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  • कोरोना के बाद इबोला ले रहा महामारी का रूप…. कांगो में 3 हजार से ज्यादा लोगों की मौत

    कोरोना के बाद इबोला ले रहा महामारी का रूप…. कांगो में 3 हजार से ज्यादा लोगों की मौत


    ब्राजाविले।
    अफ्रीका महाद्वीप (Africa Continent) के कुछ देशों में दावा किया जा रहा है कि कोरोना (Corona) के बाद इबोला महामारी (Ebola Epidemic) का रुप अख्तियार करके लोगों को असमय काल के गाल में खींच रही है. कुछ घंटे पहले जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, खासकर डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (Democratic Republic of Congo) में इबोला के प्रकोप से मरने वालों की संख्या 3,000 से ज्यादा हो गई है. हजारों मौतों के बाद डब्ल्यूएचओ से लेकर कई देशों की सरकारें तक स्तब्ध हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कांगो में मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 3,007 पहुंच चुका है, जबकि इबोला से संक्रमित मरीजों की तादाद अब 6,186 है।

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इस साल देश की अब तक की सबसे भयानक महामारी उत्तर-पूर्व में तेजी से फैलती जा रही है. इसने लाखों लोगों को अपनी चपेट में लिया है. इस बीमारी से मरने वालों का आंकड़ा लोगों को डरा रहा है।


    शहर दर शहर इबोला का ‘कहर’

    गुरुवार के बुलेटिन में पीड़ितों और मृतकों का आंकड़ा और बढ़ सकता है. आपको बताते चलें कि इस बीमारी के फैलने की आधिकारिक घोषणा 15 मई को इतुरी प्रांत में हुई थी, हालांकि कुछ स्वास्थ्य अधिकारियों और विशेषज्ञों का कहना है कि इसका प्रकोप शायद जनवरी, 2026 में ही शुरू हो गया था.

    कांगो के अधिकारियों, विश्व स्वास्थ्य संगठन और सहायता समूहों की इसे रोकने की कोशिशों के बावजूद, यह बीमारी छह प्रांतों में फैल चुकी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लचर निगरानी सिस्टम, असुरक्षा और समुदायों के आपसी विरोध के कारण मरीजों की जल्दी पहचान करने और उनके इलाज की कोशिशों में रुकावट आई है।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि लगभग 60% मौतें अस्पतालों के बाहर होती हैं, जिससे मरीजों की मौत होने से पहले इबोला पीड़ित मामलों का पता लगाने में आने वाली चुनौतियों का पता चलता है. साल 2026 में इबोला का प्रकोप, 2018-2020 की महामारी को पीछे छोड़ते हुए कांगो के इतिहास का सबसे बड़ा और सबसे घातक रूप लेता जा रहा है. कांगो के लोगों का मानना है कि इस बार इबोला का प्रकोप साल 2014-2016 में पश्चिम अफ्रीका में फैले प्रकोप से घातक हो सकता है. एक दशक पहले गिनी, लाइबेरिया और सिएरा लियोन में 28,600 से ज्यादा लोग इबोला से संक्रमित हुए थे तब 11,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।


    कब-कब दहशत में आई दुनिया?

    WHO और देश की सरकारें किसी बीमारी को महामारी घोषित करती हैं. बीती कुछ सदियों की बड़ी महामारियों की बात करें तो अमेरिका सरकार की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक कोविड नाम की महामारी से पहले 1918-1919 की इन्फ्लुएंजा महामारी को मानव इतिहास की सबसे घातक बीमारी और महामारी माना गया था।

    108 साल पहले इन्फ्लुएंजा वायरस ने एक ही समय में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में दिखा और उसने अप्रत्याशित रूप से लोगों की जान ली थी. उस समय 5 से 10 करोड़ लोगों की मौत हुई थी. उस महामारी में बीमारी के लक्षण और उसके फैलने का तरीका भी कई मायनों में अप्रत्याशित था. इसी तरह 1957-58 का एशियाई फ्लू, 1968-69 का हांगकांग फ्लू और 2009-10 में स्वाइन फ्लू नाम की बीमारी ने दुनिया को डराया था।

    कोरोनावायरस महामारी के कारण दुनिया भर में आधिकारिक तौर पर 71 लाख लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी. WHO और अन्य स्वतंत्र डेटा एजेंसियों के मुताबिक महामारी के दौरान हुई अप्रत्यक्ष या अतिरिक्त मौतों को भी शामिल करें तो असल आंकड़ा 1.8 करोड़ से 3 करोड़ के बीच होने का अनुमान है। सालों पहले न तो मेडिकल साइंस आज की जैसी समृद्ध थी और न ही जीवन रक्षक दवाएं और मेडिकल उपकरण थे, तब इतनी मौतें होना समझ में आता है, लेकिन आज इतनी दवाओं और टीके होने के बावजूद तमाम वायरस से लोगों का डरना समझ से परे है।

  • डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला संक्रमण तेजी से फैला, WHO ने वैश्विक सतर्कता और तत्काल कार्रवाई की अपील

    डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला संक्रमण तेजी से फैला, WHO ने वैश्विक सतर्कता और तत्काल कार्रवाई की अपील

