगाबाद में घटित हुई, जिनके संदर्भ में स्थानीय थानों में पूर्व में ही सूचना दी जा चुकी है। उन्होंने इन घटनाओं से जुड़े साक्ष्य होने का दावा करते हुए दिल्ली पुलिस से त्वरित वैधानिक कदम उठाने का अनुरोध किया है।

    आवेदन में अभिजीत दीपके पर कई अन्य गंभीर आक्षेप भी मढ़े गए हैं। इसमें उन्हें पाकिस्तान का एजेंट बताने के साथ-साथ उमर खालिद का समर्थन करने का आरोप लगाया गया है। इसके अतिरिक्त यह दावा भी किया गया है कि विगत आंदोलनों में कुछ नामचीन हस्तियों को धनराशि देकर आमंत्रित किया गया था। हालांकि, किसी भी प्रशासनिक या न्यायिक संस्था ने इन आरोपों का समर्थन नहीं किया है और न ही अभिजीत दीपके की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान आया है।

    फैजान अंसारी ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे विशेष रूप से मुंबई से दिल्ली केवल इस आवेदन को सौंपने आए हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए चेतावनी दी कि समय पर उचित कार्रवाई न होने से स्थिति बिगड़ सकती है। मध्य प्रदेश समेत देशभर के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इस पूरे घटनाक्रम की चर्चाएं तेज हो गई हैं, लेकिन यह पूरी तरह से एकपक्षीय आरोपों पर आधारित मामला है।

    यह विवाद ऐसे वक्त सामने आया है जब सीजेपी और अभिजीत दीपके पूर्व में आयोजित आंदोलनों के कारण सार्वजनिक रूप से चर्चा का केंद्र रहे हैं। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों के दौरान भी उनके संगठन की भूमिका पर बात हुई थी। फिलहाल दिल्ली पुलिस को प्राप्त शिकायत की समीक्षा की जा रही है और प्राथमिक जांच के पश्चात ही अगली विधिक प्रक्रिया तय होगी। जांच पूर्ण होने तक इन दावों को अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता।

  • जनता दर्शन में सख्त दिखे सीएम योगी, बोले- जनसमस्याओं के समाधान में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

    जनता दर्शन में सख्त दिखे सीएम योगी, बोले- जनसमस्याओं के समाधान में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

    लखनऊ। सावन के पहले सोमवार को धार्मिक कार्यक्रमों और विधानसभा के मानसून सत्र की व्यस्तताओं के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता दर्शन में लोगों की समस्याएं सुनीं। विभिन्न जिलों से पहुंचे लोगों से उन्होंने व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनके प्रार्थना पत्र संबंधित अधिकारियों को सौंपे और समयबद्ध एवं प्रभावी निस्तारण के निर्देश दिए।

    पुलिस मामलों पर दिखाई सख्ती

    जनता दर्शन के दौरान पुलिस से जुड़ी कई शिकायतें सामने आने पर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने मुकदमों में दबाव बनाने और आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी जैसी शिकायतों पर नाराजगी जताते हुए शासन स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन जिलों से इस तरह की शिकायतें लगातार आ रही हैं, वहां संबंधित पुलिस अधीक्षकों की जवाबदेही तय की जाए।

    पीड़ितों के साथ संवेदनशील व्यवहार के निर्देश

    सीएम योगी ने अधिकारियों से कहा कि किसी भी नागरिक के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। प्रत्येक पीड़ित की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए तथा समयबद्ध तरीके से समाधान सुनिश्चित किया जाए।

    राजस्व और पुलिस मामलों पर विशेष फोकस
    मुख्यमंत्री ने राजस्व और पुलिस से जुड़े मामलों को प्राथमिकता से निपटाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पारिवारिक विवादों में पहले आपसी संवाद और समझौते का प्रयास किया जाए, उसके बाद आवश्यकता होने पर विधिक कार्रवाई की जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जनसमस्याओं का समाधान पारदर्शिता, संवेदनशीलता और गुणवत्ता के साथ किया जाए, ताकि लोगों को संतोषजनक न्याय और राहत मिल सके।

  • 8वीं के छात्र को 200 बार गाली लिखने की सजा, अभिभावकों ने की शिकायत; शिक्षा विभाग ने बैठाई जांच

    8वीं के छात्र को 200 बार गाली लिखने की सजा, अभिभावकों ने की शिकायत; शिक्षा विभाग ने बैठाई जांच


