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  • कांग्रेस का संगठनात्मक रिपोर्ट कार्ड तैयार, दिल्ली बैठक में 10 जिला अध्यक्षों की छुट्टी पर हो सकता है फैसला

    कांग्रेस का संगठनात्मक रिपोर्ट कार्ड तैयार, दिल्ली बैठक में 10 जिला अध्यक्षों की छुट्टी पर हो सकता है फैसला


    भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में संगठन सृजन अभियान के तहत नियुक्त किए गए जिलाध्यक्षों की आज सबसे बड़ी परीक्षा होने जा रही है। पिछले वर्ष अगस्त में लंबी प्रक्रिया के बाद बनाए गए जिला कांग्रेस अध्यक्षों के कामकाज की समीक्षा के लिए कांग्रेस हाईकमान ने दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक के नतीजे प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव का रास्ता खोल सकते हैं और खराब प्रदर्शन करने वाले कई जिलाध्यक्षों की जिम्मेदारी भी छिन सकती है।

    दिल्ली में आयोजित इस समीक्षा बैठक की कमान कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल संभालेंगे। बैठक दो चरणों में आयोजित होगी। पहले चरण में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और मध्य प्रदेश के प्रभारी हरीश चौधरी के साथ संगठन की स्थिति और जिलों की रिपोर्ट पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसके बाद दूसरे चरण में विभिन्न जिलाध्यक्षों से सीधे संवाद कर उनके कार्यों का मूल्यांकन किया जाएगा।

    सूत्रों के अनुसार कांग्रेस ने प्रदेश के सभी जिलाध्यक्षों को उनके कामकाज और संगठन विस्तार के आधार पर चार श्रेणियों ए बी सी और डी में विभाजित किया है। सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले ए श्रेणी के जिलाध्यक्षों को इस बैठक में नहीं बुलाया गया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इन जिलाध्यक्षों ने संगठन निर्माण अभियान में उत्कृष्ट कार्य किया है। इन्हें भविष्य में अलग से दिल्ली बुलाकर राहुल गांधी स्वयं संवाद करेंगे और आगामी रणनीति में उनकी भूमिका तय की जाएगी।

    बी श्रेणी में शामिल जिलाध्यक्षों को आज की बैठक में शामिल किया गया है। इनसे उनके संगठनात्मक प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी और यह बताया जाएगा कि उन्हें किन क्षेत्रों में सुधार कर ए श्रेणी तक पहुंचना है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि इन जिलों में संगठन और अधिक मजबूत हो तथा आगामी चुनावों के लिए बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाई जाए।

    सी श्रेणी में आने वाले जिलाध्यक्षों को अंतिम अवसर दिया जाएगा। समीक्षा के बाद उन्हें निश्चित समय सीमा में संगठनात्मक प्रदर्शन सुधारने के निर्देश मिलेंगे। यदि निर्धारित अवधि में अपेक्षित परिणाम नहीं मिले तो भविष्य में उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

    सबसे अधिक निगाहें डी श्रेणी के जिलाध्यक्षों पर टिकी हैं। इन्हें कमजोर प्रदर्शन करने वाला माना गया है और ऐसे करीब दस जिलाध्यक्षों को बैठक के बाद पद से हटाया जा सकता है। माना जा रहा है कि समीक्षा पूरी होते ही इनके स्थान पर नए चेहरों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी ताकि संगठन को अधिक सक्रिय और चुनावी दृष्टि से मजबूत बनाया जा सके।