    नई दिल्ली । डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला वायरस का मौजूदा प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि संक्रमण की रफ्तार पर समय रहते प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में यह और अधिक व्यापक तबाही का कारण बन सकता है। मई 2026 में घोषित इस प्रकोप ने अब तक हजारों लोगों को संक्रमित किया है और बड़ी संख्या में मौतें दर्ज की गई हैं। बढ़ते मामलों के कारण यह दुनिया के इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी इबोला महामारी बन चुकी है।

    स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार यह प्रकोप बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के कारण फैल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस वायरस के लिए अभी तक कोई स्वीकृत टीका या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि संक्रमण की रोकथाम के लिए संक्रमित व्यक्ति की शीघ्र पहचान, संपर्क में आए लोगों की निगरानी, संक्रमण नियंत्रण और समुदाय स्तर पर जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण उपाय माने जा रहे हैं। स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर संक्रमण की श्रृंखला तोड़ने का प्रयास कर रही हैं।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के ताजा आकलन के अनुसार जुलाई के अंत तक इबोला संक्रमण के मामलों की संख्या 3,600 से अधिक पहुंच चुकी है, जबकि लगभग 1,600 लोगों की मौत हो चुकी है। मृत्यु दर भी काफी अधिक बनी हुई है, जिससे स्थिति की गंभीरता और बढ़ गई है। संगठन का कहना है कि कई क्षेत्रों में संक्रमण की नई कड़ियां लगातार सामने आ रही हैं, जिससे प्रकोप पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

    कांगो का उत्तर-पूर्वी इतुरी प्रांत इस महामारी से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। यह इलाका लंबे समय से संघर्ष, विस्थापन और मानवीय संकट जैसी समस्याओं का सामना कर रहा है। बड़ी संख्या में लोगों का लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना, सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं, स्वच्छ पानी और पर्याप्त चिकित्सा संसाधनों की कमी संक्रमण को नियंत्रित करने के प्रयासों को और कठिन बना रही है। पड़ोसी देशों की सीमाओं से लोगों की आवाजाही भी स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा रही है।

    विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान प्रकोप ने वर्ष 2018 से 2020 के बीच कांगो में फैली पिछली बड़ी इबोला महामारी के मामलों का आंकड़ा भी पीछे छोड़ दिया है। अब यह पश्चिम अफ्रीका में वर्ष 2014 से 2016 के बीच फैली ऐतिहासिक महामारी के बाद दूसरी सबसे बड़ी इबोला महामारी के रूप में दर्ज हो चुका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा स्थिति पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हुआ तो संक्रमण का दायरा और बढ़ सकता है।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थाएं प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी, जांच, उपचार सुविधाओं के विस्तार और सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रमों को मजबूत करने पर जोर दे रही हैं। साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और संक्रमण के संभावित प्रसार को रोकने के लिए क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता भी बताई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान, संक्रमित मरीजों का पृथक्करण और स्वास्थ्य सुरक्षा उपायों का कड़ाई से पालन ही इस महामारी के प्रभाव को सीमित करने का सबसे प्रभावी तरीका है। वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय की नजर अब कांगो की स्थिति पर बनी हुई है, क्योंकि यह प्रकोप केवल एक देश ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर चुनौती बन चुका है।

  • अफ्रीकी देश कांगो में इबोला का कहर…. अब तक 1,031 लोगों की हो चुकी है मौत

    अफ्रीकी देश कांगो में इबोला का कहर…. अब तक 1,031 लोगों की हो चुकी है मौत


    घाना।
    अफ्रीकी देश कांगो (Congo) में इबोला (Ebola) के प्रकोप से 1,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. यह इतिहास का सबसे तेजी से फैलने वाला इबोला प्रकोप माना जा रहा है।

    बुधवार को घाना में एक स्वास्थ्य सम्मेलन में बोलते हुए, ‘अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन’ के महानिदेशक डॉ. जीन कासेया (Dr. Jean Casey) ने बताया कि अब तक 1,031 मौतों की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा, ‘ये लोग मर रहे हैं. वे इसलिए मर रहे हैं क्योंकि हमारे पास वैक्सीन नहीं हैं, दवाएं नहीं हैं और फंड नहीं है।

    कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय की ताजा जानकारी के अनुसार, सोमवार तक इस प्रकोप में 2,473 मामले दर्ज किए गए थे. मंत्रालय ने बताया कि कम से कम 737 मरीज आइसोलेशन में थे या अस्पताल में भर्ती थे।

    इस बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि इबोला प्रकोप का वास्तविक दायरा आधिकारिक आंकड़ों की तुलना में दो से चार गुना बड़ा हो सकता है. WHO के मुताबिक, 15 मई से शुरू हुआ यह प्रकोप इतनी तेजी से फैल रहा है कि स्वास्थ्य अधिकारी इसकी रफ्तार को पकड़ने में सफल नहीं हो पा रहे हैं.

    अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि 80% नए मामले संक्रमण की ज्ञात चेन के बाहर सामने आए हैं. यह इस बात का संकेत है कि प्रकोप स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा ट्रैक किए जा सकने की गति से भी तेजी से फैल रहा है.

