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  • मुझ पर 36 केस, ममता पर मेहरबानी क्‍यों? राहुल गांधी ने मोदी सरकार और TMC दोनों पर साधा निशाना

    मुझ पर 36 केस, ममता पर मेहरबानी क्‍यों? राहुल गांधी ने मोदी सरकार और TMC दोनों पर साधा निशाना


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल चुनाव के दूसरे चरण से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हुगली जिले के सेरामपुर में आयोजित रैली में केंद्र सरकार BJP-RSS और ममता बनर्जी की TMC पर एक साथ तीखा हमला बोला। अपने संबोधन में उन्होंने सवाल उठाया कि उनके खिलाफ 36 केस दर्ज किए गए और ED ने 55 घंटे पूछताछ की लेकिन ममता बनर्जी पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

    राहुल गांधी ने दावा किया कि इसका कारण यह है कि ममता बनर्जी BJP से सीधे तौर पर मुकाबला नहीं करतीं इसलिए उन्हें केंद्र से राहत मिलती है। रैली में राहुल ने कहा कि देश में दो विचारधाराओं के बीच संघर्ष चल रहा है। एक ओर कांग्रेस है जो संविधान एकता और भाईचारे की बात करती है जबकि दूसरी ओर BJP है जो उनके अनुसार नफरत और हिंसा फैलाने का काम करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि RSS और BJP समाज में विभाजन पैदा करते हैं और धर्म के नाम पर लोगों को बांटते हैं।

    कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा का जिक्र करते हुए राहुल ने कहा कि इसका उद्देश्य देश में प्रेम और सद्भाव का संदेश फैलाना था। वहीं उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्राओं को भारत तोड़ो यात्रा बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार देश को बांटने की राजनीति कर रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी पर हमला जारी रखते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वे बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते में उन्होंने देश के हितों से समझौता किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस डील में कृषि छोटे उद्योग ऊर्जा क्षेत्र और देश का डेटा प्रभावित हुआ। राहुल ने यह भी कहा कि कोई भी मजबूत प्रधानमंत्री दबाव में आकर ऐसा फैसला नहीं लेता।

    ममता बनर्जी पर सवाल उठाते हुए राहुल ने अपने खिलाफ कार्रवाई का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि उन पर कई राज्यों में केस चल रहे हैं उनसे लंबी पूछताछ हुई यहां तक कि उनकी लोकसभा सदस्यता भी चली गई। इसके मुकाबले उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के खिलाफ न तो ED और न ही CBI ने कोई ठोस कार्रवाई की।

    बंगाल की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए राहुल गांधी ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में नौकरी पाने के लिए TMC से जुड़ाव जरूरी हो गया है। उन्होंने हिंदुस्तान मोटर्स की बंद फैक्ट्री का उदाहरण देते हुए कहा कि जो बंगाल कभी औद्योगिक रूप से मजबूत था वह अब पिछड़ गया है।

    इसके अलावा उन्होंने शारदा और रोज वैली जैसे पोंजी घोटालों कोयला तस्करी और अवैध खनन का मुद्दा उठाया। राहुल ने आरोप लगाया कि राज्य में हर काम के लिए गुंडा टैक्स देना पड़ता है जिससे आम जनता परेशान है।

  • 94 वर्ष की आयु में वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहसिना किदवई का निधन, नोएडा स्थित आवास में अंतिम दर्शन।

    94 वर्ष की आयु में वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहसिना किदवई का निधन, नोएडा स्थित आवास में अंतिम दर्शन।


    नई दिल्ली। भारतीय राजनीति की वरिष्ठ और सम्मानित नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई का आज सुबह 4 बजे निधन हो गया। 94 वर्ष की आयु में उनकी यह विदाई स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण हुई। उन्हें 8 अप्रैल को दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका इलाज चल रहा था। उनका पार्थिव शरीर नोएडा स्थित उनके आवास में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जिसके बाद आज शाम 5 बजे उन्हें निजामुद्दीन स्थित शवदाह गृह में सुपर्द-ए-खाक किया जाएगा।

    मोहसिना किदवई का जन्म 1 जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में हुआ था। उन्होंने कम उम्र में ही राजनीति में कदम रखा और राज्य स्तर से राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने कई बार लोकसभा सदस्य के रूप में उत्तर प्रदेश के मेरठ संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और बाद में 2004 से 2016 तक छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की सदस्य रहीं। अपने राजनीतिक करियर के दौरान उन्होंने संसद में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई और नीति निर्माण में योगदान दिया।

