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  • MP: दीपके और उनके साथियों की इंदौर पुलिस में शिकायत, नाबालिगों को बरगलाने का आरोप…

    MP: दीपके और उनके साथियों की इंदौर पुलिस में शिकायत, नाबालिगों को बरगलाने का आरोप…


    इंदौर।
    अभिजीत दीपके (Abhijit Deepke) और सौरव दास (Sourav Das) समेत उनके अन्य साथियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। खुद को सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर बताने वाले एक शख्स ने इंदौर पुलिस में इनकी भूमिकाओं की जांच की मांग उठाई है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party-CJP) के प्रदर्शन में नाबालिग लड़के-लड़कियों को बरगलाकर जमावड़ा कराने में इनकी कथित भूमिका साबित होती हो और पॉक्सो के तहत अपराध पाए जाएं तो FIR दर्ज किया जाना चाहिए।


    किसने दी शिकायत?

    मुंबई के निवासी फैजान अंसारी ने इंदौर पुलिस की अपराध निरोधक शाखा में दी गई अपनी शिकायत में दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP की अगुवाई में 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन में नाबालिगों की कथित मौजूदगी का दावा करते हुए अभिजीत दीपके और सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास समेत अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच करने की मांग की है।


    अभिजीत दीपके, सौरभ दास और अन्य की भूमिकाओं की हो जांच

    मुंबई के निवासी फैजान अंसारी ने शिकायत में कहा कि जांच के जरिये इस बात का पता लगाया जाना चाहिए कि अभिजीत दीपके, सौरभ दास या समूह के अन्य सदस्य नाबालिगों को प्रदर्शन में लाने में कहीं शामिल तो नहीं थे। क्या ये लोग नाबालिगों को भड़काने में शामिल तो नहीं थे।


    इन सुबूतों को सुरक्षित किए जाने की भी मांग

    फैजान अंसारी ने इंदौर पुलिस क्राइम ब्रांच से विरोध प्रदर्शन के फोटो-वीडियो, मीडिया इंटरव्यू, सार्वजनिक बयान, प्रदर्शन स्थल और इसके आस-पास के सीसीटीवी फुटेज, सोशल मीडिया सामग्री और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को संरक्षित करके उनकी जांच का अनुरोध किया है।


    जांच में पॉक्सो का अपराध मिले हो तो करें FIR

    शिकायत में कहा गया है कि यदि जांच में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम के तहत किसी भी प्रकार का संज्ञेय अपराध सामने आता है तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।


    इंदौर पुलिस ने भी शुरू की जांच

    अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेश दंडोतिया ने बताया कि हमें अंसारी की शिकायत मिली है जो खुद को सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर बता रहे हैं। शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है। जांच में मिले तथ्यों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


    दिल्ली पुलिस की भी भूमिका हो जाएगी अहम

    गौरतलब है कि कथित नीट पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी की अगुवाई में विरोध प्रदर्शन हुआ था। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने संसद तक मार्च की कोशिश थी तब पुलिस के साथ उनकी झड़पें हुई थीं। इसमें कई आपत्तिजनक वीडियो वायरल हुए थे। ऐसे में इस शिकायत के सामने आने से पूरे प्रकरण में नया मोड़ आ गया है। यदि इंदौर पुलिस उक्त शिकायत पर आगे बढ़ती है तब जांच में दिल्ली पुलिस की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाएगी।

  • अभिजीत दीपके के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर ने एफआईआर और गिरफ्तारी की मांग की

    अभिजीत दीपके के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर ने एफआईआर और गिरफ्तारी की मांग की

    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके के खिलाफ दिल्ली पुलिस में एक आवेदन प्रस्तुत किया गया है। सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर फैजान अंसारी ने राष्ट्रीय राजधानी पहुंचकर अभिजीत दीपके के विरुद्ध प्राथमिक दर्ज करने और उन्हें हिरासत में लेने की मांग उठाई है। शिकायत आवेदन में कई संगीन आरोप लगाए गए हैं, यद्यपि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और पुलिस प्रशासन की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक वक्तव्य जारी नहीं हुआ है।