    हाल ही में दतिया निकाय चुनाव में मिली सफलता के बाद कांग्रेस नेतृत्व संगठन को और मजबूत करने के मूड में है। पार्टी अब केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि बूथ स्तर तक मजबूत नेटवर्क तैयार करने पर जोर दे रही है। यही वजह है कि संगठन सृजन अभियान के तहत नियुक्त पदाधिकारियों की जवाबदेही तय की जा रही है और प्रदर्शन को ही आगे की जिम्मेदारी का आधार बनाया जा रहा है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दिल्ली में होने वाली यह समीक्षा बैठक मध्य प्रदेश कांग्रेस के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। इससे न केवल संगठन में नई ऊर्जा आएगी बल्कि आगामी चुनावों की रणनीति भी इसी के आधार पर तैयार की जाएगी। बैठक के बाद होने वाले फैसलों पर प्रदेशभर के कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की नजरें टिकी हुई हैं।

  • कांग्रेस में बदलाव की सुगबुगाहट? डीके शिवकुमार की बढ़ती दावेदारी के बीच तेज हुआ मंथन

    कांग्रेस में बदलाव की सुगबुगाहट? डीके शिवकुमार की बढ़ती दावेदारी के बीच तेज हुआ मंथन

    नई दिल्ली । कर्नाटक की राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर राजनीतिक गलियारों में लगातार अटकलें तेज होती दिखाई दे रही हैं। कांग्रेस के भीतर संभावित बदलाव और सत्ता की कमान को लेकर चल रहे मंथन ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। हाल के घटनाक्रमों और दिल्ली में शीर्ष स्तर पर जारी बैठकों के बाद यह चर्चा और अधिक तेज हो गई है कि राज्य में नेतृत्व से जुड़ा कोई बड़ा फैसला आने वाले समय में सामने आ सकता है।

    सूत्रों के हवाले से सामने आ रही चर्चाओं के अनुसार, पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर नए समीकरणों पर विचार किया जा रहा है। ऐसी चर्चा है कि कुछ वरिष्ठ नेता मौजूदा नेतृत्व व्यवस्था में बदलाव के पक्ष में अपनी राय रख रहे हैं। इसी बीच उपमुख्यमंत्री पद संभाल रहे D. K. Shivakumar का नाम संभावित नेतृत्व विकल्प के रूप में तेजी से चर्चा में आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर उनकी सक्रियता और संगठनात्मक पकड़ उन्हें मजबूत दावेदार बना सकती है।

    बताया जा रहा है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इस विषय पर लगातार विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की एक के बाद एक बैठकों ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दी है। इन बैठकों में पार्टी के कई बड़े नेताओं की मौजूदगी को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि अब तक पार्टी की ओर से किसी आधिकारिक निर्णय या बयान की घोषणा नहीं की गई है।

    राजनीतिक चर्चाओं के बीच यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस महासचिव Priyanka Gandhi इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और नेतृत्व से जुड़े मंथन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वहीं पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की बैठकों और विचार-विमर्श को भी बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और राजनीतिक चर्चाएं अभी सूत्रों पर आधारित हैं।

    दिल्ली में हुई बैठकों ने पूरे मामले को और अधिक दिलचस्प बना दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge, Rahul Gandhi और अन्य वरिष्ठ नेताओं के बीच हुई चर्चाओं को कर्नाटक के राजनीतिक भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारी के अनुसार अलग-अलग चरणों में कई बैठकें हुईं, जिनमें राज्य नेतृत्व और संगठनात्मक पहलुओं पर चर्चा किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

    कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन और नेतृत्व बदलाव का विषय पहले भी राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बनता रहा है। राज्य की राजनीति में क्षेत्रीय समीकरण, संगठनात्मक संतुलन और नेतृत्व की भूमिका हमेशा अहम रही है। ऐसे में यदि भविष्य में किसी तरह का निर्णय सामने आता है तो उसका असर केवल राज्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी उसके राजनीतिक मायने निकाले जाएंगे।

    फिलहाल पार्टी की ओर से किसी अंतिम निर्णय का संकेत नहीं दिया गया है, लेकिन लगातार हो रही बैठकों और बढ़ती राजनीतिक चर्चाओं ने कर्नाटक की राजनीति को फिर से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस विषय पर होने वाली गतिविधियों पर सभी की नजर बनी रहेगी।