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मध्य प्रदेश की राज्यसभा जंग तेज, कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने; मीनाक्षी नटराजन बोलीं- एकजुट हैं हम
नई दिल्ली। भोपाल में राज्यसभा चुनाव का राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। एक ओर कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन के बाद पार्टी में एकजुटता का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने भी अपने चुनावी समीकरणों को मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है।कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि यह चुनाव विचारधाराओं की लड़ाई है और पार्टी पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतरी है। नामांकन के दौरान प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कई विधायक मौजूद रहे। इस दौरान विधायकों ने एकजुटता दिखाते हुए पार्टी नेतृत्व के साथ फोटो सेशन भी करायाहालांकि इसी बीच कांग्रेस को एक झटका भी लगा जब हुजूर सीट से पूर्व प्रत्याशी नरेश ज्ञानचंदानी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। वे मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने से नाराज बताए जा रहे हैं। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस खेमे में हलचल बढ़ा दी है।वहीं बीजेपी खेमे में भी हलचल कम नहीं है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि पार्टी के पास अतिरिक्त वोट हैं और विकास चाहने वाले लोग बीजेपी उम्मीदवारों के साथ खड़े होंगे। उन्होंने दावा किया कि चुनाव परिणाम पार्टी के पक्ष में रहेगा।बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट ने भी अपनी जिम्मेदारी को लेकर भरोसा जताया और कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने जो जिम्मेदारी दी है, उसे वे पूरी निष्ठा से निभाएंगे। इसी बीच उनके परिवार की ओर से धार्मिक माहौल भी देखने को मिला। महेश केवट के भाई और बेटे ने ओरछा में विशेष पूजा-अर्चना कर उनके राजनीतिक भविष्य की सफलता की कामना की।भोपाल में बीजेपी दफ्तर में भी लगातार विधायकों की आवाजाही जारी है। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और कई वरिष्ठ नेता बैठक के लिए पहुंचे। वहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सभी विधायकों को भोपाल में ही रहने के निर्देश दिए हैं, जिससे वोटिंग प्रक्रिया में पूरी एकजुटता बनी रहे।राज्यसभा चुनाव को लेकर दोनों दलों ने अपनी रणनीति अंतिम चरण में पहुंचा दी है। कांग्रेस जहां एकजुटता का दावा कर रही है, वहीं बीजेपी अपने संख्याबल और संगठनात्मक ताकत पर भरोसा जता रही है। आने वाले दिनों में यह चुनाव राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकता है। -

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की नितिन गडकरी से मुलाकात बस ट्रक बॉडी उद्योग की समस्याओं पर मंथन तेज
नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपनी बहन और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से महत्वपूर्ण मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब बस और ट्रक बॉडी निर्माण से जुड़ा उद्योग कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है और उद्योग जगत अपनी समस्याओं को लेकर सरकार से समाधान की उम्मीद लगाए बैठा है।इस बैठक में राजस्थान के बस और ट्रक बॉडी बिल्डर एसोसिएशन के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार इस मुलाकात में प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख समस्याओं को विस्तार से सामने रखा। उद्योग से जुड़े लोगों ने खासतौर पर नए तकनीकी मानकों, बढ़ती उत्पादन लागत और मंत्रालय के अनुपालन नियमों को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं। उनका कहना था कि लगातार बदलते नियम और मानकों के चलते छोटे और मध्यम स्तर के निर्माताओं के लिए व्यवसाय चलाना कठिन होता जा रहा है।
राहुल गांधी ने इस दौरान उद्योग प्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से सुना और इन मुद्दों को केंद्रीय मंत्री के सामने रखा। उन्होंने नितिन गडकरी से आग्रह किया कि इन समस्याओं का समाधान जल्द से जल्द निकाला जाए ताकि इस उद्योग से जुड़े लाखों लोगों की आजीविका सुरक्षित रह सके। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि यदि नियमों और शुल्कों का बोझ इसी तरह बढ़ता रहा तो कई छोटे निर्माता बाजार से बाहर हो सकते हैं जिससे रोजगार पर भी असर पड़ेगा।
सूत्रों के अनुसार गडकरी ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को ध्यान से सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करेगी और समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने उद्योग की चुनौतियों को समझने और उनके व्यावहारिक समाधान खोजने की बात कही।
बैठक से पहले भी इन प्रतिनिधियों ने राहुल गांधी से मुलाकात की थी और उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराया था। उस दौरान भी उन्होंने यह चिंता जताई थी कि लाइसेंस प्रक्रिया में अधिक खर्च और समय लगने के कारण छोटे निर्माताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। इसके साथ ही नए मानकों को पूरा करने में आ रही कठिनाइयों ने भी उनकी चिंता बढ़ा दी है।
प्रियंका गांधी ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में बताया कि प्रतिनिधियों ने लाइसेंस और अनुपालन से जुड़ी दिक्कतों को प्रमुख रूप से उठाया है। उन्होंने कहा कि नितिन गडकरी ने इन समस्याओं को समझते हुए जल्द समाधान निकालने का आश्वासन दिया है। इस बयान से उद्योग जगत में थोड़ी राहत की उम्मीद जगी है।
यह बैठक ऐसे समय में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब देश में बुनियादी ढांचे और परिवहन क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। सरकार जहां नियमों को सख्त और आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रही है वहीं उद्योग जगत चाहता है कि इन नियमों को व्यावहारिक बनाया जाए ताकि छोटे और मध्यम उद्यम भी टिक सकें।
कुल मिलाकर यह मुलाकात सिर्फ एक राजनीतिक बैठक नहीं बल्कि उद्योग और सरकार के बीच संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन मुद्दों पर क्या ठोस कदम उठाती है और बस ट्रक बॉडी निर्माण उद्योग को किस तरह राहत मिलती है