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  • रॉकेट से सैटेलाइट तक देश में बनेंगे अहम पुर्जे, इसरो ने जारी किए टेंडर; फ्लाइट सोलर पैनल भी होंगे स्वदेशी

    रॉकेट से सैटेलाइट तक देश में बनेंगे अहम पुर्जे, इसरो ने जारी किए टेंडर; फ्लाइट सोलर पैनल भी होंगे स्वदेशी

    नई दिल्ली । भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन रॉकेट और सैटेलाइट में इस्तेमाल होने वाले कई अहम पुर्जे देश में बनाएगा। इसरो के अलग-अलग केंद्रों ने इन तकनीकी कामों के लिए टेंडर जारी किए हैं। इनमें सबसे अहम रॉड एंड बेयरिंग का स्वदेशी विकास है।

    विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र ने इसके लिए अलग से टेंडर जारी किया है। खास बात यह है कि इसमें विदेशी मूल के उपकरण निर्माताओं और उनके एजेंटों को बोली लगाने की अनुमति नहीं है। इससे इस तकनीकी क्षेत्र में देश के भीतर विकास और निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है।

    इसरो के यूआर राव सैटेलाइट सेंटर ने वाइब्रेशन टेस्ट फिक्स्चर के लिए टेंडर जारी किया है। इसका इस्तेमाल कंपन की स्थिति में अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले उपकरणों और संरचनाओं को जांचने के लिए किया जाता है। अंतरिक्ष अभियानों के दौरान उपकरणों को विभिन्न परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, इसलिए उनकी जांच के लिए ऐसे परीक्षण महत्वपूर्ण होते हैं।

    सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र ने एचपीएस3 एक्सियल थ्रस्ट मेजरमेंट सिस्टम के लिए टेंडर निकाला है। यह रॉकेट से जुड़े परीक्षणों में महत्वपूर्ण होता है। इसके अलावा अंतरिक्ष संचार केंद्र ने एक्स-बैंड सिमुलेशन अप-कन्वर्टर और एक्साइटर के लिए भी टेंडर जारी किया है। ये उपकरण अंतरिक्ष संचार से जुड़े तकनीकी कार्यों में उपयोग किए जाते हैं।

    फ्लाइट सोलर पैनल का फैब्रिकेशन और टेस्टिंग भी इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। यूआरएससी ने फ्लाइट सोलर पैनल के निर्माण और परीक्षण के लिए टेंडर मांगा है। इसमें ऐसे सौर पैनलों के निर्माण और उनकी जांच से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा, जिनका इस्तेमाल वास्तविक अंतरिक्ष मिशन में किया जाना है।

    सैटेलाइटों में सौर पैनल सूर्य की रोशनी से बिजली बनाने का मुख्य साधन होते हैं। अंतरिक्ष मिशनों में इनका उपयोग उपग्रहों के लिए आवश्यक विद्युत ऊर्जा उपलब्ध कराने में किया जाता है। इसलिए इनके निर्माण और परीक्षण की प्रक्रिया अंतरिक्ष अभियानों की तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका रखती है।

    इसरो की ओर से अलग-अलग तकनीकी जरूरतों के लिए जारी किए गए ये टेंडर रॉकेट और सैटेलाइट से जुड़े उपकरणों के देश में विकास और निर्माण की दिशा में उठाए गए कदम हैं। रॉड एंड बेयरिंग से लेकर परीक्षण उपकरणों और संचार प्रणालियों तक कई क्षेत्रों में घरेलू क्षमता विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

    फ्लाइट सोलर पैनल के निर्माण और परीक्षण को भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है। इससे अंतरिक्ष मिशनों में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण उपकरणों और प्रणालियों के लिए देश के भीतर निर्माण तथा परीक्षण क्षमता को आगे बढ़ाने का प्रयास दिखाई देता है।

  • रिकॉर्ड EV बिक्री के बीच सिर्फ वाहन निर्माता नहीं, पूरी EV वैल्यू चेन की कंपनियां बन सकती हैं निवेशकों की बड़ी पसंद