    मोहसिना किदवई ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकारों में कई केंद्रीय मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। उनके मंत्रालयों में ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, परिवहन और शहरी विकास शामिल थे। उनके नेतृत्व में इन क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण योजनाओं और नीतियों का कार्यान्वयन हुआ।

    कांग्रेस पार्टी में उनका योगदान भी उल्लेखनीय रहा। वे कांग्रेस वर्किंग कमेटी की सदस्य रहीं और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव के रूप में पार्टी संगठन और रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने युवा नेताओं को मार्गदर्शन दिया और पार्टी के निर्णयों एवं नीतियों के निर्माण में सक्रिय योगदान दिया।

    मोहसिना किदवई की राजनीतिक यात्रा लंबी और प्रभावशाली रही। उन्होंने हमेशा महिला और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय और विकास के मुद्दों को प्राथमिकता दी। उनकी नीति और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें पार्टी और संसद में एक विशिष्ट स्थान दिलाया। उनकी अचानक विदाई से भारतीय राजनीति और कांग्रेस पार्टी एक सम्मानित नेता को खो चुकी है।

  • अशोक खरात मामले में कांग्रेस नेता ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

    अशोक खरात मामले में कांग्रेस नेता ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप


    मुंबई।
     कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने अशोक खरात मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि अगर इस मामले का खुलासा हुआ तो सरकार पर बड़ा असर पड़ सकता है। मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने दावा किया कि स्वयंभू बाबा अशोक खरात (Swayambhu Baba Ashok Kharat) को बड़े लोगों को बचाने के लिए बलि का बकरा बनाया जा सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि सबूतों को नष्ट करने की कोशिश हो सकती है और खरात को नुकसान पहुंचने का खतरा भी है, जिससे ‘एपस्टीन जैसा मामला’ सामने आ सकता है।

    39 विधायकों के संपर्क का दावा
    वडेट्टीवार ने कहाकि खरात को कानून के तहत कड़ी सजा मिलनी चाहिए, साथ ही उन लोगों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने कथित तौर पर उसकी मदद की। उन्होंने मंत्री दीपक केसरकर के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें 39 विधायकों के खरात से संपर्क में होने की बात कही गई थी। उन्होंने मांग की कि इन सभी विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं और केसरकर से जुड़े नाम सार्वजनिक करने को कहा। वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि पूरे मामले को दबाने की कोशिश हो रही है और इसमें शामिल सभी लोगों, चाहे वे विधायक हों या मंत्री, की गहन जांच होनी चाहिए।

    पीएम मोदी पर भी निशाना

    इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि देश की समस्याओं की अनदेखी कर चुनावी राजनीति पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने पश्चिम एशिया संकट के बीच आवश्यक वस्तुओं, जैसे एलपीजी सिलेंडर, के लिए लंबी कतारों का जिक्र करते हुए सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाए।

    बढ़ गई पुलिस हिरासत
    इस बीच महाराष्ट्र में नासिक की एक अदालत ने बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार स्वयंभू बाबा अशोक खरात की पुलिस हिरासत रविवार को एक अप्रैल तक बढ़ा दी। खरात को 18 मार्च को उस वक्त गिरफ्तार किया गया था, जब एक महिला ने उनपर तीन साल से अधिक समय तक बार-बार बलात्कार करने का आरोप लगाया। खरात नासिक जिले के मिरगांव में एक मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख हैं और वर्षों से उनसे महाराष्ट्र के कई प्रमुख राजनेता मिलते रहे हैं। शहर के सरकारवाड़ा पुलिस थाने में अब तक उनके खिलाफ 10 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जिनमें से आठ कथित यौन उत्पीड़न या शोषण और दो धोखाधड़ी से संबंधित हैं।

    100 से अधिक शिकायतें
    पुलिस ने शनिवार को बताया था कि खरात के खिलाफ जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) को पिछले कुछ दिनों में फोन पर 100 से अधिक शिकायतें मिली हैं, जिनमें से अधिकतर महिलाओं की हैं। खरात को पिछली पुलिस हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद रविवार को अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान, लोक अभियोजक शैलेंद्र बागडे ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और आरोपी सहयोग नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि आरोपी की संपत्तियों की जांच अभी बाकी है।

    पानी की जांच अभी बाकी
    बागडे ने कहाकि कई महिलाएं अब भी शिकायत दर्ज कराने के लिए आगे आ रही हैं और उस तथाकथित ‘पानी या तरल पदार्थ’ की जांच अभी बाकी है, जिसे खरात यौन शोषण से पहले पीड़ितों को बहलाने-फुसलाने के लिए देते थे। उन्होंने कहाकि आरोपी के मोबाइल फोन डेटा की जांच की जा चुकी है और ‘क्लोन रिपोर्ट’ प्राप्त हो गई है।

