Tag: Congress Criticism

  • पश्चिम एशिया संकट पर कांग्रेस का हमला, जयराम रमेश ने पीएम मोदी की चुप्पी पर उठाए सवाल

    पश्चिम एशिया संकट पर कांग्रेस का हमला, जयराम रमेश ने पीएम मोदी की चुप्पी पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी तनाव और लेबनान में इजराइली सैन्य कार्रवाई को लेकर भारत की विदेश नीति पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि मौजूदा वैश्विक घटनाक्रमों पर भारत का स्पष्ट रुख सामने आना चाहिए, क्योंकि ये सीधे तौर पर देश की आर्थिक और रणनीतिक हितों को प्रभावित करते हैं।

    जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत पश्चिम एशिया में संभावित शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार, यदि दोनों देशों के बीच किसी प्रकार का समझौता होता है तो होर्मुज स्ट्रेट के संचालन में स्थिरता आएगी, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य होगी और कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत जैसे ऊर्जा-आधारित आयातक देश के लिए यह स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इस कूटनीतिक प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा लेबनान में इजराइल की सैन्य कार्रवाई है। उन्होंने दावा किया कि इस सैन्य गतिविधि के कारण क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो रही है और शांति वार्ता पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। जयराम रमेश ने यह भी उल्लेख किया कि कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस कार्रवाई की आलोचना की गई है और वैश्विक स्तर पर चिंता व्यक्त की जा रही है।

    अपने बयान में जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि भारत जैसे बड़े लोकतंत्र और वैश्विक शक्ति को इन घटनाओं पर स्पष्ट और संतुलित प्रतिक्रिया देनी चाहिए, खासकर तब जब ये घटनाएं सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर रही हों। उन्होंने कटाक्ष करते हुए यह भी कहा कि विदेश नीति में स्पष्टता की कमी सवाल खड़े करती है।

    कांग्रेस का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला की अनिश्चितता भारत की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकती है। ऐसे में सरकार की सक्रिय कूटनीतिक भूमिका और स्पष्ट रुख आवश्यक माना जा रहा है।

    वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान आने वाले समय में विदेश नीति को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर सकते हैं। विपक्ष लगातार सरकार से अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अधिक पारदर्शिता और सक्रियता की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का रुख अक्सर संतुलित और रणनीतिक कूटनीति पर आधारित माना जाता है।

    कुल मिलाकर यह मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, कूटनीतिक संतुलन और भारत की अंतरराष्ट्रीय भूमिका जैसे महत्वपूर्ण पहलू जुड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है, जिससे विदेश नीति को लेकर बहस और गहराने की उम्मीद है।

  • कांग्रेस की राजनीति पर पीएम मोदी का निशाना, कहा-अकड़ और धोखे से कमजोर हुई पार्टी

    कांग्रेस की राजनीति पर पीएम मोदी का निशाना, कहा-अकड़ और धोखे से कमजोर हुई पार्टी


    नई दिल्ली । बेंगलुरु में आयोजित एक बड़ी जनसभा के दौरान देश की राजनीति को लेकर तीखे और सीधे संदेश सामने आए, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी राजनीति पर कड़ा रुख अपनाते हुए कांग्रेस पार्टी को अपने निशाने पर रखा। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि देश की राजनीति में कांग्रेस की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है और इसका मुख्य कारण उसकी राजनीतिक सोच और कार्यशैली में जमी हुई “अकड़” है।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि एक समय देश की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत मानी जाने वाली पार्टी अब लगातार चुनावी संघर्ष का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता ने पिछले कुछ वर्षों में बार-बार अपना रुझान स्पष्ट किया है और सत्ता के समीकरण बदलते रहे हैं। इसके बावजूद पार्टी अपनी हार की समीक्षा करने के बजाय दूसरों पर दोष मढ़ती रही है।

    अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में हार और जीत स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन हार को स्वीकार न कर दूसरों पर आरोप लगाना राजनीतिक परिपक्वता की कमी को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ राजनीतिक दल अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए संस्थाओं और व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए सही संकेत नहीं है।

    उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान सरकार का ध्यान विकास, जनकल्याण और स्थिर प्रशासन पर केंद्रित है। सरकार की नीतियों का उद्देश्य देश के गरीब और मध्यम वर्ग को सशक्त बनाना है। उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्षों में बड़ी संख्या में लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं और विकास योजनाओं का लाभ व्यापक स्तर पर पहुंचा है।

    प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों की सरकारों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि कई राज्यों में राजनीतिक अस्थिरता और आंतरिक विवादों के कारण विकास कार्य प्रभावित होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता में आने के बाद कई बार वादों और वास्तविकता के बीच अंतर दिखाई देता है, जिससे जनता में निराशा पैदा होती है।

    अपने संबोधन के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक गठबंधन केवल सत्ता तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि उनमें आपसी विश्वास और जिम्मेदारी भी होनी चाहिए। उन्होंने यह संकेत दिया कि कई बार राजनीतिक रिश्ते समय के साथ बदल जाते हैं और इसका असर प्रशासनिक स्थिरता पर भी पड़ता है।

    अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की जनता अब अधिक जागरूक हो चुकी है और वह विकास, स्थिरता और पारदर्शिता को प्राथमिकता देती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आने वाले समय में राजनीति का केंद्र केवल आरोप-प्रत्यारोप नहीं बल्कि ठोस विकास कार्य और जनता की भलाई होना चाहिए।

    पूरा संबोधन राजनीतिक रूप से बेहद सख्त और आक्रामक स्वर में रहा, जिसमें प्रधानमंत्री ने विपक्षी राजनीति पर कई सवाल उठाए और सरकार की उपलब्धियों को जनता के सामने रखा।

  • शुभेंदु के शपथ ग्रहण पर गरमाई सियासत, कांग्रेस ने पुराने-नए बयानों से उठाए सवाल

    शुभेंदु के शपथ ग्रहण पर गरमाई सियासत, कांग्रेस ने पुराने-नए बयानों से उठाए सवाल


    नई दिल्ली ।
    पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद जहां एक ओर समर्थकों में उत्साह देखा गया, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों ने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस ने एक वीडियो साझा कर केंद्र की राजनीति और भारतीय जनता पार्टी पर सीधा हमला बोला है, जिससे राज्य की सियासत में नया विवाद खड़ा हो गया है।

    शपथ ग्रहण के तुरंत बाद सामने आए इस राजनीतिक घटनाक्रम ने चर्चा को और तेज कर दिया। कांग्रेस की ओर से साझा किए गए वीडियो में दो अलग-अलग समय की राजनीतिक झलकियों को जोड़ा गया है। एक दृश्य में हालिया शपथ ग्रहण के बाद प्रधानमंत्री का शुभेंदु अधिकारी के साथ गर्मजोशी से मिलना दिखाया गया है, जबकि दूसरे दृश्य में पुराने समय का एक राजनीतिक बयान शामिल है, जिसे मौजूदा परिस्थिति से जोड़कर सवाल खड़े किए गए हैं। इसी तुलना के आधार पर कांग्रेस ने यह संदेश देने की कोशिश की कि समय के साथ राजनीतिक रिश्तों और रुख में बड़ा बदलाव आया है।

    इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। समर्थक इसे राजनीतिक परिपक्वता और बदलते समय की आवश्यकता बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे अवसरवादी राजनीति का उदाहरण मान रहा है। “वो साल दूसरा था, ये साल दूसरा है” जैसे संदेश के जरिए कांग्रेस ने राजनीतिक परिवर्तन और कथित विरोधाभास को उजागर करने की कोशिश की है, जिससे बहस और अधिक गहराती जा रही है।

    इसी बीच शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर भी लगातार चर्चा में बना हुआ है। कुछ वर्ष पहले तक वे एक अलग राजनीतिक दल से जुड़े हुए थे, लेकिन बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा और धीरे-धीरे राज्य की राजनीति में एक मजबूत चेहरा बनकर उभरे। उनके राजनीतिक फैसलों और चुनावी रणनीतियों ने पश्चिम बंगाल की सत्ता समीकरणों को कई बार प्रभावित किया है।