    शिकायतकर्ता फैजान अंसारी ने दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारियों को सौंपे पत्र में कहा कि उन पर अभिजीत दीपके के समर्थकों द्वारा दो अलग-अलग मौकों पर हमला किया गया। उनके अनुसार पहली घटना पुणे में और दूसरी औरंगाबाद में घटित हुई, जिनके संदर्भ में स्थानीय थानों में पूर्व में ही सूचना दी जा चुकी है। उन्होंने इन घटनाओं से जुड़े साक्ष्य होने का दावा करते हुए दिल्ली पुलिस से त्वरित वैधानिक कदम उठाने का अनुरोध किया है।

    आवेदन में अभिजीत दीपके पर कई अन्य गंभीर आक्षेप भी मढ़े गए हैं। इसमें उन्हें पाकिस्तान का एजेंट बताने के साथ-साथ उमर खालिद का समर्थन करने का आरोप लगाया गया है। इसके अतिरिक्त यह दावा भी किया गया है कि विगत आंदोलनों में कुछ नामचीन हस्तियों को धनराशि देकर आमंत्रित किया गया था। हालांकि, किसी भी प्रशासनिक या न्यायिक संस्था ने इन आरोपों का समर्थन नहीं किया है और न ही अभिजीत दीपके की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान आया है।

    फैजान अंसारी ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे विशेष रूप से मुंबई से दिल्ली केवल इस आवेदन को सौंपने आए हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए चेतावनी दी कि समय पर उचित कार्रवाई न होने से स्थिति बिगड़ सकती है। मध्य प्रदेश समेत देशभर के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इस पूरे घटनाक्रम की चर्चाएं तेज हो गई हैं, लेकिन यह पूरी तरह से एकपक्षीय आरोपों पर आधारित मामला है।

    यह विवाद ऐसे वक्त सामने आया है जब सीजेपी और अभिजीत दीपके पूर्व में आयोजित आंदोलनों के कारण सार्वजनिक रूप से चर्चा का केंद्र रहे हैं। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों के दौरान भी उनके संगठन की भूमिका पर बात हुई थी। फिलहाल दिल्ली पुलिस को प्राप्त शिकायत की समीक्षा की जा रही है और प्राथमिक जांच के पश्चात ही अगली विधिक प्रक्रिया तय होगी। जांच पूर्ण होने तक इन दावों को अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता।

  • जनता दर्शन में सख्त दिखे सीएम योगी, बोले- जनसमस्याओं के समाधान में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

    जनता दर्शन में सख्त दिखे सीएम योगी, बोले- जनसमस्याओं के समाधान में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

    लखनऊ। सावन के पहले सोमवार को धार्मिक कार्यक्रमों और विधानसभा के मानसून सत्र की व्यस्तताओं के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता दर्शन में लोगों की समस्याएं सुनीं। विभिन्न जिलों से पहुंचे लोगों से उन्होंने व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनके प्रार्थना पत्र संबंधित अधिकारियों को सौंपे और समयबद्ध एवं प्रभावी निस्तारण के निर्देश दिए।

    पुलिस मामलों पर दिखाई सख्ती

    जनता दर्शन के दौरान पुलिस से जुड़ी कई शिकायतें सामने आने पर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने मुकदमों में दबाव बनाने और आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी जैसी शिकायतों पर नाराजगी जताते हुए शासन स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन जिलों से इस तरह की शिकायतें लगातार आ रही हैं, वहां संबंधित पुलिस अधीक्षकों की जवाबदेही तय की जाए।

    पीड़ितों के साथ संवेदनशील व्यवहार के निर्देश

    सीएम योगी ने अधिकारियों से कहा कि किसी भी नागरिक के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। प्रत्येक पीड़ित की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए तथा समयबद्ध तरीके से समाधान सुनिश्चित किया जाए।