    अंबिकापुर ।
    छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित एक निजी स्कूल में आठवीं कक्षा के छात्र को कथित तौर पर 200 बार ‘मां’ से जुड़ी गाली लिखने की सजा दिए जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद छात्र के अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) से शिकायत की है। शिकायत के आधार पर शिक्षा विभाग ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि आरोप सही पाए जाने पर संबंधित शिक्षिका के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    जानकारी के अनुसार, शहर से लगे ग्राम सरगवां स्थित बिरला ओपन माइंड इंटरनेशनल स्कूल में 28 जुलाई को कक्षा आठ के दो छात्रों के बीच विवाद और मारपीट हो गई थी। आरोप है कि इस घटना के बाद कक्षा की शिक्षिका ने एक छात्र को अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत हिंदी और अंग्रेजी में 100-100 बार गाली लिखने का निर्देश दिया। छात्र ने अपनी कॉपी में कुल 200 बार वही शब्द लिखे। इसके बाद उससे कहा गया कि वह कॉपी घर ले जाकर अपने माता-पिता को दिखाए और उनके हस्ताक्षर करवाकर वापस स्कूल लाए।

    घर पहुंचने पर छात्र के परिजनों ने कॉपी देखी तो वे हैरान रह गए। छात्र के पिता ने इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी से शिकायत दर्ज कराते हुए कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि यदि छात्र से कोई गलती हुई थी तो शिक्षक का दायित्व उसे समझाना और सही मार्गदर्शन देना था, न कि इस प्रकार की आपत्तिजनक सजा देना। उन्होंने कहा कि इस तरह की सजा से बच्चे के मानसिक विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

    मामला सामने आने के बाद छात्र संगठनों ने भी इसकी निंदा करते हुए संबंधित शिक्षिका के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    जिला शिक्षा अधिकारी दिनेश झा ने बताया कि शिकायत प्राप्त होने के बाद सहायक संचालक को पूरे मामले की जांच सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षिका के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को इस प्रकार की सजा देना उचित नहीं है और शिक्षा विभाग मामले को गंभीरता से देख रहा है।

  • मुंबई महापौर और पूर्व मेयर के बीच बढ़ा सियासी टकराव, कार्यालय में जबरन प्रवेश और गोपनीय दस्तावेजों की रिकॉर्डिंग के गंभीर आरोप

    मुंबई महापौर और पूर्व मेयर के बीच बढ़ा सियासी टकराव, कार्यालय में जबरन प्रवेश और गोपनीय दस्तावेजों की रिकॉर्डिंग के गंभीर आरोप

    नई दिल्ली। मुंबई महानगरपालिका मुख्यालय में राजनीतिक तनाव उस समय और बढ़ गया जब महापौर रितू तावड़े ने विपक्ष की नेता एवं पूर्व महापौर किशोरी पेडनेकर पर उनके कार्यालय में बिना अनुमति प्रवेश करने और संवेदनशील दस्तावेजों की वीडियो रिकॉर्डिंग करने का गंभीर आरोप लगाया। इस घटना के बाद नगर निगम की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है और मामले को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।

    महापौर रितू तावड़े का दावा है कि घटना उस समय हुई जब वह शहर में मैनहोल सुरक्षा व्यवस्था और निरीक्षण कार्यों की समीक्षा के लिए कार्यालय से बाहर थीं। उनके अनुसार इसी दौरान पूर्व महापौर बिना पूर्व अनुमति सीधे महापौर के निजी कार्यालय में पहुंचीं और वहां मौजूद दस्तावेजों तथा कार्यालय परिसर की वीडियो रिकॉर्डिंग करने का प्रयास किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल सामान्य निरीक्षण नहीं बल्कि कार्यालय की गतिविधियों की ‘रेकी’ करने जैसा कृत्य था।

    महापौर ने कहा कि उनके कार्यालय में प्रवेश के दौरान कर्मचारियों के साथ तीखी बहस भी हुई। आरोप है कि कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों पर दबाव बनाया गया और उन्हें कथित रूप से धमकाया भी गया। उनका कहना है कि पूरे घटनाक्रम के सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध हैं, जिनके आधार पर मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने दावा किया कि घटना निर्धारित समय पर हुई और उसके डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित हैं।

    रितू तावड़े ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को प्रशासनिक जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया और नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। उनके अनुसार किसी भी संवेदनशील कार्यालय में बिना अनुमति प्रवेश करना और वहां की रिकॉर्डिंग करना प्रशासनिक मर्यादाओं के विपरीत है। उन्होंने इस घटना को नगर निगम की कार्यप्रणाली और संस्थागत व्यवस्था के लिए गंभीर विषय बताया।