    2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में मिली जीत ने उन्हें राज्य की राजनीति में केंद्रीय भूमिका में ला खड़ा किया था। इसके बाद आने वाले वर्षों में उन्होंने लगातार राजनीतिक सक्रियता बनाए रखी और कई महत्वपूर्ण आंदोलनों और घटनाओं में प्रमुख भूमिका निभाई। 2026 के चुनावों में भी उनका प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जिसने राजनीतिक दिशा को पूरी तरह बदल दिया।

    हाल के चुनाव परिणामों ने राज्य की सत्ता संरचना को नया रूप दिया है। लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिला, जिसके बाद नई सरकार का गठन हुआ। इस बदलाव ने न केवल प्रशासनिक स्तर पर नई उम्मीदें जगाई हैं, बल्कि राजनीतिक टकराव को भी और बढ़ा दिया है।

    अब जब नई सरकार ने कार्यभार संभाल लिया है, तो विपक्ष की भूमिका और अधिक सक्रिय हो गई है। कांग्रेस द्वारा उठाए गए इस नए मुद्दे ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति और अधिक बयानबाजी, आरोप-प्रत्यारोप और रणनीतिक टकराव से भरी रहने वाली है।

  • महिला आरक्षण और परिसीमन विवाद पर भाजपा का कांग्रेस पर तीखा प्रहार, स्मृति ईरानी और रवि शंकर प्रसाद ने लगाए गंभीर आरोप

    महिला आरक्षण और परिसीमन विवाद पर भाजपा का कांग्रेस पर तीखा प्रहार, स्मृति ईरानी और रवि शंकर प्रसाद ने लगाए गंभीर आरोप


    नई दिल्ली:
    महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर संसद में जारी राजनीतिक बहस अब और अधिक तेज हो गई है। इस मुद्दे पर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं स्मृति ईरानी और रवि शंकर प्रसाद ने प्रेस वार्ता कर कांग्रेस और विपक्षी दलों पर गंभीर आरोप लगाए। दोनों नेताओं ने कहा कि विपक्ष ने महिला आरक्षण जैसे ऐतिहासिक मुद्दे पर असंगत और विरोधाभासी रुख अपनाया है, जिससे महिलाओं के अधिकारों को लेकर राजनीतिक भ्रम की स्थिति बनी है।

    स्मृति ईरानी ने कहा कि देश की महिलाओं के अधिकारों को लेकर जो चर्चा की जा रही है, उसमें विपक्ष का रवैया जमीनी वास्तविकताओं से अलग दिखाई देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस महिलाओं के राजनीतिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए अपेक्षित कार्य नहीं कर पाई। उनके अनुसार वर्तमान सरकार ने महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर ठोस कदम उठाए हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण केवल एक राजनीतिक घोषणा नहीं है बल्कि यह महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में वास्तविक भागीदारी दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उनके अनुसार सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि वास्तविक अधिकार देना है, जिससे वे देश की नीति निर्माण प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा सकें।

    स्मृति ईरानी ने कांग्रेस पर यह भी आरोप लगाया कि उसने इस मुद्दे को राजनीतिक दृष्टि से देखा है, जबकि यह सामाजिक सुधार से जुड़ा विषय है। उनके अनुसार महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर केवल भाषण देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नीतियों को जमीन पर लागू करना अधिक महत्वपूर्ण है।

    दूसरी ओर रवि शंकर प्रसाद ने भी कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दों पर स्पष्ट रुख नहीं रखता। उनके अनुसार संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार लोकसभा और विधानसभा सीटों का पुनर्वितरण परिसीमन के माध्यम से ही संभव है और यह जनसंख्या के आधार पर तय होता है।

    उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन एक आवश्यक प्रक्रिया है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार यह दोनों प्रक्रियाएं एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं और इन्हें अलग करके देखना व्यावहारिक नहीं होगा।

    रवि शंकर प्रसाद ने यह भी कहा कि विपक्ष कुछ मामलों में समर्थन की बात करता है लेकिन जब संवैधानिक प्रक्रिया की बात आती है तो विरोधाभासी रुख अपनाता है। उनके अनुसार यह स्थिति देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्पष्टता की कमी पैदा करती है।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल क्षेत्रीय संतुलन और प्रतिनिधित्व के मुद्दे को लेकर भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर नीति निर्माण की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

    कुल मिलाकर महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और गहरा गया है। दोनों पक्ष अपने अपने तर्कों के साथ इस मुद्दे पर आमने सामने हैं और यह बहस संसद से लेकर राजनीतिक मंचों तक लगातार तेज होती जा रही है।

  • मल्लिकार्जुन खरगे के विवादित बयान पर BJP ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया..