    राजस्व और पुलिस मामलों पर विशेष फोकस
    मुख्यमंत्री ने राजस्व और पुलिस से जुड़े मामलों को प्राथमिकता से निपटाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पारिवारिक विवादों में पहले आपसी संवाद और समझौते का प्रयास किया जाए, उसके बाद आवश्यकता होने पर विधिक कार्रवाई की जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जनसमस्याओं का समाधान पारदर्शिता, संवेदनशीलता और गुणवत्ता के साथ किया जाए, ताकि लोगों को संतोषजनक न्याय और राहत मिल सके।

  • 8वीं के छात्र को 200 बार गाली लिखने की सजा, अभिभावकों ने की शिकायत; शिक्षा विभाग ने बैठाई जांच

    8वीं के छात्र को 200 बार गाली लिखने की सजा, अभिभावकों ने की शिकायत; शिक्षा विभाग ने बैठाई जांच


    अंबिकापुर ।
    छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित एक निजी स्कूल में आठवीं कक्षा के छात्र को कथित तौर पर 200 बार ‘मां’ से जुड़ी गाली लिखने की सजा दिए जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद छात्र के अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) से शिकायत की है। शिकायत के आधार पर शिक्षा विभाग ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि आरोप सही पाए जाने पर संबंधित शिक्षिका के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    जानकारी के अनुसार, शहर से लगे ग्राम सरगवां स्थित बिरला ओपन माइंड इंटरनेशनल स्कूल में 28 जुलाई को कक्षा आठ के दो छात्रों के बीच विवाद और मारपीट हो गई थी। आरोप है कि इस घटना के बाद कक्षा की शिक्षिका ने एक छात्र को अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत हिंदी और अंग्रेजी में 100-100 बार गाली लिखने का निर्देश दिया। छात्र ने अपनी कॉपी में कुल 200 बार वही शब्द लिखे। इसके बाद उससे कहा गया कि वह कॉपी घर ले जाकर अपने माता-पिता को दिखाए और उनके हस्ताक्षर करवाकर वापस स्कूल लाए।

    घर पहुंचने पर छात्र के परिजनों ने कॉपी देखी तो वे हैरान रह गए। छात्र के पिता ने इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी से शिकायत दर्ज कराते हुए कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि यदि छात्र से कोई गलती हुई थी तो शिक्षक का दायित्व उसे समझाना और सही मार्गदर्शन देना था, न कि इस प्रकार की आपत्तिजनक सजा देना। उन्होंने कहा कि इस तरह की सजा से बच्चे के मानसिक विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

    मामला सामने आने के बाद छात्र संगठनों ने भी इसकी निंदा करते हुए संबंधित शिक्षिका के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    जिला शिक्षा अधिकारी दिनेश झा ने बताया कि शिकायत प्राप्त होने के बाद सहायक संचालक को पूरे मामले की जांच सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षिका के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को इस प्रकार की सजा देना उचित नहीं है और शिक्षा विभाग मामले को गंभीरता से देख रहा है।

  • मुंबई महापौर और पूर्व मेयर के बीच बढ़ा सियासी टकराव, कार्यालय में जबरन प्रवेश और गोपनीय दस्तावेजों की रिकॉर्डिंग के गंभीर आरोप

    मुंबई महापौर और पूर्व मेयर के बीच बढ़ा सियासी टकराव, कार्यालय में जबरन प्रवेश और गोपनीय दस्तावेजों की रिकॉर्डिंग के गंभीर आरोप

    नई दिल्ली। मुंबई महानगरपालिका मुख्यालय में राजनीतिक तनाव उस समय और बढ़ गया जब महापौर रितू तावड़े ने विपक्ष की नेता एवं पूर्व महापौर किशोरी पेडनेकर पर उनके कार्यालय में बिना अनुमति प्रवेश करने और संवेदनशील दस्तावेजों की वीडियो रिकॉर्डिंग करने का गंभीर आरोप लगाया। इस घटना के बाद नगर निगम की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है और मामले को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।

