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  • इबोला वायरस का कहर: 900 से ज्यादा संदिग्ध केस, WHO ने घोषित किया Global Health Emergency; भारत में अलर्ट

    इबोला वायरस का कहर: 900 से ज्यादा संदिग्ध केस, WHO ने घोषित किया Global Health Emergency; भारत में अलर्ट



    नई दिल्ली। अफ्रीकी देशों डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में इबोला वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है। हालात की गंभीरता को देखते हुए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने इसे अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है। इस बार संक्रमण दुर्लभ बुंडीबुग्यो स्ट्रेन से फैल रहा है, जिसके लिए फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है।

    WHO की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 900 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें 101 मामलों की पुष्टि हुई है। कांगो के इटुरी प्रांत को इसका केंद्र बताया जा रहा है, जहां लाखों लोग संघर्ष और अस्थिरता के बीच रह रहे हैं।

    यूएस CDC के अनुसार कांगो में अब तक 119 संदिग्ध मौतें और 10 पुष्ट मौतें दर्ज की गई हैं, जबकि युगांडा में भी नए मामले सामने आने के बाद स्थिति गंभीर बनी हुई है। वायरस अब स्थानीय समुदायों में फैलता जा रहा है, जिससे नियंत्रण और मुश्किल हो गया है।

    इसी बीच भारत सरकार ने भी एहतियात के तौर पर एडवाइजरी जारी की है। कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग बढ़ा दी गई है और एयरपोर्ट्स पर निगरानी कड़ी कर दी गई है। हालांकि भारत में अभी तक इबोला का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है, लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों को गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है।

  • दुनिया पर मंडरा रहा इबोला का नया खतरा: भारत ने नागरिकों को किया सावधान, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी चिंता

    दुनिया पर मंडरा रहा इबोला का नया खतरा: भारत ने नागरिकों को किया सावधान, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली। अफ्रीकी देशों में तेजी से फैल रहे इबोला संक्रमण ने एक बार फिर दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। हालात को गंभीर मानते हुए भारत सरकार ने एहतियाती कदम उठाए हैं और भारतीय नागरिकों को कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह जारी की है। सरकार ने साफ कहा है कि इन देशों में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता और सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो गया है। इस चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है और कई देशों ने भी अपने स्तर पर निगरानी व्यवस्था मजबूत करनी शुरू कर दी है।

    इबोला वायरस को दुनिया की सबसे खतरनाक संक्रामक बीमारियों में गिना जाता है। इसकी गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह संक्रमण बहुत तेजी से फैल सकता है और कई मामलों में मृत्यु दर भी काफी अधिक देखी गई है। वर्तमान में जिस वायरस स्ट्रेन को लेकर चिंता जताई जा रही है, उसने स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है। इसी कारण वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को अलर्ट मोड पर रखा गया है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते संक्रमण को नियंत्रित नहीं किया गया तो स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

    भारत सरकार ने अपने नागरिकों से अपील की है कि जो लोग इन प्रभावित देशों में रह रहे हैं या यात्रा की योजना बना रहे हैं, वे स्थानीय स्वास्थ्य नियमों और सुरक्षा दिशानिर्देशों का गंभीरता से पालन करें। लोगों को भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों से दूरी बनाने, स्वच्छता बनाए रखने और स्वास्थ्य संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी गई है। सरकार ने यह भी कहा है कि वर्तमान स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर पैनी नजर बनी हुई है।

    फिलहाल राहत की बात यह है कि भारत में इस वायरस से संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि वैश्विक यात्रा और अंतरराष्ट्रीय संपर्क के दौर में किसी भी बीमारी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। इसी वजह से एयरपोर्ट और सीमा क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है ताकि प्रभावित इलाकों से आने वाले यात्रियों की समय रहते जांच की जा सके।

    विशेषज्ञों के अनुसार इबोला संक्रमण की शुरुआत तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, सिरदर्द, शरीर दर्द और अन्य गंभीर लक्षणों से हो सकती है। कई मामलों में यह बीमारी शरीर के अंदर गंभीर प्रभाव डाल सकती है, जिससे मरीज की स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। यही कारण है कि स्वास्थ्य एजेंसियां लोगों से अफवाहों से दूर रहने और केवल आधिकारिक सलाह पर भरोसा करने की अपील कर रही हैं।

    बदलते वैश्विक हालात ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्वास्थ्य सुरक्षा अब केवल किसी एक देश का नहीं बल्कि पूरी दुनिया का मुद्दा बन चुकी है। ऐसे समय में सतर्कता, जागरूकता और समय पर उठाए गए कदम ही किसी बड़े संकट को रोकने में सबसे अहम भूमिका निभा सकते हैं।