    महापौर ने कहा कि मामले को लेकर संबंधित पुलिस थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम के इतिहास में इस प्रकार की घटना पहले कभी सामने नहीं आई और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की जाएगी। उनका मानना है कि सार्वजनिक संस्थानों की सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

    दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम ने मुंबई की स्थानीय राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। साकीनाका मैनहोल हादसे के बाद पहले से ही राजनीतिक माहौल गर्म था और अब इस आरोप के बाद दोनों पक्षों के बीच टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। नगर निगम के भीतर भी इस मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा जारी है।

    फिलहाल इस मामले में आरोप लगाए गए हैं और संबंधित एजेंसियों द्वारा आगे की प्रक्रिया अपनाई जानी बाकी है। यदि पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज होती है तो उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच की जा सकती है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी तथ्यात्मक पुष्टि होती है और आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है।

  • इंदौर मुक्तिधाम हड़कंप: 13 नंबर के तीन टोकन की चूक से अस्थियां गड़बड़, दो परिवारों में हंगामा, तीन घंटे बाद सुलझा मामला

    इंदौर मुक्तिधाम हड़कंप: 13 नंबर के तीन टोकन की चूक से अस्थियां गड़बड़, दो परिवारों में हंगामा, तीन घंटे बाद सुलझा मामला


    इंदौर। इंदौर में पचकुइया मुक्तिधाम पर शनिवार को अस्थियों की अदला-बदली से हंगामा मच गया। मामला तब सामने आया जब एक ही नंबर (13) के तीन टोकन अलग-अलग परिवारों को दे दिए गए। इसी कारण गलती से एक अन्य परिवार स्व. मदनलाल विश्वकर्मा की अस्थियों को अपने स्वजन समझकर ले गया। जब परिवार अस्थियां लेने पहुंचा, तब उन्हें यह पता चला कि अस्थियां उनके स्वजन की नहीं हैं।

    विश्वकर्मा परिवार के अनुसार, 55 वर्षीय मदनलाल विश्वकर्मा का निधन कुछ दिनों पहले हुआ था। उनके अंतिम संस्कार के लिए पंडित ने अस्थि संचय की तिथि रविवार तय की थी, लेकिन शनिवार को परिवार जब संग्रह के लिए मुक्तिधाम पहुंचे तो अस्थियां वहां नहीं मिलीं। इसके बाद परिवार ने ड्यूटी पर मौजूद निगमकर्मी से जानकारी ली, लेकिन कर्मचारी नशे में होने के कारण मदद नहीं कर सके।

    घटना की तहकीकात में पता चला कि 13 नंबर के तीन टोकन अलग-अलग परिवारों को दे दिए गए थे। इसी कारण चौबे परिवार, जिनके 65 वर्षीय स्व. सुनील चौबे का निधन 5 मार्च को हुआ था, ने गलती से विश्वकर्मा परिवार की अस्थियां ले ली। सुबह लगभग 8.30 बजे चौबे परिवार अस्थियों को संग्रह कर खेड़ी घाट के लिए रवाना हुआ, तभी उन्हें मुक्तिधाम से फोन आया कि उन्होंने गलत अस्थियां ले ली हैं। इसके बाद दोनों परिवारों की अस्थियां तीन घंटे बाद सही ढंग से लौटाई गईं।

    विश्वकर्मा परिवार के नजदीकी मुकेश शर्मा ने आरोप लगाया कि मुक्तिधाम में तैनात पंचकुइया मोक्ष विकास समिति के कर्मचारी की लापरवाही से यह स्थिति बनी। उन्होंने बताया कि कर्मचारी से गलती हुई और उसने टोकन संख्या में गड़बड़ी कर दी।

    मुक्तिधाम समिति के अध्यक्ष वैभव बाहेती ने खेद जताते हुए बताया कि गलती करने वाला कर्मचारी 35 सालों से मुक्तिधाम में सेवाएं दे रहा है और कोरोना महामारी के दौरान भी उसने अहम योगदान दिया। उन्होंने कहा कि यह मानवीय भूल थी और संबंधित कर्मचारी को चेतावनी दी गई है।

    इंदौर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर डायल 100 भेजा और एडी. डीसीपी क्राइम राजेश दंडोतिया ने कहा कि यदि किसी पक्ष ने शिकायत दर्ज कराई, तो वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर मुक्तिधाम संचालन में कर्मचारियों की सतर्कता और टोकन प्रणाली में सुधार की आवश्यकता उजागर कर दी है।