    रिकॉर्ड EV बिक्री के बीच सिर्फ वाहन निर्माता नहीं, पूरी EV वैल्यू चेन की कंपनियां बन सकती हैं निवेशकों की बड़ी पसंद

    नई दिल्ली । भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार लगातार विस्तार की ओर बढ़ रहा है और इसके साथ ही निवेशकों की रुचि भी इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ी है। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि केवल इलेक्ट्रिक कार या दोपहिया वाहन बनाने वाली कंपनियों में निवेश करना पर्याप्त नहीं है। EV उद्योग की वास्तविक मजबूती उन कंपनियों में भी दिखाई देती है जो इस पूरे इकोसिस्टम को आवश्यक तकनीक, उपकरण और पुर्जे उपलब्ध कराती हैं। ऐसे में निवेश का दायरा वाहन निर्माताओं से आगे बढ़कर पूरी EV वैल्यू चेन तक फैलता नजर आ रहा है।

    हाल के समय में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। बढ़ती ईंधन कीमतों, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली नीतियों और उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं ने EV को तेजी से लोकप्रिय बनाया है। यही कारण है कि इस क्षेत्र से जुड़ी अनेक कंपनियों के कारोबार में भी विस्तार की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में EV उद्योग का विकास केवल वाहन निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे जुड़े हर स्तर के उद्योग को इसका लाभ मिलेगा।

    EV वैल्यू चेन में बैटरी निर्माण, मोटर, कंट्रोल सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, सॉफ्टवेयर, इंजीनियरिंग सेवाएं और चार्जिंग से जुड़े पावर उपकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन क्षेत्रों में कार्यरत कंपनियां वाहन निर्माताओं को जरूरी तकनीक और उत्पाद उपलब्ध कराती हैं। जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों का उत्पादन बढ़ेगा, इन कंपनियों की मांग भी समान गति से बढ़ने की संभावना है। यही वजह है कि निवेशकों का ध्यान अब पूरे इकोसिस्टम की ओर केंद्रित हो रहा है।

    बाजार विश्लेषकों ने इस क्षेत्र से जुड़ी कई कंपनियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया है। इनमें ऑटो कंपोनेंट, बैटरी, इंजीनियरिंग, पावर उपकरण और विशेष रसायन बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं। ऐसे व्यवसाय EV उद्योग की रीढ़ माने जाते हैं क्योंकि इनके बिना बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव नहीं है। यदि इलेक्ट्रिक वाहन बाजार अपेक्षित गति से आगे बढ़ता है, तो इन कंपनियों के राजस्व और ऑर्डर बुक पर भी इसका अनुकूल प्रभाव देखने को मिल सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को केवल किसी एक प्रमुख वाहन निर्माता पर निर्भर रहने के बजाय विविधीकृत रणनीति अपनानी चाहिए। EV उद्योग कई स्तरों पर अवसर प्रदान करता है और अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियां अपने-अपने हिस्से का लाभ अर्जित कर सकती हैं। इस कारण बैटरी, मोटर, ऑटो कंपोनेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग समाधान उपलब्ध कराने वाली कंपनियां भी दीर्घकालिक निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

    हालांकि किसी भी निवेश निर्णय से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार की गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धी क्षमता और भविष्य की विकास संभावनाओं का मूल्यांकन करना आवश्यक है। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक होता है और किसी भी क्षेत्र में निवेश जोखिम से पूरी तरह मुक्त नहीं होता। इसके बावजूद भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के बढ़ते दायरे और सरकार के स्वच्छ ऊर्जा पर बढ़ते जोर को देखते हुए EV वैल्यू चेन आने वाले वर्षों में निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण अवसरों वाला क्षेत्र बन सकती है। इसी वजह से अब बाजार की नजर केवल इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनियों पर नहीं, बल्कि पूरे EV इकोसिस्टम को मजबूत करने वाले उद्योगों पर भी बनी हुई है।