    राजनीतिक संपर्कों के इस्तेमाल की जांच
    अभियोजक ने अदालत को बताया कि इस बात की जांच की जाएगी कि क्या खरात ने अपने संपर्कों-विशेष रूप से राजनीतिक नेताओं-के नाम फर्जी पहचान के साथ फोन में सेव किए थे और कई डिजिटल सबूतों की अभी जांच की जानी है। सरकारी वकील ने कहा कि विस्तृत पड़ताल के लिए तीन और दिन की हिरासत की जरूरत है। हालांकि, बचाव पक्ष के वकील सचिन भाटे ने कहा कि एसआईटी वही दलीलें दे रही है जो पिछली सुनवाई के दौरान पुलिस हिरासत के लिए दी गई थीं। उन्होंने दावा किया कि जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस हिरासत बढ़ाने का कोई कारण नहीं है।

    दूसरी ओर, एक पीड़ित का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील एम वाई काले ने खरात की पुलिस हिरासत बढ़ाने की अभियोजक की मांग का समर्थन किया। दलीलें सुनने के बाद, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एम वी भराडे ने खरात की पुलिस हिरासत एक अप्रैल तक बढ़ा दी।

  • दिग्विजय सिंह का अयोध्या दौरा 26 मार्च को, रामलला के करेंगे दर्शन

    दिग्विजय सिंह का अयोध्या दौरा 26 मार्च को, रामलला के करेंगे दर्शन


    भोपाल । मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह 26 मार्च को अयोध्या की यात्रा पर जाएंगे। इस दौरान वे राम मंदिर अयोध्या में विराजमान रामलला के दर्शन करेंगे और हनुमानगढ़ी में भी पूजा-अर्चना करेंगे। राम मंदिर निर्माण के बाद यह उनका पहला अयोध्या दौरा होगा, जिसे लेकर राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही दृष्टिकोण से यह यात्रा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    दिग्विजय सिंह ने मंदिर निर्माण के दौरान एक संकल्प लिया था कि जब तक प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर पूर्ण रूप से तैयार नहीं हो जाता, तब तक वे अयोध्या जाकर दर्शन नहीं करेंगे। अब जब राम मंदिर का मुख्य निर्माण कार्य पूर्णता की ओर है, तो वे अपने उसी संकल्प को पूरा करने के लिए अयोध्या जा रहे हैं।

    उनकी यह यात्रा केवल एक धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि उनके व्यक्तिगत संकल्प और विश्वास को भी दर्शाती है। लंबे समय से राम मंदिर निर्माण को लेकर देशभर में चर्चा और भावनात्मक जुड़ाव रहा है, ऐसे में मंदिर निर्माण के बाद विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों के अयोध्या दौरे भी लगातार हो रहे हैं।

    अयोध्या, जो कि अयोध्या में स्थित है, हिंदू आस्था का एक प्रमुख केंद्र है और राम मंदिर निर्माण के बाद इसकी धार्मिक महत्ता और भी बढ़ गई है। यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। दिग्विजय सिंह का यह दौरा भी इसी क्रम में देखा जा रहा है, जहां वे व्यक्तिगत श्रद्धा के साथ भगवान श्रीराम के दर्शन करेंगे।

    राजनीतिक दृष्टि से भी यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि दिग्विजय सिंह लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं और उनके हर कदम पर राजनीतिक विश्लेषकों की नजर रहती है। हालांकि, उनके इस दौरे को व्यक्तिगत आस्था और संकल्प से जोड़कर देखा जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार अयोध्या प्रवास के दौरान वे मंदिर में पूजा-अर्चना कर देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। साथ ही वे हनुमानगढ़ी में भी दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे, जो अयोध्या का एक प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है।

    राम मंदिर का निर्माण देश के लिए एक ऐतिहासिक और भावनात्मक घटना रहा है और इसके पूर्ण होने के साथ ही अयोध्या एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। इस बीच, दिग्विजय सिंह का यह दौरा उनके व्यक्तिगत संकल्प की पूर्ति के साथ-साथ आस्था और श्रद्धा का भी प्रतीक बनकर सामने आया है।

  • जयवर्धन सिंह ने महाकाल की भस्म आरती में लिया आशीर्वाद, नंदी हॉल से किए दर्शन

    जयवर्धन सिंह ने महाकाल की भस्म आरती में लिया आशीर्वाद, नंदी हॉल से किए दर्शन


    उज्जैन । उज्जैन में बुधवार सुबह पूर्व मंत्री और राघोगढ़ के वर्तमान विधायक जयवर्धन सिंह बाबा महाकाल की भस्म आरती में शामिल हुए। उन्होंने देहरी पर प्रणाम कर भगवान महाकालेश्वर का आशीर्वाद लिया और नंदी हॉल में बैठकर भस्म आरती का दर्शन किया।