    महापौर रितू तावड़े का दावा है कि घटना उस समय हुई जब वह शहर में मैनहोल सुरक्षा व्यवस्था और निरीक्षण कार्यों की समीक्षा के लिए कार्यालय से बाहर थीं। उनके अनुसार इसी दौरान पूर्व महापौर बिना पूर्व अनुमति सीधे महापौर के निजी कार्यालय में पहुंचीं और वहां मौजूद दस्तावेजों तथा कार्यालय परिसर की वीडियो रिकॉर्डिंग करने का प्रयास किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल सामान्य निरीक्षण नहीं बल्कि कार्यालय की गतिविधियों की ‘रेकी’ करने जैसा कृत्य था।

    महापौर ने कहा कि उनके कार्यालय में प्रवेश के दौरान कर्मचारियों के साथ तीखी बहस भी हुई। आरोप है कि कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों पर दबाव बनाया गया और उन्हें कथित रूप से धमकाया भी गया। उनका कहना है कि पूरे घटनाक्रम के सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध हैं, जिनके आधार पर मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने दावा किया कि घटना निर्धारित समय पर हुई और उसके डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित हैं।

    रितू तावड़े ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को प्रशासनिक जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया और नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। उनके अनुसार किसी भी संवेदनशील कार्यालय में बिना अनुमति प्रवेश करना और वहां की रिकॉर्डिंग करना प्रशासनिक मर्यादाओं के विपरीत है। उन्होंने इस घटना को नगर निगम की कार्यप्रणाली और संस्थागत व्यवस्था के लिए गंभीर विषय बताया।

    महापौर ने कहा कि मामले को लेकर संबंधित पुलिस थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम के इतिहास में इस प्रकार की घटना पहले कभी सामने नहीं आई और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की जाएगी। उनका मानना है कि सार्वजनिक संस्थानों की सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

    दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम ने मुंबई की स्थानीय राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। साकीनाका मैनहोल हादसे के बाद पहले से ही राजनीतिक माहौल गर्म था और अब इस आरोप के बाद दोनों पक्षों के बीच टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। नगर निगम के भीतर भी इस मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा जारी है।

    फिलहाल इस मामले में आरोप लगाए गए हैं और संबंधित एजेंसियों द्वारा आगे की प्रक्रिया अपनाई जानी बाकी है। यदि पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज होती है तो उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच की जा सकती है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी तथ्यात्मक पुष्टि होती है और आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है।

  • इंदौर मुक्तिधाम हड़कंप: 13 नंबर के तीन टोकन की चूक से अस्थियां गड़बड़, दो परिवारों में हंगामा, तीन घंटे बाद सुलझा मामला

    इंदौर मुक्तिधाम हड़कंप: 13 नंबर के तीन टोकन की चूक से अस्थियां गड़बड़, दो परिवारों में हंगामा, तीन घंटे बाद सुलझा मामला


    इंदौर इंदौर में पचकुइया मुक्तिधाम पर शनिवार को अस्थियों की अदला-बदली से हंगामा मच गया। मामला तब सामने आया जब एक ही नंबर (13) के तीन टोकन अलग-अलग परिवारों को दे दिए गए। इसी कारण गलती से एक अन्य परिवार स्व. मदनलाल विश्वकर्मा की अस्थियों को अपने स्वजन समझकर ले गया। जब परिवार अस्थियां लेने पहुंचा, तब उन्हें यह पता चला कि अस्थियां उनके स्वजन की नहीं हैं।

    विश्वकर्मा परिवार के अनुसार, 55 वर्षीय मदनलाल विश्वकर्मा का निधन कुछ दिनों पहले हुआ था। उनके अंतिम संस्कार के लिए पंडित ने अस्थि संचय की तिथि रविवार तय की थी, लेकिन शनिवार को परिवार जब संग्रह के लिए मुक्तिधाम पहुंचे तो अस्थियां वहां नहीं मिलीं। इसके बाद परिवार ने ड्यूटी पर मौजूद निगमकर्मी से जानकारी ली, लेकिन कर्मचारी नशे में होने के कारण मदद नहीं कर सके।