    मल्लिकार्जुन खरगे के विवादित बयान पर BJP ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया..


    नई दिल्ली:कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के हालिया ‘सांप’ बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने इस बयान को कांग्रेस की हताशा और राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताया। नबीन ने स्पष्ट किया कि खरगे के शब्द दरअसल गांधी परिवार के निर्देशों के तहत आ रहे हैं और वे रिमोट कंट्रोल की तरह चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बयान पूरी तरह से लोगों को सांप्रदायिक रूप से भड़काने और राजनीतिक माहौल को तनावपूर्ण बनाने की कोशिश है।

    नितिन नबीन ने सीधे तौर पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा मर्यादा लांघती रही है और जब भी इस तरह के विवादास्पद बयान दिए जाते हैं, जनता भाजपा को मजबूत समर्थन देती है। उन्होंने दावा किया कि पहले ये शब्द सीधे गांधी परिवार से आते थे और अब मल्लिकार्जुन खरगे के माध्यम से जनता तक पहुँच रहे हैं। नबीन ने कहा कि कांग्रेस के इस तरह के बयान इतिहास में हमेशा जनता के दृष्टिकोण को प्रभावित करने में असफल रहे हैं।

    भाजपा अध्यक्ष ने पश्चिम बंगाल और केरल की आगामी विधानसभा चुनावों पर भी प्रकाश डाला। बंगाल में भाजपा के वोट शेयर में लगातार वृद्धि हुई है और पार्टी इस बार राज्य में सरकार बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। केरल में उन्होंने एलडीएफ और यूडीएफ के बीच ‘मैच फिक्सिंग’ का आरोप लगाया और कहा कि जनता इस फिक्सिंग से तंग आ चुकी है। नबीन ने कहा कि भाजपा का वोट बैंक लगातार बढ़ रहा है और लोग पार्टी को एक सशक्त विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

    राहुल गांधी द्वारा बीजेपी और एलडीएफ के बीच ‘सेटिंग’ के आरोपों पर नबीन ने पलटवार किया। उन्होंने राहुल गांधी को कमजोर ज्ञान वाला नेता करार देते हुए सवाल उठाया कि अगर सेटिंग होती, तो पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में कांग्रेस और कम्युनिस्ट गठबंधन क्यों हैं। उन्होंने सबरीमाला मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा और पूछा कि क्यों इस संवेदनशील विषय पर राहुल गांधी चुप्पी साध लेते हैं। नबीन ने स्पष्ट किया कि भाजपा का लक्ष्य ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ है और पार्टी देश में कम्युनिस्ट सिस्टम को पूरी तरह उखाड़ फेंकने के लिए प्रतिबद्ध है।

    असम चुनाव को लेकर भी भाजपा अध्यक्ष ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पूरी तरह निराश और हताश स्थिति में है, जबकि भाजपा पिछले प्रदर्शन से भी बेहतर परिणाम लाने के लिए तैयार है। दक्षिण भारत में सुपरस्टार और टीवीके प्रमुख विजय की राजनीति में एंट्री पर नबीन ने कहा कि राजनीति में पूर्ण समय और समर्पण जरूरी है, पार्ट-टाइम से कोई काम नहीं चलता। उन्होंने तमिलनाडु में भाजपा के AIADMK के साथ गठबंधन का उल्लेख करते हुए पार्टी की रणनीति का स्पष्ट संकेत दिया।

    नबीन ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर शब्दों की मर्यादा के साथ कड़ा रुख अपनाना भाजपा का कर्तव्य है और पार्टी जनता के विश्वास और समर्थन को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसकी रणनीतियों और बयानबाजी का लक्ष्य केवल भ्रम और विवाद फैलाना है, जबकि जनता भाजपा को एक सशक्त विकल्प के रूप में देख रही है।