    बता दें, इबोला एक बहुत खतरनाक वायरस से होने वाली बीमारी है. यह संक्रमण दुर्लभ जरूर है, लेकिन काफी गंभीर और कई मामलों में जानलेवा साबित हो सकता है.

    यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों जैसे खून, उल्टी, पसीना या वीर्य के संपर्क में आने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है. इसका कोई पक्का इलाज अभी तक नहीं है।

  • इबोला वायरस का कहर: 900 से ज्यादा संदिग्ध केस, WHO ने घोषित किया Global Health Emergency; भारत में अलर्ट

    इबोला वायरस का कहर: 900 से ज्यादा संदिग्ध केस, WHO ने घोषित किया Global Health Emergency; भारत में अलर्ट



    नई दिल्ली। अफ्रीकी देशों डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में इबोला वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है। हालात की गंभीरता को देखते हुए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने इसे अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है। इस बार संक्रमण दुर्लभ बुंडीबुग्यो स्ट्रेन से फैल रहा है, जिसके लिए फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है।

    WHO की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 900 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें 101 मामलों की पुष्टि हुई है। कांगो के इटुरी प्रांत को इसका केंद्र बताया जा रहा है, जहां लाखों लोग संघर्ष और अस्थिरता के बीच रह रहे हैं।

    यूएस CDC के अनुसार कांगो में अब तक 119 संदिग्ध मौतें और 10 पुष्ट मौतें दर्ज की गई हैं, जबकि युगांडा में भी नए मामले सामने आने के बाद स्थिति गंभीर बनी हुई है। वायरस अब स्थानीय समुदायों में फैलता जा रहा है, जिससे नियंत्रण और मुश्किल हो गया है।

    इसी बीच भारत सरकार ने भी एहतियात के तौर पर एडवाइजरी जारी की है। कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग बढ़ा दी गई है और एयरपोर्ट्स पर निगरानी कड़ी कर दी गई है। हालांकि भारत में अभी तक इबोला का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है, लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों को गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है।

  • दुनिया पर मंडरा रहा इबोला का नया खतरा: भारत ने नागरिकों को किया सावधान, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी चिंता

    दुनिया पर मंडरा रहा इबोला का नया खतरा: भारत ने नागरिकों को किया सावधान, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली। अफ्रीकी देशों में तेजी से फैल रहे इबोला संक्रमण ने एक बार फिर दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। हालात को गंभीर मानते हुए भारत सरकार ने एहतियाती कदम उठाए हैं और भारतीय नागरिकों को कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह जारी की है। सरकार ने साफ कहा है कि इन देशों में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता और सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो गया है। इस चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है और कई देशों ने भी अपने स्तर पर निगरानी व्यवस्था मजबूत करनी शुरू कर दी है।

    इबोला वायरस को दुनिया की सबसे खतरनाक संक्रामक बीमारियों में गिना जाता है। इसकी गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह संक्रमण बहुत तेजी से फैल सकता है और कई मामलों में मृत्यु दर भी काफी अधिक देखी गई है। वर्तमान में जिस वायरस स्ट्रेन को लेकर चिंता जताई जा रही है, उसने स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है। इसी कारण वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को अलर्ट मोड पर रखा गया है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते संक्रमण को नियंत्रित नहीं किया गया तो स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

    भारत सरकार ने अपने नागरिकों से अपील की है कि जो लोग इन प्रभावित देशों में रह रहे हैं या यात्रा की योजना बना रहे हैं, वे स्थानीय स्वास्थ्य नियमों और सुरक्षा दिशानिर्देशों का गंभीरता से पालन करें। लोगों को भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों से दूरी बनाने, स्वच्छता बनाए रखने और स्वास्थ्य संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी गई है। सरकार ने यह भी कहा है कि वर्तमान स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर पैनी नजर बनी हुई है।

    फिलहाल राहत की बात यह है कि भारत में इस वायरस से संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि वैश्विक यात्रा और अंतरराष्ट्रीय संपर्क के दौर में किसी भी बीमारी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। इसी वजह से एयरपोर्ट और सीमा क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है ताकि प्रभावित इलाकों से आने वाले यात्रियों की समय रहते जांच की जा सके।

    विशेषज्ञों के अनुसार इबोला संक्रमण की शुरुआत तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, सिरदर्द, शरीर दर्द और अन्य गंभीर लक्षणों से हो सकती है। कई मामलों में यह बीमारी शरीर के अंदर गंभीर प्रभाव डाल सकती है, जिससे मरीज की स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। यही कारण है कि स्वास्थ्य एजेंसियां लोगों से अफवाहों से दूर रहने और केवल आधिकारिक सलाह पर भरोसा करने की अपील कर रही हैं।

    बदलते वैश्विक हालात ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्वास्थ्य सुरक्षा अब केवल किसी एक देश का नहीं बल्कि पूरी दुनिया का मुद्दा बन चुकी है। ऐसे समय में सतर्कता, जागरूकता और समय पर उठाए गए कदम ही किसी बड़े संकट को रोकने में सबसे अहम भूमिका निभा सकते हैं।