    घटना की तहकीकात में पता चला कि 13 नंबर के तीन टोकन अलग-अलग परिवारों को दे दिए गए थे। इसी कारण चौबे परिवार, जिनके 65 वर्षीय स्व. सुनील चौबे का निधन 5 मार्च को हुआ था, ने गलती से विश्वकर्मा परिवार की अस्थियां ले ली। सुबह लगभग 8.30 बजे चौबे परिवार अस्थियों को संग्रह कर खेड़ी घाट के लिए रवाना हुआ, तभी उन्हें मुक्तिधाम से फोन आया कि उन्होंने गलत अस्थियां ले ली हैं। इसके बाद दोनों परिवारों की अस्थियां तीन घंटे बाद सही ढंग से लौटाई गईं।

    विश्वकर्मा परिवार के नजदीकी मुकेश शर्मा ने आरोप लगाया कि मुक्तिधाम में तैनात पंचकुइया मोक्ष विकास समिति के कर्मचारी की लापरवाही से यह स्थिति बनी। उन्होंने बताया कि कर्मचारी से गलती हुई और उसने टोकन संख्या में गड़बड़ी कर दी।

    मुक्तिधाम समिति के अध्यक्ष वैभव बाहेती ने खेद जताते हुए बताया कि गलती करने वाला कर्मचारी 35 सालों से मुक्तिधाम में सेवाएं दे रहा है और कोरोना महामारी के दौरान भी उसने अहम योगदान दिया। उन्होंने कहा कि यह मानवीय भूल थी और संबंधित कर्मचारी को चेतावनी दी गई है।

    इंदौर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर डायल 100 भेजा और एडी. डीसीपी क्राइम राजेश दंडोतिया ने कहा कि यदि किसी पक्ष ने शिकायत दर्ज कराई, तो वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर मुक्तिधाम संचालन में कर्मचारियों की सतर्कता और टोकन प्रणाली में सुधार की आवश्यकता उजागर कर दी है।

  • मुरादाबाद: 5 मुस्लिम छात्राओं ने हिंदू छात्रा को सड़क पर घेरकर जबरन बुर्का पहनाया, भाई ने लगाया धर्मांतरण का आरोप FIR दर्ज

    मुरादाबाद: 5 मुस्लिम छात्राओं ने हिंदू छात्रा को सड़क पर घेरकर जबरन बुर्का पहनाया, भाई ने लगाया धर्मांतरण का आरोप FIR दर्ज



    मुरादाबाद। यूपी के मुरादाबाद में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें 5 मुस्लिम छात्राओं पर एक हिंदू नाबालिग छात्रा को जबरन बुर्का पहनाने का आरोप लगा है। घटना 20 दिसंबर की बताई जा रही है, लेकिन पीड़िता के भाई ने 22 जनवरी को पुलिस में FIR दर्ज कराई।

    पीड़िता और आरोपी छात्राएं सभी 12वीं की छात्राएं हैं और एक ही स्कूल तथा कोचिंग में पढ़ती हैं। आरोप है कि कोचिंग से निकलने के बाद आरोपित छात्राओं ने छात्रा को सड़क पर घेर लिया, उसके बैग से बुर्का निकाला और उसे पहनाने पर मजबूर किया।

    भाई ने लगाया बड़ा आरोप: “इस्लाम कबूल करने से किस्मत बदलेगी”
    पीड़िता के भाई ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि शुरुआत में दोस्ती के बहाने आरोपी छात्राओं ने उसकी बहन का ब्रेनवॉश किया और उसे बार-बार इस्लाम अपनाने के लिए उकसाया। उसने दावा किया कि उसकी बहन के मन में हिंदू धर्म के प्रति नकारात्मक भाव पैदा किए गए।

    भाई ने बताया कि 11वीं में दोस्ती बढ़ी और धीरे-धीरे बहन ने परिवार की बात नहीं सुननी शुरू कर दी। 20 दिसंबर को ट्यूशन के बाद आरोपी छात्राओं ने उसे रोककर बुर्का पहनाया और उसका वीडियो/फोटो भी लिया जा सकता है।