  • एमपी बजट पर सियासी संग्राम: PCC चीफ जीतू पटवारी ने बजट को ‘ठग-गुब्बारा और धांधलियों का बजट’ कहा, भ्रष्टाचार की नसबंदी की मांग

    एमपी बजट पर सियासी संग्राम: PCC चीफ जीतू पटवारी ने बजट को ‘ठग-गुब्बारा और धांधलियों का बजट’ कहा, भ्रष्टाचार की नसबंदी की मांग


    भोपाल । मध्य प्रदेश में वित्त वर्ष 2026-27 के बजट पेश होने के साथ ही सियासी तनाव भी तेज़ हो गया है। बुधवार को वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा पेपरलेस बजट विधानसभा में पेश किया गया, जिसमें किसानों, महिलाओं, युवाओं और गरीबों के लिए बड़े प्रावधान किए गए हैं। इस दौरान विपक्ष खासकर कांग्रेस ने बजट पर तीखी टिप्पणी की, इसे जनता के साथ धोखा, ठग, गुब्बारा और धांधलियों का बजट करार दिया।
    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि यह बजट भ्रष्टाचार की नसबंदी करने की बजाय सरकार का ढोंग बजट है। उन्होंने कहा कि सरकार सदन में कुत्तों की नसबंदी जैसी बातों पर समय बर्बाद कर रही है, जबकि असल मुद्दों भ्रष्टाचार और आर्थिक संकट पर काम होना चाहिए। पटवारी ने दावा किया कि पिछले वित्त वर्ष में केंद्र से मिलने वाला ₹50,000 करोड़ नहीं मिला, जिसके कारण सरकार अब तक अपने बजट का सिर्फ़ आधा ही खर्च कर सकी है और यह बजट फर्जी तथा खोखला है।

    पटवारी ने कर्ज बढ़ने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि सरकार रोज़ाना ₹213 करोड़ कर्ज ले रही है तथा इस वित्त वर्ष में लगभग ₹72,000 करोड़ का उधार लिया गया है, जिससे राज्य गंभीर आर्थिक संकट के कगार पर है। उन्होंने कहा कि बजट को वास्तविकता के साथ पेश करना चाहिए और मुख्यमंत्री मोहन यादव को राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है। विपक्ष ने बजट को गुब्बारा एवं धांधलियों का बजट बताया, जिसमें सिर्फ वाढ़ती व्यय और घोषणाओं का फोकस है लेकिन जमीन पर कोई ठोस योजना या क्रियान्वयन नहीं दिख रहा। इतना ही नहीं, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बजट में निवेश वाले वादे सिर्फ़ शोरगरबा हैं और वास्तव में जनता को इससे कोई ठोस लाभ नहीं मिलेगा।

    पटवारी ने सवाल उठाया कि यदि प्रति व्यक्ति आय बढ़ी है, तो क्यों गरीबी बनी हुई है और राशन की लंबी कतारें आज भी चल रहीं हैं? उन्होंने कहा कि बजट में रोज़गार और महंगाई जैसे मुद्दे पर कोई ठोस प्रावधान नहीं है और सरकार का आर्थिक समझ बिल्कुल जीरो है। इसके अलावा कांग्रेस ने न्यायिक जांच की मांग भी की, विशेष रूप से बेटियों की सुरक्षा और एेसी अन्य भयावह स्थितियों पर जहाँ प्रतिदिन लड़कियों के लापता होने और बलात्कार की घटनाएं बढ़ रही हैं। पीसीसी चीफ ने कहा कि यह मामला सिर्फ़ प्रदेश का नहीं है इसके लिए केंद्रीय गृह एवं विदेश मंत्रालय को भी तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।

    वहीं, बजट सत्र के दौरान वित्त मंत्री ने सत्तापक्ष की ओर से बजट को गरीबों, महिलाओं और युवाओं के हित का बताया और कहा कि इसमें कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है। लेकिन विपक्ष इस बात पर अड़ा है कि बजट सिर्फ़ प्रचार का औज़ार है और आर्थिक वास्तविकताओं से इसका कोई वास्ता नहीं है।  इस बीच बजट को सरकार की लंबी-अगली रणनीति के रूप में देखा जा रहा है और समर्थन तथा विरोध दोनों तरफ से इसका सियासी विश्लेषण जारी है।