    इस अवसर पर कई कांग्रेस नेता भी मौजूद थे जिनमें राजेंद्र वशिष्ठ और भरत पोरवाल शामिल थे। जयवर्धन सिंह भस्म आरती के दौरान पूरी तरह से भक्ति में लीन दिखाई दिए।

    आरती के बाद उन्होंने मंदिर परिसर में स्थित भगवान वीरभद्र के दर्शन भी किए। यह धार्मिक आयोजन स्थानीय लोगों और भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है और जयवर्धन सिंह की उपस्थिति ने इसे और भी यादगार बना दिया।

  • सूदखोरी के जाल में उलझकर बीजेपी नेता ने गंवाई जान, कांग्रेस नेता पर मौत से पहले लगाए गंभीर आरोप

    सूदखोरी के जाल में उलझकर बीजेपी नेता ने गंवाई जान, कांग्रेस नेता पर मौत से पहले लगाए गंभीर आरोप


    खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है जहाँ भारतीय जनता पार्टी के नेता जितेंद्र चौधरी उर्फ जीतू ने सूदखोरी और कर्ज के दबाव में आकर आत्महत्या कर ली। आरोप है कि एक पूर्व कांग्रेस पार्षद और उनके परिवार द्वारा लगातार दी जा रही प्रताड़ना से तंग आकर जीतू ने यह आत्मघाती कदम उठाया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बीजेपी नेता ने कांग्रेस नेता के घर जाकर ही जहरीला पदार्थ खा लिया।

    50 लाख का हिसाब और जानलेवा धमकी जानकारी के मुताबिक खंडवा के लवकुश नगर निवासी जितेंद्र चौधरी मंगलवार सुबह बड़गांव भीला रोड स्थित पूर्व कांग्रेस पार्षद गणेश सकरगाये के घर पहुंचे थे। मामला करीब 50 लाख रुपये के लेनदेन के हिसाब-किताब का था। बताया जा रहा है कि ब्याज की रकम चुकाने में असमर्थता जताने पर कांग्रेस नेता ने उन्हें कथित तौर पर गंभीर परिणाम भुगतने और उनका घर बिकवाने की धमकी दी। इस मानसिक दबाव को जीतू सहन नहीं कर पाए और उन्होंने वहीं जहरीला पदार्थ गटक लिया।

    अस्पताल में इलाज के दौरान मौत तबीयत बिगड़ते देख गणेश सकरगाये और उनके साथियों ने आनन-फानन में जीतू को एक निजी अस्पताल पहुँचाया जहाँ से उन्हें गंभीर हालत में जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। अस्पताल के आईसीयू वार्ड में संघर्ष करने के बाद आखिरकार जितेंद्र चौधरी ने दम तोड़ दिया। मौत से पहले दिए गए अपने बयान में जीतू ने स्पष्ट रूप से गणेश सकरगाये पर सूदखोरी और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि कर्ज और बढ़ते ब्याज के कारण वे पिछले काफी समय से तनाव में थे।

    पुलिस जांच में जुटी मोघट थाना पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस के पास अब मृतक का मृत्यु पूर्व बयान मौजूद है जिसे जांच का मुख्य आधार बनाया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लेनदेन के दस्तावेजों और कॉल डिटेल्स की जांच की जा रही है। इस घटना के बाद शहर के सियासी गलियारों में भी तनाव देखा जा रहा है क्योंकि मामला सत्ताधारी दल के नेता और विपक्ष के पूर्व पार्षद के बीच के विवाद से जुड़ा है।

  • कांग्रेस नेता का रील के लिए 'धुरंधर स्‍टाइल', रहमान डकैत के अंदाज में लहराई गन, पुलिस ने शुरू की जांच

    कांग्रेस नेता का रील के लिए 'धुरंधर स्‍टाइल', रहमान डकैत के अंदाज में लहराई गन, पुलिस ने शुरू की जांच

    नई दिल्ली । कर्नाटक के कलबुर्गी में एक कांग्रेस नेता ने ब्‍लॉकबस्‍टर फिल्‍म धुरंधर के बेहद लोकप्रिय गाने Fa9la पर रील बनाकर विवाद खड़ा कर दिया है. इस रील में कांग्रेस विधायक के बेहद करीबी मतीन पटेल वीडियो में पिस्तौल और बंदूक लहराते नजर आते हैं. अब इस मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है.