    मामले में FIR दर्ज, जांच जारी
    पुलिस ने 5 आरोपी छात्राओं के खिलाफ आईपीसी और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें छात्रा को बुर्का पहनाते हुए देखा गया है।

    भाई का दावा: पीछे साजिश है
    पीड़िता के भाई का कहना है कि यह सिर्फ दोस्ती नहीं, बल्कि धर्मांतरण की साजिश है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि किसी संगठन द्वारा छात्राओं को उकसाकर हिंदू नाबालिगों को धर्म बदलने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
    भाई ने यह भी कहा कि ट्यूशन टीचर ने सबसे पहले बहन को बुर्का पहनाने की जानकारी दी थी और बाद में जब बहन से पूछा गया तो वह डरकर कुछ नहीं बताई।

  • उज्जैन के बड़नगर में बिजली विभाग की टीम पर हमला: कनेक्शन काटने पर किसान ने की मारपीट

    उज्जैन के बड़नगर में बिजली विभाग की टीम पर हमला: कनेक्शन काटने पर किसान ने की मारपीट


    उज्जैन । मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर क्षेत्र में बिजली विभाग की टीम पर हमला होने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह घटना ग्राम पिपलु में हुई, जहां एक किसान ने बिजली बिल का लंबा समय से भुगतान न करने के बाद जब बिजली विभाग की टीम ने उसका कनेक्शन काटा, तो किसान ने कर्मचारियों पर हमला कर दिया।

    घटना का विवरण

    बताया जा रहा है कि सुपरवाइजर जनार्दन द्विवेदी अपनी टीम के साथ बकाया बिजली बिल की वसूली के लिए किसान लोकेंद्र के घर पहुंचे थे। लोकेंद्र पर काफी समय से बिजली का बिल बकाया था, और जब विभागीय टीम ने कनेक्शन काटने की प्रक्रिया शुरू की, तो किसान लोकेंद्र आक्रोशित हो गए। उन्होंने जनार्दन द्विवेदी और उनके साथियों से मारपीट करना शुरू कर दिया।

    मोबाइल में कैद हुई मारपीट की घटना

    किसान द्वारा की गई मारपीट की घटना को किसी ने अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया, जिसके बाद इसका वीडियो वायरल हो गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि किसान ने कनेक्शन काटने के दौरान कर्मचारियों से हाथापाई की। इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद घटना ने काफी तूल पकड़ लिया।

    पुलिस में शिकायत और जांच

    मारपीट की इस घटना के बाद सभी कर्मचारी बड़नगर थाने पहुंचे और आरोपी किसान लोकेंद्र के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने और मारपीट करने की शिकायत की। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपी किसान के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

    घटना का असर

    इस घटना ने बिजली विभाग के कर्मचारियों के लिए सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में जहां एक ओर बिजली विभाग की टीम कनेक्शन काटने के लिए जाती है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की हिंसक घटनाएं विभाग के कार्यों में रुकावट डाल सकती हैं।अब देखना होगा कि पुलिस मामले की जांच के बाद क्या कार्रवाई करती है और क्या किसान लोकेंद्र के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी या नहीं।

  • मोहम्मद सिराज की फ्लाइट देरी पर नाराजगी, एअर इंडिया से की शिकायत

    मोहम्मद सिराज की फ्लाइट देरी पर नाराजगी, एअर इंडिया से की शिकायत

    नई दिल्‍ली । भारत और साउथ अफ्रीका के बीच गुवाहाटी में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में दक्षिण अफ्रीका ने 408 रनों से जीत हासिल कर सीरीज 2-0 से अपने नाम की। इस हार के बाद जब टीम इंडिया के तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज हैदराबाद लौटने के लिए एअर इंडिया की फ्लाइट में सवार हो रहे थे तो फ्लाइट में लगातार हो रही देरी ने उन्हें नाराज कर दिया।

