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  • कर्नाटक कांग्रेस में 30 विधायकों का दिल्ली दौरा, कैबिनेट फेरबदल की मांग तेज…

    कर्नाटक कांग्रेस में 30 विधायकों का दिल्ली दौरा, कैबिनेट फेरबदल की मांग तेज…


    नई दिल्ली। कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया है, जहां सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर असंतोष के स्वर खुलकर सामने आने लगे हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की सरकार में संभावित कैबिनेट फेरबदल को लेकर पार्टी के भीतर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, कर्नाटक कांग्रेस के लगभग 30 वरिष्ठ विधायकों का एक समूह दिल्ली पहुंच चुका है, जहां वे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की तैयारी में हैं। इन विधायकों का उद्देश्य राज्य मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव की मांग को मजबूती से रखना है। उनका कहना है कि सरकार को बने ढाई से तीन वर्ष हो चुके हैं और अब प्रशासन में नए चेहरों को अवसर देना आवश्यक है, ताकि सरकार में नई ऊर्जा और गति लाई जा सके।

    जानकारी के मुताबिक, यह असंतोष अचानक नहीं उभरा है, बल्कि लंबे समय से पार्टी के भीतर चल रही बैठकों और असंतोषपूर्ण चर्चाओं का परिणाम है। हाल के राजनीतिक घटनाक्रम और उपचुनावों के बाद विधायकों के एक वर्ग में यह धारणा मजबूत हुई है कि संगठन और सरकार में अपेक्षित बदलाव नहीं किए गए हैं।

    विधायकों का कहना है कि कुछ मंत्री लंबे समय से अपने पदों पर बने हुए हैं, जिससे प्रशासनिक संतुलन और कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है। उनका तर्क है कि अनुभवी और नए चेहरों को शामिल करने से सरकार की कार्यप्रणाली और जनता के बीच उसकी स्वीकार्यता और मजबूत होगी।

    इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने संतुलित प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट फेरबदल की प्रक्रिया पहले से चल रही है और इसमें देरी का कारण विभिन्न राज्यों में चुनावी व्यस्तता और बजट सत्र है। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्री पद की इच्छा रखने वाले विधायकों का दिल्ली जाना स्वाभाविक है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर सभी विषयों पर चर्चा जारी है और समय आने पर उचित निर्णय लिया जाएगा। साथ ही उन्होंने भरोसा जताया कि कांग्रेस आगामी चुनावों में मजबूत प्रदर्शन करेगी।

    इस घटनाक्रम के बीच अब सभी की नजरें पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि क्या शीर्ष नेतृत्व विधायकों की मांग के अनुरूप कैबिनेट में बड़ा फेरबदल करता है या मौजूदा व्यवस्था को ही जारी रखने का निर्णय लिया जाता है।

    कर्नाटक कांग्रेस में यह स्थिति एक बार फिर आंतरिक असंतुलन और नेतृत्व की चुनौती को उजागर कर रही है, जिससे राज्य की राजनीति में आने वाले दिनों में और अधिक हलचल की संभावना बनी हुई है।

  • कर्नाटक CM पद पर खींचतान बरकरार, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दिल्ली में हाई कमान से करेंगे मुलाकात

    कर्नाटक CM पद पर खींचतान बरकरार, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दिल्ली में हाई कमान से करेंगे मुलाकात


    नई दिल्ली / कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस के भीतर जारी सियासी खींचतान अभी थमने के आसार नहीं दिखा रही है। बेलगावी से लेकर बेंगलुरु तक लगातार बयानबाजी के बीच अब यह मामला सीधे दिल्ली दरबार तक पहुंचता नजर आ रहा है। चर्चा है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उप मुख्य मंत्रीडीके शिवकुमार 14 दिसंबर को नई दिल्ली में कांग्रेस हाई कमान से मुलाकात कर सकते हैं। कुछ दिन पहले हाई कमान के निर्देश पर दोनों नेताओं का मुख्यमंत्री आवास पर नाश्ता हुआ था। उस बैठक के बाद यह संदेश देने की कोशिश की गई कि सब कुछ सामान्य हो गया है। लेकिन इसके बाद दोनों खेमों से जिस तरह के बयान सामने आए हैं, उससे साफ है कि अंदरखाने असहमति अब भी बनी हुई है।

    दिल्ली में अहम बैठक की संभावना
    हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर सकते हैं। पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि यह बैठक सोनिया गांधी, राहुल गांधी या कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे में से किसी एक के साथ हो सकती है। हालांकि समय कम बताया जा रहा है, लेकिन अगर यह मुलाकात होती है तो इसे कर्नाटक की राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। कांग्रेस के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा
    सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। अगर वे हमारे शीर्ष नेतृत्व से मिलना चाहते हैं, तो इसमें कोई बाधा नहीं है।सूत्रों के अनुसार, यह संभावित बैठक नई दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली कांग्रेस रैली के बाद हो सकती है, जिसे ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ अभियान के तहत आयोजित किया जा रहा है।
    कहां से शुरू हुआ विवाद?
    2023 में कर्नाटक में कांग्रेस की सत्ता में वापसी के बाद से ही मुख्यमंत्री पद को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। सत्ता गठन के समय सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री और डीके शिवकुमार को उप मुख्यमंत्री बनाया गया था। तभी से यह चर्चा चलती रही कि ढाई साल बाद मुख्यमंत्री पद में बदलाव हो सकता है।20 नवंबर को सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद यह मुद्दा फिर से तेज हो गया। शिवकुमार समर्थकों का दावा है कि चुनाव जीतने के बाद सत्ता साझा करने को लेकर कोई अघोषित समझौता हुआ था, जिसके तहत आधे कार्यकाल के बाद मुख्यमंत्री बदले जाने की बात थी। हालांकि पार्टी और सरकार की ओर से कभी भी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई।

    बयानबाजी ने बढ़ाया तनाव

    हाल के दिनों में दोनों नेताओं के समर्थकों की बयानबाजी ने आग में घी डालने का काम किया है। एक ओर सिद्धारमैया खेमे की ओर से यह संदेश दिया जा रहा है कि सरकार स्थिर है और नेतृत्व में बदलाव की कोई जरूरत नहीं है, वहीं शिवकुमार समर्थक लगातार समझौते” की याद दिला रहे हैं।यह खींचतान न सिर्फ सरकार की छवि पर असर डाल रही है, बल्कि पार्टी के भीतर असंतोष को भी उजागर कर रही है। यही वजह है कि हाई कमान को अब सीधे दखल देना पड़ सकता है।

    हाई कमान के लिए बड़ी चुनौती
    कांग्रेस नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कर्नाटक में सरकार की स्थिरता बनी रहे और अंदरूनी कलह बाहर न आए। ऐसे में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की दिल्ली मुलाकात को फायरफाइटिंग मीटिंग के तौर पर देखा जा रहा है।अगर यह बैठक होती है, तो इससे यह साफ हो सकता है कि पार्टी नेतृत्व कर्नाटक में नेतृत्व को लेकर क्या रुख अपनाने जा रहा है। फिलहाल इतना तय है कि कर्नाटक की सियासत में आने वाले दिन काफी अहम होने वाले हैं।