    कलबुर्गी के पुलिस कमिश्‍नर शरणप्पा एसडी ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक व्यक्ति हथियार लहराता दिख रहा है. हम वीडियो में दिख रहे व्यक्ति को जानते हैं. मैंने अधिकारियों को यह पता लगाने के लिए कहा है कि वीडियो कहां बनाया गया और यह किस पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आता है.

    पुलिस कमिश्‍नर ने दिए निर्देश
    साथ ही पुलिस कमिश्‍नर ने कहा कि उन्होंने पुलिस को निर्देश दिया है कि पता लगाएं कि किस हथियार का इस्तेमाल किया गया था और क्या वह असली है या नहीं. साथ ही कहा कि अगर यह असली है तो हम देखेंगे कि क्या यह लाइसेंसी था या नहीं. अगर यह लाइसेंसी था तो हम जांच करेंगे कि क्या शर्तों का उल्लंघन हुआ था. शरणप्पा ने कहा कि अगर यह अवैध पाया गया, तो शस्त्र अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी.

    रहमान डकैत के अंदाज में डांस

    वीडियो में मतीन अपनी काली एसयूवी से उतरते हैं और फिर अपने दोस्तों के साथ डांस करते हुए आगे बढ़ते हैं यह ठीक बिलकुल वैसा ही है, जैसा फिल्‍म धुरंधर में रहमान डकैत अक्षय खन्ना बलूचिस्तान में एक हथियार डीलर के कैंप में घुसते वक्‍त करते हैं.

  • 1984 सिख विरोधी दंगे: कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को बड़ी राहत, राउज एवेन्यू कोर्ट ने किया बरी

    1984 सिख विरोधी दंगे: कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को बड़ी राहत, राउज एवेन्यू कोर्ट ने किया बरी


    नई दिल्ली। 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक अहम मामले में कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को अदालत से बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने जनकपुरी और विकासपुरी क्षेत्रों में हुई हिंसा से संबंधित मामले में उन्हें बरी कर दिया। अदालत ने यह फैसला सबूतों की कमी के आधार पर सुनाया। यह निर्णय गुरुवार को संक्षिप्त मौखिक आदेश के रूप में दिया गया, जबकि फैसले की लिखित प्रति का अब भी इंतजार किया जा रहा है।
    यह मामला 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के सिख विरोधी दंगों से जुड़ा है, जिसमें दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में व्यापक हिंसा हुई थी। इन दंगों में हजारों सिख नागरिकों की हत्या कर दी गई थी और उनकी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया गया था। सज्जन कुमार का नाम इन दंगों से जुड़े कई मामलों में सामने आता रहा है और वे वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं।राउज एवेन्यू कोर्ट में जिस मामले में उन्हें बरी किया गया है, उसमें आरोप था कि सज्जन कुमार ने दिल्ली के जनकपुरी और विकासपुरी इलाकों में भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया था। अदालत में इस केस की सुनवाई पूरी होने के बाद पिछले साल दिसंबर में फैसला सुरक्षित रख लिया गया था, जिसे 22 जनवरी को सुनाया गया।

    इस मामले की जांच विशेष जांच दल SIT द्वारा की गई थी। फरवरी 2015 में SIT ने शिकायतों के आधार पर सज्जन कुमार के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की थीं। पहली एफआईआर जनकपुरी इलाके से संबंधित थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि 1 नवंबर 1984 को सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या कर दी गई थी। दूसरी एफआईआर विकासपुरी की घटना से जुड़ी थी जिसमें आरोप था कि 2 नवंबर 1984 को गुरबचन सिंह को कथित तौर पर जिंदा जला दिया गया।अभियोजन पक्ष का दावा था कि इन दोनों घटनाओं के दौरान सज्जन कुमार की भूमिका भीड़ को भड़काने में रही, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों को निराधार बताते हुए सबूतों की कमी की बात कही। अदालत ने सभी दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त प्रमाण मौजूद नहीं हैं।

    गौरतलब है कि सज्जन कुमार 1984 दंगों से जुड़े अन्य मामलों में पहले दोषी भी ठहराए जा चुके हैं और सजा काट रहे हैं। ऐसे में इस केस में बरी होने को उनके लिए एक बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है। हालांकि पीड़ित पक्ष और सिख संगठनों की ओर से इस फैसले पर नाराजगी जताए जाने की संभावना भी है।यह फैसला एक बार फिर 1984 दंगों से जुड़े मामलों में न्याय साक्ष्यों की मजबूती और लंबी न्यायिक प्रक्रिया को लेकर बहस को तेज कर सकता है। पीड़ित परिवारों के लिए यह मुद्दा आज भी बेहद संवेदनशील बना हुआ है।