    सिराज ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि फ्लाइट की देरी के बारे में उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई और बार-बार संपर्क करने पर भी कोई अपडेट नहीं मिला।

    उन्होंने फ्लाइट के संचालन को काफी निराशाजनक करार दिया और कहा कि यात्री जानना चाहते हैं कि इतनी देर क्यों हो रही है लेकिन एयरलाइन की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिला। सिराज ने ट्वीट कर लिखा मैं सच में किसी को भी इस उड़ान से यात्रा करने की सलाह नहीं दूंगा अगर एअर इंडिया कोई ठोस कदम नहीं उठाती

    सिराज की यह प्रतिक्रिया एयर इंडिया की फ्लाइट IX 2884 के मामले में आई जो गुवाहाटी से हैदराबाद के लिए शाम 7:25 बजे उड़ान भरने वाली थी।

    हालांकि उड़ान चार घंटे की देरी से शुरू हुई और इस दौरान यात्रियों को न तो कोई उचित जानकारी दी गई न ही किसी तरह की स्थिति की स्पष्टता दी गई। सिराज ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में यात्रियों की परेशानियों को साझा करते हुए यह सवाल उठाया कि इतनी लंबी देरी के बावजूद एयरलाइन क्यों कोई अपडेट नहीं दे रही है।
    एअर इंडिया का आधिकारिक जवाब
    मोहम्मद सिराज के ट्वीट के बाद एअर इंडिया ने आधिकारिक तौर पर प्रतिक्रिया दी और बताया कि फ्लाइट IX 2884 को ऑपरेशनल कारणों की वजह से रद्द कर दिया गया है। एयरलाइन ने यह भी स्पष्ट किया कि वे इस मामले पर काम कर रहे हैं और यात्रियों के साथ जल्द ही संपर्क करेंगे। हालांकि यह स्थिति सिराज और अन्य यात्रियों के लिए निराशाजनक रही क्योंकि उन्हें अपनी यात्रा को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं मिली थी।
    सिराज का भावनात्मक प्रतिक्रिया

    सिराज ने न केवल एयरलाइन की देरी और खराब सेवा के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त की बल्कि अपनी यात्रा के अनुभव को सार्वजनिक करते हुए अन्य यात्रियों को भी एक चेतावनी दी। उनका यह बयान एक सामान्य यात्री की स्थिति को उजागर करता है जो एयरलाइनों की देरी और खराब संचालन से परेशान हो जाता है। इसके साथ ही उन्होंने इस मामले में एअर इंडिया से ठोस कदम उठाने की मांग की।

    आगामी मैचों के लिए सिराज की तैयारी

    मोहम्मद सिराज हाल ही में समाप्त हुई टेस्ट सीरीज के बाद अब आगामी वनडे सीरीज में साउथ अफ्रीका के खिलाफ भारत की टीम का हिस्सा होंगे। यह सीरीज 30 नवंबर से शुरू होने वाली है और सिराज को इस सीरीज में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है। हालांकि उनका यह अनुभव एक कड़ा सबक था कि यात्रा की कोई भी असुविधा क्रिकेट की मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकती है खासकर जब खिलाड़ी अपनी टीम के लिए एक मजबूत प्रदर्शन की तैयारी कर रहे होते हैं।
     
    इस घटनाक्रम से यह भी साफ है कि फ्लाइट की देरी या किसी अन्य यात्रा संबंधित समस्या सिर्फ खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है बल्कि आम यात्रियों के लिए भी यह एक आम परेशानी बन चुकी है। फ्लाइट के ऑपरेशनल कारणों से रद्द या देरी होना खासकर जब यात्रियों को कोई जानकारी नहीं दी जाती तो यह उनकी यात्रा को और भी तनावपूर्ण बना देता है।

    सिराज की प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को एक बड़ा सार्वजनिक ध्यान दिलाया है, और अब यह देखना होगा कि एअर इंडिया इस मामले को किस तरह से हल करती है ताकि भविष्य में इस प्रकार की असुविधाओं से बचा जा सके।